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December 01, 2020
UP में कल फिर ड्राई-डेतीन दिसंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना खत्म होने तक बंद रहेगी शराब की दुकानें
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सदस्य (एमएलसी ) चुनाव के मद्देनजर तीन दिसंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना खत्म होने तक सभी देशी-विदेशी शराब की दुकानें बंद रहेंगी। इससे पहले मतदान के चलते 29 नवंबर शाम पांच बजे से एक दिसंबर शाम पांच बजे तक शराब की दुकानें बंद रही थीं। संबंधित जिलाधिकारियों ने दुकानों को बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैंं।
UP में 11 शिक्षक-स्नातक विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 6 मई 2020 को समाप्त हो गया था। उत्तर प्रदेश में कुल 100 विधान परिषद सदस्यों की संख्या है। 11 एमएलसी सीट पर चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराए जाने को लेकर रविवार की शाम पांच बजे से ही शराब की दुकानें बंद कर दी गई थीं, जो एक दिसम्बर को मतदान होने तक बंद रही। अब मतगणना के दिन तीन दिसंबर को भी बंदी रहेगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।
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फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में वृद्धि पर UP के मुख्य सचिव नाराज
जिलाधिकारी ने दियेे दायित्वों का निर्वहन न करने में अक्षम क्षेत्रीय कार्मिकों तथा अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश
बिजनौर। शासन के निर्देश एवं उच्चतम न्यायालय और हरित न्यायाधिकरण के आदेश के क्रम में जिले में फसल अवशेष तथा गन्ने की पत्तियों आदि को जलाने की घटनाओं को शत-प्रतिशत रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी रमाकांत पांडे ने बताया कि जिला गन्ना अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि इस प्रकार की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए कृषकों को क्षेत्रीय कार्मिकों एवं गन्ना मिल के माध्यम से जागरूक करने तथा फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न विधाओं का प्रयोग करते हुए फसल अवशेष का इन सीटू प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि इन्हीं निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना समितियों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराए गए, जिससे फसल अवशेष को खेत में आसानी से मिलाया जा सके तथा इसके अलावा वेस्ट डी कंपोजर आदि की मदद से फसल अवशेष को खेत में ही सड़ा कर उसकी खाद बनाई जा सके ताकि खेत की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके अलावा गन्ने की पत्तियों को निराश्रित गौवंश आश्रय स्थलों को भी दान करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल की कटाई शुरू होने के बाद जिले में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिस पर अपर मुख्य सचिव कृषि एवं मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गहरा रोष व्यक्त करते हुए संबंधित क्षेत्रीय कार्मिक/अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
DCO को सचेत करने के साथ ही कड़े निर्देशश्री पांडे ने संबंध में जिला गन्ना अधिकारी को सचेत करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी एवं समीक्षा प्रदेश के उच्च अधिकारियों सहित उच्चतम न्यायालय एवं हरित न्यायाधिकरण द्वारा की जा रही है, जिसके दृष्टिगत उनके द्वारा इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषकों को जागरूक करने हेतु जन जागरण अभियान चलाने, क्षेत्र एक गन्ना मिल गन्ना समिति के कार्मिकों अधिकारियों के द्वारा प्रतिदिन सघन निगरानी एवं विजिलेंट रहने तथा घटित घटना होने पर संबंधित कृषक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, परंतु घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि होने से यह स्पष्ट होता है कि आपके स्तर से इस संबंध में अभी तक कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है, जो अत्यंत ही खेदजनक है। उन्होंने उक्त क्रम में जिला गन्ना अधिकारी को कड़ाई के साथ निर्देशित किया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुझाए गए सभी उपायों का प्रयोग कराना सुनिश्चित कराएं तथा फसल अवशेष में इन सीटू मैनेजमेंट के लिए उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कराते हुए फसल अवशेष तथा गन्ने की पत्तियों को जलाने की घटनाओं को शत प्रतिशत रोकना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाए जाने की घटना होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्रतिकूल कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने जिला गन्ना अधिकारी को निर्देश दिए कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए गन्ना समितियों को उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों का प्रयोग कर किए गए फसल अवशेष प्रबंधन की गन्ना समिति वार सूचना अलग से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की इस में लापरवाही अथवा शिथिलता न बरती जाए।
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बदल जाएगा बैंक से जुड़ा ये जरूरी नियम!
अब 24 घंटे उठा सकेंगे RTGS का फायदानई दिल्ली। पहली दिसंबर के साथ ही बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करने के नियम भी बदलने वाले हैं। अब रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सुविधा हर रोज हर समय यानी 24×7 उपलब्ध होगी। इसका मतलब है कि RTGS के जरिए आप किसी भी दिन किसी भी समय में पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे।
वर्तमान में यह सुविधा महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर सप्ताह के सभी कामकाजी दिनों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध होती है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पिछले महीने यानी अक्टूबर में फैसला किया था कि RTGS सुविधा को 24 घंटे उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले के साथ ही रिज़र्व बैंक ने कहा था कि इस सुविधा के शुरू होने के बाद भारत उन चुनिंद देशों की फेहरिस्त में शामिल होगा, जो 24x7x365 लार्ज वैल्यू रियल टाइम पेमेंट सिस्टम की सुविधा देती हैं।
