पूर्व इंचार्ज/क्राइम रिपोर्टर दैनिक जागरण उरई (जालौन), मेरठ, बिजनौर, धामपुर, मुजफ्फरनगर। समाचार संपादक दैनिक प्रयाण हरिद्वार। पूर्व महामंत्री श्रमजीवी पत्रकार यूनियन। अध्यक्ष ऑल मीडिया एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन।
किसानों को खेत तालाब योजना के तहत मिलेगा 50% अनुदान!
बिजनौर, (09 सितंबर 2025)। किसानों की आय बढ़ाने और खेती-बाड़ी को बेहतर बनाने के लिए सरकार सजग और प्रयासरत है। इसी मकसद से भूमि संरक्षण अधिकारी/जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया की अध्यक्षता में विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी सरकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
खेत तालाब योजना: 54 तालाबों का मिला लक्ष्य
बैठक में सबसे बड़ी खबर किसानों के लिए थी ‘खेत तालाब योजना’। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि इस योजना के तहत बिजनौर को इस साल 54 तालाब बनाने का लक्ष्य मिला है। अब तक 18 किसानों ने इसके लिए बुकिंग करा ली है, और बाकी किसान भी इसका फायदा उठा सकते हैं। इस योजना में 22x20x3 मीटर का तालाब बनाने पर ₹1,05,000 की कुल लागत आएगी, जिसमें से सरकार ₹52,500 का अनुदान देगी। इतना ही नहीं, किसानों को तालाब के लिए पंपसेट खरीदने पर ₹15,000 का अतिरिक्त अनुदान भी मिलेगा।
“किसानों की समृद्धि ही हमारी प्राथमिकता है”
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने सभी किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य है कि बिजनौर का हर किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सके। किसानों की तरक्की और उनकी समृद्धि ही हमारे विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।” बैठक का समापन किसानों को इन योजनाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए किया गया। बैठक में किसानों के लिए प्रेरणा बने शरद कुमार, यूट्यूबर राहुल जवान, पूर्व कृषि अधिकारी योगेंद्र पाल और कई अन्य अनुभवी किसान भी मौजूद थे।
पर्यटन और कृषि को जोड़ने तथा ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने की पहल
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं रोजगार सृजन हेतु फॉर्म-स्टे योजना में निवेश के लिए निवेशकों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे
पर्यटन और कृषि को जोड़कर ग्रामीण अंचलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पहल -जयवीर सिंह
विकसित उत्तर प्रदेश में गांव होंगे पर्यटन की धड़कन- पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह
~ शैली सक्सेना
लखनऊ, (09 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन निदेशालय ने राज्य में पहली बार फार्म स्टे आवास विकसित व संचालित करने के लिए निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इस पहल को राज्य को कृषि-पर्यटन का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘इस प्रयास से पर्यटकों को खेती-बाड़ी, ग्रामीण संस्कृति और गांवों में आतिथ्य सत्कार का विशेष अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि फार्म स्टे से न केवल पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।’
मंत्री ने बताया, ‘योजना के तहत परिभाषित फार्म स्टे ऐसा पर्यटक आवास है, जो खेत या उसके निकट बनाया जाएगा। यह आवास मालिक के घर से अलग होगा। इसमें कम से कम दो किराए पर देने योग्य कमरे तथा एक रिसेप्शन क्षेत्र अनिवार्य रूप से होगा। हर फार्म स्टे में पर्यटकों को ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव देने के लिए कृषि कार्य, बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, फार्म टूर या अन्य स्वीकृत ग्रामीण गतिविधियां उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इस प्रकार आगंतुक के लिए पूरा गांव ही आकर्षण का केंद्र बनेगा।’
योजना के तहत प्रोत्साहन पैकेज
योजना के तहत प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान है। पूंजी निवेश पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो इस प्रकार है- 10 लाख रुपए से 10 करोड़ रुपए के बीच 25 प्रतिशत (अधिकतम 02 करोड़ रुपए), 50 करोड़ तक 20 फीसदी (अधिकतम 07.5 करोड़ रुपए), 200 करोड़ रुपए तक 15 फीसद (अधिकतम 20 करोड़ रुपए), 500 करोड़ रुपए तक 10 प्रतिशत (अधिकतम 25 करोड़ रुपए) और 500 करोड़ रुपए से अधिक पर 10 फीसदी (अधिकतम 40 करोड़ रुपए) होगी।
अधिकतम 30 प्रतिशत तक सब्सिडी
पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘निवेशकों को सामान्य प्रोत्साहनों के अलावा अतिरिक्त सब्सिडी भी दी जाएगी। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग के निवेशकों को विशेष रियायतें मिलेंगी। इसी तरह फोकस टूरिज्म डेस्टिनेशन में स्थापित किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स को भी 05 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जाएगी। हालांकि, यह सब्सिडी अधिकतम 30 प्रतिशत की सीमा तक ही सीमित रहेगी।’
स्टाम्प ड्यूटी एवं विकास शुल्क पर सौ फीसदी छूट
पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ब्याज सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 05 करोड़ रुपए तक के बैंक ऋण पर 5 फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। एक निवेशक को प्रति वर्ष अधिकतम 25 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिल सकेगी, जो अधिकतम 5 वर्षों तक लागू रहेगी। निवेशकों और उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए भी बड़े कदम भी उठाए गए हैं। नई घोषणा के तहत स्टाम्प ड्यूटी, भूमि रूपांतरण शुल्क और विकास शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। इस निर्णय से निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ राज्य में औद्योगिक और पर्यटन परियोजनाओं को गति मिलेगी।’
मिलेंगी अन्य प्रोत्साहन सुविधाएं
औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था के तहत ऐसी इकाइयों जो 50 या उससे अधिक स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति करेंगी, उन्हें नियोक्ता द्वारा जमा किए जाने वाले ईपीएफ योगदान की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी। यह सुविधा अधिकतम 5 वर्षों तक उपलब्ध रहेगी। दिव्यांग जनोन्मुखी इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए नई सुविधा लागू की है। इसके तहत यदि कोई इकाई दिव्यांग कर्मचारियों को रोजगार देती है, तो उसे प्रति कर्मचारी 1,500 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सुविधा अधिकतम 5 कर्मचारियों तक मान्य होगी।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा ‘राज्य सरकार ग्रामीण पर्यटन को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ फार्म स्टे बनाने की योजना नहीं है, बल्कि गांवों को संस्कृति, आजीविका और सीखने के जीवंत केंद्र बनाने का अभियान है। वर्तमान समय में पर्यटक शहरों की भीड़-भाड़ से दूर ग्रामीण जीवन का अनुभव करना चाहता है। राज्य सरकार ने पहले ही ऐसे गांवों की पहचान कर ली है, जिनमें पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यह कार्यक्रम होमस्टे और बेड-एंड-ब्रेकफास्ट नीति को और सशक्त करेगा। किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए यह योजना आय के नए स्रोत खोलेगी। साथ ही, उनकी पारंपरिक जीवनशैली को भी संरक्षित रखेगी। इससे स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प, खाद्य उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।’
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि ‘फार्म स्टे पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रोजेक्ट को प्रोत्साहन और पारदर्शी प्रक्रियाओं के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ग्रामीण पर्यटन केवल संदेश न रह जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर एक सफल और सशक्त स्वरूप में सामने आए।’
बिजनौर, (9 सितंबर 2025)। पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर में गंगा नदी का पानी विकराल रूप ले रहा है। ऐसे में मेरठ पौढ़ी मार्ग स्थित रावली तटबंध के समीप के एक दर्जन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। रावली तटबंध के कटान को रोकने के लिए क्या कर रहा है प्रशासन.. क्या की गई है व्यवस्था? बिजनौर डीएम जसजीत कौर ने दी पूरी जानकारी।
रावली बंधे पर कटान को रोकने के लिए संबंधित विभाग दिन रात जुटे हुए हैं। मौके पर मौजूद जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने जिले के तटबंधों की स्थिति पर जनता को आश्वस्त किया। उन्होंने बताया कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं और उन्हें मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि आज ही तटबंध की मरम्मत पूरी करके पानी को पूरी तरह रोका जा सके। उन्होंने बताया कि इस कार्य में जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण भी पूरी लगन से सहयोग कर रहे हैं।
अफवाहों पर न दें ध्यान
श्रीमती जसजीत कौर ने जनता से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी खबर पर विश्वास न करें। उन्होंने बताया कि नदी में पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है और वर्तमान में समस्त आबादी सुरक्षित है। उन्होंने यह भी बताया कि मौके पर वे स्वयं, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर, सिंचाई विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी मौजूद हैं, जो लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
फोटो, वीडियो या रील्स बनाने से बचें लोग
जिलाधिकारी ने जनसामान्य से अपील करते हुए कहा कि वे तटबंध के करीब जाने का प्रयास न करें। उन्होंने आग्रह किया कि वहां की फोटो, वीडियो या रील्स बनाने से बचें, क्योंकि इससे मरम्मत कार्य में बाधा आती है और यह स्वयं उनके लिए भी खतरनाक हो सकता है। जिला प्रशासन जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है और किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
गौरतलब है कि रविवार को गंगा की तेज धारा ने रावली तटबंध का तेजी से कटान करते हुए करीब 14 फीट चौड़े इस तटबंध के एक बड़े भाग को गंगा के बेकाबू पानी ने काट दिया था। प्रशासन द्वारा आसपास के गांवों में अलर्ट जारी कर दिया था। फ्लड लाइट की रोशनी में पूरी रात मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर जारी रहा। कटान रोकने के लिए वायर क्रिएट बोल्डर क्रेट गेट बोल्डर और साथ ही पेड़ों को काटकर डाला जा रहा है। सिंचाई विभाग व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर कैंप किए हुए हैं।
घरेलू कलह और प्रताड़ना से तंग आकर किया था आत्महत्या का प्रयास
इलाज के दौरान मेरठ के एक अस्पताल में मौत
पुलिस विभाग में शोक की लहर
जहर खाने वाले सिपाही ने दम तोड़ा
बिजनौर। घरेलू विवाद और एक युवती द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन करने वाले सिपाही का उपचार के दौरान निधन हो गया।
जनपद बिजनौर की पुलिस लाइन में तैनात वर्ष 2021 बैच के एक युवा आरक्षी, अमित कुमार (पीएनओ- 212141267) ने घरेलू विवाद और एक युवती द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान सोमवार (08.09.2025) को उनका निधन हो गया। मूल रूप से बुलंदशहर के डोमला हसनगढ़ के निवासी युवा आरक्षी, अमित कुमार के आकस्मिक निधन से पुलिस विभाग में शोक की लहर है।
घटना का विवरण
यह दु:खद घटना 02 सितंबर 2025 की सुबह की है। पुलिस को सीएचसी समीपुर, नजीबाबाद से एक मेमो के जरिए जानकारी मिली कि आरक्षी अमित कुमार को जहरीले पदार्थ के सेवन के बाद अस्पताल लाया गया है। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
जांच में पता चला कि आरक्षी अमित ने नजीबाबाद स्थित अपने किराए के मकान, सरस्वती विहार कॉलोनी में पारिवारिक विवाद से तंग आकर सल्फास का सेवन कर लिया था। उनकी हालत की गंभीरता को देखते हुए, चिकित्सकों ने उन्हें तुरंत हायर सेंटर मेरठ रेफर कर दिया। स्थानीय पुलिस ने उन्हें तत्काल मेरठ के आनंद हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां उनके समुचित इलाज की व्यवस्था की गई और उनके परिजनों को भी सूचित किया गया।
सुसाइड नोट में प्रताड़ना का उल्लेख
पुलिस ने घटनास्थल की गहनता से जांच की, जहां से सल्फास के पैकेट और एक सुसाइड नोट/रजिस्टर बरामद हुआ। बरामद सुसाइड नोट में आरक्षी अमित ने अपनी आत्महत्या का कारण घरेलू कलह और दीप्ति नामक एक युवती व उसके परिवार द्वारा की जा रही प्रताड़ना को बताया है। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है और सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की पुष्टि की जा रही है।
उपचार के दौरान निधन
पिछले एक सप्ताह से जीवन-मृत्यु के बीच जूझ रहे आरक्षी अमित कुमार का रविवार 08 सितंबर 2025 को आनंद हॉस्पिटल, मेरठ में इलाज के दौरान दु:खद निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से पुलिस विभाग में शोक की लहर है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना से एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और पुलिसकर्मियों पर बढ़ते तनाव का मुद्दा सामने आया है।
ब्रह्म मुहूर्त को माना जाता है रात का 14वाँ मुहूर्त
सूर्य उगने से ठीक 96 मिनट पहले शुरू होता है ब्रह्म मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त हिंदू धर्म में एक बहुत ही शुभ समय माना जाता है। यह सूर्य उगने से ठीक 96 मिनट पहले शुरू होता है और सूर्योदय तक रहता है। इस समय को ध्यान, पूजा, अध्ययन और योग जैसे आध्यात्मिक कार्यों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान मन शांत और एकाग्र होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है, जो इन कार्यों में मदद करती है।
इस समय के कुछ प्रमुख लाभ : * बेहतर एकाग्रता: इस समय का शांत वातावरण ध्यान और अध्ययन के लिए बहुत अच्छा होता है। * शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: सुबह जल्दी उठने से शरीर की घड़ी सही रहती है, जिससे अच्छी नींद और बेहतर स्वास्थ्य मिलता है। * सकारात्मकता: सुबह की ताज़ी हवा और शांत माहौल मन को शांत और सकारात्मक बनाता है। ब्रह्म मुहूर्त का समय हर दिन थोड़ा बदलता रहता है, क्योंकि यह सूर्योदय पर निर्भर करता है।
सूर्योदय से 96 मिनट पहले
सूर्योदय से 96 मिनट पहले ब्रह्म मुहूर्त शुरू होने का एक निश्चित पैमाना है। यह पैमाना प्राचीन भारतीय समय-गणना प्रणाली पर आधारित है। मुहूर्तों का पैमाना प्राचीन भारतीय ज्योतिष में, एक पूरे दिन (24 घंटे) को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है। * एक मुहूर्त की अवधि 48 मिनट की होती है (24 घंटे × 60 मिनट ÷ 30 मुहूर्त = 48 मिनट)। * रात में कुल 15 मुहूर्त होते हैं। ब्रह्म मुहूर्त रात का 14वाँ मुहूर्त माना जाता है। * इसलिए, ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से ठीक 2 मुहूर्त पहले शुरू होता है (48 मिनट × 2 = 96 मिनट)। * यह 96 मिनट पहले शुरू होता है और सूर्योदय से 48 मिनट पहले समाप्त हो जाता है, जिससे इसकी कुल अवधि 48 मिनट की होती है। यह गणना इस बात पर आधारित है कि एक दिन में कुल कितने मुहूर्त होते हैं, जिससे यह एक तयशुदा पैमाना बन जाता है। हालाँकि, चूंकि सूर्योदय का समय हर दिन बदलता रहता है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त का समय भी उसी के अनुसार बदलता है। ब्रह्म मुहूर्त का रहस्य यह वीडियो ब्रह्म मुहूर्त के समय और उसके पीछे के रहस्य को समझाने में सहायक है…
बिना स्नान के भी ब्रह्म मुहूर्त में की जा सकती है ध्यान और पूजा
हिंदू धर्म में, शुद्धता को बहुत महत्व दिया जाता है, और स्नान को शारीरिक और मानसिक शुद्धता के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। इसलिए, यह आदर्श माना जाता है कि पूजा और ध्यान से पहले स्नान किया जाए। हालाँकि, अगर किसी कारण से स्नान संभव न हो, तो भी ध्यान और मंत्र जाप किया जा सकता है।
स्नान के बिना अगर आप बीमार हैं, यात्रा पर हैं, या सुबह बहुत ठंड है, तो आप इन विकल्पों को अपना सकते हैं: * हाथ-पैर और मुँह धोना: आप सिर्फ अपने हाथ, पैर और मुँह धोकर खुद को तरोताज़ा महसूस करा सकते हैं। यह एक तरह से प्रतीकात्मक शुद्धता को दर्शाता है। * मानसिक शुद्धता: पूजा और ध्यान का मुख्य उद्देश्य मन को शुद्ध और शांत करना है। अगर आप शारीरिक रूप से शुद्ध नहीं हैं, तो भी आप मानसिक रूप से भगवान का ध्यान कर सकते हैं। * आसन पर बैठकर ध्यान: आप एक साफ आसन पर बैठें, मन को शांत करें और ईश्वर का ध्यान करें। आप अपने मन में मंत्रों का जाप कर सकते हैं। पूजा और ध्यान में मन की शुद्धता सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए, यदि शारीरिक रूप से स्नान करना संभव न हो तो भी आप मानसिक रूप से ईश्वर से जुड़ सकते हैं। यह आपकी भक्ति और समर्पण पर निर्भर करता है।
अगर रात में स्त्री संसर्ग हुआ है, तो स्नान के बाद ही करना चाहिए पूजा और ध्यान
धार्मिक कारण हिंदू धर्म और अन्य कई परंपराओं में, संसर्ग को शारीरिक और ऊर्जा के स्तर पर एक महत्वपूर्ण क्रिया माना जाता है। इस क्रिया के बाद, शरीर को फिर से शुद्ध करने और ऊर्जा को संतुलित करने के लिए स्नान को बहुत आवश्यक माना गया है। इसे धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में एक शौच (शुद्धि) क्रिया के रूप में देखा जाता है। * शारीरिक शुद्धि: स्नान शरीर को शुद्ध करता है, जो पूजा-पाठ के लिए एक अनिवार्य शर्त है। * ऊर्जा की शुद्धि: माना जाता है कि स्नान करने से संसर्ग के दौरान हुई ऊर्जा का आदान-प्रदान संतुलित हो जाता है और मन पूजा के लिए शांत व एकाग्र हो पाता है। निष्कर्ष इसलिए, ब्रह्म मुहूर्त में या किसी भी समय पूजा या ध्यान करने से पहले, अगर आपने संसर्ग किया है, तो स्नान करना सबसे उचित और अनिवार्य माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक नियम नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक शुद्धि से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण पहलू है।
शराब और मांस का सेवन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शराब और मांस के सेवन के बाद पूजा या ध्यान करना पूरी तरह वर्जित है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं: 1. शारीरिक और मानसिक शुद्धि का अभाव * तामसिक भोजन और पदार्थ: हिंदू धर्म में भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: सात्विक, राजसिक और तामसिक। शराब और मांस को तामसिक माना जाता है। तामसिक भोजन और पदार्थ मन को अस्थिर, बेचैन और हिंसक बनाते हैं। * एकाग्रता में बाधा: पूजा और ध्यान का मुख्य उद्देश्य मन को शांत और एकाग्र करना है। शराब या मांस के सेवन से मन अशांत हो जाता है और ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है। 2. ऊर्जा का स्तर और आध्यात्मिक हानि * नकारात्मक ऊर्जा: माना जाता है कि शराब और मांस के सेवन से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आध्यात्मिक कार्यों के लिए सकारात्मक और शुद्ध ऊर्जा की आवश्यकता होती है। * धार्मिक ग्रंथों के अनुसार: कई धार्मिक ग्रंथ और संत, जैसे कि प्रेमानंद महाराज, स्पष्ट रूप से कहते हैं कि मांस और शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति की भक्ति और पूजा का कोई महत्व नहीं रह जाता। वे कहते हैं कि सच्चे मन से पूजा करने वाले व्यक्ति का मन इन चीजों में लगेगा ही नहीं। क्या करना चाहिए? अगर आपने शराब या मांस का सेवन किया है, तो पूजा या ध्यान करने से पहले आपको खुद को पूरी तरह से शुद्ध करना चाहिए। * पूर्ण स्नान: सबसे पहले, एक पूर्ण स्नान करें। यह शारीरिक शुद्धि के लिए अनिवार्य है। * वस्त्र बदलें: स्वच्छ और धुले हुए कपड़े पहनें। * अंतरात्मा की शुद्धि: केवल शारीरिक शुद्धि ही काफी नहीं है। अपने मन में पश्चाताप का भाव लाएं और भविष्य में ऐसे सेवन से बचने का संकल्प लें। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूजा और भक्ति का संबंध सिर्फ कर्मकांड से नहीं, बल्कि आपके मन की शुद्धता और इरादों से है। इसलिए, यदि आपने इन पदार्थों का सेवन किया है, तो खुद को शुद्ध करके ही आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना उचित है।
बिजनौर से पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद की पहल: मानवता की मिसाल
– भूपेंद्र निरंकारी, पत्रकार
बिजनौर। पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अनेक प्रांतों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी जान, खाने और रहने की जगहों को बचाने के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। ऐसे कठिन समय में, पूरा देश पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहा है, और इसमें उत्तर प्रदेश का बिजनौर जनपद भी अपनी जिंदादिली का परिचय दे रहा है। बिजनौर के लोग न केवल अपने स्थानीय बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचा रहे हैं, बल्कि पंजाब के भाई-बहनों के लिए भी खुलकर सहायता सामग्री भेज रहे हैं। यह उनकी उदारता और मानवीय भावना को दर्शाता है। “नर सेवा ही नारायण सेवा है” के सिद्धांत पर चलते हुए, बिजनौरवासी राहत सामग्री जुटाने और भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
एकजुट होकर मदद को आगे आए लोग
पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी जा रही राहत सामग्री में दवाइयां, खाने-पीने का सामान और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इस नेक काम में बिजनौर का हर वर्ग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। इसमें भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के सदस्य, मुस्लिम समुदाय के लोग, और कई अन्य सामाजिक संगठन व व्यक्ति शामिल हैं। ये सभी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। यह पहल दिखाती है कि आपदा के समय, सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोग एक साथ मिलकर कैसे काम कर सकते हैं। यह आपसी सौहार्द और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल है, जो यह साबित करती है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। बिजनौर वासियों का यह प्रयास उनकी मानवता को उजागर करता है और दूसरों को भी प्रेरित करता है।
भूपेंद्र निरंकारी, पत्रकार
सामाजिक योगदान का महत्व
यह सहयोग इस बात का भी प्रमाण है कि सामाजिक कार्यों में योगदान देना कितना महत्वपूर्ण है। जैसा कि कहा जाता है, दूसरों का भला करने में ही हमारा अपना भला छिपा है। ऐसे समय में जब लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, थोड़ी सी मदद भी उनके लिए जीवनदायिनी साबित हो सकती है। यह पहल केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश भी है कि हमें हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए और इंसानियत की भलाई के लिए काम करना चाहिए। भूपेंद्र निरंकारी, एक पत्रकार के रूप में, बिजनौर की विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं, साथ ही पत्रकार बंधुओं से भी अपील करते हैं कि वे इस पुण्य कार्य में अपना योगदान दें। उनका मानना है कि इस तरह के प्रयासों से मिलने वाली दुआएं व्यक्ति की तकदीर बदल सकती हैं। बिजनौर के लोगों की यह पहल सराहनीय है और यह दर्शाती है कि मुश्किल घड़ी में हम सब एक हैं। यह मानवता की जीत है, जो हर आपदा को पार करने की शक्ति देती है।
अयोध्या दीपोत्सव-2025 में 26 लाख से ज्यादा दीप प्रज्ज्वलन की तैयारी
सरयू तट, राम की पैड़ी सहित अन्य घाटों पर जलेंगे लाखों दीये, छात्र-स्वयंसेवक करेंगे सहयोग
19 अक्टूबर को दीपोत्सव-2025 का आयोजन, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की तैयारियां तेज
~शैली सक्सेना
लखनऊ, (08 सितंबर 2025)। अयोध्या में 19 अक्टूबर को दीपोत्सव-2025 के दौरान 26 लाख से अधिक दीये जलाकर ऐतिहासिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा सरयू तट, राम की पैड़ी सहित अन्य घाटों पर दीयों की श्रृंखला से अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। राम नगरी का दीपोत्सव एक बार फिर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि विभागीय तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘अयोध्या में वर्ष 2017 से भव्य और दिव्य दीपोत्सव मनाया जा रहा है। इसे बरकरार रखते हुए दीपोत्सव-2025 के दौरान भी सरयू नदी पर सबसे बड़े दीप प्रज्वलन एवं सबसे बड़े आरती समारोह का आयोजन होगा। इस वर्ष 26 लाख से अधिक दीयों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव केवल अयोध्या के सांस्कृतिक वैभव को ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर इसकी पहचान को और मजबूत करेगा।’ उल्लेखनीय है कि अयोध्या दीपोत्सव के दौरान हर वर्ष दीप प्रज्ज्वलन का अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित करती है।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद दूसरे दीपोत्सव को भव्यता और दिव्यता से मनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राम की पैड़ी सहित अन्य घाटों पर इस बार 26 लाख से अधिक दीयों को प्रज्वलित कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा। सरयू तट पर अब तक की सबसे बड़ी आरती का आयोजन भी होगा, जिसमें 1,100 से अधिक धर्माचार्य, संत-महात्मा और नगरवासी सम्मिलित होंगे। आयोजन से तीन दिन पहले से स्थल पर तैयारी शुरू होगी। गिनीज मानकों के अनुसार डिजाइन आदि से संबंधित समन्वय स्थापित किया जाएगा।’
इस दौरान छात्र-स्वयंसेवक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के सफल संचालन में सहयोग करेंगे। ये स्वयंसेवक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मानकों के अनुरूप दीयों की सजावट, प्रज्वलन, गिनती और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाएंगे। आयोजन के दौरान दीयों की संख्या को सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया तकनीकी और पारदर्शी ढंग से पूरी की जाएगी, ताकि रिकॉर्ड का सफल क्रियान्वयन संभव हो सके।
अयोध्या दीपोत्सव-2025 के दौरान गिनीज रिकॉर्ड प्रयासों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, अयोध्या जिला प्रशासन, अवध विश्वविद्यालय और अन्य संस्थाओं के बीच लगातार समन्वय किया जाएगा। कार्यक्रम में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक मंडल की उपस्थिति में प्रक्रिया, साक्ष्यों आदि का मिलान किया जाएगा। रिकॉर्ड की पुष्टि के बाद मा0 मुख्यमंत्री को पर्यटन मंत्री सहित अन्य मंत्रियों की उपस्थिति में प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘अयोध्या दीपोत्सव केवल राज्य ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता का विश्वस्तरीय प्रतीक बन चुका है। भगवान श्रीराम की नगरी में दीपोत्सव का यह पर्व हमारे लिए गर्व का अवसर है, जहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। दीयों की श्रृंखला न केवल श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कराती है, बल्कि विश्व बंधुत्व का संदेश भी देती है।’
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा, ‘दीपोत्सव हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को प्रदर्शित करता है। इस वर्ष अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव को पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक भव्य बनाने की तैयारियां की जा रही है। अद्भुत झांकियों और मनोरम दृश्यों के साथ विभागीय प्रयास है कि यह आयोजन न केवल देशवासियों बल्कि दुनियाभर के पर्यटकों के लिए भी एक यादगार अनुभव बने।’
एम-पैक्स सदस्यता महाभियान में 50 हजार नए सदस्य बनाने का लक्ष्य
12 सितंबर से 12 अक्टूबर 2025 तक चलेगा महाभियान
जिला सहकारी बैंक बिजनौर की कार्यशाला में निर्णय
सहकारिता मजबूत और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम
~ सतेंद्र चौधरी
बिजनौर। सहकारिता को मजबूत बनाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, बिजनौर ने शासन के निर्देशों के अनुरूप एम-पैक्स सदस्यता महाभियान 2025 के लिए एक जनपद स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। विकास भवन सभागार में सोमवार 8 सितंबर, 2025 को सुबह 11:00 बजे आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने की।
बनाए जाएंगे 50 हजार नए सदस्य
कार्यशाला के दौरान, बैंक के सचिव/मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रवीण कुमार ने 12 सितंबर 2025 से 12 अक्टूबर 2025 तक चलने वाले इस महाभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य 50 हजार नए सदस्य बनाना है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से इस लक्ष्य को पूरा करने और नए सदस्यों के बैंक खाते खोलने, उन्हें ऋण वितरित करने तथा सहकारिता की अन्य गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया।
“सहकार से समृद्धि” योजना
मुख्य अतिथि भूपेन्द्र चौहान ने “सहकार से समृद्धि” योजना का उल्लेख करते हुए सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की कि वे सरकार की मंशा के अनुरूप काम करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को 100% पूरा करें।
सरकार की मंशानुरूप कार्य करने की अपील
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, राजवीर सिंह ने भी शासन की मंशा के अनुरूप पूरी लगन से काम करने और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के निर्देश दिए। अध्यक्ष दिनेश कुमार ने अपने संबोधन में सहकार से समृद्धि योजना को सफल बनाने के लिए बिंदुवार निर्देश दिए:
1. एम-पैक्स से उर्वरक लेने वाले सभी किसानों की सूची तैयार की जाए, जिसमें सदस्य और गैर-सदस्य दोनों शामिल हों। 2. पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों को एम-पैक्स से जोड़ना इस अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु है। इसके लिए, पीएम किसान लाभार्थियों की न्याय पंचायत/विकास खंडवार सूची ए.डी.सी.ओ./ए.डी.ओ. द्वारा कृषि विभाग से प्राप्त करके पैक्स को उपलब्ध कराई जाएगी। 3. बैंक शाखा के सभी कर्मचारियों द्वारा सदस्यों से संपर्क किया जाए और उनके खाते अनिवार्य रूप से खोले जाएं। 4. बैंक/शाखा प्रबंधकों द्वारा सेविंग खातों के लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, और सदस्यों को खातों पर दी जाने वाली ब्याज दरों के बारे में जानकारी दी जाए।
प्रवीण कुमार, सचिव/मुख्य कार्यपालक अधिकारी
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष भूपेन्द्र चौहान मौजूद रहे। उनके साथ-साथ जनपद-बिजनौर के समस्त अपर जिला सहकारी अधिकारी, जिला सहकारी बैंक के सभी उप महाप्रबंधक/तहसील प्रभारी, सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता), अनुभाग अधिकारी, शाखा प्रबंधक और बी-पैक्स सचिवों ने भी इस महत्वपूर्ण आयोजन में भाग लिया।
अंत में, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, बिजनौर के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला का सफल आयोजन सचिव/मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रवीण कुमार की देखरेख में हुआ।
kidney stones: खान-पान में कुछ विशेष सावधानियां ज़रूरी
~ शैली सक्सेना
पथरी (kidney stones) होने पर खान-पान में कुछ विशेष सावधानियां बरतना बहुत ज़रूरी है, ताकि पथरी का आकार न बढ़े और नई पथरी बनने का खतरा कम हो जाए। जानिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां :
1. खूब पिएं पानी
~ क्या करें: दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास (लगभग 2 से 3 लीटर) पानी पिएं। पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और यूरिन को पतला बनाता है, जिससे पथरी बनाने वाले मिनरल्स शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
~ क्या न करें: पानी कम पीने से बचें, खासकर गर्म मौसम में या ज़्यादा शारीरिक गतिविधि के बाद।
2. कम करें नमक (सोडियम)
~ क्या करें: अपने खाने में नमक की मात्रा कम करें। ज़्यादा नमक यूरिन में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देता है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
~ क्या न करें: डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड फूड, पैकेट वाले स्नैक्स, अचार और पापड़ खाने से बचें, क्योंकि इनमें सोडियम ज़्यादा होता है।
3. कैल्शियम की सही मात्रा
~ क्या करें: कैल्शियम युक्त भोजन जैसे दूध, दही और पनीर का सेवन करें, लेकिन नियंत्रित मात्रा में। अचानक कैल्शियम लेना बंद न करें, क्योंकि यह शरीर के लिए ज़रूरी है और ऑक्सालेट को बांधने में मदद करता है।
~ क्या न करें: कैल्शियम सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
4. ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों से बचें
~ क्या करें: ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें जिनमें ऑक्सालेट की मात्रा ज़्यादा होती है, खासकर अगर आपकी पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट की है।
~ क्या न करें: पालक, टमाटर के बीज, बैंगन, चुकंदर, चॉकलेट, चाय, कॉफी और नट्स (बादाम, काजू) का ज़्यादा सेवन न करें। अगर आप इन्हें खाते भी हैं, तो साथ में पानी खूब पिएं।
5. प्रोटीन पर दें ध्यान
~ क्या करें: प्रोटीन को संतुलित मात्रा में लें।
~ क्या न करें: ज़्यादा मांसाहारी भोजन जैसे रेड मीट, चिकन, और मछली से बचें, क्योंकि ये यूरिन की एसिडिटी बढ़ाते हैं और पथरी बनने में मदद कर सकते हैं।
6. विटामिन-C और यूरिक एसिड
~ क्या करें: विटामिन-C वाले खट्टे फल जैसे नींबू और संतरा का सेवन करें, क्योंकि ये यूरिन को अल्कलाइन बनाते हैं।
~ क्या न करें: ज़्यादा विटामिन-C सप्लीमेंट्स लेने से बचें, क्योंकि यह कुछ मामलों में पथरी के खतरे को बढ़ा सकता है।
यूरिक एसिड पथरी: अगर आपकी पथरी यूरिक एसिड की है, तो दाल, राजमा, छोले, और मांसाहारी भोजन का सेवन कम करें।
कुछ अतिरिक्त सुझाव ~ डॉक्टर से सलाह: किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से ज़रूर सलाह लें। ~ दवाईयों का ध्यान: अगर आप कोई दवाई ले रहे हैं, तो उसके बारे में डॉक्टर को बताएं, क्योंकि कुछ दवाएं भी पथरी का कारण बन सकती हैं।
क्या आप अपनी पथरी के प्रकार (जैसे कैल्शियम, यूरिक एसिड आदि) के बारे में जानते हैं?
अगर आपको पता है कि आपकी पथरी किस प्रकार की है, तो खान-पान में और भी सटीक बदलाव किए जा सकते हैं।
पथरी के प्रकार
1. कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी: यह सबसे आम प्रकार की पथरी है। 2. कैल्शियम फॉस्फेट पथरी: यह भी एक तरह की कैल्शियम पथरी है। 3. यूरिक एसिड पथरी: यह तब बनती है जब यूरिन में यूरिक एसिड की मात्रा ज़्यादा होती है। 4. सिस्टीन पथरी: यह एक आनुवंशिक स्थिति (genetic condition) के कारण बनती है।
क्या होता है ऑक्सालेट (Oxalate)
ऑक्सालेट (Oxalate) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला केमिकल कंपाउंड है। यह पौधों, जानवरों और मनुष्यों में मौजूद होता है। जब हम ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो हमारा शरीर उसे पचाता है और बचा हुआ ऑक्सालेट यूरिन (पेशाब) के रास्ते बाहर निकाल देता है। पथरी से संबंध ऑक्सालेट का संबंध पथरी से सबसे ज़्यादा है क्योंकि, पथरी के 80% मामले कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी के होते हैं। 1. कैसे बनती है पथरी: जब शरीर में ऑक्सालेट की मात्रा बहुत ज़्यादा हो जाती है और पेशाब कम बनता है, तो ऑक्सालेट यूरिन में मौजूद कैल्शियम से जुड़कर क्रिस्टल बना लेता है। 2. क्रिस्टल से पथरी: ये छोटे-छोटे क्रिस्टल एक साथ मिलकर धीरे-धीरे एक बड़ा और कठोर पत्थर जैसा पदार्थ बना लेते हैं, जिसे हम पथरी कहते हैं।
कहाँ पाया जाता है ऑक्सालेट ?
कुछ खाद्य पदार्थों में ऑक्सालेट की मात्रा बहुत अधिक होती है। पथरी के मरीजों को इन चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।
उच्च ऑक्सालेट वाले खाद्य पदार्थ: 1. हरी सब्जियाँ: पालक, चुकंदर, बैंगन 2. फल: रसभरी, स्ट्रॉबेरी, कीवी 3. मेवे (Nuts): बादाम, काजू, मूंगफली 4. अन्य: चॉकलेट, कोको, सोया उत्पाद, शकरकंद, चाय और कॉफी
खान-पान में बरतें क्या सावधानी
अगर आपको कैल्शियम ऑक्सालेट की पथरी है या पहले हो चुकी है, तो आपको ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों के साथ कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए: ~ पानी ज़्यादा पिएं: पर्याप्त पानी पीने से यूरिन पतला रहता है और ऑक्सालेट बाहर निकल जाता है। ~ कैल्शियम लें, पर संतुलित मात्रा में: खाने के साथ कैल्शियम लेने से ऑक्सालेट पेट में ही कैल्शियम से जुड़ जाता है और पेशाब में जाने से पहले ही मल के रास्ते बाहर निकल जाता है। दूध, दही, और पनीर का सेवन करें, लेकिन सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह पर ही लें। ~ उच्च ऑक्सालेट खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें: अगर आप ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो उनकी मात्रा कम रखें। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ऑक्सालेट केवल एक कारक है। पथरी के लिए कई अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे पानी कम पीना और आनुवंशिक कारण। इसलिए, किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है।
“पथरी” (स्टोन) और “किडनी स्टोन” (गुर्दे की पथरी) में अंतर
“पथरी” (स्टोन) और “किडनी स्टोन” (गुर्दे की पथरी) में कोई खास अंतर नहीं है। वास्तव में, “किडनी स्टोन” एक प्रकार की पथरी है। “पथरी” एक सामान्य शब्द है जो शरीर के किसी भी अंग में बनने वाले कठोर, कंकड़ जैसे जमाव के लिए इस्तेमाल होता है, जैसे: * गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन): यह सबसे आम प्रकार की पथरी है। यह गुर्दे में बनती है और मूत्र प्रणाली (मूत्रवाहिनी, मूत्राशय) से होकर गुजरती है। * पित्ताशय की पथरी (गॉलब्लैडर स्टोन): यह पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन से बनी होती है। * मूत्राशय की पथरी (ब्लेडर स्टोन): यह मूत्राशय में बनती है।
गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) के बारे में जानकारी: गुर्दे की पथरी को “रेनल लिथियासिस” या “नेफ्रोलिथियासिस” भी कहा जाता है। ये खनिज और नमक के जमाव से बनती हैं। कैसे बनती है गुर्दे की पथरी : 1. कैल्शियम स्टोन (Calcium Stones): यह सबसे आम प्रकार की पथरी है। यह कैल्शियम ऑक्सालेट या कैल्शियम फॉस्फेट से बनी होती है। 2. यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stones): यह उन लोगों में बनती है जिनका मूत्र बहुत अम्लीय होता है, खासकर जो अधिक मात्रा में पशु प्रोटीन (मांस, मछली आदि) का सेवन करते हैं। 3. स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite Stones): यह मूत्र पथ के संक्रमण (Urinary Tract Infection) के कारण बनती है। 4. सिस्टीन स्टोन (Cystine Stones): यह एक दुर्लभ प्रकार की पथरी है जो सिस्टीनुरिया नामक वंशानुगत स्थिति के कारण बनती है।
लक्षण:
जब तक पथरी छोटी होती है, तब तक इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जब यह मूत्रवाहिनी (ureter) में अटक जाती है, तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं: * पीठ, पेट के निचले हिस्से या बाजू में तेज दर्द। * पेशाब में खून आना। * पेशाब करते समय जलन या दर्द होना। * बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना। * बुखार और ठंड लगना। * मतली और उल्टी। * बदबूदार या मटमैला पेशाब।
क्या है इलाज:
इलाज पथरी के आकार, प्रकार और स्थान पर निर्भर करता है। 1. छोटे स्टोन: अधिक पानी पीकर और दर्द निवारक दवाओं की मदद से ये स्टोन प्राकृतिक रूप से बाहर निकल जाते हैं। 2. बड़े स्टोन: ~ शॉकवेव लिथोट्रिप्सी (SWL): इसमें शॉकवेव की मदद से स्टोन को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। ~ युरेटेरोस्कोपी (Ureteroscopy): इसमें एक पतली ट्यूब डालकर स्टोन को निकाला या लेजर से तोड़ा जाता है। ~ परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL): यह बड़े स्टोन के लिए एक सर्जिकल प्रक्रिया है। ~ ओपन सर्जरी: यह बहुत ही दुर्लभ मामलों में की जाती है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त कर प्रस्तुत की गई है। योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।)
चंद्र ग्रहण: हर कष्ट से मुक्ति को लाल किताब के उपाय
लाल किताब के अनुसार कमजोर चंद्रमा को मजबूत करने और शुभ फल पाने के लिए चंद्रमा को अर्ध्य देना, मां का आशीर्वाद लेना, बरगद के पेड़ की जड़ों में जल देना, चांदी के बर्तन में पानी पीना, घर में चांदी का चौकोर टुकड़ा रखना और मजदूरों को दूध पिलाना जैसे उपाय किए जा सकते हैं. साथ ही, शराब और जुआ खेलने से बचना, हरे रंग से परहेज करना और पवित्र नदियों में बहते हुए पानी में तांबे के सिक्के या पानीदार नारियल प्रवाहित करना भी शुभ माना जाता है.
