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  • नई दिल्ली। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने संदिग्ध / पुष्टि किए गए COVID-19 मामलों के उचित प्रबंधन के लिए तीन स्तरीय स्वास्थ्य अवसंरचना स्थापित करने की नीति लागू की है। इस संबंध में 7 अप्रैल 2020 को जारी मार्गदर्शन दस्तावेज को ध्यान में रखा गया है।

    A- COVID केयर सेंटर (CCC) जो हल्के मामलों की देखभाल करेगा। ये हॉस्टल, होटल, स्कूल, स्टेडियम, लॉज आदि में स्थापित किए गए हैं, दोनों सरकारी और निजी कार्यात्मक अस्पताल जैसे सीएचसीएस, आदि, जो नियमित रूप से काम कर सकते हैं, गैर-सीओवीआईडी मामलों को अंतिम रूप में सीओवीआईडी देखभाल केंद्र के रूप में भी नामित किया जा सकता है।

    B- समर्पित COVID स्वास्थ्य केंद्र (DCHC) उन सभी मामलों की देखभाल करेगा जो चिकित्सकीय रूप से उदारवादी के रूप में सौंपे गए हैं। ये या तो एक पूर्ण अस्पताल या अस्पताल में एक अलग ब्लॉक होना चाहिए जिसमें अधिमानतः अलग प्रवेश / निकास / ज़ोनिंग हो। निजी अस्पतालों को COVID समर्पित स्वास्थ्य केंद्रों के रूप में भी नामित किया जा सकता है। इन अस्पतालों में सुनिश्चित ऑक्सीजन सहायता के साथ बेड होंगे।

    C- समर्पित COVID अस्पताल (DCH) जो मुख्य रूप से उन लोगों के लिए व्यापक देखभाल की पेशकश करेगा जिन्हें चिकित्सकीय रूप से गंभीर रूप से सौंपा गया है। ये अस्पताल या तो एक पूर्ण अस्पताल होना चाहिए या अधिमानतः अलग प्रवेश / निकास वाले अस्पताल में एक अलग ब्लॉक होना चाहिए। निजी अस्पतालों को COVID समर्पित अस्पतालों के रूप में भी नामित किया जा सकता है। इन मेहमाननवाज में पूरी तरह से सुनिश्चित आईसीयूएस, वेंटिलेटर और सुनिश्चित ऑक्सीजन के साथ बेड का समर्थन होगा

    1. उपर्युक्त COVID स्वास्थ्य संरचना को CCC में हल्के मामलों के प्रवेश के लिए नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल के साथ संरेखित किया गया है। DCHC को मॉडरेट केस और DCH को गंभीर केस।
    2. केंद्र सरकार के अधीन अस्पतालों को निर्देश है। निजी अस्पतालों (राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में) सहित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों में COVID रोगियों का प्रबंधन निम्नलिखित सुनिश्चित करेगा: (A) COVID -19 वायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण की आवश्यकता COVID स्वास्थ्य सुविधा में प्रवेश के लिए अनिवार्य नहीं है। एक संदिग्ध मामला CCC, DCHC या DHC के संदिग्ध वार्ड में भर्ती किया जा सकता है, जैसा कि मामला हो सकता है। (B) किसी भी रोगी को किसी भी गिनती पर सेवाओं से इंकार नहीं किया जाएगा। इसमें ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल हैं, भले ही रोगी एक अलग शहर से संबंधित हो। (C) किसी भी मरीज को उस आधार पर प्रवेश से इंकार नहीं किया जाएगा,जो वह नहीं कर पा रहा है। एक वैध पहचान पत्र का उत्पादन करें जो उस शहर से संबंधित नहीं है जहां अस्पताल स्थित है।
    3. (D) अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर होना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बेड उन व्यक्तियों द्वारा कब्जा नहीं किया जाता है जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, https://www.mohfw.gov / pdf / ReviseddischargePolicyforCOVID19.pdf पर उपलब्ध संशोधित निर्वहन नीति के अनुसार निर्वहन सख्ती से किया जाना चाहिए।
  • Coronavirus को शरीर से खत्म करेगा ये इनहेलर, ट्रायल के बाद जल्द होगी उपलब्ध

    नई दिल्ली। कोरोना महामारी से निपटने के लिए पूरे विश्व में खोज जारी है, इसके सटीक इलाज की भी तलाश हो रही है। अब इसके इलाज को लेकर एक बड़ी उम्मीद बंधी है। वैज्ञानिकों ने ऐसा इनहेलर विकसित किया है जो किलर कोरोना के पहले लक्षण का मजबूती से सामना कर सकता है। वैज्ञानिक अब इस इनहेलर की फाइनल टेस्टिंग में जुट गए हैं।

    ट्रायल में 220 मरीज शामिल

    कोविड-19 के मरीजों के लिए ब्रिटिश कंपनी सिनायर्जन द्वारा बनाए गई इस खास तकनीक का नाम SNG001 इनहेलर है। SG016 नाम के इस ट्रायल में 220 मरीज शामिल हैं, जिन्हें उनके लक्षण दिखने के बाद तीन दिन के भीतर इनहेलर दिया जाएगा।

    फेफड़ों में पड़ने वाले प्रभाव से होगा बचाव

    सिनायर्जन के सीईओ रिचर्ड मार्डसन ने कहा है कि SG016 ट्रायल के विस्तार से वे बेहद खुश हैं। इससे हम काफी जल्दी घरेलू एनवायरोमेंट में ही ड्रग को टेस्ट करने में कामयाब हो सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें इस ट्रायल से बड़ी उम्मीद है। यदि इस ट्रायल में सफलता मिली तो हम बीमारी के कारण फेफड़ों और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव से शरीर को बचा पाएंगे।’ इस दौरान 98 रोगियों को इसका डोज दिया गया। अब इसका टॉप लाइन डेटा जुलाई में जारी किया जाएगा।

    एंटी-वायरल प्रतिक्रियाओं को करता है टारगेट

    इनहेलर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रोटीन (इंटरफेरॉन बीटा,आईएफएन-बीटा) को सीधे फेफड़ों में उतारता है। यह शरीर की एंटी-वायरल प्रतिक्रियाओं को टारगेट करता है। ये न सिर्फ सेल्स डैमेज होने से बचाता है, बल्कि वायरस को नकल करने से भी रोकता है। कंपनी का दावा है कि दुनिया भर में फैलती इस महामारी के बीच SNG001 इनहेलर एक बड़ा रोल अदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रायल की कामयाबी के बाद ये इनहेलर पूरे ब्रिटेन में लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।

  • कुल केस 11864, कुल ठीक 9916, कुल मौत 81, सक्रिय केस 1867

    जिला समाज कल्याण अधिकारी समेत 3 की मौत, 323 संक्रमित। 08 मौत तो शुक्रवार शाम से शनिवार सुबह तक ही हो गई, दर्ज नहीं अधिकारिक आंकड़ों में।

    बिजनौर। जिला समाज कल्याण अधिकारी समेत 3 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। कोरोना के 323 नए संक्रमित मिलने के साथ ही सक्रिय केस इस समय 1867 हो गए हैं। वहीं 371 लोग ठीक होकर अपने घर भी जा चुके हैं।

    मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव ने जिला समाज कल्याण अधिकारी बद्री विशाल की मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया, कि हालांकि यह अभी पोर्टल पर नहीं आई है, लेकिन उनके संज्ञान में आया है। वह यहां डा. अवधेश कुमार वशिष्ठ के उपचार में भर्ती थे । इलाज के दौरान शनिवार शाम उनकी मृत्यु हो गई। दो अन्य कोरोना संक्रमितों की मौतों की जानकारी पोर्टल पर आने के बाद हुई है। चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल में 29 अप्रैल को शक्ति नर्सिग होम मंडावर रोड बिजनौर निवासी 84 वर्षीय महिला की तथा 5 मई को मोहल्ला ब्रह्मनान मंडावर निवासी 55 वर्षीय महिला की मृत्यु की पुष्टि हुई है।

  • लखनऊ जिला प्रशासन ने एंबुलेंस के रेट तय किए

    एंबुलेंस चालकों के मनमाने किराए पर जिला प्रशासन की रोक

    कोविड संक्रमित रोगियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का किराया तय

    बिना ऑक्सीजन एंबुलेंस में मरीज को ले जाने पर ₹1000 प्रति 10 किलोमीटर देना होगा

    10 किलोमीटर से आगे ले जाने पर प्रति किलोमीटर ₹100 देना होगा

    ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस में ले जाने पर 1500 रुपए प्रति 10 किलोमीटर

    10 किलोमीटर से आगे ले जाने पर ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस को ₹100 प्रति किलोमीटर के हिसाब से देना होगा

    वेंटिलेटर सपोर्टेड एंबुलेंस को 2500 रुपए प्रति 10 किलोमीटर

    10 किलोमीटर से आगे ले जाने पर ₹200 प्रति किलोमीटर के हिसाब से देना होगा

  • लखनऊ। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर डटी खाकी के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो रही है। पंचायत चुनाव, कंटेनमेंट जोन से लेकर फील्ड ड्यूटी में मुस्तैद उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों से लेकर जवानों में संक्रमण की रफ्तार बीते एक माह में तेजी से बढ़ी है। कोरोना संक्रमण के चलते ही छह जिलों में प्रभारी एसपी की तैनाती तक करनी पड़ी। कोरोना की दूसरी लहर में अब 59 पुलिसकर्मी अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

    एडीजी लॉ एंड आर्डर ने जारी किए आदेश

    यूपी के एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान पूरी जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी निभाते हुए संक्रमण के चलते अब तक 137 पुलिसकर्मी शहीद हो चुके हैं।वहीं, वर्तमान काल में 4117 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव है। हालांकि अब तक 13824 पुलिसकर्मी कोरोना को मात देकर पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं और जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभा भी रहे हैं।

    दिन रात काम कर रही है यूपी पुलिस

    कोरोना के दौरान कानून व्यवस्था संभालने से लेकर क्राइम कंट्रोल और पंचायत चुनाव कराने जैसी अहम जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश पुलिस के ही कंधों पर थीं। ढाई लाख की पुलिस फोर्स वाली उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिन रात कंटेंटमेंट जोन से लेकर गलियों और चौराहों पर ड्यूटी की है। उत्तर प्रदेश में 66761 माइक्रो कंटेनमेंट जोन हैं, जबकि मैक्रो कंटेनमेंट जोन की संख्‍या 13257 है। इन कंटेनमेंट जोन में 32706 पुलिसकर्मी तैनात हैं जो सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख में लगे रहते हैं।

    एडीजी एलओ ने दिए ये निर्देश– एडीजी एलओ प्रशांत कुमार के मुताबिक, हर पुलिस लाइन में कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं।इसके साथ ही पुलिस थानों, चौकियों, पीएसी और पुलिस के अन्य कार्यालयों में भी कोविड सेंटर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जहां पर कोरोना से निपटने के सभी संसाधन मौजूद रहते हैं।

    कोरोना संक्रमण व सुधार पर पूरी नजर-डीजीपी मुख्यालय स्तर से 26 अप्रैल 2020 से पुलिसकर्मियों में कोरोना संक्रमण व सुधार पर पूरी नजर रखी जा रही है। फरवरी 2021 में तीन पुलिसकर्मी ही कोरोना संक्रमित बचे थे, जबकि अगस्त 2020 में 2300 से अधिक पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमित थे। एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने निर्देश दिया है कि चुनाव ड्यूटी से वापस लौटे जिन पुलिसकर्मियों को अपने स्वास्थ्य में परिवर्तन महसूस हो रहा है अथवा कोई आशंका है, वे आराम करें और तत्काल अपना कोरोना टेस्ट कराए।

    कोरोना से जंग के लिए 16 करोड़ रुपए-पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पुलिस की सभी इकाइयों को 16 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस रकम से वाहनों व कार्यालय परिसरों का सैनीटाइजेशन कराने से लेकर कर्मियों के लिए मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर, फेस शील्ड व अन्य सुरक्षा उपकरणों के बंदोबस्त किए जा रहे हैं। सभी पुलिस लाइन व पीएसी वाहिनियों में कोविड केयर सेंटर भी स्थापित किए गए हैं। पुलिस अस्पतालों में भी कोविड के बेड व आक्सीजन सिलेंडर का बंदोबस्त कराया गया है।

  • अमरोहा। बहुजन समाज पार्टी के अमरोहा सांसद कुंवर दानिश अली ने आज दिनांक 8 मई 2021 को अपनी सांसद निधि से कोरोना से लड़ने के लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाने व अन्य आवश्यक उपकरण आदि की खरीद के लिए ₹ 5.00.00.000 (पांच करोड़) देने की संस्तुति की है।

    इस संबंध में उन्होंने 04 मई को प्रधानमंत्री को लिखा था। सांसद ने जिलाधिकारी को पत्र लिख कर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए स्थान चिन्हित करने, इस्टीमेट आदि पूरी तैयारी करने का अनुरोध किया है।बसपा सांसद के इस सहयोग के लिए उनकी प्रशंसा की जा रही है।

    विदित हो कि पिछले हफ्ते बीजेपी के पूर्व सांसद चौधरी कंवर सिंह तंवर ने अमरोहा में ऑक्सीजन प्लांट लगावाने के लिए डीएम उमेश मिश्र को 50 लाख रुपए दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने करीब एक करोड़ की तीन मोबाइल एंबुलेंस भी डीएम को सौंपी हैं, ताकि कोरोना संक्रमितों की गांव-गांव में जांच के साथ दवा बांटी जा सकें। बताया जा रहा है कि पूर्व सांसद की धनराशि से जोया रोड स्थित जिला संयुक्त अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया जाएगा। इसको लेकर डीएम के निर्देश पर अफसरों ने प्लांट स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है।

  • जिला कारागार से छोड़े जाएंगे 20 कैदी और 160 बंदी अंतरिम जमानत व 60 दिन की पैरोल की कवायद 

    बिजनौर। कोरोना संक्रमण के बढ़़ते खतरे को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिला कारागार से करीब 20 कैदी और 160 बंदी जिला कारागार से छोड़े जाएंगे।  इन बंदियों को अंतरिम जमानत और कैदियों को पैरोल पर छोड़ा जाएगा। इसके लिए लिस्ट तैयार की जा रही है। कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए शासन ने जेलों में बंदियों का बोझ कम करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 60 दिन की पैरोल पर कैदियों को छोड़ा जाएगा। वहीं लगभग इतने ही दिनों की अंतरिम जमानत बंदियों को दी जानी है। विदित हो कि पिछले साल लॉकडाउन में भी बंदियों और कैदियों को छोड़ा गया था। उस वक्त बिजनौर जेल से 175 बंदी अंतरिम जमानत पर बाहर आए थे, जबकि 16 कैदियों को पैरोल मिली थी। उन्हें 28 दिन के लिए छोड़ा गया था लेकिन बाद में इस अवधि को बढ़ाते हुए 5 महीने कर दिया गया था। एक बार अब फिर से वही व्यवस्था की जा रही है। शासन के आदेश पर जिला कारागार प्रशासन ने करीब 160 बंदियों की लिस्ट तैयार की है। इन्हें अंतरिम जमानत के लिए जेल में लगने वाली कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके अलावा 20 कैदियों की लिस्ट तैयार कर शासन को भेजी जानी है। इसके बाद ही इन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया जाएगा।जेलर एसपी सिंह ने बताया कि करीब 160 बंदियों को शासन के निर्देश पर अंतरिम जमानत दिलाई जानी है। इसके लिए सूची तैयार हो चुकी है। 10 मई से 20 मई तक जज और मजिस्ट्रेट जेल में दौरा कर अंतरिम जमानत की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। इनमें ऐसे लोगों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाएगा जो कि 7 साल तक की सजा वाले केस में जेल में बंद हैं। शासन के दिशा निर्देश के चलते पैरोल पर छोडऩे के लिए सूची तैयार की जा रही है। कैदियों की सूची शासन को भेजी जाएगी। जबकि बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाना है।

  • शनिवार को सडक़ें रहीं गुलजार, वाहनों ने भरा फर्राटा 

    बिजनौर। कोरोना संक्रमण को लेकर जारी लॉक डाउन के बीच यदा कदा वीरान रहने वाली सडक़ें शनिवार को गुलजार रहीं। दिन भर सडक़ों पर वाहनों की आवाजाही रही। वहीं पैदल आने जाने वालों की संख्या भी पिछले कुछ दिनों के मुकाबले बढ़ गई। लोगों में पुलिस का खौफ बिल्कुल भी नहीं दिखाई दिया। कोरोना संक्रमण के कारण उत्पन्न वर्तमान हालात को देखते हुए भी कोई सीख लेने को तैयार नहीं है। हाल यह है कि लगभग हर घर में कोई न कोई किसी न किसी प्रकार की बीमार की चपेट में हैँ।

    लोग समाचार पत्रों, टीवी, सोशल मीडिया पर लगातार कोरोना के कारण बिगड़ते हालात जान रहे हैं। इसके बावजूद समझने की कोशिश नहीं कर रहे। कई दिन से लगातार जारी लॉक डाउन सोमवार सवेरे समाप्त होगा। इसका इंतजार करना लोगों को पसंद नहीं आ रहा। यही कारण रहा कि शनिवार को अन्य दिनों की अपेक्षा खासी भीड़ देखी गई। खूब वाहन निकले, पैदल निकलने वालों की संख्या भी काफी रही। पता नहीं लोगों को अचानक ऐसा क्या काम आ पड़ा कि चारों तरफ मंडराते मौत के मंजर के बीच उन्हें घर से बाहर कदम निकालने पड़े। किसी में भी पुलिस का भय नहीं दिखाई दिया। सब कुछ आम दिनों की भांति ही प्रतीत हो रहा था। बीच बीच में यदि पुलिस की कोई गाड़ी निकलती तो लोग सतर्क मुद्रा में आ जाते, लेकिन पुलिस के न टोकने से निश्चिंत हो जाते। 

    वहीं चांदपुर की चुंगी पर चौकी पुलिस प्रभारी व टीम ने लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए   वाहनों से गुजर रहे लोगों से गहन पूछताछ की।  घर से बाहर निकलने का वाजिब कारण जो बता पाया उसे कोविड नियमों का पालन करने की सलाह दी गई। वहीं तफरीह करने निकले लोगों की पुलिस  ने जम कर क्लास ली। ऐसे लोगों को सख्ती से समझाया गया। 

  • drdo

    नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत तेजी से प्रभावी कदम उठा रहा है। डीआरडीओ की एक लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज द्वारा डॉक्टर रेड्डी की लैब के साथ मिलकर बनाई गई कोरोना की ओरल दवा- 2- डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज को भारत में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है। दवा के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे बताते हैं कि यह दवा अस्पताल में मौजूद कोरोना के मरीजों की जल्दी रिकवरी में सहायक है और इसी के साथ ही यह दवा मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरत को भी कम करती है।

    बताया गया है कि इस दवाई को लेने वाले कोरोना मरीजों की रिपोर्ट आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव आई है। इस महामारी मे कोरोना वायरस से जूझ रहे लोगों के लिए यह दवाई काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। पीएम मोदी की कोरोना महामारी के खिलाफ तैयार होकर रहने की बात पर अमल करते हुए डीआरडीओ ने कोरोना की दवा- 2-डीजी बनाने का कदम उठाया। 

    अप्रैल 2020 में, महामारी की पहली लहर के दौरान INMAS-DRDO वैज्ञानिकों ने हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) की मदद से प्रयोगशाला में प्रयोग किए गए और पाया कि यह अणु SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करता है और वायरस की वृद्धि को रोकता है। इन परिणाणों के आधार पर DCGI ने मई,2020 में इस दवा के दूसरे चरण के ट्रायल करने की मंजूरी दी थी।

    DRDO ने अपने उद्योग भागीदार डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (DRL, हैदराबाद) के साथ मिलकर COVID-19 रोगियों में दवा की सुरक्षा और प्रभावकारिता का परीक्षण  परीक्षण शुरू किया। मई से अक्टूबर 2020 के दौरान किए गए चरण- II के परीक्षणों में, दवा COVID-19 रोगियों में सुरक्षित पाई गई, और उनकी रिकवरी में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

    चरण 2A 6 अस्पतालों में आयोजित किया गया था और चरण 2B (खुराक लेकर) ks नैदानिक परीक्षण पूरे देश के 11 अस्पतालों में आयोजित किए गए थे। चरण- II का परीक्षण 110 रोगियों पर किया गया। प्रभावकारिता के रुझानों में,जिन रोगियों का इलाज 2-डीजी के साथ किया गया था। उन रोगियों ने विभिन्न बिंदुओं पर मानक देखभाल (SoC) की तुलना में तेजी से सुधार देखा गया।

  • करो योग-रहो निरोग
    विषय- कोरोना-साध्य या असाध्य

    वी. प्रकाश तनोट
    वैदिक योग चिकित्सक
    (पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
    संपर्क-6395575501

    कोरोना साध्य है या असाध्य! इस पर चर्चा से पहले मैं थोड़ा योग शब्द पर चर्चा करूंगा। आज के युग में योग अपना परिचय देने के लिए विश्व में किसी सहारे का मोहताज नहीं। योग क्या है? इसका जन्म स्थान क्या है? जन्मदाता कौन है? इसका जन्म कब, क्यों कैसे हुआ? यहां संक्षेप में इतना ही कहा जा सकता है कि योग सदियों पुराना एक ऐसा दिव्य ज्ञान है जिसको अपना कर संपूर्ण मानव जाति, मानव समाज ने स्वयं को शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से स्वस्थ रहते हुए जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की की है। यह हमें ईश्वर द्वारा प्रदान किया एक ऐसा दिव्य मंत्र है, जिसमें मनुष्य ने योग की विभिन्न क्रियाओं को करते हुए स्वयं की सुप्त शक्तियों और ऊर्जाओं को जागृत करके अपना अकथनीय विकास किया है। देवों के देव महादेव भी एक महान योगी थे।
    महर्षि पतंजलि और न जाने कितने ऋषि-मुनियों साधु-संतों ने योग रूपी अमृत को जनसामान्य के बीच में बांटते हुए संसार को इसकी दिव्य शक्तियों से परिचित कराया। वर्तमान समय में योग गुरु माननीय स्वामी रामदेव जी ने अपने अथक प्रयासों द्वारा भारत ही नहीं संपूर्ण जगत में इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया है, जिसका फल यह हुआ कि विश्व के एक विशाल मानव समाज ने अपने जीवन में योग को आत्मसात करते हुए स्वयं को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाते हुए अपने देश की उन्नति में योगदान दिया। विषय व्यापक है, समय का अभाव है इसलिए अपने मुख्य बिंदु कोरोना व्याधि की तरफ चलते हैं, जिसने आज संपूर्ण विश्व में हाहाकार मचा रखा है। विश्व में करोड़ों की आबादी इस व्याधि से त्रस्त है। लाखों लोग काल के गाल में समा चुके हैं। लाखों व्यक्ति अभी भी बीमारी के संक्रमण से जूझ रहे हैं। मानव जीवन को बचाने के लिए सभी देशों की सरकारें अस्पतालों, कोविड वैक्सीन विभिन्न दवाइयों (एलोपैथिक, होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक) द्वारा अपने हर संभव प्रयासों द्वारा कोरोना महामारी से पार पाने के लिए युद्ध स्तर पर कोशिशें कर रही हैं। समाज सेवा से जुड़े व्यक्तियों के अनेक समूह भी अपने तन, मन, धन से इसमें भागीदारी कर रहे हैं। एक योगाचार्य व आयुर्वेद का ज्ञाता होने के नाते मैं भी भारत देश की जनता की सेवा के लिए अपना एक छोटा सा योगदान दे रहा हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि देश की जनता भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए मेरे द्वारा बताए गए योग के विभिन्न प्राणायामों, आसनों और विभिन्न आयुर्वेदिक प्राकृतिक चीजों का सेवन करके स्वयं को कोरोना संक्रमण से बचा सकते हैं और संक्रमित रोगी अपने चिकित्सक की सलाह से मेरे द्वारा बताए नुस्खों योग क्रियाओं को करके जल्दी ठीक हो सकते हैं।

    ये तीन प्राणायाम हमारे फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में व इम्युनिटी बढ़ाने में विशेष कारगर हैं-

    १. भस्त्रिका: किसी भी ध्यान वाले आसन में जैसे सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में किसी मैट, दरी या चादर पर सीधे बैठ जाएं। कमर, गर्दन सीधा रखते हुए दोनों हाथों को घुटनों पर ध्यान मुद्रा में रखें। श्वांस को धीरे-धीरे दोनों नासिका रंध्रों से फेफड़ों भरें व छोडं़े। ध्यान रहे श्वांस लेने और छोडऩे का अनुपात समान हो। आंखें बंद करके पूरा ध्यान श्वांस प्रश्वांस पर रखें। दो से 3 मिनट अभ्यास करें। उच्च रक्तचाप व हृदय रोगी इस को तीव्र गति से ना करें।

    कपाल भांति प्राणायाम

    २.कपाल भांति: किसी भी ध्यानात्मक आसन से पूर्व की भांति सीधे बैठ जाएं। श्वांस को सामान्य करें फिर थोड़ा प्रेशर के साथ नासिका से श्वास को बाहर फेंकें। उसी समय पेट को अधिकतम पीछे की तरफ खींचे। बार-बार इस क्रिया को दोहराएं। 5 मिनट करें।

    अनुलोम विलोम प्राणायाम

    ३.अनुलोम विलोम: पूर्व की भांति बैठ जाएं। पहले श्वांस को सामान्य करें। फिर अपने दाएं हाथ को उठाकर मुंह के सामने लाते हुए अंगूठे से दाहिने नासिका रंध्र को बंद करते हुए बाएं नासिका रंध्र से श्वांस भरें और दाएं हाथ की मध्यमा और अनामिका उंगलियों से बाएं रंध्र को बंद करते हुए अंगूठे को हटाते हुए दाएं रंध्र से निकाल दें। फिर दाहिने रंध्र से भर कर बाएं से निकाल दें। इस क्रिया को 5 मिनट तक करें।

    विशेष आयुर्वेदिक सुझाव
    १. गर्म पानी में थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर रोज दो से तीन बार गरारे करने से गला संक्रमण से मुक्त रहता है।
    २. दो कप पानी में पांच तुलसी पत्र दो लौंग, एक पिप्पली व एक चुटकी दालचीनी पाउडर डालकर हल्की आंच पर इतना पकाएं कि एक कप पानी रह जाए। सुबह-शाम पीने से इम्युनिटी बढ़ती है।
    ३. रात में सोते समय एक गिलास गर्म दूध में 5 ग्राम शुद्ध हल्दी पाउडर डालकर रोज पिएं।

    नोट-पाठकगण अपनी किसी भी जीर्ण/ पुरानी बीमारी से संबंधित किसी भी समस्या के लिए गुरुजी से व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज करें।
    प्रस्तुति-
    वी. प्रकाश तनोट
    वैदिक योग चिकित्सक
    (पूर्व वैदिक चिकित्सक एमजेबीवाईएस, महाराष्ट्र)
    संपर्क-6395575501

  • लखनऊ : इस वजह से आपको नहीं मिल रहा न्यूज़ पेपर, कई दिनों तक चल सकती है यह समस्या

    लखनऊ। यदि आप सुबह सुबह न्यूज़ पेपर यानी कि समाचार पत्र पढ़ने के आदी है तो आगामी कुछ दिनों तक आपको समाचार पत्र नही मिलने वाला है । दरअसल पूरा मामला यह है कि प्रमुख हिंदी समाचार पत्र कंपनियों ने न्यूज़ पेपर के मूल्यों में 50 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है । इसके विरोध में समाचार पत्र विक्रेता और डिलीवरी करने वाले लोग स्ट्राइक पर आ गए हैं ।

    महानगर लखनऊ के समाचार विक्रेता संघ के प्रमुख मनीष सिंह रावत ने बताया कि एक तो ग्राहकों ने कोरोना की वजह से वैसे ही न्यूज़ पेपर लेना कम कर दिया है दूसरी तरफ मूल्यों में 50 प्रतिशत वृद्दि होने से मौजूद ग्राहक भी न्यूज़ पेपर लेना बंद कर देंगे । समाचार पत्रों ने इस कोरोना काल मे न केवल पेपर के पृष्ठों की संख्या कम कर दिया है बल्कि मूल्यों में वृद्धि भी कर दी है । विक्रेताओं के हितों को भी समाचार पत्रों ने कोई स्थान नहीं दिया है, जिससे लोगों के सामने आजीविका चलाने की समस्या पैदा हो गयी है । उन्होंने संबंधित लोगों अधिकारियों और सरकार से निवेदन किया है कि इस समस्या का समाधान निकाला जाए और न्यूज़ पेपर विक्रेताओं और डिलीवरी करने वाले लोगों के हितों को संरक्षित किया जाए।

    आपको बता दे कि समाचार पत्र विक्रेता और डिलीवरी में लगे लोग अपने जान को हथेली पर रखकर न्यूज़ पेपर लोगो तक पहुँचा रहे हैं । संगठन ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक समाचार पत्र कंपनियां इनकी बातों को नहीं मानतीं, तब तक इनकी डिलीवरी बन्द रहेगी ।

    दूसरी तरफ समाचार पत्र कंपनियां, जिन्होंने मूल्य में वृद्धि की है, उनका कहना हैं कि बिज्ञापन न मिलने से उनकी प्रिंटिंग लागत बढ़ गयी है और यदि वो मूल्य नहीं बढ़ाती हैं तो प्रकाशन करना मुश्किल हो जाएगा।

    श्री राहुल जो कि नियमित न्यूज़ पेपर लेते है उनका कहना है कि इस वैश्विक महामारी की स्थिति में समाचार पत्र प्रकाशन करने वाली कंपनियों को मूल्य में वृद्धि नही करना चाहिए इसे अगले कुछ महीनों के लिए टाल देना चाहिए ।

    शहर में अनेक लोग न्यूज़ पेपर पढ़ने के आदी हैं और न्यूज़ पेपर न मिलने से उनमे गुस्सा देखा जा सकता है। आपको बता दें कि पहले सभी प्रमुख समाचार पत्रों के डिजिटल एडिशन पढ़ने के लिए फ्री थे लेकिन पिछले वर्ष से कई कंपनियों ने उसे भी पेड बेसिस कर दिया है ।

  • हारने वाले पक्ष के हमले में विजयी पक्ष की महिला की मौत। ग्रामीणों ने शव सडक़ पर रख कर लगाया जाम।

    बिजनौर। हल्दौर थाना क्षेत्र में चुनाव हारने वाले पक्ष ने जीतने वाले पक्ष के समर्थक के घर पर गुरुवार रात हमला कर दिया। घटना में एक महिला की मौत हो गई। शुक्रवार सुबह परिजनों व ग्रामीणों ने मृतका का शव थाने के सामने सड़क पर रख कर नहटौर-हल्दौर हाइवे जाम कर दिया।

    जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम कड़ापुर में बीती रात प्रधानी के चुनाव को लेकर दो पक्षो में जमकर लाठी-डंडे चले जिसमें हारने वाले के हमले से एक महिला की मौत हो गई जबकि आधा दर्जन के करीब घायल हो गये। उल्लेखनीय है ग्राम कड़ापुर से विनीत ग्राम प्रधान निर्वाचित हुआ है। उसने अपने प्रतिद्वंद्वी विपिन उर्फ पप्पू को हरा कर जीत हासिल की है। हारने के बाद से पप्पू विनीत से रंजिश रख रहा था। आरोप है कि बीती रात लगभग नौ बजे पप्पू ने जीते हुए प्रधान के समर्थकों धर्मेंद्र पुत्र नौबहार, विपिन पुत्र धर्मेंद, ब्रह्म सिंह पुत्र डालू सिंह, कोशेन्द्र पुत्र ब्रह्म सिंह व योगेन्द्र पुत्र भीष्म को घेर कर लाठी-डंडों से पीटना शुरू कर दिया। झगड़े की सूचना पर सविता देवी (50 वर्ष) पत्नी भीष्म सिंह मौके पर पहुंची और बीच-बचाव करने लगी। यह भी आरोप है कि उसके ऊपर भी हमला कर दिया गया, जिसमें वो गम्भीर रूप से घायल हो गई। गंभीर अवस्था में परिजन उसे लेकर बिजनौर पहुंचे, गंभीर हालत में मेरठ रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद स्थानीय पुलिस घण्टों बाद पहुची और आरोपियों को पकड़ लिया मगर हलके में तैनात एक सिपाही ने पकड़े गये आरोपियों को छोड़ दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। इससे रुष्ट होकर ग्रामीण शुकवार सुबह मृतका का शव थाने लेकर पहुचे और नहटौर-हल्दौर मार्ग पर थाने के सामने हाइवे जाम कर दिया। जाम लगने से हाइवे के दोनों और वाहनों की कतार लग गई। ग्रामीणों का कहना था कि सभी आरोपितों पर गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो और आरोपितों को छोडऩे वाले सिपाही  के खिलाफ कार्यवाही हो। जाम की सूचना पर पुलिस क्षेत्राधिकारी डॉ. गणेश कुमार गुप्ता मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को उचित कार्यवाही कराने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।

    हिंसा के मामले बढ़े- पिछले एक सप्ताह में चुनावी रंजिश को लेकर एक दर्जन से ज्यादा हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। एक दिन पहले ही हल्दौर थाना क्षेत्र के गांव बल्दिया में नए ग्राम प्रधान पर जानलेवा हमला किया गया। वहीं स्योहारा में भी तीन दिन पहले चुनावी रंजिश के चलते हत्या हुई।

  • बिजनौर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह के निर्देशन में बिना मास्क घूमने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार दिनांक 07.05.2021 को जनपदीय पुलिस द्वारा बिना मास्क घूम रहे 361 व्यक्तियों का चालान कर 2,56,500 रुपए का जुर्माना वसूला गया।

    अकारण घूमते लोगों के एसपी ग्रामीण ने कटवाए चालान
    नजीबाबाद। एसपी ग्रामीण ने स्वयं खड़े होकर बिना किसी जरूरी कारण घूमते मिले लोगों की क्लास लगायी। उन्होंने कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक को कई लोगों के चालान काटने के निर्देश दिए और अपने सामने कई लोगो के चालान कटवाए। इसके अलावा साथ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। शुक्रवार की दोपहर पहुंचे एसपी ग्रामीण संजय कुमार ने रेलवे स्टेशन चौकी के सामने सडक़ पर बेखौफ आवागमन करते हुए लोगों को देख कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश गौड़ से कहा कि लोग खुले आम तुम्हारे सामने से जा रहे हैं तुम क्या कर रहे हो?  दौरे पर आए एसपी ग्रामीण संजय कुमार इस दौरान नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पुलिस चौकी के बाहर खड़े हो गए थे। उप जिलाधिकारी परमानन्द झा तथा क्षेत्राधिकारी पुलिस गजेन्द्र पाल सिंह भी वहां पर मौजूद थे। एसपी ग्रामीण ने कहा कि लॉकडाउन का मतलब ही क्या है? जब पुलिस के सामने ही खुले आम लोग दौड़ रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाए। बिना कारण सडक़ों पर घूमने वाले लोगों का सीधे चालान करो तभी लोग समझेंगे। जब कोई कहने से नहीं मान रहा तो सख्ती अपनानी जरूरी है। उन्होंने स्वयं खड़े होकर वाहनों को रोका और पूछताछ की जो लोग बिना कारण घूमते मिले उनका चालान कराया।

  • भीड़ की शक्ल में खड़े लोगों को नहीं कोरोना का खतरा
    बिजनौर/नजीबाबाद। कोरोना संक्रमण के देशभर में लगातार बढ़ते प्रभाव के चलते हो रही मौतों को देखते हुए सरकार की ओर से कोरोना से बचाव को घर में रहने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और हर संभव बचाव के उपाय अपनाने को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हुए हैं। इसके बावजूद कुछ लोग कोरोना के खौफ से बेपरवाह सडक़ों पर अकारण घूमकर कोरोना संक्रमण को दावत देने पर तुले हुए हैं।

    तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण से रोजाना कितने ही लोग काल के गाल में समा रहे हैं। कहीं अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, कहीं बिना इलाज के लोग दम तोड़ रहे हैं। जबकि अधिक संक्रमित लोग बेहतर इलाज के बावजूद जान गंवा रहे हैं। इसके बावजूद विभिन्न बाजारों व मोहल्लों में सडक़ों पर बेखौफ घूमने वाले लोग शायद इस बात को न समझने पर ही उतारु हैं। उनके क्रियाकलापों से लगता है कि मानों उन्हें कोरोना संक्रमण के खतरे का कोई डर ही नहीं है। नजीबाबाद के अजमल खां रोड पर अपराह्न एक बजे सडक़ पर दौड़ रहे वाहन व खरीददारी करने वाले लोगों के बीच ऐसे भी लोग देखे गए जो कहते नजर आए कि कोरोना से क्या डरना जब मौत आनी होगी तो कोई रोक नहीं पाएगा। कोरोना वोरोना तो बस सरकार की चालबाजी है। अब इन्हें कौन बताए कि देश के क्या हालात हैं? इस महामारी के चलते लोग किस मुश्किल से गुजर रहे हैं? दवाओं, ऑक्सीजन व अन्य सुविधाओं के अभाव में लोग किस कदर मजबूर और लाचार हैं?

  • कोविड नियमों का उल्लंघन कर दी रोजा अफ्तार पार्टी 

    नगीना विधायक मनोज पारस

    बिजनौर। कोविड-19 नियमों का उल्लंघन करने के मामले में पुलिस ने नगीना से सपा विधायक मनोज पारस सहित 35 समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के विरुद्ध संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही शुरु कर दी है।

    थाना  प्रभारी कृष्ण मुरारी दोहरे.ने बताया कि सपा विधायक मनोज पारस द्वारा सपा के नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों व ग्राम प्रधानों के लिए  5 मई गुरुवार की सायं मोहल्ला सरायमीर में मतलूब कुरैशी के कोठी वाले घर पर बिना परमिशन के रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था।

    इस दौरान काफी भीड़भाड़ थी। इस कार्यक्रम की एक वीडियो भी वायरल हुई थी। मामला संज्ञान में आने पर पुलिस ने एसआई कर्मजीत सिंह व  एसआई योगेश कुमार द्वारा रिपोर्ट लिखाई गई।

    पुलिस ने सपा विधायक मनोज पारस, इमरान कुरैशी, हनीफ, शहजाद अंसारी, आलमगीर, केशर, जमशेद, कफील अंसारी, राशिद, शिवकुमार गोस्वामी, परवेज पाशी, रामदयाल गैस वाले, असलम, अहमद हसन, मतलूब कुरैशी आदि 35 समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के विरुद्ध धारा 188, 269, 270  व महामारी,आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा ( 3) 51 (बी) के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही शुरु कर दी है। 


  • कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का मुकाबला करने के लिए मंत्रालय की नई पहल

    मुख्य फोकस अस्पताल के बाहर के कोविड-19 रोगी

    नई दिल्ली। देश में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर का मजबूती से मुकाबला करने के लिए आयुष मंत्रालय आज शुक्रवार 07 मई 2021 से अपनी पॉली हर्बल औषधि आयुष-64 और काबासूरा कुडिनीर को कोविड-19 संक्रमित रोगियों (जो अस्पताल में भर्ती नहीं हैं) को वितरित करने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू कर रहा है। इन दवाओं की उपयोगिता और प्रभावशीलता बहु-केंद्रीयक्लीनिकल परीक्षणों के माध्यम से साबित हो चुकी है। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और आयुष मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) किरेन रिजिजू द्वारा शुरू किए जा रहे इस अभियान से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि दवाएँ पारदर्शी तरीके से ज़रूरतमंदों तक पहुँचे। अभियान में मुख्य सहयोगी के रूप में सेवा भारती संस्था साथ जुड़ी है।

    कोविड के लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम संक्रमण के इलाज में कारगर इन औषधियों के देशव्यापी वितरण की एक व्यापक रणनीति बनाई गई है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में काम करने वाले विभिन्न संस्थानों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा और यह सेवा भारती के देशव्यापी नेटवर्क द्वारा समर्थित होगा।

    आयुष मंत्रालय द्वारा विभिन्न स्तरों पर किये जा रहे प्रयासों को कारगर बनाने के लिए तथा इस तरह की पहल के लिए रणनीति तैयार करने और विकसित करने के लिए वरिष्ठ विशेषज्ञों के एक समूह के साथ एक अंतःविषयक आयुष अनुसंधान और विकास कार्य बल पहले से ही काम कर रहा है। कोविड-19 के दुष्प्रभाव को घटाने और प्रबंधन में आयुष हस्तक्षेप की भूमिका का आकलन करने के लिए कई नैदानिक (क्लीनिकल), पर्यवेक्षणीय अध्ययन भी किए गए हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल: आयुर्वेद और योग के एकीकरण’ के लिए एक अंतःविषयक समिति भी स्थापित की है, जिसकी अध्यक्षता ICMR के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी.एम. कटोच तथा विशेषज्ञों के समूह ने की है।

    कोविड-19 के खिलाफ जारी इस जंग में आयुष मंत्रालय द्वारा की गई विभिन्न पहलों में आयुर्वेद और योग पर आधारित कोविड-19 के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल भी शामिल है, जिसका उद्देश्य आम जनता को इन प्रणालियों की ताकत का लाभ उठाने में मदद प्रदान करना है। इसके अलावा, कोविड-19 की इस दूसरी लहर के उभार के दौरान मंत्रालय ने आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं और साथ ही कोविड-19 रोगियों के लिए होम आइसोलेशन के दौरान आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार स्वयं की देखभाल के लिए निवारक उपाय साझा किये हैं। इसके अलावा, मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान एथिकल प्रैक्टिसेज पर आयुष चिकित्सकों के लिए सलाह-सहायिका भी जारी की है।

    ज्ञात हो कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान आयुष-64 और काबासुरा कुडिनीर कोविड-19 के हल्के एवं मध्यम संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरे हैं। देश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष-64, जो कि आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल दवा है, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार में मानक देखभाल के लिए सहायक के रूप में उपयोगी है।

    1980 में विकसित की गई थी आयुष-64: उल्लेखनीय है कि आयुष-64 प्रारंभ में मलेरिया के लिए 1980 में विकसित की गई थी और अब इसे कोविड-19 के लिए पुनरुद्देशित किया गया है। आयुष मंत्रालय तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान मंत्रालय (CSIR) के सहयोग ने हाल ही में कोविड-19 के हल्के एवं मध्यम संक्रमण के रोगियों में आयुष 64 की सुरक्षा और प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक बहु-केंद्र क्लीनिकल परीक्षण कार्य पूरा किया है। इसके अलावा सिद्ध पद्धति के औषधीय काढ़े काबासुरा कुडिनीर को भी आयुष मंत्रालय के तहत कार्यरत केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (CCRS) ने कोविड-19 रोगियों में इसकी प्रभावकारिता का अध्ययन करने के लिए क्लिनिकल परीक्षणों द्वारा जांचा और तथा हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के रोगियों के उपचार में उपयोगी पाया।

    आयुष -64 और काबासुरा कुडिनीर के उत्साहवर्धक परिणामों के आधार पर लक्षणविहीन, हल्के से मध्यम COVID-19 संक्रमण में मानक देखभाल के लिए सहायक के रूप में, आयुष मंत्रालय इन औषधियों के वितरण के लिए इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ कर रहा है ताकि होम आइसोलेशन में रह रहे कोविड-19 संक्रमण के मरीजों को इन औषधियों का सही लाभ मिल सके और उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने की नौबत ही न आने पाए।

  • फेफड़ों को रखना चाहते है मजबूत, बस तुलसी में ये 5 चीजें मिलाकर ऐसे करें इस्तेमाल

    कहा जाता है कि अगर आपके सांस लेने में किसी भी तरह की समस्या नहीं होती है, यानि चलने में सांस नहीं फूलती है तो समझ लें कि आपके लंग्स मजबूत है और आप कई बीमारियों के हमले झेल सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी लोग बेपरवाह हैं। आपके द्वारा की गई जरा सी लापरवाही आपको कोरोना का शिकार बना सकती हैं। दरअसल कोरोना का नया स्ट्रेन सीधे आपके लंग्स पर अटैक करता है। जिसे वह डैमेज करता है। जिससे आपके शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती हैं। इससे आपकी जान पर भी बन आती है। इसलिए फेफड़ों को हेल्दी रखना बहुत ही जरूरी हैा

    हवा में प्रदूषण के साथ -साथ स्मोकिंग की बुरी आदत, किसी ना किसी तरह की एलर्जी, रेस्पिरेटरी डिजीज़ सब मिलकर सांसों संबंधी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए लंग्स का ख्याल रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि शरीर को चलाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है और लंग्स का काम शरीर में ब्लड के जरिए ऑक्सीजन की सप्लाई करना है। जानिए कैसे तुलसी के साथ कुछ चीजें मिलाकर रोजामा सेवन करने से आपका फेफड़े मजबूत होगे। इसके साथ ही शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी। 

    सेवन का तरीका-फेफड़ों को मजबूत करने के लिए थोड़ी सी मुलेठी, 1-2 काली मिर्च, 1-2 लौंग को सेंक कर, 4-5 तुलसी के पत्ते, थोड़ी सी मिश्री और थोड़ी सी दालचीनी लेकर मुंह में डालकर धीरे-धीरे चबा लें। आप रोजाना ऐसा कर सकते हैं। इससे अस्थमा में भी लाभ मिलेगा।

    मुलेठी

    औषधीय गुणों से भरपूर मुलेठी में विटामिन बी, ई के साथ-साथ फास्फोरस, कैल्शियम, कोलीन, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सिलिकॉन, प्रोटीन, ग्लिसराइजिक एसिड के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बायोटिक गुण पाए जाते हैं। जो सर्दी-जुकाम, बुखार के साथ-साथ फेफड़ों को मजबूत रखने में मदद करती है। मुलेठी का सेवन 3-5 ग्राम ही पाउडर के रूप में करना चाहिए। मुलेठी की तासीर ठंडी होती है। 

    तुलसी

    तुलसी के पत्ते में अधिक मात्रा में पोटैशियम, आयरन, क्लोरोफिल  मैग्नीशियम, कैरीटीन और विटामिन-सी पाया जाता है जो फेफड़ों को हेल्दी रखने में मदद करता है। रोजाना सुबह 4-5 पत्तियों को चबा लें। इसके अलावा आप गिलोय और तुलसी का आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। 

    लौंग

    दिखने में छोटी और खाने में थोड़ी सी कड़वी लगने वाली लौंग कई गुणों से भरपूर होती है। लौंग में युजिनॉल नामक तत्व पाया जाता है, जिसके कारण स्ट्रेस, पेट संबंधी समस्या, पार्किसंस, बदनदर्द जैसी समस्याओं से लाभ मिलता है। लौंग में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल गुणों के अलावा विटामिन ई, विटामिन सी, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन ए, थायमिन और विटामिन डी, ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे आवश्यक तत्व पाए जाते हैं। हार्ट, फेफड़े, लिवर आदि को मजबूत करने के साथ पाचन तंत्र को दूरस्त रखने में मदद करता है। इसके साथ ही सर्दी-जुकाम जैसी समस्या से भी लाभ मिलता है। 

    दालचीनी 

    दालचीनी स्वाद में थोड़ी मीठी और तीखी होती है। इसमें भरपूर मात्रा में थाइमीन, फॉस्फोरस, प्रोटीन, सोडियम, विटामिन, कैल्शियम, मैंग्नीज, पोटेशियम, निआसीन, कार्बोहाइडे्ट आदि पाए जाते हैं। इसके अलावा यह एंटी-ऑक्सीडेंट का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। यह फेफड़ों को हेल्दी रखने के साथ हार्ट को भी मजबूत रखते हैं। इसके साथ ही इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद मिलती है। 

  • समकालीन चर्चा/ व्यथा

    क्या आपको उस चित्र की याद है?
    उस चित्र का नाम है- ‘गिद्ध और छोटी बच्ची’। इस चित्र में एक गिद्ध, भूखी बच्ची की मृत्यु का इंतजार कर रहा है। एक दक्षिण अफ्रीकी फोटो पत्रकार केविन कार्टर ने इसे मार्च 1993 के अकाल में सूडान में खींचा था। उस फिल्म के लिए उसे पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था। लेकिन इतना सम्मान प्राप्त करने के बाद भी कार्टर ने 33 वर्ष की उम्र में आत्महत्या कर ली थी।

    उस आत्महत्या का कारण क्या था? वास्तव में, जब वह सम्मान मिलने की खुशी मना रहा था, और उस पुरस्कार का समाचार अनेक टीवी समाचार चैनलों पर दिखाया जा रहा था, उसी समय किसी ने उससे एक टेलीफोन इंटरव्यू में पूछा कि अन्त में उस लड़की का क्या हुआ?

    कार्टर ने उत्तर दिया कि मैं कुछ कह नहीं सकता, क्योंकि मैं अपनी उड़ान पकड़ने की जल्दी में था।

    ‘वहाँ कितने गिद्ध थे?’ उसी आदमी ने पूछा।

    कार्टर ने कहा, ‘मैं समझता हूँ कि वहाँ एक ही था।’

    टेलीफोन पर दूसरी ओर से बात कर रहे व्यक्ति ने कहा, ‘मैं कह रहा हूँ कि वहाँ उस समय दो गिद्ध थे, उनमें से एक के पास कैमरा था।’

    इन शब्दों की सार्थकता समझते ही कार्टर बहुत दुःखी हो गया और उसके कुछ समय बाद उसने आत्महत्या कर ली।

    हमें हर स्थिति में मानवता का ध्यान रखना चाहिए। कार्टर आज भी जिन्दा होता, यदि उसने उस भूख से मरती हुई बच्ची को संयुक्त मिशन के भोजन केन्द्र तक पहुँचा दिया होता, जो वहाँ से केवल आधा मील दूर था।

    आज फिर, अनेक गिद्ध हाथों में कैमरा लेकर पूरे देश से अपने घर लौट रहे हैं, जो केवल जलती हुई चिताओं और ऑक्सीजन के अभाव में दम घुटने से मरने वाले लोगों के चित्र खींच रहे हैं और उनको ऑनलाइन बेच रहे हैं।

    इन गिद्धों को मौतों की चिन्ता करने के बजाय उनके समाचार एकत्र करने की चिन्ता अधिक है, ताकि चैनलों की टीआरपी बढायी जा सके। वे जलती हुई चिताओं में ईंधन डालकर ब्रेकिंग न्यूज एकत्र करने में व्यस्त हैं।

    केविन कार्टर में स्वाभिमान था, इसलिए उसने आत्महत्या कर ली, लेकिन ये पत्रकार नामधारी गिद्ध गर्व के साथ ब्रेकिंग न्यूज बनाने में व्यस्त हैं। (साभार)

  • जमाखोरी से मेडिकल स्टोरों पर जीवन रक्षक दवाइयों का टोटा। दहशत में जरूरत से अधिक दवाईयों की खरीद रहे लोग

    लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और सरकार द्वारा रोकथाम के प्रयास के बीच मेडिकल स्टोर्स से दवाइयां भी कम होती जा रही हैं। मांग के हिसाब से आपूर्ति न होना व कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय दवाइयों की अचानक जरूरत की बात सोचकर लोग आवश्यकताओं से अधिक दवाइयों की खरीदकर उसका स्टॉक कर रहे हैं। लोगों की यह जमाखोरी आम इंसान के लिए समस्या बनती जा रही है। बाजार से गायब होने के कारण लोगों को यह दवाएं उपलब्ध नहीं हो रही। 

    सामान्यतः प्रयोग होने वाली दवाइयां लगभग सभी मेडिकल स्टोर्स पर मिल जाती हैं। कुछ विशेष दवाइयों को मेडिकल स्टोर्स संचालकों द्वारा नोट करवा कर अगले दिन उपलब्ध करवा दिया जाता है। नियमित दवाइयों का सेवन करने वालों के लिये अधिकतर दवाइयां उनके लिये जीवन रक्षक दवाइयां जैसी ही होती है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के अलावा रक्तचाप, मधुमेह, थायरायड जैसे रोगों से पीड़ितों को लगातार दवाइयों का सेवन करना होता है। इसके अलावा सर्दी, बुखार, पेट दर्द जैसी सामान्य दवा व सर्जिकल आदि के केस वालों की दवाइयां होती है जो कि अल्प अवधि के लिये इस्तेमाल की जाती है। कोविड-19 के सेकेंड स्ट्रीम की गंभीरता और लगातार संक्रमण की बढ़ोत्तरी ने लोगों के दिलो में दहशत भर दी है। लोगों के लागतार संक्रमित होने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। दूसरी ओर बिना किसी टेस्ट और लक्षण वाले व्यक्तियों की सांस लेने की दिक्कत से होने वाली मौतों ने लोगो के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा दी है।

    कोविड मरीजों को सुगमता से इलाज मिल सके, इसके लिये सरकारी अस्पतालों में ओपीडी लगभग बन्द है। अब निजी चिकित्सकों ने भी ओपीडी या तो बन्द कर रखी है या फिर सीमित कर दी है। ऐसे में नियमित मरीजों को इलाज में दिक्कत हो रही है और वह दवाई कराने के लिये झोलाछापों या मेडिकल स्टोरों के ही भरोसे है। कोविड संक्रमण का असर कहा जाये या मौसम का मिजाज, लगभग सभी के घरों में खांसी, जुखाम, बुखार के मरीज हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर्स से दवाइयों की खरीद बढ़ गयी है। मेडिकल स्टोर्स में दवाइयों की जबरदस्त किल्लत देखने को मिल रही है। एक मेडिकल एजेंसी के संचालक ने बताया कि लॉकडाउन होने की वजह से दवाइयों के आने में समस्या आ रही है। कुछ एक दवाइयों की ऊपर से भी कम सप्लाई मिल रही है। लोगों की आवश्यकताओं से अधिक दवाइयों की खरीद की वजह से भी दवाइयों की कमी सामने आ रही है। शुगर, बीपी, हार्ट आदि में काम आने वाली दवाइयां जैसे ग्लाइकोमेट, ग्लाइकोमेट 0.5, ग्लाइमेट एमएक्स एवं चिकित्सकों द्वारा पैरासीटामाल डोलो 650, कालपाल समेत कई दवाइयों की खपत बढ़ गई है। इसके अलावा खांसी के सीरप आदि की मांग अधिक है।

  • बिहार की तरह यूपी में भी एम्बुलेंस मालिकों चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है। वहां स्वास्थ्य विभाग व परिवहन विभाग बिहार के आपसी समन्वय से गठित समिति द्वारा विस्तृत समीक्षा की गई और राज्य भर में निजी एंबुलेंस का किराया निर्धारित करने की अनुशंसा कर दी गई। उत्तर प्रदेश में भी ऐसा होने से गरीब एवं मध्यम वर्ग को राहत मिल सकेगी और वो मनमानी व लूट खसोट का शिकार होने से बच सकेंगे।

    विदित हो कि बिहार सरकार द्वारा कोविड 19 संक्रमण को देखते हुए एम्बुलेंस की मनमानी को रोकने के लिए एंबुलेंस का दर निर्धारण किया गया है।
    स्वास्थ्य विभाग एवं परिवहन विभाग, बिहार के आपसी समन्वय से गठित समिति के द्वारा विस्तृत समीक्षोपरांत राज्य भर में निजी एंबुलेंस का किराया निर्धारित करने की अनुशंसा की गई है। इस एंबुलेंस में बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम, जीवन रक्षक दवाएं एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध रहेंगे।
    समिति की अनुशंसा के आलोक में  The Bihar Epidemic Disease, Covid-19 regulation 2021 के तहत प्रदत शक्तियों के आलोक में उपरोक्त आदेश का उल्लंघन किए जाने पर The Bihar Epidemic Disease, Covid-19 regulation में निहित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।  राज्य भर में विभिन्न श्रेणियों के निजी एंबुलेंस का किराया निम्नवत निर्धारित किया गया है :-
    01. छोटी कार (सामान्य) – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को देखते हुए एंबुलेंस अनुशंसित दर (50 कि.मी. तक आने-जाने सहित) 1500 रुपये निर्धारित किया गया है तथा 50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 18 रुपये प्रति किलोमीटर (आने-जाने सहित) देय होगा।
    02. छोटी कार (वातानुकूलित) – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को देखते हुए एंबुलेंस अनुशंसित दर (50 कि.मी. तक आने-जाने सहित) 1700 रुपये निर्धारित किया गया है तथा 50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 18 रुपये प्रति किलोमीटर (आने-जाने सहित) देय होगा।
    03. बोलेरो/सुमो/मार्शल (सामान्य) – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को देखते हुए एंबुलेंस अनुशंसित दर (50 कि.मी. तक आने-जाने सहित) 1800 रुपये निर्धारित किया गया है तथा 50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 18 रुपये प्रति किलोमीटर (आने-जाने सहित) देय होगा।
    04. बोलेरो/सुमो/मार्शल (वातानुकूलित) – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को देखते हुए एंबुलेंस अनुशंसित दर (50 कि.मी. तक आने-जाने सहित) 2100 रुपये  निर्धारित किया गया है तथा 50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 18 रुपये प्रति किलोमीटर (आने-जाने सहित) देय होगा।
    05. मैक्सी/सी.टी. राईड/विंगर/टेम्पों/ट्रेवलर एवं समकक्षीय (14-22 सीट) – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को देखते हुए एंबुलेंस अनुशंसित दर (50 कि.मी. तक आने-जाने सहित) 2500 रुपये निर्धारित किया गया है तथा 50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 25 रुपये प्रति किलोमीटर (आने-जाने सहित) देय होगा।
    06. जाइलो/स्कॉर्पियो/क्वालिस/ट्वेरा (वातानुकूलित) – कोरोना से उत्पन्न परिस्थिति को देखते हुए एंबुलेंस अनुशंसित दर (50 कि.मी. तक आने-जाने सहित) 2500 रुपये निर्धारित किया गया है तथा 50 किलोमीटर से अधिक परिचालन होने पर 25 रुपये प्रति किलोमीटर (आने-जाने सहित) देय होगा।

  • लखनऊ। जानकीपुरम थाना अंतर्गत सौभाग्य लॉन से करीब 600 पेटी किंगफिशर बीयर बरामद।

    घटनास्थल पर आईपीएस प्राची सिंह मौजूद एसीपी अलीगंज व प्रभारी निरीक्षक जानकीपुरम बृजेश सिंह भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर मौजूद।

    लॉकडाउन में बेचने के लिए एक लॉन में इकट्ठा की गई थी 600 पेटी किंगफिशर की बियर।

    भारी मात्रा में सेक्टर 2 जानकीपुरम स्थित सौभाग्य लॉन से बीयर बरामद।

    नार्थ जोन पुलिस की बड़ी कार्रवाई भारी मात्रा में बीयर बरामद।

  • जीत के जश्र के बीच पराजित प्रत्याशी के पोस्टर फाड़े 

    बिजनौर। स्योहारा थाने के ग्राम अकबरपुर आशा उर्फ हरौली में जीत का जश्न मना रहे प्रधान पति समर्थकों ने पराजित हुए पूर्व प्रधान के बैनर पोस्टर फाड़ दिए। बैनर, पोस्टर पर स्याही से अभद्र भाषा प्रयोग किया, जिसको लेकर गांव में तनाव फैल गया। ग्राम हरौली के पूर्व प्रधान अलीमुद्दीन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए खड़ा हुआ था। मुकाबले मे निजामुद्दीन की पत्नी जरीना ने अलीमुद्दीन को पराजित कर जीत हासिल की। जीत की खुशी मनाते हुए प्रधान पति निजामुद्दीन ने ढ़ोल बजाकर गांव में विजय जुलूस निकाला। उन्होंने व समर्थकों ने कोविड-19 नियम का पालन भी नहीं किया और बिना सोशल डिस्टेंसिंग के जलूस निकाला। प्रधान पति समर्थकों ने अलीमुद्दीन के बैनर पोस्टर फाड़ दिए तथा बैनर पर स्याही से अभद्र भाषा लिख दी। तहरीर में पूर्व प्रधान अलीमुद्दीन ने मानहानि का आरोप लगाते हुए 5 लाख के मुआवजा की मांग भी की है। थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार गौड़ का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

  • बिजनौर। जनपद में गुरुवार को कोरोना के 133 पॉजिटिव केस की पुष्टि हुई है। इसी के साथ एक्टिव केस की संख्या 2210 पर पहुंच गई है।

    मण्डावर थाने में भी पहुँचा कोरोना

    थाना मण्डावर में 01 दरोगा व 05 सिपाही हुए कोरोना पॉजिटिव

  • हारे प्रत्याशी के घर में घुस कर तोडफ़ोड़, मारपीट। एसपी की चेतावनी के बावजूद विजयी प्रधान ने निकाला जुलूस 

    बिजनौर। त्रिस्तरीय चुनाव बीतने व नतीजे आने के बाद खुद पुलिस कप्तान ने सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि कोई भी व्यक्ति विजय जुलूस नहीं निकालेगा और न ही कोई जश्न होगा, उसके बावजूद लोग दबंगई दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में स्योहारा थानांतर्गत अनीसा नंगली में एक महिला की जान भी जा चुकी है। वहीं अब ग्राम किवाड़ में भी हालात गर्म बने हुए हैं। आरोप है कि यहां जीते हुए प्रत्याशी शगुफ्ता पत्नी शौकत अली व उसके सैकडों समर्थकों ने गांव भर में न सिर्फ विशाल विजय जुलूस निकाला बल्कि दूसरे नम्बर पर आए  इशरत अली पुत्र अमीरुद्दीन के घर जाकर जोर-जोर से ढ़ोल बजाते हुए गाली गलौज भी की। विरोध करने पर सभी से गुंडई दिखाते हुए इशरत के घर में घुसकर तोडफ़ोड़ व परिजनों से मारपीट की। मामले की शिकायत इशरत ने जुलूस की वीडियो सहित डीआईजी से की। पुलिस ने आरोपियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।पीडि़त ने बताया कि पुलिस ने अच्छे प्रयास किये हैं साथ ही परिवार की सुरक्षा के लिए रात को पुलिस की ड्यूटी भी रही लेकिन अभी भी उनको डर व भय है क्योंकि आरोपी दबंग लोग हैं, जो कभी भी कुछ भी बुरा कर सकते हैं। साथ ही इशरत ने कहा कि भले ही वो दूसरे नम्बर पर आकर हार गया है लेकिन वो हमेशा गांव व लोगों के बीच रहकर सदा सबकी सेवा में हाजिर रहेगा। थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार गौड़ ने कहा कि गांव में स्थिति सामान्य है साथ ही कई आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