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01 दिसंबर से लागू होगा OTP सिस्टमनई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) 01 दिसंबर से एटीएम से कैश निकालने के तौर तरीकों में बदलाव करने जा रहा है।
फ्रॉड्स के मामले बढ़ते देख पीएनबी अपने ग्राहकों के हित में एटीएम से पैसे निकालने को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए एक वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सिस्टम लागू करने जा रहा है। यह नई प्रणाली 01 दिसंबर से लागू होगी। इसके तहत एटीएम से कैश निकालने के लिए आपको बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी बताना होगा। यह नियम 10 हजार रुपए से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। बैंक ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।
साथ ले जाना न भूलें अपना मोबाइलपीएनबी के ट्वीट के मुताबिक, 01 दिसंबर से रात 8 बजे से लेकर सुबह 8 बजे के बीच PNB 2.0 एटीएम से एक बार में 10,000 रुपए से ज्यादा की कैश निकासी अब ओटीपी प्रणाली आधारित होगी। यानि कि इन घंटों में 10 हजार रुपए से अधिक की धनराशि निकालने के लिए पीएनबी ग्राहकों को ओटीपी की जरूरत होगी, इसलिए ग्राहक अपना मोबाइल साथ ले जाना न भूलें।
अन्य बैंक एटीएम पर लागू नहींपंजाब नेशनल बैंक में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स मर्ज हो चुका है, जो कि 01 अप्रैल, 2020 से प्रभाव में आया है। इसके बाद जो एंटिटी अस्तित्व में आई है, उसे PNB 2.0 नाम दिया गया है। बैंक के ट्वीट व मैसेज में साफ कहा गया है कि ओटीपी बेस्ड कैश विदड्रॉअल PNB 2.0 एटीएम पर ही लागू होगा। यानि ओटीपी आधारित कैश निकासी सुविधा पीएनबी डेबिट/एटीएम कार्ड से अन्य बैंक एटीएम से पैसे निकालने पर लागू नहीं होगी।
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UP के 11 शहरों में पांच दिन बंद रहेंगी शराब की दुकानें
निर्वाचन आयोग ने सभी DM को जारी किए निर्देश
29 नवंबर शाम पांच बजे से एक दिसंबर शाम पांच बजे तक रहेगी बंदी
तीन दिसंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना खत्म होने तक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हो रहे 11 विधान परिषद सदस्य (एमएलसी ) चुनाव के मद्देनजर शराब की दुकानें पांच दिन बंद रहेंगी। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने शहर में शराब की दुकानों को बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं प्रदेश के मतदान वाले आगरा, गोरखपुर, बरेली समेत 11 जिलों में भी बंदी रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
दरअसल, प्रदेश में 11 शिक्षक-स्नातक विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल 6 मई 2020 को समाप्त हो गया था। उत्तर प्रदेश में कुल 100 विधान परिषद सदस्यों की संख्या है। 11 एमएलसी सीट पर चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराए जाने को लेकर रविवार की शाम पांच बजे से ही शराब की दुकानें बंद कर दी जायेगी। एक दिसम्बर को मतदान होने तक दुकानें बंद रहेंगी। साथ ही साथ काउंटिंग के दिन तीन दिसंबर को भी बंदी रहेगी। अगर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।
मतदान से 48 घंटे पूर्व शराब बिक्री पर प्रतिबंध29 नवंबर शाम पांच बजे से एक दिसंबर शाम पांच बजे तक और फिर तीन दिसंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना खत्म होने तक सभी देशी-विदेशी शराब की दुकानें बंद रहेंगी। विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान से 48 घंटे पूर्व शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है।
पीठासीन और मतदान अधिकारी नियुक्त
राज्य चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारी को मतदान संपन्न कराने के लिए पोलिंग पार्टियां और पीठासीन व मतदान अधिकारियों की नियुक्त कर दी है। एक पार्टी में चार मतदानकर्मी होंगे।मतदाता को मिलेगा अवकाश
चुनाव आयोग ने शिक्षक और स्नातक खंड सीट पर एक दिसंबर को वोट डालने वाले सभी मतदाताओं के लिए एक दिन का अवकाश स्वीकृत किया है। मतदेय स्थल के बाहर 200 मीटर दूर प्रत्याशी का बस्ता लगेगा। बस्ते पर सिर्फ दो व्यक्तियों के बैठने की अनुमति होगी। प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, आगरा, इलाहाबाद, झांसी, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर बंदी रहेगी।
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http://sanjaysaxenanews.blogspot.com/2020/11/dm-sp.html
मुख्यमंत्री का फरमान:
सीयूजी नम्बर की हर कॉल खुद रिसीव करें डीएम, पुलिस कप्तान
CM ऑफिस से औचक फोन कर जानी जाएगी हकीकतयोगी की हिदायत: DM SP खुद रिसीव करें सीयूजी नम्बर की हर कॉल
लखनऊ। जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को अपने सरकारी मोबाइल (सीयूजी) नम्बर पर आने वाली हर कॉल खुद रिसीव करनी होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी डीएम, एसपी और एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि जन समस्याओं को पूरी गंभीरता से लें। उनके कार्यालय से कोई भी फरियादी निराश होकर न लौटे। डीएम और पुलिस कप्तान अपने सीयूजी नम्बर पर आने वाली हर फोन कॉल का जवाब जरूर दें।

भारी पड़ेगी जन समस्या निराकरण में हीलाहवाली
यह आदेश तत्काल प्रभाव से अमल में आएगा। अगले एक सप्ताह में मुख्यमंत्री कार्यालय से औचक फोन कर अधिकारियों की कार्यशैली की हकीकत की पड़ताल की जाएगी। सीएम योगी ने गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए उच्चाधिकारियों को भी निर्देशित किया है।

कार्यशैली की होगी सतत निगरानी