चंद्रमा को मजबूत करने के उपाय
अर्ध्य दें: चांदी के लोटे में गंगाजल, दूध, चावल और शक्कर मिलाकर प्रतिदिन रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें. मां का आशीर्वाद लें: प्रतिदिन सुबह उठकर मां के चरण स्पर्श करें और उनकी सेवा करें. बरगद के पेड़ की जड़ में जल दें: कुंडली में चंद्रमा कमजोर होने पर बरगद के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें. चांदी के बर्तन में पानी पिएं: चांदी के बर्तन में पानी भरकर उसका सेवन करने से चंद्रमा मजबूत होता है. घर में चांदी का टुकड़ा रखें: अलमारी में चांदी का एक चौकोर टुकड़ा रखने से चंद्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है. मजदूरों को दूध पिलाएं: मजदूर वर्ग को दूध पिलाने से भी चंद्रमा का शुभ प्रभाव मिलता है. नदी में तांबे के सिक्के बहाएं: बच्चों के साथ यात्रा करते समय नदी में तांबे के सिक्के बहाने से चंद्र दोष दूर होता है. पानीदार नारियल प्रवाहित करें: चंद्र ग्रहण के दिन पानीदार नारियल को सिर से 21 बार वारकर बहते हुए पानी में प्रवाहित करें.
अन्य महत्वपूर्ण उपाय
नकारात्मक आदतों से बचें: शराब, जुआ और अनैतिकता से बचें, ये चंद्रमा को कमजोर करते हैं. हरे रंग से बचें: हरे रंग के वस्त्रों और वस्तुओं के उपयोग से बचें. पूजा स्थल में दान करें: पूजा स्थल में चना और दाल दान करें. धर्म स्थान में माथा टेकें: धर्म स्थान में जाकर माथा टेकने और कुछ प्रसाद चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है.
चंद्र ग्रहण के दिन लाल किताब के इन उपाय से मिलेगी हर कष्ट से मुक्ति चंद्र ग्रहण के दिन करें लाल किताब के ये उपाय, मिलेगी हर कष्ट से मुक्ति 5 मई दिन शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण तुला राशि में लगने जा रहा है और इस दिन भद्रा का भी […]
महाभारत सर्किट के तहत 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत
उत्तरी पांचाल प्रदेश की राजधानी रहा है अहिच्छत्र
बरेली के अहिच्छत्र को मिलेगा नया स्वरूप
~शैली सक्सेना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने बरेली के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाने के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। यह मंजूरी महाभारत सर्किट के अंतर्गत दी गई है। राज्य सरकार का यह कदम बरेली में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, जयवीर सिंह ने दी।
अहिच्छत्र: धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का संगम
अहिच्छत्र का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यह प्राचीन स्थल उत्तरी पांचाल प्रदेश की राजधानी था। बरेली मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर आंवला तहसील के रामनगर में स्थित यह विशाल किला द्वापर युग के वैभव का गवाह है। इसके बाद भी गुप्त, पाल और सेन राजाओं ने यहां शासन किया, और हर दौर में इसका गौरव बना रहा।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अहिच्छत्र में पर्यटन सुविधाओं का विकास तेजी से किया जाएगा। इसमें प्रवेश द्वार का निर्माण, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, सूचना केंद्र, पेयजल व्यवस्था और विश्राम स्थल जैसी मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं।
विभिन्न धर्मों के लिए एक पवित्र स्थल
अहिच्छत्र सिर्फ महाभारतकालीन इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण स्थल है। * जैन धर्म: जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ को यहीं कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। हर साल बड़ी संख्या में जैन अनुयायी इस पवित्र स्थल की यात्रा करने आते हैं। * बौद्ध धर्म: माना जाता है कि भगवान बुद्ध भी यहां आए थे और उन्होंने नाग राजाओं को धर्म की दीक्षा दी थी। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा विवरण में अहिच्छत्र में बड़े बौद्ध विहारों का उल्लेख किया है। मौर्य शासक सम्राट अशोक ने भी यहां कई बौद्ध स्तूपों का निर्माण करवाया था। 19वीं और 20वीं सदी में हुई पुरातात्विक खुदाई में यहां कई बेशकीमती वस्तुएं मिली हैं, जो बताती हैं कि यह प्राचीन समय में एक समृद्ध व्यापारिक केंद्र था।
बरेली में बढ़ रहा है पर्यटकों का आकर्षण
बरेली में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। 2024 में यहां 1 करोड़ 15 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। 2025 में भी यह संख्या उत्साहजनक बनी हुई है, और पर्यटन विभाग का अनुमान है कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 1.25 करोड़ तक पहुंच सकता है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और भी मजबूत तरीके से स्थापित किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बना सके।
दुबई के भक्त ने भेंट किए ‘ओम साईं राम’ के दो सुनहरे पत्र
शिरडी के साईं बाबा को 1.58 करोड़ रुपए का गुप्त स्वर्ण दान
शिरडी, महाराष्ट्र (एजेंसी)। साईं बाबा के भक्तों की आस्था और दान का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। शिरडी में साईं बाबा के एक अज्ञात भक्त ने 1 करोड़ 58 लाख रुपए से अधिक का सोना गुप्त रूप से दान किया है। यह दान 17 साल पहले हैदराबाद के आदिनारायण रेड्डी द्वारा दिए गए स्वर्ण सिंहासन के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है।
गुप्त दान और भक्त की साईं बाबा में अटूट आस्था
दुबई में रहने वाले इस साईं भक्त ने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने 1 किलो 623 ग्राम और 600 मिलीग्राम वजन के दो सुनहरे ‘ओम साईं राम’ पत्र साईं बाबा को अर्पित किए। साईं बाबा संस्थान के सूत्रों के मुताबिक, यह भक्त कई सालों से हर महीने शिरडी आते हैं और आरती में भी शामिल होते हैं। वे हर बार लगभग 1 लाख रुपए का दान भी देते हैं। उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वे बाबा को सोने की कोई वस्तु दान करें और आखिरकार, गुरुवार के शुभ दिन उन्होंने अपनी यह इच्छा पूरी की।
दान पत्रों की स्थापना
साईं बाबा संस्थान ने दान में मिले इन सुनहरे ‘ओम साईं राम’ पत्रों को समाधि मंदिर के उन दोनों द्वारों पर स्थापित किया है, जहां से दर्शन करने के बाद भक्त बाहर निकलते हैं। इस तरह भक्त अब मंदिर से बाहर निकलते समय ‘साईं राम’ का जाप करते हुए निकलेंगे। संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गोरक्ष गाडिलकर ने बताया कि भक्त ने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया था, इसलिए उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। संस्थान ने भक्त को शॉल, साईं मूर्ति और उदी भेंट कर सम्मानित किया।
74 डिब्बों में 9.768 किलोग्राम प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद
बिजनौर पुलिस को मिली शानदार कामयाबी
प्रतिबंधित कैप्सूल की स्विफ्ट कार से तस्करी, एक गिरफ्तार
बिजनौर। रेहड़ पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक स्विफ्ट कार से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद कर एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के अभियान के तहत रेहड़ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। थाना रेहड़ पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि उत्तराखंड की ओर से एक स्विफ्ट कार में नशीले पदार्थ ले जाए जा रहे हैं। सूचना के आधार पर, उपनिरीक्षक भीम सिंह, मुख्य आरक्षी पुरुषोत्तम और आरक्षी ललित कुमार की टीम ने तत्काल जाल बिछाया। चेकिंग के दौरान, पुलिस ने एक संदिग्ध स्विफ्ट कार (पंजीकरण संख्या- यूपी14 बीवी-3527) को रोका। कार की तलाशी लेने पर, पुलिस टीम को उसमें रखे 74 डिब्बे प्रतिबंधित कैप्सूल मिले, जिनका कुल वजन 9.768 किलोग्राम था।
पुलिस ने तत्काल कार चला रहे आरोपी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम इबरान, पुत्र रहमतुल्ला, निवासी ग्राम महुआ डावरा नादेई, थाना जसपुर, जिला उधम सिंह नगर, उत्तराखंड बताया। आरोपी के पास इन कैप्सूलों से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं था।
बरामदगी के आधार पर, पुलिस ने आरोपी इबरान के खिलाफ थाना रेहड़ में मुकदमा संख्या 66/2025, धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह प्रतिबंधित सामग्री कहाँ से लाई गई थी और इसे कहाँ पहुँचाया जाना था।
शिक्षक दिवस: विदुर कुटी और वरिष्ठ नागरिक समिति ने मनाया उत्सव
~ भूपेंद्र निरंकारी
बिजनौर। शिक्षक दिवस के अवसर पर विदुर कुटी के श्री विदुर गुरु गृह इंटर कॉलेज और बिजनौर की वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण समिति द्वारा अलग-अलग समारोह आयोजित कर शिक्षकों का सम्मान किया गया। दोनों ही कार्यक्रमों में गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षकों के समाज निर्माण में योगदान पर जोर दिया गया।
श्री विदुर गुरु गृह इंटर कॉलेज में पुष्पांजलि और सम्मान
श्री विदुर गुरु गृह इंटर कॉलेज, दारानगर विदुर कुटी में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह का आरंभ देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर प्रधानाचार्य कैलाशचंद और सभी शिक्षकों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ।
अपने संबोधन में प्रधानाचार्य कैलाशचंद ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षकों के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “शिक्षक स्वयं दीपक के समान जलकर समाज और दुनिया को रोशनी देते हैं। वे ही सभ्यता और संस्कृति के असली शिल्पी होते हैं।” कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अध्यापक अरुण त्यागी ने किया, और अंत में प्रधानाचार्य ने सभी शिक्षकों को उपहार देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य अखिलेश कुमार, ज्ञानेंद्र सिंह, निरंजन लाल, ओम प्रकाश, दिनकर सिंह, अखिलेश चंद्र शर्मा, रवि प्रकाश आर्य, अनिल कुमार, जसवीर सिंह, सुशील चौधरी, राहुल कुमार, देवेंद्र कुमार, अरविंद शर्मा, सुमित कुमार, संजय सक्सेना, अंशुल कुमार, श्रीमती बबीता सिंगल, मेघना शर्मा, प्रेरणा शर्मा, दीना रानी, विकासना, छवि और शिव नंदन यादव सहित अन्य शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण समिति द्वारा सम्मान समारोह
इसी क्रम में, वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण समिति द्वारा एक स्थानीय धर्मशाला में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समिति के अध्यक्ष एम. एस. भारद्वाज, संरक्षक वैद्य अजय गर्ग और अन्य सदस्यों द्वारा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और ईश वंदना के साथ हुआ।
अजय माहेश्वरी ने डॉ. राधाकृष्णन के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला, जबकि अन्य वक्ताओं ने सभ्यता और संस्कृति के विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। समारोह में डॉ. चंद्र प्रकाश आर्य (पूर्व अध्यक्ष, वर्धमान कॉलेज बिजनौर), सुरेंद्र प्रकाश भटनागर, डॉ. एन. के. अग्रवाल, ए. के. दुबे, प्रीतम सिंह, विनोद कुमार शर्मा, कृष्ण कुमार पाठक और श्रीमती शशि जैन जैसे अनुभवी शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। अनिल कुमार दुबे को ‘समयबद्धता पुरस्कार’ से नवाजा गया। इस कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष एम. एस. भारद्वाज, कोषाध्यक्ष के. के. खन्ना, सचिव गिरधारी सिंह खन्ना, संरक्षक वैद्य अजय गर्ग, संजय जैन और एस. पी. रस्तौगी सहित सभी सदस्यों ने भाग लिया। भजन-वंदना और स्वादिष्ट भोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी और डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन का विशेष कार्यक्रम
फतेहपुर में सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान
फतेहपुर। शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, फतेहपुर और डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, उत्तर प्रदेश के चेयरमैन और कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने इन शिक्षकों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया।
कार्यक्रम का आयोजन सुबह 10 बजे हुआ, जहाँ डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने अपनी माता श्रीमती पद्मिनी श्रीवास्तव से आशीर्वाद लेकर समारोह की शुरुआत की। श्रीमती पद्मिनी श्रीवास्तव, जो स्वयं निरंकारी बालिका इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त संस्कृत की प्रवक्ता हैं, के प्रति डॉ. श्रीवास्तव ने अपने जीवन में उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प दोहराया।
इस सम्मान समारोह में चार शिक्षकों को सम्मानित किया गया: * श्रीमती पद्मिनी श्रीवास्तव: सेवानिवृत्त संस्कृत प्रवक्ता, श्री निरंकारी बालिका इंटर कॉलेज। * डॉ. ओमप्रकाश अवस्थी: पूर्व प्रवक्ता, हिंदी साहित्य, महात्मा गांधी महाविद्यालय। * डॉ. श्रीमती अरुणा श्रीवास्तव: पूर्व प्रवक्ता, हिंदी साहित्य और योग शिक्षिका, श्री निरंकारी गर्ल्स इंटर कॉलेज। * श्री श्रवण कुमार पांडेय: वरिष्ठ साहित्यकार और सेवानिवृत्त अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय जैनपुर।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने इन सभी शिक्षकों को माल्यार्पण किया, मोतियों की माला पहनाई, शॉल ओढ़ाई और श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर उनका सम्मान किया। उन्होंने सभी शिक्षकों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद भी लिया और उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। इस अवसर पर इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के आजीवन सदस्य अभिनव श्रीवास्तव और होम्योपैथिक केमिस्ट प्रकोष्ठ के संयोजक प्रशांत अवस्थी भी उपस्थित थे, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया। यह आयोजन शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर ई-रिक्शा के अनधिकृत संचालन के खिलाफ एक बड़ा अभियान
बिजनौर यातायात पुलिस ने जब्त किए 3 ई-रिक्शा, 10 के चालान
बिजनौर, (5 सितंबर 2025)। बिजनौर की यातायात पुलिस ने आज पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर ई-रिक्शा के अनधिकृत संचालन के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान तीन ई-रिक्शा जब्त किए गए और 10 ई-रिक्शा का चालान किया गया।
यातायात पुलिस ने बिजनौर-नजीबाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर यह कार्रवाई करते हुए ई-रिक्शा चालकों को सख्त चेतावनी दी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई भी ई-रिक्शा राष्ट्रीय या राज्य राजमार्गों पर चलता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ जब्ती और चालान की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, ई-रिक्शा का संचालन केवल शहर और कस्बों की सड़कों तक ही सीमित होना चाहिए। इस संबंध में यातायात पुलिस ने सभी ई-रिक्शा चालकों और उनके यूनियन पदाधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे बिना सत्यापन और रजिस्ट्रेशन वाले ई-रिक्शा को सड़कों पर न चलने दें।
यह कदम सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात को सुचारू बनाने के लिए उठाया गया है। यातायात पुलिस ने आम जनता से भी यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित सड़क यातायात बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी प्रतापगढ़ को पहचान
धार्मिक स्थलों के पर्यटन विकास को 8 करोड़ की परियोजनाएं
~ शैली सक्सेना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार लाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने प्रतापगढ़ जिले में 8 करोड़ रुपए की लागत से 8 प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास को मंजूरी दी है। इस पहल के तहत इन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
परियोजना का उद्देश्य
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि इन योजनाओं का मुख्य लक्ष्य प्रतापगढ़ के प्रमुख मंदिरों, धामों और बौद्ध स्थलों पर पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा श्रद्धालुओं को साफ-सुथरा, सुरक्षित और आधुनिक वातावरण प्रदान करना है। उनका मानना है कि इस पहल से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। मंत्री ने कहा कि यह प्रयास प्रतापगढ़ को प्रदेश की पर्यटन आय में एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद करेगा।
इन स्थलों का होगा विकास
इस परियोजना में जिन 8 स्थलों को शामिल किया गया है, उनमें प्रत्येक के लिए 1-1 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इन स्थलों की सूची इस प्रकार है: 1. सुगता नंद बौद्ध vihar: नगर पालिका बेल्हा, रंजितपुर चिलबिला में स्थित। 2. राम जानकी मंदिर: वार्ड संख्या-08, जगापुर में स्थित। 3. बौद्ध विहार: ग्राम सभा बुआपुर (रूपपुर), विकासखंड मान्धाता में स्थित। 4. बाबा घुईसरनाथ धाम: विकासखंड सांगीपुर में स्थित। 5. मां दुर्गा मंदिर: ग्राम सर्वजीत, तहसील पट्टी में स्थित। 6. नरसिंह धाम मंदिर: ग्राम पंचायत नौबस्ता (वि०ख० कुण्डा) में गंगा तट पर स्थित। 7. बाबा अवधेश्वरनाथ धाम मंदिर: ग्राम पंचायत शाहपुर (वि०ख० कुण्डा) में गंगा तट पर स्थित। 8. मां ज्वाला देवी धाम सिद्धपीठ: नगर पंचायत मानिकपुर में स्थित।
आस्था, परंपरा और आधुनिकता का संगम
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है। प्रतापगढ़ में शुरू होने वाले इन विकास कार्यों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को नई सुविधाएं और आकर्षण मिलेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि गंगा तट के धामों, प्राचीन बौद्ध विहारों और मंदिरों का विकास इस तरह किया जाएगा कि वहां आस्था, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिले। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि यह परियोजना प्रदेश सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत धार्मिक स्थलों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, प्रतापगढ़ धार्मिक-पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
ईश्वर को जानना हमारे लिए बहुत ज़रूरी: बहन हर्ष चावला
~ भूपेंद्र निरंकारी
बिजनौर। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वावधान में कालिका मंदिर रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में एक विशाल महिला समागम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली से पधारीं बहन हर्ष चावला जी ने सत्संग भवन में उपस्थित सभी लोगों को संबोधित किया।
अपने प्रवचन में बहन हर्ष चावला जी ने कहा कि चंद्रमा का काम शीतलता देना, सूर्य का काम गर्मी देना, अग्नि का काम जलना और पहाड़ का काम अडिग रहना है, लेकिन ये सब परिवर्तनशील हैं। जो भी चीज़ें परिवर्तनशील होती हैं, वे परमात्मा नहीं हो सकतीं। यह सब माया है, जो बहुत शक्तिशाली होती है। उन्होंने समझाया कि जिस चीज़ में भी हमें परिवर्तन नज़र आता है, वह नाशवान है। केवल एक प्रभु ही अजर, अमर और अविनाशी है, जिसकी जानकारी हमें पूर्ण सतगुरु के माध्यम से ही मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि ईश्वर को जानना हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। उसकी भक्ति और पूजा के लिए उसके ज्ञान का होना आवश्यक है, जो हमें सतगुरु द्वारा दिए गए ज्ञान-चक्षु से प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि हमें ईश्वर की याद तब आती है, जब हमारे अपने और सगे-संबंधी हमारा साथ छोड़ देते हैं।
सतगुरु पर विश्वास
बहन हर्ष चावला जी ने सतगुरु पर पूर्ण विश्वास रखने की बात पर ज़ोर दिया। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक बच्चा अपने माता-पिता के हवा में उछालने पर भी मुस्कुराता रहता है क्योंकि उसे पूरा भरोसा होता है कि वे उसे चोट नहीं लगने देंगे, उसी तरह हमें भी अपने सतगुरु पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। वे हमेशा हमारा कल्याण ही करेंगे और कभी हमारा अहित नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि सतगुरु दूध का दूध और पानी का पानी कर देते हैं।
प्रेम और सद्भाव का संदेश
उन्होंने सभी से आपस में प्रेम और सहनशीलता के साथ रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “प्यार गुलशन को सजाता है और नफरत वीरान करती है।” प्रेम ही ईश्वर का दूसरा रूप है।
कार्यक्रम के अंत में, बरेली जोन 58-ए के जोनल इंचार्ज संजीव अग्रवाल जी ने सभी का आभार व्यक्त किया। सेवादल संचालक विनोद जी ने भी सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद अदा किया।
बिजनौर। नगर पालिका परिषद बिजनौर द्वारा आयोजित जिला कृषि औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी के तहत बीती रात ‘रूहानियत शाम ए गजल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने संगीत और शायरी की खूबसूरती से सबका मन मोह लिया। इस कार्यक्रम में मशहूर प्लेबैक सिंगर कमाल खान ने अपनी शानदार आवाज से समां बांध दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि जिलाधिकारी जसजीत कौर, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. बीरबल सिंह, डॉ. अभिनव सिंह और अधिशासी अधिकारी विकास कुमार द्वारा संयुक्त रूप से मां सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद, कार्यक्रम के संयोजक डॉ. पंकज भारद्वाज, ज्योति लाल शर्मा, सभासद जुल्फिकार बेग (बेबी) और प्रिंस रवि सिद्धार्थ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
कमाल खान ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत भगवान राम पर आधारित एक भजन से की, जिसके बाद उन्होंने नायब तहसीलदार राजकुमार चौधरी को श्रद्धांजलि देते हुए ‘चिट्ठी ना कोई संदेश जाने वो कौन सा देश’ गीत गाया। इसके बाद, उन्होंने एक के बाद एक कई मशहूर गजलें प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। इनमें ‘तुझको देखा तो ये ख्याल आया’, ‘होठों से छू लो तुम’, ‘हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह’ और ‘कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो’ जैसी गजलें शामिल थीं। कमाल खान ने अपनी प्रस्तुति से पंडाल में मौजूद सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह उल्लेखनीय है कि उन्होंने सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर’ में एक गीत को अपनी आवाज दी है, जिसे उन्हीं पर फिल्माया गया था। वे कई अन्य फिल्मों में भी प्लेबैक सिंगिंग कर चुके हैं।।
कार्यक्रम का निर्देशन संगीतकार और अभिनेता मदन मोहन ने किया, जबकि इसका संचालन डॉ. पंकज भारद्वाज ने किया। इस मौके पर डॉ अनिल चौधरी, गौरव भारद्वाज, सुधांशु वत्स, माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष आसिफ गयूर सहित शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में, जिलाधिकारी जसजीत कौर ने संगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे तनावपूर्ण माहौल में एक औषधि बताया। नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष इंदिरा सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि धर्म ग्रंथों में भी संगीत का महत्वपूर्ण स्थान है। डॉ. बीरबल सिंह ने गजल के इतिहास पर चर्चा की। अंत में, सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
जनपद फर्रूखाबाद में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह उन्नाव, फिरोजाबाद, मैनपुरी तथा फर्रूखाबाद के भ्रमण पर
~ शैली सक्सेना
लखनऊ: (04 सितम्बर, 2025)। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह जनपद उन्नाव, फिरोजाबाद, मैनपुरी तथा फर्रूखाबाद के तीन दिवसीय भ्रमण पर रहेंगे।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार कल शुक्रवार अपराह्न 03 बजे अरोड़ा रिसार्ट उन्नाव स्थित स्व. अजीत सिंह जी की 31वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल होंगे। इसके उपरान्त 06 सितम्बर को पूर्वाहन 09 बजे से अपराह्न 01 बजे तक ट्रांजिट हास्टल पीडब्लूडी पुलिस लाइन में आम जनता की समस्याओं की सुनवाई करेंगे। इसके उपरान्त घंटाघर मैनपुरी में थिमैटिक गेट आदि के पर्यटन विकास संबंधित परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे।
अगले दिन रविवार 07 सितम्बर को कैम्प कार्यालय सिरसागंज फिरोजाबाद में जनता की समस्याएं सुनेंगे। इसके पश्चात ठाकुर जी महाराज मंदिर प्रांगण शिकोहाबाद थाना अराव सिरसागंज में आयोजित पर्यटन विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। निरीक्षण भवन फर्रूखाबाद के सभागार में लोगों से मुलाकात करेंगे तथा 12 से 01 बजे तक बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। इसके पश्चात कलेक्ट्रेट सभागार फर्रूखाबाद में जिले के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे तथा सायं 06 बजे कलेक्टेट सभागार फर्रूखाबाद में मीडिया को सम्बोधित करेंगे। इसके उपरान्त लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।
‘ईको टूरिज्म, नेचर एंड कल्चर सेलिब्रेशन’ होगी महोत्सव की थीम
दुधवा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी
दुधवा वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और फोटोग्राफर्स को कर रहा आकर्षित
दुधवा महोत्सव का पहला संस्करण नवंबर में, तीन दिन तक होगा भव्य आयोजन
~ शैली सक्सेना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने और दुधवा टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता को दुनिया तक पहुंचाने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार पहली बार दुधवा महोत्सव का आयोजन करने जा रही है। यह तीन दिवसीय भव्य आयोजन नवंबर 2025 में लखीमपुर खीरी स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में होगा। पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव की थीम ‘ईको टूरिज्म, नेचर एंड कल्चर सेलिब्रेशन’ रखी गई है।
महोत्सव का उद्देश्य और मुख्य आकर्षण
इस अनोखे महोत्सव का मुख्य उद्देश्य ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना, प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और स्थानीय थारू जनजाति की संस्कृति को दुनिया के सामने लाना है। इस आयोजन में आवासीय, सांस्कृतिक और वन्यजीव आधारित गतिविधियां शामिल होंगी, जो पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करेंगी।
महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में ये शामिल हैं:
वन्यजीव सफारी और गाइडेड टूर: पर्यटक जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे और गाइडेड टूर के माध्यम से दुधवा की जैव विविधता को करीब से जान पाएंगे। स्थानीय संस्कृति का अनुभव: थारू जनजाति की अनोखी संस्कृति, उनके खानपान, हस्तशिल्प और जीवनशैली को देखने और समझने का मौका मिलेगा। प्रकृति के बीच गतिविधियाँ: नेचर वॉक, बर्ड वाचिंग सेशन, ग्रामीण कल्चरल टूर और प्रकृति के साथ योग जैसे अनुभव पर्यटकों को प्रकृति से जोड़ेंगे। साहसिक खेल और मनोरंजन: एडवेंचर एवं इको स्पोर्ट्स जैसे वाल क्लाइम्बिंग, साइकिल ट्रैक और इंडोर गेम्स की व्यवस्था होगी। आरामदायक रहने की व्यवस्था: महोत्सव के दौरान 50 लक्जरी और 200 डीलक्स टेंट की व्यवस्था की जाएगी, ताकि पर्यटक आराम से रुक सकें।
दुधवा को मिलेगी वैश्विक पहचान
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, यह महोत्सव न केवल दुधवा टाइगर रिजर्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। महोत्सव में देश-विदेश से पर्यटकों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकेगा। इस आयोजन का उद्देश्य दुधवा राष्ट्रीय उद्यान को देश के प्रमुख ईको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
यूपी टूरिज्म (इको) के निदेशक प्रखर मिश्रा ने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से दुधवा की प्राकृतिक विरासत, जनजातीय संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी। यह महोत्सव रोजगार सृजन और राज्य की पहचान को विशिष्टता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हाल के वर्षों में दुधवा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वन्यजीव प्रेमी, शोधकर्ता, छात्र और फोटोग्राफर लगातार इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसी बढ़ते रुझान को देखते हुए, यह महोत्सव ईको-टूरिज्म को और अधिक सुलभ और आकर्षक बनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
बिजनौर। जिला मुख्यालय बिजनौर सदर तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात राजकुमार ने कथित तौर पर अपने सरकारी आवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय वे अपने परिवार के साथ थे। आत्महत्या के पीछे के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है।
राजकुमार नायब तहसीलदार (फाइल फोटो)
सुबह इलाहाबाद से लौटे थे घर
राजकुमार बागपत जिले के रहने वाले थे और अपने परिवार, जिसमें उनकी पत्नी, दो छोटी बेटियाँ और माता-पिता शामिल हैं, के साथ कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी में रहते थे। अधिकारियों के मुताबिक, वे एक सरकारी काम के सिलसिले में इलाहाबाद गए थे और सुबह करीब 9 बजे ही घर लौटे थे।
बताया जाता है कि घर आने के बाद उनकी परिवार के सदस्यों से किसी बात पर बहस हो रही थी। बातचीत के दौरान ही वे अपने कमरे में चले गए और अंदर से दरवाजा बंद करके अपनी पिस्टल से कनपटी पर गोली मार ली। गोली की आवाज सुनते ही घर में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मच गई।
अस्पताल में तोड़ा दम
परिजनों और मौके पर पहुँची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर राजकुमार को बाहर निकाला। वे खून से लथपथ थे और उनकी हालत बेहद नाजुक थी। उन्हें तुरंत सिविल लाइंस स्थित बीना-प्रकाश हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के डॉ. प्रकाश के अनुसार, जब उन्हें लाया गया था, तब उनकी हालत बेहद गंभीर थी। घटना की सूचना मिलते ही जिला मजिस्ट्रेट जसजीत कौर और पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा सहित कई अधिकारी अस्पताल पहुँचे। उन्होंने डॉक्टरों से राजकुमार के इलाज में कोई कमी न छोड़ने का आग्रह किया था।।
अभिषेक झा एसपी बिजनौर
पहले भी विवादों में रहे थे नायब तहसीलदार।
राजकुमार एक होनहार और मिलनसार व्यक्ति थे। नायब तहसीलदार बनने से पहले उनका चयन पैरामिलिट्री फोर्स में सब-इंस्पेक्टर के पद पर भी हुआ था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका परिवार छोटा था और वे अपनी दो छोटी बेटियों से बहुत प्यार करते थे। यह भी सामने आया है कि राजकुमार कुछ समय पहले तब सुर्खियों में आए थे जब एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय यह मामला किसी तरह शांत हो गया था। चर्चा है कि वही महिला उन्हें फिर से परेशान कर रही थी, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया? हालाँकि, एसपी अभिषेक झा ने बताया कि आत्महत्या के पीछे के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सच उजागर: शिकायतें बंद, समस्याएं जस की तस
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़े अधिकारी शिकायतों का समाधान करने के बजाय मनमाने ढंग से “स्पेशल क्लोज़” कर रहे हैं। यह आरोप जिला अल्मोड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने लगाया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को “जनता की उम्मीदों से विश्वासघात” बताते हुए इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संजय पाण्डे का कहना है कि जिस हेल्पलाइन का मकसद जनता को त्वरित और पारदर्शी समाधान दिलाना था, वह अब काग़ज़ी औपचारिकता बनकर रह गई है। शिकायतों का समाधान करने के बजाय अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से उन्हें “स्पेशल क्लोज़” कर दिया जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्यपाल के अनु सचिव द्वारा L4 स्तर पर भेजी गई शिकायत को L3 स्तर के अधिकारी ने बिना कार्रवाई के स्पेशल क्लोज़ में डाल दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजी गई दो शिकायतें भी इसी तरह ठंडे बस्ते में डाल दी गईं।
दो साल से लटकी शिकायतें
संजय पाण्डे ने बताया कि…CHML 0820238432564 (24 अगस्त 2023), CHML 0920238448554 (26 सितम्बर 2023) पिछले दो साल से लंबित हैं। जबकि, CHML 032025870316 (8 मार्च 2025) शिकायत का भी अब तक कोई हल नहीं निकला है और जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
सुनी जातीं हैं चुनिंदा शिकायतें
पाण्डे का आरोप है कि मुख्यमंत्री केवल चुनिंदा लोगों की शिकायतें सुनते हैं, जबकि आम जनता की समस्याओं को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिले के अधिकारी हेल्पलाइन की समीक्षा तक नहीं कर रहे, जिससे लोगों में गहरी नाराज़गी है।
सरकार की साख पर सवाल !
