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नगीना क्षेत्र में परवान चढ़ रही है रोड नहीं तो वोट नहीं की मंशा
जर्जर सड़कों पर चलना हुआ दुश्वार
अधिकारी या जनप्रतिनिधि नहीं देते इस ओर कोई ध्यान

बिजनौर। नगीना क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की उपेक्षा ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। इसके चलते नगीना क्षेत्र के दर्जनभर ग्रामों के मुख्य मार्ग जर्जर अवस्था में होने के कारण ग्रामीणों को वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। अधिकारी या जनप्रतिनिधि इस ओर कोई ध्यान नहीं दे दे रहे हैं।
नगीना क्षेत्र के ग्राम पखनपुर से पुरैनी तक, ज्ञानपुर से पखनपुर तक लालवाला से सेदखेड़ी तक, नगीना से बढ़ापुर रोड, नगीना से ग्राम मठरी मार्ग, बूढ़ावाला रोड ,काला खेड़ी रोड, अल्हेदादपुर रोड, किरतपुर रोड, नैनपुरा सराय रोड, कस्बा कोटरा से शाहलीपुर कोटरा मार्ग, समेत अनेक ग्रामों के लिंक मार्ग एवं मुख्य मार्ग पिछले कई वर्षों से क्षतिग्रस्त एवं जर्जर हालात में हैं। इन पर वाहन चलाना तो दूर की बात, पैदल चलना भी दूभर हो रहा है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के हालात से अधिकारी और जनप्रतिनिधि अंजान बने हुए हैं।

तहसील दिवस से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी लगाई गुहार-ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने तहसील दिवस से लेकर जिला मुख्यालय तक एवं मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी अनेक बार शिकायत की है लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी की इस ओर दया दृष्टि नहीं हो सकी है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को भी बार-बार अवगत कराया जा चुका है, पर उनके कानों पर भी जूं तक नहीं रेंगी। इस कारण ग्रामीणों का सड़कों पर चलना दूभर हो गया है।

…आखिर कहां गया सरकारी धन-
ग्रामीणों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गांव के विकास और निर्माण कार्यों के लिए ग्राम प्रधानों को तमाम धन दिया, लेकिन वह धन भी सड़कों के निर्माण कार्यों पर खर्च नहीं किया गया। सवाल फिर वही उठता है कि लाखों रुपए की ग्रांट फिर कहां जाकर गुम हो गई। किसी भी अधिकारी ने कोई जांच पड़ताल नहीं की। यदि ग्रामों के प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी चाहते तो सरकार से आई लाखों रुपए की ग्रांट से ग्रामों की सड़कों का निर्माण कराकर हालात सुधारे जा सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही हाल क्षेत्र के सांसद और विधायकों का रहा है कि चुनाव के दौरान तो बड़े-बड़े वायदे करके वोट ले लेते हैं फिर उसके बाद गांव की ओर आकर देखते भी नहीं है।
उपरोक्त ग्रामों के ग्रामीण इस बार मन बना रहे हैं कि सड़कों का निर्माण नहीं तो किसी को वोट नहीं। इसी को लेकर ग्रामीण लामबंद होते जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के चुनाव सिर पर हैं, अब देखना है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग कौन सी रणनीति अपनाकर उन पर अमल करते हैं। बहरहाल अपने-अपने ग्रामों की प्रमुख सड़क और हाईवे के लिंक रोड में गहरे-गहरे गड्ढे होने से जर्जर पड़ी सड़कों के हालात देखकर ग्रामीण मायूस और आक्रोशित हो रहे हैं । ग्रामों के लोगों ने जिलाधिकारी से सड़कों का निर्माण कराए जाने की मांग की है।

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