जन समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निदान के संबंध में जारी मुख्यमंत्री के ताजा आदेश में कहा गया है कि जिले में तैनात अधिकारी अपने कैम्प ऑफिस (आवास से संचालित होने वाला कार्यालय) की अपेक्षा कार्यालय में अधिक से अधिक समय दें। कोई भी व्यक्ति जो अपनी समस्या लेकर आता है, उससे मर्यादित व्यवहार करें। उनकी समस्या को सुनें और स्थाई समाधान के लिए उचित कदम उठाएं। सीएम योगी ने कहा है कि सरकार जनता के लिए है, ऐसे में जनता की सुविधा, उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता में है। जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ अधिकारीगण अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री कार्यालय से डीएम, एसपी और एसएसपी की कार्यशैली की सतत निगरानी की जाएगी।
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http://sanjaysaxenanews.blogspot.com/2020/11/blog-post_21.html
उल्लंघन करने पर की जाएगी कार्रवाई
अब नोएडा में भी छोटी की गई मेहमानों की listनोएडा। अब जिले में होने वाले शादी समारोह में केवल 100 लोग ही शामिल हो पाएंगे। इससे पहले सरकार ने शादी समारोह सहित अन्य दूसरे कार्यक्रमों में 200 लोगों के शिरकत करने की अनुमति दी थी।
कोरोना के कारण बदली रणनीति
दिल्ली के बाद अब नोएडा जिला प्रशासन ने भी शादी समारोह में मेहमानों की लिस्ट पर कैची चला दी है। नोएडा के डीएम सुहास एल वाई ने शनिवार को इस बारे में एक बयान जारी कर बताया कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अब किसी भी समारोह में अधिकतम 100 व्यक्ति ही भाग ले सकेंगे। शासन के इस निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
जनता से सहयोग करने का आह्वान
जिलाधिकारी ने सहयोग करने का आह्वान करते हुए जिले के सभी लोगों से कहा है कि आयोजित होने वाले सभी प्रकार के समारोह में 100 से ज्यादा शख्स हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि इसका उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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अब नोएडा में भी छोटी की गई मेहमानों की list -
25 नवम्बर से विवाह मुहूर्त प्रारम्भ- आचार्य (डॉ) प्रदीप द्विवेदी
Saturday, November 21, 2020
9:54 AM / by Dr Pradeep Dwivedi
http://sanjaysaxenanews.blogspot.com/2020/11/25.html
आचार्य (डॉ) प्रदीप द्विवेदी लखनऊ
1 जुलाई से शयन कर रहे देवता 25 नवम्बर को देवोत्थान एकादशी के साथ जागने जा रहे हैं। इसी के साथ विवाह मुहूर्त शुरू हो जाएंगे, जो कि 13 दिसम्बर तक जारी रहेगा।
25 नवम्बर की सुबह 04:21 बजे से एकादशी शुरू हो जाएगी, जो कि 26 की सुबह 06:04 बजे तक रहेगी।
देवोत्थान एकादशी का पूजन 25 नवम्बर को किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार दशमीबेधी एकादशी का त्याग करते हुए एकादशी का व्रत 26 नवम्बर को करना उचित रहेगा। गांधारी ने दशमी विधि एकादशी का व्रत किया था, उसके बाद से ही शास्त्रों के मुताबिक इसका त्याग करने को कहा गया है।
15 दिसम्बर की सुबह सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा। उससे पहले 13 को मासांत दोष शुरू हो जाएगा। खरमास में विवाह आदि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। मकर संक्रांति में खरमास समाप्त होगा, लेकिन उसके बाद 16 जनवरी को गुरु अस्त, फिर फरवरी में शुक्र अस्त और उसके बाद सूर्य के मीन राशि में जाने पर खरमास के चलते विवाह लग्नों के लिए अप्रैल 2021 के दूसरे पखवाड़े तक का इंतजार करना पड़ेगा। साल की शुरुआत में सहालग नहीं मिलेगी।
इस वर्ष की विवाह लग्न
नवम्बर- 25, 26, 29 व 30
दिसम्बर- 1, 2, 6, 7, 8, 9, 10, 11 व 13
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सर पैट्रिक वलांस Vaccine आने के बाद भी खत्म नहीं होगा Corona Virus!
ब्रिटिश वैज्ञानिक का सनसनीखेज दावा
मौसमी फ्लू की तरह आ सकता है सामने
नई दिल्ली। कोरोना वैक्सीन का पूरी दुनिया में इंतजार हो रहा है, इस बीच ब्रिटेन सरकार के एक प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार एक बयान देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ब्रिटेन सरकार में वैज्ञानिक सर पैट्रिक वलांस के मुताबिक कोरोना वायरस, वैक्सीन से भी पूरी तरह खत्म नहीं होगा। संभव है कि मौसमी फ्लू की तरह आने वाले वर्षों में इसके संक्रमण के मामले सामने आते रहें। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि कोरोना वैक्सीन से संक्रमण प्रसार की संभावना जरूर कम होगी। लोगों को गंभीर बीमार पड़ने से बचाया जा सकेगा।
वैक्सीन अगले जाड़े से पहले नहीं
वैज्ञानिक सर पैट्रिक वलांस ने ब्रिटेन के सांसदों की एक कमेटी को जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अगले वर्ष कम से कम वसंत से पहले आमजन के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो पाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में कोरोना वायरस का इलाज हर सर्दी में होने वाले फ्लू की तरह ही होगा। यह संभावना नहीं है कि स्टरलाइज़िंग वैक्सीन के साथ कोरोना वायरस समाप्त हो जाए।
क्योंकि फैल चुका है बड़े पैमाने पर
वैज्ञानिक सर पैट्रिक वलांस ने कहा कि फ्लू, एचआईवी और मलेरिया के वायरस की तरह कोरोना महामारी भी एन्डेमिक में बदल जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि कोरोना वायरस इसलिए पूरी तरह खत्म नहीं होगा क्योंकि यह बहुत बड़े पैमाने पर पहले ही फैल चुका है। सर पैट्रिक के मुताबिक अभी वैक्सीन की उपयोगिता और वास्तविकता का पता लगने में ही कुछ और माह लगेंगे। उन्होंने कहा है कि अधिकारियों को जनता से बड़े-बड़े वादे नहीं करने चाहिए। गलत दावों से जनता को अंधेरे में न रखा जाए और वैक्सीन से जुड़ी असल जानकारी देनी चाहिए।
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समाचार के प्रायोजक-

बीकानेर का सुप्रसिद्ध -
पितृ श्राद्ध आरम्भ
पूर्णिमा श्राद्ध – 2/9/20, बुधवार
1 प्रतिपदा श्राद्ध – 3/9/20 गुरुवार
2 द्वितीया श्राद्ध – 4/9/20 शुक्रवार
3 तृतीया श्राद्ध- 5/9/20 शनिवार
4 चतुर्थी श्राद्ध-6/9/20 रविवार
5 पंचमी श्राद्ध- 7/9/20 सोमवार
6 षष्ठी श्राद्ध-8/9/20 मंगलवार
7 सप्तमी श्राद्ध- 9/9/20 बुधवार
8 अष्टमी श्राद्ध- 10/9/20 गुरुवार
9 नवमी श्राद्ध- 11/9/20 शुक्रवार
10 दशमी श्राद्ध- 12/9/20 शनिवार
11 एकादशी श्राद्ध- 13/9/20 रविवार
12 द्वादशी श्राद्ध- 14/9/20 सोमवार
13 त्रयोदशी श्राद्ध- 15/9/20 मंगलवार
14 चतुर्दशी श्राद्ध- 16/9/20 बुधवार
15 सर्वपितृ अमावस श्राद्ध 17/9/20 गुरुवार
आखिर ये पितृदोष है क्या?