संजय पाण्डे ने मुख्यमंत्री से मांग की कि हेल्पलाइन प्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो जनता का भरोसा सरकार से पूरी तरह उठ जाएगा और यह सरकार की साख पर सीधा हमला होगा।
मेरी काशी क्रिएटर्स पाठशाला परंपरा और तकनीक का संगम है- मंत्री जयवीर सिंह
सोशल मीडिया और स्टोरीटेलिंग के जरिए युवा पहुँचाएंगे काशी की विरासत दुनिया तक
यूपी पर्यटन की नई पहल: युवाओं की आवाज़ से दुनिया तक गूँजेंगी काशी की कहानियाँ
~ शैली सक्सेना
लखनऊ/वाराणसी, 3 सितम्बर 2025: उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन हब बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी कड़ी में पर्यटन विभाग ने भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और वाराणसी जिला प्रशासन के सहयोग से ‘मेरी काशी क्रिएटर्स पाठशाला’ का आयोजन किया। आयुक्त कार्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को काशी का सांस्कृतिक राजदूत बनाने की दिशा में एक और अहम कदम साबित हुआ।
इस पाठशाला में 275 से अधिक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, क्रिएटर्स और विद्यार्थी (बीएचयू, काशी विद्यापीठ और डीएवी कॉलेज से) तथा काशी सांसद टूरिस्ट गाइड प्रतियोगिता के विजेता शामिल हुए। प्रतिभागियों को काशी और सारनाथ की 170 कहानियों पर प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें सोशल मीडिया व नई तरह की स्टोरीटेलिंग तकनीकें सिखाई गईं, ताकि वे इन कहानियों को देश-विदेश के दर्शकों तक पहुँचा सकें।
युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में पहल
कार्यक्रम में वाराणसी गुरु ने युवाओं को कहानी कहने की अनोखी तकनीकें जैसे इमोशनल ग्राफिंग, पर्सनलाइजेशन और ‘थिएटर ऑफ माइंड’ सिखाईं, जिससे वे काशी की कहानियों को और असरदार बना सकें। वहीं यूट्यूब विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को रील्स निर्माण, डिजिटल पहुँच बढ़ाने, दर्शकों से जुड़ाव और मोनेटाइजेशन के व्यावहारिक गुर सिखाए। युवाओं को लगातार जोड़े रखने और उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए यूपी पर्यटन और जिला प्रशासन ने ‘मेरी काशी एंबेसडर्स प्रोग्राम’ के तहत एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप भी तैयार किया।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि, “मेरी काशी क्रिएटर्स पाठशाला’ उत्तर प्रदेश पर्यटन की उस पहल का प्रतीक है, जहाँ विरासत और आधुनिकता साथ-साथ चलते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम युवाओं को काशी का सांस्कृतिक दूत बना रहे हैं, ताकि वे नई तकनीकों के जरिए हमारी धरोहर की कहानियाँ दुनिया तक पहुँचा सकें और वैश्विक पर्यटकों को काशी की ओर आकर्षित कर सकें।”
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि, “इस पाठशाला ने साबित किया है कि स्थानीय युवाओं की रचनात्मकता पर्यटन को नई दिशा दे सकती है। जब ये युवा काशी की कहानियों को अपने अंदाज़ में दुनिया तक पहुँचाएंगे, तो न केवल पर्यटकों का अनुभव और समृद्ध होगा बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वैश्विक जुड़ाव की ओर कदम
मंडलायुक्त एस. राजालिंगम ने घोषणा की कि यूपी पर्यटन के तहत 4 घंटे का विशेष ‘मेरी काशी कोर्स मॉड्यूल’ शुरू किया जाएगा। इसके तहत प्रतिभागी #MeriKashi हैशटैग के साथ आकर्षक रील्स बनाकर ‘मेरी काशी एंबेसडर’ के रूप में प्रमाणित होंगे। इन एंबेसडर्स को यूपी पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर स्थान मिलेगा, जिससे देशी और विदेशी पर्यटक सीधे स्थानीय और असली आवाज़ों से जुड़ सकेंगे।
यह पहल एक बार फिर यूपी पर्यटन की उस प्रतिबद्धता को मज़बूत करती है, जिसके तहत वाराणसी को एक वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में गढ़ा जा रहा है, जहाँ परंपरा और तकनीक का संगम है और स्थानीय युवाओं की आवाज़ें काशी की कहानियों को दुनिया के हर कोने तक पहुँचा रही हैं।”
अयोध्या में आगामी 19 अक्टूबर को होगा भव्य दीपोत्सव का आयोजन
स्वदेशी ड्रोन रामनगरी के आसमान में पौराणिक गाथा करेंगे चित्रित
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा पिछले वर्ष से अधिक भव्य दीपोत्सव की तैयारियां
वीर मुद्राओं में दिखेंगे प्रभु श्री राम, लक्ष्मण और हनुमान, लेजर लाइट्स, वॉयस ओवर दर्शकों को करेंगे मंत्रमुग्ध
दीपोत्सव-2025 में दुनिया देखेगी भारत की आस्था और तकनीक का अद्भुत संगम- मंत्री जयवीर सिंह
अयोध्या में दीपोत्सव- 2025 पर 1,000 से अधिक ड्रोन से होगा भव्य शो
~शैली सक्सेना
लखनऊ, 03 सितंबर 2025। उत्तर प्रदेश सरकार इस वर्ष भी अयोध्या में दीपावली को भव्य रूप देने के लिए ‘दीपोत्सव 2025’ का आयोजन करने जा रही है। इस अवसर पर पर्यटन विभाग द्वारा एक भव्य एरियल ड्रोन शो आयोजित किया जाएगा। रामनगरी के आसमान में 1,000 से अधिक रंग-बिरंगे ड्रोन एक साथ उड़ान भरकर भक्ति, अध्यात्म और आधुनिकता का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करेंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ड्रोन शो दीपोत्सव की आध्यात्मिक भव्यता को और भी आकर्षक बनाएगा। पिछले वर्ष से भव्य दीपोत्सव की तैयारियां की जा रही है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘अयोध्या में 19 अक्टूबर 2025 को भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर रामनगरी लाखों दीयों की रोशनी से आलोकित होगी।भव्य आयोजन का उद्देश्य भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की पौराणिक स्मृतियों को जीवंत करना है। इसके तहत पूरे नगर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा और सरयू नदी के घाटों पर लाखों दीप प्रज्वलित होंगे। दीपोत्सव में शोभायात्रा के साथ विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक आयोजन भी होंगे, जो आगंतुकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।’
वीर मुद्राओं में दिखेंगे श्री राम, लक्ष्मण और हनुमान
मंत्री ने बताया कि ‘अयोध्या में इस बार होने वाले दीपोत्सव में दर्शकों को भव्य एरियल ड्रोन शो का दिव्य अनुभव मिलेगा। मंत्री ने बताया कि लगभग 15 मिनट तक चलने वाले इस शो में 1,000 से अधिक मेड इन इंडिया ड्रोन रामायण की पौराणिक एवं आध्यात्मिक गाथा को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करेंगे। ड्रोन शो में प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी की वीर मुद्राओं का सजीव चित्रण होगा।
लेजर लाइट्स, वॉयस ओवर करेंगे मंत्रमुग्ध
ड्रोन शो को और आकर्षक बनाने के लिए लेजर लाइट्स, वॉयस ओवर और संगीतमय नैरेशन का विशेष संयोजन किया जाएगा, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा।’ ज्ञात कि, दीपोत्सव-2024 में 500 ड्रोन के जरिए भव्य एरियल ड्रोन शो का आयोजन हुआ था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगा ड्रोन शो
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ही ड्रोन शो का आयोजन होगा। प्रभु रामलला के भव्य मंदिर में विराजित होने के बाद दूसरी बार आयोजित होने जा रहे दीपोत्सव कार्यक्रम को भव्य और सुंदर बनाने के लिए पर्यटन विभाग कोई कसर नहीं छोड़ रहा। दीपोत्सव कार्यक्रम से पूर्व ड्रोन शो का रिहर्सल भी किया जाएगा, जिससे ड्रोन शो के सही क्रम को परखा जाएगा। राम की पैड़ी पर इस ड्रोन शो का आयोजन किया जाएगा।’
‘विश्व बंधुत्व का संदेश’
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, ‘अयोध्या दीपोत्सव केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता का विश्वस्तरीय प्रतीक बन चुका है। प्रभु श्रीराम की नगरी में दीपोत्सव का यह पर्व हमारे लिए गर्व का अवसर है, जहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। दीपों की यह श्रृंखला न केवल श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कराती है, बल्कि ‘विश्व बंधुत्व’ और ‘सबका साथ-सबका विश्वास’ का संदेश भी देती है।’
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा, ‘दीपोत्सव हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को प्रदर्शित करने का अवसर है। इस वर्ष अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव को पिछले वर्षों की तुलना में और भी भव्य बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा, विभाग का प्रयास है कि यह आयोजन न केवल देशवासियों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के पर्यटकों के लिए भी एक यादगार अनुभव बने।’
उल्लेखनीय है कि कल 02 सितम्बर को पर्यटन भवन में दीपोत्सव अयोध्या तथा देव दीपावली काशी को भव्य ढंग से आयोजित करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में की गई थी।
सपना बन कर रह गया आशियाना में आशियाना बनाने का सपना
~ by Shalie
लखनऊ। आशियाना क्षेत्र के शारदा नगर रश्मि खंड में एक प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ प्लॉट देने के नाम पर लाखों रुपए हड़पने का आरोप लगा है। पीड़ित ने जब अपने पैसे वापस मांगे तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई! शिकायत के बाद, पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मूल रूप से बिहार के महाराजगंज, सीवान जिले के रहने वाले अंकित कुमार सिंह से जुड़ा है। अंकित के मुताबिक, उन्होंने साल 2017 में एक ऑनलाइन विज्ञापन देखा था, जिसमें लखनऊ में आशियाना बनाने का सपना दिखाया गया था। विज्ञापन देखकर उन्होंने आशियाना के रश्मि खंड में स्थित एचके इन्फ्राविजन नामक कंपनी से संपर्क किया।
कंपनी में उनकी मुलाकात मालिक प्रमोद कुमार उपाध्याय और विनोद कुमार उपाध्याय से हुई। उनके भरोसे में आकर अंकित ने उनकी ‘कान्हा उपवन वैली’ परियोजना में 1000 वर्ग फुट का प्लॉट बुक कराया। बुकिंग के समय उन्होंने 5 लाख रुपए का एडवांस पेमेंट किया था। इसके बाद, उन्होंने किश्तों में और भी भुगतान किया, जिससे कुल रकम 7.29 लाख रुपए हो गई।
प्लॉट नहीं मिला, पैसे मांगने पर मिली धमकी
इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी, अंकित को कंपनी की ओर से प्लॉट नहीं दिया गया। जब भी उन्होंने प्लॉट के बारे में बात की, कंपनी के मालिक उन्हें टालते रहे। पीड़ित अंकित का आरोप है कि बीते अप्रैल महीने में जब वह लखनऊ वापस आए और कंपनी के ऑफिस पहुंचकर अपने पैसे वापस मांगे, तो प्रमोद और विनोद उपाध्याय ने उन्हें पैसे लौटाने से इंकार कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने ऑफिस में असलहा निकालकर अंकित को जान से मारने की धमकी भी दी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस घटना के बाद, अंकित कुमार सिंह ने हार कर आशियाना थाने में एचके इन्फ्राविजन कंपनी के मालिकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
एचके इन्फ्राविजन प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप
लखनऊ के रश्मि खंड में स्थित एचके इन्फ्राविजन प्राइवेट लिमिटेड एक रियल एस्टेट कंपनी है। यह कंपनी कथित तौर पर प्लॉट और अन्य रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित काम करती है। हाल ही में इस कंपनी पर कई ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप लगे हैं, जिसमें प्लॉट का पैसा लेकर भी उन्हें न तो प्लॉट दिया गया और न ही उनका पैसा वापस किया गया।
कंपनी के बारे में जानकारी
1. पंजीकृत पता: कंपनी का पंजीकृत पता 1/44, रश्मि खंड, शारदा नगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, 226002 है। 2. आरोप: कंपनी के मालिकों पर ग्राहकों से लाखों रुपए हड़पने और वापस मांगने पर धमकाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में लखनऊ के आशियाना थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। 3. संबधित मामले: मिली जानकारी के अनुसार, इस कंपनी पर सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि कई अन्य धोखाधड़ी के मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें मोहनलालगंज में जमीन का बैनामा करने के बाद कब्जा न देने का मामला भी शामिल है।
यह ध्यान देने योग्य है कि कंपनी के खिलाफ लगे आरोप अभी जांच के दायरे में हैं, लेकिन ये मामले रियल एस्टेट में निवेश करने से पहले सावधानी बरतने की आवश्यकता को उजागर करते हैं। किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले, उसकी वैधता और कंपनी की विश्वसनीयता की अच्छी तरह से जांच कर लेना बहुत महत्वपूर्ण है।
समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व से है अयोध्या और वाराणसी की पहचान
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
दीपोत्सव और देव दीपावली से यूपी की सांस्कृतिक धरोहर को मिलेगा नया आयाम
लखनऊ (शैली सक्सेना)। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने आज दीपोत्सव-2025 और देव दीपावली की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने इन आयोजनों को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए, ताकि ये पर्व न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बनें, बल्कि राज्य के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करें।
राज्य की ब्रांडिंग का एक बड़ा अवसर
बैठक के दौरान, मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव और देव दीपावली जैसे आयोजन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल पर नए आयाम देंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये आयोजन केवल पर्व नहीं, बल्कि राज्य की ब्रांडिंग का एक बड़ा अवसर हैं, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुनाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से प्रचार-प्रसार की व्यापक रणनीति बनाने को कहा, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक इन अद्वितीय आयोजनों का हिस्सा बन सकें।
अयोध्या और काशी में भव्यता की तैयारी
मंत्री ने निर्देश दिया कि गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी अयोध्या का दीपोत्सव और काशी की देव दीपावली का आयोजन खास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों की झलक इतनी अद्वितीय हो कि हर आगंतुक के मन पर एक अविस्मरणीय छाप छोड़ जाए। इस दौरान, अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) के माध्यम से तैयारियों का विवरण दिया। जयवीर सिंह ने कहा कि अयोध्या और वाराणसी की पहचान उनकी समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व से है। इन पर्वों के माध्यम से इस विरासत को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इन आयोजनों के दौरान आगंतुकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए और तैयारियों में किसी भी प्रकार की कमी न रहे।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
पर्यटन निदेशालय में हुई इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मुकेश मेश्राम, विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया और पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी ने मिलकर कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की और मंत्री के निर्देशों के अनुसार कार्य करने का संकल्प लिया।
राज्य की सांस्कृतिक छवि वैश्विक स्तर पर होगी स्थापित
इस बैठक से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश सरकार दीपोत्सव और देव दीपावली को केवल एक धार्मिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पर्यटन और आर्थिक संवर्धन के अवसर के रूप में देख रही है, जिसका लक्ष्य राज्य की सांस्कृतिक छवि को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।
मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने जन्मदिन पर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
‘शिक्षक स्वयं भी पेड़ लगाएं और छात्रों को भी प्रेरित करें’ : रुचि वीरा
~ भूपेंद्र निरंकारी
बिजनौर। मुरादाबाद की लोकसभा सांसद और बिजनौर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, कुंवरानी रुचि वीरा ने अपना जन्मदिन मंगलवार को राजा ज्वाला प्रसाद आर्य इंटर कॉलेज, बिजनौर में मनाया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि शिक्षकों से भी हर शुभ अवसर पर वृक्षारोपण करने और छात्रों को इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।
भव्य स्वागत और सम्मान
सुबह 11 बजे रुचि वीरा अपनी बेटी स्वाति वीरा (रेडियो 89.6 की सचिव) और अन्य समर्थकों के साथ विद्यालय पहुंचीं। विद्यालय के मुख्य द्वार पर ढोल-बाजे के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। विद्यालय में प्रवेश के बाद, उन्होंने सबसे पहले अपने दादा ससुर राजा ज्वाला प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद, राजा ज्वाला प्रसाद हॉल में उन्होंने केक काटकर अपना जन्मदिन मनाया, जहां उपस्थित सभी शिक्षकों और कर्मचारियों ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।
पौधारोपण और प्रेरणा
इस अवसर पर रुचि वीरा ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे न सिर्फ अपने जन्मदिन या अन्य शुभ अवसरों पर पौधे लगाएं, बल्कि छात्रों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने पर्यावरण की सुरक्षा को समय की आवश्यकता बताया और कहा कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने की प्रशंसा
विद्यालय के प्रधानाचार्य बिशनलाल ने रुचि वीरा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि रुचि वीरा बिजनौर ही नहीं, बल्कि समूचे पश्चिम उत्तर प्रदेश में एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में जानी जाती हैं। उप प्रधानाचार्य और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गय्यूर आसिफ ने भी उन्हें बधाई दी। आसिफ ने कहा कि अपने मात्र एक वर्ष के कार्यकाल में कुंवरानी जी ने मुरादाबाद के संपूर्ण लोकसभा क्षेत्र में जिस प्रकार से लोकप्रियता और आम जनता का प्रेम एवं स्नेह प्राप्त किया है, वह किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए गौरव और गरिमा की एक जीती-जागती मिसाल है।
सांसद ने जताया आभार
अपने संबोधन में सांसद रुचि वीरा ने कहा कि यद्यपि वह मुरादाबाद की सांसद हैं, लेकिन अपने क्षेत्र और लोगों से उनका आज भी वही स्नेह और लगाव है जो पहले था। उन्होंने अपने सम्मान में जन्मदिन कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रधानाचार्य और सभी स्टाफ का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम के दौरान, शिक्षकों ने सांसद की नातिन वृंदा महाजन को भी माला पहनाकर और केक खिलाकर अभिनंदन किया। वृंदा ने भी माइक पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अपनी नानी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, जिस पर उपस्थित सभी लोगों ने तालियां बजाकर उसके लिए दीर्घायु की कामना की।
इस अवसर पर विद्यालय के स्टाफ के लिए प्रीति भोज की भी व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में मनोज यादव, सुधांशु कुमार, बृजेश राजपूत, सुभाष राजपूत, चंद्रहास, सत्य प्रकाश गंगवार, करणवीर सिंह, प्रदीप कुमार, जितेंद्र कुमार, जयप्रकाश, अमन यादव, विनोद यादव, सुनील बाबू, तेजपाल सिंह, मोहम्मद अनस, रश्मि चौहान, अलका अग्रवाल, राजेंद्र कुमार, अनुराग भारद्वाज सहित सभी शिक्षकों ने अपनी संरक्षक को शुभकामनाएं दीं।
लखनऊ के हुसैनगंज और बासमंडी इलाके में की गई कार्रवाई
तंबाकू नियंत्रण टीम ने 14 दुकानों से वसूला जुर्माना ₹ साढ़े 4 हजार
लखनऊ। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लखनऊ में तंबाकू नियंत्रण टीम ने एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया। इस अभियान के तहत, हुसैनगंज चौराहा और बासमंडी इलाके में अचानक निरीक्षण किया गया, जिसमें कोटपा अधिनियम 2003 का उल्लंघन करते पाए जाने पर 14 दुकानों पर जुर्माना लगाया गया।
कार्रवाई का विवरण
यह कार्रवाई मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ और जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी, डॉ. निशांत निर्वाण के निर्देश पर की गई। इस टीम में डॉ. मयंक चौधरी (जिला सलाहकार) और विनोद सिंह यादव (सामाजिक कार्यकर्ता) शामिल थे। इनके साथ, संयुक्त पुलिस आयुक्त, कानून एवं व्यवस्था, लखनऊ के कार्यालय से एक प्रवर्तन दल भी मौजूद था, जिसमें एस.आई. रविंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल सतीश कुमार, आरक्षी नीतेश कुमार और राधा शामिल थे। इस संयुक्त टीम ने हुसैनगंज चौराहा से लेकर बासमंडी नगरीय क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, 14 दुकानें कोटपा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पाई गईं। इन दुकानों पर कुल 4400 रुपए का जुर्माना लगाया गया। किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई?
जुर्माने की यह कार्रवाई मुख्य रूप से कोटपा अधिनियम की दो धाराओं के तहत की गई:
धारा 4: सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध के उल्लंघन के लिए 12 दुकानों पर 4000 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
धारा 6बी: शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री के उल्लंघन के लिए 2 दुकानों पर 400 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
जागरूकता और शिक्षा का भी अभियान
जुर्माना लगाने के साथ-साथ, टीम ने लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले गंभीर रोगों के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने तंबाकू उन्मूलन केंद्र और कोटपा अधिनियम 2003 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी दी, ताकि लोग कानून का पालन करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। यह अभियान दर्शाता है कि प्रशासन तंबाकू नियंत्रण को लेकर गंभीर है और आने वाले समय में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
क्या है कोटपा अधिनियम 2003
‘सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का निषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003’, जिसे संक्षेप में कोटपा अधिनियम 2003 (COTPA – Cigarettes and Other Tobacco Products Act, 2003) भी कहा जाता है, भारत में तंबाकू के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और विशेष रूप से युवाओं को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से बचाना है। इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान और उनके उल्लंघन इस प्रकार हैं:
1. धारा 4: सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध * प्रावधान: यह धारा सार्वजनिक स्थानों जैसे होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, मॉल, सरकारी कार्यालय, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, और शैक्षणिक संस्थानों में धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाती है। इन स्थानों के मालिकों को “धूम्रपान निषेध क्षेत्र” का बोर्ड लगाना अनिवार्य है। * उल्लंघन: सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करना इस धारा का उल्लंघन है। इसका उल्लंघन करने पर ₹200 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 2. धारा 5: तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध * प्रावधान: यह धारा सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाती है। * उल्लंघन: तंबाकू उत्पादों का किसी भी माध्यम से विज्ञापन करना (जैसे टीवी, रेडियो, प्रिंट मीडिया या बैनर), या किसी कार्यक्रम को प्रायोजित करना इस धारा का उल्लंघन है। इसका उल्लंघन करने पर ₹1000 से लेकर ₹5000 तक का जुर्माना या 1 से 5 साल तक की कैद हो सकती है। 3. धारा 6: नाबालिगों को बिक्री और शैक्षणिक संस्थानों के पास बिक्री पर प्रतिबंध * प्रावधान: इस धारा के दो भाग हैं: * धारा 6 (क): 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाती है। * धारा 6 (ख): किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज (लगभग 91 मीटर) के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाती है। * उल्लंघन: * नाबालिग को तंबाकू उत्पाद बेचना या शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में ऐसी बिक्री करना इस धारा का उल्लंघन है। * दुकानों को यह बोर्ड प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है कि “तंबाकू उत्पादों की बिक्री 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को नहीं की जाती है”। इस बोर्ड का न लगाया जाना भी उल्लंघन माना जाता है। इस धारा का उल्लंघन करने पर ₹200 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 4. धारा 7: स्वास्थ्य चेतावनी का अनिवार्य प्रदर्शन * प्रावधान: यह धारा अनिवार्य करती है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के हर पैकेट पर निर्दिष्ट स्वास्थ्य चेतावनी (चित्रित चेतावनी सहित) स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए। * उल्लंघन: बिना स्वास्थ्य चेतावनी या गलत चेतावनी वाले पैकेट में तंबाकू उत्पादों का उत्पादन, आपूर्ति या बिक्री करना इस धारा का उल्लंघन है। कोटपा अधिनियम का उद्देश्य सिर्फ जुर्माना लगाना नहीं है, बल्कि लोगों को तंबाकू के सेवन से दूर रखकर एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है।
लखनऊ। विश्व दलित परिषद और उसके सहयोगी संगठनों के प्रयासों से मुरादाबाद मंडल में अनुसूचित जाति (SC) के लोगों की कृषि योग्य भूमि को अवैध रूप से खरीदने का मामला सामने आया है। इन संगठनों ने इस गंभीर मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है, जिससे कई गांवों में हुई अवैध बिक्री पर रोक लगाने और दोषियों पर कार्रवाई करने की उम्मीद जगी है।
क्या है पूरा मामला?
मुरादाबाद मंडल में कुछ लोग अनुसूचित जाति के सीधे-साधे और गरीब लोगों को बहला-फुसलाकर या धमकाकर उनकी जमीन कम कीमत पर खरीद रहे हैं। यह खरीद-फरोख्त बिना कलेक्टर, मुरादाबाद की अनुमति के की जा रही है, जो कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 104 और 105 का सीधा उल्लंघन है। नियमानुसार, अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन को गैर-अनुसूचित जाति के लोग कलेक्टर की अनुमति के बिना नहीं खरीद सकते। यदि ऐसा होता है, तो कलेक्टर के पास यह अधिकार है कि वह बेची गई जमीन को राज्य सरकार के अधीन कर दे।
कानूनी कार्रवाई और सफलता
विश्व दलित परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, भूपेंद्र पाल सिंह चमार साहब, और उनके सहयोगी संगठनों जैसे अखिल भारतीय चमार महार जाटव महासभा और दि चमार रेजीमेंट की ओर से ओंकार सिंह एडवोकेट ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने ग्राम सिरसा इनायतपुर, समाथल, रतनपुर कला, शाहपुर तिगरी, संभल तहसील के मखदुमपुर, फुलसिंगा और अन्य गांवों में हुई अवैध बिक्री के खिलाफ शिकायत दर्ज की।
जांच में ये आरोप सही पाए गए। इसी के परिणामस्वरूप, ग्राम सिरसा इनायतपुर की गाटा संख्या 1209 पर हुई अवैध बिक्री के खिलाफ खरीदार जाहिद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा अपर उप जिलाधिकारी, मुरादाबाद के न्यायालय में चल रहा है, जिसका उद्देश्य इस जमीन को सरकार के अधीन करना है। अन्य गांवों में हुई ऐसी ही अवैध बिक्री पर भी कार्रवाई जारी है।
संगठनों की बड़ी कामयाबी
भारतीय लोकतंत्र बचाओ मोर्चा और विश्व दलित परिषद ने इस कानूनी लड़ाई को अपनी एक बड़ी कामयाबी माना है। वर्ल्ड दलित काउंसिल यूथ सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हर्षवर्धन सिंह के अनुसार, यदि इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगती है, तो दि चमार रेजीमेंट और अखिल भारतीय चमार महार जाटव महासभा अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में एक बड़ा आंदोलन करेंगे। यह कार्रवाई न केवल अनुसूचित जाति के लोगों को भूमिहीन होने से बचाएगी, बल्कि कानून के उल्लंघन करने वालों को भी एक कड़ा संदेश देगी।
12.5 फीट ऊंची ब्रास की भव्य मूर्ति होगी स्थापित – मंत्री जयवीर सिंह
लखनऊ में मराठी समाज के गणेश पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए जयवीर सिंह
चौक चौराहे पर लगेगी छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारोही मूर्ति
लखनऊ, (01 सितंबर 2025)। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह सोमवार शाम राजधानी लखनऊ के चौक स्थित राममनोहर लोहिया चौक पर मराठी समाज द्वारा आयोजित श्री गणेश पूजा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। मंत्री ने प्रथम पूज्य भगवान श्री गणपति जी की विशेष आरती कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने चौक चौराहे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की 12.5 फीट ऊंची अश्वारोही भव्य मूर्ति स्थापित करने की घोषणा की। यह मूर्ति ब्रास की होगी, जिसका निर्माण जयपुर में किया जा रहा है।
पूजन के बाद कार्यक्रम में गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुति हुई, जिसमें मराठी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। मंत्री जयवीर सिंह ने सभी को गणेश उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और हमारी संस्कृति व परंपरा को सशक्त बनाते हैं।
मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘मराठी समाज द्वारा लखनऊ में भव्य रूप से आयोजित श्री गणेश उत्सव में सम्मिलित होकर मुझे अत्यंत आनंद और गर्व की अनुभूति हुई। प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सद्भावना बनी रहे। मराठी समाज की सांस्कृतिक परंपराएं और सामाजिक एकता अनुकरणीय हैं। यह उत्सव समाज को जोड़ने, हमारी संस्कृति को सशक्त बनाने और भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का कार्य करता है।’
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से कार्यक्रम का आनंद लिया और पूजा-अर्चना की। मंत्री ने विशेष रूप से शिवभूषण सिंह प्रदेश मंत्री, उमेश कुमार पाटिल (संयोजक), विकास पाटिल (अध्यक्ष) गजानन माने, सचिन माली, किसन डिसले, विष्णु चव्हाण. तथा स्थानीय मराठी मानुष एवं भक्त गण के साथ मीडिया के साथियों का आभार प्रकट किया।
राजधानी में उत्तर प्रदेश बेड एण्ड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति 2025
बड़ी संख्या में आवेदकों ने दिखाई रुचि
लखनऊ में पर्यटकों के ठहरने को अब होटल नहीं, होमस्टे होंगे नए आकर्षण के केन्द्र – जयवीर सिंह
लखनऊ (01 सितम्बर, 2025)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में पर्यटकों को किफायती और बेहतर ठहरने की सुविधा देने के लिए सकारात्मक पहल की है। ‘उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होमस्टे नीति 2025’ के तहत लखनऊ वासियों ने बड़े पैमाने पर अपने घरों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत कराने में रुचि दिखाई है। पर्यटन विभाग के इस प्रयास से धार्मिक एवं अन्य पर्यटन स्थलों पर आने वाले आगंतुकों को सस्ती दरों पर होटल का विकल्प उपलब्ध होगा।
यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया नई नीति से प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय लोगों को भी आय के नए अवसर मिलेंगे। पर्यटकों को होटल के मुकाबले सस्ती सुविधाओं के साथ पारिवारिक माहौल भी प्राप्त होगा। उन्होंने बताया, कि प्रमुख धार्मिक या पर्यटन स्थलों पर होटल रूम खाली नहीं मिलते, जिससे पर्यटकों को रुकने में परेशानी होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए यह नई नीति तैयार की गई है।
‘उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होमस्टे नीति 2025’
पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होमस्टे नीति 2025’ के तहत राजधानी लखनऊ में करीब 800 होमस्टे तैयार किये जाने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में होमस्टे बनने से एक ओर पर्यटकों के ठहरने की समस्या का समाधान होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि इस नीति में वित्तीय प्रोत्साहन और अनुदान की भी व्यवस्था की गई है, ताकि राज्य के निवासियों को प्रोत्साहित किया जा सके कि वे अपने घरों से आमदनी प्राप्त करने का प्रयास करें। उन्होंने बताया, कि बीएंडबी एवं होमस्टे नीति 2025 के तहत अब पर्यटन स्थलों के आसपास कोई भी व्यक्ति अपने 01 से 06 कमरों तक के आवासीय भवन (जिसमें वह स्वयं निवास करता हो) को होमस्टे के रूप में रजिस्टर करा सकता है। इसके अंतर्गत अधिकतम 12 बेड की अनुमति होगी। सम्पत्तिधारक द्वारा उसके आवासीय भवन के अधिकतम दो तिहाई कक्षों को ही किराये पर दिया जा सकेगा। इच्छुक आवेदक इस योजना में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल up-tourismportal.in पर आवेदन कर सकते हैं। यह योजना दो श्रेणियों गोल्ड और सिल्वर में वर्गीकृत की गई है।’
राज्य में पहले ऐसी कोई नीति न होने के कारण होमस्टे संचालकों को केंद्र सरकार के निधि प्लस पोर्टल पर पंजीकरण कराना पड़ता था। अब राज्य सरकार की नई नीति के तहत वे स्थानीय निकायों की अनापत्ति लेकर सरल प्रक्रिया से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। ज्ञात हो कि, अनुमति की प्रक्रिया जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अगुवाई वाली कमेटी के माध्यम से पूरी की जाएगी।
हरिद्वार में चित्रांश बंधुओं को मिला ‘भगवान श्री चित्रगुप्त घाट’
हरिद्वार। समस्त चित्रांश बंधुओं के लिए यह एक बेहद गौरव और खुशी का क्षण है। सरवानंद घाट के पास अब भगवान श्री चित्रगुप्त जी के नाम पर एक अलग घाट होगा।
दरअसल 24 अगस्त 2025 को हरिद्वार में हुई एक बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी से आए कायस्थ बंधुओं ने हिस्सा लिया।
इस निर्णय से कायस्थ समाज को अब हरिद्वार में अपनी एक विशेष पहचान और स्थान मिल गया है। यह घाट न केवल पूजा-अर्चना के लिए एक पवित्र स्थल बनेगा, बल्कि यहां आने वाले चित्रांश परिवार के सदस्यों के लिए विश्राम करने की भी सुविधा होगी।
भव्य कार्यक्रम की घोषणा
इस शुभ अवसर को यादगार बनाने के लिए, 4 और 5 अक्टूबर को द्वितीय भगवान श्री चित्रगुप्त जी की पूजा, कथा और एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन इसी नए ‘भगवान श्री चित्रगुप्त घाट’ पर किया जाएगा। आयोजकों ने सभी चित्रांश परिवारों से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में शामिल होकर इसे सफल बनाएं।
यह जानकारी देते हुए मुरारी प्रसाद श्रीवास्तव ने सभी कायस्थ बंधुओं से अनुरोध किया है कि वे इस खुशखबरी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि हर चित्रांश परिवार को इस नए घाट के बारे में पता चले और वे इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिसका लाभ सभी को उठाना चाहिए। संपर्क जानकारी: मुरारी प्रसाद श्रीवास्तव– मोबाइल नंबर: 8788489569
बांदा विकास प्राधिकरण में ठेका दिलाने का दिया झांसा
धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
ठेका दिलाने के नाम पर दोस्त ने ठगे ₹ 75 लाख
लखनऊ। आशियाना थाना क्षेत्र में रहने वाले एक शख्स ने अपने दोस्त पर बांदा विकास प्राधिकरण में ठेका दिलाने के नाम पर 75 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया है।
आलमबाग थाना क्षेत्र के औरंगाबाद खालसा निवासी आसिफ खान पुत्र वासिद खान ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी दोस्ती बांदा निवासी अब्दुल रहीम अहमद से थी। अब्दुल रहीम ने आसिफ को बांदा विकास प्राधिकरण में ठेका दिलाने का झांसा दिया और साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा। आसिफ के अनुसार, पिछले साल दिसंबर महीने में अब्दुल रहीम ने उनसे अलग-अलग किस्तों में 75 लाख रुपये लिए। इसमें से 8 लाख रुपये के.जी.एन. प्राइवेट लिमिटेड के नाम से अपने बैंक अकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए, जबकि 42 लाख रुपये नकद लिए गए।
धोखाधड़ी का खुलासा:
जब ठेका नहीं मिला तो आसिफ ने अपने दोस्त अब्दुल रहीम से पैसों के बारे में पूछताछ की। आरोप है कि पैसों की बात सुनते ही अब्दुल रहीम गाली-गलौज करने लगा और पैसे वापस देने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही, उसने पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित आसिफ खान ने अपनी शिकायत में बताया कि ठगी का एहसास होने के बाद उन्होंने आशियाना थाने में अब्दुल रहीम अहमद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
आँखों की समस्या से ग्रस्त बच्चों के लिए वरदान साबित होगा अभियान
बच्चों की आंखों के लिए रेड क्रॉस का सराहनीय कदम
फ़तेहपुर। बच्चों की आंखों के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, फतेहपुर और जगदम्बा आई क्लीनिक ने मिलकर एक स्कूल नेत्र परीक्षण अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का शुभारंभ आज, 1 सितंबर 2025 को प्राथमिक विद्यालय पनी द्वितीय से किया गया।
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी सदस्य और फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने इस पहल का नेतृत्व किया। अभियान के पहले दिन, जगदम्बा आई क्लीनिक के नेत्र विशेषज्ञ विवेक कुमार अग्निहोत्री ने 33 बच्चों की आँखों की जांच की।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान उन बच्चों के लिए एक वरदान साबित होगा, जिन्हें आँखों की समस्या है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन बच्चों को परीक्षण के बाद चश्मे की जरूरत होगी और जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें जगदम्बा आई क्लीनिक द्वारा निःशुल्क चश्मा प्रदान किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर, प्रमुख सहयोगी अंजली, इंचार्ज प्रधानाध्यापक रोहित सिंह और विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहे। इस तरह की पहल से न केवल बच्चों की आँखों की समस्याओं का समय पर पता चलेगा, बल्कि उन्हें सही इलाज और देखभाल भी मिल सकेगी।
बिजनौर। जिले में किसानों को गन्ने की फसल में फैल रहे लाल सड़न रोग (Red Rot) के प्रकोप से बचाने के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को इस बीमारी से बचाव के उपाय सुझाए हैं।
क्या है लाल सड़न रोग?
लाल सड़न रोग गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुँचाता है। इस रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियों पर लाल धब्बे दिखाई देने लगते हैं और धीरे-धीरे पत्तियाँ पीली होकर सूख जाती हैं। अगर प्रभावित गन्ने को बीच से काटा जाए तो अंदर का हिस्सा लाल दिखाई देता है और उसमें से अल्कोहल जैसी तेज गंध आती है।
रोग पर नियंत्रण कैसे करें?
कृषि विभाग ने किसानों को इस रोग से निपटने के लिए निम्नलिखित सलाह दी है: 1. बीमार पौधों को हटाएँ: सबसे पहले, रोग से ग्रसित पौधों को पहचानकर उन्हें उखाड़ लें और उन्हें खेत से दूर किसी गहरे गड्ढे में दबा दें। 2. मिट्टी का उपचार करें: जिस जगह से पौधा उखाड़ा गया है, वहाँ की मिट्टी में ब्लीचिंग पाउडर छिड़कें ताकि संक्रमण आगे न फैले। 3. रासायनिक छिड़काव: किसान एजोक्सीस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाजोल 18.3% SC का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा, थायोफिनेट मिथाइल 70% की 500 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से भी इस्तेमाल की जा सकती है।
कृषि विभाग से कैसे संपर्क करें?
अगर किसानों को अपनी फसल में किसी भी तरह की कीट या रोग से जुड़ी समस्या है, तो वे कृषि विभाग से सीधे मदद ले सकते हैं। इसके लिए, किसान अपना पंजीकरण नंबर या नाम, गाँव, विकास खंड और जिले का नाम लिखकर समस्या की फोटो के साथ 9452247111 और 9452257111 नंबरों पर SMS या WhatsApp कर सकते हैं। विभाग 48 घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान देगा।
यह भी रखें ध्यान….
1. गन्ने की नई किस्मों पर दें ध्यान: गन्ना अनुसंधान संस्थानों ने रोग-प्रतिरोधी नई किस्में विकसित की हैं। किसानों को इन किस्मों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। 2. अपनाएँ फसल चक्र : खेत में बार-बार गन्ना लगाने से बचें। बीच-बीच में दूसरी फसलें लगाने से मिट्टी की सेहत अच्छी रहती है और रोगों का प्रकोप कम होता है।
बारां, राजस्थान। शाहाबाद तहसील का ढिकवानी गाँव इन दिनों एक गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बनी पानी की टंकी शोपीस बनकर रह गई है और ‘हर घर नल से जल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएँ प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। ग्रामीण, जिनमें महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, आज भी दूर-दराज से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि सरकार और अधिकारियों की ओर से केवल खोखले आश्वासन और निष्क्रियता ही मिल रही है।
करोड़ों की योजना, परिणाम शून्य
ग्राम ढिकवानी में निर्मित पानी की टंकी का उद्घाटन 21 अप्रैल 2022 को किया गया था। शुरुआत में कुछ दिनों के लिए पानी की आपूर्ति हुई, लेकिन फिर टंकी बंद हो गई। गाँव के निवासी आशीष मेहता बताते हैं कि ग्रामीणों को कभी भी नियमित रूप से पानी नहीं मिला। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 12 फरवरी 2024 को बिजली कनेक्शन काट दिया गया और जल स्वच्छता समिति पर ₹1,85,000 का भारी-भरकम बिजली बिल थोप दिया गया, जबकि ग्रामीणों को कभी भी योजना का लाभ नहीं मिला।
यह केवल पैसे की बर्बादी का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे सरकारी परियोजनाओं को भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण जनता तक पहुँचने से रोका जा रहा है। प्रशासनिक लापरवाही और ‘सूचना का अधिकार’ का मखौल ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर हर संभव दरवाजा खटखटाया है। जिला कलेक्टर, एसडीओ, तहसीलदार, PHED विभाग और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक को विस्तृत शिकायतें भेजी गई हैं, लेकिन किसी भी स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय विधायक के निर्देशों के बावजूद ठेकेदार और विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
आशीष मेहता ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के तहत जानकारी माँगी, लेकिन 35 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। यह सूचना के अधिकार का सीधा उल्लंघन है, जो अधिकारियों की मनमानी और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।
सड़कों पर जनता, अधिकारी मौन
यह समस्या सिर्फ ढिकवानी तक सीमित नहीं है। शाहाबाद तहसील के कई अन्य गाँवों में भी ऐसी ही स्थिति है। ग्रामीण पिछले 3-4 महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। भीषण गर्मी में, जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, महिलाएँ मीलों चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के जीवन को कठिन बना रही है, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार) का भी सीधा उल्लंघन है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
1. ढिकवानी पानी की टंकी और अन्य क्षेत्रीय योजनाओं की उच्च स्तरीय जाँच हो। 2. दोषी विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई की जाए। 3. ‘हर घर नल से जल योजना’ को तुरंत लागू कर ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराया जाए। 4. RTI और शिकायतों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए। 5. जल स्वच्छता समिति पर थोपे गए ₹1,85,000 के बिजली बिल की निष्पक्ष जाँच हो।
यह मामला केवल स्थानीय प्रशासनिक विफलता का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच पा रहा है। यह जरूरी है कि सरकार इस मामले का संज्ञान ले और ग्रामीणों की समस्या का समाधान करे, ताकि ढिकवानी और आस-पास के गाँवों को पीने के पानी के लिए इस तरह संघर्ष न करना पड़े।
‘हर घर नल से जल’
‘हर घर नल से जल’ योजना भारत सरकार द्वारा चलाई गई एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे जल जीवन मिशन (JJM) के तहत शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य लक्ष्य 2024 तक भारत के हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
मुख्य उद्देश्य और विशेषताएँ
1. हर घर तक नल का कनेक्शन: योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के सभी ग्रामीण घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुँचाना है। 2. पर्याप्त और नियमित जल आपूर्ति: यह सुनिश्चित करना कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर पानी मिले। 3. स्वच्छ और सुरक्षित पानी: आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता उच्च स्तर की हो ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ न हों। 4. सामुदायिक भागीदारी: पानी समितियों (ग्राम जल तथा स्वच्छता समिति) के माध्यम से योजना के प्रबंधन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों को शामिल करना। 5. जल संरक्षण को बढ़ावा: वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) और पानी के कुशल उपयोग जैसे तरीकों को प्रोत्साहित करना।
कुल मिलाकर इस योजना का उद्देश्य सिर्फ पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और महिलाओं तथा बच्चों को पानी लाने के बोझ से मुक्त करना भी है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर मुजफ्फरनगर में हुई महत्वपूर्ण बैठक
फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कराएंगे कड़ी कार्रवाई
अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है अनुसूचित जाति समाज
लखनऊ। अनुसूचित जाति समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। यह संदेश पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर में संपन्न हुई बैठक में निकल कर आया है।
दरअसल शाहवली/वार्ड नंबर-2 मुजफ्फरनगर में, 31 अगस्त, 2025 को नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के सभासद पति सुंदर सिंह के आवास सह कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ।
इस बैठक में अनुसूचित जाति समाज के जागरूक और बुद्धिजीवी लोग शामिल थे, जिन्हें विश्व दलित परिषद/ वर्ल्ड दलित काउंसिल के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, भूपेंद्र पाल सिंह चमार साहब और विश्व दलित काउंसिल यूथ सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह ने संबोधित किया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य फर्जी और कूटरचित अनुसूचित जाति प्रमाण पत्रों के मुद्दे पर चर्चा करना था। वक्ताओं ने समाज के लोगों को इन प्रमाण पत्रों को रद्द कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के तरीकों के बारे में समझाया।
भूपेंद्र पाल सिंह चमार साहब अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व दलित परिषद/ वर्ल्ड दलित काउंसिल
बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
बैठक में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के तीन मुख्य मामलों पर चर्चा की गई: 1. 485 फर्जी प्रमाण पत्र: ये प्रमाण पत्र हिंदू जुलाहा समाज के भुईयार और कोरी के नाम पर बनाए गए हैं। 2. 1408 फर्जी प्रमाण पत्र: ये प्रमाण पत्र पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की गडरिया/पाल/बघेल जातियों के लोगों को “धनगर” के नाम से जारी किए गए हैं। 3. 3 फर्जी प्रमाण पत्र: ये प्रमाण पत्र मुस्लिम महिलाओं को जारी किए गए हैं।
कार्रवाई की मांग और आगे की योजना
कुल मिलाकर, लगभग 1493 फर्जी प्रमाण पत्रों के धारकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। बैठक में शामिल वक्ताओं और समाज के लोगों ने जिला स्तरीय कास्ट स्क्रूटनी कमेटी, मुजफ्फरनगर से इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को तुरंत निरस्त कराने की मांग की। यह कमेटी जिलाधिकारी महोदय, मुजफ्फरनगर की अध्यक्षता में गठित है। इसके साथ ही, उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने और जारी करने में शामिल सभी व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।
इनमें शामिल हैं:
1. सर्टिफिकेट जारी करने वाले तत्कालीन तहसीलदार,
2. लेखपाल, कानूनगो, नाज़िर और क्लर्क (नाम और पता अज्ञात)।
3. लोकवाणी केंद्रों के संचालक (नाम और पता अज्ञात)।
4. फर्जी तस्दीक करने वाले और झूठे तथ्य व साक्ष्य देने वाले अन्य सभी दोषी कर्मचारी और अधिकारी।
5. झूठे हलफनामे (affidavits) देने वाले व्यक्ति।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इन सभी दोषियों के खिलाफ समुचित आपराधिक कार्रवाई (क्रिमिनल प्रोसीडिंग)/एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
भूपेंद्र पाल सिंह चमार साहब ने समाज के लोगों को इस लड़ाई में एकजुट रहने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए प्रेरित किया। हर्षवर्धन सिंह ने युवाओं से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया ताकि समाज के वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार मिल सके। यह बैठक इस बात पर जोर देती है कि अनुसूचित जाति समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
ऊपर से नीचे तक सभी सुनियोजित भ्रष्टाचार में लिप्त !
“आखिर कौन है इसका ‘सुपर चीफ” ?
LDA में अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों का सिंडिकेट !