  • बिजनौर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह के निर्देशन में बिना मास्क घूमने वालों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान में दिनांक 06.05.2021 को जनपदीय पुलिस द्वारा बिना मास्क घूम रहे 431 व्यक्तियों का चालान कर 3,26,500 रुपए का जुर्माना वसूला गया।

  • लॉक डाउन की धज्जियां उड़ा कर बटोर रहे भारी मुनाफा 
    बिजनौर। एक तरफ जहां कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते प्रदेश सरकार द्वारा पूरे सूबे में सोमवार तक लॉक डाउन लगाया गया है, वहीं दूसरी ओर हल्दौर नगर के कुछ दुकानदार नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए संकट के इस समय मे भी अधिक कीमतों पर सामान बेच कर मुनाफा कमाने में लगे हैं। 

    प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव करने के लिए विभिन्न उपाय किये जा रहे है। संक्रमण की दर को रोकने के लिए लॉकडाउन किया गया है, लेकिन हल्दौर नगर के कुछ दुकानदार संक्रमण को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। आरोप है कि ऐसे दुकानदार लॉकडाउन के बावजूद भी चोरी-चुपके अपनी सुविधा के अनुसार दुकान खोल कर अधिक कीमत पर सामान बेच रहे हैं। नगर के गली मोहल्लों की अधिकतर दुकानें रोजाना खुलती हैं, जबकि गांव में भी सभी दुकान खुलने के बावजूद लोगों का उक्त दुकानों पर तांता लगा रहता है। इसे प्रशासन की घोर लापरवाही ही कहा जाएगा कि नगर के बाजारों में लोगों की खरीददारी करने के लिए भीड़ भी लग जाती है। पुलिस की पैनी निगाह के बाद भी ऐसे लोग बाज नहीं आ रही हैं। हालांकि पुलिस को सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत कार्रवाई भी कर रही हैं। कुछ दुकानदारों ने तो यह रवैया बना रखा है। दुकान पर जब ग्राहक सामान लेने आता तो ग्राहक को दुकान के अन्दर लेकर शटर गिरा देते हैं, जिससे आमजन को लगे दुकान बंद हैं या फिर दुकान का आधा शटर खोले रहते हैं। यह हाल पूरे नगर का है। 

  • नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान पर जानलेवा हमला। लाठी डंडो व सरियों से हमला। तमंचे से फायरिंग। कई घायल, पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज।

    बिजनौर। हल्दौर थाना क्षेत्र के ग्राम बल्दिया में चुनावी रंजिश के चलते नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान पर कुछ लोगों ने तमंचों से जानलेवा हमला कर दिया। घटना में ग्राम प्रधान सहित उसके कई समर्थक घायल हो गए। प्रधान के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने पांच लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी है।बुधवार रात्रि ग्राम बल्दिया का नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान रोहित पुत्र जोगेन्द्र गांव में ही अपने एक परिचित के घर से अपने घर लौट रहा था। प्रधान के परिजनों ने थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि रास्ते में चुनाव में पराजित प्रत्याशी आशुतोष उर्फ टीटू पुत्र वीरेंद्र, दीपक, मोनू, मुकेश व विपिन ने उसे घेर लिया और जान से मारने की नीयत से लाठी डंडो व सरियों से हमला कर दिया। आरोपियों ने रोहित पर तमंचे से फायरिंग भी की, जिसमे वह बाल बाल बच गया। फायरिंग की आवाज सुन मौके पर पहुंचे रोहित के साथियों से भी आरोपियों ने मारपीट की। ग्रामीणों को आता देख आरोपी धमकियां देते हुए फरार हो गए। हमले में प्रधान व उसके चार साथी घायल हो गए। प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार ने रोहित के परिजनों की तहरीर पर पांच आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच कर कार्यवाही की बात कही है।

  • लॉक डाउन के बावजूद घर में नहीं बैठ पा रहे लोग 
    बिजनौर। लॉक डाउन में लोगों को अपने घरों में बैठने में तकलीफ हो रही है। यही कारण है कि कोरोना के संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए यूपी में 10 मई तक बढ़ाए गए लॉकडाउन की परवाह न कर लोग सडक़ों पर निकल रहे हैं। बुधवार को पुलिस ने दुकानें बंद रखने और सडक़ों पर आवाजाही रोकने के प्रति सख्ती का रुख अपनाया था। इस कारण गुरुवार को मुख्य बाजार एवं गली-मोहल्लों की दुकानें तो बंद रहीं, लेकिन काफी दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों के बाहर बैठे दिखाई दिये। ये लोग किसी ग्राहक के आते ही उसे चुपचाप सामान बेच रहे हैं। वहीं सिविल लाइन व अन्य क्षेत्रों में भी लॉकडाउन के बाद भी काफी भीड़ नजर आई। सडक़ों पर लोग अपने चौपहिया व दोपहिया वाहनों से आवाजाही करते दिखे। घर में बैठना ऐसे लोगों को परेशानी भरा प्रतीत हो रहा है। वहीं ऐसे लोगों की तादाद भी बहुत अधिक हैं, जो अपने चेहरे पर मास्क नही लगा रहे हैं। सोचने वाली बात यह है कि लॉक डाउन के कारण जब पूरा बाजार बंद हैं तो ऐसे में वह किस काम से बाजार की ओर दौड़ लगा रहे हैं। इसके पीछे पुलिस विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। पिछले लॉकडाउन की तरह से इस बार नगर की पुलिस सक्रिय नहीं है। किसी भी चौराहे पर कोई पुलिसकर्मी चैकिंग करते नजर नहीं आ रहा। पुलिस की सख्ती न होने के कारण लोग बेखौफ होकर घरों से निकल रहे हैं। यही नहीं गांवों से भी लोगों का बिजनौर शहर आना-जाना हो रहा है। ऐसे में लॉक डाउन लगने को लेकर प्रश्रचिन्ह खड़े हो गए हैं। 


  • डॉक्टर दंपती की तकनीक और रिटायर्ड वैज्ञानिक की मदद से इंदौर के उद्योगपति ने आधी कीमत में बनाया वेंटिलेटर। 10 महीने की मेहनत से 50 हजार में किया तैयार। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी।
    सिलेंडर खत्म होने पर वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को देगा।

    इंदौर। (एजेंसी) कोरोना के गंभीर मरीजों को आ रही वेंटिलेटर की समस्या को देखते हुए शहर के एक उद्योगपति ने आधी कीमत में देसी वेंटिलेटर बना लिया है। विदेश से लौटे डॉक्टर दंपती की तकनीक और कैट के रिटायर्ड सांइटिस्ट की मदद से यह हो सका है। उनके वेंटिलेटर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। पोलोग्राउंड में साईं प्रसाद उद्योग के संचालक संजय पटवर्धन ने बताया कि नान इन्वेजिव टाइप का वेंटिलेटर 10 माह में तैयार हुआ है। इसकी कीमत करीब 50 हजार है, जबकि विदेशी वेंटिलेटर एक-डेढ़ से 10 लाख में मिलते हैं। यह कम ऑक्सीजन फ्लो में भी सपोर्ट करता है। सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने पर तीन-चार घंटे वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को दे सकेगा। मरीज को कहीं शिफ्ट करना हो या फिर छोटी जगहों पर मरीज गंभीर हो जाए और संक्रमण 50-60 फीसदी हो तो ऐसी स्थिति में यह जिंदगी बचा सकता है। इसका वजन दो किलो है, जिससे इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं।

    बना है यूरोपीय मानकों के अनुसार-पटवर्धन बताते हैं कि डॉ. एसके भंडारी और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा के पास इसकी तकनीक थी। कैट के रिटायर्ड वैज्ञानिक अनिल थिप्से ने मदद की। मेडिकल उपकरण के लिए जरूरी लाइसेंस लेने, यूरोप के मानक के अनुसार बनाने के लिए पार्ट्स अमेरिका, मुंबई आदि जगह से मंगाए। टेस्टिंग, रजिस्ट्रेशन आदि में भी काफी समय लगा।

    इसलिए पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरतवेंटिलेटर तब उपयोग में आता है, जब मरीज खुद सांस नहीं ले पाता। वेंटिलेटर दो तरह के होते हैं। पहला – इन्वेजिव, जिसमें लंग्स तक पाइपलाइन जाती है। दूसरा- नाॅन इन्वेजिव, जिसमें नाक में पाइपलाइन जाती है। मरीज के लंग्स चलते हैं। (दै.भा.)

  • ऑक्सीजन और दवाओं की कालाबाजारी पर सीएम योगी सख्त, अधिक वसूली करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रत्येक सीएचसी में 20-20 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए जाएं। सभी जिलों में 4,370 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों को वेंटिलेटर भी उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों में इन जीवनरक्षक उपकरणों का क्रियाशील होना सुनिश्चित कराएं। मुख्य सचिव स्तर से इसकी निगरानी की जाए। कतिपय जिलों में एनेस्थेटिक नहीं हैं, वहां अगले 24 घंटे में एनेस्थेटिक और तकनीशियन उपलब्ध कराए जाएं। सीएम ने बुधवार टीम-9 की बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से भी कंसंट्रेटर प्राप्त हुए हैं। मरीजों को ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

    अधिक वसूली करने वालों पर की जाए सख्त कार्रवाई

    सीएम ने कहा कि कुछ अस्पतालों में बेड व ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता होने के बाद भी अनावश्यक अभाव दर्शा कर मरीजों और उनके परिजनों के इलाज में आनाकानी करने की शिकायतें मिली हैं। कुछ जगहों पर नियत शुल्क की दर से अधिक की वसूली की बात भी सामने आई है। ऐसी सभी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई के निर्देश अफसरों को दिए हैं।

    एकीकृत पोर्टल पर दी जाए जानकारी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड मरीजों के संबंध में दैनिक रिपोर्ट एकीकृत पोर्टल पर हर दिन जरूर अपलोड की जाए। ऑक्सीजन प्लांट के सम्बंध में केंद्र सरकार, राज्य सरकार अथवा निजी क्षेत्र द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों का प्रभावी मानीटिरिंग की जाए। मुख्य सचिव इनकी दैनिक समीक्षा करें। ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को और बेहतर किये जाने की जरूरत है। हर जिले के संबंध में पृथक कार्ययोजना तैयार हो। ऑक्सिजन ऑडिट की प्रारंभिक रिपोर्ट को दृष्टिगत रखते हुए ऑक्सीजन के वितरण व्यवस्था लागू करें। केंद्र सरकार से 14 नए टैंकर मिले हैं। टैंकरों की संख्या और बढ़ाने की दिशा में प्रयास किये जाएं। 108 एम्बुलेंस सेवा की 75 फीसदी एम्बुलेंस कोविड डेडिकेटेड की जाएं, शेष 25 फीसदी को नॉन कोविड मरीजों के उपयोगार्थ आरक्षित रखा जाए। आइसीसीसी, कोविड प्रबंधन की रीढ़ है। डीएम व सीएमओ हर दिन यहां भ्रमण कर निरीक्षण जरूर करें। दैनिक बैठक यहीं होनी चाहिए।

  • लखनऊ। यूपी के गोंडा में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान एक दिलचस्प मामला हुआ। पंडरी कृपाल ब्लॉक के खैरा गांव के प्रधान पद के उम्मीदवारों को एक बराबर वोट आया तो टॉस प्रक्रिया की गई और हवा में उछलकर जमीन पर गिर सिक्का घास में सीधा खड़ा हो गया। इस प्रक्रिया में जब नतीजे नहीं सामने आए तो पर्ची निकालकर चुनावी भाग्य का फैसला किया गया। दोनों प्रधान समर्थकों ने विवाद उत्पन्न करने का प्रयास किया, मौके पर पहुंची पुलिस उपद्रवियों को कोतवाली ले गई।

    जिला निर्वाचन अधिकारी के संज्ञान में आने पर उनके निर्देश पर दोनों प्रत्याशियों के बीच पहले सिक्का उछाला गया तो सिक्का घास में खड़ा हो गया। उसके बाद लॉटरी निकाली गई, जिसमें पूनम पाठक आखिरकार विजई घोषित हुईं। इस जीत से पूनम पाठक के भाग्य का फैसला हुआ और वो प्रधान चुनी गईं।

    कैसे हुआ जीत का फैसला-गोंडा जिले में पंडरी कृपाल विकासखंड के खैरा गांव से प्रधान पद की प्रत्याशी पूनम पाठक व जामवंत देवी के बीच कांटे की टक्कर हुई। दोनों प्रत्यशियों को 607-607 वोट मिले। इसके बाद दोनों के बीच वोटों की गिनती टाई होने पर दोनों पक्ष के समर्थकों ने आमने-सामने आकर हंगामा शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख मौके पर पहुंची पुलिस ने समर्थकों को हटाने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित समर्थक पुलिस से ही भिड़ने लगे। पुलिस ने प्रदर्शनकारी और हंगामा काट रहे 14 लोगों को हिरासत में ले लिया। उसके बाद सिक्का उछाला गया तो सिक्का घास में खड़ा हो गया। फिर जिला निर्वाचन अधिकारी मार्कण्डेय शाही के निर्देश पर पर्ची निकाल कर प्रधान के भाग्य का फैसला हुआ, जिसमें पूनम पाठक को जीत हासिल हुई।

  • प्रमाण पत्र पाने को चक्कर काट रहे विजयी बीडीसी। तहसील व ब्लाक परिसर के चक्कर लगा रहे बीडीसी।ब्लाक में सात मई को प्रमाण पत्र देने का लगाया नोटिस।

    बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर चुनाव लड़ कर विजय प्राप्त करने के बावजूद जीत का प्रमाण पत्र न मिल पाने को लेकर परेशान नवनिर्वाचित बीडीसी नजीबाबाद तहसील व खंड विकास कार्यालय परिसर के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि मतगणना पूर्ण हो जाने के तीन दिन बाद ब्लाक में सात मई को विजयी होने के प्रमाण पत्र दिए जाने का नोटिस चस्पा किया गया है।

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना पूर्ण हो जाने के तीन दिन बाद भी क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों पर चुनाव लडक़र विजयी होने वाले प्रत्याशियों को निर्वाचन की मतगणना प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों ने प्रमाण पत्र जारी नहीं किए हैं। इसे लेकर विजयी बीडीसी प्रत्याशी जीत का प्रमाण पत्र पाने को तहसील परिसर व ब्लाक परिसर के चक्कर काटकर अधिकारियों से गुहार लगाने में लगे हुए हैं। प्रमाण पत्र पाने से वंचित रहे विजयी प्रत्याशियों का कहना है कि मतगणना पूर्ण होने पर निर्वाचन अधिकारी कैलाश चंद जोशी ने उनके नाम लेकर विजयी होने सम्बन्धित उद्घोषणा की परंतु तकनीकि कारणों से प्रमाण पत्र देने में देरी होने की बात कही। उन्होंने विजय का प्रमाण पत्र न दिए जाने को मतगणना कार्य में जुटी टीम की लापरवाही बताते हुए कहा कि उन्हें कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि प्रमाण पत्र कहां से मिलेंगे? हालांकि काफी संख्या में विजयी प्रत्याशियों के प्रमाण पत्र पाने को घूमते रहने के चलते ब्लाक पर सात मई को विजयी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र दिए जाने का नोटिस चस्पा कर दिया गया। प्रमाण पत्र दिए जाने की मांग करने वालों में वसीम अहमद मोहम्मद अलीपुर परमा, तेजपाल करमसखेड़ी, अहसान मेमनपुरा, गुलशनम जालपुर, गुलशन भागूवाला, फरीदा मेमनपुरा, राईला भागूवाला, राखी हकीमपुर, मौहम्मद उस्मान भागूवाला, धनश्याम भागूवाला, माला देवी तातारपुर लालू, प्रेम गुढ़ा, कामेन्द्री, सनोज, अनीस, गुफरान, नईम अहमद आदि लोग शामिल रहे।    

  • पूर्व क्षेत्राधिकारी पुलिस के निधन पर जताया शोक। एसपी क्राइम एटा के पद पर थे तैनात राहुल कुमार। होम क्वारंटाइन में घर पर व्यायाम करते समय गिरे।

    बिजनौर। क्षेत्राधिकारी पुलिस नजीबाबाद रह चुके राहुल कुमार का आकस्मिक निधन हो गया। वह वर्तमान में एसपी क्राइम एटा के पद पर तैनात थे। उनके निधन के समाचार पर नगर में भी लोगों ने गहरा दु:ख जताया। एसपी क्राइम एटा के पद पर तैनात राहुल कुमार का नजीबाबाद से भी नाता रहा है। क्षेत्राधिकारी नजीबाबाद के पद पर रहते हुए उन्होंने व्यापारी जौली हत्याकांड का खुलासा किया था। साथ ही गंगास्नान के दिन नांगलसोती में भरे बाजार में दिन दहाड़े सर्राफ अरुण कुमार के यहां डाली गयी डकैती और दोहरे हत्याकांड का भी खुलासा किया था। इससे क्षेत्र के लोग उनकी कार्यशैली से काफी प्रभावित रहे हैं। बताया जा रहा है कि एसपी क्राइम एटा राहुल कुमार करीब दस दिन पूर्व कोरोना पॉजिटिव हुए थे। वह तभी से होम आइसोलेशन में थे। बुधवार की सुबह व्यायाम करते समय अचानक उनकी तबियत खराब हो गयी और वे नीचे गिर गए। उन्हें जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया। कुछ ही देर बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी मिलने पर डीएम एटा डॉ. विभा चहल, एसएसपी एटा उदय शंकर सिंह आदि अधिकारी अस्पताल पहुंचे। कुछ दिन पूर्व ही कोरोना से उनके भाई की भी मौत हो गयी थी। कोरोना से संक्रमित होने के कारण चुनाव के समय में भी उन्होंने घर से ही काम किया था। उनके निधन के समाचार पर नगर के कई संगठनों व व्यक्तियों ने गहरा दु:ख व्यक्त किया तथा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने के साथ ही उनके परिजनों को इस दु:ख की घड़ी में दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने को ईश्वर से प्रार्थना की।

  • नांगल ग्राम प्रधान समेत दो दर्जन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज। विजय जुलूस में बिना मास्क और बिना सोशल डिस्टेंस सैकड़ों रहे शामिल। वायरल वीडियो में दिखे सैकड़ों समर्थक। पुलिस ने संख्या दिखाई कम।

    बिजनौर। नजीबाबाद तहसील के ग्राम नांगलसोती में ग्राम प्रधान पद के विजयी प्रत्याशी ने सरकार के दिशा-निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाते हुए गांव भर में सैकड़ों समर्थकों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने के नियम को धता बताते हुए विजय जुलूस निकाला। इस विजय जुलूस की वीडियो वायरल हो जाने पर पुलिस ने सैकड़ों समर्थकों के साथ निकाले गए जुलूस में सिर्फ खानापूर्ति करते हुए तीन नामजद और करीब दो दर्जन अज्ञात के खिलाफ ही मुकद्दमा दायर किया है।

    ग्राम पंचायत नांगल से नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान फरमान ने जीत हासिल करने के बाद सैकड़ों की संख्या में समर्थकों के साथ गांव के विभिन्न रास्तों से होकर विजय जुलूस निकाला। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश मे कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण से हडक़ंप मचा हुआ है। शासन प्रशासन और सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान विजय जुलूस निकालने पर पूर्ण रूप से रोक लगा रखी है। इसके बावजूद अनदेखी कर निकाले गए विजय जुलूस में सरकार की ओर से वैश्विक महामारी के संक्रमण को लेकर जारी की गयी गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ायी गयी। विजय जुलूस में शामिल लोगों की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करना तो दूर लोगों ने मास्क तक का प्रयोग करने से परहेज किया। जुलूस में बुजुर्ग और युवाओं के अलावा बच्चे भी शामिल रहे। विजय जुलूस के दौरान कुछ लोगों ने अपने मुंह और नाक को ढक़ने के बजाय मास्क कानों पर मास्क रखा था।

    चर्चा है कि गांव भर में घंटों तक शोरशराबा कर जुलूस निकाले जाने के दौरान पुलिस ने कोई कार्रवाई तक करना उचित नहीं समझा। हालांकि इस विजय जुलूस की वीडियो वायरल हो जाने पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर नींद से जागी पुलिस ने ग्राम प्रधान फरमान तथा दो अन्य लोगों के खिलाफ नामजद तथा करीब दो दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ महामारी अधिनियम आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।  

  • विजय जुलूस निकालते विजयी प्रधान समेत पांच गिरफ्तार

    बिजनौर। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान को अपने साथियों के साथ विजय जुलूस निकलना उस समय भारी पड़ गया जब पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए पांच लोगों का चालान कर दिया। बताया जाता है कि थाना क्षेत्र के ग्राम तुखमापुर के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान सरफराज अंसारी अपने समर्थकों के साथ विजय जुलूस निकाल रहे थे। विरोधियों ने यह जानकारी थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्ण मुरारी दोहरे को दे दी। इस पर वह उप निरीक्षक सुभाष धनगर, सिपाही मोहित, हरीश चौधरी को साथ लेकर तुरंत गांव पहुंचे और मालूमात की। मामला सही पाए जाने पर आरोपी ग्राम प्रधान समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी  की धारा 188/269/270 तथा  महामारी अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कर चालान कर दिया।

  • मौत के तांडव के बीच भी खेल कमीशन का…! एम्बुलेंस चालक और मरीज के तीमारदार के बीच सड़क पर दिनदहाड़े मची ये जंग आजकल कोई नया नजारा नहीं रह गया है। आएदिन ऐसे मामले देखने, सुनने और पढ़ने को मिल जाएंगे कि मरीज को लाने ले जाने के लिए एम्बुलेंस मालिकों, चालकों ने कैसी लूट खुलेआम मचा रखी है। दो चार नहीं, 10 गुना तक किराया। अपने पहले से तय निजी अस्पताल, लैब आदि में ले जाने की जबरदस्ती।

    यह मामला बिजनौर के सिविल लाइंस क्षेत्र का है। एक अस्पताल में भर्ती मरीज का सीटी स्कैन आदि होना था। मरीज के परिजन उसे सरकारी अस्पताल ले जाना चाहते थे लेकिन एम्बुलेंस चालक अपनी जान पहचान बता कर कहीं और ले जाना चाह रहा था। अब यह बात तो पढ़े लिखे से लेकर अनपढ़ व्यक्ति तक भी बखूबी समझता है कि जान पहचान का मतलब क्या होता है। इसका सीधा सा मतलब है कमीशन। कमीशन का मतलब है धन। ….और धन का मतलब है आजकल का सबसे बड़ा सच! इसी के पीछे दुनिया भाग रही है। बहरहाल, इस मामले के पीछे भी एम्बुलेंस चालक की कुछ ऐसी ही चाह रही होगी। काफी देर बवाल चला। आते-जाते लोग रुके, कुछ देखकर आगे बढ़ गए, कुछ ने एम्बुलेंस चालक को खरी खोटी सुनाई। लिहाजा मामले का पटाक्षेप हो गया। फिर भी एक विचारणीय प्रश्न अनुत्तरित रह गया कि चारों तरफ मचे हाहाकार के बीच कोई कैसे मानवता को ताक पर रख देता है! ब्लैक करने के लिए दवा आदि की कृत्रिम कमी, फल, सब्जी, किराना हर चीज के दाम बढ़ा कर बेचना, ये सब क्या है ? सोचिएगा।

  • निर्वाचन आयोग की सर्वसम्मत रायः मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी नहीं होनी चाहिए

    नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने  मीडिया से संबंधित अपनी स्थिति पर हाल के बयानों का संज्ञान लिया है। आयोग ने इस संबंध में कुछ निश्चित प्रेस रिपोंर्टों का भी संज्ञान लिया है। आयोग ने हमेशा कोई निर्णय लेने से पहले उचित विचार-विमर्श किया है।  मीडिया के संबंध में आयोग यह मत स्पष्ट करना चाहता है कि वह स्वतंत्र मीडिया में गंभीर रूप से आस्था रखने के लिए संकल्पबद्ध है। संपूर्ण आयोग और इसके सदस्य अतीत और वर्तमान में संपन्न सभी चुनावों तथा देश में चुनावी लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मीडिया द्वारा निभाई गई सकारात्मक भूमिका को मानते हैं। निर्वाचन आयोग की यह सर्वसम्मत राय है कि मीडिया रिपोर्टिंग के संबंध में उच्चतम न्यायालय के समक्ष किसी तरह की याचिका प्रस्तुत नहीं की जानी चाहिए। 

    आयोग निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ होने से लेकर समाप्त होने तक चुनाव प्रबंधन को प्रभावी बनाने तथा पारदर्शिता लागू करने में मीडिया की भूमिका को विशेष रूप से मानता है। मीडिया के साथ सहयोग के बारे में भारत निर्वाचन आयोग का दृष्टिकोण स्वाभाविक सहयोगी का रहा है और इसमें परिवर्तन नहीं हुआ है।

    Release Id :-1716192
  • लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। अब 10 मई यानी सोमवार सुबह 7 बजे तक पूरे प्रदेश में लॉक डाउन लागू रहेगा। पहले गुरुवार यानी 6 मई सुबह 7 बजे तक पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन अब इसे सोमवार सुबह तक लागू करने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान मिली छूट सशर्त जारी रहेगी।

    उत्तर प्रदेश में कोरोना का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। पंचायत चुनाव के बाद यूपी के हर गांव में संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते सरकार ने लॉक डाउन को बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, पहले जो आदेश आया था, उसके मुताबिक, गुरुवार सुबह 7 बजे से शुक्रवार रात 8 बजे तक बाजार को खोला जाना था।

    वैक्सीनेशन और सैनिटाइजेशन होगा तेज: सरकार ने पूरे हफ्ते लॉक डाउन लगाने का ऐलान किया है। यानी सोमवार सुबह 7 बजे तक पूरे प्रदेश में लॉक डाउन लागू रहेगा। सरकार ने सभी जिला प्रशासन को गांवों में वैक्सीनेशन और सैनिटाइजेशन को तेज करने का निर्देश दिया है। लॉक डाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं, दवा की दुकान समेत ई-कॉमर्स आपूर्ति को चालू रखा जाएगा।

    इनके लिए जरूरी नहीं ई-पास: इस बीच यूपी सरकार की ओर से एक और आदेश जारी किया गया है, जिसमें औद्योगिक गतिविधियों, मेडिकल या आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं का परिवहन, ई-कामर्स ऑपरेशन्स, आपात चिकित्सा वाले व्यक्ति और दूरसंचार, डाक सेवा, प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया सेवा से जुड़े लोगों को ई-पास लेने की जरूरत न होगी।


  • कई जड़ी-बूटियों से बनी दवा आयुष – 64 को कोविड 19 के हल्के और कम गंभीर मामलों के उपचार के लिये क्लीनिकल परीक्षण में कारगर पाया गया।

    नई दिल्ली। कई जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाई गई आयुष–64 दवा को इस महामारी के समय में विशेषज्ञों ने उम्मीद की किरण बताया है। इस दवा को मूलरूप से मलेरिया के उपचार के लिये 1980 में विकसित किया गया था। अब उसे कोविड 19 के उपचार के लिये भी उपयुक्त पाया गया है। केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय के अधीन आयुर्वेद में शोध करने वाला एक अग्रणी संस्थान है। उसने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के सहयोग से हाल में इस दवा का विस्तृत और गहन परीक्षण किया है। इसमें देश के अन्य अनुसंधान संगठनों और मेडिकल कॉलेजों का भी सहयोग लिया गया। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने आयुष 64 का जो क्लीनिकल परीक्षण किया, उसमें पता लगा कि इस दवा में वाइरस के खिलाफ लड़ने, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बुखार उतारने के गुण हैं। इसे लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड 19 संक्रमण के उपचार के लिये भी कारगर पाया गया। परिणामस्वरूप, इस दवा को कोविड 19 के उपचार के लिये उपयुक्त मान लिया गया है।

    आयुष मंत्रालय ने क्लीनिकल परीक्षण के नतीजों की घोषणा 29 अप्रैल, 2021 को एक प्रेस-कांफ्रेंस में की थी। उसके बाद आम जनता और चिकित्सा कार्य से जुड़े लोगों में आयुष – 64 के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। इस विषय में कई जिज्ञासाएं मिली हैं। मंत्रालय ने अब प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों के रूप में जवाब जारी किये हैं, जिन्हें नीचे दिया जा रहा हैः

    1. आयुष क्या है?

    आयुष एक आयुर्वेदिक नुस्खा है, जिसे केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद ने विकसित किया है, जो आयुष मंत्रालय के अधीन आयुर्वेद अनुसंधान की प्रमुख संस्था है। मूल रूप से इसे 1980 में मलेरिया के उपचार के लिये विकसित किया गया था। अब इस दवा को कोविड 19 के उपचार के लिये भी उपयोगी माना गया है, क्योंकि इसमें वाइरस से लड़ने, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बुखार उतारने के गुण हैं। आयुष 64 के वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि इसके 36 घटकों में से 35 घटक ऐसे हैं, जो कोविड 19 के वाइरस के खिलाफ एक-जुट होकर उसका मुकाबला कर सकते हैं। इस नुस्खे में ऐसे भी घटक मौजूद हैं, जो फ्लू जैसी बीमारियों से भी लड़ सकते हैं। देश भर में 64 क्लीनिकल परीक्षण हुये हैं। इन परीक्षणों से जो सबूत मिले हैं, उनसे साबित होता है कि लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड 19 के इलाज में यह दवा बहुत कारगर है और इससे मरीज जल्द ठीक हो सकता है।

    1. आयुष–64 कौन ले सकता है?

    कोविड 19 के किसी भी स्तर का मरीज इसे ले सकता है। बहरहाल, वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि यह दवा लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर मालमों में ज्यादा कारगर है। इसके विपरीत नतीजे निकलने का कोई खतरा नहीं है। इसके अलावा जिन मरीजों को आपात चिकित्सकीय मदद या अस्पताल की जरूरत नहीं है, वे मरीज आयुष–64 ले सकते हैं। कोविड 10 के हल्के और कम गंभीर लक्षणों वाले जिन मरीजों में शुरूआत में बुखार, शरीर दर्द, नाक बंद होना, अस्वस्थ महसूस करना, नाक से पानी बहना, सिरदर्द, खांसी आदि शिकायतें होती हैं, वे दवा ले सकते हैं। साथ में, जिन मरीजों में कोई लक्षण नहीं होता, वे आरटी-पीसीआर जांच के सात दिन के अंदर आयुष–64 दवा ले सकते हैं। इससे बेहतर नतीजे मिलेंगे।

    1. मैं आयुष–64 क्यों लूं?

    रोग के निदान और गंभीरता के मद्देनजर आयुष–64 को बीमारी से उबरने में बहुत कारगर पाया गया है। इससे बीमारी से जल्दी ठीक हो सकते हैं। यह दवा आम सेहत, थकान, चिंता, तनाव, भूख न लगना, आरोग्य और नींद के लिये भी उपयोगी है।

    1. क्या इसकी उपयोगिता कोविड 19 के संदर्भ में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है?

