
जिस कारोबार को फाइनल GSTIN नंबर नहीं मिला है, उन्हें प्रोविजनल जीएसटी नंबर इस्तेमाल करना चाहिए.
नई दिल्ली। देश में एक जुलाई 2019 से ही गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू है। बिल के मामले में शॉपिंग करने वाले लोगों के लिए कर प्रावधान में यह बदलाव बहुत अच्छा नहीं रहा। वजह यह है कि कई बार ग्राहकों को गलत या फर्जी बिल पकड़ा दिए जाते हैं।
योग्य नहीं फिर भी फाड़ रहे बिल
सभी दुकान के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है और इस हिसाब से वे आपसे जीएसटी चार्ज भी नहीं कर सकते.म, जिस बिल में जीएसटी IN नंबर है, उसमें सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी का अलग ब्रेक अप होना जरूरी है।
पुराने फॉर्मेट में जीएसटी वसूलना
यह भी देखा गया है कि बहुत से कारोबारी और दुकानदार पुरानी रसीद से ही जीएसटी वसूल रहे हैं। इसमें वैट या टिन नंबर लिखा है, जो कि गलत है। ऐसे मामलों के जानकार कहते हैं कि, ‘जीएसटी नंबर लेना और उसका ही बिल देना जरूरी हो है। सभी कारोबार को तुरंत जीएसटी पर जाना चाहिए और बिल में जीएसटी IN का प्रयोग करना चाहिए। इसमें सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी का अलग उल्लेख होना चाहिए।’
प्रोविजनल जीएसटी नंबर चलेगा?
बहुत से दुकानदार प्रोविजनल जीएसटी नंबर के साथ बिल देते हैं और कहते हैं कि अगर सरकार ने उनका जीएसटी IN मंजूर किया तब वे उस तरह का बिल देंगे, यह गलत चलन है। बिल में जीएसटी IN नंबर मेंशन किये बिना ग्राहक से यह वसूलना गलत है। जीएसटी नंबर वेरीफाय नहीं होने का बहाना भी गलत है।, ‘जिस कारोबार को फाइनल जीएसटी IN नंबर नहीं मिला है, उन्हें प्रोविजनल जीएसटी नंबर इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही उन्हें समय पर रिटर्न फाइल करना चाहिए और दूसरे नियम फ़ॉलो करना चाहिए. प्रोविजनल जीएसटी नंबर ही जीएसटी IN में बदल जाता है।’
ग्राहक को पता होना चाहिए कि दुकानदार या कारोबारी आपको सही बिल दे रहा है या नहीं!

अगर जीएसटी नंबर गलत है तो आपको यह संदेश दिखाई देगा:
आपने जो जीएसटी IN/UIN नंबर डाला है वह गलत है. कृपया सही जीएसटी IN/UIN नंबर डालें।
अगर जीएसटी IN/UIN नंबर सही है तो आपको उसकी यह स्थिति दिखाई देगी:
कारोबार का नाम, राज्य, रजिस्ट्रेशन की तारीख, कारोबार का प्रकार-निजी या पब्लिक लिमिटेड कंपनी, पूर्ण स्वामित्व या पार्टनरशिप कंपनी

वेरिफिकेशन पेंडिंग होना
अगर आपको साईट यह दिखा रही है कि इस जीएसटी IN/UIN का वेरिफिकेशन पेंडिंग है, तब भी यह सही है। इस प्रोविजनल आईडी है जो कारोबार को जारी किया गया है।
जीएसटी IN/UIN का स्ट्रक्चर
- पहले दो अंक स्टेट कोड के लिए होते हैं। हर राज्य के लिए कोड अलग है जैसे महाराष्ट्र का 27 और दिल्ली का 07 है।
- अगले 10 अंक कारोबार मालिक या दुकान का पैन नंबर हैं।
- 13 वां अंक किसी राज्य में कारोबार में रजिस्ट्रेशन की संख्या के हिसाब से जारी किया जाता है।
- 14वां अंक डिफॉल्ट तरीके से z रखा गया है।
- आखिरी अंक चेक कोड के लिए दिया गया है। यह कोई अंक या अक्षर हो सकता है।

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