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माण का खेल एक बड़ा और संगठित सिंडिकेट चला रहा है, जिसमें लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के विभिन्न अधिकारी शामिल हैं? यह कोई साधारण मिलीभगत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है, जिसमें प्रवर्तन अधिकारी, अवर अभियंता, सहायक अभियंता, जोनल अधिकारी और यहां तक कि विहित प्राधिकारी भी लिप्त हैं! ‘अवध की आवाज़’ समाचार पत्र की एक विस्तृत जांच में यह सामने आया है कि ये अधिकारी लोकहित और जनहित की परवाह किए बिना अपनी दूषित कार्यशैली से करोड़ों के राजस्व का नुकसान कर रहे हैं।
नोटिस से लेकर सीलिंग तक, हर कदम पर ‘डीलिंग’
खबर के अनुसार, LDA के प्रवर्तन अधिकारी अवैध निर्माणकर्ताओं के साथ मिलकर काम करते हैं। वे न केवल नोटिस जारी करने में ढिलाई बरतते हैं, बल्कि सीलिंग के मामलों में भी ‘डीलिंग’ करते हैं। इनकी भ्रामक कार्यशैली का नतीजा यह है कि अवैध निर्माण पूर्ण हो जाते हैं और उनमें लोग रहने भी लगते हैं। विभाग को मिलने वाला करोड़ों का राजस्व सुविधा शुल्क की भेंट चढ़ जाता है। जब समाचार पत्रों में इन अवैध निर्माणों की खबरें छपती हैं या शिकायतकर्ता शिकायत करते हैं, तो कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। यह सबसे बड़ा विरोधाभास है कि ये सभी मामले LDA के मुखिया, यानी उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और अन्य उच्चाधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती! सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों इस ‘संयुक्त खेल’ में शामिल अधिकारियों, के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की जाती?
प्रवर्तन ज़ोन-3 का एक चौंकाने वाला मामला
इस सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए, ‘अवध की आवाज़’ ने एक-एक मामले को उजागर करने का संकल्प लिया है। इसी कड़ी में, प्रवर्तन ज़ोन-3 का एक मामला सामने आया है। यहाँ सभी नियमों और मानकों को ताक पर रखकर लगभग 400 अवैध रो हाउस का निर्माण किया गया। इन रो हाउस से जुड़ी शिकायतें भी थीं, लेकिन सिंडिकेट ने उन्हें संरक्षण दिया और निर्माण को पूरा करवाकर उनमें लोगों को रहने भी दिया।
झूठी और भ्रामक रिपोर्ट देकर शिकायत का निपटारा
तत्कालीन अवर अभियंता संजय शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने झूठी और भ्रामक रिपोर्ट देकर शिकायत का निपटारा कर दिया! उन्होंने मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र और राजीव कुमार जैसे उच्च अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेशों का भी उल्लंघन किया। यह स्पष्ट रूप से एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था, जिसमें तत्कालीन सभी प्रवर्तन अधिकारियों ने जनता के साथ धोखाधड़ी की। भविष्य में इन अवैध निर्माणों के कारण जनता को आर्थिक, मानसिक या जान-माल की हानि हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेगा।
अधिकारियों की चुप्पी: कौन है इस सिंडिकेट का ‘सुपर चीफ’?
खबर में इस बात पर जोर दिया गया है कि तत्कालीन और वर्तमान दोनों ही उपाध्यक्षों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है! …न तो दोषियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही की गई है और न ही ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए हैं? यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इस सिंडिकेट को आखिर कौन संचालित कर रहा है? कौन है वह ‘सुपर चीफ’, जिसके इशारे पर सारे मामले बंद फाइलों में दब जाते हैं?
इस खबर ने लखनऊ के अवैध निर्माणों और अधिकारियों की मिलीभगत की एक परत खोली है। ‘अवध की आवाज़’ ने घोषणा की है कि अगले समाचार में उन अधिकारियों के नाम और खुलासे किए जाएंगे, जो इन 400 अवैध रो हाउस से जुड़े हैं। जारी रहेगी यह खबर ..…
राधा अष्टमी पर ब्रज में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 07 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए राधारानी के दर्शन
होटल, दुकानदारों और हस्तशिल्पियों को मिला बड़ा सहारा
50 से अधिक पार्किंग और लाइव स्ट्रीमिंग से आसान हुए दर्शन
पर्यटन का उत्सव, आस्था संग रोज़गार और समृद्धि: जयवीर सिंह
राधे-राधे की गूंज से सराबोर हुआ पूरा ब्रज, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों और स्वागत द्वारों ने बढ़ाई भव्यता
मथुरा, 31 अगस्त। राधे-राधे की गूंज, नगाड़ों की थाप, फूलों की वर्षा और भक्ति की तरंगों से सराबोर गलियां… रविवार को राधा अष्टमी पर पूरा ब्रजभूमि आस्था के रंग में रंगा दिखा। रावल, बरसाना और वृंदावन में भक्तों का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि हर ओर भक्ति और उल्लास का दृश्य नजर आया। लगभग 07 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने राधारानी के दर्शन कर दिव्यता का अनुभव किया। सुबह से ही रावल स्थित जन्मस्थली पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। यहां विशेष पूजा-अर्चना और भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दराज से आए भक्तों ने भक्ति रस का आनंद लिया। बरसाना का राधारानी मंदिर आयोजन का केंद्र रहा, जहां बूढ़ी लीला महोत्सव की शुरुआत हुई। वहीं वृंदावन के बांके बिहारी और राधा रमण मंदिरों में भव्य झांकियां और संध्याएं हुईं, जिनमें हजारों श्रद्धालु डूबते-उतराते दिखे।
बरसाना इस बार भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सबसे ज्यादा सराबोर रहा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने छह स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगवाईं, जिनसे लाखों भक्तों ने लाइव दर्शन किए। लोक कलाकारों की छह टीमों ने बीन, नगाड़ा, ढोल और तबले की धुनों से ऐसा वातावरण रचा कि पूरा बरसाना राधे-राधे के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए गोवर्धन-बरसाना और बरसाना-छाता मार्ग पर बने भव्य स्वागत द्वार आकर्षण का केंद्र बने। गलियों और मंदिर प्रांगण को फूलों और रोशनी से सजाया गया, जिससे ब्रज की सांस्कृतिक छवि और निखरकर सामने आई।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिली नई रौनक
त्योहार ने आस्था और पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी। होटल, गेस्ट हाउस, रेस्त्रां, परिवहन सेवाओं, दुकानदारों और हस्तशिल्प विक्रेताओं को जबर्दस्त लाभ हुआ। भीड़ ने हजारों लोगों के लिए अस्थायी रोजगार पैदा किया। दुकानें, प्रसाद विक्रेता और हस्तशिल्प की छोटी-छोटी दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसा माहौल केवल ब्रज में ही देखने को मिलता है, जहां भक्ति और संस्कृति साथ-साथ चलती है।
सरकार का संकल्प: भक्ति संग सुविधा
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “राधा अष्टमी केवल आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की समृद्धि और रोजगार का माध्यम भी है। सरकार और विभाग का संकल्प है कि ब्रज आने वाले हर श्रद्धालु को सुविधा और आत्मीयता मिले।” प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि जब देश-विदेश से आए श्रद्धालु यहां की संस्कृति और बेहतर व्यवस्थाओं का अनुभव लेकर लौटते हैं, तो यह ब्रज पर्यटन की पहचान को और सशक्त करता है।
व्यापक व्यवस्थाओं की सराहना
सहायक पर्यटक अधिकारी हेमंत कुमार शर्मा ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से स्वच्छता, पेयजल और पार्किंग की व्यवस्थाओं की सराहना की। बरसाना में कई पार्किंग स्थलों का निर्माण किया गया। अतिरिक्त सफाईकर्मी तैनात किए गए और अस्थायी शौचालय लगाए गए। भीड़ में किसी को परेशानी न हो, इसके लिए दिशा-निर्देश केंद्र बनाए गए। मंदिरों में लाइव स्ट्रीमिंग से हजारों श्रद्धालुओं ने बिना भीड़ के शांतिपूर्वक दर्शन किए।
भक्ति, पर्यटन और समृद्धि का संगम
राधा अष्टमी पर ब्रजभूमि का हर कोना भक्ति में डूबा दिखा। राधे-राधे की गूंज से गलियां जीवंत हो उठीं। भक्तों की भीड़, सजावट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और व्यवस्थाओं ने मिलकर इस पर्व को आस्था, पर्यटन और समृद्धि का ऐसा उत्सव बना दिया, जिसने हर किसी के दिल पर अमिट छाप छोड़ी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने ई-रिक्शा में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। आयोग ने सभी 75 जिलों में ई-रिक्शा चालकों के लिए एक नया निर्देश जारी किया है।
डॉ. बबिता सिंह चौहान, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग
प्रमुख निर्देश
चालक का नाम और मोबाइल नंबर: अब सभी ई-रिक्शा पर चालक का नाम और मोबाइल नंबर साफ-साफ लिखा होना अनिवार्य होगा। यह कदम महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
महिला हेल्पलाइन्स: महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने 1090 और 181 जैसी महिला हेल्पलाइन्स की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा करने का आश्वासन दिया है, ताकि पीड़ित महिलाओं को तुरंत मदद मिल सके।
महिला डेस्क को मज़बूती: आयोग ने सभी थानों में महिला डेस्क को और भी मजबूत करने का निर्देश दिया है, ताकि महिलाएं बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और उन्हें त्वरित न्याय मिल सके।
महिला सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम
यह फैसला बाराबंकी में अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में लिया गया। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश ट्रैफिक पुलिस ने ऑटो और ई-रिक्शा पर ड्राइवर और मालिक की जानकारी लिखने का अभियान चलाया था, लेकिन इसमें ढिलाई बरती गई थी। महिला आयोग के इस नए निर्देश के बाद उम्मीद है कि इस पर सख्ती से अमल होगा। यह कदम महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे घटनाओं में कमी आने की संभावना है।
कार में मिला इंस्पेक्टर का शव, शरीर पर चोट के निशान
कानपुर। सेंट्रल स्टेशन के बाहर पार्किंग में एक लग्जरी कार में सीआरपीएफ इंस्पेक्टर का शव मिला है, जिसके शरीर पर चोट के निशान हैं. जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.
घटना का विवरण
मृतक की पहचान: मृतक की पहचान उत्तराखंड निवासी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर निर्मल के रूप में हुई है.
शव की स्थिति: शव कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के कैंट साइड पार्किंग में मिली एक लग्जरी कार में मिला. उनके गले और शरीर के अन्य हिस्सों पर खरोंच और चोट के निशान मिले हैं.
पत्नी का बयान: निर्मल की पत्नी ने बताया कि उनके पति को शराब की लत थी, जिस वजह से परिवार में अक्सर विवाद होता रहता था. बीती रात भी इसी बात पर पति-पत्नी में झगड़ा हुआ था.
जांच: जीआरपी और फोरेंसिक यूनिट ने मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए हैं. जीआरपी ने कहा है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी.
अनसुलझे सवाल
घटना से जुड़े कुछ सवाल अभी भी अनसुलझे हैं, जिन पर जांच चल रही है:
1. कानपुर शताब्दी सुबह 6 बजे रवाना होती है, लेकिन कार सुबह 7 बजे सेंट्रल की पार्किंग में क्यों खड़ी थी?
2. निर्मल ससुराल से कुछ घंटे पहले निकले थे, तो रास्ते में क्या हुआ, जिसके बाद उनका शव मिला?
3. कार में उनकी सीट के पास शराब का क्वार्टर, नमकीन और गिलास क्यों पड़ा था?
4. उनकी पत्नी को शाम 5 बजे सूचना दी गई थी, लेकिन वह डेढ़ घंटे बाद जीआरपी थाने क्यों पहुंची?
5. पत्नी ने बताया कि उनके पति कार नहीं चला पाते थे, तो ड्राइवर कार को पार्किंग में क्यों छोड़कर चला गया?
6. जिस कार में शव मिला, उसका पता साकेत नगर का है, जबकि मृतक का स्थायी पता दिल्ली का है.
इस मामले की जांच जारी है और पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि सच्चाई का पता चल सके.
मेक माई ट्रिप ऐप से बुक किया था बाराबिरवा में होटल
होटल में भतीजी और उसकी सहेली से छेड़छाड़
लखनऊ, (30 अगस्त)। कृष्णा नगर थाना क्षेत्र में एक निजी होटल के मैनेजर और दो अन्य के खिलाफ छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पांचवीं मंजिल का रेस्टोरेंट
मिर्ज़ापुर के रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि उन्होंने मेक माई ट्रिप ऐप के जरिए लखनऊ के बाराबिरवा स्थित एक होटल में कमरा नंबर 309 बुक किया था। शुक्रवार की शाम उन्होंने अपनी भतीजी और उसकी सहेली को मिलने के लिए बुलाया। वे सभी होटल की पांचवीं मंजिल पर स्थित रेस्टोरेंट में बैठे थे। इसी दौरान, पास की टेबल पर बैठे दो अज्ञात व्यक्तियों ने उनकी भतीजी के साथ अश्लील इशारे और छेड़छाड़ शुरू कर दी। जब पीड़ित ने इसकी शिकायत होटल के मैनेजर आलोक प्रकाश से की, तो मैनेजर ने आरोपियों का ही साथ दिया। उन्होंने पीड़ित को धमकाया और तुरंत बिल चुकाकर होटल छोड़ने को कहा।
मैनेजर समेत तीन पर केस दर्ज
पीड़ित चाचा ने कृष्णा नगर थाने में होटल मैनेजर आलोक प्रकाश और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ छेड़छाड़ और धमकी देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
रोडवेज से यात्री का बैग चोरी, क्रेडिट कार्ड से 2 लाख की ठगी
लखनऊ, (30 अगस्त)। आलमबाग बस अड्डे पर एक यात्री का बैग चोरी होने और कृष्णा नगर में क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इन दोनों वारदातों में पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच में जुट गई है।
बस अड्डे से यात्री का बैग चोरी
आजमगढ़ के रहने वाले शिवचरण भगत का बैग आलमबाग बस अड्डे से चोरी हो गया। शिवचरण 23 अगस्त की रात करीब 11:20 बजे आजमगढ़ जाने वाली बस में बैठे थे। वे पानी लेने के लिए बस से उतरे, और जब वापस लौटे, तो पाया कि उनका बैग गायब था। बैग में एक मोबाइल फोन और 3,000 रुपए नकद थे। आलमबाग कोतवाली में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोर की तलाश शुरू कर दी है।
क्रेडिट कार्ड से 2 लाख रुपए की ठगी
कृष्णा नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले राजेंद्र कुमार प्रजापति को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया गया। राजेंद्र ने अपने क्रेडिट कार्ड का वार्षिक शुल्क हटाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। 8 अगस्त को उन्हें एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाली ने खुद को पूजा शर्मा बताया। बातचीत के दौरान, जालसाज ने उनके क्रेडिट कार्ड से दो बार में 1 लाख 97 हजार रुपए निकाल लिए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
काम्पिल्य में प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर धर्मावलंबियों का आस्था स्थल
काम्पिल्य बनेगा महाभारत सर्किट की विशिष्ट पहचान, त्रेता-द्वापर युगीन स्थलों का विकास हमारी प्राथमिकता- जयवीर सिंह
फर्रुखाबाद में पर्यटन को नई उड़ान, 2025 वर्षांत तक 35-40 लाख पर्यटकों तक पहुंच सकता है आंकड़ा
04 करोड़ से होगा द्रौपदी के जन्म और स्वयंवर स्थल का विकास
लखनऊ, (30 अगस्त 2025) उत्तर प्रदेश सरकार ने महाभारत सर्किट अंतर्गत फर्रुखाबाद जिले के पौराणिक स्थल काम्पिल्य (कंपिल) के पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। रामायण और महाभारत काल के साक्षी रहे काम्पिल्य के समेकित विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से 04 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। यह कदम जिले को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग राज्य के धार्मिक स्थलों के आसपास पर्यटक सुविधाओं का तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्राचीन स्थल काम्पिल्य का विशेष धार्मिक महत्व है। त्रेता व द्वापर युग से जुड़ी इस पौराणिक भूमि को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। द्रौपदी की जन्मस्थली सहित अनेक सांस्कृतिक धरोहरों की धरती काम्पिल्य को संवारने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
विकास कार्यों से निखरेगा काम्पिल्य
पर्यटन विभाग काम्पिल्य के समेकित विकास के माध्यम से फर्रुखाबाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। पर्यटन विकास के अंतर्गत प्रवेश द्वार, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, सूचना केंद्र, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, विश्राम स्थल का निर्माण आदि सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
यहीं हुआ था द्रौपदी का जन्म और स्वयंवर
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, ‘महाभारत काल में काम्पिल्य, पांचाल की राजधानी रही है। मान्यता है कि यहीं द्रौपदी का जन्म और बाद में स्वयंवर हुआ था। द्रौपदी कुंड आज भी यहां विद्यमान है, जिसे देखने प्रति वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। प्राचीन रामेश्वर नाथ मंदिर और गीता ज्ञान आश्रम प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। इतिहास में इस तीर्थ नगरी का प्राचीन नाम ‘द्रुपद गढ़’ भी मिलता है, जहां द्रौपदी के पिता राजा द्रुपद का राज था।’
रामायण से भी गहरा नाता
काम्पिल्य स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर का विशेष महत्व है। किंवदंतियों के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग को प्रभु श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद लंका से लाए थे। अशोक वाटिका में माता सीता इसी शिवलिंग की पूजा किया करती थीं। बाद में श्रीराम के भाई शत्रुघ्न ने लवणासुर का वध करने के लिए जाते समय इसे काम्पिल्य में गंगा तट पर स्थापित कर दिया था। आज भी यहां सावन में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
जैन-बौद्ध अनुयायियों का भी तीर्थ स्थल
काम्पिल्य में जैन धर्मावलंबियों का प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर भी है, जिसमें 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ जी की प्रतिमा है। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार, प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव ने इस नगर को बसाया था। इसे 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ जी की जन्मस्थली भी बताया जाता है।
फर्रुखाबाद में बढ़ी पर्यटक संख्या
पर्यटन के लिहाज से फर्रुखाबाद लगातार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वर्ष 2024 में यहां 25.47 लाख से अधिक पर्यटक आए थे। वहीं, मौजूदा वर्ष 2025 की शुरुआत भी उत्साहजनक रही है। जनवरी से मार्च के बीच ही तकरीबन 10.41 लाख सैलानियों ने जिले का रुख कर चुके हैं। पर्यटन विभाग का अनुमान है, कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 35-40 लाख के बीच पहुंच सकता है।’
धार्मिक पर्यटन में निरंतर आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, धार्मिक पर्यटन में उत्तर प्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है। फर्रुखाबाद अपने पौराणिकता स्थलों के लिए विख्यात है। जनपद में सभी धर्मों से जुड़े पवित्र स्थल हैं। सरकार का प्रयास है कि इन स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त तरीके से स्थापित किया जाए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश की पहचान एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में मजबूत हो सके।’
PATA के मंच पर राज्य की बौद्ध विरासतों की भव्यता से प्रस्तुति
पाटा ट्रैवल मार्ट 2025 में यूपी पर्यटन पवेलियन आगंतुकों के बीच बना आकर्षण का केंद्र
‘एम्बार्क ऑन योर बोधि यात्रा इन उत्तर प्रदेश’ रहा विशेष आकर्षण
हमारा लक्ष्य हर आगंतुक की बोधि यात्रा उत्तर प्रदेश से हो शुरू – पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह
बैंकॉक में यूपी पर्यटन की दमदार प्रस्तुति, भारतीय दूतावास का भव्य रोड शो
लखनऊ (29 अगस्त 2025) उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने राज्य की बौद्ध विरासतों के साथ एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन मंच 47वें पैसिफिक एशिया ट्रैवल एसोसिएशन (पाटा-2025) में अपनी सशक्त भागीदारी दर्ज कराई। राज्य पर्यटन अपनी विशेष प्रदर्शनी ‘एम्बार्क ऑन योर बोधि यात्रा इन उत्तर प्रदेश’ के साथ सबसे आकर्षक और सर्वाधिक देखे जाने वाले पवेलियनों में शामिल रहा। यहां राज्य के प्रमुख बौद्ध स्थलों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। विदेशी आगंतुकों को ‘बोधि यात्रा’ पर उत्तर प्रदेश आमंत्रण के साथ पाटा-2025 की भव्य विदाई हुई। यह जानकारी उ. प्र. के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।
पर्यटन मंत्री ने बताया, ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन के स्टॉल का उद्घाटन थाईलैंड में भारत के राजदूत नागेश सिंह ने किया।26 से 28 अगस्त तक बैंकॉक के क्वीन सिरीकिट नेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, टूर एंड ट्रैवल क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और साझेदारों के साथ सार्थक संवाद हुए। संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और आध्यात्मिकता को रेखांकित किया गया। यूपी पवेलियन में विदेशी आगंतुकों को ‘बुद्धा राइस’ (काला नमक चावल) विशेष रूप से भेंट की गई।’
नए साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया, ’47वां पैसिफिक एशिया ट्रैवल एसोसिएशन, पर्यटन अर्थव्यवस्था से जुड़े हितधारकों को जोड़ने वाला एक प्रमुख मंच सिद्ध हुआ। यह आयोजन राज्य के बौद्ध स्थलों की यात्रा और पर्यटन उद्योग की उत्साहजनक भागीदारी का साक्षी बना। सम्मेलन में 20 को-एग्जीबिटर्स ने बी-टू-बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) बैठकें की और नए साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किए। अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदेश के बौद्ध स्थलों- सारनाथ, कपिलवस्तु, संकिसा, कौशाम्बी, श्रावस्ती और कुशीनगर को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। उल्लेखनीय है कि यह वर्ष आसियान-भारत पर्यटन वर्ष के रूप में भी मनाया जा रहा है।’
UP मंडप की पारंपरिक और आधुनिक प्रस्तुति शैली की सराहना
बैंकॉक में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश पर्यटन ने नेटवर्किंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और साझेदारी को लेकर कई अहम पहल की। प्रतिनिधियों और मीडिया ने उत्तर प्रदेश मंडप की पारंपरिक और आधुनिक प्रस्तुति शैली की सराहना की। कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों को राज्य के बौद्ध सर्किट, उन्नत सुविधाएं, बेहतर कनेक्टिविटी और विभाग द्वारा आयोजित होने वाले फैम ट्रिप की जानकारी भी दी गई। यूपी पवेलियन में भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े वृत्तचित्रों और आधुनिक तकनीक से सजे प्रदर्शनी स्टॉल की सभी ने सराहना की।
प्रोमिला गुप्ता और जगप्रीत कौर सम्मानित
आयोजन के उपरांत बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास की ओर से भव्य रोड शो का आयोजन किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने बौद्ध सर्किट एवं प्रदेश के विविध पर्यटन अनुभवों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस अवसर पर आईआरसीटीसी की समूह महाप्रबंधक (पर्यटन) प्रोमिला गुप्ता और भारतीय दूतावास के वाणिज्य प्रकोष्ठ की प्रमुख जगप्रीत कौर को सम्मानित किया गया।
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया, ‘पाटा में मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध पर्यटन का केंद्र बनाने के हमारे लक्ष्य को और मजबूत किया है।’
महाराजगंज में पिता के अंतिम संस्कार के लिए भटकते रहे अनाथ बच्चे
मुस्लिम भाइयों ने पेश की मानवता की मिसाल
समाज और सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े करती घटना
~भूपेंद्र निरंकारी
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवा में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ दो अनाथ बच्चों को अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए दो दिनों तक भटकना पड़ा। नौतनवा के राजेंद्र नगर निवासी लव कुमार पटवा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। छह महीने पहले ही उनकी पत्नी की भी मृत्यु हो चुकी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण, उनके 14 वर्षीय बेटे राजवीर, 10 वर्षीय बेटे देवराज, और उनकी बहन पूरी तरह से अनाथ हो गए।
पत्रकार भूपेंद्र निरंकारी
रिश्तेदारों और मदद की कमी
परिवार का कोई भी रिश्तेदार या सरकारी संस्था उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। निराशा में, बच्चों ने अपने पिता की लाश को एक ठेले पर रखा और दो दिनों तक अंतिम संस्कार के लिए जगह और मदद की तलाश में भटकते रहे। वे कभी शमशान घाट तो कभी कब्रिस्तान गए, लेकिन पैसों की कमी के कारण अंतिम संस्कार नहीं कर पाए।
मुस्लिम भाइयों ने की मदद
जब हर तरफ से उम्मीद खत्म हो गई, तब दो मुस्लिम भाइयों राशिद कुरैशी एवं वारिस कुरैशी ने इन बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने न सिर्फ बच्चों को सहारा दिया, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनके पिता का अंतिम संस्कार भी करवाया। इस घटना ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की है।
सवाल खड़े करती यह घटना
यह घटना समाज और सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। लेखक भूपेंद्र निरंकारी ने इस घटना पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों, समाजसेवियों और जिम्मेदार लोगों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि “किसी की मदद करके सेल्फी लेने वाले लोग कहाँ चले गए?” उन्होंने समाज के सभी जागरूक लोगों और समाजसेवी संस्थाओं से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे आने का आग्रह किया, ताकि भविष्य में इस तरह की हृदय विदारक घटनाएँ दोबारा न हों।
टाइल्स का काम, कार मैकेनिक,चिकन कारीगर और चाय की दुकान चलाने वालों का गिरोह
खुलासा: पुलिस के हत्थे चढ़ा टाइल्स कारीगर का चोर गैंग
~पीयूष द्विवेदी
लखनऊ। पुलिस ने बंद घरों में चोरी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मड़ियांव थाना पुलिस ने इस गैंग के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक पंद्रह साल की नाबालिग भी शामिल है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर और चार हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं।
लखनऊ कमिश्नरेट के मड़ियांव थाना प्रभारी निरीक्षक शिवानंद मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस ने गुरुवार को बंद घरों में चोरी करने वाले गैंग के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी गैंग में एक पंद्रह साल की नाबालिग भी शामिल थी। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर, चार हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस सभी के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाने में लगी है। खास बात यह है कि सभी आरोपी अलग-अलग काम से जुड़े थे, पर अपराध से होने वाली आमदनी ने इन्हें नकबजनी की ओर खींचा।
उत्तरी जोन एडीसीपी जितेन्द्र दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, लगातार हो रही चोरी की घटना को लेकर पुलिस मड़ियांव थाना क्षेत्र अंतर्गत नौबस्ता मोड के पास चेकिंग कर रही थी, तभी मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ युवक चोरी के सामान के साथ राधा डिग्री कॉलेज के पास बैठे हैं। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर पांचों को पकड़ लिया। तलाशी में उनके पास जेवर और नगदी मिली। पूछताछ में आरोपी पुलिस को गुमराह करने लगे। कड़ाई से पूछताछ करने पर चोरी की बात कबूल कर ली। पुलिस टीम ने बताया कि मौके से करीब 15 वर्षीय एक नाबालिग को भी संरक्षण में लिया गया है।
पहचान: 1. असगर (21 वर्ष): मुजफ्फरपुर, बिहार का रहने वाला है और लखनऊ के अलीनगर में टाइल्स का काम करता है। 2. अदनान (20 वर्ष): मड़ियांव का निवासी है और पेशे से कार मैकेनिक है। 3. गुलाम अहमद रजा उर्फ अफरीदी (23 वर्ष): चिकन कारीगरी का काम करता है। 4. रिजवान अहमद (30 वर्ष): एक चाय की दुकान चलाता है।
चोरी और काम करने का तरीका
काम करने का तरीका: पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे बंद घरों के ताले तोड़कर चोरी करते थे। चोरी का सामान: वे घरों से सोने-चांदी के गहने और नकदी चुराते थे। आगे का काम: चोरी के सामान को बाद में बाजार में बेचकर आपस में पैसे बांट लेते थे। गैंग का गठन: सभी आरोपी अपने-अपने काम के दौरान एक-दूसरे से मिले और फिर एक गिरोह बनाकर कई चोरियों को अंजाम दिया। आगे की जांच: पुलिस अब आरोपियों के पिछले आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है।
राजधानी लखनऊ में जलभराव, टूटी सड़कें और बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था
बदहाली: सरकार और उसके अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
अपनी ही सरकार के कामकाज से त्रस्त विधायक की योगी से गुहार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जलभराव, टूटी सड़कों और बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ दल के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। यह घटना सरकार और उसके अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि एक जनप्रतिनिधि को अपनी ही सरकार से समस्याओं के समाधान के लिए गुहार लगानी पड़ रही है।
सरोजनी नगर से विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का कद और उनकी योग्यता सामान्य नहीं है। B.Tech (IIT Dhanbad), M.A, LL.B, और Ph.D जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ. सिंह सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति और पुलिस स्थाई समिति के सदस्य भी हैं। इसके बावजूद उन्हें नगर निगम और नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
करोड़ों खर्च, फिर भी हालात बदतर
विधायक ने 26/08/2025 को लिखे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि हर साल सड़क मरम्मत, नालियों की सफाई और ड्रेनेज सुधार के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हाल ही में हुई तेज बारिश ने इन विभागों की अक्षमता को एक बार फिर उजागर कर दिया। सामान्य वर्षा में ही शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। इससे न सिर्फ लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती है, बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है और शहरी ढाँचे को भी गंभीर नुकसान पहुँचता है।
समस्याओं का विवरण और विधायक की मांगें
डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजी अपनी शिकायत में निम्नलिखित प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डाला: 1. नालियों की दुर्दशा: अधिकांश नालियाँ या तो जाम हैं या उन पर अतिक्रमण है, जिसकी वजह से मानसून से पहले उनकी नियमित सफाई नहीं हो पाती। 2. सड़कों की खस्ताहाली: हाल ही में बनी या मरम्मत की गई सड़कों पर भी पहली बारिश में ही बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं, जिससे काम की गुणवत्ता पर सीधा सवाल उठता है। 3. बार-बार जलभराव वाले क्षेत्र: आलमबाग, राजाजीपुरम, चारबाग, इन्दिरानगर, गोमतीनगर विस्तार, हजरतगंज और सरोजनी नगर जैसे प्रमुख इलाकों में हर साल जलभराव की गंभीर स्थिति बनती है। 4. जवाबदेही का अभाव: नगर निगम और नगर विकास विभाग के अभियंताओं और अधिकारियों की कोई जवाबदेही तय नहीं होती, जिससे लापरवाही बनी रहती है।
तय हो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही
इन समस्याओं को दूर करने के लिए विधायक ने मुख्यमंत्री से तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है। उनकी मांगों में एक उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग समिति का गठन शामिल है, जो नालों की सफाई, सड़क मरम्मत और ड्रेनेज सुधार के कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा पर निगरानी रखे। इसके साथ ही, उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और लापरवाही पर दंडात्मक कार्यवाही करने की भी मांग की है।
दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना बनाने का भी सुझाव
विधायक ने लखनऊ के लिए एक दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना बनाने का भी सुझाव दिया, जिसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक, जीआईएस मैपिंग और वर्षा-जल निकासी का वैज्ञानिक आकलन शामिल हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस समीक्षा समिति में स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों जैसे सिविल इंजीनियरों और शहरी योजनाकारों को भी शामिल किया जाना चाहिए। अपने पत्र के अंत में, डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है और यहाँ की स्थिति पूरे राज्य की छवि को दर्शाती है। उन्होंने विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया है कि शहर की गरिमा को ठेस पहुँचने से बचाने के लिए इन मुद्दों पर शीघ्रता से कार्रवाई की जाए।
रायबरेली, फिरोजाबाद, मैनपुरी में विकास योजनाओं का पर्यटन मंत्री करेंगे शिलान्यास
लखनऊ: (28 अगस्त, 2025) उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह 29 अगस्त, 2025 के पूर्वाह्न से रायबरेली, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा के भ्रमण पर रहेंगे।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पूर्वाह्न 11ः30 बजे विकासखंड दीनशाह गौरा प्रांगण विधानसभा ऊंचाहार जनपद रायबरेली में दुर्गा माता मंदिर में दर्शन पूजन के उपरांत पर्यटन विकास की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसके उपरान्त विशाल जनसभा कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे तथा मनोज कुमार पाण्डेय विधायक/पूर्व मंत्री के आवास पर भी जायेंगे। इसके उपरान्त फिरोजाबाद के लिए प्रस्थान करेंगे।
पर्यटन मंत्री शनिवार को पूर्वाहन 09 बजे से अपराह्न 01 बजे तक ट्रांजिट हॉस्टल पीडब्लूडी पुलिस लाइन के सामने मैनपुरी में जनसुनवाई करेंगे। इसके उपरान्त घंटाघर लेनगंज मैनपुरी के ग्राम सहन में थिमैटिक गेट आदि से संबंधित पर्यटन विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसके बाद अपराह्न 02 बजे मेजर ध्यानचंद स्टेडियम सैफई जनपद इटावा में आयोजित सीबीएसई क्लस्टर एथेलीट वर्ष मीट-2025 कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
अगले दिन रविवार 31 अगस्त को कैम्प कार्यालय सिरसागंज जनपद फिरोजाबाद में सुबह 9ः30 बजे से अपराह्न 01 बजे तक जन समस्याओं की सुनवाई करेंगे। इसके उपरान्त सायं 05 बजे शिकोहाबाद मैनपुरी मार्ग थाना अरॉव तहसील सिरसागंज जनपद फिरोजाबाद में ठाकुर जी महाराज मंदिर के पर्यटन विकास की परियोजना का शिलान्यास करेंगे। अगले दिन सोमवार 01 सितम्बर को लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे।
मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना अंतर्गत अयोध्या मंडल के लिए धनराशि स्वीकृत
अम्बेडकरनगर एवं अमेठी जनपदों की 06 परियोजनाओं पर खर्च होंगे 05 करोड़ रुपए
लखनऊ: (28 अगस्त, 2025) मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 35,985 लाख रुपए की 350 नई परियोजनाएं अनुमोदित की गयी हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य प्राचीन धार्मिक स्थलों का पर्यटन विकास करके पर्यटन सेक्टर को बढ़ावा देना है। इसके तहत अयोध्या मण्डल के अंतर्गत आने वाले जनपद अम्बेडकरनगर तथा अमेठी के लिए कुल 05 करोड़ रुपए की 06 परियोजनाएं स्वीकृत की गयी हैं।
जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उत्तर प्रदेश
यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि ‘अम्बेडकरनगर स्थित आलापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत संत बाबा गोविंद साहब की तपोभूमि मठ अहिरौली का पर्यटन विकास 75 लाख रुपए की धनराशि से कराया जायेगा। इसी प्रकार कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत भीटी में काली मंदिर दिलावलपुर का पर्यटन विकास के लिए 75 लाख रुपए की परियोजना अनुमोदित की गयी है।’
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘जनपद अमेठी के विधानसभा जगदीशपुर स्थित मुसाफिरखाना के महावीर मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 75 लाख, तिलोई विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बाबा लख्खा दास कुटी सैदापुर विकासखण्ड तिलोई के पर्यटन विकास के लिए 01 करोड़ रूपये, गौरीगंज विधानसभा स्थित मुसाफिरखाना में बाबा महावीर दास मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 01 करोड़ रुपए तथा गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र स्थित विलेश्वर महादेव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 75 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गयी है।’
प्राचीन धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़़ाने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध- जयवीर सिंह
पर्यटन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु मूल बजट में 40 हजार लाख रुपए का प्राविधान किया गया है। इसमें नई परियोजनाओं हेतु अनुमानित लागत की धनराशि 35,985 लाख रुपए है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2024-25 की क्रियान्वित परियोजनाओं हेतु 28 हजार लाख रुपए की धनराशि रखी गयी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक मण्डल के कतिपय जनपदों की विधानसभाओं में स्थित प्राचीन मंदिरों का कायाकल्प करके उसके आसपास बुनियादी सुविधायें सृजित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्राचीन धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन को बढ़़ाने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है।’
हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं महिलाएं
बिजनौर। समाज में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान और उनकी उपलब्धियों को याद करने का दिन, 26 अगस्त को मनाया जाने वाला महिला समानता दिवस है। इस अवसर पर, पत्रकार भूपेन्द्र कुमार ने महिलाओं को हर क्षेत्र में मिल रही सफलता और उनके बढ़ते सम्मान पर प्रकाश डाला है।