पितृ -दोष शांति के सरल उपाय पितृ या पितृ गण कौन हैं ? आपकी जिज्ञासा को शांत करती विस्तृत प्रस्तुति।
पितृ गण हमारे पूर्वज हैं, जिनका ऋण हमारे ऊपर है, क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है। मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है, पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है एवं इस से भी ऊपर स्वर्ग लोक है।
आत्मा जब अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले ऊपर उठती है तो वह पितृ लोक में जाती है। वहां हमारे पूर्वज मिलते हैं। अगर उस आत्मा के अच्छे पुण्य हैं तो ये हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं कि इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य किया। इसके आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार पर सूर्य लोक की तरफ बढती है। वहां से आगे, यदि और अधिक पुण्य हैं, तो आत्मा सूर्य लोक को भेज कर स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है, लेकिन करोड़ों में एक आध आत्मा ही ऐसी होती है, जो परमात्मा में समाहित होती है, जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता। मनुष्य लोक एवं पितृ लोक में बहुत सारी आत्माएं पुनः अपनी इच्छा वश, मोह वश अपने कुल में जन्म लेती हैं।
पितृ दोष क्या होता है ?
हमारे ये ही पूर्वज सूक्ष्म व्यापक शरीर से अपने परिवार को जब देखते हैं और महसूस करते हैं कि हमारे परिवार के लोग ना तो हमारे प्रति श्रद्धा रखते हैं और न ही इन्हें कोई प्यार या स्नेह है और ना ही किसी भी अवसर पर ये हमको याद करते हैं, ना ही अपने ऋण चुकाने का प्रयास ही करते हैं तो ये आत्माएं दुखी होकर अपने वंशजों को श्राप दे देती हैं, जिसे “पितृ- दोष” कहा जाता है।
पितृ दोष एक अदृश्य बाधा है। ये बाधा पितरों द्वारा रुष्ट होने के कारण होती है। पितरों के रुष्ट होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। आपके आचरण से, किसी परिजन द्वारा की गयी गलती से, श्राद्ध आदि कर्म ना करने से, अंत्येष्टि कर्म आदि में हुई किसी त्रुटि के कारण भी हो सकता है।
इसके अलावा मानसिक अवसाद, व्यापार में नुक्सान, परिश्रम के अनुसार फल न मिलना, विवाह या वैवाहिक जीवन में समस्याएं, कैरिअर में समस्याएं या संक्षिप्त में कहें तो जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति और उसके परिवार को बाधाओं का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष होने पर अनुकूल ग्रहों की स्थिति, गोचर, दशाएं होने पर भी शुभ फल नहीं मिल पाते, कितना भी पूजा पाठ, देवी देवताओं की अर्चना की जाए, उसका शुभ फल नहीं मिल पाता।
पितृ दोष दो प्रकार से प्रभावित करता है
1.अधोगति वाले पितरों के कारण
2.उर्ध्वगति वाले पितरों के कारण
अधोगति वाले पितरों के दोषों का मुख्य कारण परिजनों द्वारा किया गया गलत आचरण, उनकी अतृप्त इच्छाएं, जायदाद के प्रति मोह और उसका गलत लोगों द्वारा उपभोग होने पर, विवाहादि में परिजनों द्वारा गलत निर्णय। परिवार के किसी प्रियजन को अकारण कष्ट देने पर पितर क्रुद्ध हो जाते हैं। परिवार जनों को श्राप दे देते हैं और अपनी शक्ति से नकारात्मक फल प्रदान करते हैं।
उर्ध्व गति वाले पितर सामान्यतः पितृदोष उत्पन्न नहीं करते, परन्तु उनका किसी भी रूप में अपमान होने पर अथवा परिवार के पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन नहीं करने पर वह पितृदोष उत्पन्न करते हैं।
इनके द्वारा उत्पन्न पितृदोष से व्यक्ति की भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति बिलकुल बाधित हो जाती है, फिर चाहे कितने भी प्रयास क्यों ना किये जाएं, कितने भी पूजा पाठ क्यों ना किये जाएं, उनका कोई भी कार्य ये पितृदोष सफल नहीं होने देता। पितृ दोष निवारण के लिए सबसे पहले ये जानना ज़रूरी होता है कि किस ग्रह के कारण और किस प्रकार का पितृ दोष उत्पन्न हो रहा है ?
