दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य बहुत महत्वपूर्ण: सीडीओ पूर्ण वोरा
मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा की अध्यक्षता में दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा को लेकर जनपद स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। इस कार्य को पूर्ण गुणवत्ता के साथ सम्पादित कर बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में मिसाल कायम की जा सकती है मिसाल।
बिजनौर। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य बहुत महत्वपूर्ण है, इस कार्य को पूर्ण गुणवत्ता के साथ सम्पादित कर बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में मिसाल कायम की जा सकती है। यह बात मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा ने की। वे शुक्रवार प्रातः 8ः30 से विकास भवन सभागार में आयोजित दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा के क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे।

मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा ने कार्यशाला का शुभारंभ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर शुरू किया। उन्होंने उपस्थित शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए समर्थ ऐप व पोर्टल पर दिव्यांग बच्चों की गतिविधियों का अनुश्रवण करते रहें तथा विद्यालय के अन्य बच्चों की तरह दिव्यांग बच्चों को भी निपुण भारत मिशन के अंतर्गत पठन-पाठन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके क्रम में महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा के निर्देशों के अनुपालन में दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा के क्रियान्वयन के लिए आज इस जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिले में दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं शिक्षा की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए समावेशी शिक्षा संचालित की गई है, जिसके अन्तर्गत जिले में विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की गयी हैं। उन्होंने बताया कि हाउस होल्ड सर्वेक्षण जिले में माह अप्रैल व मई 2022 में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के अध्यापकों के द्वारा घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया गया, जिनमें 5404 दिव्यांग बच्चे 6-14 आयु वर्ग के चिन्हित किए गये और मेडिकल एसेसमेन्ट कैम्प-हाउस होल्ड सर्वे में चिन्हित दिव्यांग छात्र/छात्राओं का चिकित्सीय टीम के द्वारा परीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि यह परीक्षण कैम्प ब्लाकस्तर पर आयोजित किए जाते हैं, जिसके दौरान बच्चों का मेडिकल सर्टीफिकिट बनाया जाता है और बच्चों को उपष्कर/उपकरण के लिए चयन किया जाता है। इस वर्ष मेडिकल एसेसमेन्ट कैम्प में 882 बच्चों का परीक्षण कर 551 बच्चों के दिव्यांग प्रमाण पत्र निर्गत किए गये। 324 बच्चों को उपष्कर/उपकरण के लिए चयनित किया गया।

कार्यशाला के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरण यादव द्वारा अवगत कराया गया कि समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के दौरान उपष्कर/उपकरण वितरण कैम्प के अन्तर्गत मेडिकल एसेसमेन्ट कैम्प में चयनित दिव्यांग छात्र/छात्राओं को ट्राईसाईकिल, व्हील चेयर, कैलीपर, रोलेटर, एम०आर०किट, ब्रेलकिट, हेयरिंग ऐड आदि उपलब्ध कराये गए। इसके अलावा पैरेन्ट्स काउन्सिलिंग में दिव्यांग छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की स्पेशल एजूकेटर्स के माध्यम से पेरेन्ट काउन्सिलिंग कराई गई है और शिक्षक प्रशिक्षण में दिव्यांग बच्चों के शिक्षा के बारे में आ रही कठीनाईयों को दूर करने तथा नवीन शिक्षण तकनीकि के बारे में जानकारी के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी कराया गया। उन्होंनें बताया कि लार्ज प्रिन्ट बुक से लो विजन बच्चों के सामान्य शिक्षण के लिये, ब्रेल ब्रुक्स से दृष्टि दिव्यांग बच्चों के लिए सामान्य पाठ्यक्रम का ब्रेल लिपि में मुद्रण कराकर परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत दृष्टि दिव्यांग बच्चों को वितरित कराया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को शिक्षण प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये जनपद में 38 स्पेशल एजूकेटर्स व फिजियोथेरेपी सुविधा लिये 01 फिजियोथेरेपिस्ट कार्यरत है।
इस अवसर पर बच्चों ने स्वागत गीत और साइनिंग भाषा की सुंदर प्रस्तुति प्रस्तुत कर श्रोताओं को सम्मोहित किया।
इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरन यादव, जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, समस्त खंड शिक्षा अधिकारी, सभी संबंधित अधिकारी व समग्र शिक्षा के समस्त जिला समन्वयक सहित समस्त स्पेशल एजुकेटर समावेशी शिक्षा, एनसीसी केडिट, दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे।












































































































































































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