उनका कहना है कि आज महिलाएं चिकित्सा, शिक्षा, और तकनीक जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ बराबरी से काम कर रही हैं। हमारे देश में सदियों से महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है और उन्हें देवी के रूप में पूजा जाता है। यह दु:खद है कि कुछ जगहों पर उनके साथ हीन भावना का व्यवहार भी किया जाता है, जबकि परिवार और देश के विकास में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का भी बहुत बड़ा योगदान है।
अनेक वीरांगनाओं की गौरवशाली गाथा
भारत के इतिहास में कई ऐसी वीरांगनाएं हुई हैं, जिन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने युद्ध कौशल से अंग्रेजों को परास्त किया। अंतरिक्ष के क्षेत्र में कल्पना चावला ने अपना अहम योगदान दिया। इसके अलावा, भारत की प्रथम नागरिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का पदभार संभालना देश के लिए एक गौरव का क्षण है। महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले का नाम भी शिक्षा के क्षेत्र में आदर के साथ लिया जाता है। वहीं, माता सीता ने त्याग और तपस्या की अनूठी मिसाल पेश की, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।
हर भूमिका में सम्मान की पात्र हैं महिलाएं
कुल मिलाकर महिलाएं मां, पत्नी और बेटी के रूप में हर भूमिका में सम्मान की पात्र हैं और हमें उनका हमेशा सम्मान करना चाहिए। महिलाएं जीवन में कई संघर्षों का सामना करती हैं, लेकिन फिर भी बिना किसी शिकायत के अपने कर्तव्यों का पालन पूरी लगन के साथ करती हैं। इसलिए महिला समानता दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके योगदान को स्वीकार करने की एक निरंतर प्रक्रिया है।
इस मामले में की जाएगी मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत
बिजनौर स्टेडियम की बदहाली से व्यथित हैं पूर्व खिलाड़ी
बिजनौर, (भूपेन्द्र कुमार)। किसी ज़माने में खिलाड़ियों के पसीने से सींचा गया बिजनौर का स्टेडियम आज अपनी पहचान खो रहा है। यह व्यथा किसी और की नहीं, बल्कि उसी ज़मीन पर खेलकर पुलिस सेवा में अनुशासन और शारीरिक बल हासिल करने वाले एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े पूर्व खिलाड़ियों की है। उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि कैसे सालों पहले का भाईचारे और मेहनत वाला माहौल अब पूरी तरह बदल चुका है। इसका सबसे बड़ा कारण खेल अधिकारी (स्पोर्ट्स ऑफिसर) का रवैया बताया जा रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की जाएगी।
खेल और भाईचारा, अब दोनों गायब
मॉर्निंग क्लब स्टेडियम बिजनौर के सदस्यों विजयदीप चौधरी बबलू भाई, दीपक गर्ग तिरुपति ऑटोमोबाइल्स, उपेंद्र चौधरी, डॉक्टर कर्मेंद्र, भंडारी जी आदि पूर्व खिलाड़ी बताते हैं कि उनके जमाने में स्टेडियम एक परिवार जैसा था। हर खिलाड़ी एक-दूसरे का सम्मान करता था, छोटे खिलाड़ियों को अपने भाई की तरह समझा जाता था। सब मिलकर वेटलिफ्टिंग करते, रस्सी पर चढ़ते और जमकर पसीना बहाते थे। इस मेहनत से शरीर में इतनी जान आ जाती थी कि लगता था जैसे भैंसों से भी लड़ लेंगे। लेकिन, आज यह ग्रुप और वह माहौल दोनों ही नदारद हैं। स्टेडियम में अब दोस्ती और सीनियर-जूनियर की इज्जत जैसी कोई बात नहीं बची है।
बदहाली की जड़: खेल अधिकारी का पद और गलत प्राथमिकताएँ
पूर्व खिलाड़ियों ने स्टेडियम की मौजूदा बदहाली का सारा दोष खेल अधिकारी के पद पर डाला है। उनका कहना है कि जब इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति आता है जो न तो पुराने खिलाड़ियों का सम्मान करता है और न ही उनकी सलाह लेता है, तो माहौल बिगड़ना तय है। वह बताते हैं कि आज स्टेडियम में खेल के बजाय सिर्फ उन युवाओं का जमावड़ा है जो किसी फौज या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। इस वजह से न तो खेलों को प्राथमिकता मिल रही है और न ही खिलाड़ियों के बीच आपसी रिश्ता बन पा रहा है।
अपने हाथों से संवारा था मैदान
पूर्व खिलाड़ियों ने भावुक होते हुए बताया कि कैसे उन्होंने और उनके साथियों ने मिलकर स्टेडियम की मिट्टी को संवारा था। उन्होंने खुद हाथों से घास साफ की, रोलर चलाकर क्रिकेट पिच ठीक की, फुटबॉल ग्राउंड की घास उखाड़ी और खो-खो ग्राउंड को शानदार बनाकर कई टूर्नामेंट करवाए। आज उसी जगह की बदहाली देखकर उनका मन दु:खी होता है।
समाधान का रास्ता: समूह बनाकर बात करें
इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई इस हालात को सुधारना चाहता है, तो उसे एक समूह बनाकर खेल अधिकारी से मिलना चाहिए। उन्हें समझाना होगा कि अगर सही कदम नहीं उठाए गए, तो यह माहौल और भी बिगड़ेगा। झगड़े और लड़ाई-झगड़े बढ़ेंगे, और हो सकता है कि किसी दिन स्टेडियम में कोई गंभीर घटना भी घट जाए। कुल मिलाकर किसी भी जगह का असली विकास वहाँ के लोगों के आपसी सम्मान, मेहनत और सही नेतृत्व पर निर्भर करता है।
जिला कृषि अधिकारी की टीम को देख ताले डालकर दुकानदार रफूचक्कर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने अपनी टीम के साथ धामपुर तहसील के अफजलगढ़ क्षेत्र में कई उर्वरक केंद्रों पर छापा मारा। यह निरीक्षण 27 अगस्त, 2025 को किया गया।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसानों को सही मात्रा और सही कीमत पर खाद मिल रही है। इस दौरान, उन्होंने कई दुकानों के रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि कुछ दुकानें नियमों का पालन नहीं कर रही थीं।
क्या हुई कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान, मै. कृषि सेवा केंद्र अफजलगढ़, मै. अफजलगढ़ खाद भंडार, मै. कृषक सेवा केंद्र, और मै. सरस्वती खाद भंडार भज्जावाला के रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। इस पर जिला कृषि अधिकारी ने इन सभी प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके अलावा, मै. बिश्नोई खाद भंडार और मै. बद्री कृपा खाद भंडार के मालिक दुकानें बंद करके भाग गए, जिस पर उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस और निलंबन की कार्रवाई की गई।
उर्वरक की उपलब्धता
अधिकारियों ने बताया कि बिजनौर जिले में खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से यूरिया, डीएपी, और एनपीके जैसी खादें निर्धारित दरों पर दी जा रही हैं।
उपलब्धता के आंकड़े:
* यूरिया: लक्ष्य 1,03,241 मीट्रिक टन था, जिसमें से 83,421 मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है और 9,376 मीट्रिक टन अभी भी उपलब्ध है। * डीएपी: लक्ष्य 14,717 मीट्रिक टन था, जिसमें से 11,910 मीट्रिक टन का वितरण हुआ है और 4,264 मीट्रिक टन बचा हुआ है। * एनपीके: लक्ष्य 3,230 मीट्रिक टन था, जिसमें से 1,847 मीट्रिक टन का वितरण हुआ है और 932 मीट्रिक टन उपलब्ध है।
विक्रेताओं को चेतावनी
निरीक्षण के दौरान, अधिकारियों ने उर्वरक विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे पीओएस मशीन के बिना खाद न बेचें। उन्हें यह भी बताया गया कि वे बड़ी मात्रा में (बल्क में) खाद न बेचें और किसानों की जोत बही या खतौनी के आधार पर ही वितरण करें।।
अधिकारियों ने विक्रेताओं को अधिक कीमत पर खाद बेचने और टैगिंग (एक खाद के साथ दूसरी वस्तु खरीदना अनिवार्य करना) से भी रोका। चेतावनी दी गई कि यदि कोई विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी विक्रेताओं को यह भी कहा गया कि वे किसानों को खाद खरीदने की रसीद जरूर दें।
पर्यटन मंत्री ने किया राज्य संग्रहालय के उच्चीकृत ऑडिटोरियम का लोकार्पण
मथुरा स्थित राजकीय संग्रहालय के 360 डिग्री वर्चुअल टूर का विमोचन
भावी पीढ़ी को दी जाए संग्रहालयों में संरक्षित पांडुलिपियों एवं अन्य दुर्लभ सामग्री की जानकारी – जयवीर सिंह
घर बैठे एक क्लिक से करें मथुरा संग्रहालय का वर्चुअल टूर
लखनऊ: 27 अगस्त, 2025 उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश राजकीय संग्रहालय लखनऊ एवं राजकीय संग्रहालय मथुरा में संरक्षित दुर्लभ पाण्डुलिपियों, प्रतिमाओं एवं अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं की घर बैठे भ्रमण कर सकता है। उन्होंने कहा कि मथुरा के संग्रहालय में संरक्षित की गई वस्तुओं का 360 डिग्री वर्चुअल टूर कर उनके बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों संग्रहालयों में संग्रहित प्राचीन एवं ऐतिहासिक धरोहरें हमारे विरासत का हिस्सा है। इनको संरक्षित करके युवा पीढ़ी का ज्ञानवर्धन करने के साथ ही शोधार्थियों को शोध सामग्री सुलभ कराना भी है।
पर्यटन मंत्री आज राज्य संग्रहालय, लखनऊ के उच्चीकृत ऑडिटोरियम के लोकार्पण एवं राजकीय संग्रहालय मथुरा के 360 डिग्री वर्चुअल टूर के विमोचन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पाण्डुलिपियां हमारी बहुमूल्य धरोहर है। इनका डिजिटलीकरण भी कराया गया है। वर्ष 2047 तक आजादी के 100 वर्ष पूरा होने पर भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। इसमें भावी पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने निदेशक संग्रहालय को निर्देश दिए कि आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करके अपनी धरोहरों को संरक्षित रखते हुए भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाए।
जयवीर सिंह ने यह भी निर्देश दिए कि लखनऊ तथा अन्य स्कूलों के बच्चों का संग्रहालय में भ्रमण कराएं ताकि बच्चे संरक्षित धरोहरों के बारे में जान सकें। उन्होंने कहा कि दर्शकों एवं आगंतुकों को जानकारी देकर शोधकर्ताओं को भी जोड़ने के लिए साल भर कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना बनाए। हमारी युवा पीढ़ी भविष्य की निर्माता है। वह वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, इतिहासविज्ञ, आदि बनकर विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठतम् योगदान दे सकते हैं।
पर्यटन सलाहाकार जेपी सिंह ने कहा कि आज के बाद दर्शक संग्रहालय की किसी भी गैलरी की घर बैठे जानकारी प्राप्त कर सकते है। जेपी सिंह ने कहा कि इतिहास एवं धराहरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले लोग एक क्लिक से संग्रहालयों का 360 डिग्री वर्चुअल टूर भ्रमण कर सकते हैं।
इस अवसर पर संग्रहालय द्वारा आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोंगिताओं में शामिल बच्चों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। लखनऊ जनपद के विभिन्न विद्यालयों में राज्य संग्रहालय की उपयोगिता के बारे में बताया गया। इसमें प्राथमिक विद्यालय, अमानीगंज, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका इण्टर कालेज, मलिहाबाद आदि विद्यालयों में भाषण, गायन, चित्रकला, फैंसी ड्रेस एवं रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
मंत्री जी ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विजयी बच्चों खासतौर से प्रथम पुरस्कार पाने वाले आशी, हम्बिया अंसारी, रिद्धिमा सोनी तथा द्वितीय पुरस्कार पाने वाले कार्तिक, जोया आदि को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। इसके अलावा अश्विनी आश्वि रावत, मानवी रावत, रूकसाना, हमदिया अंसारी, अनुष्का गौतम, बीरा, काव्या गुप्ता, मानसी, आशी, वंशिका मौर्या, तमन्ना मौर्या, हिफजा, रिद्धिमा सोनी, सुकन्या, कार्तिक, माही शर्मा, आस्था, जोया, नैन्सी, श्रद्धा, आन्या, नित्या, आयुषी, दिवांशु, सहनूर, रैययान, अंश, जैनब, अबु तालिब, अंश, अहम, नितिन कुमार, खुशी वर्मा, आयुष राजपूत, अंशिका यादव, हर्षिता, अंविका यादव, मो0 अवान हसीन, अलीशा, नीतू, आयजा रईस अंसारी, अखिल तिवारी आदि को सम्मानित किया गया। संग्रहालय की निदेशक, सृष्टि धवन ने अतिथियो का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर अभिलेखाकार के निदेशक, अमित अग्निहोत्री के अलावा संग्रहालय के डॉ विनय सिंह, डॉ अरसाज फातिनी, डॉ मीनाक्षी खेमका, प्रोजेक्ट मैनेजर, अरविंद दूबे के अलावा बड़ी संख्या में विभिन्न स्कूलों के बच्चे उपस्थित थे।
आध्यात्मिकता से विकास तक, पर्यटन का हर अवसर विकसित भारत के निर्माण में दे रहा है योगदान- जयवीर सिंह
लखनऊः (27 अगस्त, 2025) उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, ‘मिर्जापुर में बुधवार से शुरू हुई पहली कार्यशाला में 50 से अधिक स्कूली बच्चों, 15 से ज्यादा स्वयंसेवकों, शिक्षकों, धरोहर-प्रेमियों और वेलनेस विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों ने मिट्टी, ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) कालीन अपशिष्ट और चुनार संगमरमर पाउडर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की है। यह अभिनव वेस्ट टू ब्यूटीट मॉडल गतिशील अर्थव्यवस्था की मिसाल बन रहा है, जिसमें अपशिष्ट को धरोहर और आध्यात्म से जोड़ा जा रहा है।’
पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘यह कार्यक्रम केवल प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें संरक्षण, पुनर्स्थापन और धरोहर से जुड़ी जागरूकता संबंधी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान कराना है, कि त्योहारों को जिम्मेदारी के साथ कैसे मनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गणेश जी को आध्यात्मिक शुद्धता और पारिस्थितिकी चेतना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर यह संदेश देने का प्रयास है कि परंपराएं, पर्यावरण संरक्षण के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं।’
उन्होंने बताया, ‘हाल ही में बहराइच जिले के कारिकोट गांव को जिम्मेदार पर्यटन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मिर्जापुर की यह पहल भी उसी भावना को नवाचार के साथ आगे बढ़ा रही है। हमारा मानना है, कि बचपन से ही इस प्रकार की जागरूकता पैदा करना भविष्य में पर्यटन के विविध आयामों जैसे-फार्म-स्टे, वेलनेस टूरिज्म और इको-टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाएगा। मिर्जापुर की आध्यात्मिक भूमि से हम बच्चों में ऐसी सोच विकसित कर रहे हैं, जो भविष्य में उत्तर प्रदेश को सतत और जिम्मेदार पर्यटन की दिशा में आगे ले जाएगी।’
पर्यटकों की पसंद बनकर उभरा मिर्जापुर
निदेशक इको टूरिज्म प्रखर मिश्रा ने कहा, ‘मिर्जापुर इको टूरिज्म के प्रति जागरूक पर्यटकों की पसंद बनकर उभरा है। विंध्यधाम फॉल्स पर ही प्रतिदिन 2,000 से अधिक पर्यटक आते हैं। यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और प्रशिक्षित गाइड की सुविधाएं आगंतुकों को मिलती है। उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड स्थानीय समुदाय और बच्चों को जोड़कर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर रही है, जो पर्यटन, पर्यावरण और आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी योगदान देगा।’
बालों को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में भी करता है मदद
प्राचीन ज्ञान का नया अवतार: बालों की देखभाल में लौट रहा लकड़ी का कंघा
~ Shalie Saxena
लखनऊ, [27/02/2025] — आधुनिक प्लास्टिक के कंघों के बीच, सदियों पुराना लकड़ी का कंघा फिर से लोकप्रियता हासिल कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के जानकार मानते हैं कि यह कंघा न केवल बालों की सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह बालों को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में भी मदद करता है। यह चलन, खासकर जापानी और चीनी परंपराओं से प्रेरित है, जहाँ बालों की देखभाल में लकड़ी के कंघे को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
बालों और स्कैल्प के लिए वरदान
विशेषज्ञों का कहना है कि लकड़ी के कंघे के कई फायदे हैं जो प्लास्टिक के कंघों में नहीं मिलते। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बालों को नुकसान नहीं पहुंचाता। प्लास्टिक के कंघों से उत्पन्न होने वाला स्थैतिक आवेश (Static Electricity) बालों को रूखा और उलझा हुआ बनाता है, जबकि लकड़ी इस आवेश को कम करती है, जिससे बाल मुलायम और चमकदार बने रहते हैं।
बेहतर रक्त संचार
इसके अलावा, लकड़ी के कंघे के दांत प्लास्टिक की तरह नुकीले नहीं होते। ये सिर की त्वचा पर हल्के से मालिश करते हैं, जिससे रक्त संचार बढ़ता है। बेहतर रक्त संचार से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है, जिससे वे मजबूत होते हैं और बालों का टूटना कम होता है। यह कंघा बालों के प्राकृतिक तेलों को जड़ों से लेकर सिरों तक समान रूप से फैलाता है, जिससे बालों की नमी बनी रहती है और वे स्वस्थ दिखते हैं।
क्या लकड़ी का कंघा बालों को काला रखता है?
जापानी और चीनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में यह धारणा प्रचलित है कि लकड़ी के कंघे का नियमित उपयोग बालों को समय से पहले सफेद होने से बचा सकता है। हालांकि, यह सीधे तौर पर बालों को काला नहीं करता। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्कैल्प के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। एक जानकार ने बताया, “स्वस्थ स्कैल्प और बालों की जड़ें स्वस्थ रहती हैं, जिससे बालों का प्राकृतिक रंग लंबे समय तक बना रहता है।” यह एक समग्र दृष्टिकोण है, जिसमें कंघी करने की प्रक्रिया को सिर्फ बाल सुलझाने तक सीमित न रखकर, सिर की मालिश और पोषण का हिस्सा माना जाता है।
पर्यावरण और टिकाऊपन का विकल्प
आज के समय में जब लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं, लकड़ी का कंघा एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। प्लास्टिक के कंघों की तुलना में यह बायोडिग्रेडेबल होता है और लंबे समय तक चलता है। यह चलन सिर्फ एक फैशन नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक स्वास्थ्य लाभों का एक सुंदर मिश्रण है, जो लोगों को प्रकृति के करीब ले जा रहा है।
यूपी में गठबंधन की खटास: संजय निषाद का बीजेपी पर हमला
उनकी वजह से ही मिल रहा है बीजेपी को समाज का वोट
फायदा नहीं है, तो गठबंधन तोड़ दे बीजेपी: संजय निषाद
~ विनीत सिन्हा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने गोरखपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ-साफ कहा कि अगर बीजेपी को लगता है कि निषाद पार्टी से उन्हें कोई फायदा नहीं है, तो वे गठबंधन तोड़ सकते हैं। उन्होंने खुद को निषाद समुदाय का नेता बताते हुए दावा किया कि इस समाज का वोट बीजेपी को उनकी वजह से ही मिल रहा है।
किसी एक की नहीं, सबकी साझी होती है जीत
निषाद ने बीजेपी को चेताते हुए कहा कि सहयोगियों की ताकत को कम नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने कहा, “जीत किसी एक की नहीं, सबकी साझी होती है।” उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें भरोसा है तो गठबंधन निभाएं, वरना साफ कह दें, “हम तैयार हैं।”
आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरा
संजय निषाद ने निषाद समुदाय के लिए अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे की मांग को लेकर भी बीजेपी पर दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि निषादों को आरक्षण देना बीजेपी की जिम्मेदारी है और एक सहयोगी के तौर पर वे इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
बेटे की हार: बीजेपी पर फोड़ा ठीकरा
लोकसभा चुनाव 2024 में अपने बेटे प्रवीण निषाद की हार पर सवाल पूछे जाने पर संजय निषाद ने कहा कि यह सवाल उनसे नहीं, बल्कि बीजेपी नेतृत्व से पूछा जाना चाहिए। प्रवीण निषाद संतकबीर नगर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। इससे पहले वे दो बार सांसद रह चुके थे, जिसमें से एक बार सपा के टिकट पर और दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के हैं कुल चार सहयोगी दल:
अपना दल (सोनेलाल)
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा)
राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी)
निषाद पार्टी इनमें से अपना दल, सुभासपा, आरएलडी और निषाद पार्टी के नेता, सभी को सरकार में जगह मिली है, लेकिन हाल के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से सहयोगी दलों और बीजेपी के बीच की तनातनी सामने आ रही है!
विधायक ओपी श्रीवास्तव ने राम धर्म कांटा पर सुनीं वार्ड की जनता की समस्याएँ
शंकरपुरवा वार्ड-2 में सीवर और पेयजल की समस्या से मिलेगी राहत
~ By Geetanjali singh
लखनऊ, (26 अगस्त 2025)। लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शंकरपुरवा वार्ड-2 में आज विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव की पहल पर राम धर्म कांटा पर जनसुनवाई एवं स्थलीय निरीक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षेत्रवासियों ने पानी एवं सीवर संबंधी वर्षों से चली आ रही समस्याओं को प्रमुखता से रखा।
जलकल विभाग के महाप्रबंधक, अधिशासी अभियंता और सुएज कंपनी के अधिकारी रहे मौजूद
मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश
जल निगम, नगर निगम और जलकल विभाग मिलकर करेंगे स्थलीय निरीक्षण और बनाएंगे ठोस कार्ययोजना
विधायक ने जलभराव और सीवर से जूझ रही जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना और तत्काल समाधान हेतु जलकल विभाग के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता अनिल तथा सुएज कंपनी के अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीवर लाइन से संबंधित गंभीर समस्याओं के निवारण हेतु दीर्घकालिक योजना बनाई जाएगी और इसके लिए जल निगम, नगर निगम तथा जलकल विभाग संयुक्त निरीक्षण कर समन्वय के साथ ठोस कार्ययोजना तैयार करेंगे ताकि जनता को स्थाई राहत मिल सके।
जनता की मांग पर खुद पहुंचे
जनता की मांग पर विधायक श्रीवास्तव स्वयं मौके पर पहुँचे और समस्याओं को प्रत्यक्ष देखा। निरीक्षण के समय विभागीय अधिकारी भी साथ में उपस्थित रहे। इस जनसुनवाई के दौरान क्षेत्र के प्रबुद्धजन एवं नागरिक रामदयाल, आरके भदौरिया, सुदामा, अमित श्रीवास्तव, अरुण कुमार गुप्ता, गिरीश तिवारी, महेंद्र निगम, नागेंद्र प्रताप सिंह, हर्षित, बृजेश अवस्थी, डॉ. ज्ञानेश्वर सिंह तथा ओरी लाल ने अपनी समस्याएँ रखीं। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष नरेंद्र देवड़ी, पार्षद प्रतिनिधि, दीपक तिवारी सहित मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
छेड़छाड़ और शारीरिक संबंध बनाने को दबाव डालने का आरोप
सास, जेठ और जेठ के बेटे ने मिलकर उसे घर से निकाला
पति की मृत्यु के बाद बहू को प्रताड़ित कर रहा जेठ
~ Geetanjali singh
बाराबंकी। पति की मौत के बाद संपत्ति के लालच में ससुराल वालों द्वारा एक बहू को बेरहमी से प्रताड़ित करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़िता ने अपने जेठ पर छेड़छाड़ और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। विरोध करने पर पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी गई और झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश भी की गई। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, यह घटना बाराबंकी के कोतवाली नगर क्षेत्र की है। अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ रहने वाली पीड़िता ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद उनके जेठ पामेश उन पर बुरी नजर रखते थे। वह अक्सर जबरन उनके कमरे में घुस आते और छेड़छाड़ करते, साथ ही जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालते थे। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया, तो जेठ ने कहा कि अगर वह उनकी बात मान लेगी तो वह उसे रानी बनाकर रखेंगे, नहीं तो उसे घर से निकाल देंगे और कोई उनका कुछ नहीं कर पाएगा। पीड़िता का आरोप है कि विरोध करने पर पामेश और उनके बेटे यश ने उसे मारा-पीटा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। 28 जून 2025 को पीड़िता की सास, जेठ और जेठ के बेटे ने मिलकर उसे घर से निकाल दिया था। पीड़िता ने बताया कि वह अपने पति के कारोबार में भी शामिल थी और उसे बखूबी संभालती थी।
रिपोर्ट दर्ज, पुलिस कार्रवाई का इंतजार
पीड़िता की शिकायत पर कोतवाली नगर थाने में ससुराल वालों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। चौकी इंचार्ज संजीव प्रकाश ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। अब यह देखना बाकी है कि पुलिस इस मामले में आरोपियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाती है।
लखनऊ। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर से पूर्व अध्यक्ष व संरक्षक हृदय नारायण श्रीवास्तव की प्रथम पुण्यतिथि पर सोमवार को जियामऊ स्थित विश्व संवाद केंद्र में स्मृति सभा एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया।
प्रदेश अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईपीएस उमेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हृदय नारायण जी की सादगी व जनसेवा की भावना का अनुसरण संपूर्ण कायस्थ समाज को करना चाहिए।
इस अवसर पर विधायक ओपी श्रीवास्तव, भाजपा प्रवक्ता हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने भी उनके व्यक्तित्व कृतित्व के बारे में बताया।
इस दौरान ज्ञान प्रकाश अस्थाना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद निगम, संयोजक डीके श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी संजय निगम, नानक चंद्र, भरत दीक्षित, कुलदीप श्रीवास्तव, कीर्ति श्रीवास्तव, अतुल निगम और बीएस लाल आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व. हृदय नारायण श्रीवास्तव के पुत्र शेखर श्रीवास्तव ने सभी आगंतुकाें के प्रति आभार जताया।
बात यूपीए सरकार के समय की है, जिसमें डा. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्री यानी अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए जो टेलीकॉम लाइसेंस नीति बनाई थी। इसके चलते डब्ल्यूएलएल-एसटीडी घोटाला को अंजाम देने का मौका रिलायंस को मिला था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। जांच हुई तो पता चला कि एसटीडी और आईएसडी कॉल्स को लोकल दिखाकर रिलायंस ने सरकार को करोड़ों का चूना लगा दिया था। यह मामला बाद में रिलायंस से कुछ जुर्माना लेकर रफादफा कर दिया गया, जबकि सरकार के राजस्व का नुकसान कई गुना ज्यादा था। इस मामले में बिजनेस का नया हथकंडा उजागर हुआ था। रिलायंस; टेलीकॉम के रिटायर अधिकारियों को ऊंचे वेतन पर हायर कर लेती थी। इसके बाद उनका इस्तेमाल टेलीकॉम नीति में सेंधमारी के गुर बताने और मामले को फंसने न देने के लिए सेवाकाल में उनके अधीनस्थ रहे वे अधिकारी जो अब उच्च पदासीन हो गए थे, उनको प्रभावित करने में किया जाता था। फिर वह केवल पुराने लिहाज को भुनाने के रूप में हो या लेन-देन से उनको सेट करने के रूप में। सरकार को उसी समय खबरदार हो जाना चाहिए था कि उसके अधिकारियों द्वारा रिटायर होने के बाद किसी संदिग्ध कंपनी का चाकर बनने की गुंजाइश को कैसे कड़ा किया जाये, लेकिन यह कैसे होता। अंबानी तो हर पार्टी की सरकार का बाप जो होता है।
मिस्टर क्लीन राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, तब उनके वित्त मंत्री के रूप में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अर्थव्यवस्था को पारदर्शी और स्वच्छ बनाने के ठोस कदम उठाए थे। यह वो दौर था जब आयकर फार्म का सरलीकरण कर ईमानदार करदाताओं को सहूलियत प्रदान की गई थी, लेकिन काला धन इकठ्ठा करने वालों की शामत लाने का इंतजाम किया गया था। उन्होंने दुनिया की उस समय की आर्थिक अभिसूचना जुटाने वाली सर्वश्रेष्ठ कंपनी फेयरफैक्स को अनुबंधित किया था ताकि देश में किन लोगों के पास ज्यादा काला धन है और यह धन कहां निवेशित किया गया है, पता किया जा सके। कहा जाता है कि इसमें फेयरफैक्स ने अपनी जानकारी में सबसे ऊपर रिलायंस का नाम दर्ज किया था। पर राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले दिन से ही धीरू भाई अंबानी से अनुग्रहीत थे। मुरली देवड़ा के माध्यम से धीरू भाई अंबानी ने उनसे संपर्क जोड़कर कांग्रेस के उनके समय के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन का जो अत्यंत भव्य स्वरूप में हुआ था, उसका पूरा खर्चा उठाया था। इसलिए रिलायंस का तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह का विभाग बदल गया और बाद में नौबत उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाले जाने की आ गई।
PM बनने का रोड मैप बनी उठा-पटक
हालांकि यह उठा-पटक उनके लिए वरदान भी बनी। विश्वनाथ प्रताप सिंह का प्रधानमंत्री बनने का रोड मैप इसी शुरूआत से तैयार हुआ था। …लेकिन वीपी सिंह ऊंची सीढ़ियां चढ़े तो समानान्तर रिलायंस भी अपनी बुलंदी को बढ़ाता गया। उसका रुतबा उस मयार पर पहुंच गया जहां देश की सरकार बनाने और बिगाड़ने की कुंजी उसके हाथ में आ गई। मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद जनता दल की टूट स्वतः स्फूर्त नहीं थी। रिलायंस द्वारा खरीदे गए सांसदों के समर्थन से तथाकथित समाजवादी चंद्रशेखर को जीवन में एक बार प्रधानमंत्री बनने की अपनी हविश पूरी करने का मौका मिल पाया था, जबकि ऐसी सरकार को कबूल करना कलंक का विषय होना चाहिए था। बहरहाल इस पायदान पर पहुंचने के बाद रिलायंस को फिर कोई पीछे मुड़कर देखने के लिए विवश न कर सका। नरसिंहा राव ने पांच वर्षों तक अल्पमत सरकार चलाकर दिखाई, जिसमें कोई चमत्कार नहीं था। झारखंड मुक्ति मोर्चा रिश्वत कांड की याद लोगों को अभी भी होगी। जाहिर है कि यह अपने आप में इस बात को स्पष्ट करने वाला था कि भारत की राजनीति के फैसले अब जनादेश से नहीं बल्कि थैलीशाहों की मेहरबानी पर निर्भर करेंगे। बाद में अटल जी आये तो भी इसका चक्र नहीं टूटा। सभी जानते हैं कि उनकी सरकार में भी धीरू भाई अंबानी को सरकार रूपी कंपनी के मालिक के बतौर ट्रीटमेंट दिया जाता था। उस समय के अखबारों में यह दर्ज है कि जिस दिन अंबानी मुंबई से दिल्ली आते थे, अटल जी के दत्तक दमाद रंजन भटटाचार्य और पीएमओ का एक सीनियर अधिकारी उनकी अगवानी के लिए हवाई अड्डे पर हाजिर मिलता था। संयुक्त मोर्चे की अर्थहीन सरकारों की चर्चा के लिए मैंने जानबूझकर स्याही खर्च करने की जरूरत नहीं समझी। उस समय तक रिलायंस टेलीकॉम सैक्टर के एक बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो चुका था। इसके विभाग संचार की हालत यह थी कि मंत्री बेनीप्रसाद वर्मा रोते थे कि नीति निर्धारक वे हैं और उनके विभाग के निर्णयों को तय करने का काम अमर सिंह अपनी मुटठी में कैद किये हुए हैं। उनकी पार्टी के नेता मुलायम सिंह को बेनी बाबू के दुखड़े की कोई परवाह नहीं थी, क्योंकि अमर सिंह उनके लिए दुधारू सहयोगी थे। ऐसे में कहा जाए कि संचार विभाग तो अंबानी के पास गिरवी हो गया था तो अन्यथा न होगा। इस तरह रिलायंस के पैर देश की सत्ता में जमे तो मजबूत ही होते चले गए। मनमोहन सिंह की सरकार में उनका हस्तक्षेप कितना मजबूत था इसकी चर्चा इस आलेख की शुरूआत में हम कर ही चुके हैं। मोदी तो काला धन को विदेशों से खींचकर लाने की प्रतिज्ञा पर ही हीरो बने थे और लोगों के लिए उन पर विश्वास करने का बड़ा कारण यह था कि उनका कोई परिवार नहीं है। विवाह हुआ था, लेकिन जिसे घर बसाना कहते हैं वह उन्होंने कभी नहीं किया। उनके भाई हैं लेकिन उन्हें कभी लाभ पहुंचाया हो इसका उदाहरण उनके मुख्यमंत्रित्व काल से ही किसी को नहीं दिखा। इसलिए इतने वीतराग नेता से स्वाभाविक रूप से अपेक्षा थी कि वे काला धन रखने वाले अमीरों और भ्रष्ट कारगुजारी करने वालों पर कोई रहम नहीं करेगें। …लेकिन उनके मामले में मानवीय मनोविज्ञान के सहज नियम फेल दिखाई दे रहे हैं। अब जबकि मोदी के चहेते उद्योगपतियों का विस्तार विदेशों तक में भरपूर हो चुका है और उनकी व्यवसाय महत्वाकांक्षाओं का कैनवास अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पसर चुका है तो सरकार में उनके दखल को लेकर सतर्कता बरती जानी चाहिए थी लेकिन इस समय तो राष्ट्रीय हितों की कीमत पर इस मामले में उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है।
चर्चा का विषय बना हुआ है ओआरएफ
ओआरएफ का फुलफॉर्म है आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन। अंबानी ने आब्जर्वर के नाम से अखबार निकाले थे। इसी नाम से उन्होंने यह फाउंडेशन बनाया जो दरअसल एक थिंक टैंक है। इस फांउडेशन से पहले एस. जयशंकर जुड़े थे अब उनका बेटा ध्रुव जयशंकर अमेरिका में इस फाउंडेशन का हैड है। इस फाउंडेशन के लिए 65 प्रतिशत फंड अंबानी जुटाते हैं। 35 प्रतिशत फंडिंग इसमें विदेशी होती है। ध्रुव जयशंकर ही नहीं रॉ के दो रिटायर चीफ, बीएसएफ के रिटायर डीजी और सरकार को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले अधिकारी, पत्रकार और तमाम अन्य लोग इस फाउंडेशन में नौकरी कर रहे हैं। जैसा कांग्रेस के समय टेलीकॉम में बड़ा मुनाफा हथियाने के लिए रिलायंस ने उसके सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपना नौकर बनाकर मोहरा बनाया वैसा अब अंबानी और बड़े स्तर पर कर रहे हैं क्योंकि अब उनके पास पहले से भी ज्यादा ताकतवर लोगों की फौज है। अमेरिका में अंबानी के स्वार्थ को पूरा करने के लिए ध्रुव का इस्तेमाल क्यों नही हो सकता। आखिर पापा को उनकी बात तो माननी ही पड़ेगी। यहां तक कि चूंकि ध्रुव अमेरिका में सैट है, जहां की एजेंसियों को कहा जाता है कि निरंकुश पॉवर हैं तो उन्हें डराकर अमेरिका अपने हित के लिए भारत की नीतियों को ट्विस्ट करा दे यह आशंका दिमाग में क्यों नहीं रखी जानी चाहिए। आरोप लग रहा है कि ध्रुव जयशंकर की इसी हैसियत के कारण भारत की विदेश नीति के लिए गच्चा खाने की नौबत आई है।
अजीत डोभाल और उनके दो बेटे
अब बात अजीत डोभाल की, जो मोदी सरकार के पहले दिन से अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उनके दो बेटे हैं शौर्य और विवेक। शौर्य को वंशवाद के खिलाफ जुबानी जंग छेड़े मोदी जी को पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा का उम्मीदवार बनाते समय बिल्कुल नहीं लगा कि यह करके वे लोगों की निगाह में अपना धर्म भ्रष्ट करने के अपराधी बन रहे हैं। आखिर शौर्य ने फील्ड पर कोई काम तो किया नहीं था, जिससे पौड़ी की जनता शौर्य-शौर्य करके उन्हें चुनाव मैदान में लाने की मांग कर रही हो! उनको टिकट के लिए चयनित करने का एक ही आधार था कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे हैं। शौर्य और विवेक के बिजनेस कनेक्शन भी चर्चा का विषय है। शौर्य का कनेक्शन इण्डिया फाउंडेशन नाम के एक थिंक टैंक से है, जिसमें निर्मला सीतारमण भी निदेशक रहीं हैं। निजी कंपनी द्वारा पोषित इस फाउंडेशन की भी सरकार को नीतियों के मामले में गाइड करने में बड़ी भूमिका बताई जाती है। अब उसकी गाइडेंस देश के हितों के मद्देनजर होती है या अपने आका कॉरपोरेट के हितों के लिए; यह शोध का विषय है। विवेक ने कैमल द्वीपीय देश में अपनी एक कंपनी रजिस्टर करा रखी है। दुनिया में यह चर्चा आम है कि कैमल, कर चोरों का स्वर्ग देश है जहां बड़े पैमाने पर मनी लांड्रिंग का काम होता है। खुद अजीत डोभाल भी विवेकानंद फाउंडेशन के नाम से राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित एक थिंक टैंक चला रहे हैं।
देश की गोपनीय जानकारियां सुरक्षित ?
क्या ऐसी स्थितियों में देश की गोपनीय जानकारियां सुरक्षित रहने को लेकर आश्वस्त हुआ जा सकता है। क्या ऐसा सोचा जा सकता है कि ऐसी स्थितियों में सरकार देश के लोगों के उत्थान की नीतियां बना और लागू कर सकती हैं या तंत्र ने अपने को निहित स्वार्थों के हितों की पूर्ति के लिए टिका दिया है। हो सकता है कि हमारे अंदेशे गलत हों लेकिन सरकार को ऐसे विधि-विधान बनाने की सोचना ही पड़ेगा, जिसमें उच्च पदों के रिटायर लोगों के लिए मुनाफाखोरों का मोहरा बनने की गुंजाइश न रहे। इसी के दृष्टिगत नियम बनाया गया है कि विधायक, सांसद, मंत्री पद पर रहते हुए ठेकेदारी आदि कोई निजी कारोबार नहीं करेंगे तो इस बंदिश का विस्तार और क्यों नहीं हो सकता? रिटायरमेंट के बाद उच्च पदाधिकारियों को अच्छी खासी पेंशन मिलती है फिर भी उनका पेट क्यों नहीं भरता? रिटायरमेंट के बाद अगर वे घर नहीं बैठना चाहते तो देश हित के लिए बिना कुछ लिए स्वयंसेवा क्यों नहीं करते? व्यक्तिगत कामों की चिंता के अलावा हर व्यक्ति में समाज के लिए अपने समय और कमाई का एक अंश अर्पित करने का जज्बा होना चाहिए। अगर ऐसे संकल्प नहीं होंगे तो उच्चादर्श पर आरूढ़ समाज के निर्माण की कल्पना कैसे हो सकेगी?
मेरठ के युवक को शिक्षिका ने किया अगुवा, तलाश रही पुलिस
बिजनौर। पुलिस ने एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। एक शिक्षिका ने अपने प्रेमी और उसके दोस्तों के साथ मिलकर मेरठ के एक युवक को अगवा कर लिया और उसकी बुरी तरह पिटाई कर मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अपहृत युवक की बरामदगी के लिए पुलिस टीम लगी हुई हैं।
स्वाट/सर्विलांस व थाना चाँदपुर पुलिस टीम ने मु.अ.सं. 420/25 धारा 140 (1)/115(2)/3(5) बीएनएस में वांछित 05 अभियुक्तों को घटना में प्रयुक्त कार, मोटरसाईकिल एवं 04 मोबाईल फोन सहित किया गिरफ्तार।
यह मामला तब शुरू हुआ जब मेरठ के अनुराग आर्य ने अपनी जीरो एफआईआर (Zero FIR) में बताया कि उनके चचेरे भाई अमित आर्य को बिजनौर बुलाकर ज्योति और 4 अज्ञात लोगों ने पीटा और उसे अपनी कार में कहीं ले गए। इस शिकायत के आधार पर, चांदपुर थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान, पुलिस ने पाया कि इस घटना की मुख्य आरोपी ज्योति है, जो चांदपुर के एक कॉलेज में शिक्षिका है। उसके साथ उसका प्रेमी सचिन और उसके दोस्त यक्षु, शुभम और अनस भी इस वारदात में शामिल थे।
जानिए क्या हुआ था
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि ज्योति का सचिन के साथ प्रेम संबंध था। अमित आर्य ने इंस्टाग्राम पर ज्योति को अश्लील फोटो और वीडियो भेजना शुरू कर दिया था। उसने ज्योति को लगातार कॉल करके परेशान किया। ज्योति ने यह बात सचिन को बताई और उन्हें स्क्रीनशॉट भी दिखाए। इसके बाद, ज्योति, सचिन और उनके दोस्तों ने अमित को सबक सिखाने की योजना बनाई।
अपहरण और पिटाई: 11 जुलाई 2025 को, ज्योति, सचिन और यक्षु एक कार से बिजनौर के गोलबाग चौराहे पर पहुंचे। उन्होंने अमित को वहां बुलाया और कालीमाता मंदिर से झालू रोड पर उसका अपहरण कर लिया।
मारपीट और वीडियो रिकॉर्डिंग: आरोपियों ने अमित का फोन छीन लिया, उसकी सिम तोड़ दी और उसे चांदपुर की अकोन्दा नहर पटरी पर ले गए। वहां उन्होंने अमित की जमकर पिटाई की। इस दौरान, यक्षु ने अपने फोन से पूरी घटना का वीडियो बनाया।
मरणासन्न हालत में छोड़ा: पिटाई के बाद, उन्होंने अमित के कपड़े बदले और उसे उसकी सिम के बिना मोबाइल लौटा दिया। इसके बाद, वे उसे अम्हेड़ा चौराहे से आगे कुल्चाना गांव के पास सड़क किनारे मरणासन्न हालत में छोड़कर भाग गए।
पुलिस की पूछताछ में क्या हुआ खुलासा ?
