लखनऊ। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायतों के आरक्षण की स्थिति बदलने से संभावित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। पंचायतों में आरक्षण की सूची जारी होने के बाद संभावित प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ने की तैयारियां तेज कर दी थीं। चुनाव लड़ने का मन बना चुके लोगों को अब नई आरक्षण सूची का इंतजार करना होगा।

सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2015 के शासनादेश के मुताबिक आरक्षण सूची जारी करने के आदेश के बाद अब जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदल जाएगा। जो सीटें अब तक सामान्य श्रेणी में थीं अब वह आरक्षित श्रेणी में जाएंगी। जो सीटें अब तक एससीएसटी और ओबीसी में आरक्षित रही हैं वह अब सामान्य श्रेणी में जा सकती हैं। जिला प्रशासन ने जैसे ही पंचायतों की आरक्षण सूची जारी की तो लोगों ने चुनाव लड़ने की तैयारियां तेज कर दीं थी। जिला पंचायत के वार्डों में चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों ने अपने आवेदन भी पार्टियों के जिलाध्यक्ष को दे दिए थे। संभावित प्रत्याशियों ने सोशल नेटवर्क पर जिला पंचायत के वार्डों के लिए अपनी दावेदारी भी प्रदर्शित कर समर्थन मांगना शुरू भी कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनके मंसूबों पर तुषारापात हो सकता है। जिला पंचायत के हर वार्ड पर आरक्षण की स्थित बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भाजपा व सपा में संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी अधिक
जिला पंचायत के सभी वार्डों में चुनाव लड़ने के लिए सबसे अधिक दावेदारी भाजपा और सपा में है। आरक्षण की सूची जारी होने के बाद प्रत्याशियों ने नेताओं को अपने आवदेन देना शुरू कर दिए थे। बसपा और कांग्रेस भी पंचायत चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगी, जिसके लिए दोनों ही पार्टियों ने पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज कर दी थीं।
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