..आंसुओं से भरी होंगी आंखें और हमें मुस्कुराना पड़ेगा
-बज्म-ए-जिगर ने की शेरी नशिस्त आयोजित
मशहूर शायर की पत्नी की स्मृति में किया आयोजन

बिजनौर। बज्म ए जिगर नजीबाबाद की ओर से मशहूर शायर महेंद्र अश्क की पत्नी वेदकांती की स्मृति में एक शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। शायरों ने अपने शेरों के माध्यम से दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बज्म ए जिगर नजीबाबाद की ओर से मोहल्ला रम्पुरा स्थित शायर मौसूफ अहमद वासिफ के निवास पर किए गए आयोजन में शायरों ने मातृशक्ति को समर्पित कलाम पेश कर दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शेरी नशिस्त का आगाज़ अकरम जलालाबादी ने नात ए रसूल ए पाक पेश कर किया। उन्होंने कहा कि कोई भी विर्द नहीं इस कलाम से अच्छा, खुदा के बाद मौहम्मद के नाम से अच्छा। नौशाद अहमद शाद ने कहा कि मेरी मां ने झूला, झुलाया है मुझको, आंचल में अपने छुपाया हैं मुझ को। साजिद खां कोटद्वार ने कहा कि तुम अगर दीनदार हो जाओ, बा खुदा बा वकार हो जाओ। सुहेल शहाब शम्सी ने ने कहा कि क्या खबर के तुम से बिछड कर, खुद को यूं आजमाना पड़ेगा, आंसूओ से भरी होगी आंखे और हमें मुस्कुराना पड़ेगा। शायर शकील अहमद वफ़ा ने कहा कि मां ने फाको से जिस को पाला है, उस का दुनियां में बोलबाला है। डा. साबिर अहमद भागूवाला ने कहा कि टाल ना कोई कर सके विधि का यही विधान, भरपाई होगी नहीं जितना है नुकसान। कार्यक्रम संचालक शादाब जफर शादाब ने कहा कि मां के जैसा नहीं जमाने में, मां की अजमत पे क्या कहा जाये, बूढ़ी मां जिन घरों में बैठी हैं उनको जन्नत समझ लिया जाये। तैय्यब जमाल ने कहा कि तुम्हारी इनायत कहां तक ना पहुंची, जरूरत जिसे थी वहां तक ना पहुंची। उवैद अहमद ने कहा कि नजऱ आते हैं वो खफा से, मर्ज अच्छा ना होगा दवा से। सैय्यद अहमद ने कहा कि किसे खबर थी के चाहत में मारे जायेगे, ये भौरे फूलों की हसरत में मारे जायेगे। अकरम जलालाबादीने कहा कि तेरी याद से ही रोशन मेरी शम्मे जिन्दगी है, ये ही मेरी जिन्दगी है, ये ही मेरी बंदगी है। तसलीम मंडावरी ने कहा कि एक दिन राहे वफा में मैं फना हो जाऊंगा, मुझ को पत्थर कहने वालों आईना हो जाऊंगा। नौशाद अहमद नौशाद ने कहा कि वो हर्फ ए हक से जऱा जो मुकर गया होता, दिल से सबके कभी का उतर गया होता। मौसूफ अहमद वासिफ ने कहा कि काम ऐसा ये कर गई कांती, बस खिजा में बिखर गई कांती, वो तो जिन्दा हैं अपनी उल्फत से, कौन कहता है मर गई कांती। महेंद्र अश्क ने कहा कि उड़ा दिये जो हवाओ के दोश पर रखकर, वो तिनके जोड़ के रखते तो घर ना हो जाता। मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे जहीर अहमद खलिश ने कहा कि परख कर देखिए हर जाविये से, अगर मैं नेक हूं तो नेक कहिये।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विपिन त्यागी, नितीश त्यागी, नौशाद अहमद नौशाद रहे। शेरी नशिस्त में एम डी खान, नसीम अहमद, अबरार सलमानी आदि मौजूद रहे। नशिस्त के अंत में बज्म ए जिगर नजीबाबाद की ओर से वेद कांती त्यागी के निधन पर शायरो ने खिराज ए अकीदत पेश की।
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