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विनय कुमार सिंह ने बताया कि अभियुक्तगण से पूछताछ पर यह तथ्य प्रकाश में आए हैं कि ज्योति राजपूत वर्ष 2023 से आसरा कॉलेज, नहटौर रोड पर शिक्षिका के पद पर कार्यरत है तथा वर्ष 2023 से उसके सचिन से संबंध थे। दिनांक 04 जुलाई 2025 को ज्योति की इंस्टाग्राम पर अमित आर्या नामक व्यक्ति की आईडी से हाय/हैलो मैसेज आए, जिनका उसने उत्तर नहीं दिया, परन्तु दिनांक 08 जुलाई 2025 को अमित द्वारा ज्योति को इंस्टाग्राम पर अश्लील फोटो/वीडियो भेजे जाने लगे तथा आडियो/वीडियो कॉल कर परेशान किया गया। दिनांक 09 जुलाई 2025 को कॉलेज के दौरान भी लगातार कॉल आने लगी तो कॉलेज मालिक के बेटे प्रियांशु पुत्र कुलवन्त के कहने पर ज्योति ने अपना नम्बर अमित को दे दिया। इसके बाद अमित द्वारा लगातार वाट्सएप कॉल/मैसेज आने लगे, जिनकी जानकारी अभियुक्ता ज्योति ने सचिन को दी और स्क्रीनशॉट भी दिखाए। ज्योति ने सचिन व प्रियांशु के साथ मिलकर अमित आर्या को बुलाकर मारपीट की योजना बनाई, जिसमें सचिन द्वारा यक्षू उर्फ यक्षराज, छोटू उर्फ शुभम व अनस को भी सम्मिलित किया गया। दिनांक 11.07.2025 को पूर्व योजना के अनुसार ज्योति, सचिन व यक्षू आई-20 कार से निकले और गोलबाग चौराहा, बिजनौर पर अमित को बुलाकर काली माता मंदिर से झालू रोड पर हत्या करने के इरादे से अपहरण कर लिया गया, जहां पर अभियुक्तों ने अमित को दबोचकर उसका मोबाइल छीन कर सिम तोड़ दिया तथा अमित को अकोंधा नहर पटरी चाँदपुर ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। इसकी वीडियो यक्षू उर्फ यक्षराज ने अपने मोबाईल फोन से बना ली। इसके उपरान्त अमित के कपड़े बदलवाकर उसका मोबाइल (बिना सिम) लौटाकर कार में बैठाया गया और सचिन, यक्षू व छोटू द्वारा उसे आई-20 कार से अम्हेड़ा चौराहे से आगे कुल्चाना गांव के पास सड़क किनारे मरणासन्न अवस्था में कार से उतार कर फरार हो गए।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने इस मामले में ज्योति पुत्री परमेन्द्र नि० स्याऊ थाना चाँदपुर जनपद बिजनौर, सचिन उर्फ शोभित पुत्र गजराज, यक्षु उर्फ यक्ष उर्फ यक्षराज पुत्र राकेश, शुभम उर्फ छोटू पुत्र सुभाष निवासीगण ग्राम कौशल्या थाना चाँदपुर जनपद बिजनौर और अनस कुरैशी पुत्र उस्मान नि० ग्राम बास्टा थाना चाँदपुर जनपद बिजनौर को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से घटना में इस्तेमाल की गई एक आई-20 कार नंबर DL7CL-3036, एक प्लैटिना मोटरसाइकिल UP20CD-6056, एक वेन्यू कार UP23AM-2051, अमित के मोजे और 4 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
आरोपियों पर दर्ज मामले:
सचिन उर्फ शोभित: इसके खिलाफ पहले भी 6 मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या का प्रयास (धारा 307), मारपीट, धमकी और हथियार अधिनियम (Arms Act) जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। यक्षु उर्फ यक्ष उर्फ यक्षराज: इसके खिलाफ मारपीट और धमकी देने के 2 पुराने मामले दर्ज हैं। शुभम उर्फ छोटू: इसके खिलाफ भी मारपीट और धमकी का एक मामला दर्ज है। ज्योति: इसके खिलाफ कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।
गिरफ्तार करने वाली थाना चांदपुर की पुलिस टीम: प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार, प्रभारी स्वाट टीम, निरीक्षक सचिन मलिक मय टीम उप-निरीक्षक मदनपाल राणा, उप-निरीक्षक संदीप पंवार, उप-निरीक्षक हिमांशु पंवार, महिला उप-निरीक्षक सुश्री अल्पना, उप-निरीक्षक रोबिन कौशिक, हेड कांस्टेबल विपिन कुमार, हेड कांस्टेबल कृष्णपाल, कांस्टेबल अवनीश, कांस्टेबल सागर कुमार, कांस्टेबल चरन सिंह, महिला कांस्टेबल प्रीति।
उत्तर प्रदेश बौद्ध पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करेगा
लखनऊ/बैंकॉक, 25 अगस्त, 2025:
उत्तर प्रदेश सरकार ‘पाटा ट्रैवल मार्ट 2025’ में अपनी बौद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश करने के लिए तैयार है। यह कार्यक्रम 26 से 28 अगस्त तक बैंकॉक, थाईलैंड के क्वीन सिरकिट नेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाला है।
पाटा ट्रैवल मार्ट 2025, या PTM 2025, 26 से 28 अगस्त, 2025 तक क्वीन सिरिकिट नेशनल कन्वेंशन सेंटर (QSNCC), बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित किया जा रहा है। यह एक दिवसीय सम्मेलन, दो दिवसीय बिज़नेस-टू-बिज़नेस (B2B) ट्रैवल मार्ट और नेटवर्किंग के अवसरों का एक संयोजन है, जो एशिया प्रशांत क्षेत्र के यात्रा और पर्यटन पेशेवरों को एक साथ लाता है।
बौद्ध सर्किट पर ध्यान केंद्रित
‘उत्तर प्रदेश में अपनी बोधि यात्रा शुरू करें’ शीर्षक के विशेष अभियान के साथ, राज्य अपने अद्वितीय आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक साझेदारी के साथ मिलाते हुए, बौद्ध पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को उजागर करेगा। उत्तर प्रदेश के पवेलियन में बौद्ध सर्किट के छह प्रमुख पवित्र स्थलों – सारनाथ, कपिलवस्तु, संकिसा, कौशांबी, श्रावस्ती और कुशीनगर – पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। गहन प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कहानियों और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से, आगंतुकों को भगवान बुद्ध की यात्रा का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय परंपराओं, शिल्प और व्यंजनों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश अपने आधुनिक विकास को भी प्रदर्शित करेगा, जिसमें कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विश्व स्तरीय सुविधाएं, वाराणसी तक बेहतर कनेक्टिविटी और बौद्ध स्थलों पर उन्नत यात्री बुनियादी ढांचा शामिल है। ये सभी सुविधाएं अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “पाटा ट्रैवल मार्ट में हम उत्तर प्रदेश को बौद्ध पर्यटन के लिए दुनिया के सबसे बेहतरीन गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करेंगे। हमारा बौद्ध सर्किट आध्यात्मिक खोज के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं के साथ सांस्कृतिक और अनुभवात्मक यात्राएं भी प्रदान करता है। नए हवाई अड्डों, बेहतर कनेक्टिविटी और वैश्विक ऑपरेटरों के साथ सहयोग के माध्यम से, हम यूपी को अंतर्राष्ट्रीय आगंतुकों के लिए बौद्ध यात्रा का केंद्रीय केंद्र बनाने के लिए तैयार हैं।”
पर्यटन एवं संस्कृति के प्रमुख सचिव, मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा, “राज्य ने विश्व स्तरीय सुविधाओं, डिजिटल पहुंच और स्थायी पर्यटन प्रथाओं के साथ बौद्ध सर्किट को मजबूत करने के लिए एक केंद्रित प्रयास किया है। पाटा में, हम एयरलाइंस, डेस्टिनेशन मैनेजरों और निवेशकों के साथ वैश्विक साझेदारी बनाने के लिए जुड़ेंगे, जो उत्तर प्रदेश में अधिक यात्रियों को लाएगा। हमारा लक्ष्य यूपी में बोधि यात्रा को तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक निर्बाध, सुरक्षित और समृद्ध यात्रा बनाना है।”
व्यापक पर्यटन परिदृश्य
बौद्ध प्रदर्शन के साथ, उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को अपने व्यापक पर्यटन परिदृश्य से भी परिचित कराएगा। इसमें अयोध्या और मथुरा-वृंदावन की जीवित परंपराएं, कन्नौज की इत्र विरासत और देव दीपावली, महाकुंभ, रंगोत्सव और ताज उत्सव जैसे भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।
बैंकॉक में इन तीन दिनों के दौरान, यूपी पर्यटन नए सहयोग बनाने, यात्रा योजनाओं को सह-निर्मित करने और वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में उत्तर प्रदेश की दृश्यता को मजबूत करने के लिए वैश्विक हितधारकों के साथ बैठकें करेगा। उम्मीद है कि राज्य की भागीदारी व्यापक रुचि को आकर्षित करेगी और भारत के आध्यात्मिक हृदय के रूप में इसकी छवि को मजबूत करेगी, जो दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है।
पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह पर भाजपा हाईकमान का लाड़ आजकल जिस तरह बरस रहा है वह चर्चा का विषय बना हुआ है। गत 19 अगस्त को ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे करण भूषण ने अपने बच्चों कामाक्षी सिंह और अमर्थ भूषण सिंह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दोनों ही नेता बहुत व्यस्त रहते हैं। प्रधानमंत्री तो इतने व्यस्त रहते हैं कि हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ कई बार उनसे मुलाकात करने दिल्ली गए लेकिन उनको अमित शाह और जेपी नड्डा के दर्शन में ही संतोष करके वापस लौटना पड़ा। प्रधानमंत्री उनसे मुलाकात के लिए समय नही निकाल सके। हालांकि कई बार के प्रयास के बाद उन्हें किसी तरह प्रधानमंत्री से भेंट की इच्छा का सौभाग्य बाद में प्राप्त हो गया था। लेकिन करण भूषण सिंह पहली बार के निर्वाचित सांसद हैं और वह भी एवजी सांसद हैं। उनके पिता ब्रजभूषण के महिला पहलवानों पर दिखाई गई मर्दानगी के कारण भाजपा उनको 2024 का टिकट देने में सकुचा गई थी। लेकिन ऐसे पुण्य कर्ता से मुंह मोड़ने का पाप भी संभव नही था। इसलिए बात बनाई गई और ब्रजभूषण के स्थान पर उनके बेटे करण भूषण को टिकट दे दिया गया तो करण भूषण एवजी सांसद हुए न!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति में वंशवाद के खिलाफ भी दिल्ली आने के बाद से परचम उठाये हुए हैं। लेकिन करण भूषण को मुलाकात का समय देते हुए इस मामले में उनको धर्म भ्रष्ट होने का डर नहीं सताया। प्रधानमंत्री की बहादुरी के ऐसे नमूने हर दिन और दिन में कई बार सामने आते हैं जब कई बार अपनी घोषित आन तोड़ने में लोकलाज उनके आड़े नहीं आ पाती। चूंकि वे अलौकिक प्रधानमंत्री हैं इसलिए उन्हें जवाबदेही के घेरे में लेना मुनासिब नहीं है।
महिला पहलवान जब उनके खिलाफ आसमान सिर पर उठाए हुए थीं तो उस समय प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के लिए उनके गुणों को पहचानने का अवसर था। चूंकि देश के ये शिखर नेता इस मामले में असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। इन्होंने कई बार अपनी गुण ग्राहक विशिष्टता का प्रदर्शन किया है। अजय मिश्रा टिन्नी के साहबजादे द्वारा अपनी थार जीप से किसानों को कुचलने के मामले में भी इन नेताओं की अडिगता का नमूना सामने आया था। अजय मिश्रा ने खुलेआम इस घटना को नकारने का प्रयास करके गृह राज्य मंत्री की अपनी हैसियत का उपयोग केस को ट्विस्ट करने की कोशिश की थी लेकिन इस दुस्साहस के बावजूद उनका विभाग तक बदलने की नही सोची गई। इसे प्रशासनिक दृढ़ता कहें या धृष्टता यह लोगों के विवेक पर निर्भर है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इतने साहसी नही हैं। वे मानते हैं कि लोकलाज भी कोई चीज है जिस पर आंच आते दिखती है तो वह हाथ खींचने में अपनी भलाई समझते हैं। महिला पहलवानों के मामले में केंद्रीय नेतृत्व के रवैये के विपरीत योगी का रुख अपने पुराने मित्र ब्रजभूषण के प्रति ऐसा रहा कि वे उसे दगा की तरह मानने लगे।
ब्रजभूषण और सीएम के बीच बोलचाल तक बंद हो गई। खबरें तो यहां तक हैं कि देवीपाटन मंडल में ब्रजभूषण शरण सिंह की सरकार के समानान्तर हुकूमत को खत्म करने तक का इरादा योगी ने बना लिया तांकि ब्रजभूषण सिंह को एहसास हो सके कि उनको सीमा का ध्यान रखना चाहिये था। पानी सिर से ऊपर चला गया तो कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके तहत योगी ने पीडब्लूडी और अन्य विभागों में टेंडरों पर उनके एकाधिकार को रोक दिया। गोंडा के डीएम, एसपी को हिदायत दी गई कि वे ब्रजभूषण से दूरी बनाकर काम करें। देवीपाटन क्षेत्र में उन्होंने ब्रजभूषण शरण सिंह के बरक्स कीर्तिवर्धन सिंह का कद बढ़ाना शुरू कर दिया।
ब्रजभूषण ने अपना साम्राज्य खत्म होते देख केंद्रीय नेतृत्व का सहारा लिया तो केंद्रीय नेतृत्व ने योगी आदित्यनाथ को इशारा दिया कि ब्रजभूषण से राजनीतिक अदावत पार्टी को मंहगी पड़ सकती है इसलिए उन्हें मुलाकात का समय दें और उनसे दूरियां खत्म करें। योगी आदित्यनाथ ने इस पर यस कह दिया जिसके चलते 31 महीने के अबोलेपन के बाद 21 जुलाई को ब्रजभूषण लखनऊ में योगी के सरकारी आवास पर पहुंचे। योगी और उनके बीच कोई कहता है कि केवल 15 मिनट बात हुई और कोई कहता है कि मुलाकात 1 घंटे चली। लेकिन जो भी हो यह स्पष्ट रहा कि योगी ने मुलाकात में किसी ठोस मुददे पर चर्चा का अवसर नही आने दिया और उनकी और उनके परिवार की कुशलक्षेम पूंछने में मुलाकात का पूरा समय गुजार दिया। ब्रजभूषण योगी के इस रवैये से खिन्न होकर निकले लेकिन उन्होंने फिर भी संयम साधा। पर पत्रकारों से यह जताकर कि मुलाकात की पहल उन्होंने नही की थी मुख्यमंत्री की ओर से मिलने का संदेश आया तो वे चले आये ब्रजभूषण ने कहीं न कहीं भड़ास सी निकाली थी। इसके बाद ब्रजभूषण के सामने यह स्पष्ट होता गया कि अभी भी देवीपाटन मंडल में उनका साम्राज्य बरकरार न रहने देने के योगी के निश्चय पर कोई अंतर नही आया तो ऐंठू मिजाज के ब्रजभूषण भी जबावी कार्रवाई के लिए तैयार हो गये। योगी से भेंट करने गये बाबा रामदेव को सार्वजनिक रूप से काना बाबा कहकर ब्रजभूषण ने एक तरह से योगी को चिहुकाने का काम किया। मीडिया में इस तरह की खबरे प्लांट कराई जाने लगीं जिससे ब्रजभूषण को उत्तर प्रदेश की राजनीति के अत्यंत सशक्त राजपूत नेता के रूप में जनमानस में स्थापित किया जा सके। यहां तक कि ऐसी खबरे भी चलवाई गईं कि ब्रजभूषण को भाजपा का हाईकमान योगी का विकल्प बना सकता है। जाहिर है कि ब्रजभूषण के कद संवर्द्धन की इस कवायद के पीछे भाजपा हाईकमान के अदृष्ट प्रयास रहे। इसी कड़ी में उनके पुत्र से परिवार सहित भेंट करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने समय निकाल लिया। चूंकि उनकी नजर में इस मुलाकात में बड़ी राष्ट्रीय उपयोगिता नजर आई होगी।
2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री थे तो तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह देश के सबसे बड़े क्षत्रिय नेता के रूप में आम धारणाओं में मान्य किये जा चुके थे। वैसे तो राजनाथ ने ही नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पार्टी की ओर से पेश कराने मेें भूमिका निभाई थी। लेकिन कहा यह जाता है कि उनको यह उम्मीद नही थी कि चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा। इसलिए उन्होंने सोच रखा था कि गठबंधन में सहयोगी दलों को मोदी स्वीकार नही होगें और गेंद उनके पाले में आ जायेगी पर यह नही हुआ। कुर्सी पर आसीन होने के बाद ये चर्चाएं मोदी के कानों में भी पहुंची तो उन्होंने राजनाथ के कद के अल्पीकरण का इंतजाम किया। इसी के तहत उन्होंने नरेंद्र सिंह तोमर को अपने मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाकर राजनाथ के समकक्ष खड़ा किया। उत्तर प्रदेश में भी क्षत्रियों के एकछत्र नेता के रूप में राजनाथ के कद को कट साइज करने के लिए ही उन्होंने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति दे दी। इस क्रम में शुरूआत में केंद्रीय नेतृत्व ने योगी को पर्याप्त प्रोत्साहित भी किया पर बाद में अपनी महत्वाकांक्षाओं के कारण जिसे दवा समझा गया था वे योगी केंद्रीय नेतृत्व के लिए दर्द बन गये। इस बीच राजनाथ चूंकि मोदी के सामने पूरी तरह सरेंडर कर गये थे इसलिए नरेंद्र सिंह में केंद्रीय नेतृत्व की रुचि समाप्त हो गई थी और उन्हें मध्य प्रदेश का विधानसभा अध्यक्ष बनाकर निपटा दिया गया था। अब योगी के मुकाबले नया ठाकुर चेहरा लाने की मशक्कत हो रही है। क्षत्रिय राजनीति की बिसात पर केंद्रीय नेतृत्व के मोहरेबाजी के खेल में फिलहाल ब्रजभूषण के नाम की गोटी लाल की जा रही।
ताजी हवा की कमी बन सकती है दम घुटने (asphyxiation) का कारण
एयर टाइट कमरे में AC चलाते वक्त बरतें सावधानी ⚠️
पूरी तरह से बंद (एयर टाइट) कमरे में AC चलाना खतरनाक हो सकता है। इसका सबसे बड़ा खतरा है ताजी हवा की कमी, जिससे कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) का स्तर बढ़ सकता है और ऑक्सीजन (O_2) का स्तर घट सकता है, जो दम घुटने (asphyxiation) का कारण बन सकता है।
एयर टाइट कमरे में AC चलाते समय हवा के सही वेंटिलेशन के लिए थोड़ी देर के लिए दरवाजा खोलना, नियमित समय पर एयर फिल्टर साफ करना, और एसी को बहुत कम तापमान पर लगातार चलाने से बचना महत्वपूर्ण है। इससे हवा में नमी बनी रहेगी और घुटन या एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ताजी हवा की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करें। एयर कंडीशनर कमरे की मौजूदा हवा को ठंडा करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, वे बाहर से ताजी हवा नहीं लाते। हवा के आदान-प्रदान के लिए एक खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला रखें।
खतरे ⚠️
ऑक्सीजन की कमी: जब लोग एक बंद जगह में साँस लेते हैं, तो वे ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। एक एयर टाइट कमरे में, ऑक्सीजन का स्तर धीरे-धीरे कम होता जाएगा जबकि कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता जाएगा। इससे सिरदर्द, चक्कर आना और भ्रम जैसी समस्याएँ हो सकती हैं, और गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है।
कार्बन डाइऑक्साइड का जमाव: CO_2की अधिक मात्रा भी जहरीली हो सकती है। भले ही कमरे में ऑक्सीजन मौजूद हो, अधिकCO_2 होने पर शरीर उसका ठीक से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे हाइपरकेनिया (hypercapnia) नामक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
AC में खराबी:
हालाँकि यह दुर्लभ है, एक खराब AC यूनिट से रेफ्रिजरेंट गैस लीक हो सकती है, जो जहरीली होती है। एक सीलबंद कमरे में, ये गैसें बहुत जल्दी खतरनाक स्तर तक जमा हो सकती हैं।
सुरक्षा उपाय और सुझाव ✅
सुनिश्चित करें उचित वेंटिलेशन:
एग्जॉस्ट फैन का उपयोग करें: यदि संभव हो, तो कमरे की बासी हवा को बाहर निकालने के लिए एग्जॉस्ट फैन का उपयोग करें, जिससे ताजी हवा अंदर आ सके।
कार्बन डाइऑक्साइड मॉनिटर लगाएं: अतिरिक्त सुरक्षा के लिए, एक CO_2 मॉनिटर लगाने पर विचार करें जिसमें अलार्म हो। यह डिवाइस आपको तब अलर्ट करेगा जब कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर असुरक्षित हो जाएगा।
कमरे को पूरी तरह से सील करने से बचें: बेहतर कूलिंग के लिए दरवाजों, खिड़कियों या किसी भी अन्य खुले स्थान को टेप लगाकर “अधिक एयर टाइट” बनाने की कोशिश न करें। कूलिंग दक्षता में थोड़ी सी वृद्धि के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उठाना सही नहीं है।
नियमित AC रखरखाव: यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका AC सही ढंग से काम कर रहा है और किसी भी संभावित रिसाव को रोकने के लिए, उसकी नियमित सर्विसिंग करवाएं। हमेशा अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य को कूलिंग दक्षता से ऊपर रखें। एक अच्छी तरह से हवादार कमरा ही एक सुरक्षित कमरा है।
बिजनौर। भुइयार समाज की धर्मशाला का निर्माण अब जल्द ही शुरू होगा। इसके लिए बिजनौर मुख्यालय पर लगभग 192 वर्ग गज की भूमि का चयन कर लिया गया है।
भुइयार समाज उत्थान समिति (रजि०) बिजनौर के सौजन्य से आज, 24 अगस्त 2025 को, एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक महा सिंह के नवनिर्मित व्यावसायिक भवन, बख्शीवाला फाटक के पास, बिजनौर में हुई।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष करनपाल सिंह ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी महामंत्री बलजीत सिंह ने संभाली। इस दौरान समाज के लिए धर्मशाला के निर्माण हेतु भूमि खरीदने पर चर्चा हुई। अध्यक्ष ने बताया कि बिजनौर मुख्यालय पर लगभग 192 वर्ग गज की भूमि का चयन कर लिया गया है। इस आवश्यक बैठक में समिति के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, जिनमें संरक्षक राजपाल सिंह और विजयपाल सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष बलवंत सिंह, कोषाध्यक्ष सुभाष सिंह, प्रचार मंत्री शेर सिंह, और अन्य कोर कमेटी सदस्य शामिल थे।
नूरपुर से भी मास्टर हरपाल सिंह, कैलाश सिंह, विजयपाल और देवराज सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस बैठक में शामिल हुए। सभी ने समाज के उत्थान के लिए धर्मशाला निर्माण के इस प्रयास का समर्थन किया।
संत निरंकारी मंडल, ब्रांच चांदपुर का विशाल रक्तदान शिविर
लंगर और एक विशाल सत्संग का भी आयोजन
निरंकारी मिशन के शिविर में 100 यूनिट रक्तदान
~ भूपेंद्र निरंकारी
चांदपुर, बिजनौर। संत निरंकारी मंडल, ब्रांच चांदपुर के तत्वावधान में धनोरा रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में रविवार को एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन चांदपुर की पूर्व विधायक कमलेश सैनी और बरेली जोन 58 के जोनल इंचार्ज संजीव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
शिविर में जिला संयुक्त चिकित्सालय बिजनौर के डॉक्टरों की देखरेख में करीब 100 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। इस नेक कार्य में बिजनौर, नजीबाबाद, हल्दौर, नूरपुर, धामपुर, किरतपुर, खानपुर खादर जैसी जनपद की विभिन्न ब्रांचों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष रक्तदाताओं ने भाग लिया। रक्तदान शिविर के साथ-साथ, लंगर और एक विशाल सत्संग का भी आयोजन किया गया।
1985 से अब तक लगभग 10 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान
सत्संग में जोनल इंचार्ज संजीव अग्रवाल ने निरंकारी मिशन की रक्तदान परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मिशन 1985 से लगातार रक्तदान कर रहा है और अब तक लगभग 10 लाख यूनिट से अधिक रक्तदान कर चुका है। उन्होंने सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने और उसके महत्व पर भी जोर दिया, यह बताते हुए कि यही ज्ञान आत्मा को मोक्ष और मुक्ति दिला सकता है।
कार्यक्रम का संचालन महात्मा सुरेंद्र खन्ना ने किया। इस दौरान जनपद बिजनौर के बिजनौर, नजीबाबाद, हल्दौर, नूरपुर, धामपुर, किरतपुर, खानपुर खादर सहित विभिन्न ब्रांचों के रक्तदाताओं और सेवादारों का विशेष योगदान रहा।सत्संग कार्यक्रम में खानपुर खादर ब्रांच के कैलाश सिंह, धामपुर से भीम सिंह, योगेश कुमार, खानपुर राजा के ताजपुर ब्रांच से मुकेश, सुरेंद्र सिंह, किरतपुर से हुकम सिंह, नहटौर से कुशल पाल शर्मा, बिजनौर ब्रांच से भूपेंद्र निरंकारी पत्रकार, क्षेत्रीय संचालक पवन कुमार, डीके सागर, बृजेश कुमार के साथ ही चांदपुर ब्रांच के संचालक राहुल खन्ना, पारुल, अंकित, चारुल, संतोष कुमारी, मिथिलेश, अनीता, मनोज, कमल कुमार, खानपुर शिक्षक यशराज और आदित्य समेत कई अन्य लोगों ने अपना सहयोग दिया।
स्थानीय मुखी डॉ. केपीएस चौहान ने सभी अतिथियों, मीडिया कर्मियों और सेवादल सदस्यों का आभार व्यक्त किया। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की डॉ. जैस्मिन के नेतृत्व में डॉ. सुमित, योगेंद्र शर्मा, विनोद कुमार सहित 10 सदस्यीय टीम ने रक्तदान प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर मीडिया कर्मी राजीव अग्रवाल अमर उजाला, पवन शर्मा दैनिक जागरण, रामावतार शर्मा, मुनेश चंद्र शर्मा, धर्मेंद्र कुमार पब्लिक इमोशन आदि सहित अन्य पत्रकार भी उपस्थित रहे।
गौतमबुद्ध नगर-गाजियाबाद के प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहार का पर्यटन विकास
धार्मिक पर्यटन के विकास पर खर्च होंगे 07 करोड़ रुपए
लखनऊ: 24 अगस्त, 2025
उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए तेजी से काम कर रही है। प्राचीन मंदिरों, गुरुद्वारे और बौद्ध विहार जैसे धार्मिक स्थलों की भव्यता पुनर्स्थापित करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने मेरठ मंडल की आठ परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जिलों में धार्मिक पर्यटन के विकास पर कुल 07 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि विभागीय प्रयासों से श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और प्रदेश में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। हाल के वर्षों में धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे प्रमुख तीर्थों के साथ-साथ श्रद्धालुओं का रुझान प्रदेश के नए गंतव्यों की ओर भी बढ़ रहा है। मंत्री ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और पर्यटक विकास विभाग की प्राथमिकता में शामिल है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे होने से गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं। इसी क्रम में गौतमबुद्ध नगर जनपद के ग्राम नगली वाजिदपुर के प्राचीन बेरी वाला मंदिर और जेवर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सिरसा माचीपुर जेवर में मां भूड़ावाली देवी मंदिर का पर्यटन विकास का 01-01 करोड़ रुपए की स्वीकृत राशि से किया जाएगा। इसी प्रकार, नोएडा विधानसभा क्षेत्र के अक्षरधाम कॉलोनी स्थित धम्मदीप बौद्ध विहार और ग्रेटर नोएडा स्थित साईट- बी, सूरजनगर स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा के पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए क्रमशः 50-50 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। पर्यटन विभाग के इस तरह के प्रयासों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गाज़ियाबाद जिले के पर्यटन विकास को लेकर बड़ी पहल की गई है। पर्यटन विभाग द्वारा जिले के प्राचीन मंदिरों का सौंदर्यीकरण और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार कराया जाएगा। इसके तहत जय भीम पार्क (वार्ड-01, कृष्णा नगर बागू), मुरादनगर विधानसभा के ग्राम असालतनगर स्थित श्री हनुमान जी मंदिर, नगर निगम साहिबाबाद के वार्ड-31 सिहानी स्थित प्राचीन शिव मंदिर और मोदीनगर विधानसभा के नगर पंचायत निवाड़ी स्थित चुकाय वाली माता मंदिर के पर्यटन विकास कार्यों पर क्रमशः एक-एक करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना को मूर्त रूप दे रहा है। परियोजनाओं के माध्यम से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों का पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। इन प्रयासों से आधुनिक आधारभूत ढांचे का निर्माण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक विरासत को आधुनिक रूप देकर पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय संस्कृति को संजोए रखना है।
ऑटो चालक ने डॉक्टर से 200 मीटर दूरी के वसूले ₹ 2000
लखनऊ। लखनऊ रेलवे स्टेशन और लखनऊ जंक्शन के नामों के बीच भ्रम का फायदा उठाकर ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से मनमानी वसूली का एक और मामला सामने आया है। इस बार केजीएमयू के डॉक्टर सनी चौधरी को इसका शिकार होना पड़ा, जिनसे महज 200 मीटर की दूरी तय करने के लिए एक ऑटो चालक ने 2000 रुपए वसूल लिए।
डॉक्टर चौधरी को शुक्रवार की सुबह देहरादून के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस पकड़नी थी। स्टेशन के नामों में भ्रम के कारण वह लखनऊ स्टेशन (चारबाग) पहुँच गए, जबकि उनकी ट्रेन लखनऊ जंक्शन (छोटी लाइन) से छूटने वाली थी। स्टेशन के बाहर एक ऑटो चालक ने उन्हें सही प्लेटफॉर्म तक पहुँचाने का झाँसा दिया। ऑटो चालक डॉक्टर को 200 मीटर दूर लखनऊ जंक्शन तक ले गया और इसके लिए उनसे 2000 रुपए वसूल लिए।
शिकायत पर हरकत में आई GRP
डॉक्टर चौधरी की शिकायत पर जीआरपी हरकत में आई और ऑटो नंबर यूपी 35 एटी 8997 को जब्त कर लिया गया। जीआरपी प्रभारी धर्मवीर सिंह ने बताया कि यह ऑटो शाही ऑटो एसोसिएशन से पंजीकृत है और डॉक्टर से तहरीर मिलने के बाद कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
यात्रियों के लिए स्टेशन के नामों में भ्रम
यह घटना कोई नई नहीं है। लखनऊ आने वाले यात्री अक्सर लखनऊ स्टेशन (लखनऊ एनआर (LKO)) और लखनऊ जंक्शन (लखनऊ NE (LJN)) के बीच अंतर नहीं समझ पाते। शताब्दी एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस, पुष्पक एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी प्रमुख ट्रेनें लखनऊ जंक्शन से चलती हैं, जबकि लखनऊ स्टेशन से चलने वाली ट्रेनों के टिकट पर LKO कोड होता है। ऑटो चालक इसी भ्रम का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं।
लापरवाही का नतीजा: प्रीपेड बूथ बंद
पहले लखनऊ स्टेशन पर जीआरपी द्वारा एक प्रीपेड ऑटो बूथ चलाया जाता था, जहाँ आरटीओ द्वारा तय किराया लिया जाता था। लेकिन यह बूथ कई साल पहले बंद कर दिया गया। अब कोई किराया तय नहीं है और शाही ऑटो एसोसिएशन से जुड़े लगभग 300 ऑटो चालक स्टेशन पर मनमानी वसूली कर रहे हैं। इस अव्यवस्था के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दिनों उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने भी स्टेशन पर अव्यवस्थित ऑटो और जाम की स्थिति पर नाराज़गी जताई थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे और प्रशासन को मिलकर इस स्थिति पर नियंत्रण करना ज़रूरी है।
निलॉन्स मेगा डिस्ट्रीब्यूटर मीट 2025: रिश्तों को मज़बूत करना, नए नवाचारों की शुरुआत
निलॉन्स ने बाजार में उतारी नए खाद्य पदार्थों की श्रृंखला
लखनऊ। निलॉन्स एंटरप्राइजेज, जो भारत का सबसे बड़ा अचार और टूटी-फूटी निर्माता है, ने सफलतापूर्वक अपना मेगा डिस्ट्रीब्यूटर मीट 2025 हयात रीजेंसी, लखनऊ में आयोजित किया। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के केंद्रीय क्षेत्र से आए 150 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स और सुपर स्टॉकिस्ट्स ने भाग लिया, जिससे निलॉन्स की इस गहरी प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई कि वह अपने डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क को केवल व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानता है।
इस मीट की शोभा बढ़ाई चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक सांघवी ने, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से डिस्ट्रीब्यूटर्स से एक-एक करके संवाद किया और उनके अनुभवों एवं आकांक्षाओं को समझा। इस अवसर पर उपस्थित रहे चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुनीत झा, नेशनल सेल्स हेड विजय वर्मा, रीजनल सेल्स मैनेजर संतोष सिंह, मार्केटिंग हेड रमेश गुरुराज और ब्रांड मैनेजर सुरेश खेड़कर, जिन्होंने लीडरशिप और पार्टनर नेटवर्क के बीच के रिश्ते को और गहरा किया।
नए उत्पादों का लोकार्पण
इस मीट का एक महत्वपूर्ण पहलू था नए उत्पादों का लॉन्च। प्रमुख लॉन्च में शामिल थेः निलॉन्स गीला मसाला रेंज, जो प्रामाणिक क्षेत्रीय स्वादों को सुविधाजनक गीले मसाले के रूप में प्रस्तुत करता है। उत्तर प्रदेश रीजनल अचार, उत्तर प्रदेश की समृद्ध खाद्य विरासत को समर्पित विशेष अचार, जो स्थानीय स्वादानुसार तैयार किया गया है। ये नए उत्पाद निलॉन्स की उस दृष्टि को मजबूत करते हैं जिसमें परंपरा और नवाचार का संगम है, ताकि उपभोक्ताओं को भारत की विविधताओं से भरपूर स्वाद का आनंद मिल सके।
पुरस्कार और सम्मान
आभार के प्रतीक के रूप में, निलॉन्स ने अपने कई लंबे समय से जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर भागीदारों की सम्मानित किया, जिन्होंने वर्षों से कंपनी की प्रगति यात्रा में अहम योगदान दिया है। यह सम्मान समारोह विश्वास, निष्ठा और साझा सफलता का उत्सव था।
मज़बूत ब्रांड मूल्यों की पुनः स्थापना
इस मेगा मीट ने न केवल नए लॉन्ब को उजागर किया बल्कि निलॉन्स के “साथ और विश्वास” वाले मज़बूत ब्रांड मूल्यों को भी पुनः स्थापित किया। लीडरशिप ने ज़ोर दिया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स सिर्फ बिचौलिये नहीं, बल्कि असली व्यापारिक भागीदार हैं, जो निलॉन्स की विकास और विस्तार यात्रा का अभिन्न हिस्सा हैं।
निलॉन्स एंटरप्राइजेज के बारे में …
1962 में स्थापित, निलॉन्स आज हर घर का जाना-पहचाना नाम है। इसके उत्पादों की श्रेणी में अचार, सॉस, मसाले, वर्मिलेली, सोया चंक्स और बहुत कुछ शामिल है। आज निलॉन्स गर्व से भारत का सबसे बड़ा अचार और टूटी-फूटी निर्माता है, जिसकी मौजूदगी पूरे भारत में है और जिसका निर्यात 30 से अधिक देशों में किया जाता है।
राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह भातखण्डे कैसरबाग में कार्यक्रम
25 अगस्त को लखनऊ में अखण्ड आर्यावर्त आर्य महासभा का अधिवेशन
~विनीत सिन्हा
लखनऊ। अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदण्डी महासभा का द्वितीय स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय अधिवेशन आगामी 25 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह भातखण्डे कैसरबाग में प्रातः 11 बजे से शुरू होने वाले स्थापना दिवस एवं अधिवेशन की तैयारियों को अन्तिम रूप देने के लिए कुर्सी रोड स्थित संगठन के मुख्यालय में हुई।
देशभर से जुटेंगे साधु-संत व अतिथि
राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने बताया कि इस अधिवेशन में देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संत, विशिष्ट अतिथि और भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी पवन सिंह चौहान सहित संगठन के पदाधिकारी और सदस्य शामिल होंगे। त्रिवेदी ने बताया कि इस राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेने के लिए संगठन के पदाधिकारी और सदस्य सोमवार से लखनऊ पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
कई महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा
संगठन के संयोजक पंकज तिवारी ने बताया कि स्थापना दिवस एवं राष्ट्रीय अधिवेशन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इनमें संगठन के भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करना, सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए जातिवाद से ऊपर उठकर हिंदू समाज को एकजुट करना और क्षेत्रीय स्तर पर लोगों को हरसंभव मदद पहुँचाने के लिए हिंदू धार्मिक स्थलों को ‘शक्ति केंद्र’ के रूप में स्थापित करना शामिल है।
डिजिटल युग में बढ़ती चुनौतियों का सामना करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
सुरक्षित रहने के उपायों की दी जानकारी
SP बिजनौर ने पेंशनर्स को साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक
बिजनौर। पुलिस पेंशनर्स को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ ही उनसे सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी दी जा रही है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार ने पुलिस लाइन स्थित सभागार कक्ष में इस उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया।
पुलिस अधीक्षक बिजनौर ने जनपद के पुलिस पेंशनर्स के साथ एक महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना और उनसे सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी देना था।
पुलिस अधीक्षक ने विस्तार से विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों, जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, ओटीपी फ्रॉड, और सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों के बारे में बताया। उन्होंने पेंशनर्स को इन अपराधों से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों पर भी जोर दिया। उन्होंने समझाया कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते के विवरण या ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को साझा न करें। साथ ही, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध कॉल का जवाब देने से बचें।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल पुलिस पेंशनर्स को बल्कि उनके माध्यम से समाज के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों से सुरक्षित रखना और जागरूकता फैलाना है। पुलिस अधीक्षक ने पेंशनर्स से अपील की, कि वे इस जानकारी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी साझा करें ताकि पूरा समाज इस खतरे से बच सके।
यह पहल पुलिस विभाग की ओर से समाज को सुरक्षित रखने और डिजिटल युग में बढ़ती चुनौतियों का सामना करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कजाकिस्तान के शिमकेंट शहर में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप
अंश की सफलता का क्रम जारी, मिक्स डबल में जीता गोल्ड मेडल
बिजनौर। अंश डबास की सफलता का क्रम जारी रहा आज मिक्स डबल में भारत के अंश डबास व अरशद अमीराह ने शिन सुंगवो व किम मिशनों की जोड़ी को 20.1- 19.2 से हराया
अंश इस प्रतियोगिता में अब तक दो गोल्ड मेडल व एक कांस्य पदक जीत चुके। उनके इस प्रदर्शन से जनपद के सभी शूटर व खेल प्रेमी गदगद हैं।
अंश डबास की इस सफलता पर जहां परिजन, उनके कोच तथा करीबी मित्र रिश्तेदार बहुत खुश हैं, वहीं गांव वाले भी अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहें हैं। विवेकानन्द दिव्य भारती उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष योगेन्द्र पाल सिंह योगी ने घोषणा की है कि बिजनौर पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जायेगा।
गौरतलब है कि अंश डबास ने कजाकिस्तान के शिमकेंट शहर में आयोजित एशियन चैंपियनशिप के 10 मीटर एयर राइफल वर्ग के टीम इवेंट में स्वर्ण व व्यक्तिगत इवेंट में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। अंश डबास की सफलता का समाचार मिलते ही जनपद के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है।
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रावती परिदा ने किया उप्र पर्यटन विभाग के स्टॉल का उद्घाटन
यूपी पर्यटन के स्टॉल पर स्पिरिचुअल ट्रायंगल, इत्र नगरी कन्नौज, दीपोत्सव और रंगोत्सव की झलकियां
परफ्यूम टूरिज्म और आध्यात्मिक सर्किट ने आगंतुकों को किया आकर्षित, सम्मेलन में पर्यटन क्षेत्र के विविध आयामों पर महामंथन
22 से 25 अगस्त 2025 तक आयोजित सम्मेलन में जुटे पर्यटन उद्योग के दिग्गज- जयवीर सिंह
ओडिशा के पुरी में 40वें आयटो वार्षिक सम्मेलन की भव्य शुरुआत