जन्म पत्रिका और पितृ दोष जन्म पत्रिका में लग्न, पंचम, अष्टम और द्वादश भाव से पितृदोष का विचार किया जाता है। पितृ दोष में ग्रहों में मुख्य रूप से सूर्य, चन्द्रमा, गुरु, शनि और राहू -केतु की स्थितियों से पितृ दोष का विचार किया जाता है।
इनमें से भी गुरु, शनि और राहु की भूमिका प्रत्येक पितृ दोष में महत्वपूर्ण होती है। इनमें सूर्य से पिता या पितामह, चन्द्रमा से माता या मातामह, मंगल से भ्राता या भगिनी और शुक्र से पत्नी का विचार किया जाता है।
अधिकांश लोगों की जन्म पत्रिका में मुख्य रूप से क्योंकि गुरु, शनि और राहु से पीड़ित होने पर ही पितृ दोष उत्पन्न होता है, इसलिए विभिन्न उपायों को करने के साथ साथ व्यक्ति यदि पंचमुखी, सातमुखी और आठ मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर ले, तो पितृ दोष का निवारण शीघ्र हो जाता है।
पितृ दोष निवारण के लिए इन रुद्राक्षों को धारण करने के अतिरिक्त इन ग्रहों के अन्य उपाय जैसे मंत्र जप और स्तोत्रों का पाठ करना भी श्रेष्ठ होता है।
विभिन्न ऋण और पितृ दोष
हमारे ऊपर मुख्य रूप से 5 ऋण होते हैं, जिनका कर्म न करने (ऋण न चुकाने पर ) हमें निश्चित रूप से श्राप मिलता है।
ये ऋण हैं : मातृ ऋण, पितृ ऋण, मनुष्य ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण।
मातृ ऋण👉 माता एवं माता पक्ष के सभी लोग जिनमें मां, मामी, नाना, नानी, मौसा, मौसी और इनके तीन पीढ़ी के पूर्वज होते हैं, क्योंकि मां का स्थान परमात्मा से भी ऊंचा माना गया है अतः यदि माता के प्रति कोई गलत शब्द बोलता है, अथवा माता के पक्ष को कोई कष्ट देता रहता है, तो इसके फलस्वरूप उसको नाना प्रकार के कष्ट भोगने पड़ते हैं। इतना ही नहीं, इसके बाद भी कलह और कष्टों का दौर भी परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहता है।
पितृ ऋण👉 पिता पक्ष के लोगों जैसे बाबा, ताऊ, चाचा, दादा-दादी और इसके पूर्व की तीन पीढ़ी का श्राप हमारे जीवन को प्रभावित करता है। पिता हमें आकाश की तरह छत्रछाया देता है। हमारा जिंदगी भर पालन -पोषण करता है, और अंतिम समय तक हमारे सारे दुखों को खुद झेलता रहता है।
पर आज के इस भौतिक युग में पिता का सम्मान क्या नयी पीढ़ी कर रही है ?पितृ -भक्ति करना मनुष्य का धर्म है। इस धर्म का पालन न करने पर उनका श्राप नयी पीढ़ी को झेलना ही पड़ता है। इसमें घर में आर्थिक अभाव, दरिद्रता, संतानहीनता, संतान को विभिन्न प्रकार के कष्ट आना या संतान अपंग रह जाने से जीवन भर कष्ट की प्राप्ति आदि।
देव ऋण 👉 माता-पिता प्रथम देवता हैं, जिसके कारण भगवान गणेश महान बने। इसके बाद हमारे इष्ट भगवान शंकर जी, दुर्गा मां, आदि आते हैं, जिनको हमारा कुल मानता आ रहा है। हमारे पूर्वज भी अपने अपने कुल के देवताओं को मानते थे, लेकिन नयी पीढ़ी ने बिलकुल छोड़ दिया है। इसी कारण भगवान /कुलदेवी /कुलदेवता उन्हें नाना प्रकार के कष्ट /श्राप देकर उन्हें अपनी उपस्थिति का आभास कराते हैं।
ऋषि ऋण 👉 जिस ऋषि के गोत्र में पैदा हुए, वंश वृद्धि की, उन ऋषियों का नाम अपने नाम के साथ जोड़ने में नयी पीढ़ी कतराती है। उनके ऋषि तर्पण आदि नहीं करती है। इस कारण उनके घरों में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इसलिए उनका श्राप पीढ़ी दर पीढ़ी प्राप्त होता रहता है।
मनुष्य ऋण 👉 माता -पिता के अतिरिक्त जिन अन्य मनुष्यों ने हमें प्यार दिया, दुलार दिया, हमारा ख्याल रखा, समय समय पर मदद की। गाय आदि पशुओं का दूध पिया, जिन अनेक मनुष्यों, पशुओं, पक्षियों ने हमारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद की, उनका ऋण भी हमारे ऊपर हो गया।
लेकिन लोग आजकल गरीब, बेबस, लाचार लोगों की धन संपत्ति हरण करके अपने को ज्यादा गौरवान्वित महसूस करते हैं। इसी कारण देखने में आया है कि ऐसे लोगों का पूरा परिवार जीवन भर नहीं बस पाता है, वंश हीनता, संतानों का गलत संगति में पड़ जाना, परिवार के सदस्यों का आपस में सामंजस्य न बन पाना, परिवार के सदस्यों का किसी असाध्य रोग से ग्रस्त रहना इत्यादि दोष उस परिवार में उत्पन्न हो जाते हैं।
ऐसे परिवार को पितृ दोष युक्त या शापित परिवार कहा जाता है। रामायण में श्रवण कुमार के माता -पिता के श्राप के कारण दशरथ के परिवार को हमेशा कष्ट झेलना पड़ा, ये जग -ज़ाहिर है। इसलिए परिवार कि सर्वोन्नती के पितृ दोषों का निवारण करना बहुत आवश्यक है।
पितृों के रूष्ट होने के लक्षण
पितरों के रुष्ट होने के कुछ असामान्य लक्षण वे क्रमशः इस प्रकार हो सकते है।
खाने में से बाल निकलना
अक्सर खाना खाते समय यदि आपके भोजन में से बाल निकलता है तो इसे नजरअंदाज न करें
बहुत बार परिवार के किसी एक ही सदस्य के साथ होता है कि उसके खाने में से बाल निकलता है, यह बाल कहां से आया इसका कुछ पता नहीं चलता। यहां तक कि वह व्यक्ति यदि रेस्टोरेंट आदि में भी जाए तो वहां पर भी उसके ही खाने में से बाल निकलता है और परिवार के लोग उसे ही दोषी मानते हुए उसका मजाक तक उडाते है।
बदबू या दुर्गंध
कुछ लोगों की समस्या रहती है कि उनके घर से दुर्गंध आती है, यह भी नहीं पता चलता कि दुर्गंध कहां से आ रही है। कई बार इस दुर्गंध के इतने अभ्यस्त हो जाते है कि उन्हें यह दुर्गंध महसूस भी नहीं होती लेकिन बाहर के लोग उन्हें बताते हैं कि ऐसा हो रहा है अब जबकि परेशानी का स्रोत पता ना चले तो उसका इलाज कैसे संभव है
पूर्वजों का स्वप्न में बार-बार आना