    आयुष–64 कई जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाई गई दवा है। इसे हर चिकित्सकीय तकाजों के तहत बनाया गया है। आयुष मंत्रालय के अधीन आयुष अनुसंधान सम्बंधी केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा तय चिकित्सा मानकों के हवाले से इसकी गुणवत्ता और औषधीय गुणों का पूरा ध्यान रखा गया है। वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो चुका है कि यह लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड 19 संक्रमण के उपचार में कारगर है। देश में इस दवा पर गहन क्लीनिकल परीक्षण किये गये हैं, जिसमें इसे उपयोगी पाया गया है।

    1. मरीजों के लिये कोविड 19 की आदर्श खराक क्या है?

    लक्षण-रहित कोविड 19 के मामलों में इसकी खुराक के तहत खाना खाने के एक घंटे बाद 500 एमजी की दो गोली दो बार लेनी है। गर्म पानी के साथ दवा खानी है। चौदह दिनों तक गोलियां खानी हैं। हल्के और कम गंभीर मामलों में खुराक के तहत 500 एमजी की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार लेनी हैं। गोलियां गर्म पानी के साथ खाना खाने के एक घंटे बाद लेनी हैं।

    1. क्या आयुष-64 के साइड-इफेक्ट्स हैं?

    कुछ मरीजों को पेचिश की शिकायत हो सकती है, जो अपने आप ठीक हो जायेगा। उसके लिये कोई दवा खाने की जरूरत नहीं है।

    1. क्या आयुष-64 को बुखार उतारने वाली दवा के रूप में भी लिया जा सकता है?

    इसे बुखार की दवा के रूप में लिया जा सकता है। इसके लिये 500 एमजी की दो गोली दिन में दो बार लेनी है। लेकिन बुखार की दवा के रूप में क्लीनिकल परीक्षण में इसके प्रभाव को नहीं जांचा गया था। अगर मरीज को कोविड 19 है, तो लक्षण दिखते ही इसे दिया जा सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति की आरटी-पीसीआर या रैपिड एंटीजन जांच जरूरी है। मरीज को चिकित्सकीय देखरेख में रहना चाहिये।

    1. क्या हल्के लक्षणों में सिर्फ आयुष-64 से काम चल जायेगा?

    आयुर्वेदिक चिक्तिसक की देखरेख में हल्के लक्षणों वाले कोविड 19 के इलाज में आयुष-64 को अकेले लिया जा सकता है, बशर्ते कि आगे उचित इलाज की सुविधा मौजूद हो। बहरहाल, सलाह दी जाती है कि आयुष-64 को हल्के और कम गंभीर मामलों में चिकित्सकीय देखरेख के तहत लिया जाये, जब मरीज होम आईसोलेशन में हो। आयुष-64 को आयुष चिकित्सक की सलाह पर ही लिया जाये।

    1. आयुष-64 को कितने दिनों तक लेना चाहिये?

    आयुष-64 को कम से कम 14 दिनों तक लिया जा सकता है। बहरहाल, अगर जरूरत पड़े, तो योग्य आयुष चिकित्सक की सलाह पर उसे 12 हफ्तों तक भी लिया जा सकता है। क्लीनिकल परीक्षण में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि इसे 12 हफ्तों तक लेना बिलकुल सुरक्षित है।

    1. आयुष-64 को कैसे लिया जाये?

    इसे गर्म पानी से ले सकते हैं। अच्छा होगा अगर खाना खाने के एक घंटे बाद लिया जाये।

    1. जिन कोविड 19 मरीजों को अन्य बीमारियां (कोमॉर्बीटीज) भी हैं, क्या वे भी आयुष-64 ले सकते हैं?

    जिन मरीजों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि अन्य बीमारियां हैं, वे भी लक्षण-रहित, हल्के और कम गंभीर कोविड मामलों में भी आयुष-64 ले सकते हैं। उन्हें सलाह दी जाती है कि वे इन बीमारियों की दवा बंद न करें।

    1. टीकाकरण के बाद क्या आयुष-64 लेना सुरक्षित है?

    हां। अगर व्यक्ति टीका लगवाने के बाद भी संक्रमित हो जाता है, तो वह आरटी-पीसीआर पॉजीटिव रहने पर आयुष चिकित्सक की सलाह से आयुष-64 ले सकता है। बहरहाल, वैज्ञानिक अध्ययन में इस विषय में कोई प्रमाण नहीं मिला है।

    1. क्या गर्भवती और दुग्धपान कराने वाली माताओं के लिये यह सुरक्षित है?

    वैज्ञानिक अध्ययन में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि आयुष-64 गर्भवती और दुग्धपान कराने वाली माताओं के लिये सुरक्षित है।

    1. क्या आयुष-64 बाजार में उपलब्ध है?

    यह बाजार में उपलब्ध है और आयुर्वेदिक फार्मेसी से इसे खरीदा जा सकता है। बहरहाल, यह सुनिश्चित कर लिया जाये कि इसे बिना चिकित्सक के पर्चे के न बेचा जाये और आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही इसका इस्तेमाल किया जाये।

    1. आयुष-64 लेने के बारे में किन मार्गदर्शनों का पालन किया जाना चाहिये?

    आयुष-64 के इस्तेमाल के सम्बंध में किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है। बहरहाल, व्यक्ति को कोविड 19 के बारे में आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिये।

  • टेलिकॉम सेवाएं देने वाली कंपनियां भारत के विभिन्न स्थानों पर 5जी ट्रॉयल शुरू कर सकेंगी

    ग्रामीण, अर्द्ध शहरी और शहरी इलाकों को 5जी ट्रॉयल में शामिल किया जाएगा

    ट्रॉयल के तहत 5जी से जुड़ी घरेलू तकनीकी को भी शामिल किया जाएगा

    नई दिल्ली। भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने मंगलवार को दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को 5जी तकनीक के उपयोग और एप्लीकेशन के लिए परीक्षण करने की अनुमति दे दी। आवेदक कंपनियों में भारती एयरटेल लिमिटेड, रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड, वोडाफोन इंडिया लिमिटेड और एमटीएनएल शामिल हैं। इन कंपनियों (टीएसपी) ने मूल उपकरण निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ समझौता किया है। जिसमें एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट शामिल हैं। इसके अलावा रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड भी अपनी स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए परीक्षण करेगी।

    डीओटी ने यह मंजूरी टीएसपी द्वारा पहचान की गई प्राथमिकताओं और प्रौद्योगिकी सहयोगी कंपनियों के आधार पर दी है। प्रयोग के लिए यह स्पेक्ट्रम विभिन्न बैंडों में दिया जा रहा है जिसमें मिड-बैंड (3.2 गीगाहर्ट्ज़ से 3.67 गीगाहर्ट्ज़), मिलीमीटर वेव बैंड (24.25 गीगाहर्ट्ज़ से 28.5 गीगाहर्ट्ज़) और सब-गीगाहर्ट्ज़ बैंड (700 गीगाहर्ट्ज़) शामिल हैं। टीएसपी को इसके अलावा 5 जी परीक्षणों के संचालन के लिए उनके मौजूदा स्पेक्ट्रम (800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज) के तहत ट्रॉयल की अनुमति होगी।

    वर्तमान में परीक्षणों की अवधि 6 महीने के लिए है। इसमें उपकरणों की खरीद और स्थापना के लिए 2 महीने की अवधि शामिल है।

    अनुमति पत्र के अनुसार प्रत्येक टीएसपी को शहरों के अलावा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी परीक्षण करना होगा ताकि देश भर में 5जी टेक्नोलॉजी का लाभ प्राप्त हो और यह केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित न हो।

    टीएसपी को पहले से ही मौजूद 5जी प्रौद्योगिकी के अलावा 5जी आई तकनीक का उपयोग परीक्षण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने 5जीआई तकनीक को भी मंजूरी दी है। इसकी भारत ने वकालत की थी, क्योंकि यह 5जी टावरों और रेडियो नेटवर्क की पहुंच को आसान बनाता है। 5जीआई तकनीक का विकास आईआईटी मद्रास वायरलेस टेक्नोलॉजी के उत्कृष्ट केंद्र (सीईडब्ल्यूआईटी) और आईआईटी हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है।

    5जी परीक्षणों का संचालन विशेष रुप से भारतीय संदर्भ में उद्देश्यों में 5जी स्पेक्ट्रम का प्रसार भारतीय जरूरतों के आधारों पर करना है। मॉडल ट्यूनिंग और चुने हुए उपकरण औऱ उनके वेंडर का मूल्यांकन, स्वदेशी तकनीक का परीक्षण, एप्लीकेशन आधारित तकनीकी का परीक्षण (जैसे टेली-मेडिसिन, टेली-शिक्षा, संवर्धित / वर्चुअल रियल्टी, ड्रोन-आधारित कृषि निगरानी, ​​आदि।) और 5जी फोन और उपकरणों का परीक्षण करने के लिए किया गया है।

    5 जी तकनीक से डेटा डाउनलोड दरों (4 जी के 10 गुना होने की उम्मीद) है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेगी, जिसके जरिए स्पेक्ट्रम क्षमता से तीन गुना अधिक उपयोग किया जा सकेगा और उद्योग जगत को 4.0 एप्लीकेशन के लिए सक्षम कर सकेगा। इन एप्लीकेशंस का इस्तेमाल कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, यातायात प्रबंधन, स्मार्ट शहरों, स्मार्ट घरों और आईओटी (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) में हो सकेगा।

    डीओटी ने निर्दिष्ट किया है कि परीक्षण को अलग से किया जाएगा और टीएसपी के मौजूदा नेटवर्क के साथ नहीं जोड़ा जाएगा। परीक्षण गैर-वाणिज्यिक आधार पर होंगे। परीक्षणों के दौरान उत्पन्न डेटा भारत में संग्रहीत किया जाएगा। टीएसपी से यह भी उम्मीद है कि वह परीक्षण के हिस्से के रूप में स्वदेशी रूप से विकसित उपकरणों और तकनीकी का इस्तेमाल करेंगी। हाल ही में 5 जी एप्लीकेशन पर हैकाथन आयोजित करने के बाद डीओटी द्वारा चुने गए 100 एप्लीकेशन / इस्तेमाल मामलों का भी इन परीक्षणों को उपयोग किया जा सकता है।

  • FACT CHECK: कॉस्मिक किरणों की वजह से मोबाइल फ़ोन ऑफ रखने वाली खबर फर्जी है
    • By Vishvas News
    • Updated: June 26, 2019

    नई दिल्ली (विश्वास टीम)। सोशल मीडिया पर कुछ समय से एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें कहा गया है कि आज रात 12:30 बजे से 3:30 बजे तक पृथ्वी के पास से कुछ कॉस्मिक किरणें गुज़रेंगीं जिस दौरान अपने फोन को स्विच ऑफ रखने की सलाह दी गई है वरना यह शरीर के लिए हानिकारक होगा। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। इसरो ने हमसे बातचीत में साफ करा कि यह फेक न्यूज़ है।

    CLAIM

    पोस्ट में क्लेम किया गया है, “आज रात 12:30 से 3:30 बजे तक अपने फोन और बाकी सभी गैजेट्स को बंद रखें और अपने शरीर से दूर रखें। सिंगापुर टीवी ने यह घोषणा की है। कृपया अपने परिवार और दोस्तों को बताएं। हमारे ग्रह के करीब से आज रात 12:30 बजे से 3:30 बजे तक कुछ कॉस्मिक किरणें गुज़रेंगीं। यह कॉस्मिक किरणें पृथ्वी के करीब से गुजरेंगीं इसलिए कृपया अपना सेल फोन बंद कर दें। अपनी मोबाइल डिवाइस को अपने शरीर के करीब मत छोड़े। यह आपको भयानक नुकसान पहुंचा सकता है। “

    FACT CHECK

    इस पोस्ट की पड़ताल करने के लिए हमें सबसे पहले जानना था कि आखिर कॉस्मिक किरणें होती क्या हैं। हमने जांच की तो पाया कि कॉस्मिक किरणें असल में उच्च ऊर्जा अभिकरण है जो मुख्य रूप से सौरमंडल के बाहर पैदा होती हैं। पृथ्वी लगातार कॉस्मिक किरणों के संपर्क में आती रहती है पर वायुमंडल और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र ज्यादातर कॉस्मिक किरणों को अपनी सतह से ही बाहर भेज देते हैं और एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करते हैं। हालांकि, कॉस्मिक किरणों के सीधे तौर पर संपर्क में आने पर आपको नुकसान हो सकता है पर अर्थ की एटमॉस्फेरिक लेयर्स आपको इन रेज़ से प्रोटेक्ट करती हैं। और आपको किसी भी तरह के खतरे से बचाती हैं। अंतरिक्ष में काम कर रहे एस्ट्रोनॉट्स के लिए यह किरणें हानिकारक हो सकती है इसलिए इसरो और नासा जैसी एजेंसियां लगातार इन किरणों पर नजर रखती हैं पर उस केस में भी बचाव के बहुत सारे तरीके होते हैं।

    पोस्ट में सिंगापुर टीवी का ज़िक्र है। हमने जाँच की तो पाया कि ऐसा कोई चैनल नहीं है।

    ज़्यादा पुष्टि के लिए हमने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO में बात की तो हमें बताया गया कि यह खबर गलत है। पृथ्वी पर लोग और मशीनें कॉस्मिक किरणों से सुरक्षित हैं।

    इस पोस्ट को Ravindra Kumar Singh नाम के एक फेसबुक यूजर ने शेयर किया था।

    निष्कर्ष: हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। इसरो ने हमसे बातचीत में साफ करा कि यह फेक न्यूज़ है। पृथ्वी लगातार कॉस्मिक किरणों के संपर्क में आती रहती है पर वायुमंडल और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र ज्यादातर कॉस्मिक किरणों को अपनी सतह से ही बाहर भेज देते हैं, और एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करते हैं। (साभार)

  • 5G इंटरनेट की टेस्टिंग पर प्रतिबंध लगाने के लिए वकील AP सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और इसे यूजर्स के लिए खतरनाक बताया है।

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    भारत में 5G इंटरनेट टावर परिक्षण पर प्रतिबंध लागने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका को वकील AP सिंह ने दायर किया है. याचिका में कहा कि भारत सहित आज दुनिया भर में 5G नेटवर्क का विरोध किया जा रहा है। धरती के लिए 5G नेटवर्क एक बहुत बड़ा खतरा हैं, लेकिन मोबाइल कंपनियों ने 5 जी स्मार्टफोन बेचना शुरू कर दिया है।

    याचिका में कहा कि 5G इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, उपयोगकर्ताओं के डेटा को आसानी से हैक भी हो सकता है। इसके साथ यह भी कहा गया कि नीदरलैंड में परीक्षण के दौरान सैकड़ों पक्षियों की अचानक मौत हो गई थी, हेग शहर में 5G नेटवर्क के परीक्षण के दौरान लगभग 300 पक्षियों की मौत हो गई, जिनमें से 150 पक्षियों की परीक्षण शुरू होने के बाद मौत हुई।

    याचिका में कहा कि वर्ष 2018 में, चीनी कंपनी हुवावे ने गुरुग्राम, हरियाणा में 5 जी इंटरनेट का परीक्षण किया था।। कहा कि 5G नेटवर्क की तकनीक में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का उपयोग किया जाता है, इससे कैंसर का खतरा भी बहुत बढ़ जाता है, गर्भावस्था के दौरान मोबाइल रेडिएशन से महिलाओं के साथ-साथ बच्चे पर भी असर पड़ता है। याचिका में कहा 5G नेटवर्क आतंकियों के लिए मददगार होगा और देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।

    विदित हो कि सभी टेलिकॉम कंपनियां इन दिनों 5G टेस्टिंग पर जोर दे रही हैं। एयरटेल, जियो और वोडाफोन-आइडिया लगातार इसकी टेस्टिंग पर काम कर रही हैं। जियो ने हाल ही में 57123 करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम की खरीदारी की है। कंपनी ने 22 सर्किल में स्पेक्ट्रम खरीदा है। रिलायंस जियो की ओर से खरीदे गए स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल 5G सर्विस देने के लिए भी किया जाएगा। कंपनी ने ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसने स्वदेशी 5G टेक्नोलॉजी डेवलप कर ली है जिसे अमेरीका में टेस्ट कर लिया गया है। इसके साथ ही कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी ने भी इसी वर्ष 5G लॉन्च की घोषणा की है।

  • नई दिल्ली। देश में सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों में कोरोना के लिए 5-जी तकनीक की टेस्टिंग को जिम्मेदार बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि 5 जी टावरों की टेस्टिंग से निकलने वाला रेडिएशन हवा को जहरीला बना रहा है इसलिए लोगों को सांस लेने में मुश्किल आ रही है। साथ ही वायरल पोस्ट में ये भी कहा जा रहा है कि इसी रेडिएशन की वजह से घर में हर जगह करंट लगता रहता है। पोस्ट में सुझाव दिया जा रहा है कि अगर इन टावरों की टेस्टिंग पर रोक लगा दी जाती है तो सब ठीक हो जाएगा। कोरोना से जुड़े तथ्यों और भ्रमों पर विश्व स्वस्थ्य संगठन की तरफ से जारी रिपोर्ट में इस बात का खंडन किया गया है। 

    सोशल मीडिया पर “5G कि टेस्टिंग बन्द करो इन्सानो को बचाओ” शीर्षक से एक पोस्ट वायरल हो रहा है। इसमें नीचे की ओर लिखा है ‘ये जो महामारी दूसरी बार आई है जिसे सब कोरोना का नाम दे रहे हं ये बीमारी कोरोना नहीं 5जी टावर की टेस्टिंग की वजह से है। टावर से जो रैडिकशन निकलता है वो हवा में मिलकर हवा को जहरीला बना रही है इसलिए लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और लोग मर रहे हैं।’ इसीलिए 5जी टावर की टेस्टिंग को बंद करने की मांग करिए फिर देखिए सब सही हो जाएगा।’

    सिम्टम्स ऑफ 5G नेटवर्क रेडिएशन
    1. 5G नेटवर्क रेडिएशन के कारण घर में हर जगह हल्का सा करंट महसूस हो रहा है ।
    2. गला कुछ ज्यादा ही सूखना प्यास ज़्यादा लगना । 
    3. नाक में कुछ पपड़ी जैसा जमना पपड़ी में खून दिखना ।

    यदि आपके साथ वास्तव में ऐसा हो रहा है तो समझ लीजिए कि इस हानिकारक 5G नेटवर्क रेडिएशन का हमारे ऊपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। नोटिस:- जैसे 4G रेडिएशन ने चिड़ियों पंछियों को खत्म किया था वैसे ही 5G रेडिएशन जीवों और मानव जाति के लिए बहुत ही ज़्यादा हानिकारक है, वक़्त रहते इसका एक जुट होकर कर विरोध करें ।। और वक़्त हो तो इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर शेयर करें ।।

    एक अखबार की कटिंग भी वायरल हो रही है, जिसमें पानीपत की समाज सेविका शशि लूथरा के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने सरकार से 5जी की टेस्टिंग बंद करने की मांग की है। शशि लूथरा के हवाले से लिखा गया है कि 5जी के कारण महामारी फैल रही है। वास्तव में लूथरा ने ऐसा कहा है या नहीं, अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर इस तरह के अफवाहों को लेकर एक सेक्शन है, जिसमें कोरोना को लेकर सोशल मीडिया के दावों के बारे में विस्तार से समझाया गया है। वेबसाइट से ‘FACT: 5G mobile networks DO NOT spread COVID-19’ नाम से एक पोस्ट है।

    26 मार्च को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 5 जी मोबाइल नेटवर्क से कोरोना नहीं फैलता है। इसके अलावा ये भी कहा गया है कि कोरोना मोबाइल नेटवर्क और रेडियो तरंगों के साथ एक जगह से दूसरी जगह पर नहीं पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना उन देशों में भी हो रहा है जहां 5 जी मोबाइल नेटवर्क नहीं है।

    इस पोस्ट में साफतौर पर लिखा है कि वायरस रेडियो वेव और मोबाइल नेटवर्क से नहीं फैलते हैं। COVID-19 उन देशों में भी फैल रहा है जहां पर 5जी की ना टेस्टिंग हो रही है और ना ही 5जी मोबाइल नेटवर्क है। कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति की सांस की बूंदों से फैलता है जब वह छींकता है, बात करता है या थूकता है। इसके अलावा यदि किसी सतह पर संक्रमित इंसान की सांस की बूंदें गिरी हैं तो उसे छूने और फिर नाक, मुंह और आंख छूने से कोरोना फैलता है।

  • कोरोना ने सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त कर के रख दी हैं। यही हाल अर्थव्यवस्था का भी है। इसी के चलते राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने शराब की कीमतों में बढ़ोत्तरी कर दी है। सरकार ने आबकारी नीति 2021-22 में संशोधन करते हुए विशेष अतिरिक्त कोविड सेस लगा दिया है। शराब अब प्रति 90 एमएल पर 10 रुपए से लेकर 40 रुपए तक महंगी हो गई है।

    लखनऊ। कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच बढ़ते राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने शराब की कीमतों में बढ़ोत्तरी कर दी है। दरअसल, सरकार ने आबकारी नीति 2021-22 में संशोधन करते हुए विशेष अतिरिक्त कोविड सेस लगा दिया है। इसकी वजह से शराब अब 10 रुपए से लेकर 40 रुपए तक महंगी हो गई है।

    कोरोना की पहली लहर में भी यह अतिरिक्त सेस लगाया गया था, लेकिन उसे मौजूदा सत्र में समाप्त कर दिया गया था। आबकारी नीति 2021-22 में हुए संशोधन के मुताबिक रेगुलर केटेगरी की शराब पर प्रति 90 एमएल 10 रुपए कोविड सेस लगाया गया है।

    इसी तरह प्रीमियम केटेगरी शराब पर भी प्रति 90 एमएल 10 रुपए बढ़ोत्तरी की गई है। सुपर प्रीमियम पर प्रति 90 एमएल 20 रुपए, स्कॉच पर प्रति 90 एमएल 30 रुपए और विदेशों से आयातित शराब पर भी प्रति 90 एमएल 40 रुपए अतिरिक्त कोविड सेस लगाया गया है। इस संबंध में सोमवार को शासनादेश जारी कर दिया गया।

    इससे पहले यूपी सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 की शुरुआत होते ही शराब के दाम बढ़ाए थे। दूसरे देशों से आने वाली स्कॉच, वाइन, व्हिस्की, वोदका समेत अन्य सभी शराबों पर परमिट फीस को बढ़ा दिया था। 1 अप्रैल 2021 को आए सर्कुलर के मुताबिक, यूपी में अंग्रेजी शराब के दामों पर 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, वहीं बीयर की कीमतों में 10 से 20 रुपए की कमी की गई थी। इसके साथ ही नियम बना दिया गया था कि यूपी में एक अप्रैल से 21 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति शराब नहीं खरीद पाएगा।

  • बेंगलूरु। कोविड के गंभीर मरीजों के उपचार के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir Injection) को लेकर देश भर में अफरा-तफरी का माहौल है। कई चिकित्सकों ने इसके उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। कालाबाजारी जारी है। लोग हजारों रुपए में इस इंजेक्शन को खरीदने में मजबूर हो रहे हैं। इस बीच, नकली इंजेक्शन बेच कर लोगों की जान से खिलवाड़ के भी मामले सामने आए हैं। हालांकि, कई चिकित्सकों ने साफ किया है कि इस इंजेक्शन का कोई विशेष फायदा नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे उपचार प्रोटोकॉल से बाहर रखा है। केंद्र और राज्य सरकार भी यही बात कह रही है। अब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR – आइसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS – एम्स), नई दिल्ली ने भी नए उपचार प्रोटोकॉल में इसे शामिल किया है।

    जीवनदायी साबित हो रही एक सस्ती गोली

    ऐसे में एक बेहद सस्ती और आसानी से उपलब्ध इंजेक्शन व गोली डेक्सामेथासोन ( Dexamethasone) चर्चा का विषय बनी हुई है। कोविड मरीजों के उपचार में यह बेहद कारगर और जीवनदायी साबित हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार कोविड के गंभीर मरीजों में रेमडेसिविर की एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (Acute Respiratory Distress Syndrome ) को रोकने में कोई विशेष भूमिका नहीं है। इसके मुकाबले डेक्सामेथासोन अधिक कारगर है।

    दो हजार मरीजों पर हुआ शोध- हाल ही में ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि दुनिया भर में बेहद सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा डेक्सामेथासोन कोरोना वायरस से संक्रमित और गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान बचाने में मदद कर सकती है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल ब्रिटेन में संक्रमण के शुरुआती दौर से ही किया जाता तो करीब 5,000 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम ने अस्पतालों में भर्ती 2,000 मरीजों को यह दवा दी और उसके बाद इसका तुलनात्मक अध्ययन उन 4,000 मरीजों से किया, जिन्हें दवा नहीं दी गई थी। जो मरीज वेंटिलेटर पर थे, उनमें इस दवा के असर से 40 फीसदी से लेकर 28 फीसदी तक मरने का जोखिम कम हो गया और जिन्हें ऑक्सीजन (OXYGEN) की जरूरत थी उनमें ये जोखिम 25 फीसदी से 20 फीसदी तक कम हुआ। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण शरीर में इनफ्लेमेशन यानी सूजन बढ़ाने की कोशिश करता है। जबकि डेक्सामेथासोन इस प्रक्रिया को धीमी करने में असरदार पाई गई। बेहद सस्ती होने के कारण यह दवा गरीब मरीजों व देशों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, कुछ चिकित्सकों का कहना है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ डेक्सामेथासोन बेहद प्रभावी है। कई मामलों में दोनों की जरूरत पड़ती है।

    1960 के दशक से इस्तेमाल जारी– भारत में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल 1960 के दशक से जारी है। अनुमान है कि भारत में डेक्सामेथासोन की सालाना बिक्री 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। भारत सरकार के ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर पॉलिसी के तहत इस दवा की गोलियों के पत्ते और इंजेक्शन पांच रुपए से लेकर 10 रुपए के भीतर खरीदे जा सकते हैं।

    गौरतलब है कि बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका सहित प्रदेश के कई निकायों की ओर से होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमितों को दिए जाने वाले दवा के किट में यह दवा शामिल है।

    रेमडेसिविर जीवनरक्षक दवा नहीं– कर्नाटक राज्य के स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ के. सुधाकर जो पेशे से चिकित्सक भी हैं, कहते हैं कि प्रचार के कारण रेमडेसिविर की मांग ज्यादा है। हालांकि, यह जीवनरक्षक दवा नहीं है। इससे ज्यादा प्रभावी है स्टेरॉयड। डेक्सामेथासोन इनमें से एक है। डेक्सामेथासोन की एक गोली 50 पैसे में उपलब्ध है। रेमडेसिविर की मांग है इसलिए सरकार इसकी भी आपूर्ति करेगी।

    सबसे सस्ती,आसानी से मिलने वाली दवा– डेक्सामेथासोन स्टेरॉयड देश में काफी आम है। यह सबसे सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा और इंजेक्शन है। कोविड के उपचार में स्टेरॉयड कारगर है। कोविड के मध्यम व गंभीर मरीजों के उपचार में डेक्सामेथासोन असरदार है। इसके प्रमाण भी हैं। कई मरीजों का फायदा हुआ है। इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत है। चिकित्सकों की सलाह पर ही यह दवा लेनी चाहिए। चिकित्सकों को तय करना होगा कि किसी मरीज को यह दवा कब देनी है।” डॉ. सोनल अस्थाना, यकृत रोग विशेषज्ञ, एस्टर सीएमआइ अस्पताल

    मरीज की हालत व चिकित्सक पर निर्भर– गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार हिरेमठ ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ स्टेरॉयड प्रभावी है। डेक्सामेथासोन भी एक स्टेरॉयड है। कोविड के मध्यम से गंभीर मरीजों के उपचार में इसका इस्तेमाल हो सकता है। दवाओं का विकल्प मरीज की हालत व चिकित्सकों पर निर्भर करता है।” डॉ. संजीव कुमार हिरेमठ, गुर्दा रोग विशेषज्ञ, सागर अस्पताल

    हल्के लक्षण वाले मरीजों को जरूरत नहीं-“कोविड के मध्यम व गंभीर मरीजों के उपचार में ही डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल होना चाहिए। याद रहे यह खुद से लेने वाली दवा नहीं है। घरों में 10 दिन के लिए क्वारंटाइन कोविड के हल्के लक्षण वाले मरीजों को इसकी जरूरत नहीं है। डेक्सामेथासोन एक ऐसी दवाई है जिसे निश्चित समय पर दिया जाए, तो अच्छे परिणाम आते हैं। चिकित्सक मरीज की स्थिति को ध्यान में रखकर इस इंजेक्शन के बारे में बता सकते हैं।” डॉ. जी. बी. सत्तूर, सदस्य, कोविड-19 विशेषज्ञ समित

  • मानदेय के लिए परेशान रहे शिक्षक व कर्मचारी!