लखनऊ: (23 अगस्त, 2025) इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आयटो) का 40वां वार्षिक सम्मेल ओडिशा के पुरी में 22 से 25 अगस्त 2025 तक आयोजित हो रहा है। अधिवेशन का शुभारंभ केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। रिजुवेनेट इनबाउंड@2030 थीम पर आधारित इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के स्टॉल का उद्घाटन ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रावती परिदा ने किया। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 40वें आयटो वार्षिक सम्मेलन में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने अपने विविध पर्यटन आकर्षणों को प्रदर्शित किया। यूपी पर्यटन के स्टॉल पर श्भारत की इत्र नगरीश् कन्नौज, स्पिरिचुअल ट्रायंगल (अयोध्या-काशी-प्रयागराज) और दीपोत्सव से लेकर रंगोत्सव तक के भव्य वार्षिक आयोजनों की झलक प्रस्तुत की गई। आयोजन में देशभर से 1,000 प्रतिनिधि, टूर ऑपरेटर, होटल व्यवसायी और ट्रैवल मीडिया के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन को इस मंच से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है, जहां पर्यटन उद्योग के पेशेवरों और सरकारी हितधारकों की भागीदारी के साथ इनबाउंड टूरिज्म के भविष्य पर विचार-विमर्श होगा। उन्होंने बताया, आयटो उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रहा है। आयोजन के दौरान पर्यटन क्षेत्र से जुड़े निवेश, नवाचार और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं।
सम्मेलन के पहले दिन उत्तर प्रदेश पर्यटन मंडप आगंतुकों का मुख्य आकर्षण रहा। प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से इत्र पर्यटन में गहरी रुचि दिखाई। यहां कन्नौज की सदियों पुरानी अत्तर निर्माण परंपरा को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक अनूठा अनुभवात्मक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सम्मेलन के पहले दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नेटवर्किंग सत्रों का भी आयोजन हुआ, जहां उत्तर प्रदेश पर्यटन के अधिकारियों ने अयोध्या के राम मंदिर सर्किट, वाराणसी के रिवर फ्रंट और दुधवा व बुंदेलखंड में इको-टूरिज्म से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की। आगामी दो दिनों में भी उत्तर प्रदेश पर्यटन अपने प्रचार-प्रसार की गतिविधियां जारी रखेगा।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि आयटो सम्मेलन राज्य के लिए पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने का अवसर है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्रदेश को भारत के बहुआयामी पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए। उत्तर प्रदेश आने वाला हर पर्यटक यहां से न केवल अच्छी यादें लेकर जाए, बल्कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिकता से गहरा जुड़ाव भी महसूस करे।
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति उ.प्र., मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि आयटो के माध्यम से राज्य सरकार देश के अग्रणी टूर ऑपरेटरों और उद्योग जगत के नेताओं से सीधा संवाद कर रही है। यह पहल केवल धरोहर और स्मारकों के प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यटन अवसंरचना का विस्तार, निजी निवेश को आकर्षित करना और अनुभवों का विविधीकरण भी शामिल है। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन, इको टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, एग्री टूरिज्म, इत्र पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं, जो देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
इस अवसर पर पर्यटन महानिदेशक एवं अतिरिक्त सचिव भारत सरकार सुमन बिल्ला, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की चेयरमैन नीलू शर्मा तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मिट्टी की महक और मेहमाननवाज़ी से भरी पर्यटन विभाग की अनोखी फैम ट्रिप
फार्म स्टे, स्थानीय भोजन और गांव की कला रहे आकर्षण का केंद्र
महिलाओं की सहभागिता ने ग्रामीण पर्यटन को दी नई पहचान
ग्रामीण पर्यटन से खुलेगी गांवों में रोजगार, संस्कृति और संस्कार की नई राह -पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह
लखनऊः (22 अगस्त, 2025) उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव-2025 के सफल आयोजन के अगले दिन आज प्रतिभागियों के लिए एक विशेष फैमिलियराइजेशन ट्रिप (फैम ट्रिप) का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को गांव की असली खुशबू, परंपराओं और ग्रामीण जीवन की झलक से सीधे रूबरू कराना रहा। यात्रा के दौरान मेहमानों ने खेतों की पगडंडियों पर चलते हुए ग्रामीण परिवेश का अनुभव लिया, पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा, लोककला और संस्कृति को करीब से देखा तथा स्वयं सहायता समूहों के हुनर की सराहना की।
इसमें पीलीभीत के राजेंद्र गुप्ता, अनिल शाही, मुजाहिद अली, प्रयागराज के बीके द्विवेदी, तन्मय अग्रवाल, सार्थक, देवेंद्र कुमार तिवारी, कन्नौज के संदीप कुमार कटियार, फर्रूखाबाद के अजय कुमार सिंह, महेश सिंह, कानपुर के राज किशोर, मथुरा से संतोषी शर्मा, यशवीर सिंह, झांसी से सियाराम, विजय शंकर मिश्र, अनिल कुमार, जालौन से उदय प्रताप सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, आगरा से रागिनी, पीलीभीत से साहेब सिंह, मोबीन आरिफ, ज्ञान दीक्षित और लखीमपुर खीरी से पूजा डोंग शामिल रहे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि “गांव केवल भौगोलिक स्थान नहीं हैं, बल्कि भारत की जीवंत धरोहर और असली पहचान हैं। हमारी परंपराएं, संस्कृति और मूल जीवनशैली गांवों से ही निकलकर दुनिया तक पहुँचती हैं। ग्रामीण पर्यटन न केवल भारत की नई वैश्विक पहचान बनेगा, बल्कि यह विभिन्न समुदायों को रोजगार, आत्मनिर्भरता और गौरव की नई राह भी दिखाएगा। आने वाले समय में गांव ही पर्यटन के सबसे बड़े आकर्षण और भारत की सॉफ्ट पावर साबित होंगे।”
इकिगाई फार्म स्टे के मालिक कर्नल सहाई ने कहा, “ग्रामीण पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत स्थानीय समुदाय की भागीदारी है। जब तक गांववाले सक्रिय रूप से इसमें शामिल नहीं होंगे, यह मॉडल सफल नहीं हो सकता। ग्रामीण पर्यटन शहर और गांव के बीच की दूरी को मिटाकर दोनों को एक-दूसरे से जोड़ने का मजबूत पुल बन सकता है।”
पद्मश्री किसान राम सरन वर्मा ने कहा, “मल्टी-लेयर खेती, केले की टिशू खेती और फसल विविधीकरण से न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ती है, बल्कि यह ग्रामीण पर्यटन के नए अवसर भी खोलता है। यहां आने वाले पर्यटक खेती के आधुनिक तरीके नज़दीक से देख और समझ सकते हैं। अगर खेती आगे बढ़ेगी, तभी भारत भी तरक्की करेगा।”
विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया ने कहा, “आज का पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मा की तलाश का माध्यम बन चुका है। हर घर, चाहे मिट्टी के बर्तन हों या अचार, पर्यटन इकाई बनने की क्षमता रखता है। इस तरह की फैम ट्रिप यह साबित करती है कि सामुदायिक मॉडल न केवल संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि भविष्य को भी टिकाऊ बना सकते हैं।”
प्रयागराज के फूलकली फार्म स्टे के मालिक श्री सार्थक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “यह यात्रा मेरे लिए अविस्मरणीय रही। गांव की असली खूबसूरती को नज़दीक से देखने और महसूस करने का अवसर मिला। यूपी टूरिज्म का आभारी हूं कि उन्होंने हमें सीखने और जुड़ने का इतना सार्थक मौका दिया।”
भाजपा में सुशासन के सबसे भारी मॉडल रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की चौथी वर्षी पर अलीगढ़ में उनके परिवार के लोगों द्वारा किया गया आयोजन एक बिग पॉलिटिकल शो बन गया। पूर्व मुख्यमंत्री कह देने से स्व. कल्याण सिंह का परिचय पूरा नही होता क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री तो बहुत रहे होगें। कल्याण सिंह उस कतार की एक शख्सियत भर नही थे। सरदार पटेल को उनके कड़े फैसलों के कारण जनमानस में लौह पुरुष के बतौर नवाजा गया था। चौधरी चरण सिंह चाहते थे कि उन्हें दूसरे लौह पुरुष के रूप में देश याद करे। अपने मुख्यमंत्रित्व के समय एक झटके में प्रदेश भर के पटवारियों को बर्खास्त करके उन्होंने इसके लिए काफी सोपान तय कर लिए थे। देश में पहली बार गैर कांग्रेस सरकार बनने पर चौधरी साहब को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रशासनिक दृढ़ता दिखाने का अवसर मिला। उनके पास विभाग भी गृह था। जनता पार्टी के आरंभिक दिनों में जनता देखना चाहती थी कि इमरजेंसी में हुए दमन की जिम्मेदार इंदिरा गांधी को चौधरी साहब कैसा सबक सिखाते हैं। लेकिन परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी कि चौधरी साहब के इरादे बूमरेंग कर गए। वे इंदिरा गांधी से जेल की चक्की न पिसवा सके बल्कि उनके समर्थन से ही उनको भारत का अनोखा प्रधानमंत्री बनने का अवसर जुटाना पड़ा। इस व्यतिक्रम ने चौधरी साहब का मूर्तिभंजन कर डाला। वे शिखर पर कदम रखने के पहले ही फिसलकर जमीन पर आ गिरे। लालकृष्ण आडवाणी की भी हसरत थी कि लोग उन्हें सरदार साहब के बाद दूसरे लौह पुरुष के रूप में याद करें पर उनकी किस्मत भी काफी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद औंधे मुंह गिरने के लिए अभिशप्त हो गई। कल्याण सिंह के मन में शायद लौह पुरुष कहलवाने की कोई हसरत कभी नही रही लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे में अराजकता की विरासत को उन्होंने जिस तरह से दुरुस्त किया उससे बाद में लोग उनमें लौह पुरुष का अक्स अनायास देखने लगे थे। इस बीच लखनऊ की गोमती नदी में बहुत पानी बह चुका है। कितनी ही सरकार बदल चुकी हैं जिनके अलग-अलग हिस्सों की स्मृतियां और अनुभव लोगों के जेहन में हैं जिनके आधार पर उन्हें आयरन मैन मानने की धारणा अब तो बहुत पुख्ता हो चुकी है।
कल्याण सिंह की पुण्य तिथि के दिन 75 वर्ष की उम्र में दायित्व मुक्ति लेने की बहस भी नये सिरे से प्रासंगिक हो गई। इसलिए कुछ चर्चा इस पर भी। हिन्दू कहो या सनातन इसके परंपरागत विधान में जीवन को चार चरणों में विभक्त करने की कल्पना की गई है। वैसे तो पौराणिक आख्यान और मिथकों में प्राचीन विभूतियों के 10 हजार वर्ष तक तप में लीन रहने के वर्णन आम हैं। लेकिन कथानक को रुचिकर बनाने के लिए अतिश्योक्ति को अलंकार का दर्जा दिये जाने की व्यवस्था से जो परिचित हैं वे उसमें केवल वास्तविकता को प्रयोजनीयता के लिए निथार कर उस पर चलते हैं। इसके तहत सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की आयु 100 वर्ष निर्धारित की गई थी। 75वां वर्ष जिसे चौथेपन में प्रवेश भी कहा जाता है, इस परिभाषा को और सुबोध बनाया जाये तो यह जीवन के अंतिम सोपान के रूप में व्याख्यायित किया जाता है। 75 वर्ष की उम्र के बाद मान लिया जाता है कि व्यक्ति की आंखें कभी भी मुंद सकती हैं। ऐसे में यह व्यवस्था की गई थी कि उम्र का यह पड़ाव तय करते ही वह अपने उत्तराधिकारी को सारे उत्तरदायित्व सौंप कर खुद को हलका कर लें। इससे दो बातें होगीं। एक तो आपके सामने ही आपका उत्तराधिकारी सारी जिम्मेदारियों के लिए खुद को तैयार कर लेगा। दूसरा जिस दिन आपकी चला-चली की बेला आयेगी आप शांन्ति के साथ देह छोड़ सकेगें। 2014 में जब संघ ने भाजपा के लिए यह नियम बनवाया था तब उसके कर्ता-धर्ताओं के मन में हिन्दू अध्यात्म की प्रेरणाएं काम कर रहीं थीं या नेतृत्व के लिए जिस चेहरे को तय कर लिया गया था उसका अपने वरिष्ठों के सामने निष्कंटक रास्ता तैयार करने की रणनीति का परिणाम थी यह व्यवस्था। अगर यह स्थायी व्यवस्था नही थी तो 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने के बाद इसे विराम दे दिया जाना चाहिए था। लेकिन लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को मार्गदर्शक मण्डल में भेजे जाने के बाद भी इसे याद रखा गया। उनके परवर्तियों में चाहे कल्याण सिंह हो, चाहे सुमित्रा महाजन जो कि 75 वर्ष की दहलीज पर पैर रखने के बाद भी चुस्त-दुरुस्त बने हुए थे उनका कैरियर भी इस नियम की बलिवेदी पर चढ़ा दिया गया। तो क्या नियम तो नियम वाली बात फिर होगी। आपने अगर 75 वर्ष की लाइन क्रास कर ली है तो भले ही आप अपने को युवाओं से ज्यादा फिट दिखायें पर आपको कुर्सी का मोह छोड़ना ही पड़ेगा। कल्याण सिंह की पुण्य तिथि पर यह जिज्ञासा फिर उठ खड़ी हुई।
कल्याण सिंह को भाजपा को 1991 में इसलिए मुख्यमंत्री बनाना पड़ा था क्योंकि मण्डल क्रांति के कारण ओबीसी अपने हक के लिए सारे देश में मचल पड़ा था। भाजपा के सोशल इंजीनियरिंग के मास्टर गोविंदाचार्य ने पार्टी को हिदायत दी कि अगर मुख्यमंत्री पद के लिए सवर्ण चेहरे को चुनने की गलती की गई तो मण्डलवादी दल फिर राजनीतिक परिदृश्य पर छा जायेगें और भाजपा को दूरगामी तौर पर स्थायी नुकसान हो जायेगा। यह बात भाजपा के रणनीतिकारों को समझ में आई इसलिए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर कल्याण सिंह के राजतिलक की हामी भर दी गई। पर कल्याण सिंह ने उच्च प्रशासनिक मानकों का निर्वाह करते हुए जिस तरह का शासन चलाया उससे भाजपा की असल वर्गसत्ता के होश उड़ गए। लोगों को सेवा और न्याय सुलभ होने लगा, व्यवस्था द्रोहियों के हौसले पस्त होने लगे तो कल्याण सिंह की पकड़ बहुत मजबूत होती दिखने लगी। भाजपा विरोधी मानने लगे थे कि अगर कल्याण सिंह की सरकार ने कार्यकाल पूरा कर लिया तो भाजपा को दशकों तक उत्तर प्रदेश में कोई हरा नही पायेगा और राष्ट्रीय राजनीति में भी भाजपा को इससे इतना बल मिलेगा कि केंद्र की सरकार की बागडोर उसके हाथ में आ जायेगी। लेकिन भाजपा की संचालक शक्तियों को ही यह मंजूर नही हुआ। लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके में स्व. रामप्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में जाति विशेष के भाजपा विधायकों ने बैठक करके कल्याण सिंह को उखाड़ फेकने के लिए अपनी शिखाएं खोल दीं। कल्याण सिंह सरकार की बलि देने के लिए अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को हठधर्मिता पूर्वक विवादित ढांचा ढहाने का तांडव कर दिया गया। जबकि सारे सयाने कह रहे थे कि पहले कल्याण सिंह की सरकार को चलने दो। सरकार कार्यकाल पूरा करते-करते उस बुलंदी पर पहुंच जायेगी जहां से उसे कोई खिसका नही सकता। कल्याण सिंह यह उददेश्य हासिल करने के बाद सरकार के अंत के दिनों में विवादित ढांचे पर हिन्दुओं के आराध्य भगवान राम का मंदिर भी खड़ा करवा देगे। कल्याण सिंह की मंदिर के लिए निष्ठा में भी संदेह नही किया जा सकता था जो कि बाद में प्रमाणित हुआ। बाबरी मस्जिद गिरने का जो मुकदमा चला उसमें आखिर कल्याण सिंह ने इसके ध्वंस की सारी जिम्मेदारी अपने सिर पर ले ली और सजायाफ्ता बनना कुबूल कर लिया। लेकिन दूसरे लोगों को मंदिर के निर्माण की उतनी लगन नही थी जितनी कि शूद्र को समय रहते अपने छाती से हटा देने की थी।
कल्याण सिंह को फिर एक बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। लेकिन बहुत बुरी स्थितियों में। कल्याण सिंह नही चाहते थे कि वे इस भानुमती का पिटारा बनी हुई सरकार को चलाएं। ऐसी सरकार बनाएं, जिसमें हर दलबदलू को मंत्री पद देना पड़े!… पर राजनाथ सिंह जो प्रदेश अध्यक्ष थे अपने आप को चाणक्य का अवतार सिद्ध करने के लिए मरे जा रहे थे। पार्टी के दबाव के कारण कांटों का ताज कल्याण सिंह को पहनना पड़ा। लेकिन उन स्थितियों में भी उन्होंने सुशासन की झलक देने में कोई कसर नही छोड़ी। राजनीति के जानकार उन मंथराओं के नाम जानते हैं जिन्होंने कल्याण सिंह के प्रति अपनी डाह भंजाने के लिए कुसुम राय के नाम से जोड़कर रची कहानियों से अखबारों के गॉसिप कॉलम भरवा दिये तांकि कल्याण सिंह की गुड गवर्नेंस की जनमानस में गहरी हो रही छाप को धुंधला किया जा सके। 2014 में जब भाजपा में सबसे बड़ी बहार आई तो अनुमान यह किया गया था कि पार्टी का नेतृत्व कल्याण सिंह की क्षमताओं का सदुपयोग करने को उत्सुक होगा। लेकिन निर्द्वंद्व सत्ता के लिए पार्टी में सामूहिक नेतृत्व की हर गुंजाइश पर पहले दिन से ही फरसा ताने भाजपा के नये नेतृत्व ने कल्याण सिंह को भी नही बख्शा। राजस्थान का राज्यपाल बनाकर सक्रिय राजनीति से उनकी पारी के विराम का इंतजाम कर दिया गया। भाजपा के शुभचिंतक मानते हैं कि अगर मोदी कल्याण सिंह को अपने मंत्रिमंडल में जगह दे देते तो उनकी सरकार का इकबाल बेहद चमकदार बनाने में कल्याण सिंह बड़ा योगदान दे सकते थे। इसके बाद 2019 में कल्याण सिंह को ही उत्तर प्रदेश की बागडोर सौंपी जानी चाहिए थी क्योंकि वे देश के सबसे बड़े सूबे को व्यवस्थित करने के मामले में पूरी तरह टेस्टेड थे। भाजपा के नये नेतृत्व की नीति स्पष्ट है कि जिनके पंख अभी उगे न हों उन्हें राज्यों की बागडोर सौंपी जाए ताकि वे सिर उठाकर काम न कर सकें। इस सिलसिले की शुरूआत यूपी से की गई थी। जिसके लिए पार्टी के मूल्यवान एसेस्ट्स की पहचान रखने वाले कल्याण सिंह के कैरियर को बर्बाद करने का जोखिम मोल लिया गया।
कल्याण सिंह जब पहली बार मुख्यमंत्री थे किसानों के मुददे पर पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने आंदोलन छेड़ रखा था कल्याण सिंह को आरएसएस के स्कूल में दीक्षा मिली थी जहां ब्रेनवॉश मंडली पवित्र सामाजिक व्यवस्था को छूने वाले को सबसे बड़े पापी के रूप में देखना सिखाया जाता है। चूंकि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करके इस सामाजिक व्यवस्था की चूलें हिला देने का अधम कृत्य किया था इसलिए कल्याण सिंह के मन में उनका नाम आते ही दुष्ट दलन की तरंगे फंुफकारने लगती थी। फर्रुखाबाद में कल्याण सिंह के हुकुम पर विश्वनाथ प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर उनके पूर्व प्रधानमंत्री के प्रोटोकोल को परे करके उन्हें जेल में सामान्य कैदियों वाली कोठरी में धकेल दिया गया जहां अस्त-व्यस्त वायरिंग के कारण विश्वनाथ प्रताप सिंह को करंट लग गया था।
लेकिन वही कल्याण सिंह थे जिन्होंने लखनऊ में आयोजित वीपी सिंह के पुण्यतिथि के कार्यक्रम में जयपुर के राजभवन से चलकर आने की स्वीकृति दी और जब वे आए तो दिल खोलकर बोले। कल्याण सिंह ने कहा कि पिछड़ा वर्ग वीपी सिंह का कर्जा कभी नहीं चुका पायेगा। उन्होंने हमें अपना हक पहचानना सिखाया और हक मांगने से नहीं छीनने से मिलता है। उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण पदों से दलितों पिछड़ों को दूर रखने की जो कवायद चल रही थी उसे निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा था कि वीपी सिंह से प्रेरणा लेकर हमें थानेदार से लेकर एसपी तक और लेखपाल से लेकर कलेक्टर तक के पदों को अपनी आबादी के अनुपात में छीनकर लेने के लिए तत्पर होना पड़ेगा। कल्याण सिंह के वारिस अभी इस भाषा को दोहराने की दम नहीं रखते लेकिन उनके अनुयायी अपने बाबूजी की इस सीख को अमल में लाने की ठान लें तो कल्याण सिंह के अरमान जमीन पकड़ सकते हैं और शायद तभी उनकी आत्मा का सही तर्पण हो सकता है।
बिजनौर। विकास खण्ड नूरपुर के ग्राम शादीपुर मिलक के रहने वाले संजीव डबास के पुत्र अंश डवास ने कजाकिस्तान के शिमकेंट शहर में आयोजित एशियन चैंपियनशिप के 10 मीटर एयर राइफल वर्ग के टीम इवेंट में स्वर्ण व व्यक्तिगत इवेंट में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। अंश डबास की सफलता का समाचार मिलते ही जनपद के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाई देने वालों का तांता लग गया है। अभी तक इससे पहले जनपद का कोई भी शूटर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल नहीं जीत पाया था। अंश ने एक नहीं बल्कि एक साथ दो मेडल जीतकर कर इतिहास रच दिया।
अंश ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता संजीव डवास, कोच आकाश कुमार व परिवार को दिया है। अंश के पिता जी ने बताया कि इस सफलता के लिए भारत व प्रदेश सरकार की खेल प्रोत्साहन की नीति का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय रेडक्रास सोसायटी बिजनौर के चेयरमैन टीकम सिंह सेंगर, डा. सुबोध चन्द्र शर्मा निदेशक, विवेकानन्द दिव्य भारती के अध्यक्ष योगेन्द्र पाल सिंह योगी, जिला व्यायाम शिक्षक अरविन्द अहलावत, खेल परिवार यूट्यूब चैनल के विनय तितोरिया ने उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी है। कोच आकाश कुमार ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि अंश निश्चित रूप से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेगा। अंश अब तक स्कूल गेम, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में 100 के लगभग पदक ट्राफी जीत चुका है।
अंश डबास की कामयाबी का सफर
अंश डबास का शूटिंग का सफर आरआर पब्लिक स्कूल व किसान शूटिंग रेंज से शुरू हुआ, जहां प्रबंधक मनुजेन्द्र व प्रधानाचार्य प्रमन्यु गुप्ता, उपप्रधानाचार्य टीकम सिंह के प्रोत्साहन और कोच आकाश कुमार के प्रशिक्षण में अंश लगातार जिला, मण्डल, प्रान्त व राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन करते रहे। उसके बाद अलवर राजस्थान में कोच परवेन्द्र सिंह व कर्णी सिंह नेशनल शूटिंग एकेडमी दिल्ली में कोच दीक्षान्त की देखरेख में लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाता है, सीखा। उनके सफल होने पर जिला राइफल ऐसोसिएशन के खान ज़फ़र सुल्तान, ताजपुर के एमपी सिंह आदि का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अंश के पिता विवेकानन्द दिव्य भारती के नूरपुर विकास खण्ड अध्यक्ष व आरआर पब्लिक स्कूल में फिजिकल के अध्यापक हैं। एक मध्य वर्गीय आय वाले संजीव डवास ने अपना तन मन धन अंश की कामयाबी में लगा कर हर सुविधा देने का प्रयास किया, ऐसा समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है।
लखनऊ में राष्ट्रीय सामाजिक न्याय महासम्मेलन का आयोजन
नंद, सेन और सविता समाज के तत्वावधान में हुआ कार्यक्रम
विस चुनाव 2027 में अति पिछड़ा जातियों की भागीदारी हो सुनिश्चित
~ विनीत सिन्हा
लखनऊ। राजधानी के सहकारिता भवन में राष्ट्रीय सामाजिक न्याय सम्मेलन का आयोजन नंद, सेन और सविता समाज के तत्वावधान में किया गया। सम्मेलन में अति-पिछड़ी जातियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों में अति-पिछड़ी जातियों की भागीदारी बढ़ाना रहा। सम्मेलन में लंबित रोहिणी आयोग और केंद्र में नवरत्न समिति की सिफारिशों पर भी चर्चा की गई, जो बुद्धजीवियों की चर्चा का विषय थीं।
सहकारिता भवन में बुधवार को नंद, सेन, सविता, श्रीवास समाज की ओर से अति पिछड़ा वर्ग की जातियों का राष्ट्रीय सामाजिक न्याय महासम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में अति पिछड़ा जातियों की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने की मांग की। समाज के नेताओं ने अति पिछड़ा आरक्षण को लागू किए जाने पर चर्चा के साथ ही केन्द्र में लंबित रोहिणी आयोग की सिफारिशों को लागू कराने के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा की।
अति पिछड़ा वर्ग की जातियों के उत्थान पर जोर
इस मौके पर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य अशोक कुमार, कार्यक्रम संयोजक डॉ. गौरव नंद (भाजपा नेता, पूर्व विधानसभा प्रभारी-मऊ) ने अति पिछड़ा वर्ग की जातियों के उत्थान पर अपने विचार रखे। इसके साथ ही सम्मेलन में सतीश पाल, आरडी पाल, संजय सेन, धनश्याम, भानू, महेश पाल, राम प्रकाश समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बुद्धजीवी पहुंचे।
राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन और नई पीढ़ी फाउंडेशन का सम्मिलित कार्यक्रम
समारोह में मौजूद रहे कई गणमान्य लोग
“ख्वाबों का ताना-बाना” गजल संग्रह का विमोचन
~विनीत सिन्हा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सचिवालय में कार्यरत निजी सचिव रतन कुमार श्रीवास्तव ‘रतन’ के दूसरे गजल संग्रह ‘ख्वाबों का ताना-बाना’ का हाल ही में लखनऊ के सहकारिता भवन स्थित ऑडिटोरियम में विमोचन हुआ।
इस समारोह का आयोजन राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संरक्षण में और नई पीढ़ी फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया। इस गजल संग्रह को वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है। समारोह की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन रहे। इनके अलावा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इंद्र विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी महेश चंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश चंद्र अवस्थी, व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना, प्रख्यात छायाकार रवि कपूर और दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम प्रमुख आत्म प्रकाश मिश्र सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
मूलतः जौनपुर के मछलीशहर तहसील अन्तर्गत ग्राम कोटवा निवासी रतन कुमार वर्तमान में उत्तर प्रदेश सचिवालय लखनऊ में निजी सचिव पद पर कार्यरत हैं लेकिन उनकी असली पहचान एक संवेदनशील साहित्यकार के रूप में उभर रही है।
लेखक रतन कुमार श्रीवास्तव ‘रतन’ ने अपनी किताब के बारे में बताया कि जिंदगी में कई बार चीजें मन मुताबिक नहीं होतीं, और ऐसे में खुश रहने के लिए सामंजस्य बैठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ख्वाबों और ख्यालों से मिलने वाली थोड़ी-सी खुशी को भी अपना लेना चाहिए, क्योंकि यही जिंदगी को जीवंत और खुशहाल बनाए रखती है। समारोह में गायिकाओं नीतू श्रीवास्तव और छाया चौबे ने ‘रतन’ की लिखी गजलों को गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन नई पीढ़ी फाउंडेशन के प्रदेश प्रभारी चंद्रशेखर पांडेय ने कुशलतापूर्वक किया।
2021 में ज़िन्दगी मुस्कुराती रही’ से मिली साहित्यिक पहचान
रतन जी की पहली पुस्तक वर्ष 2021 में प्रकाशित हुई थी, जिसने अमेज़न की बेस्टसेलर रैंकिंग में जगह बनाई। इस कृति के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिष्ठित “जयशंकर प्रसाद पुरस्कार” (1,00,000) और ‘कादम्बरी’ (जबलपुर म.प्र.) का ‘साज जबलपुरी स्मृति सम्मान’ (2024) प्राप्त हुआ।
सम्मानों की श्रृंखला
रतन कुमार को साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए देशभर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है: हर घर तिरंगा नारा लेखन प्रतियोगिता (2022) राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग निबंध प्रतियोगिता (2022) तृतीय स्थान, भारत मेरी जान अवार्ड (2023) मुंबई स्थित सर्वधर्म समभाव संस्था द्वारा साहित्य श्री सम्मान (2024) स-व-रू फाउंडेशन लखनऊ, रेवांत साहित्य गौरव सम्मान (2024) रेवांत संस्था लखनऊ।
अब तक प्राप्त हुई 51,000 की रायल्टी
उनकी पहली पुस्तक को अब तक ₹ 51,000 की रॉयल्टी प्राप्त हो चुकी है जो पाठकों के बीच उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। ‘पद्मावतीयम्’, रतन खण्ड, शारदा नगर योजना, लखनऊ में रहने वाले रतन कुमार का कहना है कि “ख़्वाबों की आमद आज तब और मुकम्मल हुई, जब मेरी ग़ज़लों की किताब पाठकों के हाथों में पहुँची। अब उड़ान आप सब के हाथों में है।”
बहुत ही पुण्य का कार्य है किसी की मदद करना, अपना रक्त देना
जरूरतमंद महिला के लिए महात्मा मनजीत ने किया रक्तदान
~भूपेन्द्र कुमार
बिजनौर। संत निरंकारी मिशन बिजनौर ब्रांच के महात्मा मनजीत सिंह चौधरी पुत्र रमेश चौधरी ने जिला अस्पताल पहुंचकर अस्पताल के लिए भर्ती एक महिला को अपना ब्लड डोनेट किया।
जानकारी के अनुसार ग्राम गोपालपुर निवासी गजेंद्र सिंह की पत्नी नूतन जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उनका ऑपरेशन होना है। उससे पहले उन्हें ब्लड की आवश्यकता थी। जैसे ही मनजीत चौधरी को इस बारे में पता लगा, उन्होंने तुरन्त जिला अस्पताल पहुंचकर अपना ब्लड डोनेट किया। रक्तदान बहुत ही पुण्य का काम है, क्योंकि रक्तदान महादान। किसी को अपना रक्त देना, किसी की मदद करना बहुत ही पुण्य का कार्य है। ईश्वर ऐसे ही पुण्य कार्यों से खुश होते हैं और हमें समाज सेवा की प्रेरणा मिलती है।
शोधादर्श के संपादकाचार्य पंडित रुद्रदत्त शर्मा विशेषांक का विमोचन-लोकार्पण
~भूपेंद्र कुमार
धामपुर। शोधादर्श के संपादकाचार्य पंडित रुद्रदत्त शर्मा विशेषांक का विमोचन-लोकार्पण शिवाजी पार्क स्थित पंडित जी की प्रतिमा स्थल पर सम्पन्न हुआ। संपादक आचार्य पंडित रुद्रदत्त शर्मा सम्मान समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश चंद अग्रवाल नवीन ने और संचालन डॉ अनिल शर्मा अनिल व मनोज कात्यायन (संयोजक) ने किया।
मुख्य अतिथि डॉ पंकज भारद्वाज ने कहा कि संपादकाचार्य की स्मृतियों को संजोए रखने की कड़ी में यह विशेषांक एक मील का पत्थर है। एक ही जिल्द में पंडित रुद्रदत्त शर्मा पर इतनी सामग्री अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं है। यह विशेषांक एक ऐसा दस्तावेज बन गया है जो आने वाली पीढ़ियों को उनके संबंध में बताता रहेगा।
संपादक शोधादर्श अमन कुमार त्यागी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में अतुलनीय योगदान करने वाले पत्रकार पंडित रुद्रदत्त शर्मा जी पर भारतवर्ष के सभी पत्रकारों को गर्व है। धामपुर स्थित उनकी एकमात्र प्रतिमा के समक्ष इस विशेषांक का विमोचन लोकार्पण एक ऐतिहासिक पल है।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा ने कहा कि पंडित रुद्रदत्त शर्मा पुस्तकालय और यह प्रतिमा अमूल्य धरोहर है, आज इन धरोहरों यह विशेषांक भी जुड़ गया है। डॉ अनिल शर्मा अनिल ने पंडित रुद्रदत्त जी के संबंध में चर्चा करते हुए अमन कुमार त्यागी के श्रम और संयोजन से तैयार इस विशेषांक में उल्लेखित कुछ विशेष बिंदुओं को रेखांकित किया।
अध्यक्षीय संबोधन में दिनेश चंद अग्रवाल नवीन ने पंडित रुद्रदत्त शर्मा पुस्तकालय के नामकरण और उद्घाटन के संस्मरण सुनाते हुए अमन कुमार त्यागी के कार्य की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।समाजसेवी विवेक अग्रवाल, डॉ.अमित कुमार सिंह और रोमियो मयूर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पंडित जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। मनोज कात्यायन ने पंडित रुद्रदत्त शर्मा सम्मान समिति के कार्यों की चर्चा करते हुए इस पत्रिका को महत्त्वपूर्ण दस्तावेज बताया।अंत में पंडित रुद्रदत्त शर्मा सम्मान समिति की ओर से विवेक अग्रवाल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
सत्संग भवन चांदपुर में प्रातः 9:00 बजे से 2:00 तक होगा आयोजन
संत निरंकारी मिशन का रक्तदान शिविर 24 अगस्त को
~भूपेंद्र कुमार
बिजनौर। संत निरंकारी मंडल ब्रांच चांदपुर के तत्वावधान में आगामी दिनांक 24 अगस्त दिन रविवार को एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन होने जा रहा है। संत निरंकारी सत्संग भवन चांदपुर में उक्त आयोजन प्रातः 9:00 बजे से 2:00 तक होगा।
चांदपुर ब्रांच के मुखी महात्मा डॉक्टर केपीएस चौहान व सेवादल संचालक राहुल खन्ना ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि बरेली जोन 58 ए के जोनल इंचार्ज संजीव अग्रवाल की हुजूरी में यह कार्यक्रम संपन्न होगा। इस अवसर पर लंगर सहित विशाल सत्संग का आयोजन भी होगा। सरकारी अस्पताल के कुशल चिकित्सकों व उनकी टीम के कुशल नेतृत्व में रक्तदान शिविर का आयोजन होगा। उन्होंने जनपद बिजनौर की समस्त ब्रांचों के मुख महात्माओं, सेवादल संचालकों में साथ संगत से कार्यक्रम में शामिल होने की विनती की है। मुख महात्मा डॉक्टर केपीएस चौहान ने बताया कि संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वाधान में समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन होता है। अबकी बार यह मौका चांदपुर ब्रांच को प्राप्त हुआ है।
तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें ना रहें: विधायक ओपी श्रीवास्तव
~विनीत सिन्हा
लखनऊ पूर्वी विधानसभा द्वारा 15 अगस्त की शाम को ऑपरेशन सिंदूर विजय उत्सव तिरंगा बाइक रैली मिठाई वाले चौराहे से हनुमान चौराहे तक और हैनीमैन चौराहे से हुसेड़िया चौराहा, पत्रकार पुरम चौराहा होते हुए कैप्टन मनोज पांडे चौराहे पहुंची। मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता नीरज सिंह और लखनऊ पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक ओपी श्रीवास्तव ने कैप्टन मनोज पांडे चौराहे पर क्रेन पर चढ़कर शहीद की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।
लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लखनऊ पूर्वी विधानसभा द्वारा आयोजित ऑपरेशन सिंदूर विजयोत्सव तिरंगा यात्रा अद्वितीय उत्साह, जोश और देशभक्ति के माहौल में सम्पन्न हुई।
भव्य तिरंगा यात्रा
यह बाइक रैली मिठाई वाले चौराहे से प्रारंभ होकर गोमती नगर के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए हैनीमैन चौराहे पर पहुंची, जहां सम्मानित पार्षदगण, मंडल अध्यक्षगण, मोहल्ला समितियों के प्रतिनिधि, समाजसेवी तथा महिला मोर्चा की पदाधिकारी बड़ी संख्या में एकत्र हुए। यहां से रैली हुसेड़िया चौराहा, पत्रकारपुरम चौराहा होते हुए कैप्टन मनोज पांडे चौराहा पहुंची।
शहीद कैप्टन मनोज पांडे को श्रद्धांजलि
कैप्टन मनोज पांडे चौराहे पर विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता नीरज सिंह ने क्रेन पर चढ़कर भव्य माल्यार्पण किया। पुष्पांजलि के दौरान उपस्थित जनसमूह ने “भारत माता की जय” एवं “वंदे मातरम्” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
मुख्य अतिथि का संबोधन
मुख्य अतिथि नीरज सिंह ने कहा, “तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, यह हमारी अस्मिता, हमारी शौर्यगाथा और हमारे बलिदानों का प्रतीक है। हमें इस सम्मान को हमेशा अपने हृदय में जीवित रखना है।”
तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक: विधायक ओ.पी. श्रीवास्तव
विधायक ओपी श्रीवास्तव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा “इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना, रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना, लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने, इस तिरंगे को सदा दिल में बसाये रखना।” उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, एकता और अखंडता का जनआंदोलन है। तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक है, जो हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य का प्रतिबिंब है।ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सोच भले ही शांति की हो, लेकिन हमारे खून में देशभक्ति का जोश और साहस सदैव प्रबल है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।
शहीदों के परिजनों का सम्मान
कार्यक्रम में कारगिल युद्ध के शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडे के भाई मनमोहन पांडे, राइफलमैन सुनील जंग महत की मां एवं बहन सुनीता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. मानसिंह आजाद की पुत्रवधू श्रीमती सुमन सिंह, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नरेंद्र दत्त किमोठी की पुत्रवधू श्रीमती चंद्र कल किमोठी, लेफ्टिनेंट स्व. रजनीकांत यादव के पिता बृजेन्द्र सिंह यादव व परिवारीजनों को सम्मानित किया गया।
तिरंगे को सलाम और देश सेवा का संकल्प
इस अवसर पर भाजपा लखनऊ महानगर के विभिन्न वार्डों के लखनऊ महानगर महिला मोर्चा अध्यक्ष सीता नेगी, मंडल अध्यक्ष नरेंद्र देवडी, अभिषेक राय, सुश्री रीना चौरसिया, सुमित खन्ना, पार्षद अरुण तिवारी, संजय सिंह राठौड़, राजेश सिंह गब्बर, प्रमोद राजन, भृगु नाथ शुक्ला, शैलेंद्र वर्मा, अरुण राय, कौशल शंकर पांडे, हरिश्चंद्र लोधी, भूपेंद्र शर्मा, अशोक उपाध्याय, राम कुमार वर्मा, राकेश मिश्रा, उमेश संनवाल, हरिश्चंद्र लोधी, पार्षद प्रतिनिधि सुनील शंखधर, संदीप पाठक, शैलेंद्र राय डब्बू, कृष्ण वीर बंटू, कृष्ण वीर बंटू, सूरज जसवानी, दीपक तिवारी समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा समाजसेवी व सम्मानित नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां सभी ने तिरंगे को सलाम किया और देश सेवा का संकल्प लिया।
CMS में चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विश्व एकता एवं शांति महोत्सव का शुभारंभ
~विनीत सिन्हा
लखनऊ। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS), इंदिरा नगर कैंपस द्वारा आयोजित चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विश्व एकता एवं शांति महोत्सव ‘कान्फ्लुएन्स-2025’ का शुभारंभ हो गया है। रविवार को CMS कानपुर रोड ऑडिटोरियम में शुरू हुए इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भावी पीढ़ी में एकता और शांति के मूल्यों को स्थापित करना है।
समारोह के मुख्य अतिथि विधायक ओपी श्रीवास्तव ने उद्घाटन करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में बच्चों को मानवीय गुणों से परिपूर्ण करने और उन्हें एकता व शान्ति की महत्ता से अवगत कराना बहुत आवश्यक है।
अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी
इस महोत्सव में युगांडा, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका सहित कई देशों के साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों से आए छात्र-छात्राएँ भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आपसी भाईचारा बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मानवता का भविष्य एकता और शांति पर ही निर्भर करता है।
‘एम्ब्रेसिंग डिफरेंसेज, सेलीब्रेटिंग वननेस’
महोत्सव की थीम “एम्ब्रेसिंग डिफरेंसेज, सेलीब्रेटिंग वननेस” रखी गई है, जो विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर जोर देती है। CMS की प्रबंधक प्रो. गीता गांधी किंगडन ने कहा कि यह आयोजन छात्रों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और समझ विकसित करने का मौका देगा।
प्रतियोगिताओं का आयोजन
महोत्सव की संयोजिका सुश्री कनिका कपूर ने बताया कि 18 अगस्त से विभिन्न प्रतियोगिताएं शुरू होंगी। इनमें फोटोग्राफी, कविता पाठ, भाषण, क्विज, पेपर प्रेजेंटेशन, ड्रामा, समूह गायन और कोरियोग्राफी जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्र अपनी रचनात्मकता और विचारों को साझा कर पाएंगे।
CMS हेड कम्युनिकेशन्स ऋषि खन्ना के अनुसार, यह महोत्सव न केवल एक प्रतिस्पर्धा का मंच है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जो युवाओं को वैश्विक नागरिक के रूप में तैयार करेगा।
तम्बाकू की लत जानलेवा हो सकती है. चाहे व्यक्ति गुटका चबाता हो या फिर धूम्रपान करता हो, ये आदतें सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचाती हैं और व्यक्ति को बीमार कर सकती हैं. कहते हैं तंबाकू के सेवन से कई सालों तक की उम्र कम हो जाती है. लेकिन, तंबाकू की लत दूर करना आसान काम नहीं है. एक बार यह लत लग जाती है तो छुड़ाए नहीं छूटती है. लेकिन, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट सुभाष गोयल का कहना है कि घर का ही एक मसाला तंबाकू की लत छुड़वाने में मददगार साबित हो सकता है. यहां जानिए एक्सपर्ट गुटका (Gutka) या धूम्रपान (Smoking) छोड़ने के लिए क्या सलाह दे रहे हैं.
