
विश्व सी-ओ-पीडी दिवस याद रखना जरूरी, क्योंकि सवाल है सांसों का-डॉक्टर तजीन आरिफ।
बिजनौर। नवम्बर माह में विश्व सी-ओ-पीडी दिवस याद रखना जरूरी है क्योंकि सवाल सांसों का है। न चाहते हुए भी दुनियाभर में करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो अपने हिस्से की सांस भी पूरी तरह नहीं ले पाते हैं।
डॉक्टर तजीन आरिफ ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल नवंबर माह के तीसरे बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान करना स्वच्छ इंधन का प्रयोग न करना, धूल व प्रदूषण ऐसे कारण हैं, जो सी-ओ-पीडी के मरीजों की संख्या का बढ़ा रहे हैं। इसे कुछ सावधानियों के साथ रोका जा कसता है। जैसे- धूम्रपान न करना, स्वच्छ वातारण में रहना, व्यायाम करना धूल-धुआं प्रदूषण से बच्चों को बचाना, मास्क का इस्तेमाल करना, नियमित रूप से जांच कराएं आशंका होने पर सम्बन्धित चिकित्सक से मिलें, दवाईयों का नियमित इस्तेमाल करें। भारत में देखा जाये तो 17 से 20 करोड़ सी-ओ-पीडी के मरीज हैं। विश्वभर में सी-ओ-पीडी के कारण हर साल लगभग 3 करोड़ मौत हो जाती हैं। सी-ओ-पीडी के मरीजों को ठंड के मौसम में अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता है। वातावरण में मौजूद वायरस एवं हवा से फैलने वाले इनफैक्शन सी-ओ-पीडी के मरीजों को प्रभावित करते हैं। अलग-अलग लोगों में सांस के दौरों के कारण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। इसलिए आवश्यक बात यही है कि आप अपनी स्थिति को समझें और अपना इलाज सही रूप से करें वरना यह सी-ओ-पीडी में बदल सकता है।
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