

बिजनौर। प्रतिबंध के बावजूद बिजनौर में बेजुबान परिंदों को खुलेआम बेचा जा रहा है। गैरकानूनी होते हुए भी प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।
बिजनौर में बच्चे पक्षियों को बेच रहे हैं। खासतौर पर भीड़भाड़ वाले बाजारों और रेलवे क्रॉसिंग जैसे स्थानों पर। यह क्रम काफी समय से चल रहा है। गैरकानूनी होते हुए भी प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। नगरपालिका के सामने एक बच्चा पिजरों में पक्षी तोता प्रति जोड़ी तीन सौ रुपए में बेच रहा था। उसके पास पांच पिंजरों में आठ पक्षी थे। अचानक एक समाजसेवी महिला वहां पहुंची और सौदेबाजी कर आठ सौ रुपए में सभी पक्षी खरीद लिए। मौके पर मौजूद लोगों ने पूछा कि इन सबका क्या करेंगी? इस पर उनका कहना था कि इन बेजुबान परिंदों को कैद से आजाद करना है, बाग में इनको छोड़ना है। यह सुनकर वहां मौजूद लोगों ने उनके इस विचार की काफी सराहना की।
गौरतलब है कि वन्यजीव सरंक्षण अधिनियम 1972 की धारा-4 के तहत शेड्यूल में शामिल प्रजातियों को पिंजरे में कैद नहीं किया जा सकता और न ही उन्हें पाला जा सकता है। यदि कोई एेसा करता पाया जाता है तो शेड्यूल के अनुसार सजा का प्रावधान है।
देश भर में तोतों की करीब एक दर्जन प्रजातियां मौजूद हैं और सभी संरक्षित हैं। नियमानुसार तोतों को पालने के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी होती है, लेकिन उन्हें पिंजरे में बंद करने वाले यह अनुमति नहीं लेते हैं।
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