एक व्यक्ति का अपने पिता के साथ झगड़ा हो गया है और वह झगड़ा काफी सालों तक चला पिता ने मरते समय अपने पुत्र से मिलने की इच्छा जाहिर की परंतु पुत्र मिलने नहीं आया, पिता का स्वर्गवास हो गया। कुछ समय पश्चात उन्होंने अपने पिता को बिना कपड़ों के देखा, ऐसा स्वप्न पहले भी कई बार आया।
शुभ कार्य में अड़चन
कभी-कभी ऐसा होता है कि आप कोई त्योहार मना रहे हैं या कोई उत्सव आपके घर पर हो रहा है। ठीक उसी समय पर कुछ ना कुछ ऐसा घटित हो जाता है कि जिससे रंग में भंग डल जाता है। ऐसी घटना घटित होती है कि खुशी का माहौल बदल जाता है। तात्पर्य यह है कि शुभ अवसर पर कुछ अशुभ घटित होना पितरों की असंतुष्टि का संकेत है।
घर के किसी एक सदस्य का कुंवारा रह जाना
बहुत बार आपने अपने आसपास या फिर रिश्तेदारी में देखा होगा या अनुभव किया होगा कि बहुत अच्छा युवक है, कहीं कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी शादी नहीं हो रही है। एक लंबी उम्र निकल जाने के पश्चात भी शादी नहीं हो पाना कोई अच्छा संकेत नहीं है। यदि घर में पहले ही किसी कुंवारे व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है तो उपरोक्त स्थिति बनने के आसार बढ़ जाते हैं। इस समस्या के कारण का भी पता नहीं चलता।
मकान या प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में दिक्कत आना
आपने देखा होगा कि कि एक बहुत अच्छी प्रॉपर्टी, मकान, दुकान या जमीन का एक हिस्सा किन्ही कारणों से बिक नहीं पा रहा यदि कोई खरीदार मिलता भी है तो बात नहीं बनती। यदि कोई खरीदार मिल भी जाता है और सब कुछ हो जाता है तो अंतिम समय पर सौदा कैंसिल हो जाता है। इस तरह की स्थिति यदि लंबे समय से चली आ रही है तो यह मान लेना चाहिए कि इसके पीछे अवश्य ही कोई ऐसी कोई अतृप्त आत्मा है जिसका उस भूमि या जमीन के टुकड़े से कोई संबंध रहा हो।
संतान ना होना
मेडिकल रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य होने के बावजूद संतान सुख से वंचित है, हालांकि आपके पूर्वजों का इस से संबंध होना लाजमी नहीं है परंतु ऐसा होना बहुत हद तक संभव है जो भूमि किसी निसंतान व्यक्ति से खरीदी गई हो वह भूमि अपने नए मालिक को संतानहीन बना देती है।
उपरोक्त सभी प्रकार की घटनाएं या समस्याएं आप में से बहुत से लोगों ने अनुभव की होंगी। इसके निवारण के लिए लोग समय और पैसा नष्ट कर देते हैं परंतु समस्या का समाधान नहीं हो पाता। क्या पता इस लेख से ऐसे ही किसी पीड़ित व्यक्ति को कुछ प्रेरणा मिले इसलिए निवारण भी स्पष्ट कर रहा हूं।
पितृ दोष की शांति के उपाय
1👉 सामान्य उपायों में षोडश पिंड दान, सर्प पूजा, ब्राह्मण को गौ -दान, कन्या -दान, कुआं, बावड़ी, तालाब आदि बनवाना। मंदिर प्रांगण में पीपल, बड़(बरगद) आदि देव वृक्ष लगवाना एवं विष्णु मन्त्रों का जाप आदि करना, प्रेत श्राप को दूर करने के लिए श्रीमद्द्भागवत का पाठ करना चाहिए।
2👉 वेदों और पुराणों में पितरों की संतुष्टि के लिए मंत्र, स्तोत्र एवं सूक्तों का वर्णन है, जिसके नित्य पठन से किसी भी प्रकार की पितृ बाधा क्यों ना हो, शांत हो जाती है। अगर नित्य पठन संभव ना हो, तो कम से कम प्रत्येक माह की अमावस्या और आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या अर्थात पितृपक्ष में अवश्य करना चाहिए।
वैसे तो कुंडली में किस प्रकार का पितृ दोष है उस पितृ दोष के प्रकार के हिसाब से पितृदोष शांति करवाना अच्छा होता है।
3👉 भगवान भोलेनाथ की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष बैठ कर या घर में ही भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर निम्न मंत्र की एक माला नित्य जाप करने से समस्त प्रकार के पितृ- दोष संकट बाधा आदि शांत होकर शुभत्व की प्राप्ति होती है। मंत्र जाप प्रातः या सायंकाल कभी भी कर सकते हैं।
मंत्र : “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।
4👉 अमावस्या को पितरों के निमित्त पवित्रता पूर्वक बनाया गया भोजन तथा चावल बूरा, घी एवं एक रोटी गाय को खिलाने से पितृ दोष शांत होता है।
5👉 अपने माता -पिता, बुजुर्गों का सम्मान, सभी स्त्री कुल का आदर /सम्मान करने और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते रहने से पितर हमेशा प्रसन्न रहते हैं।
6👉 पितृ दोष जनित संतान कष्ट को दूर करने के लिए “हरिवंश पुराण ” का श्रवण करें या स्वयं नियमित रूप से पाठ करें।
7👉 प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती या सुन्दर काण्ड का पाठ करने से भी इस दोष में कमी आती है।
8👉 सूर्य पिता है अतः ताम्बे के लोटे में जल भर कर, उसमें लाल फूल, लाल चन्दन का चूरा, रोली आदि डाल कर सूर्य देव को अर्घ्य देकर ११ बार “ॐ घृणि सूर्याय नमः ” मंत्र का जाप करने से पितरों की प्रसन्नता एवं उनकी ऊर्ध्व गति होती है।
9👉 अमावस्या वाले दिन अवश्य अपने पूर्वजों के नाम दुग्ध, चीनी, सफ़ेद, कपडा, दक्षिणा आदि किसी मंदिर में अथवा किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए।
10👉 पितृ पक्ष में पीपल की परिक्रमा अवश्य करें अगर १०८ परिक्रमा लगाई जाएं, तो पितृ दोष अवश्य दूर होगा।
विशिष्ट उपाय :
1👉 किसी मंदिर के परिसर में पीपल अथवा बड़ का वृक्ष लगाएं और रोज़ उसमें जल डालें, उसकी देखभाल करें, जैसे-जैसे वृक्ष फलता -फूलता जाएगा, पितृ -दोष दूर होता जाएगा, क्योकि इन वृक्षों पर ही सारे देवी -देवता, इतर -योनियाँ ,पितर आदि निवास करते हैं।
2👉 यदि आपने किसी का हक छीना है, या किसी मजबूर व्यक्ति की धन संपत्ति का हरण किया है, तो उसका हक या संपत्ति उसको अवश्य लौटा दें।
