
तस्वीर में दिख रही लड़की बेलारूस देश की “क्रिस्टीना सिमनौस्काया” है और यह टोक्यो ओलंपिक में 200 मीटर दौड़ में भाग लेने गई थी !
बेलारूस के राष्ट्रपति एलेग्जेंडर लुकाशेंको बीते 20 साल से अवैध तरीके से सत्ता में बने हुए हैं! यह इतने सहिष्णु हैं कि इनके खिलाफ सोशल मीडिया पर हल्का सा भी कटाक्ष करने पर यह उस पर्सन को जेल की हवा खिला देते हैं। इनके बड़े बेटे का नाम निकोलाई लुकाशेंको है और यह बेलारूस ओलंपिक कमेटी में वरिष्ठ है।
बेलारूस के खिलाड़ी जब टोक्यो ओलंपिक के लिए जा रहे थे तब निकोलाई ने खिलाड़ियों को यह कहते हुए चेतावनी दी थी देश में तभी आना जब मेडल मिल जाए, वरना टूरिस्ट बनके जा रहे हो आते वक्त कोई और देश देख लेना अपने लिए।
क्रिस्टीना 200 मीटर दौड़ में भाग लेने टोक्यो ओलंपिक में आई थी लेकिन ऐन मौके पर इन को कहा गया तुम अब 400 मीटर की दौड़ में भाग लोगी। क्रिस्टीना ने मना कर दिया कि मुझसे बिना पूछे यह फैसला किसने किया ? जवाब में आया तुम्हें हर हाल में दौड़ना है। क्रिस्टीना ने टोक्यो ओलंपिक को क्विट कर दिया, तथा जापान सरकार से आग्रह कि मैं लौटकर अपने देश बेलारूस नहीं जाऊंगी क्योंकि वहां मुझे जान का खतरा है वहां मुझे जेल में डाल दिया जाएगा।
जापान ने इन्हें ऑस्ट्रिया भेजा और वहां से हृमेटेरियन वीजा पाकर पोलैंड चली गई अतः पोलैंड ने इन्हें अपने यहां शरण दी है। क्रिस्टीना के पति भी बेलारूस से भागकर यूक्रेन में शरण ले चुके हैं।
ये होता है डर और इसको कहते हैं तानाशाही !
एक हमारे देश के एथलीट हैं जिन्हें टोक्यो ओलंपिक में हार मिली है उन्हे लोगों ने जीतने वाले खिलाड़ियों की तुलना में अधिक स्नेह और प्यार दिया है। इस देश का प्रधानमंत्री हर एक खिलाड़ी को व्यक्तिगत फोन करके शुभकामनाएं दे रहा है तसल्ली दे रहा है और उनका हौसला बढ़ा रहा है चाहे वह खिलाड़ी हारे हो या जीते हो। लोग इसे पॉलिटिकल करेक्ट होने के लिए पीएम का राजनीतिक स्टंट कह सकते हैं लेकिन यह स्टंट भी है तो यह उन खिलाड़ियों के लिए एक सुखद अनुभव और हौसला प्रदान करेगा कि हमारी हार पर भी देश के पीएम ने हमारा हौसला बढ़ाया है ! (साभार fb)
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