    बिजनौर। कोरोना महामारी के इस दौर में एक ओर सरकार व सभी संगठन लोगों से घरों में रहने तथा जरूरी काम से ही बाहर निकलने पर सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क लगाने की अपील कर रहे हैं। वहीं रविवार से दूसरे दिन तक कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा कर कर्मचारियों शिक्षकों को मतगणना पूरी कराने के बाद भी मानदेय नहीं दिया गया! परेशान शिक्षक, कर्मचारी लगातार सोशल मीडिया के जरिए एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि किस ब्लॉक में मतगणना के पश्चात नियत मानदेय दिया गया है। कुल मिलाकर भारी अव्यवस्थाओं के बीच चुनाव लगभग संपन्न हो गया।जानकारी के अनुसार प्रत्येक टेबल पर एक पर्यवेक्षक व तीन अन्य की ड्यूटी लगाई गई थी, जिन्हें मानदेय दिया जाना था। ड्यूटी के लिए प्रात: 8:00 बजे से सायं के 8:00 बजे तक पहली शिफ्ट तथा रात्रि 8:00 बजे से प्रात: 800 बजे तक दूसरी शिफ्ट लगाई गई थी। वहीं बताया गया है कि पहली टीम को पुन: प्रात: 8:00 बजे बुलाया गया। आरोप है कि महामारी के इस खतरनाक दौर में शिक्षक कर्मचारी जान हथेली पर रखकर एक मेज पर चारों ओर बैठकर 12 से 15 घंटे की ड्यूटी करने के बावजूद चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानदेय अधिकांश ब्लॉक में नहीं दिया जा सका। कई शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मानदेय देने के नाम पर कई बहाने बनाए गए। कई ब्लॉक में कहा गया कि मतगणना पूरी होने के बाद दिया जाएगा। गणना में लगे कर्मचारियों ने बताया कि पर्यवेक्षक को रुपए 700  तथा अन्य को रुपए 500 दिए जाने थे। आरोप लगाया कि मानदेय के लिए इतना परेशान किया गया कि अनेक शिक्षक कर्मचारी मानदेय लिए बिना ही वापस आ गए। 

  • आयुष मंत्रालय ने देशभर में ‘आयुष – 64’ की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए


    पॉलीहर्बल औषधि ‘आयुष – 64’ को नैदानिक परीक्षणों में कोविड- 19 के हल्के से लेकर मध्यम स्तर के संक्रमण के इलाज में बहुत उपयोगी पाया गया।

    नई दिल्ली। कोविड -19 महामारी, विशेष रूप से पिछले कुछ हफ्तों में संक्रमण के मामलों में हुई वृद्धि, को देश के सामने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सदी की सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर देखा गया है। इस अवधि के दौरान, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने में स्वास्थ्य सेवा की आयुष प्रणालियों की क्षमता का उपयोग बड़े पैमाने पर व्यक्तियों और चिकित्सकों द्वारा समान रूप से किया गया है और इसके कई उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं।

    पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है आयुष-64- कोविड -19 के उपचार के लिए ‘आयुष- 64’, जोकि एक पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है, का उपयोग इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक रहा है। ‘आयुष- 64’ को मूल रूप से मलेरिया के उपचार के लिए 1980 में विकसित किया गया था और यह सभी नियामक संबंधी जरूरतों और गुणवत्ता एवं फार्माकोपियोअल मानकों का अनुपालन करता है।

    देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने किया परीक्षण- सीसीआरएएस ने हाल ही में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और देशभर के कई अन्य अनुसंधान संगठनों और मेडिकल कॉलेजों के सहयोग से बिना लक्षण वाले, हल्के से लेकर मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस औषधि के व्यापक सुदृढ़ नैदानिक परीक्षणों को पूरा किया। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए इन परीक्षणों से पता चला कि ‘आयुष – 64’ में एंटीवायरल, इम्यून- मोडुलेटर और एंटीपायरेटिक गुण हैं। यह बिना लक्षण वाले, हल्के और मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के उपचार में उपयोगी पाया गया है। नतीजतन, इस औषधि को अब कोविड -19 के इलाज के लिए उपयोग में लाया गया है। आयुष मंत्रालय द्वारा इस आशय की घोषणा 29 अप्रैल, 2021 को एक संवाददाता सम्मेलन में की गई थी।

    सभी राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों को एडवाइजरी जारी- आयुष मंत्रालय ने देशभर में ‘आयुष – 64’ के वितरण को व्यवस्थित करने और इसके उत्पादन में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि यह औषधि कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को उपलब्ध हो सके। इस प्रयास के तहत सीसीआरएएस (CCRAS) और नेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (NDRC) ने आपसी सहयोग के जरिए ‘आयुष – 64’ का व्यापक पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायीकरण करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। मौजूदा संकेतों के अलावा, आयुष मंत्रालय ने 27 अप्रैल, 2021 को हल्के से लेकर मध्यम स्तर के कोविड -19 संक्रमण के इलाज के लिए एक उपाय के तौर पर ‘आयुष -64’ का उपयोग करने के लिए सभी राज्यों के एएसयू दवाओं के लाइसेंसिंग अधिकारियों को एडवाइजरी भी जारी की है।

    दवा कंपनियों को प्रोत्साहन- देशभर में ‘आयुष – 64’ की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर देते हुए, आयुष मंत्रालय ने अधिक से अधिक दवा कंपनियों को इस दवा के उत्पादन के लिए आगे आने और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे जुड़ी प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए इच्छुक कंपनियां सीसीआरएएस और एनआरडीसी से संपर्क कर सकती हैं। सीसीआरएएस एएसयू दवाओं के निर्माताओं को ‘आयुष – 64’ के उत्पादन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इसके अलावा, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण उत्पादन से जुड़े ऐसे आवेदनों की लाइसेंसिंग / अनुमोदन की प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं बशर्ते वेड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के निर्धारित मानकों और प्रासंगिक प्रावधानों पर खरा उतरते हों।

    देशव्यापी आयुष नेटवर्क पहले से ही मौजूद- विभिन्न राज्यों और केन्द्र- शासित प्रदेशों के प्रशासन से भी राष्ट्रीय आयुष मिशन,जिसके तहत एक देशव्यापी आयुष नेटवर्क पहले से ही मौजूद है, के माध्यम से इस प्रक्रिया में और आगे योगदान देने की अपेक्षा है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण आयुर्वेद और योग से जुड़े उपायों पर आधारित राष्ट्रीय नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल (नेशनल क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल) के अनुरूप ‘आयुष–64’ के उपयोग को बढ़ावा देगा।

  • सबसे ज्यादा 572 वोटों से बीडीसी प्रत्याशी नीलम यादव विजयी

    मलिहाबाद,लखनऊ। कोरोना महामारी के चलते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में राजधानी लखनऊ की विकास खण्ड मलिहाबाद में बीते 19 अप्रैल को चुनाव शांति पूर्वक सम्पन्न हो गए थे।

    इसकी मतगणना रविवार को मलिहाबाद स्थित गया प्रसाद इंस्टीट्यूट में सुबह 8 बजे से कोविड प्रोटोकाल के तहत शुरू हुई। विकास खण्ड मलिहाबाद की ग्राम पंचायत कसमंडी खुर्द से क्षेत्र पंचायत सदस्य बीडीसी का चुनाव लड़ने वाली अमानीगंज गांव निवासिनी नीलम यादव पत्नी मनोज यादव ने कुल 810 वोट हासिल की और उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी ज्ञानवती को मात्र 238 वोट मिले। इस तरह से नीलम यादव ने कुल 572 मत पाकर सबसे बड़ी जीत हासिल की है। नीलम की इतनी बड़ी जीत से पंचायतवासी काफी खुश नजर आ रहे हैं।

  • मतपेटी गायब होने की सूचना पर मचा रहा हडक़ंप। काफी खोजबीन पर तीन घण्टे बाद मिली मतपेटी। मतपेटी मिलने के बाद कराई मोटाढाक की मतगणना

    बिजनौर। कासमिया इंटर कालेज नजीबाबाद में बनाए गए मतदान केन्द्र पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना जारी रहने के दौरान अचानक ग्राम पंचायत मोटाढाक की एक मतपेटी गायब होने की सूचना मिलने पर प्रशासन में हडक़म्प मच गया। काफी देर की खोजबीन के बाद मतपेटी मिलने पर निर्वाचन की मतगणना में जुटे अधिकारियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद ग्राम पंचायत मोटाढाक की मतगणना करायी गयी।

    सोमवार की सुबह करीब आठ बजे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना को कासमिया इंटर कालेज में बनाए गए मतगणना स्थल पर ग्राम पंचायत मोटाढाक की एक मतपेटी गायब होने की सूचना प्रशासन को मिली। इसको लेकर मतगणना स्थल में हडक़म्प मच गया। दरअसल मतगणना कक्ष में बताया गया कि एक मतपेटी गायब हो गयी है।  उक्त ग्राम पंचायत में चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने तुरंत ही फोन पर आला अधिकारियों को भी इस मामले की जानकारी देते हुए मतपेटी का पता लगाने की मांग उठायी। उधर प्रशासन के अधिकारी काफी देर तक मतपेटी गायब न होने की बात कहते रहे। हालांकि मतपेटी न मिलने के चलते करीब तीन घण्टे तक उक्त ग्राम पंचायत की मतगणना रुकी रही। बाद में मतपेटी मिल जाने पर प्रशासन ने राहत ने सांस ली और मतगणना शुरू करायी। उक्त मामले में निर्वाचन अधिकारी कैलाश चंद जोशी ने बताया कि मतपेटी स्ट्रांग रूम में ही रखी हुई थी। मतपेटी पर लिखे नम्बर अस्पष्ट होने के कारण अन्य मतपेटियों के बींच में वह नजर नहीं आयी। बारीकी से छानबीन किए जाने पर मतपेटी अन्य मतपेटियों के बीच स्ट्रांगरूम से ही मिल गयी, जिसके बाद मतगणना पूरी करा ली गयी थी। 

  • बिजनौर। भारतीय जनता पार्टी समर्थित जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों का प्रदर्शन अपेक्षानुसार निराशाजनक रहा। कुल 56 वार्ड में से बीजेपी ने 55 पर समर्थन किया था। मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा के खाते में मात्र 7 सीट ही आ सकी हैं।

    बीजेपी प्रवक्ता द्वारा जारी विजयी प्रत्याशियों की सूची

    भाजपा समर्थित प्रत्याशी निम्न सीट पर चुनाव जीते हैं- वार्ड 18 किरतपुर चतुर्थ से संजीव मलिक, वार्ड 20 मोहम्मदपुर देवमल द्वितीय से श्रीमती रुपा रानी, वार्ड 24 हल्दौर द्वितीय से चन्द्रशेखर एडवोकेट, वार्ड 26 हल्दौर तृतीय से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साकेन्द्र प्रताप सिंह, वार्ड 29 जलीलपुर द्वितीय से श्रीमती मोनिका कश्यप, वार्ड 46 धामपुर चतुर्थ से श्रीमती शशीबाला तथा वार्ड 50 स्योहारा तृतीय से आयुष चौहान ने विजय प्राप्त की है।

    वहीं रालोद, बसपा और सपा को बढ़त मिली है। सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सपा समर्थित 20 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। रालोद जिलाध्यक्ष राहुल सिंह के अनुसार 11 प्रत्याशी में से 4 चुनाव जीते हैं। बसपा जिलाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार ने बताया कि चुनाव में 52 प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें 10 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। भाकियू के युवा के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगम्बर सिंह की पत्नी निगम चौधरी भी चुनाव जीत कर जिला पंचायत सदस्य बन गई है।

  • बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर रविवार से जारी मतगणना सोमवार को समाप्त हुई। इस दौरान लॉक डाउन नियमों को खुल कर उल्लंघन किया गया। मतगणना स्थल सीडी इंटर कालेज हल्दौर के आसपास एकत्र भीड़ को खदेडऩे के लिए पुलिस को कई बार लाठियां फटकारनीं पड़ीं। सोमवार दिन में जारी परिणामों में ब्लॉक हल्दौर की ग्राम पंचायत अगरी से बबली रानी ४७४, गंगदासपुर से रामवीर सिंह ३२४, कम्भौर से रेणू ८४२, धोमपुर से सुशीला ४२७, भरैसा सुनीता ६३१, अ.पुर मुन्ना उर्फ दादरपुर से श्रीमती अनुपम ४४२, इस्लामपुर नीमदास से सुमन देवी ३०२, अ.पुर चंदरू गडाना से शिव ध्यान ४५२, गोपालपुर से पूनम ५९४, पेदी से जोगेन्द्री देवी ४४३ मत, सालमाबाद से नीतिका चौधरी ७९३, सदुपुरा से अमित कुमार ११०८, मुबारकपुर तालन से नूरजहां ९८९, रसूलपुर पित्तनका से बलविंदर कौर ४३२, पृथ्वीपुर से निर्देश देवी ४४५, सिरधनी बंगर से अनवर जमाल ४०७, सलेमपुर मथना से राजकुमार २०६, चौकपुरी से मिथलेश ५३४, मुकरदंपुर से धर्मेन्द्र सिंह ६७४, गौसपुर टॉपरी से रेखा ६१७, खारी से नदीम ९८२, बिसाठ से नरेश ७०६, चांदा नंगली से सत्यम चौधरी ६७२, गंगौड़ा शेख से कैफुल इस्लाम ६९४, गंगौड़ा जट से फूलवती ३४८, नांगल जट से रेखा देवी १५३०, धनौरी से अलका ७०३, कान्हा नंगला से शालू देवी ३६३, इस्लामपुर थम्बूचाऊ से रचना ७६१, उमरी कलां से शहबाज अली १७०३, कुम्हारपुरा से आंचल राजपूत १३५३, हरदासपुर गढ़ी से जोगिन्द्र ६२३, शाहनगर से जोविन्द्र ४३७, कूकड़ा इस्लामपुर से सागर ७६३, बिलाई से प्रवेज ६५३, खेडक़ी टप्पा नांगल से रचना सैनी ३८९, इनामपुरा से मो. अनवार ३९५, इस्सापुर से सुधीर कुमार ५७०, शेरपुर से हेमेन्द्र सिंह ७६२, पुटठा से सुभद्रा देवी ४५८, फरीदपुर सदीरन से महेश कुमार ४१५, नसीरपुर नैनसिंह से हेमेद्र सिंह ४६७, जलालपुर हसना से संजीव नत्थू १२७५, अतापुर खतापुर से केहर सिंह ४२८, ननुपुरा से पारूल ४३२, फतेहपुर कलां से गजेन्द्र सिंह ६१५, नंगली छोईया से राहुल कुमार ३८३, छाछरी टीप से कमलेश ४३५, मुकरपुर गुर्जर से देवेन्द्र कुमार ७०२, करीमनगर उर्फ उलेढ़ा से सुदेश ५१३, मण्डौरा जट से रामेश्वर सिंह ४७९, वाजिदपुर से धर्मेन्द्र सिंह ५८२, कड़ापुर से विनीत कुमार ५५३, निजामतपुरा गंज से फिरोजा ११०३, दारानगर से रूखसाना खातून ११९३, जहानाबाद से तहजीब ११४४, चंदनपुरा से सुधीर कुमार ४९७, फरीदपुर भोगन से नीसा ९००, रेहड़वा से पम्मी ५११, सिकंदरपुर लालमन मुन्नी देव १९६, अम्हेड़ा से समीमा खातून १२५२, सल्लाहपुर से शाकिब ३६७, शादीपुर कलां से कविता ३४५, मिठन कुंवर प्रताप से अश्वनी ४२७, लाडनपुर से राजवाला ५००, शफीपुर हीरा से किश्वर जहां ४७२, सिसौना से अमित कुमार ९५७, पिलाना से विनोद ६२७, गांगू नंगला से शबनम ५४०, उमरी पीर से इसरत जहां ६३०, रोनिया से अनु देवी ६४८, मुबारकपुर कलां से आयशा १२३३, अखलासपुर से तेजपाल ३६९, करनपुर गांवड़ी से कमलेश देवी ४८३, फतेहउल्लापुर पौटा से विनय कुमार ५९१, सोतखेड़ी से मो. सादिक ५१७, शरीफपुर से जोली रानी ७०९, ताहरपुर मदद इमामद से कमल सिंह ४१३, पावटी से इमरान अहमद ७५७, मुकरपुर सत्ती से शौकीन ३७७ मत पाकर विजयी रहे। 

  • बिजनौर। मतगणना की आपाधापी में एक सहायक निर्वाचन अधिकारी की गलती से हारे को जीता और जीते को हारा हुआ घोषित कर दिया गया। मामला नहटौर विकास क्षेत्र के क्षेत्र पंचायत वार्ड 13 ककराला/तकीपुरा का है।

    नहटौर विकास क्षेत्र के क्षेत्र पंचायत वार्ड 13 ककराला/तकीपुरा में जारी किया गया पहला प्रमाण पत्र निरस्त कर रिटर्निंग ऑफिसर ने दूसरा प्रमाण पत्र जारी किया। इसकी प्रति पूर्व में विजयी घोषित दयाराम को भी प्रेषित की गई है। इसमें बताया गया है कि उनको त्रुटिवश निर्गत प्रमाण पत्र निरस्त किया जाता है तथा उनका कोई भी दावा मान्य नहीं होगा। वहीं इस मामले को लेकर उनके समर्थकों में छाया उत्साह ठंडा पड़ गया। दूसरी तरफ हारने के बाद नरेश कुमार के खेमे में फैला मातम का नजारा उत्साह से लबरेज हो गया।

    भूपेश कुमार गर्ग निर्वाचन अधिकारी, नहटौर ने जिला निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में उक्त जानकारी देते हुए कहा कि विकास खण्ड नहटौर के अन्तर्गत क्षेत्र पंचायत सदस्य संख्या-13 में सहायक निर्वाचन अधिकारी की त्रुटि से केवल एक ग्राम पंचायत ककराला के मतों की गणना कर परिणाम घोषित करते हुये श्री दयाराम को विजयी घोषित कर प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया गया था। जबकि उक्त क्षेत्र पंचायत के अन्तर्गत ग्राम पंचायत ककराला एवं ग्राम पंचायत तकीपुरा सम्मिलित थे। दोनो ग्राम पंचायतों की गणना करने के उपरान्त श्री नरेश कुमार को 718 वैध मत एवं श्री दयाराम को 531 वैध मत प्राप्त हुए। फलस्वरूप श्री नरेश कुमार को विजयी घोषित करते हुये प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है एवं श्री दयाराम के प्रमाण पत्र को निरस्त किया जा रहा है।

  • ब्लॉक कोतवाली के विजेता ग्राम प्रधानों की सूची

    1- उमरपुर बरखेड़ा – यासमीन अली‚
    2- फजलपुर भाऊ – श्याम सिंह‚
    3- आजमपुर परमा – नरेश कुमार‚ 
    4- जगनाथपुर – नरेन्द्र कुमार‚
    5- किरतपुर – यामीन
    6- जमालपुर मतलूब – रिजवाना बेगम‚
    7- चन्दपुरा नसीब – सचिन कुमार‚
    8- सैदपुरी महिचन्द – पूनम देवी‚
    9- सिक्कावाला – अंकित कुमार‚
    10- मुस्सेपुर – मुनेश‚
    11- हसनअलीपुर हीरा – रोशन सिंह‚
    12- लाडपुर – संजीव कुमार‚
    13- बेनीपुर – धर्मवीर
    14- बेगमपुर चायमल – चरन सिंह‚
    15- सुलेमा शिकोहपुर – तीरथ सिंह‚
    16- घनसूरपुर अमरौली – भजन सिंह‚
    17- रावलहेड़ी खजूरी – हलीमा,
    18- अजुपुरा रानी – मौ० अनवर‚
    19- गारवपुर – निगहत शाहिन‚ 
    20- गौसपुर सादात – राजीव कुमार‚
    21- खिजरपुर जग्गु – संत
    22- अब्दुल्लापुर कुरैशी – बिलकिस‚
    23- नरूल्लापुर – मौ० बन्दे हसन‚
    24- रसूलपुर मुजफ्फर – नासिर खान‚
    25- सादातपुर गढ़ी – गफूल खातून‚
    26- निजामपुर देवसी – शशि देवी‚
    27- शहबाजपुर – अन्जुम जहां‚
    28- मिर्जालीपुर भारा – मुमताज बानो‚
    29- मसूरी – रेखा‚
    30- जगन्नाथपुर मेहरू – राखी देवी‚
    31- मौ० आशिकपुर भूरे – मगन देई‚ 
    32- शाहलीपुर आशा -जैबुनिशा‚
    33- महेशपुर – पुष्पेन्द्र‚
    34- तकीपुर नरोत्तम – आलोक।
    35- सैदखेड़ी – सुरेन्द्र कुमार‚
    36- कमरूद्दीन नगर – मौ० अशरफ‚
    37- बघाला – पवन कुमारी‚ 
    38- अलीपुर मान – एकता त्यागी‚
    39- मुकन्दपुर राजमल – अमर सिंह‚
    40- औरंगाबाद – देवेन्द्र सिंह‚
     41- आले अलीपुर – मौ० असलम‚
    42- रतुपुरा – मौ० असलम‚
    43- अलीपुरा जट – मौ० इरशाद‚
    44- अब्दीपुर हरवंश – रूपा देवी‚
    45- कृतो नंगली – राजेन्द्र‚
    46- जमालपुर ढीकली – निर्दोष देवी‚
    47- जमालपुर बांगर – चांदनी परवीन‚
    48- महमूदपुर भावता – पारूल‚
    49- अल्हैदादपुर खजवा – रीना‚
    50- काजीपुर इम्मा – अमर सिंह‚
    51- शरफुद्दीन नगर – दयाचन्द‚
    52- रायपुर गढ़ी – सुरेश सिंह‚
    53- सराय डडूम्बर – शहजाद‚
    54- हकीकतपुर सहसू – अ० माजिद‚
    55- तेलीपाड़ा – सूरज भान सिंह‚
    56- राजोपुर सादात – जबर सिंह‚
    57- उग्रसैनपुर – उमा रानी‚
    58- मलकपुर अब्दुल्ला – विरेन्द्र पाल सिंह‚
    59- हसनअली धर्मा – रेखा‚
    60- इस्माईलपुर दमी – हेमराज सिंह‚
    61- कुंजैटा – हरेन्द्र सिंह‚
    62- समसपुर नसीब – अमित कुमार‚
    63- मेघपुरा सुल्तान – अनीता देवी‚
    64- रसूलपुर जागन – निधि कुमारी‚
    65- फतेहपुर – सुखवीर सिंह,
    66- चकउदयचंद- परशुराम सिंह निर्वाचित हुए।

  • नौ घंटे का ब्लाक, चार ट्रेनें रहेंगी रद्द। हरिद्वार-देहरादून रेलमार्ग पर होना है गर्डर्स बदलने का कार्य। एनएचएआई करेगी रायवाला-कांसरो के बीच आरयूबी पर काम।

    नजीबाबाद (बिजनौर) उत्तर रेलवे की ओर से एनएचएआई के अनुरोध पर हरिद्वार-देहरादून रेलमार्ग पर रेलवे स्टेशन रायवाला व कांसरो के बीच आरएच गर्डर्स बदलने के चलते नौ घंटों का ब्लाक दिया गया है। इस वजह से देहरादून से संचालित होने वाली तीन ट्रेनें चार व पांच मई को कैंसिंल रहेंगी।

    उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल की वरिष्ठ रेल वाणिज्य प्रबंधक रेखा शर्मा ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि पांच मई को हरिद्वार-देहरादून रेलमार्ग पर रेलवे स्टेशन रायवाला व कांसरो के बीच आरयूबी पर आरएच गर्डर्स बदलने का कार्य किया जाएगा। इसको लेकर इंडियन नेशनल हाइवे के अधिकारियों की ओर से किए गए अनुरोध पर पांच मई को सुबह 06:30 बजे से शाम 15:30 बजे तक उक्त रेलमार्ग पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बाधित रहेगा। उक्त रेल मार्ग पर नौ घंटों का ब्लाक जारी किए जाने के चलते पांच मई को ऋषिकेश-पुरी स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 08478 डाउन के गंतव्य के लिए प्रस्थान करने के बाद आगामी नौ घंटों के लिए सभी ट्रेनों का परिचालन रोक दिया जाएगा। इस कार्य की वजह से चार मई को देहरादून से दिल्ली के लिए जाने वाली (मसूरी एक्सप्रेस) ट्रेन संख्या 04041 तथा पांच मई को दिल्ली से देहरादून करे लिए चलने वाली (मसूरी एक्सप्रेस) ट्रेन संख्या 04042 को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा देहरादून-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 02017 अप तथा दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस टे्रन सं 02018 डाउन को भी पांच मई के लिए रद्द कर दिया गया है।

  • चुनाव ड्यूटी से लौटे एक और सिंचाई कर्मी ने तोड़ा दम। एक सप्ताह में मृतकों की संख्या हुई तीन।

    कालागढ़। पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे एक और सिंचाईकर्मी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटकर मरने वाले सिंचाईकर्मियों की संख्या तीन हो गई है। एक सप्ताह के भीतर पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे 3 सिंचाईकर्मियों की मौत से हडक़ंप मच गया।

    पंचायत चुनाव की मतदान ड्यूटी से लौटने के बाद तबियत खराब होने पर सिंचाई विभाग में कार्यरत राकेश कुमार विद्युतकार (40 वर्ष) का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। वहीं कोरोना संक्रमित पाए जाने की पुष्टि के बाद उपचार के लिए बिजनौर भर्ती करा दिया गया, जहां शनिवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इससे पहले पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटी सिंचाई विभाग द्वारा संचालित जूनियर हाई स्कूल की सहायक अध्यापिका मोरीस गोयल की गुरुवार को रात कोटद्वार स्थित सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। वहीं एक सप्ताह पहले बीते रविवार को युवा सिंचाईकर्मी उपेन्द्र सिंह चौहान ने काशीपुर के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड दिया था। सप्ताहभर के भीतर साथी कर्मियों की मौत हो जाने से माहौल पूरी तरह गमगीन है तथा लोग खौफजदा हैं। 

    दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित 

    कालागढ़। सिंचाईकर्मियों ने शोकसभा आयोजित कर मृतक कर्मचारियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर ईश्वर से मृतात्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। शनिवार को नई कॉलोनी स्थित विभागीय कार्यालय परिसर में आयोजित शोकसभा में शिक्षिका मोरिस गोयल के अलावा उपेन्द्र चौहान तथा राकेश कुमार के आकस्मिक निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया गया। इसके बाद 2 मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से मृतात्माओं को शांति के लिए प्रार्थना की गई। शोकसभा में मनोज कुमार लिखवार, एमडी जोशी, मुस्तकीम अहमद, विजय सिंह, सुरेश देवान्तक, कमल विश्नोई, एसएस बिष्ट तथा कोमल सिंह सहित अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।

    कोरोना: सिल्ट सफाई कार्य स्थगित करने की मांग 

    कालागढ़। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मतदान के दौरान संक्रमण की चपेट में आये 3 कर्मी अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि अनेक अन्य कर्मचारी बीमार हैं। बीमारी से ग्रस्त कर्मियों की मतगणना में दोबारा ड्यूटी लगा दी गई है। संक्रमण ग्रस्त कर्मियों की मतगणना में ड्यूटी लगाकर उनकी जान से खिलवाड़ किये जाने का आरोप लगाते हुए कर्मचारी नेताओं ने मतदान ड्यूटी कर चुके कर्मचारियों की मतगणना ड्यूटी निरस्त किये जाने की मांग की। वहीं सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के मण्डल अध्यक्ष कविराज सिंह ने कोराना संक्रमण के फैलने की आशंका का हवाला देते हुए अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नहरों की सिल्ट सफाई के काम में लगाये जाने का अमानवीय करार देते हुये सिल्ट सफाई का कार्य स्थगित कर खरीफ फसली के बाद कराने की मांग की है।

  • लखनऊ। कोरोना के बढ़ते संकट के बीच उत्तर प्रदेश में लॉक डाउन को दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। अब मंगलवार, बुधवार भी लॉक डाउन रहेगा जो गुरुवार सुबह 7 बजे तक जारी रहेगा। कोरोना वायरस का प्रकोप उत्तर प्रदेश में लगातार जारी है। इसी के चलते प्रदेश सरकार ने पहले वीकेंड लॉक डाउन का ऐलान किया था, लेकिन उसे सोमवार तक बढ़ा दिया था। शुक्रवार शाम से मंगलवार की सुबह तक लॉकडाउन था, लेकिन अब इसी पाबंदी को मंगलवार, बुधवार के लिए लागू कर दिया गया है। इस लॉक डाउन के दौरान किसी भी व्यक्ति का बेवजह बाहर निकलना बंद होगा। बाजार बंद रहेंगे, साप्ताहिक मार्केट नहीं लगेंगी। जरूरी क्षेत्र के लोगों को छूट रहेगी और परिवहन भी जारी रहेगा।

  • बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से रविवार को अधिकारिक तौर पर कोरोना संक्रमण से एक ही मौत की जानकारी दी गयी, जबकि 8 अन्य मौत होने की जानकारी भी सामने आ रही है। उक्त सभी की कोविड रिपोर्ट की जानकारी तो नहीं है लेकिन लक्षण कोविड के ही बताए जा रहे हैं।

    वरिष्ठ भाजपाई, समाजसेवी अतुल गुप्ता एडवोकेट का फाइल फोटो

    जानकारी के अनुसार नगर के वरिष्ठ भाजपाई एवं समाजसेवी अतुल गुप्ता एडवोकेट का निधन पुलकित हॉस्पिटल में उपचार के दौरान रविवार दोपहर हो गया। नहटौर व किरतपुर के पूर्ति निरीक्षक आदित्य त्यागी की भी मेरठ में उपचार के दौरान रविवार को मौत हो गयी। जिला पूर्ति अधिकारी ने उनके कोरोना संक्रमित होने व दु:खद मृत्यु होने की पुष्टि की है। बिजनौर शुगर मिल के सीजीएम इसरार अहमद की पत्नी का घर पर ही उपचार चल रहा था, रविवार सुबह उनका भी निधन हो गया। बिजनौर शुगर मिल के ही एचआर विभाग में कार्यरत कार्मिक अधिकारी ऐश्वर्य कुमार (36 वर्ष) की भी मृत्यु रविवार प्रात: आगरा में हो गयी। उनमें भी कोविड समान लक्षण बताए गए। वहीं जिला अस्पताल में ही उपचाराधीन नहटौर क्षेत्र निवासी स्वास्थ्य विभाग के एक एलए की भी मृत्यु हो गयी। पिछले दिनों ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने पर उन्हें भर्ती कराया गया था। जिला अस्पताल में ही वन दरोगा सुरेश कुमार की भी मृत्यु हो गयी। एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान नहटौर निवासी पत्रकार शमशाद भारती ने भी दम तोड़ दिया। नींदडू निवासी वरिष्ठ पत्रकार आशिक हुसैन का निधन शनिवार-रविवार की रात्रि दिल्ली के अस्पताल में हो गया। इसके अलावा भी जिले के विभिन्न इलाकों से ऐसी ही खबरें हैं, हालांकि इनकी मृत्यु कोविड संक्रमण से होने की कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

  • बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव परिणामों के आने का सिलसिला जारी है। नजीबाबाद के कासमिया इंटर कॉलेज में मतगणना की गति अन्य मतगणना स्थलों के मुकाबले काफी धीमी दिखाई दी।

    रविवार देर सायं तक घोषित परिणाम के अनुसार ग्राम सादतपुर में ग्राम प्रधान पद पर सोनी 427 वोट लेकर विजयी रहीं, उनकी प्रतिद्वंदी कांता देवी को 370 वोट मिले। ग्राम तैयबपुर गौरवा उर्फ तिसोतरा में अनीता देवी 594 वोट हासिल कर विजयी रहीं। मौज़ज़्मपुर सादात में धर्मवीर सिंह 329 लेकर विजयी हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंदी अतेंद्र सिंह को 294 मत मिले। काशीरामपुर में छोटे सिंह 464 मत लेकर विजयी रहे, उनके प्रतिद्वंदी गोविंद सिंह को 284 वोट मिले। मीरमपुर बेगा में साजिद को 778 वोट लेकर जीते, उनके प्रतिद्वंदी हरपाल को 329 वोट मिले। हरेवली में कुसुम लता 347 वोट लेकर विजयी रहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी तिलकराम को 265 वोट मिले। लालपुर मान से गीता रानी 316 मत हासिल कर विजयी रहीं। कमालपुर से अहमद रजा ने 483 मत प्राप्त कर जीत हांसिल की। राजा रामपुर फाजिल से हिना नाज पत्नी मरगूब अहमद ने प्रतिद्वन्दी समर पाल को 657 मत प्राप्त कर हराया। ताहरपुर इशाक से खालिद पुत्र याकूब ने 558 मत हासिल कर जीत दर्ज कराई। हकीम पुरकाजी से जरीफ पुत्र जमीर ने 944 मत प्राप्त कर जीत हासिल की। हरचंदपुर से नौबहार सिंह पुत्र बलदेव सिंह ने 576 मत प्राप्त कर जीत हासिल की। मौजमपुर तुलसी से कमरुनिशा पत्नी मोहम्मद जाकिर ने 772 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। बिजौरी से अलका पत्नी जोगिंदर सिंह ने 636 मत प्राप्त कर जीत हासिल की। शेखपुरा आलम से भगीरथ 285 मत प्राप्त कर विजयी रहे। फजलपुर हबीब 936 वोट प्राप्त करके जीती। सौफतपुर से विवेक ने 415 मत प्राप्त कर जीत दर्ज कराई।

  • अध्यक्ष अजित पवार ने बार एसोसिएशन केयर फंड में दिए रुपए 5100

    बिजनौर। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजित पवार ने जिला बार एसोसिएशन केयर फंड में दान देने वाले अधिवक्ताओं का धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पांच अधिवक्ताओं की कमेटी बनाई जाएगी और ईमानदारी से पैसा जरुरतमंदों को वितरित किया जाएगा। इस महामारी में सभी लोग सहयोग करें। इसी के साथ श्री पवार ने रुपए 5100 अपनी तरफ से जिला बार केयर फंड में दिए। 