3👉 पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति को किसी भी एक अमावस्या से लेकर दूसरी अमावस्या तक अर्थात एक माह तक किसी पीपल के वृक्ष के नीचे सूर्योदय काल में एक शुद्ध घी का दीपक लगाना चाहिए, ये क्रम टूटना नहीं चाहिए।
एक माह बीतने पर जो अमावस्या आये उस दिन एक प्रयोग और करें
इसके लिए किसी देसी गाय या दूध देने वाली गाय का थोडा सा गौ -मूत्र प्राप्त करें उसे थोड़े जल में मिलाकर इस जल को पीपल वृक्ष की जड़ों में डाल दें इसके बाद पीपल वृक्ष के नीचे ५ अगरबत्ती, एक नारियल और शुद्ध घी का दीपक लगाकर अपने पूर्वजों से श्रद्धापूर्वक अपने कल्याण की कामना करें और घर आकर उसी दिन दोपहर में कुछ गरीबों को भोजन करा दें ऐसा करने पर पितृ दोष शांत हो जायेगा।
4👉 घर में कुआं हो या पीने का पानी रखने की जगह हो, उस जगह की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें, क्योंके ये पितृ स्थान माना जाता है। इसके अलावा पशुओं के लिए पीने का पानी भरवाने तथा प्याऊ लगवाने अथवा आवारा कुत्तों को जलेबी खिलाने से भी पितृ दोष शांत होता है।
5 👉 अगर पितृ दोष के कारण अत्यधिक परेशानी हो, संतान हानि हो या संतान को कष्ट हो तो किसी शुभ समय अपने पितरों को प्रणाम कर उनसे प्रसन्न होने की प्रार्थना करें और अपने द्वारा जाने-अनजाने में किये गए अपराध / उपेक्षा के लिए क्षमा याचना करें, फिर घर अथवा शिवालय में पितृ गायत्री मंत्र का सवा लाख विधि से जाप कराएं जाप के उपरांत दशांश हवन के बाद संकल्प लें कि इसका पूर्ण फल पितरों को प्राप्त हो। ऐसा करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं, क्योंकि उनकी मुक्ति का मार्ग आपने प्रशस्त किया होता है।
6👉 पितृ दोष की शांति हेतु ये उपाय बहुत ही अनुभूत और अचूक फल देने वाला देखा गया है, वो ये कि- किसी गरीब की कन्या के विवाह में गुप्त रूप से अथवा प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग करना। (लेकिन ये सहयोग पूरे दिल से होना चाहिए, केवल दिखावे या अपनी बढ़ाई कराने के लिए नहीं )। इस से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं, क्योंकि इसके परिणाम स्वरुप मिलने वाले पुण्य फल से पितरों को बल और तेज़ मिलता है, जिस से वह ऊर्ध्व लोकों की ओर गति करते हुए पुण्य लोकों को प्राप्त होते है।
7👉 अगर किसी विशेष कामना को लेकर किसी परिजन की आत्मा पितृ दोष उत्पन्न करती है तो ऐसी स्थिति में मोह को त्याग कर उसकी सदगति के लिए “गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र ” का पाठ करना चाहिए।
8👉 पितृ दोष दूर करने का अत्यंत सरल उपाय: इसके लिए सम्बंधित व्यक्ति को अपने घर के वायव्य कोण (N -W )में नित्य सरसों का तेल में बराबर मात्रा में अगर का तेल मिलाकर दीपक पूरे पितृ पक्ष में नित्य लगाना चाहिए+दिया पीतल का हो तो ज्यादा अच्छा है, दीपक कम से कम 10 मिनट नित्य जलना आवश्यक है।
इन उपायों के अतिरिक्त वर्ष की प्रत्येक अमावस्या को दोपहर के समय गूगल की धूनी पूरे घर में सब जगह घुमाएं। शाम को आंध्र होने के बाद पितरों के निमित्त शुद्ध भोजन बनाकर एक दोने में सारी सामग्री रख कर किसी बबूल के वृक्ष अथवा पीपल या बड़ की जड़ में रख कर आ जाएं, पीछे मुड़कर न देखें। नित्य प्रति घर में देसी कपूर जलाया करें। ये कुछ ऐसे उपाय हैं, जो सरल भी हैं और प्रभावी भी, और हर कोई सरलता से इन्हें कर पितृ दोषों से मुक्ति पा सकता है। लेकिन किसी भी प्रयोग की सफलता आपकी पितरों के प्रति श्रद्धा के ऊपर निर्भर करती है।
पितृदोष निवारण के लिए करें विशेष उपाय (नारायणबलि_नागबलि)
अक्सर हम देखते हैं कि कई लोगों के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती। वे चाहे जितना भी समय और धन खर्च कर लें लेकिन काम सफल नहीं होता। ऐसे लोगों की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष होता है।
यह दोष पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता रहता है, जब तक कि इसका विधि-विधानपूर्वक निवारण न किया जाए। आने वाली पीढ़ीयों को भी कष्ट देता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। श्राद्ध पक्ष यही अवसर है जब पितृदोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दोष के निवारण के लिए शास्त्रों में नारायण बलि का विधान बताया गया है। इसी तरह नागबलि भी होती है।
क्या है नारायणबलि और नागबलि
नारायणबलि और नागबलि दोनों विधि मनुष्य की अपूर्ण इच्छाओं और अपूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिए की जाती है। इसलिए दोनों को काम्य कहा जाता है। नारायणबलि और नागबलि दो अलग-अलग विधियां हैं। नारायणबलि का मुख्य उद्देश्य पितृदोष निवारण करना है और नागबलि का उद्देश्य सर्प या नाग की हत्या के दोष का निवारण करना है। इनमें से कोई भी एक विधि करने से उद्देश्य पूरा नहीं होता इसलिए दोनों को एक साथ ही संपन्न करना पड़ता है।
इन कारणों से की जाती है नारायणबलि पूजा
जिस परिवार के किसी सदस्य या पूर्वज का ठीक प्रकार से अंतिम संस्कार, पिंडदान और तर्पण नहीं हुआ हो उनकी आगामी पीढि़यों में पितृदोष उत्पन्न होता है। ऐसे व्यक्तियों का संपूर्ण जीवन कष्टमय रहता है, जब तक कि पितरों के निमित्त नारायणबलि विधान न किया जाए। प्रेतयोनी से होने वाली पीड़ा दूर करने के लिए नारायणबलि की जाती है। परिवार के किसी सदस्य की आकस्मिक मृत्यु हुई हो। आत्महत्या, पानी में डूबने से, आग में जलने से, दुर्घटना में मृत्यु होने से ऐसा दोष उत्पन्न होता है।
क्यों की जाती है यह पूजा….?
