नीलगिरी का पेड़ काफी लंबा और पतला होता है। इसकी पत्तियों से प्राप्त होने वाले तेल का उपयोग औषधि और अन्य रूप से किया जाता है। नीलगिरी की पत्तियां लंबी और नुकीली होती हैं, जिनकी सतह पर गांठ पाई जाती है और इन्हीं गाठों में तेल संचित रहता है। नीलगिरी का वानस्पतिक नाम यूकेलिप्टस ग्लोब्यूलस है। परफ्यूम इंडस्ट्री में नीलगिरी का तेल खूब इस्तेमाल होता है। शरीर की मालिश के लिए नीलगिरी का तेल उपयोग में लाया जाए तो गम्भीर सूजन तथा बदन में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है, वैसे आदिवासी मानते हैं कि नीलगिरी का तेल जितना पुराना होता जाता है इसका असर और भी बढ़ता जाता है। इसका तेल जुकाम, पुरानी खांसी से पीड़ित रोगी के लिए फायदेमंद होता है। इसे छिड़ककर सुंघाने से लाभ मिलता है। नीलगिरी का तेल एक सूती कपड़े में लगा दिया जाए और सर्दी और खाँसी होने पर सूंघा जाए तो आराम मिलता है। गले में दर्द होने पर भी नीलगिरी के तेल का उपयोग किया जाता है। माइग्रेन होने की दशा में इसके तेल को माथा में लगाएं तो आराम मिलता है। एक बाल्टी पानी में दो चम्मच लहसुन का रस और 2 बूंद नीलगिरी का तेल डाल दीजिए और फिर घर में पोछा करें, अगले 5-6 घंटों तक मच्छरों का अता पता नहीं रहेगा, इसी पानी को आंगन में छिड़क दीजिए, मच्छर दूर भाग जाएंगे।
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