  • देहरादून। कोरोना के मामले लगातार बढ़ने पर सरकार ने बुधवार 06 मई तक के लिए राज्य में कोविड कर्फ्यू बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सभी निकायों में कर्फ्यू का दायरा बढ़ाने को हरी झंडी दे दी है। आवश्यक सेवाओं से जुड़ी दुकानें भी सोमवार दोपहर 12 बजे बजे के बाद से बंद रहेंगी। दवाओं की दुकानें व पेट्रोल पंपों को इससे छूट रहेगी। रविवार देर शाम सीएम तीरथ रावत ने संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी। सूत्रों ने बताया कि एक्सपर्ट कमेटी ने बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर सीएम तीरथ को एक हफ्ते तक के लिए पूरे राज्य में कोविड कर्फ्यू लागू करने का सुझाव दिया था, लेकिन सीएम ने फिलहाल तीन दिन के लिए की मंजूरी दी है।

    सरकारी दफ्तर खुलेंगे
    सरकार ने कोविड कर्फ्यू के बीच सरकारी दफ्तरों को पूर्व की भांति खोलने का निर्णय लिया है। सचिव पंकज पांडेय ने बताया कि समूह ग व घ के कर्मचारी 50 फीसदी ही दफ्तर आएंगे। राज्य में राजपत्रित अफसरों की संख्या लगभग 12 से 15 फीसदी होने से उन्हें शत-प्रतिशत दफ्तरों में आना होगा।

    कोचिंग संस्थान पूरी तरह से रहेंगे बंद
    सरकार ने सभी जिलों में कोचिंग संस्थानों, स्वीमिंग पुल और स्पा को पूरी तरह से बंद रखने का निर्णय है। वहीं कंटेनमेंट जोन एवं माइक्रो कंटेनमेंट जोन में कोई भी आयोजन, रेस्टोरेंट, सिनेमाघर, सार्वजनिक वाहन सेवाएं भी बंद रहेंगी।

    बसों में 50 फीसदी यात्री बैठेंगे
    सार्वजनिक वाहन (बस, विक्रम, आटो रिक्शा आदि में अभी भी 50 फीसदी सवारियां ही बैठ सकेंगी। सिनेमाहाल, रेस्टोरेंट और जिम भी 50 फीसदी क्षमता के साथ चलेंगे। इसका उल्लंघन करने पर आपदा एक्ट और भारतीय दंड संहिता के तहत कारवाई की जाएगी।

    65 साल से अधिक उम्र वाले बाहर ने घूमे
    सरकार ने 65 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों अनावश्यक बाहर न घूमने की भी सलाह दी है।

    प्रतिबंध के दौरान ये रहेंगी छूट
    1. विवाह समारोह से लौट कर जा सकेंगे घर

    2. सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों से घरों को जाने में रियायत

    3. जिन संस्थानों में रात्रि पाली में काम होता है, उन्हें जाने की छूट

    4. बस, ट्रेन व हवाई जहाज से आने वाले अपने गंतव्यों तक जा सकेंगे

    5. उद्योगों में रात्रिकालीन ड्यूटी करने वाले कर सकेंगे आवाजाही

    6. होटलों से होम डिलीवरी भी हो सकेगी

    7. राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर आपातकालीन परिचालन के लिए व्यक्तियों व सामानों की आवाजाही

    8. माल वाहक वाहनों की यात्रा और उतार-चढ़ाव में लगे व्यक्तियों को आवाजाही मे छूट रहेगी।

  • बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना सोमवार प्रातः आठ बजे से जारी है। 11 ब्लाक में 4320 कर्मचारी मतों की गिनती दो शिफ्टों में कर रहे हैं। कई केंद्रों पर कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ने के कारण मतगणना निर्धारित समय से शुरू नहीं की जा सकी।

    एक नजर –
    कुल पद प्रधान-1123, क्षेत्र पंचायत सदस्य-1393, ग्राम पंचायत सदस्य 14066, जिला पंचायत सदस्य- 56
    प्रत्याशी प्रधान पद-7570, क्षेत्र पंचायत सदस्य-5428, ग्राम पंचायत सदस्य-9134, जिला पंचायत सदस्य-857
    मतदाता कुल 22 लाख 53 हजार 198, वोट प्रतिशत-73.10 प्रतिशत
    काउंटिंग टेबल- 1080 कर्मचारी-4320

    बिजनौर जनपद में 19 अप्रैल को ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए 11 ब्लाक के 3654 बूथ पर वोट पड़े थे। 11 मतगणना केंद्रों पर पंचायत चुनाव की मतगणना की तैयारियां हर पहलू को ध्यान में रखकर की गई। चुनाव आयोग ने कोरोना से बचाव के लिए पूर्व में तय नियमों में बदलाव किए।

    सुबह आठ बजे से मतगणना-
    मतगणना के लिए 11 केंद्र। मतगणना की शुरुआत रविवार प्रातः सुबह आठ बजे से दो शिफ्ट में हुई। पहली शिफ्ट सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक चली। दूसरी शिफ्ट रात आठ बजे शुरू हुई, जो मतगणना समाप्त होने तक चलेगी।

    मतगणना के लिए तीन टेबल
    मतगणना के लिए तीन टेबल लगाई गई। पहली टेबल पर प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य पद, दूसरी टेबल पर क्षेत्र पंचायत सदस्य पद व तीसरी टेबल पर जिला पंचायत सदस्य पद के मतपत्र गिने गए। कक्ष में एक प्रत्याशी के एक ही एजेंट को उपस्थित रहने की अनुमति दी गई।

    गिनती के लिए व्यवस्था-
    वोटों की गिनती के लिए 1080 टेबल। एक टीम में एक सुपरवाइजर व तीन गणक समेत चार कर्मचारी। वोट गिनती के लिए कुल 4320 कर्मचारी जबकि 230 कर्मचारियों की टीम रिजर्व में। एक कमरे में एक एआरओ।

    गिनती की प्रक्रिया
    एक मतदेय स्थल पर एक से अधिक मतपेटी प्रयोग हुई हैं। सभी मतपेटी एक साथ खोली गईं। वोट गिनने के लिए एक कमरे में चार टेबल। मतपत्र की पदवार छंटाई। प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम पंचायत सदस्य पद के मतपत्र अलग-अलग रंग के हैं। सभी के 50-50 मतपत्र के बंडल बनाकर प्रत्याशी वार छंटाई। कैंसिल मतपत्र को लेकर विवाद होने की स्तिथि में अंतिम फैसला आरओ की जिम्मेदारी।

    एक कमरे में एक एआरओ- एक कमरे में एक एआरओ की तैनाती। प्रत्याशियों के एजेंट के लिए डबल मास्क जरूरी। एजेंट को 48 घंटे पहले की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव दिखाने पर ही प्रवेश। मतगणना केंद्रों के प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग। प्रत्याशी को समर्थकों की भीड़ लाने की इजाजत नहीं। प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य पद के एक प्रत्याशी का एक-एक एजेंट। जिला पंचायत सदस्य के एक ही वार्ड कई कमरों में होने के कारण एक प्रत्याशी के तीन से चार एजेंट।

    सीसीटीवी कैमरों से निगहबानी-
    मतगणना की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। सतत निगरानी के लिए हल्केवार तैनात रहे सुपर जोनल मजिस्ट्रेट। हर एसडीएम को ही सुपर जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी तहसील में आने वाले ब्लाक के मतदान केंद्र का लगातार निरीक्षण की जिम्मेदारी। मतगणना की रिपोर्ट डीएम को देने की इन्हीं पर जिम्मेदारी।

  • चुनावी रंजिश में कराल में मचा बवाल, पथराव फायरिंग से अफरातफरी। कई पुलिस हिरासत में।सेवानिवृत्त फौजी के स्वागत जुलूस के दौरान हुई घटना।

    बिजनौर। चांदपुर थाना क्षेत्र के गांव कराल में शनिवार को दो पक्षों के बीच जमकर बवाल हुआ। पथराव, फायरिग से अफरातफरी मच गई। घटना की शुरुआत रिटायरमेंट के बाद गांव पहुंचे एक फौजी के स्वागत जुलूस में प्रधान पद प्रत्याशी के समर्थकों के शामिल होने के बाद होना बताई गई है। दूसरे पक्ष ने आज होने वाली मतगणना के पहले ही इसे विजय जुलूस समझ लिया।  इसी बात पर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और कई लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के कई लोगों को हिरासत में लिया है।जानकारी के अनुसार चांदपुर क्षेत्र के गांव कराल में शनिवार को गांव कराल निवासी अशरफ पुत्र छुट्टन फौज से सेवानिवृत्त होने के बाद गांव पहुंचा था। इस पर रिटायर्ड फौजी के परिजन व गांव में इस बार प्रधान  पद के लिए प्रत्याशी इश्तेकार पक्ष के लोग ढ़ोल नगाड़े बजाते हुए जुलूस निकालकर अशरफ का स्वागत कर रहे थे। बताया जाता है कि पूर्व प्रधान मुमतियाज और उसके पक्ष के लोगों की कहासुनी इश्तेकार व अशरफ से हो गई। देखते ही देखते उनमें विवाद बढ़  गया और मारपीट शुरू हो गई। इश्तेकार के घायल होते ही दोनों पक्षों की ओर से जमकर पथराव शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काफी देर तक हुए पथराव के बाद दोनों ओर से तमंचे निकल आए और कई राउंड फायरिग हुई। विवाद में दोनों ओर के कई लोग घायल हो गए। इस दौरान गांव में अफरातफरी मच गई। किसी ग्रामीण ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना पर प्रभारी निरीक्षक पंकज तोमर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि दोनों ओर से जारी पथराव व फायरिग के चलते पुलिस काफी देर तक मूक दर्शक बनी खड़ी रही। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए भीड़ को खदेड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों से दस-दस लोगों को हिरासत में ले लिया। घायलों को सीएचसी में भर्ती करा दिया गया। बताया जाता है कि ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश में विवाद हुआ। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जांच में सामने आया है कि पूर्व प्रधान मुमतियाज पक्ष ने फौजी के रिटायरमेंट जुलूस को इश्तेकार की जीत का जश्न समझ लिया था। इसी के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। दोनों पक्षों की ओर से तहरीर प्राप्त हो चुकी है। मुकदमा दर्ज करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। 

  • सात बजे तक 23 ग्राम प्रधानों की घोषणा हुई

    बिजनौर। पंचायत चुनाव की मतगणना के परिणाम हासिल करने के लिए रविवार प्रातः सात बजे के पहले ही लोगों की भीड़ जलीलपुर में श्री कृष्ण इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र हो गई। अव्यवस्थाओं के चलते मतगणना प्रातः 9:00 बजे शुरू हो सकी। शाम 7:00 बजे तक 110 पदों में से मात्र 23 ही ग्राम प्रधानों की घोषणा की जा सकी। मतगणना स्थल से लेकर श्री कृष्ण इंटर कॉलेज के मैदान में हजारों लोगों की भीड़ लगी रही। सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन कहीं भी नहीं दिखाई दिया।

    ग्राम पंचायत औरंगपुर जोगीपुरा से राजवीर सिंह, जागीरपुर उर्फ रुस्तमपुर से रईसा, सुंदरा से फारूक अहमद, तहरपुर से दिनेश कुमार, अकौधा से प्रीति, इब्राहिमपुर से ताजिम अहमद, अहरौला से अमित कुमार, बहटौला से आमिर खान, बसंतपुर से दयावती, बुदराकला से तोफीक, केलनपुर से राजीव, अथाई से प्रिंसी, ककराला से सरोजदेवी, अकबरपुर तिगरी से अबरार, मसीत से अकरम, अकबरपुर मझरा सैदवार से विनेश देवी, दरबड से शाहिन परवीन, गन्धौर से कोमल सिंह, पहाड़पुर कला से जितेंद्र सिंह विजयी हुए।

  • बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना में कोरोना गाइडलाइन की खूब धज्जियां उड़ाई गई। मतगणना में पहला नतीजा मिलने में करीब तीन घण्टे का वक्त लग गया। जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह  ने मतगणना स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नगर के सीडी इंटर कालेज मतगणना स्थल पर 15 काउंटरों पर लगी टेबलों पर अव्यवस्थाओ के बीच 87 ग्राम पंचायतों के लिए मतगणना प्रारम्भ हुई। आरओ विशाल कुमार राठी के अनुसार विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम गंगदासपुर में ग्राम प्रधान पद के लिए रामवीर सिंह, ग्राम फतेहपुर कला में  गजेंद्र सिंह, धनोरी में अलका देवी,भरेरा में सुनीता, शेरपुर कल्याण में हेमेंद्र सिंह, मुकरन्दपुर में धर्मेंद्र उर्फ भोला, कुम्हारपुरा में पुन: आँचल राजपूत, कान्हा नंगला में शालू, शाहनगर से जयवीर सिंह,चंदनपुर से सुधीर कुमार,रसूलपुर पित्तन से बलविंदर कौर, भोजपुर टपरी से रेखा देवी, महारनपुर से धर्मेंद्र कुमार, पु_ा से सुभद्रा देवी अम्हेड़ा से शमीमा पत्नी इरशाद, पावटी से इरशाद, दारानगर से रूखसाना ने प्रधान पद पर अपने निकटतम प्रतिद्वंदियों को हराकर विजय प्राप्त की। समाचार लिखे जाने तक मतगणना कार्य जारी था। ————–

  • कहीं खुशी कहीं गम का रहा नजारा। विजयी प्रत्याशियों ने जताया आभार। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं।

    बिजनौर। जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय व पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह ने ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल पर त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य चुनाव की मतगणना के दृष्टिगत मतगणना स्थल का निरीक्षण किया व संबंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा मतगणना स्थल पर मौजूद मतगणना कर्मी, प्रत्याशी, एजेंट आदि सभी से सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क का प्रयोग व कोरोना संबंधी सभी गाइडलाइन का पालन करने की भी अपील की गयी।

    कहीं खुशी कहीं गम का रहा नजारा- नूरपुर में क्षेत्र पंचायत चुनाव की मतगणना खालसा इंटर कॉलेज में शांतिपूर्ण तरीके जारी रही। मतगणना के दौरान प्रत्याशियों में कहीं पर खुशी कहीं पर गम दिखाई दिया। डीएम रमाकांत पांडे, एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी सिटी, सीडीओ ने मतगणना स्थल पहुंच कर जायजा लिया। मतगणना सुबह नौ बजे से शुरू हो गई। सुबह के समय मतगणना की रफ्तार बहुत धीमी रही। डीएम ने कहा कि कोरोना संक्रमण के वर्तमान हालात को देखते हुए सभी क्षेत्र प्रत्याशी व एजेंट एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें। नूरपुर थाना निरीक्षक वीरेंद्र कुमार वर्मा भारी पुलिस बल के साथ हर स्थिति पर नजर बनाए रहे।

    विजयी प्रत्याशियों ने जताया आभार- ताजपुर में सलाम अहमद की पत्नी मिस्कीन खातून वार्ड नंबर 4 से विजयी रहीं। वार्ड नंबर 3 से मोहम्मद जाहिद, मोहम्मद अरमान वार्ड नंबर 2, वार्ड नंबर 1 से प्रेम सिंह सैनी, वार्ड नंबर 5 से शहनाज परवीन, वार्ड नंबर 6 से नूर हसन की पत्नी मुनीजा खातून ने विजय हासिल की। प्रत्याशियों में कहीं खुशी कहीं गम का माहौल देखने को मिला। मतगणना हर टेबल पर धीमी चल रही थी। प्रशासन का सख्त पहरा रहा। 

    सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं- नूरपुर के खालसा इंटर कॉलेज में मतगणना के दौरान प्रत्याशियों व उनके एजेंट ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया। देश प्रदेश के अंदर कोरोना वायरस बीमारी से हर तरफ खलबली मची हुई है। सरकार बार-बार आम जनता से लॉक डाउन पालन करने की अपील कर रही है, मगर वही आम जनता किसी भी बात की परवाह किए हुए अपनी जान जोखिम में डाल रही है, किसी को भी अपनी जान की परवाह नहीं है। 

  • बिजनौर। झलरी गांव के मतदाताओं ने युवा प्रधान की जिम्मेदारी अवनीश चौधरी को सौंपी है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी डॉक्टर कलवा को 304 मतों से शिकस्त दी। अवनीश चौधरी ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल से सबसे कम उम्र के युवा ग्राम प्रधान होंगे। उनकी जीत पर ग्रामीणों, परिजनों, शुभचिंतकों ने हार्दिक बधाई दी है। नवनिर्वाचित प्रधान ने भी सभी का आभार व्यक्त करते हुए ग्राम के विकास में पूर्ण योगदान देने का भरोसा दिलाया।

  • बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2021 के दृष्टिगत प्रेक्षक हरिकेश  चौरसिया ने ब्लॉक नहटौर, हल्दौर तथा कोतवाली मतगणना स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मतगणना स्थल की सुरक्षा एवं बैरीकेटिंग आदि व्यवस्थाओं का जायजा लिया। 

    रविवार पूर्वान्ह त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2021 के मतदान एवं मतगणना को स्वतन्त्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शान्तिपूर्ण सम्पन्न कराने के लिए नियुक्त प्रेक्षक हरिकेश चौरसिया, विशेष सचिव, व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग द्वारा जिले के विभिन्न ब्लॉक क्षेत्रों में स्थापित मतगणना स्थलों का भौतिक रूप से निरीक्षण कर सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर संबंधित उप जिलाधिकारी, उपाधीक्षक पुलिस व तहसीलदार तथा लाईजन ऑफिसर सत्येन्द्र सिंह आदि अन्य अधिकारी मौजूद थे।

    सैनिटाइजेशन तथा विशेष सफाई के निर्देश- सीडी इंटर कॉलेज हल्दौर, जनता इंटर कॉलेज कोतवाली तथा एसएन इंटर कॉलेज नहटौर में स्थापित मतगणना स्थलों के निरीक्षण के दौरान श्री चौरसिया ने वहां पर की जाने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए निर्देश दिए कि मतगणना कार्य स्थलों पर सैनिटाइजेशन तथा विशेष सफाई की नियमित रूप से व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए तथा मतगणना स्थल में अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी बिना पहचान पत्र के कोई व्यक्ति किसी भी अवस्था में प्रवेश न करने पाए।

    उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मतगणना स्थल के सभी महत्वूपर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों का नियमित संचालन सुनिश्चित करते हुए सतत निगरानी के लिए नियमित रूप से कर्मचारियों की क्रमवार ड्यूटी लगाई जाए।

    मतगणना स्थल पर अनावश्यक दवाब न होने दिया जाए- उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि मतगणना स्थल के बाहर प्रकाश की समुचित व्यवस्था तथा जन सामान्य को मतगणना के अद्यतन परिणाम से अवगत कराने के लिए साउण्ड सिस्टम पर सक्षम मतदान कार्मिक की व्यवस्था रखी जाए, ताकि मतगणना स्थल पर अनावश्यक रूप से दबाव ना बन सके। 

  • कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है और अधिकतर लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। वायरस कहीं से भी, किसी को भी अपना शिकार बना सकता है। बाहर से लौटे आपके घर के किसी भी एक व्यक्ति की लापरवाही पूरे घर को चपेट में ले सकती है।

    मास्क सही से पहनें- जब भी घर से बाहर निकलें, मास्क जरूर पहनें। मास्क पहनने के नाम पर लापरवाही ना करें। मास्क में नाक और मुंह पूरी तरह से ढंका होना चाहिए। मास्क चेहरे पर पूरी तरह फिट होना चाहिए। मास्क ऐसा होना चाहिए, जिसमें आप सांस भी आसानी से ले सकें।
    सही तरीके से हाथ धोएं- अपने हाथों को साबुन और पानी से 20 सेकेंड तक धोएं। अगर आप कहीं ऐसी जगह हैं जहां पानी-साबुन नहीं है तो आप सैनिटाइजर से हाथों को साफ करें।
    6 फीट की दूरी- भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें, दूसरे लोगों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें। याद रखें कि बिना लक्षण के भी लोग कोरोना फैला सकते हैं।
    खांसते या छींकते समय मुंह को ढकें- अगर मास्क पहनने के समय आपको छींक या खांसी आती है तो मास्क बिल्कुल ना उतारें। मास्क में छींकने के बाद अपना मास्क तुरंत बदल लें और हाथों को अच्छे से धोएं। अगर आपने मास्क नहीं पहना है तो खांसते समय टिश्यू से अपने मुंह और नाक को ढकें।
    घर में आकर तुरंत नहाएं- अगर आप घर के बाहर जाते हैं किसी काम से और वापस आते हैं तो किसी चीज को बिना छुए और किसी से मिले सबसे पहले नहाएं। ये भी कर सकते हैं- कई बार नहाना संभव नहीं होता। इसलिए शरीर के खुले अंगों को साबुन से अच्छी तरह से धोएं। कपड़े बदलकर उल्टे करके गर्म या गुनगुने पानी में डाल दें।

  • मतगणना स्थलों के आसपास नहीं फटक सकेगी भीड़ 

    बिजनौर। हार जीत के आंकड़े लेने को मतगणना स्थलों के आसपास इस बार भीड़ जुटने पर मनाही है। कोरोना संक्रमण और तीन दिवसीय लॉक डाउन के दूसरे दिन रविवार को पुलिस प्रशासन बेहद सख्ती के मूड में है। त्रिस्तरीय चुनाव मतगणना स्थल के बाहर कफ्र्यू रहेगा। मतगणना स्थलों के आसपास इस बार किसी को एकत्र नहीं होने दिया जाएगा। ऐसी कोशिश करने वाले लोगों से पुलिस सख्ती से निपटेगी और जरुरत पड़ी तो इन पर केस भी दर्ज किए जाएंगे। सख्ती का आलम यह रहेगा कि उम्मीदवार या उनके एजेंट के अलावा किसी को भी फटकने भी नहीं दिया जाएगा। शनिवार को पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह ने मतगणना की ड्यूटी में लगे पुलिसकर्मियों को ब्रीफ करते हुए जरूरी दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वीकेंड लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराना है। मतगणना स्थलों के आसपास समर्थकों या अन्य लोगों का जमावड़ा न होने दिया पाए। उम्मीदवार या उनके एजेंट को मतगणना स्थल पर जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा मतगणना स्थल की तरफ जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस का सख्त पहरा होगा। अगर कोई मतगणना स्थल के आसपास घूमता पाया गया तो उसके खिलाफ महामारी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया जाएगा। वहीं हवालात की हवा भी खानी पड़ सकती है।

    विदित हो कि पिछले किसी भी स्तर के चुनावों में मतगणना स्थलों के आसपास हजारों लोग हार जीत की जानकारी लेने के लिए जुट जाया करते थे, लेकिन इस बार महामारी के चलते हालात बदल गए हैं। इस बीच मतगणना को लेकर तीन एडिशनल एसपी, छह सीओ, 27 निरीक्षक, 165 उपनिरीक्षक, डेढ़ सौ हेड कांस्टेबल, 1000 सिपाही, 900 होमगार्ड और 400 चौकीदार को लगाया गया है। 

  • लॉक डाउन उल्लंघन में तुलाराम होटल के 2 कर्मियों का चालान। लॉक डाउन उल्लंघन करने, संक्रमण फैलाने सहित महामारी आपदा अधिनियम में मामला दर्ज

    बिजनौर। नगीना पुलिस ने लॉक डाउन उल्लंघन करने व संक्रमण फैलाने के मामले में तुलाराम होटल के दो कर्मचारियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर उनका चालान कर दिया।

    थाना प्रभारी कृष्ण मुरारी दोहरे के अनुसार एसआई योगेश कुमार व सहयोगी पुलिस कर्मियों द्वारा शुक्रवार की रात्रि को लॉक डाउन के चलते चैकिंग की जा रही थी। इस दौरान स्टेशन रोड स्थित तुला राम का होटल खुला व चलता पाया। पुलिस ने मौके पर मौजूद होटल के कर्मचारी अनिल कुमार पुत्र जयप्रकाश निवासी मोहल्ला शाहजाहीर व सोनू पुत्र जयप्रकाश निवासी पंजाबी कॉलोनी नगीना को गिरफ्तार कर लिया तथा उनके विरुद्ध लॉक डाउन उल्लंघन करने, संक्रमण फैलाने सहित महामारी आपदा अधिनियम में मामला दर्ज कर सुसंगत धाराओं में उनका चालान कर दिया।

    ….लेकिन गलत हो गई दिनांक सूचना!

  • अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. प्रवीण रंजन सिंह का संदेश

    बिजनौर। मतगणना स्थल पर प्रत्याशी व उनके एजेंट मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकेंगे। साथ ही मतगणना स्थल के आसपास के क्षेत्र में कर्फ्यू लागू रहेगा। बिना वजह वहां पहुंचने वाले लोगों के खिलाफ कोविड प्रोटोकॉल तोड़ने संबंधी सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. प्रवीण रंजन सिंह ने दी।

    रविवार दिनांक 02.05.2021 को त्रिस्तरीय पंचायत चुुनाव की होने वाली मतगणना के दृष्टिगत अपर पुलिस अधीक्षक नगर ने विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि मतगणना स्थल व आसपास कड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे। किसी को भी उल्लंघन करने की इजाजत नहीं दी जायेगी।

  • बिजनौर में शनिवार को संक्रमित केस की संख्या में आई कमी। कुल आए कोरोना 146 पॉजिटिव केस, एक्टिव केस की संख्या हुई 3207

    बिजनौर। जनपद में शनिवार को 146 नए कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई। 287 लोग ठीक होकर डिस्चार्ज हुए। वहीं एक कोरोना पॉजिटिव रोगी की मृत्यु की सूचना है। नए मिले संक्रमितों में अलग-अलग थानों के कईं पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इसी के साथ सक्रिय केस जिले में 3207 हो गए हैं।

    जनपद में शनिवार को प्राप्त 1596 टेस्ट रिपोर्ट में से 146 को कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई। संक्रमितों में बिजनौर अरबन में 22, नजीबाबाद ब्लॉक में 21, जलीलपुर में 20, मोहम्मदपुर देवमल (चंदक) ब्लॉक में 19, आकू नहटौर में 15, किरतपुर में 14, नूरपुर में 13, बुढ़नपुर स्योहारा में 9, हल्दौर में 6, कोतवाली में 5 तथा अल्हैपुर धामपुर ब्लॉक में 2 रोगी शामिल हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव ने बताया कि अलग-अलग थानों के पुलिसकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी से लेकर सभी वर्गों से संक्रमितों की पुष्टि हो रही है। सभी को नियमानुसार आइसोलेशन के निर्देश दिए गए हैं।

  • जिला चिकित्सालय एल-2 में फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है-डीएम रमाकांत पांडेय

    बिजनौर। जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय द्वारा अपील की गई है कि जनपद के सभी नागरिक कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु प्रोटोकॉल का पालन करें, जिससे संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर इन्टीग्रेटेड कन्ट्रोल रूम स्थापित किया गया है। आवश्यकतानुसार इन दूरभाष नंबर पर फोन करके सूचना दी जा सकती है तथा सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी अपील की कि अनावश्यक शंकाओं व अफवाहों पर ध्यान न दें। जिलाधिकारी ने भी स्पष्ट किया कि जिला चिकित्सालय एल-2 में फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।

    इन्टीग्रेटेड कन्ट्रोल रूम के दूरभाष नंबर निम्न हैंः- 01342
    (1)-262031 (2)-262295 (3)-262296 (4)-202297

  • 17,433 प्रत्याशियों की तकदीर का फैसला होगा। परिणाम देर रात तक आने की संभावना। करना होगा कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन।

    बिजनौर। त्रिस्तरीय चुनाव में किस्मत आजमाने उतरे लोगों की मतपेटियों में बंद तकदीर का फैसला रविवार को होगा। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरु होगी। इस बार मतपेटियों में 17,433 प्रत्याशियों का भाग्य बंद है।

    मतगणना को लेकर प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की बैचेनी बढ़ती जा रही है। इधर जिला प्रशासन ने मतगणना की पूरी तैयारी कर ली है। सुबह आठ बजे से मतगणना शुरु होगी। बिजनौर में आरजेपी इंटर कालेज के अलावा जिले के सभी ब्लाकों पर निर्धारित समय पर मतगणना शुरु हो जाएगी। नतीजे देर रात तक आने की संभावना है। वहीं कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन कराया जाएगा। मतगणना स्थल पर सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी, साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को मास्क लगाना अनिवार्य रहेगा। मतगणना स्थल पर सैनिटाइजर की व्यवस्था भी की गई है।निर्वाचन सूत्रों के अनुसार कुल 182 मतगणना कक्ष बनाए गए हैं। इनमें 182 एआरओ की तैनाती की गई है। प्रत्येक कक्ष में तीन मतगणना टेबिल होंगी और प्रत्येक मतगणना टेबिल पर चार कार्मिक की तैनाती होगी। एक शिफ्ट में कुल कार्मिक की संख्या 2184 है। दो शिफ्ट के 4368 कार्मिक लगाए गए हैं। 20 प्रतिशत रिजर्व स्टाफ रखा गया है। विदित हो कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद मैदान में 17,433 प्रत्याशी रह गए थे। प्रधान पद के लिए 7,498, जिला पंचायत सदस्य पद के 799 ,बीडीसी पद के 5045 और ग्राम पंचायत सदस्य पद के 4091 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना है। 

  • भारत सरकार ने अभी तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 16.37 करोड़ से अधिक टीके नि:शुल्क मुहैया कराए

    राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी 79 लाख से अधिक टीके लगाये जाने के लिए उपलब्ध हैं

    इसके अतिरिक्त, अगले तीन दिनों में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश लगभग 17 लाख टीके और मिलेंगे।

    भारत सरकार कोविड 19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका में है। टीकाकरण महामारी से लड़ने में भारत सरकार की पांच सूत्रीय रणनीति ( टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट तथा कोविड उपयुक्त व्यवहार समेत) का एक अंतरंग घटक है। कोविड 19 टीकाकरण की उदार और त्वरित तीसरे चरण की रणनीति का कार्यान्वयन आज (1 मई 2021) से लागू होगा। नए पात्र जनसंख्या समूहों के लिए पंजीकरण 28 अप्रैल से आरंभ हो चुका है। संभावित लाभार्थी या तो सीधे कोविन पोर्टल cowin.gov.in या आरोग्य सेतु ऐप के जरिये पंजीकरण कर सकते हैं।

    भारत सरकार ने अभी तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 16.37 करोड़ ( 16,37,62,300) टीके निशुल्क मुहैया कराये हैं। इनमें से  नुकसान सहित कुल खपत 15,58,48,782 टीकों (आज सुबह 8 बजे तक के उपलब्ध डाटा के अनुसार) की है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी कोविड के 79 लाख से अधिक ( 79,13,518) टीके लगाये जाने के लिए उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, अगले तीन दिनों में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश 17 लाख से अधिक ( 17,31,110) टीके और प्राप्त करेंगे ।

    जैसा कि कोविड-19 टीकाकरण की उदार और त्वरित तीसरे चरण की रणनीति में अनुशंसित था, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को टीकों की कुल संख्या के बारे में सूचित किया जा चुका है जो वे 45 वर्ष और इससे अधिक आयु के लाभार्थियों के टीकाकरण के लिए बिल्कुल निशुल्क टीकों के ‘भारत सरकार चैनल‘ के हिस्से के रूप में प्राप्त करेंगे।

