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UP Panchayat Election 2021: त्रिस्तरीय पंचायतों में वार्डों की आरक्षण नीति नियमावली जारी
लखनऊ। पंचायत चुनाव के लिए त्रिस्तरीय पंचायतों में वार्डों के आरक्षण लिए गुरुवार को नियमावली जारी कर दी गई है। इसके बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। नियमावली के अनुसार, पंचायतों में आरक्षण चक्रानुक्रम रीति से ही होगा लेकिन जहां तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, 2000, 2010 और वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जाएगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जाएंगी। इसी तरह पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायतें पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जाएंगी।

इस नियमावली के आधार पर ही अगले एक माह में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के वार्डों का आरक्षण निर्धारण होगा। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करके 30 अप्रैल तक पंचायतों के चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में अप्रैल माह में 58194 ग्राम पंचायतों, 731813 ग्राम पंचायत सदस्यों, 75855 क्षेत्र पंचायत सदस्यों, 3051 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद 826 ब्लाक प्रमुखों व 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन होगा।

इसके तहत अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायतों की एक तिहाई से न्यून (इससे कम न हो) जिला पंचायतें यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की स्त्रियों को आवंटित की जाएंगी। स्त्रियों के लिए आवंटित जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों को सम्मिलित करते हुए राज्य में जिला पंचायत के अध्यक्षों के पदों की कुल संख्या के एक तिहाई से अन्यून जिला पंचायत के अध्यक्षों के पदों को स्त्रियों को आवंटित किया जाएगा।

जिन जिला पंचायतों के प्रादेशिक क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या (जिसमें अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है) वे स्त्रियों को आवंटित की जाएंगी, लेकिन इस प्रकार की जहां तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, 2000, 2010 और वर्ष 2015 में स्त्रियों को आवंटित जिला पंचायतें स्त्रियों को आवंटित नहीं की जाएंगी।

नियमावली के तहत, पंचायतों के आगामी सामान्य निर्वाचन वर्ष 2021 के आरक्षण में चक्रानुक्रम लागू किया जाएगा। इसके फलस्वरूप पिछले सामान्य निर्वाचनों (वर्ष 1995, 2000, 2010 और वर्ष 2015) में आरक्षित वर्गों (अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों तथा स्त्रियों) के लिए जो जिला पंचायतें आरक्षित की गई थीं, उन्हें आगामी निर्वाचन में संबंधित आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया जाएगा बल्कि अवरोही क्रम में अगले स्टेज पर आने वाली जिला पंचायत से आरक्षण शुरू किया जाएगा।
वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली में 10वां संशोधन किया गया था। अब 11वां संशोधन किया गया है। इसके बाद प्रदेश के उन चार जिले गोंडा, शामली, मुरादाबाद व गौतमबुद्धनगर में ग्राम पंचायतों के निर्वाचन क्षेत्र का आरक्षण नए सिरे से नहीं होगा, जिनमें ग्राम पंचायतों का पुनर परिसीमन (पुनर्गठन) किया गया है। इनमें आरक्षण की कार्यवाही शेष 71 जिलों की तरह चक्रानुक्रम में ही होगी।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कैबिनेट बाइ सर्कुलेशन प्रस्ताव को मंजूरी देकर त्रिस्तरीय ग्रामीण पंचायतों की नियामावली में संशोधन कर आरक्षण व्यवस्था संबंधी आदेश जारी करने की अड़चन दूर कर दी थी। इससे से ग्राम पंचायतों व ग्राम पंचायत सदस्यों के चक्रानुक्रम आरक्षण की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है।

2015 में किया गया था 10वां संशोधन-
प्रदेश में वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली 1994 में 10वां संशोधन किया गया था। नियमावली का नियम-4 ग्राम प्रधानों व नियम-5 ग्राम पंचायत सदस्यों से संबंधित है। इसमें एक नया प्रावधान जोड़ा गया था- अगर सामान्य निर्वाचन के पूर्व परीसीमन (सामान्य पुनर्गठन) की कार्यवाही जनसंख्या वृद्धि अथवा अन्य कारणों से की जाती है तो उस चुनाव में पिछले आरक्षणों को शून्य मानते हुए आरक्षण नए सिरे से किया जाएगा।

2011 की जनगणना का हवाला देते हुए इस नियम के आधार पर 2015 के चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के पदों के लिए नए सिरे से आरक्षण की व्यवस्था की गई। मगर, चार जिलों गोंडा, शामली, मुरादाबाद व गौतमबुद्धनगर में सामान्य पुनर्गठन 2015 में पूरा नहीं हो सका। इसके बावजूद नए सिरे से आरक्षण की कार्यवाही की गई थी। इन चार जिलों में सामान्य पुनर्गठन की कार्यवाही नवंबर-दिसंबर, 2020 में हुई। ऐसे में 2015 में नियमावली में जोड़े गए प्रावधान को यदि समाप्त नहीं किया जाता तो इन चार जिलों में नए सिरे से पंचायतों के आरक्षण की कार्यवाही करनी पड़ती, जो बाकी 71 जिलों की व्यवस्था से भिन्न होगी। एक तरह से सभी जिलों में चक्रानुक्रम आरक्षण समान रूप से आगे नहीं बढ़ पाता। इस विसंगति को दूर करने के लिए सरकार ने यूपी पंचायतराज (स्थानों व पदों का आरक्षण व आवंटन) नियमावली 1994 में 11वां संशोधन कर पुनर्गठन के बाद नए सिरे से आरक्षण का प्रावधान समाप्त कर दिया है।

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