आखिर कौन सा है वो जादुई मसाला ?
इस मसाले से दूर होगी तंबाकू की लत एक्सपर्ट का कहना है कि जिन लोगों को गुटका खाने की आदत है उन्हें खासतौर से इस नुस्खे को आजमाकर देखना चाहिए. आपको करना बस इतना है कि हथेली पर अजवाइन और सेंधा नमक रखें बिल्कुल ऐसे जैसे जर्दा और चूना रखते हैं. इसे अंगूठे से मसलकर होंठ के पीछे रख लें जैसे कि तंबाकू रखा जाता है. इसे 3 घंटों के लिए मुंह में रखें. तंबाकू, गुटका या सिगरेट की इच्छा खुद ब खुद मरने लगेगी. एक्सपर्ट का कहना है कि इस नुस्खे को आजमाने के बाद जो लोग दिन की 20 सिगरेट पी जाया करते थे वो लोग 1 या 2 सिगरेट पर आ जाएंगे और फिर इच्छा बिल्कुल ही खत्म हो जाएगी. ये टिप्स भी आएंगे काम खानपान की अच्छी आदतें तंबाकू की लत को दूर करने में फायदा दिखा सकती हैं. तंबाकू चबाने की या फिर सिगरेट पीने की इच्छा ना हो इसके लिए मुंह को व्यस्त रखना जरूरी होता है. आप संतरा खा सकते हैं, ओट्स या ब्राउन राइस का सेवन किया जा सकता है, सूरजमुखी के बीज चबाए जा सकते हैं या फिर डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कर सकते हैं. एक्सरसाइज करना भी बेहद जरूरी है. इससे सिगरेट (Cigarette) ना पीने की या तंबाकू ना चबाने के कारण हो रही एंजाइटी दूर रहती है. फिजिकल हेल्थ पर ध्यान दिया जाए तो खुद ही व्यक्ति सिगरेट से दूर रहने लगता है. जिन चीजों से आप ट्रिगर होते हैं या कहें जिन चीजों को देखकर या सुनकर सिगरेट पीने या गुटका चबाने की इच्छा होती है उन ट्रिगर करने वाली चीजों से दूरी बनाएं।
बिजनौर। कला और सेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली शिक्षिका कविता सागर, बिजनौर के मोहल्ला अंबा विहार की निवासी हैं। वह न सिर्फ एक कुशल शिक्षिका हैं, बल्कि एक अद्भुत चित्रकार भी हैं, जिनकी कलाकारी और सामाजिक सेवा की भावना दोनों ही सराहनीय हैं।
कविता सागर की शिक्षा बिजनौर में ही हुई। उन्होंने अपनी हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई जीजीआईसी बिजनौर से पूरी की, जिसके बाद वर्धमान डिग्री कॉलेज से बीए और एमए की डिग्री हासिल की। उन्होंने धर्मवीरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, नूरपुर से बीएड किया, जिसने उन्हें शिक्षण के क्षेत्र में कदम रखने का मौका दिया।
दर्शकों को बरबस अपनी ओर खींच लेती हैं कला
कविता जी की सबसे बड़ी खूबी उनकी चित्रकला है। वे आर्ट पेंटिंग हो या वॉल पेंटिंग, सभी को बड़ी ही शालीनता और निपुणता से बनाती हैं। उनकी बनाई हुई पेंटिंग्स इतनी आकर्षक होती हैं कि वे दर्शकों को बरबस अपनी ओर खींच लेती हैं। कला के प्रति उनका जुनून और लगन साफ दिखाई देता है। शैक्षणिक जीवन में भी वे हमेशा आगे रहीं। पढ़ाई में तेज और कुशाग्र बुद्धि वाली कविता जी घर के कामों में भी उतनी ही दक्ष हैं। उनके मृदुभाषी और व्यवहार कुशल स्वभाव के कारण सभी उनकी प्रशंसा करते हैं। उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
संत निरंकारी मिशन से जुड़ाव
कविता जी के पति बृजेश कुमार, पेशे से एडवोकेट हैं। यह दंपत्ति लंबे समय से संत निरंकारी मिशन की बिजनौर शाखा को अपनी निस्वार्थ सेवाएं दे रहा है। मिशन के प्रति उनका समर्पण और लगन देखते ही बनता है। वे पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ हर जिम्मेदारी को निभाते हैं, जो उन्हें सौंपी जाती है। कविता सागर कला, शिक्षा और समाज सेवा का एक बेहतरीन उदाहरण हैं, जिनकी बहुमुखी प्रतिभा और विनम्रता उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाती है।
पुलिस लाइन लखनऊ में सांस्कृतिक कार्यक्रम, शामिल हुए सीएम योगी
जिला जेल व थानों में हुए धार्मिक अनुष्ठान
झांकियां सजीं मंगल गीतों के बीच जन्मे ‘कान्हा’
लखनऊ/वाराणसी/प्रयागराज/आगरा/बिजनौर। यूपी में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के साथ अन्य जिलों में भी जन्माष्टमी पर्व का उल्लास छाया रहा। राजधानी लखनऊ के पुलिस लाइंस परिसर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। वाराणसी के शिवपुर स्थित सेंट्रल कारागार में उत्सव मनाया गया। वहीं प्रयागराज में राम वाटिका पार्क में बनी झांकी में ऑपरेशन सिंदूर की झलक मिली। इसके साथ आगरा में पुलिस लाइन के अलावा विभिन्न स्थानों पर पर्व की धूम दिखाई दी। बिजनौर पुलिस लाइंस में नन्हें मुन्ने बच्चों ने झांकियां प्रस्तुत की।
पुलिस समाज की रीढ़: मुख्यमंत्री योगी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने पुलिस परिवार और प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई देते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाने और समाज में शांति व सौहार्द्र स्थापित करने की अपील की।
सीएम ने पुलिस को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनकी भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज में सौहार्द्र और एकता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने पुलिस कर्मियों से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को आत्मसात कर निष्काम कर्म के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अपील की। इस अवसर पर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आयोजित देशभक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति को सीएम ने देखा। समारोह में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, पूर्व मंत्री व विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
वाराणसी की शिवपुर जेल में बंदियों ने ली नई शुरुआत की प्रेरणा
वाराणसी के शिवपुर स्थित सेंट्रल कारागार में आधी रात जन्माष्टमी का पर्व बंद कैदियों के बीच भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान किया गया। भजन-कीर्तन संग कथा वाचक ने श्रीकृष्ण के कारागार में जन्म की कथा सुनाई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्म की कथा ने कैदियों को यह विश्वास दिलाया कि जब भगवान स्वयं कारागार में जन्म लेकर अधर्म का नाश कर सकते हैं, तो सत्य और भक्ति के बल पर जीवन की हर बाधा को पार किया जा सकता है। इस आयोजन में कैदियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर अपने अतीत को भूलकर एक नई शुरुआत की प्रेरणा ली।
प्रयागराज में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी सजी
प्रयागराज में कटरा स्थित रामवाटिका पार्क में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर झांकियों और मंचन का आयोजन हुआ। शुरुआत श्रीकृष्ण जन्म से हुई। इसके बाद ताड़का वध, कालिया मर्दन, माखन चुराते लड्डू गोपाल और गोवर्धन धारण की झांकियों ने श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं की याद दिलाई। बच्चे जब भगवान कृष्ण के रूप में सजे मंच पर उतरे तो दर्शक भाव-विभोर हो उठे। धार्मिक झांकियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी। इस झांकी में एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिखाया गया, वहीं दूसरी ओर भारतीय सेना की मिसाइलें पाकिस्तान के टैंकों को ध्वस्त करती नजर आईं। साथ ही हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के दृश्यों को भी इसमें दर्शाया गया, जिसने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया।
आगरा पुलिस लाइन से पंचवटी कालोनी तक रही पर्व की धूम
आगरा की पुलिस लाइन में जन्माष्टमी कार्यक्रम में के दौरान श्री कृष्ण के जन्म से लेकर उनके बाल लीलाओं का मंचन किया गया। श्री कृष्णा भजनों के साथ शिव तांडव और महाकाली के रौद्र रूप में नृत्य की प्रस्तुति ने लोगों को प्रभावित किया। कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पूरे विश्व में भगवान श्री कृष्ण के भक्त हैं। पूरा विश्व भगवान कृष्ण के नाम की पूजा अर्चना करता है। अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था इसलिए पुलिस का इस उत्सव से भी सीधा नाता है। वहीं पारसनाथ पंचवटी कॉलोनी स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर को आकर्षक रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया और भव्य जगमग रोशनी से पूरा मंदिर भी जगमगाया।
कृष्ण लीलाओं से सभी हुए मंत्रमुग्ध
बिजनौर पुलिस लाइन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में जिलाधिकारी व अपर पुलिस अधीक्षक नगर/ग्रामीण, सहायक पुलिस अधीक्षक एवं जनप्रतिनिधि सम्मिलित हुए। उन्होंने सभी को पावन पर्व की बधाई दी।
छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कृष्ण लीलाओं ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। तदोपरान्त पुलिस परिवार द्वारा मंदिर में पूजा अर्चना/भजन कीर्तन में सम्मिलित होकर महोत्सव को हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया।
युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी सेवा संस्थान का विशेष कार्यक्रम
वाजपेयी जी के जीवन, उनके आदर्शों और राष्ट्र के प्रति अमूल्य योगदान को किया याद
पुण्यतिथि पर युग पुरुष “अटल जी” को भावभीनी श्रद्धांजलि
~विनीत सिन्हा, गीतांजलि सिंह
लखनऊ, आशियाना। युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी सेवा संस्थान ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार शुक्ला के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आशियाना उपवन गेस्ट हाउस, सेक्टर-आई, आशियाना में हुआ। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने अटल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
अटल जी के आदर्शों और राष्ट्र सेवा पर हुई चर्चा
युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी सेवा संस्थान द्वारा आयोजित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग शामिल हुए। इस अवसर पर, संस्थान के सदस्यों और शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने वाजपेयी जी के जीवन, उनके आदर्शों और राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने वाजपेयी जी को एक महान राजनेता, कवि और दूरदर्शी नेता के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा में समर्पित कर दिया।
प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण, पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात सभी उपस्थित अतिथियों व सदस्यों ने अटल जी को पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।
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हम सभी के लिए एक प्रेरणा स्रोत है अटल जी का जीवन
इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार शुक्ला ने अटल जी के राजनीतिक जीवन, साहित्यिक योगदान, पत्रकारिता, भारतीय जनसंघ से लेकर भाजपा की स्थापना तक की यात्रा एवं प्रधानमंत्री के रूप में उनकी विकास योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन हम सभी के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। अटल जी एक दूरदर्शी नेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कवि भी थे, जिनकी कविताएं आज भी हमें रास्ता दिखाती हैं।साथ ही उनकी कविताओं एवं साहित्यिक रचनाओं का भी उल्लेख किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रवि श्रीवास्तव (उप श्रमायुक्त, सेवानिवृत्त) एवं विशिष्ट अतिथि आरके गुप्ता (उपाध्यक्ष, निषाद पार्टी) तथा एसएन पांडे (अध्यक्ष, पीतांबरा समूह) रहे। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। बाद में पी.के. मिश्रा भी उपस्थित हुए और उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। अंत में प्रदेश अध्यक्ष श्री शुक्ला ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। इसी अवसर पर वरिष्ठ पत्रकारों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई। संस्थान में अनिल सिंह को मीडिया प्रभारी तथा वीरेन्द्र श्रीवास्तव को सह-मीडिया प्रभारी का दायित्व सौंपा गया।
स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
देहरादून/नैनीताल। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के खिलाफ दायर आरटीआई का असर अब दिखने लगा है। महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखंड ने आदेश जारी कर राज्य के सभी जनपदों के अधीक्षकों व मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से एक माह के भीतर अपने-अपने जनपद में कार्यरत MBBS एवं PG डिग्रीधारी चिकित्सकों की तैनाती व सेवा स्थिति संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
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गौरतलब है कि यह कार्रवाई भीमताल निवासी पूर्व कृषि अधिकारी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रशेखर जोशी द्वारा डाली गई आरटीआई के आधार पर हुई है। उनके साथ अल्मोड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट संजय कुमार पाण्डे भी लगातार कंधे से कंधा मिलाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दोनों ने ही स्वास्थ्य विभाग में गहरे पैठे भ्रष्टाचार को उजागर करने का साहसिक कार्य किया है।
आने वाले समय में हो सकते हैं कई और बड़े चौंकाने वाले खुलासे
जानकारों का मानना है कि इन आरटीआई के चलते निदेशालय स्तर पर कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं और आने वाले समय में बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इस आदेश से अब स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में प्रदेश में कितने चिकित्सक कार्यरत हैं, और किन क्षेत्रों में चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता बढ़ाएगा बल्कि आम जनता को बेहतर सुविधाएं दिलाने में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
आरटीआई एक्टिविस्टों का कहना है कि “हमारी लड़ाई केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि उन गरीब और वंचित लोगों की है, जिन्हें सही समय पर इलाज न मिलने से अपनी जान गंवानी पड़ती है। भ्रष्टाचार मुक्त स्वास्थ्य विभाग ही प्रदेश की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रात के 12:00 बजते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ढोल-नगाडे़, झांझ-मंजीरे और मृदंग की आवाज गूंज उठी। भगवान के प्राकट्योत्सव की खुशी में भक्त झूमने लगे।मंदिर के कोने-कोने में कृष्ण कन्हैया की जय-जयकार होने लगी। भगवान को सोलह श्रृंगार में सजाया गया है। उनका अलौलिक रूप निखर आया, जिसके दर्शन के लिए हर भक्त लालायित है।
धूमधाम से मनाया जा रहा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व
~लखनऊ से विनीत सिन्हा और गीतांजलि, बिजनौर से भूपेंद्र कुमार, नोएडा से शादाब, कुशीनगर से रवि
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आज, 16 अगस्त 2025 को, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन और अन्य जिलों शहरों में माहौल भक्तिमय है।
मथुरा-वृंदावन में भव्य उत्सव:
भारी भीड़: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। लाखों श्रद्धालु जन्मस्थान और अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे हैं।
सजावट: मथुरा और वृंदावन के प्रमुख मंदिरों, जैसे श्रीकृष्ण जन्मस्थान और बांके बिहारी मंदिर को फूलों, रोशनी और झालरों से भव्य रूप से सजाया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था: भारी भीड़ को देखते हुए, मथुरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और यातायात को भी डायवर्ट किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।
मथुरा को ₹646 करोड़ की 118 विकास परियोजनाओं की सौगात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा का दौरा किया। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पूजा-अर्चना की और आरती में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने मथुरा को ₹646 करोड़ की 118 विकास परियोजनाओं की सौगात दी, जिनमें 80 योजनाओं का लोकार्पण और 38 का शिलान्यास शामिल है। उन्होंने ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए ₹30,000 करोड़ की कार्ययोजना की भी घोषणा की। अपने संबोधन में, उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि गुलामी के प्रतीक को हटाया गया है और अब मथुरा में भी यही काम होगा।
अन्य जिलों में कार्यक्रम:
लखनऊ: लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य शहरों में भी मंदिरों और घरों में भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना हो रही है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, उल्लास और सरकारी घोषणाओं के साथ एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
नोएडा: इस्कॉन मंदिर में भव्य आयोजन किए गए हैं, जहाँ डिजिटल कृष्णलीला भी आकर्षण का केंद्र है। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर के आसपास ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है।
कुशीनगर: 31 साल बाद सभी पुलिस थानों में जन्माष्टमी मनाई जा रही है, जो एक पुरानी परंपरा की वापसी है।
पूरे देश में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूर्ण हर्षोल्लास व खुशी के साथ मनाया जा रहा है। भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। माहौल पूरी तरह धार्मिक बना हुआ है। चारों तरफ मंदिर सजे हुए हैं। बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है। भगवान श्री कृष्ण जी के प्रति उनका उत्साह देखते ही बन रहा है। अधिकांश बच्चे श्री कृष्ण जी का रूप धरे हुए हैं।
जिला बिजनौर में भी मोहल्ला अंबे विहार निवासी बृजेश कुमार एडवोकेट व शिक्षिका कविता के होनहार सुपुत्र अर्थव कुमार संदेश (5 वर्ष) ने भगवान कृष्ण जी की वेशभूषा धारण की। इस दौरान उनका बहुत ही मनमोहक रूप है, जैसे साक्षात भगवान श्री कृष्ण जी बाल रूप में धरा पर बांसुरी के साथ अपनी बाल लीलाएं कर रहे हैं।
बिजनौर से रिपोर्टर भूपेंद्र कुमार बताया कि बहुत ही कुशाग्र बुद्धि के अर्थव कुमार संदेश इतनी कम उम्र में विभिन्न जगह सम्मानित हो चुके हैं। पढ़ने में बहुत ही तेज अर्थव को जब भी अवसर मिलता है वह सभी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाते हैं। उन्हें कोई भी किरदार दे दो, उसी को पूरी निपुणता के साथ निभाते हैं
वैश्विक बाजार में अपनी एक मजबूत जगह बनाने वाली सिंगल माल्ट व्हिस्की
भारतीय व्हिस्की ‘इंद्री’ ने दुनिया भर में लहराया परचम
नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में, भारत में बनी सिंगल माल्ट व्हिस्की ने वैश्विक बाजार में अपनी एक मजबूत जगह बनाई है। इसी कड़ी में, इंद्री (Indri) सिंगल माल्ट व्हिस्की ने अपनी पहचान को और भी ऊँचा उठाया है। हरियाणा के एक छोटे से गाँव इंद्री में बनी यह व्हिस्की, अपने लॉन्च के कुछ ही सालों के भीतर दुनिया के सबसे बड़े व्हिस्की ब्रांड्स में से एक बन गई है।
लगातार कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार
इंद्री ने ‘व्हिस्की ऑफ द वर्ल्ड अवार्ड्स’ (Whiskies of the World Awards) में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए हैं, जिसमें ‘वर्ल्ड्स बेस्ट व्हिस्की’ का ख़िताब भी शामिल है। यह लगातार दूसरी बार है जब इंद्री के दिवाली कलेक्टर एडिशन ने इस सम्मान को हासिल किया है। इसके अलावा, इंद्री को अमेरिकी प्लेटफॉर्म ‘वाइनपेयर’ (Winepair) द्वारा ‘बेस्ट न्यू वर्ल्ड व्हिस्की’ का भी सम्मान मिला है, जिससे यह साबित होता है कि पारंपरिक व्हिस्की बनाने वाले देशों के अलावा अब भारत भी इस क्षेत्र में एक बड़ा खिलाड़ी बन चुका है। इन पुरस्कारों ने न केवल इंद्री की क्वालिटी को मान्यता दी है, बल्कि भारतीय डिस्टिलरीज को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान भी दिलाई है।
क्या बात है जो ‘इंद्री’ को बनाती है इतना खास ?
इंद्री व्हिस्की को खास बनाने के पीछे कई कारण हैं:
आइंद्री भारत की पहली ट्रिपल कास्क (Triple Cask) सिंगल माल्ट व्हिस्की है। इसे तीन अलग-अलग प्रकार के लकड़ी के बैरल में परिपक्व किया जाता है:
एक्स-बोरबॉन (ex-bourbon): इसमें वेनिला और नारियल का स्वाद आता है।
एक्स-वाइन (ex-wine): यह व्हिस्की में शहद और काली मिर्च के नोट्स जोड़ता है।
पीएक्स शेरी कास्क (PX-Sherry Cask): यह गहरा एम्बर रंग और मीठे किशमिश का स्वाद देता है।
भारतीय जलवायु का फायदा: भारत की उपोष्ण कटिबंधीय (Subtropical) जलवायु व्हिस्की को स्कॉटलैंड जैसे देशों की तुलना में तेज़ी से परिपक्व करती है। जहाँ स्कॉटलैंड में एक व्हिस्की को 10-15 साल लगते हैं, वहीं भारत में 3-5 साल में ही वह उसी गुणवत्ता को पा लेती है। यह तेज प्रक्रिया भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की को एक अनूठा और गहरा स्वाद देती है।
भारतीय जौ (Barley): यह व्हिस्की राजस्थान के स्वदेशी जौ से बनाई जाती है, जो इसे एक अलग और समृद्ध स्वाद देता है।
इंद्री की खास बातें: यह भारत में निर्मित एक प्रीमियम सिंगल माल्ट व्हिस्की है। इसे पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 2021 में लॉन्च किया था। लॉन्च होने के बाद से ही इंद्री ने 14 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं।भारत में यह व्हिस्की प्रीमियम स्पिरिट्स सेगमेंट में एक क्रांति ला रही है।
स्कॉच व्हिस्की को दी कड़ी टक्कर
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में पहली बार, भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की की बिक्री स्कॉच व्हिस्की से भी आगे निकल गई है। लोग अब स्कॉच की जगह भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की को पसंद कर रहे हैं, जिसका एक बड़ा कारण इंद्री जैसे ब्रांड की बढ़ती लोकप्रियता है। इंद्री ने लॉन्च होने के सिर्फ दो सालों में ही एक लाख से ज्यादा बोतलें बेचकर एक मील का पत्थर हासिल किया है, जिससे यह दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले सिंगल माल्ट ब्रांड्स में से एक बन गया है। यह इंद्री की सफलता सिर्फ एक ब्रांड की नहीं, बल्कि भारतीय व्हिस्की उद्योग की सफलता का प्रतीक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्वालिटी, इनोवेशन और भारतीयता का सही मिश्रण किसी भी उत्पाद को विश्व मंच पर स्थापित कर सकता है।
इंद्री (Indri) व्हिस्की को कई ग्लोबल अवार्ड्स में बेहतरीन पहचान मिली है, जिनमें मियामी ग्लोबल स्पिरिट अवार्ड्स 2025 में “बेस्ट वर्ल्ड व्हिस्की” का पुरस्कार और व्हिस्कीज़ ऑफ़ द वर्ल्ड अवार्ड्स में गोल्ड मेडल जीतना शामिल है। भारत की इस व्हिस्की ने कई विदेशी ब्रांडों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ व्हिस्की में अपना नाम दर्ज कराया है।
इंद्री की कुछ प्रमुख ग्लोबल उपलब्धियां:
मियामी ग्लोबल स्पिरिट अवार्ड्स 2025: इंद्री-ड्रू सिंगल माल्ट को इस प्रतियोगिता में स्कॉटलैंड, जापान और अमेरिका के प्रतिष्ठित ब्रांडों को पीछे छोड़ते हुए “बेस्ट वर्ल्ड व्हिस्की” का खिताब मिला।
व्हिस्कीज़ ऑफ़ द वर्ल्ड अवार्ड्स 2024: इंद्री दिवाली कलेक्टर एडिशन ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में एक बार फिर गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले 2023 में भी इसने “बेस्ट इन शो, डबल गोल्ड” का पुरस्कार जीता था।
न्यूयॉर्क इंटरनेशनल स्पिरिट्स प्रतियोगिता: इंद्री-ड्रू सिंगल माल्ट को इस प्रतियोगिता में “इंडिया व्हिस्की ऑफ़ द ईयर” के रूप में मान्यता मिली है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की नई स्कीम
पहले दिन डेढ़ लाख ने एक्टिवेट किया ‘FASTag वार्षिक पास’
मुंबई। ‘FASTag वार्षिक पास’ को पहले ही दिन उपयोगकर्ताओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। लगभग डेढ़ लाख उपयोगकर्ताओं ने वार्षिक पास खरीदकर उसे एक्टिवेट कर लिया।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त, 2025 के अवसर पर आधिकारिक तौर पर FASTag वार्षिक पास लॉन्च कर दिया है। यह वार्षिक पास देश भर के चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) के लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर मान्य है। ‘FASTag वार्षिक पास’ की आधिकारिक बुकिंग भी से शुरू हो गई। उपयोगकर्ता इसे घर बैठे ऑनलाइन बुक/एक्टिवेट कर सकते हैं। इस वार्षिक पास को पहले ही दिन उपयोगकर्ताओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।
शाम तक खरीदे गए 1.4 लाख पास
वार्षिक पास को राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। बुकिंग के पहले दिन शाम 7 बजे तक लगभग 1.4 लाख उपयोगकर्ताओं ने वार्षिक पास खरीदकर उसे एक्टिवेट कर लिया। इसके अलावा, पहले दिन टोल प्लाजा पर लगभग 1.39 लाख लेनदेन दर्ज किए गए। बताया गया कि लगभग 20,000 से 25,000 उपयोगकर्ता लगातार राजमार्ग यात्रा ऐप का उपयोग कर रहे हैं और वार्षिक पास उपयोगकर्ताओं को टोल शुल्क में शून्य कटौती के एसएमएस प्राप्त हो रहे हैं। वार्षिक पास से यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रत्येक टोल प्लाजा पर एनएचएआई के अधिकारी और नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा, पास उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन 1033 में 100 से अधिक अधिकारी जोड़कर इसे और सुदृढ़ किया गया है।
कैसे सक्रिय करें फास्टैग वार्षिक पास ?
सबसे पहले, उपयोगकर्ताओं को 3,000 रुपए का वार्षिक फास्टैग पास खरीदना होगा। यह एक साल या 200 यात्राओं के लिए वैध है। इसे NHAI की आधिकारिक वेबसाइट और राजमार्ग यात्रा मोबाइल ऐप के माध्यम से खरीदा या सक्रिय किया जा सकता है। यह पास केवल निजी वाहनों जैसे कार, जीप या वैन के लिए ही मान्य है। इस पास का उपयोग व्यावसायिक वाहनों में नहीं किया जा सकता।
लखनऊ : एडीजी साइबर क्राइम के पद पर तैनात 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बिनोद कुमार सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में डीजी (महानिदेशक) के पद पर प्रोन्नत हो गए हैं। आईपीएस अधिकारी आनंद स्वरूप के केंद्र में जाने से डीजी का पद रिक्त हुआ था। तभी से ही इस पद के लिए लगातार आईपीएस अधिकारी बीके सिंह के नाम पर चर्चा चल रही थी। बीके सिंह डीजीपी राजीव कृष्ण की टॉप-10 प्राथमिकताओं की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हैं।
बिनोद कुमार (बीके) सिंह जो मूलरूप से पटना के निवासी हैं। बीके सिंह की प्रोन्नति को लेकर सोमवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में लोकभवन में डीपीसी की बैठक हुई थी। बैठक में प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद भी थे। इस बैठक के बाद अगले दिन आदेश जारी किया गया।
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बीके सिंह
राष्ट्रपति के वीरता पदक, सराहनीय कार्य सेवा पदक और उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बीके सिंह ने एडीजी साइबर क्राइम के 13 महीने के कार्यकाल से दौरान साइबर अपराधियों से लोगों बचाने के लिए काफी काम किया।लखनऊ में 1930 साइबर क्राइम हेल्प लाइन के केंद्र की स्थापना करवाने के साथ लोगों को जागरूक करने के बड़े अभियान को चलाने का काम किया। यह कॉल सेंटर साइबर क्राइम हेल्प लाइन के भारत के सबसे बड़ा कॉल सेंटर में से एक है।
पहली पोस्टिंग ट्रेनी एएसपी अलीगढ़
आईपीएस अधिकारी बीके सिंह की पहली पोस्टिंग ट्रेनी एएसपी के पद पर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई। इसके बाद वह एएसपी फैजाबाद व गाजियाबाद में तैनात रहे। बीके सिंह सिद्धार्थनगर, मिर्जापुर, बांदा, सोनभद्र, बिजनौर और रेलवे मिर्जापुर व इलाहाबाद में एसपी रहे। एसएसपी फैजाबाद, इलाहाबाद और बुलंदशहर के साथ ही पीएसी 35 वाहिनी लखनऊ व वाराणसी में भी उनकी तैनाती रही।
दबंग अधिकारी की छवि
उत्तर प्रदेश सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान बीके सिंह की छवि एक दबंग अधिकारी की रही। उनकी गिनती सरकार के भरोसेमंद अधिकारियों में होती है। उन्होंने यूपी में एडीजी सुरक्षा के पद पर भी काम किया है। वे केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के ओएसडी भी रहे हैं।
वीरता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल, नई मंडी थाना प्रभारी निरीक्षक
स्वतंत्रता दिवस पर इंस्पेक्टर दिनेश चंद बघेल राष्ट्रपति पदक से सम्मानित
~तस्लीम बेनकाब
मुजफ्फरनगर। पुलिस सेवा में समर्पण, साहस और त्वरित निर्णय क्षमता ही वह गुण हैं, जो किसी अधिकारी को विशेष बनाते हैं। ऐसे ही एक जांबाज़ और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं इंस्पेक्टर दिनेश चन्द्र बघेल, जिन्हें उनके अद्वितीय साहस और वीरता के लिए गैलेन्ट्री पदक से सम्मानित किया जा रहा है।
यह सम्मान उन्हें उस साहसिक कार्रवाई के लिए मिला, जिसमें उन्होंने कुख्यात अपराधी चांद उर्फ काला को मुठभेड़ में मार गिराकर समाज को एक बड़े खतरे से मुक्त कराया। चांद उर्फ काला लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और उसके नाम पर गंभीर अपराधों की लंबी फेहरिस्त दर्ज थी। उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी, लेकिन इंस्पेक्टर बघेल ने न केवल इस चुनौती को स्वीकार किया बल्कि अद्वितीय रणनीति और बहादुरी के साथ उसे अंजाम तक पहुंचाया। मुठभेड़ के दौरान खतरे को सामने देखकर भी पीछे न हटना और अपराधी को न्याय के कटघरे में लाना, उनके साहस की गवाही देता है।
फिलहाल इंस्पेक्टर दिनेश चन्द बघेल मुजफ्फरनगर में नयी मंडी कोतवाली प्रभारी के रूप में तैनात हैं। यहां भी उनका कार्यशैली अनुशासन, संवेदनशीलता और सख्ती के संतुलन से भरपूर है। अपराध नियंत्रण और जनता के बीच भरोसा कायम रखने में उनकी विशेष पहचान है। इंस्पेक्टर बघेल न केवल एक कुशल पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि वीरता और बहादुरी के सशक्त पुरोधा भी हैं। उनकी कार्यशैली से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस सेवा केवल वर्दी पहनने का नाम नहीं, बल्कि यह वह जिम्मेदारी है, जिसमें हर क्षण जान जोखिम में डालकर समाज की सुरक्षा करनी होती है। गैलेन्ट्री पदक से सम्मानित होना न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे पुलिस विभाग और जनपद के लिए गर्व का विषय है। इंस्पेक्टर बघेल का यह साहसिक कारनामा आने वाले समय में पुलिस बल के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा और यह संदेश देगा कि कर्तव्य के रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती से डटकर मुकाबला करना ही असली सेवा और सच्चा सम्मान है।
संगठन को मजबूती प्रदान करते हुए करेंगे उसे आगे बढ़ाने का कार्य
वरिष्ठ पार्टीजनों ने दीं शुभकामनाएं
समाजवादी पार्टी के जिला सचिव का पद संभालेंगे पंकज यादव
मलिहाबाद, लखनऊ। समाजवादी पार्टी व संगठन को विस्तार देते हुए पंकज यादव को लखनऊ जिला सचिव नियुक्त किया गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याल लाल पाल ने मनोनयन पत्र भेजते हुए पंकज यादव को शुभकामनाएं दी तथा कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के दिशा निर्देश में पंकज यादव संगठन को मजबूती प्रदान करते हुए उसे आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दिशा निर्देशन में प्रदेश अध्यक्ष श्याल लाल पाल के अनुमोदन से जिला अध्यक्ष जय सिंह जयंत के नेतृत्व में जिला सचिव पद पर पंकज यादव को मनोनीत किया गया है। श्री जयंत ने आशा जताई है कि वह अपनी लखनऊ जिले की विधानसभाओं एवं संगठन को मजबूती प्रदान करने की दिशा में काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि पंकज यादव हमेशा से पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता रहे हैं और पार्टी उम्मीद करती है कि वह संगठन को मजबूती प्रदान करेंगे तथा आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने की दिशा में काम करेंगे। मनोनयन पत्र सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष जय सिंह जयंत, जिला महासचिव शब्बीर अहमद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष सीएल वर्मा, विधानसभा मलिहाबाद के पूर्व प्रत्याशी सोनू कनौजिया, पूर्व प्रत्याशी विधान सभा मलिहाबाद एवं पूर्व ब्लाक प्रमुख सपा नेत्री राजबाला रावत, मोहनलालगंज से पूर्व विधायक अमरीश पुष्कर, वरिष्ठ समाजवादी नेता भारत यादव, वरिष्ठ समाजवादी नेता टीवी सिंह यादव, विधानसभा मलिहाबाद के महासचिव पन्नालाल रावत,एवं मुख्य रूप से संदीप यादव ब्लॉक अध्यक्ष मलिहाबाद मौजूद रहे।
मदिरा पीने के शौकीन दें ध्यान! 15 अगस्त को ड्राई डे
शराब की कोई भी दुकान खुली मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई: डीएम
व्यवस्था की या नहीं? अब मिलेगी परसों
कमोबेश पूरे उत्तर प्रदेश में यही हालात
Attention plz: कुछ एक्स्ट्रा में मिल ही जाएगी दारू!
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर शराब पीने के शौकीनों की उम्मीदों पर वज्रपात हो गया है। राजधानी लखनऊ में 15 अगस्त के दिन शराब की दुकानें बंद रहने का एलान कर दिया गया है। इसके बावजूद पीने वालों को किसी खास समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा! …वजह ये है कि आबकारी और पुलिस विभाग से कथित सैटिंग के चलते सब कुछ संभव हो गया है? हालांकि जिम्मेदार अफसर बयान देने से बच रहे हैं।
डीएम ने जारी किया आदेश
इस संबंध में लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी. ने पत्र जारी कर आदेश दे दिया है। जिलाधिकारी विशाख जी. ने बताया कि आगामी 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लखनऊ में किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। लाइसेंस शर्तों के अनुसार, पिछले साल की तरह इस साल भी देशी शराब, कम्पोजिट शॉप, मॉडल शॉप, भांग, ताड़ी की दुकानें, बार अनुज्ञापन, मिथाइल अल्कोहल संबंधी अनुज्ञापन, सीएसडी डिपो, सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बलों की कैंटीनें, और सभी प्रकार के थोक व फुटकर अनुज्ञापन वाले प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।
दुकान खुली पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
डीएम ने पत्र के जरिये लाइसेंस धारकों को साफ तौर पर चेतावनी भी दी है। 15 अगस्त को कोई भी शराब बिक्री से जुड़ा प्रतिष्ठान खुला पाया गया तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस बंदी के लिए किसी भी अनुज्ञापी को कोई प्रतिफल नहीं दिया जाएगा। इस तरह 15 अगस्त यानी शुक्रवार को लखनऊ में पूरी तरह से ड्राई डे रहेगा। इस आदेश के बाद शराब पीने वाले लोग 16 अगस्त को शराब खरीद और उसका सेवन कर सकेंगे।
फिर भी बिकेगी ही शराब
ड्राई डे के बावजूद शराब बेची ही जाएगी, ये पक्की बात है! शौकीनों को भले ही ब्लैक में खरीदनी पड़े! वजह ये है कि आबकारी और पुलिस विभाग से कथित सैटिंग के चलते सब कुछ संभव है?
आसपड़ोस से की जाएगी बिक्री
दरअसल बंदी के दिन शॉप के आसपड़ोस से नंबर दो में शराब की बिक्री की जाती है। शराब ठेकेदार के आदेश पर सेल्समैन एक दिन पहले ही रोजाना की खपत के हिसाब से माल दाएं बाएं कर देते हैं। सूत्रों का दावा है कि शराब ठेके (शॉप) के आसपास चाय पकौड़ी के ठेले, दुकानें, खाने पीने के ढाबे के अलावा रुकने के होटल, लॉज आदि इसके लिए सबसे मुफीद जगह हैं। चारबाग सुदर्शन टॉकीज के पास, फीनिक्स मॉल के पास नहरिया, आलमबाग चंदर नगर पुलिस के पड़ोस में, मुंशी की पुलिया, चौक, डालीगंज, राजाजीपुरम आदि समेत कम से कम पांच सैकड़ा जगह इसे लेकर कुख्यात हैं। इनको तो छोड़िए उत्तर प्रदेश की राजधानी का कोई ही हिस्सा अछूता रह नहीं सकता, जहां चोरी छिपे नहीं, बल्कि शराब खुलकर बेची जाती है।
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