  • यूपी सरकार ने कहा कि रेपिड एंडीज़ टेस्टिंग सेंटर काउंटर पर उपलब्ध होंगे। काउंटिंग सेंटर पर 150 से अधिक अधिकारी नहीं होंगे।

    यूपी पंचायत चुनाव के लिए मतगणना को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, कहा- काउंटिंग सेंटर्स के बाहर हो सख्त कफ्यू

    नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव की मतगणना रविवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ मतगणना कराने का आदेश दिया है। इसके लिए राज्य चुनाव आयोग की तरफ से बनाए गए कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना होगा। साथ ही मतगणना पूरी होने तक इलाके में कर्फ्यू रहेगा।

    उधर यूपी सरकार ने कहा कि रेपिड एंडीज़ टेस्टिंग सेंटर काउंटर पर उपलब्ध होंगे। काउंटिंग सेंटर पर 150 से अधिक अधिकारी नहीं होंगे तथा 15-20 से अधिक उम्मीदवार नहीं होंगे। हम अपनी जिम्मेदारियों को समझ रहे हैं, उससे भाग नहीं रहे हैं। काउंटिंग सेंटर पर सभी को ग्लब, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि प्रत्येक जिले में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। वह कोविड प्रोटोकॉल के पालन की देखरेख करेंगे और यह प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी होंगे।

    हाथरस के ग्राम प्रधान ने लगाई थी याचिका

    हाथरस के प्रधान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस हरीशकेश राव की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की। हाथरस के ग्राम प्रधान कन्हैया लाल की तरफ से दायर याचिका यूपी पंचायत चुनाव मतगणना पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में दखल की जरूरत नहीं समझते, जो प्रोटोकॉल हमारे सामने रखा गया, उसका पूरी तरह पालन हो। मतगणना केंद्र के बाहर सख्त कर्फ्यू हो।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने पूछा क्यों ना गणना दो हफ्ते आगे बढ़ाने पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लेते राज्य निर्वाचन आयोग से भी जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खेनवलकर व जस्टिस हरीशकेश राव की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि क्यों ना यूपी में पंचायत चुनाव की मतगणना को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया जाए,तब तक हमारा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर भी सुधरेगा और उम्मीद की जा सकती है कि तभी स्थिति सबसे ज्यादा बेहतर कंट्रोल में होगी। जबाव में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि बहुत सोच समझकर मतगणना कराने का फैसला लिया गया है। कोविड गाइडलाइंस के अमल के साथ मतगणना को संपन्न कराया जाएगा। मतगणना रविवार को होनी है उस दिन उत्तर प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू है। इस दौरान हालात नहीं बिगड़ेंगे।

  • नई दिल्ली। बिहार के सिवान से सांसद रहे मोहम्मद शहाबुद्दीन की कोरोना वायरस के चलते मौत की खबर को तिहाड़ जेल प्रशासन ने अफवाह करार दिया है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर जेल प्रशासन ने कहा कि पूर्व सांसद की हालत गंभीर है, उनका इलाज दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में चल रहा है। शनिवार सुबह से ही बिहार के बाहुबली नेता की कोरोना के कारण मौत की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही थीं। वहीं समाचार एजेंसी ANI ने अपने पूर्व के ट्वीट को डिलीट करते हुए कहा कि सूचनाएं पारिवारिक व पार्टी सूत्रों पर आधारित थीं। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अभी भी मौत का दावा किया जा रहा है।

    Bahubali Shahabuddin appeals for release on parole on father's death –  Granthshala News

    दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे शहाबुद्दीन का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना से संक्रमित होने के बाद मोहम्मद शहाबुद्दीन को चिकित्सीय निगरानी और समुचित इलाज मुहैया कराने के लिए दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया था। पिछले मंगलवार की रात उन्हें कोरोना पॉजिटिव होने के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

    दो बार विधानसभा सदस्य और चार बार सांसद रह चुके शहाबुद्दीन के खिलाफ तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। तिहाड़ जेल में शिफ्ट किए जाने से पहले उसने बिहार की भागलपुर जेल और सीवान जेल में भी काफी वक्त काटा है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे सीवान से दिल्ली की तिहाड़ जेल ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।

    शहाबुद्दीन का नाम सबसे अधिक सुर्खियों में सबसे अधिक तब आया था, जब उसने दो भाइयों को तेजाब से नहला कर जिंदा जला दिया था। वैसे, इससे पहले लेफ्ट और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ खूनी मारपीट के चलते वह चर्चा में आया था। यह बात अस्सी के दशक के आसपास की है। आलम यह था कि उसका नाम ही शाबू-AK 47 पड़ गया था। 1986 में जिस हुसैनगंज थाने में इसके खिलाफ पहला केस हुआ था, वहीं यह ए कैटेगरी का हिस्ट्रीशीटर (कभी न सुधरने वाला अपराधी) था।

    15 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बिहार की सीवान जेल से तिहाड़ लाने का आदेश दिया था। जेल के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि तिहाड़ में तीन ऐसे कैदी (शहाबुद्दीन, छोटा राजन और नीरज बवाना) हैं जिनको अलग-अलग बैरकों में अकेला रखा गया है। इनका किसी से भी मिलना-जुलना नहीं होता है। पिछले 20-25 दिनों से इनके परिजनों को भी इन कैदियों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इन सबके बावजूद शहाबुद्दीन कैसे कोरोना संक्रमित हो गया, ये चिंता करने की बात है।

  • ICMR ने चेताया: दर्द या बुखार होने पर पेन किलर्स से बचें, कोरोना होने पर सीरियस हो सकते हैं मरीज; दिल, डायबिटीज और बीपी के मरीजों के लिए भी खास सलाह…

    नई दिल्ली। ICMR (इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च) ने अपनी ताजा सलाह में कहा है कि कई पेन किलर्स जैसे इबुप्रोफेन (Ibuprofen) कोरोना की गंभीरता को बढ़ाते हैं। दिल के मरीजों के लिए नुकसानदायक मानी जानी वाली इन दवाओं से किडनी के लिए भी जोखिम बढ़ता है।

    ICMR का कहना है कि लोग NSAID (नॉन स्टेरोडिकल एंटी-इन्फेलेमेटरी ड्रग्स) से परहेज करें और सिर्फ डॉक्टरों की सलाह पर इन दवाओं को लें। बहुत जरूरी होने पर पेरासिटामोल लें। यह सबसे सुरक्षित दर्द निवारक दवाओं में से एक है। लोग अक्सर बुखार आने या शरीर में कहीं दर्द होने पर एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-पाइरेटिक दवाएं लेते हैं। इनमें सबसे आम पेरासिटामोल के साथ इबुप्रोफेन को मिलाकर तैयार दवाएं हैं।

    हार्ट डिजीज, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से कोरोना होने का खतरा ज्यादा नहीं– ICMR का कहना है कि दिल की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को दूसरे लोगों के मुकाबले कोरोना होने का ज्यादा खतरा नहीं। हालांकि दुनिया में अब तक का अनुभव बताता है कि इन बीमारियों से घिरे लोगों को कोरोना होने के बाद गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा ज्यादा है। इसलिए ही ऐसे लोगों को ज्यादा देखभाल की सलाह दी जाती है।

    डायबिटीज : शुगर जांचते रहें, दवा खाते रहें– ICMR की सलाह है कि डायबिटीज के मरीजों को सही खाना और डॉक्टर की सलाह पर सही एक्सरसाइज जरूरी है। इन मरीजों को बार-बार अपना शुगर लेवल जांचते रहना चाहिए और नियमित रूप से दवाई लेनी चाहिए। हार्ट डिजीज- डॉक्टर न मिलें तो भी लेते रहें दवा
    इसी तरह दिल के मरीजों को भी समय पर दवा लेना बहुत जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें। अगर डॉक्टर से मिल नहीं पा रहे हैं तो भी दवाएं लेते रहें। खासतौर पर कोलेस्ट्रॉल (स्टेटिन) को कंट्रोल करने वाली और डायबिटीज की दवा खाते रहना चाहिए। ब्लड प्रेशर- बीपी दवाओं से नहीं बढ़ती कोरोना की गंभीरता

    ICMR का कहना है कि उपलब्ध जानकारी की समीक्षा के बाद साइंटिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं कि ब्लड प्रेशर की दवाओं से कोरोना होने की संभावना या होने के बाद इसकी गंभीरता बढ़ती है। इनमें दोनों तरह की दवाएं यानी ACE इनहिबिटर और एंजियोटेंसिन रिसेप्टर ब्लॉकर्स यानी ARB शामिल हैं। ACE इनहिबिटर में रैमप्रिल (Ramipril), एनलाप्रिल (Enalapril) आदि दवाएं आती हैं। वहीं ARB में लोसार्टन (Losartan), टेल्मीसार्टन (Telmisartan) आदि दवाएं शामिल हैं। ICMR का कहना है कि ये दवाएं हार्टअटैक रोकने और हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में बहुत ही असरदार हैं। इन दवाओं को बंद करना काफी नुकसानदायक हो सकता है।

    फिजिकली एक्टिव रहें, मांस का सेवन जारी रख सकते हैं– ICMR की सलाह है कि लोग अपनी जीवन-शैली सेहतमंद रखें। सिगरेट और शराब से दूर रहें। अपनी ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें और किसी न किसी रूप में नियमित फिजिकल एक्टिविटी करते रहें। हालांकि घर के बाहर डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। ज्यादा नमक न खाएं। अगर आप मांसाहारी हैं तो मांस का सेवन जारी रख सकते हैं। खाने में प्रोटीन और फाइबर के साथ फल-सब्जियां लेते रहें।

    विशेषज्ञों की राय- वैक्सीन लगवाने से पहले या बाद में भी न खाएं पेनकिलर
    दुनिया के तमाम विशेषज्ञों ने कोरोना वैक्सीन लगवाने से पहले या उसके बाद पेनकिलर न लेने की सलाह दी है। इन्फ्लेमेशन को कम करने वाली इबुप्रोफेन (एडविल, मोट्रिन और दूसरे ब्रांड) जैसे कुछ पेनकिलर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया धीमा करता है। जबकि वैक्सीन लगाने का मकसद ही इसे तेज करना होता है। वायरोलॉजी जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार ये पेनकिलर्स चूहों के शरीर में एंटीबॉडीज बनने की गति को कम कर देते हैं। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के फार्मासिस्ट जोनाथन वतनबे का कहना है कि अगर किसी को पेनकिलर लेने की जरूरत पड़ती है तो उसे एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल) यानी पेरासिटामोल लेनी चाहिए। यही सबसे सुरक्षित है।

  • विज्ञानी समूह का अनुमान: अगले हफ्ते आ सकता है कोरोना संक्रमण का पीक

    नई दिल्ली। कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रहे देश के लिए अच्छी खबर है। सरकार के सलाहकार विज्ञानियों के समूह ने हालात के विश्लेषण के बाद आकलन किया है कि कोरोना संक्रमण का पीक (उच्चतम बिंदु) तीन से पांच मई के बीच आ सकता है। इसके बाद देश में कोरोना संक्रमण के मामले कम हो सकते हैं। यह अनुमान पूर्व के आकलन से एक सप्ताह पहले पीक आने का है। यह अनुमान कोरोना संक्रमण के मरीजों की तेजी से बढ़ रही तादाद के मद्देनजर है।

    भारत में लगातार दस दिन से प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को यह संख्या बढ़कर 3.86 लाख को पार कर गई। इसके चलते जनता की मुश्किलें बढ़ी हैं। देश ऑक्सीजन, दवाओं और संसाधनों की किल्लत झेल रहा है। पूरी दुनिया से भारत को मदद भेजी जा रही है। संक्रमण पर नजर रखने के लिए गठित विज्ञानियों के समूह के प्रमुख एम विद्यासागर के अनुसार- हमारा अनुमान संक्रमण का पीक अगले सप्ताह में आने का है। पहले इसी समूह ने पांच मई से दस मई के बीच पीक आने की बात कही थी।

    विद्यासागर ने कहा, हम कुछ अन्य अनुमानों को लेकर गंभीर नहीं हैं जिनमें संक्रमण का पीक जुलाई या अगस्त में आने की बात कही जा रही है। हमारा मानना है कि तब तक देश से संक्रमण की मौजूदा लहर खत्म हो जाएगी। लेकिन पहले की तरह बहुत कम मामले आते रहेंगे और स्थिति नियंत्रण में होगी। विज्ञानी समूह के प्रमुख ने कहा, हमें इस लहर के असर से आने वाले चार-छह हफ्ते तक जूझना पड़ सकता है। इस दौरान बड़ी संख्या में मामले आते रहेंगे लेकिन हम अगर सावधानी बनाए रखते हैं तो दिनों-दिन उनकी तादाद कम होती जाएगी। इसलिए मुश्किल से निपटने को लेकर कोई लंबी रूपरेखा मत बनाइए, जो करना है बचाव के लिए अभी कीजिए, क्योंकि यह वह समय है जिसमें सबसे ज्यादा बचने के प्रयास करने हैं- खुद को सुरक्षित रखना है। भारत में कोरोना संक्रमण की पहली लहर में सितंबर 2020 में एक दिन में अधिकतम 97,894 मामले सामने आए थे। जबकि मौजूदा लहर में दस दिनों से अधिकतम मामलों की संख्या इससे तीन गुना से ज्यादा बनी हुई है। इसलिए गणितीय अनुमान के अनुसार पीक अब ज्यादा दूर नहीं है। इस अनुमान को ठीक हो रहे मरीजों की बढ़ती संख्या भी बल दे रही है। इसलिए माना जाना चाहिए कि बेहतर समय ज्यादा दूर नहीं है।

  • नई दिल्ली। ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के लक्षणों, इलाज, होम आइसोलेशन समेत कई अहम पहलूओं पर विस्तार से समझाया है। उन्होंने समझाया कि होम आइसोलेशन में क्या करें, क्या न करें, रेमडेसिविर या आइवरमेक्टिन कब लें, इनहेलर से फायदा है या नहीं, ऑक्सिजन की कब जरूरत होगी। एम्स डायरेक्टर ने यह भी बताया कि वॉर्निंग साइन क्या हैं यानी ऐसे कौन से संकेत है जिन्हें मरीज में देखने के बाद तत्काल संभलने और अस्पताल का रुख करने की जरूरत होती है।

    यहां यह बात ध्यान देने की जरूरत है कि खुद ही डॉक्टर न बनें और सुझाई गई दवाओं का वैसे ही सेवन न करें। इसके लिए डॉक्टर से परामर्श बहुत जरूरी है, भले ही वह फोन पर ली गई हो या फिर ऑनलाइन कंसल्टेशन हो।
    बुखार, जुकाम, नजला, गले में खराश, खांसी आदि लक्षण आमतौर पर दिखते है। ऐसे में बुखार के लिए पैरासेटमॉल, जुकाम के लिए एंटी एलर्जिक ले लें कोई, खांसी के लिए कोई भी कफ सिरफ ले लें। साथ में नमक के गरारे और भांप ले सकते हैं दिन में दो दफा। इससे कई मरीजों को आराम मिलता है। कई मरीज ऐसे हैं जो कह रहे हैं कि पैरासेटमॉल से उनका बुखार नीचे नहीं आ रहा। 101-102 डिग्री बुखार रह रहा है। अगर आपका बुखार पैरासेटमॉल-650 से कम नहीं हो रहा है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। वह कोई नेप्रोक्सॉन जैसी कोई दवा दे सकते हैं जो लंबे वक्त तक लगातार बुखार के केस में दी जाती हैं।
    जिन मरीजों को बुखार या खांसी 5 दिनों से ज्यादा वक्त से है और ठीक नहीं हो रही, वे इनहेलर ले सकते हैं जिससे आराम मिलता है। बुडेसोनाइड की 800 माइक्रोग्राम दिन में 2 बार 5 से 7 दिन या 10 दिनों तक इनहेलर के जरिए ले सकते हैं। ये दवा फेंफड़े में जाकर आराम देते हैं।

    रेमडेसिविर को घर पर बिल्कुल न लें- इस दवा के अपने साइडइफेक्ट्स हैं और सिर्फ अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए यह दवा एडवाइज की जा रही है। पहले भी कहा है, आज भी कहना चाहूंगा कि रेमडेसिविर होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों यानी माइल्ड इन्फेक्शन या एसिम्प्टोमैटिक (बिना लक्षण वाले) मरीजों के लिए बिल्कुल फायदेमंद नहीं है बल्कि इसके नुकसान ही हैं। इसलिए घर पर रेमडेसिविर बिल्कुल न लें।
    अगर आपको लगे कि आपका ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल कम हो रहा है, 90 के पास आ रहा है या आपको सांस में दिक्कत आ रही है, आप खुलकर सांस नहीं ले पा रहे हैं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। यह बहुत जरूरी है ताकि आपको समय पर इलाज मिल सकेगा और अगर भर्ती करने की जरूरत हुई तो समय से भर्ती हो सकेंगे।

    अगर आप खुलकर सांस नहीं ले पा रहे हैं तो यह संभलने का वक्त है। लेकिन कई बार घबराहट की वजह से आपको लगता है कि आपको सांस लेने में दिक्कत हो रही है, इसलिए अपना ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल देखें। अगर यह 94 से कम हो रही है तो मेडिकल सपोर्ट लेने की जरूरत है। अगर छाती में एकदम दर्द हो रहा है या भारीपन हो रहा है तो मेडिकल एडवाइज की जरूरत है। अगर केयरगिवर यह देखता है कि मरीज सुस्त ज्यादा है, रिस्पॉन्ड नहीं कर रहा है, कन्फ्यूज लग रहा है, सही से जवाब नहीं दे पा रहा है, बच्चों में भी हम यह देखते हैं तो फिर आपको बिना देर किए मेडिकल सपोर्ट और एडवाइज लेने की जरूरत है। इन वॉर्निंग साइन्स को ध्यान रखना चाहिए।

    होम आइसोलेशन कब खत्म किया जाना चाहिए?
    पहली बार सिम्पटम आने के 10 दिन बाद होम आइसोलेशन खत्म कर सकते हैं। एसिम्प्टोमैटिक केस में जिस दिन टेस्ट के लिए सैंपलिंग हुई, उसके 10 दिन बाद होम आइसोलेशन खत्म कर सकते हैं। या फिर लगातार 3 दिनों तक बुखार न हो तब भी होम आइसोलेशन खत्म किया जा सकता है। अगर आपको छठे या सांतवें दिन के बाद से बुखार नहीं हुआ हो और आप 10 दिन पूरे कर लेते हो तब होम आइसोलेशन की जरूरत नहीं है।

    होम आइसोलेशन से बाहर आने के बाद फिर टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं है। माइल्ड और एसिम्प्टोमैटिक केसेज में सातवें-आठवें दिन तक वायरस मर चुका होता है या ऐसी स्थिति में नहीं होता कि किसी दूसरे को संक्रमित कर सके। वायरस कभी कभार आरटीपीसीआर में 2-3 हफ्तों तक रह सकता है। लेकिन वह डेड वायरस है, वायरस के पार्टिकल्स हैं जो टेस्ट में डिटेक्ट होते हैं। इसलिए टेस्ट करने की जरूरत नहीं है। अगर 10 दिन हो गए हों और आप एसिम्प्टोमैटिक हैं या फिर पिछले 3 दिनों से आपको बुखार न आया हो तो आप होम आइसोलेशन से बाहर आ सकते हैं।

  • नूरपुर में मतगणना प्रभावित होने की संभावना! एक एआरओ की हो चुकी मौत। 10 संक्रमण की चपेट में। आरओ खुद भी कोरोना संक्रमण को लेकर सशंकित। 

    बिजनौर। नूरपुर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतों की गिनती पर कोरोना की मार पड़ती दिख रही है। ब्लॉक की 14 न्याय पंचायतों में एक न्याय पंचायत के एआरओ की मृत्यु हो चुकी है, वहीं 10 अन्य एआरओ संक्रमण की चपेट में हैं। मात्र आरओ स्तर पर काम का बोझ बढऩे से मतगणना एजेंट बनने से लेकर अन्य सभी काममाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना दो मई को होनी है। ब्लॉक में गुरुवार से मतगणना एजेंट बनने को लेकर भारी भीड़  भी एकत्र होने लगी। इस बीच नूरपुर में मतगणना की प्रक्रिया पर कोरोना का खतरा छाने लगा है। बताया  गया है कि एक एआरओ की तीन दिन पहले मौत हो चुकी है जबकि 10 एआरओ अभी की संक्रमण की चपेट में हैं। आरओ पीपी गौतम के अनुसार अभी केवल दो एआरओ के सहारे किसी प्रकार काम चलाया जा रहा है। जिला स्तर से विकल्प में जो ड्यूटी लगाई गई, वे भी ब्लॉक में नहीं आए हैं। एक एआरओ तेज बुखार की स्थिति में पीपीई किट पहनकर आया तो उसे वापस भेज दिया गया। देर शाम तक आरओ पीपी गौतम ने सभी टेबिल के मतगणना एजेंट पास स्वयं ही जारी किए। आरओ पीपी गौतम का कहना है कि कोरोना संक्रमित सभी 10 एआरओ उनके टच में रहे हैं, लिहाजा उनमें भी कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। शुक्रवार को भी मतगणना एजेंट बनने को लेकर ब्लॉक पर भीड़ उमड़ी। स्टाफ की कमी के कारण प्रत्याशी परेशान रहे। दूसरी ओर मतगणना पास के लिए पहुंचने वाले प्रत्याशियों और अन्य लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल की जमकर धज्जियां उड़ाईं। कई लोग बिना मास्क का पहुंचे तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं किया। 

  • ऑक्सीजन की किल्लत से तीमारदार खासे परेशान। नजीबाबाद क्षेत्र में संचालित एकमात्र फैक्ट्री बंद। हल्दौर से आपूर्ति को इंकार पर बैरंग लौटे तीमारदार।

    बिजनौर। जनपद में ऑक्सीजन की कमी न होने के प्रशासन और राज्य नोडल अधिकारी के सभी दावे उस समय हवा-हवाई हो गए जब नजीबाबाद के कोरोना संक्रमित मरीजों के तीमारदारों को हल्दौर से भी बिना ऑक्सीजन दिए बैरंग लौटा दिया गया। दरअसल यह किल्लत नजीबाबाद क्षेत्र में चल रहे ऑक्सीजन प्लांट के एकाएक बंद हो जाने से सामने आयी है, जिसे लेकर लोग खासे परेशान घूम रहे हैं। शुक्रवार को भी दूसरे दिन नजीबाबाद के कोरोना संक्रमित मरीजों के तीमारदारों को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पायी। दरअसल नजीबाबाद-नगीना वाया बुंदकी मार्ग पर ग्राम सिकन्दरपुर बसी क्षेत्र में चल रहे गोयल इंडस्र्टियल (ऑक्सीजन) प्लांट से नजीबाबाद क्षेत्र के कोरोना संक्रमित लोगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। उपजिलाधिकारी नजीबाबाद परमानंद झा ने कोरोना संक्रमितों को ऑक्सीजन की कमी से न जूझने की शिकायतों को गंभीरता से लिया था। इसके विगत सप्ताह ही उन्होंने उक्त गैस प्लांट पर पहुंचकर जांच की और ऑक्सीजन की कॉमर्शियल सप्लाई बंद करा दी थी। यही नहीं अन्यत्र भेजी जा रही ऑक्सीजन पर भी पाबंद लगा दी थी। एसडीएम ने प्लांट पर पुलिसकर्मी भी तैनात कर दिए थे। इसके अलावा कोरोना संक्रमित रोगियों के तीमारदारों की ओर से दिए गए प्रार्थनापत्र के आधार पर उक्त प्लांट से ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति कराया जाना प्रारंभ कर दिया था। गुरुवार को गोयल इंडस्ट्रीयल प्लांट के स्वामी हर्ष गोयल ने अपनी ऑक्सीजन उत्पादक इकाई के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया, जिसमेें अंग्रेजी व हिंदी में ऑक्सीजन गैस उपलब्ध न करा पाने के लिए लिखा गया। गैस उत्पादक इकाई की ओर से जानकारी दी गयी है कि ऑक्सीजन गैस निर्माण के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग की जाने वाली तरल चिकित्सा आक्सीजन की कमी है, इसलिए कारखाने को अस्थाई रूप से बंद कर दिया जाता है, जब तक कि आगे की सूचना नहीं दी जाती है। वहीं गैस प्लाट के बंद हो जाने से नजीबाबाद क्षेत्र में भी आक्सीजन गैस की कमी होने की वजह से कोरोना संक्रमितों के तीमारदार इधर-उधर भटक रहे हैं।

    हल्दौर से लौटाया बैरंग! बताया जाता है कि तहसील नजीबाबाद की ओर से कुछ लोगों को ऑक्सीजन गैस लेने के लिए पत्र लिखकर हल्दौर भेजा गया। जहां से उन्हें ऑक्सीजन गैस उपलब्ध न कराकर बैरंग लौटा दिया गया। हालांकि जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से नामित नोडल अधिकारी योगेश कुमार ने दावा किया था कि जनपद में ऑक्सीजन गैस की कोई कमी नहीं है। दो दिन पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नजीबाबाद पर निरीक्षण के लिए पहुंचे नोडल अधिकारी योगेश कुमार ने कहा था कि जनपद के सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन मुहैया करा दी गयी है। ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति हरिद्वार से की जा रही है। जनपद में दवाओं के साथ ही ऑक्सीजन गैस की भी कमी नहीं होने दी जाएगी, जबकि उनकी ओर से किए गए दावे के अगले दिन ही नजीबाबाद क्षेत्र में ऑक्सीजन गैस की किल्लत दिखायी देने लगी। 

    “ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति न हो पाने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी से बातचीत की गयी है। जनपद स्तर पर ऑक्सीजन की कमी होने की बात सामने आयी है। इस सम्बन्ध में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक चल रही है। शनिवार तक ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति के मामले में कुछ न कुछ हल निकल आने की उम्मीद बनी हुई है।” राधेश्याम शर्मा, तहसीलदार नजीबाबाद।

  • डा. सर्वेश निराला पीएचसी नजीबाबाद प्रभारी नियुक्त। डा. संदीप को मंडावली से भेजा गया अफजलगढ़ पीएचसी। विगत वर्ष कोरोनाकाल में पीएचसी प्रभारी रहे हैं डा. निराला।

    बिजनौर। नजीबाबाद नगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए पीएचसी प्रभारी पद पर अफजलगढ़ से डा. सर्वेश निराला को पुन: तैनाती दी गयी है। नगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी पद पर वर्तमान में कार्य कर रहे डा. फैज़ हैदर के कोरोना संक्रमित हो जाने  पर वह आइसोलेशन में है। उनके स्थान पर कार्यभार संभालने के लिए सीएमओ ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मंडावली प्रभारी डा. संदीप को नजीबाबाद पीएचसी पर नियुक्ति दे दी थी। हालांकि उन्होंने नजीबाबाद पीएचसी का चार्ज नहीं लिया। वर्तमान में नगर में कोरोना के लगातार बढ़ रही संक्रमितों की संख्या  के बावजूद अस्पताल पर किसी प्रभारी चिकित्साधिकारी के न होने से व्यवस्था प्रभावित होने लगी थी। पिछले चार दिनों में कोरोना टैस्टिंग के लिए लंबी लाइन लग रही थी और किट के अभाव में अफरातफरी मच रही थी। वहीं बैक डोर से जांच का खेल होने की शिकायत आने लगीं, जिसे देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विजय यादव के आदेश पर डा. सर्वेश निराला को चार्ज दिया गया है। संभवत: सीएमओ की ओर से डा. निराला के विगत वर्ष कोरोनाकाल में पीएचसी नजीबाबाद पर कोरोना नोडल रहते हुए मेहनत से जनता को जागरूक कर बेहतर कार्य किए जाने का भी संज्ञान लिया है। हालांकि डा. सर्वेश निराला उन दिनों विवादों में भी घिरे रहे हैं। सीएमओ की ओर से डाक्टर संदीप को पीएचसी प्रभारी मंडावली से स्थानांतरित करते हुए  चिकित्सा अधिकारी अफजलगढ़ बनाया गया है। इसके अलावा सीएमओ की ओर से कई स्थानांतरण करते हुए डा. शील कुमार गौतम को सीएचसी समीपुर से पीएचसी मंडावली, डा. रजनीश कुमार को पीएचसी कादराबाद से पीएचसी कासमपुर गढ़ी प्रभारी के अलावा अफजलगढ़ सीएचसी के अधीक्षक पद का दायित्व भी दिया है।

  • राष्ट्रवादी पत्रकार श्री रोहित सरदाना जी के निधन की ख़बर सुन यह पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ी क्षति है। आज देश ने एक बेबाक, लेकिन शालीन व्यक्तित्व खो दिया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकसंतप्त परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।
    विनम्र श्रद्धांजलि
    ॐ शांति

    Rohit Sardana is an Indian anchor and media personality. He had hosted Taal Thok Ke, a debate programme which discusses contemporary issues in India on Zee News. He left Zee News to join Aaj Tak in 2017, and now he hosts the debate show Dangal. He is a recipient of the 2018 Ganesh Vidyarthi Puraskar Award. Wikipedia Born: 22 September 1979, Kurukshetra. Died: 30 April 2021, New Delhi. Education: Guru Jambheshwar University of Science and Technology (2000–2002)

    आज तक समाचार चैनल के वरिष्ठ पत्रकार और एंकर रोहित सरदाना का निधन हो गया है। रोहित पिछले कुछ वक्त से कोविड से पीड़ित थे, वह उससे उबर ही रहे थे कि शुक्रवार दोपहर को हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया। रोहित सरदाना के निधन की खबर से हर कोई स्तब्ध है और अपनी ओर से श्रद्धांजलि दे रहा है. 

    पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर दु:ख व्यक्त करते हुए लिखा कि लोकप्रिय न्यूज़ एंकर तथा वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना के निधन का समाचार अत्यंत दु:खद है। उनका असामयिक निधन पत्रकारिता जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। श्री सरदाना के परिवारजनों व प्रशंसकों को मेरी शोक संवेदनाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ’रोहित सरदाना बेहद जल्दी हमें छोड़ कर चले गए। भारत की प्रगति के लिए ऊर्जा से भरपूर थे और भावुक थे, रोहित को कई लोगों द्वारा याद किया जाएगा। रोहित के निधन ने मीडिया जगत में एक बहुत बड़ा शून्य छोड़ दिया है। उनके परिजनों, दोस्तों और चाहने वालों को सांत्वना, ऊं शांति’। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, असम के मंत्री हेमंता बिस्व शर्मा, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत तमाम नेताओं ने रोहित सरदाना के निधन पर दु: ख व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। कहा कि देश ने एक निडर राष्ट्रवादी पत्रकार को खोया है और इससे मीडिया जगत को भी बहुत बड़ी क्षति पहुंची है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति व शोकाकुल परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें, ॐ शांति।

    मीडिया जगत ने भी किया नमन- राज्यसभा सांसद और मीडिया जगत के बड़े नाम सुभाष चंद्रा ने भी रोहित सरदाना को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि रोहित एक शानदार व्यक्ति थे, मैं उन्हें बेहद मिस करूंगा। वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष, कवि कुमार विश्वास, रेडियो जॉकी रौनक ने रोहित सरदाना के निधन पर दुख व्यक्त किया।पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने भी रोहित सरदाना के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना जाहिर की।  

    मेरी व्यक्तिगत क्षति: सीएम हरियाणा- मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जन्मे और मीडिया के राष्ट्रीय-फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले रोहित सरदाना, असमय हमें छोड़ कर चले गए हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाले साथी कितने विषम और चुनौतीपूर्ण माहौल में काम कर रहे हैं, ये आज चिंता करने का विषय है। रोहित का यूं विदा लेना सम्पूर्ण हरियाणा के साथ-साथ मेरे लिए भी व्यक्तिगत क्षति है।

  • 31 मई तक प्रभावी रहेगा गृह मंत्रालय का आदेश। संक्रमण की दर दस फीसदी से अधिक होने वाले जिलों की होगी पहचान।

    नई दिल्ली। देश के जिन जिलों में कोविड-19 के ज्यादा मामले हैं वहां वायरस के प्रसार को रोकने के लिए गहन और स्थानीय निरूद्ध क्षेत्र बनाने जैसे उपाय किए जाएंगे। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह आदेश शुक्रवार को जारी किया। मंत्रालय ने महामारी को देखते हुए मई के लिए जारी नए दिशा-निर्देश में देश में कहीं भी लॉक डाउन लगाने के बारे में कुछ नहीं कहा है। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि उन जिलों की पहचान करें जहां या तो कोविड-19 संक्रमण की दर दस फीसदी से अधिक है या जहां पिछले एक हफ्ते में बिस्तर भरने की दर 60 फीसदी से अधिक है।

    गृह मंत्रालय ने कहा कि इनमें से किसी भी मानक को पूरा करने वाले जिले को गहन और स्थानीय निरूद्ध क्षेत्र बनाने के उपायों के लिए विचार किया जा सकता है। गृह मंत्रालय के आदेश के साथ सामुदायिक निरूद्ध क्षेत्र और बड़े निरूद्ध क्षेत्र जैसे इलाके बनाने की रूपरेखा लागू करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सलाह को भी इसमें जोड़ा गया है। बयान में कहा गया कि कोविड-19 प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश पूरे देश में कड़ाई से लागू रहेगा। गृह मंत्रालय का आदेश 31 मई तक प्रभावी रहेगा।

    स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार एक दिन में सर्वाधिक 3,79,257 नए मामले आने के साथ भारत में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की कुल संख्या 1,83,76,524 हो गई है जबकि इलाज कराने वाले रोगियों की संख्या 30 लाख से अधिक हो गई है। मंत्रालय द्वारा सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन में 3645 लोगों की संक्रमण से मौत के कारण मृतकों की कुल संख्या 2,04,832 हो गई है।

  • लखनऊ। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में आयुर्वेद चिकित्सकों को उतारने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुर्वेद चिकित्सकों की सेवाएं लेने का फैसला किया है।

    सीएम योगी आदित्यनाथ के आह्वान पर प्रदेश के पांच हजार आयुर्वेद डाक्टर भी कोविड मरीजों को अपनी सेवा देंगे। सीएम योगी आयुर्वेद चिकित्सकों से सीधे संवाद कर रणनीति बनाएंगे। सूत्रों का कहना है कि आयुष चिकित्सक होम आइसोलेशन के अलावा कोविड संक्रमण से जूझ रहे मरीजों की मदद करेंगे।

  • हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के उपचार में ‘आयुष 64’ उपयोगी- केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद

    नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के विश्वव्यापी कहर के बीच ‘आयुष 64’ दवा हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के रोगियों के लिए आशा की एक किरण के रूप में उभरी है। देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पाया है कि आयुष मंत्रालय की केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) द्वारा विकसित एक पॉली हर्बल फॉर्मूला आयुष 64, लक्षणविहीन, हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के लिए मानक उपचार की सहयोगी (adjunct to standard care) के तौर पर लाभकारी है। उल्लेखनीय है कि आयुष 64 मूल रूप से मलेरिया की दवा के रूप में वर्ष 1980 में विकसित की गई थी तथा कोविड 19 संक्रमण हेतु पुनरुद्देशित (repurpose) की गई है।

    हाल ही में आयुष मंत्रालय तथा-सीएसआईआर द्वारा हल्के से मध्यम कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में आयुष 64 की प्रभावकारिता और इसके सुरक्षित होने का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यापक और गहन बहु-केंद्र नैदानिक (क्लीनिकल) परीक्षण पूरा किया गया है।

    आयुष 64, सप्तपर्ण (Alstonia scholaris), कुटकी (Picrorhiza kurroa), चिरायता (Swertia chirata) एवं कुबेराक्ष (Caesalpinia crista) औषधियों से बनी है। यह व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर बनाई गयी है और सुरक्षित तथा प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है। इस दवाई को लेने की सलाह आयुर्वेद एवं योग आधारित नेशनल क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (National Clinical Management Protocol based on Ayurveda and Yoga)’ द्वारा भी दी गयी है जो कि आईसीएमआर की कोविड प्रबंधन पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स (National Task Force on COVID Management) के निरीक्षण के बाद जारी किया गया था।

    पुणे के सेंटर फॉर रूमेटिक डिसीज के निदेशक और आयुष मंत्रालय के ‘आयुष मंत्रालय-सीएसआईआर सहयोग’ के मानद मुख्य नैदानिक समन्वयक डॉ. अरविंद चोपड़ा ने बताया कि परीक्षण तीन केंद्रों पर आयोजित किया गया था। इसमें KGMU लखनऊ, DMIMS, वर्धा और BMC कोविड केंद्र मुंबई शामिल रहे तथा प्रत्येक केंद्र में 70 प्रतिभागी शामिल रहे। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि आयुष 64 ने मानक चिकित्सा (Standard of Care यानी एसओसी) के एक सहायक के रूप में महत्वपूर्ण सुधार प्रदर्शित किया और इस तरह इसे एसओसी के साथ लेने पर अकेले एसओसी की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने की अवधि भी कम देखी गई।

    उन्होंने यह भी साझा किया कि सामान्य स्वास्थ्य, थकान, चिंता, तनाव, भूख, सामान्य हर्ष और नींद पर आयुष 64 के कई महत्वपूर्ण, लाभकारी प्रभाव भी देखे गए। निष्कर्ष रूप में डॉ. चोपड़ा ने कहा कि इस तरह के ‘नियंत्रित दवा परीक्षण अध्ययन’ ने स्पष्ट सबूत दिए हैं कि आयुष 64 को कोविड -19 के हल्के से मध्यम मामलों का उपचार करने के लिए मानक चिकित्सा के सहायक के रूप में प्रभावी और सुरक्षित दवा के रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो रोगी आयुष 64 ले रहे हैं, उनकी निगरानी की अभी भी आवश्यकता होगी ताकि अगर बीमारी और बिगड़ने की स्थिति हो तो उसमें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ऑक्सीजन और अन्य उपचार उपायों के साथ अधिक गहन चिकित्सा की आवश्यकता की पहचान की जा सके।

    आयुष नेशनल रिसर्च प्रोफेसर तथा कोविड-19 पर अंतर-विषयक आयुष अनुसंधान और विकास कार्य बल (Inter-disciplinary Ayush Research and Development Task Force on COVID-19) के अध्यक्ष डॉ. भूषण पटवर्धन ने कहा कि आयुष 64 पर हुए इस अध्ययन के परिणाम अत्यधिक उत्साहजनक हैं और आपदा की इस कठिन घड़ी में ज़रूरतमंद मरीज़ों आयुष 64 का फायदा मिलना ही चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति (Ayush-CSIR Joint Monitoring Committee) ने इस बहु-केंद्रीय परीक्षण की निगरानी की थी। स्वास्थ्य शोध विभाग के पूर्व सचिव तथा आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी एम कटोच इस समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष 64 पर हुए इन नैदानिक अध्ययनों (clinical studies) की समय-समय पर एक स्वतंत्र संस्था ‘डेटा और सुरक्षा प्रबंधन बोर्ड’ (Data and Safety Management Board यानी डीएसएमबी) द्वारा समीक्षा की जाती थी।

    डॉ. पटवर्धन के दावे की पुष्टि करते हुए आयुष-सीएसआईआर संयुक्त निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ वीएम कटोच ने बताया कि समिति ने आयुष 64 के अध्ययन के परिणामों की गहन समीक्षा की है। उन्होंने कोविड-19 के लक्षणविहीन संक्रमण, हल्के तथा मध्यम संक्रमण के प्रबंधन के लिए इसके उपयोग की संस्तुति की। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस निगरानी समिति ने आयुष मंत्रालय से सिफारिश की है कि वह राज्यों के लाइसेंसिंग अधिकारियों / नियामकों (Regulators) को आयुष 64 के इस नये उपयोग (Repurposing) के अनुरूप इसे हल्के और मध्यम स्तर के कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन में उपयोगी के तौर पर सूचित करे।

    केंद्रीय आयुर्वेदीय अनुसन्धान संस्थान (CCRAS) के महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने विस्तार से बताया कि CSIR-IIIM, DBT-THSTI, ICMR-NIN, AIIMS जोधपुर और मेडिकल कॉलेजों सहित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़; किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ; गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नागपुर; दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नागपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आयुष 64 पर अध्ययन जारी हैं। अब तक मिले परिणामों ने हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमणों से निबटने में इसकी भूमिका स्पष्ट तौर पर जाहिर की है। उन्होंने यह भी बताया कि सात नैदानिक (क्लीनिकल) अध्ययनों के परिणाम से पता चला है कि आयुष 64 के उपयोग से संक्रमण के जल्दी ठीक होने (Early clinical recovery) और बीमारी के गंभीर होने से बचने के संकेत मिले हैं।

    लगभग 20,000 परिवारों को आयुष काढ़ा के 50 ग्राम के 20,880 पैकैटों का वितरण किया गया- लखनऊ। अपर मुख्य सचिव प्रशान्त त्रिवेदी ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में आम जनता को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने के लिए आयुष विभाग तेजी से काम कर रहा है। आयुर्वेद विभाग के चिकित्साधिकारियों और कर्मचारियों ने कुल 43,474 आयुर्वेद कोविड-19 किट का वितरण प्रदेश के 91,692 लोगों को किया है। इसमें संशमनी वटी, आयुष-64, अगस्त्य हरीतकी और अणु तैल है। इसके अलावा आयुर्वेद विधा से लगभग 20,000 परिवारों को आयुष काढ़ा के 50 ग्राम के 20,880 पैकैटों का वितरण किया गया है। साथ ही होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों द्वारा 6,28,300 आर्सेनिक एलबम की शीशियां जिलों में कोविड की रोकथाम और बचाव के लिए दी जा रही हैं। यूनानी चिकित्सकों ने बहीदाना, सपिस्ता, उन्नाब और अर्क अजीब नामक यूनानी औषधियों को करीब 3198 लोगों को दिया है।

    जनता की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा की औषधियां रामबाण बनी हैं। कोरोना के उपचार में भी आयुर्वेद काफी कारगर साबित हो रहा है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुष अधिकारियों से कहा है कि वे घरेलू बगीचे में पाए जाने वाली गुणकारी औषधियों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाएं। घर की रसोई में पाए जाने वाली औषधियों के गुण और मसालों के रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुणों की भी जानकारी लोगों को अवश्य दें।

  • जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी पर उमड़ी प्रत्याशियों व एजेंटों की भीड़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मतगणना स्थल का पास पाने को कराई जांच। सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ाई धज्जियां, कई ने चेहरे पर नहीं लगाए मास्क

    बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना के लिए पास बनवाने को कोरोना जांच रिपोर्ट अनिवार्य होने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवार तथा उनके अभिकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचे। इस दौरान जहां लोगों ने अपनी बारी के इंतजार में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम की धज्जियां उड़ायी, वहीं काफी संख्या में लाइन में लगे लोग बिना मास्क लगाए खड़े रहे। गुरुवार सुबह छह बजे से ही जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याशियों और अभिकर्ताओं ने पहुंचना शुरु कर दिया। अधिकांश जगह लाइन गेट से लेकर अन्तिम छोर तक पहुंच गयी। कई घंटे तक लाइन में लगे लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का कतई पालन नहीं किया। साथ ही कई लोग लाइन में लगे होने के बावजूद बिना मास्क लगाए ही खड़े दिखायी दिए।

    वहीं नजीबाबाद ब्लाक के निर्वाचन अधिकारी केसी जोशी तथा उपजिलाधिकारी परमानंद झा ने मतगणना के लिए प्रत्याशियों व अभिकर्ताओं को पास जारी कराने के लिए कोरोना की जांच रिपोर्ट लाना अनिवार्य घोषित किया है। इसके चलते कोरोना जांच रिपोर्ट पाने के लिए एकत्रित हुए लोग भीड़ की शक्ल में स्वास्थ्य केन्द्र पर दिखायी दिए।  

    इसी तरह सीएचसी हल्दौर में अव्यवस्था बनी रही। एंटीजन टैस्ट के लिए एजेंट बनने वाले ग्रामीणों का ताँता लगा रहा। दर्जनों लोग बिना मास्क लगाए कोविड गाइड लाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाते दिखाई दिए। अस्पताल प्रशासन द्वारा टोकने पर ये झगड़े और गाली गलौच पर उतारू हो जाते हैं। एजेंट बनने वालों की कि इस भीड़ से कोरोना संक्रमित और गंभीर मरीजों को जांच कराने में खासी दिक्कतों का सामना कर पड ऱहा है। संक्रमित मरीज अपनी बारी के इंतजार में कई कई घण्टे धूप में खड़े रहने को विवश हैं।

    प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मदनपाल सिंह ने बताया कि सीएचसी पर लैब तकनीशियन सहित कई चिकित्साकर्मियों के संक्रमित होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीएचसी को मिलने वाली जांच किट भी एजेंटो की जांच के कारण समाप्त हो चुकी है। नगर में कोरोना संक्रमण चरम सीमा पर है। उन्होंने जांच कराने आये लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग रखने, मास्क व सेनिटाइजर के प्रयोग की अपील की।

  • पैनिक होने की आवश्यकता नहीं, सभी कुछ है उपलब्ध: डीएम 

    बिजनौर। जनपद में ऑक्सीजन एवं अन्य मेडिकल सेवाओं के लिए किल्लत की खबरों का संज्ञान लेते हुए डीएम रमाकांत पाण्डेय गुरुवार को एसपी डा. धर्मवीर सिंह के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। डीएम, एसपी ने कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत जनपद की वर्तमान स्थिति, चिकित्सा व्यवस्थाओं के संबंध में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी व चिकित्सकों के साथ गोष्ठी कर दिशा निर्देश दिये। इस दौरान डीएम ने सभी अफसरों को किसी भी दशा में मरीजों को कोई दिक्कत न आने देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बताया कि फिलहाल जनपद में किसी चीज की कमी नहीं है। सारी व्यवस्थाएं ठीक हैं। जिला अस्पताल में कोविड के मरीजों को भर्ती भी किया जा रहा है और यहां ऑक्सीजन भी पर्याप्त हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस विषय में ज्यादा पैनिक होने की जरूरत नहीं है, हर आदमी ऑक्सीजन ढूंढता फिर रहा है, ये सही नहीं है। आप प्रशासन द्वारा तय की गई व्यवस्था का पालन करते हुए ऑक्सीजन पा सकते हैं। डीएम ने कहा कि बैठक में सभी ने यही व्यवथाएं देखीं है कि जनपद में कोविड को देखते हुए हमारी क्या व्यवस्थाएं हैं और कहां कमी है?

  • बिजनौर। संयुक्त जिला चिकित्सालय में सांस फूलने व निमोनिया के गंभीर रोगियों के आने की संख्या बढ़ती जा रही है।

    गुरुवार को जिला अस्पताल के एल-टू कोविड वार्ड व आईसीयू के अलावा गैर कोविड चिल्ड्रन वार्ड व इमरजेंसी वार्ड आदि में समान लक्षणों वाले भर्ती मरीजों की संख्या इससे करीब दो गुनी बताई जा रही है। इमरजेंसी में भी ऐसे मरीजों का पहुंचना जारी रहा। चिकित्सक कहते हैं कि एंटीजन या आरटीपीसीआर टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद बुखार, सूखी खांसी व अन्य लक्षण के साथ ही कुछ लोगों के सीटी स्केन में भी कोविड के समान ही रोग की पुष्टि हो रही है।

    “शासन के निर्देशानुसार कोविड की पुष्टि न होने पर भी समान लक्षण वाले मरीजों का जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में उपचार किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों से हरसंभव बेहतर उपचार की कोशिश की जा रही है।ऑक्सीजन की सप्लाई हरिद्वार से भी आ चुकी है। गुरुवार शाम को हल्दौर प्लांट से भरने के लिए भी ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे गए हैं। शुक्रवार को भी हरिद्वार से ऑक्सीजन सप्लाई मिलने की उम्मीद है।” -डॉ. ज्ञानचंद सीएमएस बिजनौर

  • लखनऊ। कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश में वीकेंड लॉकडाउन का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब शुक्रवार रात आठ बजे से मंगलवार सुबह 7 बजे तक लॉकडाउन रहेगा। शनिवार, रविवार को पहले ही वीकेंड लॉकडाउन होता था, जो अब सोमवार को भी लागू रहेगा और मंगलवार सुबह तक जारी रहेगा। अब यूपी में तीन दिन (शनिवार, रविवार, सोमवार) संपूर्ण लॉकडाउन रहेगा.

    यूपी में संक्रमण से कल हुई 266 की मौत:
    यूपी में कोरोना से हालात बहुत बिगड़ते जा रहे हैं। कल 29,824 नए मरीज मिले, जबकि 33,903 डिस्चार्ज हुए हैं। बुधवार को 266 लोगों की मौत हो गई। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में अब तक 8,70,864 लोग संक्रमण बाद स्वस्थ हो चुके हैं। पिछले एक दिन में 1,86,588 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 93 हजार से ज्यादा टेस्ट आरटीपीसीआर के जरिए किए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 4,03,28,141 सैंपल की जांच हो चुकी है। इस तरह उत्तर प्रदेश चार करोड़ से अधिक कोरोना टेस्ट करने वाला पहला राज्य बन गया है।

    प्रदेश में कुल 3 लाख एक्टिव केस में से 2,46,169 लोग होम आइसोलेशन में हैं, अर्थात घर पर अपना इलाज करा रहै हैं। वहीं 7157 संक्रमित लोग निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। बाकी संक्रमित लोगों का सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

    राजधानी में सर्वाधिक, कौशांबी में सबसे कम: लखनऊ में 3759, प्रयागराज में 1261, कानपुर नगर में 1650, वाराणसी में 1909, मेरठ में 1355, गोरखपुर में 1045, गौतम बुधनगर में 903, गाजियाबाद में 559, बरेली में 1041, झांसी में 634, मुरादाबाद में 546, आगरा में 1076, मुजफ्फरनगर में 200, सहारनपुर में 280, लखीमपुर खीरी में 366, बलिया में 361, जौनपुर में 532, गाजीपुर में 395, बाराबंकी में 393, अयोध्या में 280, शाहजहांपुर में 381, चंदौली में 337, मथुरा में 351, रायबरेली में 331, प्रतापगढ़ में 360, बिजनौर में 321 मरीज मिले हैं। अन्य जिलों में 300 से कम मरीज पाए गए हैं. सबसे कम 40 मरीज कौशांबी में मिले।

  • अगले मातम का मुकाम हो सकता है अपना ही घर!
    सरकारी आदेश ठेंगे पर, सड़क पर लोग घूम रहे छुट्टा
    सोशल डिस्टेंसिंग दरकिनार, मास्क पहनना शान के खिलाफ

    बिजनौर। एक ओर कोरोना संक्रमण ने देश व प्रदेश के साथ ही जिले में भी भयावह रुप अख्तियार कर रखा है। इसके बावजूद पब्लिक है कि मानती नहीं। कोरोना संक्रमण से बचाव को दो गज दूरी, मास्क है जरूरी, चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल करना लोग अपनी शान के खिलाफ समझ रहे हैं। मीडिया में कोरोना के कारण होने वाली मौत की खबरों पर प्रशासन व सरकारों को दोष देने वाले यह समझने को तैयार नहीं कि अगले मातम का मुकाम उनका अपना घर भी हो सकता है।

    कोरोना संक्रमण देश व प्रदेश के साथ ही जिले में भी भयावह रुप अख्तियार करता जा रहा है। रोजाना संक्रमित होने वालों और इस वैश्विक आपदा से जान गंवाने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसके बावजूद पब्लिक मानने को तैयार नहीं है। कोरोना संक्रमण से बचाव को दो गज दूरी, मास्क है जरूरी, चेहरे पर मास्क लगाने की सरकारी सलाह अधिकांश लोगों को रास नहीं आ रही। यही कारण है कि घर से निकलते समय चेहरे पर मास्क पहनना लोग अपनी शान के खिलाफ समझ रहे हैं। बाजारों में उमड़ी भीड़ को देखकर साफ समझा जा सकता है कि किसी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मीडिया में कोरोना के कारण होने वाली मौत की खबरों पर प्रशासन व सरकारों को दोष देने वाले लोग यह समझने को तैयार नहीं कि अगले मातम का मुकाम उनका अपना घर भी हो सकता है।
    पुलिस करे सख्ती तो उत्पीडऩ
    ऐसा नहीं है कि पुलिस सख्ती नहीं करती। करती है, लेकिन पहले समझाया जाता है, जिले का पुलिस व प्रशासनिक अमला रोजाना लोगों को आगाह कर रहा है कि जब तक अति आवश्यक न हो, घर से बाहर न निकलें। निकलना जरुरी हो तो चेहरे पर मास्क लगा कर रखें, दो गज की दूरी नियम को अपने रोजमर्रा के जीवन में उतार लें और सैनिटाइजेशन का ख्याल रखें। यह सब जनता की भलाई के लिए ही बताया जाता है। ऐसे में इनका पालन न करने वालों के साथ यदि पुलिस सख्ती करे तो उसे उत्पीडऩ करार दिया जाता है।
    नेता भी नहीं करते अपील
    बात बात पर सरकार व प्रशासन के खिलाफ टिप्पणी करने वाले और सभी प्रयासों का नाकाफी होने का रोना रोने वाले नेता भी चुप हैं। यह बात अलग है कि यदि कोरोना से बचाव को वैक्सीन लगवा ली, तो फोटो जरुर सोशल मीडिया पर शेयर करना है। किसी को कुछ समझाना नहीं, आम जनता मरती है तो मरे, कोई चिंता नहीं।

    312 का चालान, वसूला जुर्माना 2 लाख 42 हजार:-बिजनौर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु पुलिस अधीक्षक बिजनौर के निर्देशन में बिना मास्क घूमने वालो के विरूद्ध अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार दिनांक 28.04.2021 को जनपदीय पुलिस द्वारा बिना मास्क घूम रहे 312 व्यक्तियो का चालान कर 2,42,000/ रूपये का जुर्माना वसूला गया।

  • बिजनौर। जनपद में बुधवार को प्राप्त 3423 टैस्ट रिपोर्ट में 354 नए संक्रमितों की पुष्टि हुई है। वहीं ठीक होकर घर जाने वालों की संख्या 5930 हो गई। इसके अलावा टीएमयू में अलग-अलग तारीखों को हुई तीन मौत के साथ ही संख्या 75 पर पहुंच गयी है।

    बुधवार को 3423 टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई, इनमें 354 को कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें बिजनौर शहरी समेत जिले की सभी तहसीलों के विभिन्न इलाकों के मामले शामिल हैं। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विजय कुमार यादव के अनुसार पोर्टल पर तीन मौत की जानकारी मिली है। बिलाई निवासी 71 वर्षीय महिला की शुक्रवार की सुबह टीएमयू मुरादाबाद में मौत हो गयी। वह चार साल से हाइपरटेंशन की मरीज थी। खांसी और सांस में दिक्कत होने पर वह हल्दौर में हुई जांच में 18 अप्रैल को पॉजिटिव पाई गयी थी। 24 अप्रैल को टीएमयू में ही एक अन्य संक्रमित 58 वर्षीय ढक्का कर्मचंद निवासी व्यक्ति की मौत हुई है। वह डायबिटीज का पुराना रोगी था। इसके अलावा 21 अप्रैल को चांदपुर में तैनात मूलत: बरेली निवासी पुलिसकर्मी की भी मृत्यु की पुष्टि हुई है। उक्त पुलिसकर्मी भी सात वर्षों से डायबिटीज से पीड़ित था। अब जनपद में कुल केस की संख्या 9124 होने के साथ ही सक्रिय केस 3119 हो गए हैं। कुल मौत की संख्या 75 है जबकि 5930 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं।

  • दूसरों से आह्वान करने वालों ने स्वयं किया गाइडलाइन को दरकिनार। बुधवार को भी कोरोना टैस्टिंग कक्ष में घुसे कई भाजपाई। सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार कर की गाली-गलौज। पंचायत चुनाव में भाग्य आजमाया है इस बार।

    बिजनौर। दूसरों से सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन का पालन करने का आह्वान करने वाले कुछ भाजपाईयों ने व्यवस्था तार-तार कर दी। गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर स्थित कोरोना टैस्टिंग कक्ष में घुसकर एक बार फिर स्वास्थ्य कर्मियों से गाली-गलौज की। इसके बावजूद स्वास्थ्यकर्मी पूरी तन्मयता के साथ अपने काम में जुटे रहे।

    बुधवार को एक बार फिर एक स्थानीय भाजपा नेता ने अन्य भाजपाईयों के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर कोरोना की जांच के लिए बनाए गए कक्ष में सरकार की ओर से कोरोना गाइडलाइन के तहत जारी किए गए सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रवेश किया। उक्त भाजपा नेता और उनके साथ पहुंचे लोगों ने वहां काम कर रहे स्वास्थ्य विभाग कर्मियों को जमकर हडक़ाया। साथ ही नेताजी ने सत्ता के दंभ में स्वास्थ्य कर्मियों को गाली-गलौज करने से भी गुरेज नहीं किया।  

    गौरतलब है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पूर्व में की गयी सभाओं तथा मतदान किए जाने के समय तक उक्त नेताजी विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकाशित कराए गए समाचारों व विज्ञप्तियों में सरकार की ओर से जारी की गयी गाइडलाइन का लोगों से पालन करने का आह्वान करते रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों पर नाराजगी जाहिर करने के दौरान नेताजी ने सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन को दरकिनार कर दिया। यह वाकया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचे राज्य नोडल अधिकारी योगेश कुमार के दौरा कर लौटने के बाद हुआ। कुछ ही देर पहले नोडल अधिकारी योगेश कुमार ने मंगलवार को एक भाजपा नेता की ओर से स्वास्थ्यकर्मियों के साथ गाली-गलौज किए जाने के प्रश्न के उत्तर में कहा कि कोरोना संक्रमण के इन संवेदनशील क्षणों में सभी को संयम से काम लेना चाहिए। ऐसे में शायद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने राज्य नोडल अधिकारी की बात को समझा परंतु भाजपा के स्थानीय नेताजी ने इसको गंभीरता से लेना गंवारा नहीं किया। अब देखना यह है कि लगातार दो दिनों तक स्थानीय भाजपा नेताओं के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के स्वास्थ्य कर्मियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार पर भाजपा जिला एवं राज्य नेतृत्व क्या गंभीरता से लेते हुए कोई कार्रवाई करेगा अथवा अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना पीड़ितों की सेवा में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ की गयी अभद्रता के इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

  • अस्पताल स्टाफ के साथ गाली-गलौज पर उतरे नेताजी। विगत दिनों अस्पताल की ओर से मिले सम्मान को भी भुलाया। अपने साथ पहुंचे लोगों की जांच में देरी होने पर भडक़े नेताजी। जिले में एक महत्वपूर्ण पद पर हैं विराजमान।

    बिजनौर। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर प्रत्येक रविवार को लगने वाले मुख्यमंत्री जन आरोग्य स्वास्थ्य मेले का उद्घाटन कर अस्पताल के चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों से सम्मान पाने वाले नेताजी ने सत्ता के दंभ में अस्पताल में पहुंचकर जमकर हंगामा किया। यही नहीं स्वास्थ्य कर्मियों के साथ गाली-गलौज करने में भी गुरेज नहीं किया। उक्त नेताजी जिला कमेटी में एक महत्वपूर्ण पद पर विराजमान बताए गए हैं।

    दरअसल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की दो मई को होने वाली मतगणना के दौरान मतगणना स्थल पर पहुंचने के लिए प्रशासन व निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रत्याशी और उसके अभिकर्ता (एजेंट) के लिए कोरोना जांच की निगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता तय की गयी है। नजीबाबाद उपजिलाधिकारी परमानंद झा और निर्वाचन अधिकारी केसी जोशी की ओर से सभी प्रत्याशियों तथा उनके एजेंटों से अपनी कोरोना जांच की रिपोर्ट के साथ ही मतदान केन्द्र में प्रवेश को जारी किए जाने वाले पास के लिए आवेदन करने के लिए कहा है। इसके चलते मंगलवार को बड़ी संख्या में इस चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवार अपने साथ एजेंटों को लेकर कोरोना की आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचे।

    किट कम होने के कारण हुई असुविधा: प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आरटीपीसीआर जांच के लिए मात्र एक सौ किट ही उपलब्ध होने के चलते स्वास्थ्यकर्मियों ने जिला मुख्यालय से जांच किट प्राप्त होने पर ही अन्य जांच किए जाने की बात कही। इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय नेता भी अपने परिचितों को आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लेकर पहुंच गए। जांच करने वाले स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की ओर से मात्र सौ किट उपलब्ध होने की जानकारी दी गयी। अस्पताल में कोरोना जांच कराने पहुंचे लोगों की भीड़ हो जाने के कारण जांच में देरी हो रही थी। जांच में देरी होती देख एकाएक नेताजी ने अपना आपा खो दिया तथा स्वास्थ्य विभाग के ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों पर आग बबूला हो गए। इसके बाद नेताजी बिफर गए और गाली-गलौज करते हुए काफी देर हंगामा किया। 

    जहां जिनसे पाया सम्मान, वहीं उनका किया अपमान: बताते हैं कि यह वही नेताजी हैं, जिनको इसी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डा. फैज हैदर ने कुछ दिन पूर्व अस्पताल परिसर में शासन की योजना के अनुसार प्रत्येक रविवार को लगने वाले एक मुख्यमंत्री जन आरोग्य स्वास्थ्य मेले का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया था। मेले का उद्घाटन करने के दौरान अस्पताल के स्टाफ ने नेताजी की जमकर आवभगत की थी और फूलों का गुलदस्ता भेंटकर जोरदार स्वागत किया था। एक दिन पूर्व ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सा अधिकारी की भी जांच रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आयी है। इसके चलते उक्त चिकित्साधिकारी आइसोलेशन में हैं।

    एसडीएम ने की सीएमओ से बात: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच न हो पाने की शिकायत को उपजिलाधिकारी परमानंद झा ने गंभीरता से लेते हुए स्वयं जांच की। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र समीपुर पर कम जांच किट होने के चलते लोगों की जांच न होने के मामले को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी विजय यादव से भी बात की तथा त्रिस्तरीय  पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों व एजेंटों की जांच कराए जाने के मद्देनजर अधिक मात्रा में नगर के अस्पतालों को आरटीपीसीआर जांच किट उपल्ध कराने के लिए कहा।