शास्त्रों में पितृदोष निवारण के लिए नारायणबलि-नागबलि कर्म करने का विधान है। यह कर्म किस प्रकार और कौन कर सकता है इसकी पूर्ण जानकारी होना भी जरूरी है। यह कर्म प्रत्येक वह व्यक्ति कर सकता है जो अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता है। जिन जातकों के माता-पिता जीवित हैं वे भी यह विधान कर सकते हैं। संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि, कर्ज मुक्ति, कार्यों में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए यह कर्म पत्नी सहित करना चाहिए। यदि पत्नी जीवित न हो तो कुल के उद्धार के लिए पत्नी के बिना भी यह कर्म किया जा सकता है। यदि पत्नी गर्भवती हो तो गर्भ धारण से पांचवें महीने तक यह कर्म किया जा सकता है। घर में कोई भी मांगलिक कार्य हो तो ये कर्म एक साल तक नहीं किए जा सकते हैं। माता-पिता की मृत्यु होने पर भी एक साल तक यह कर्म करना निषिद्ध माना गया है।
कब नहीं की जा सकती है नारायणबलि नागबलि ?
नारायणबलि गुरु, शुक्र के अस्त होने पर नहीं किए जाने चाहिए, लेकिन प्रमुख ग्रंथ निर्णण सिंधु के मतानुसार इस कर्म के लिए केवल नक्षत्रों के गुण व दोष देखना ही उचित है। नारायणबलि कर्म के लिए धनिष्ठा पंचक और त्रिपाद नक्षत्र को निषिद्ध माना गया है। धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरण, शततारका, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती, इन साढ़े चार नक्षत्रों को धनिष्ठा पंचक कहा जाता है। कृतिका, पुनर्वसु, विशाखा, उत्तराषाढ़ा और उत्तराभाद्रपद ये छह नक्षत्र त्रिपाद नक्षत्र माने गए हैं। इनके अलावा सभी समय यह कर्म किया जा सकता है।
पितृपक्ष सर्वाधिक श्रेष्ठ समय
नारायणबलि- नागबलि के लिए पितृपक्ष सर्वाधिक श्रेष्ठ समय बताया गया है। इसमें किसी योग्य पुरोहित से समय निकलवाकर यह कर्म करवाना चाहिए। यह कर्म गंगा तट अथवा अन्य किसी नदी सरोवर के किनारे में भी संपन्न कराया जाता है। संपूर्ण पूजा तीन दिनों की होती है।
श्री पित्रलोक अधीश्वर अर्यमा पित्रराजाय नमः
जय श्री शिवा शिवम्
जय श्री हरि नारायण।
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RBI की मुनाफे वाली स्कीम कर देगी मालामाल
निवेश पर मिलेगा 7.15 फीसदी का गारंटीड रिटर्न
हर 6 महीने में Account में आएगा पैसा
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कारण विश्व में मजबूत से मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की हालत खराब हो गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों में लगातार कमी कर रहा है। फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FD) जैसे पारंपरिक निवेश विकल्पों से मुनाफा लगातार घटता जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए निवेश के विकल्प सीमित हो गए हैं।
कोरोना संकट के बीच बने खराब माहौल के बीच आरबीआई का फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स उन लोगों के लिए सुरक्षित निवेश विकल्प साबित हो सकता है, जो नियमित आय चाहते हैं। केंद्रीय बैंक ने 7.75 फीसदी फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट वाले बॉन्ड्स को बंद करने के बाद फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स पेश किया है। इसमें निवेश पर 7.15 फीसदी का गारंटीड रिटर्न मिलेगा। इसमें कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है। फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स में भारतीय मूल के विदेश में रहने वाले लोग या एनआरआई (NRI) निवेश नहीं कर सकते हैं।
कोई भी भारतीय नागरिक अभिभावक के तौर पर नाबालिग के नाम से भी बॉन्ड्स में निवेश कर सकता है। आप संयुक्त तौर पर भी बॉन्ड्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। आरबीआई के इस बॉन्ड में भारतीय नागरिक कम से कम 1,000 रुपए से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इस बॉन्ड में निवेश का लॉक-इन पीरियड 7 साल का है यानि आप इस अवधि तक पैसा नहीं निकाल सकते हैं।
आरबीआई के इस बॉन्ड पर छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान किया जाता है। इसका पहला भुगतान 1 जनवरी 2021 को होगा। ब्याज दरें हर छह महीने में तय की जाती हैं। ब्याज दरों में पहला बदलाव 1 जनवरी 2021 को किया जाएगा। अभी किए गए निवेश पर आपको 1 जनवरी 2021 को 7.15 फीसदी ब्याज प्राप्त होगा। आरबीआई के 7.75 फीसदी फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट बॉन्ड्स की तरह फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स के लिए मैच्योरिटी के समय Cumulative Interest हासिल करने का कोई विकल्प नहीं है।
फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स में इनकम टैक्स छूट के लाभ नहीं होगा। ये बॉन्ड से होने वाली आय पूरी तरह से Taxable होगी। इन बॉन्ड्स के ब्याज से होने वाली आय पर निवेशक को पूरा टैक्स भरना होगा।
ब्याज आय पर टीडीएस (TDS) भी काटा जाएगा। इन बॉन्ड्स के लिए किसी भी सरकारी बैंक या आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों के जरिये आवेदन कर सकते हैं। इन बॉन्ड्स के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं। इन बॉन्ड्स में 20,000 रुपए तक नकद निवेश किया जा सकता है। आरबीआई के बॉन्ड्स के लिए आवेदन करते समय आपको अपनी बैंक अकाउंट डिटेल्स देनी होंगी ताकि ब्याज सीधे आपके खाते में ट्रांसफर की जा सके।
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