
कोरोना वायरस का प्रकोप फिर से बढ़ने लगा है। सारे विश्व में तनाव व्याप्त है। पिछले वर्ष अज्ञानी व्यक्तियों की अपेक्षा ज्ञानी लोगों की मृत्यु दर अधिक रही। उसका कारण मानसिक विकार (साइकोलॉजीकल डिसऑर्डर) रहा। दिमाग ने सोचा, कानों ने सुना, मानसिक चिंता से पेट गड़बड़ाया और लीवर; लीवर से फेफड़े और फेफड़ों से हृदय और ह्रदय से नर्वस सिस्टम। नर्वस सिस्टम कमजोर होने से उसकी जीवनी शक्ति कमजोर गई तथा मन की स्थिति तथा तन की स्तिथि दोनों खराब हो गई, जिसके कारण श्वास लेने में दिक्कत और भूख की स्तिथि खराब हो गई और लोगों को असाध्य बीमारी ने घेर लिया। सोचने मात्र से सर चकराना, उल्टी आना, जी घबराना, घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ जाना, रक्तचाप कम हो जाना, सांस लेने में कमी होना, सांस लेने की शक्ति न होना; जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं। आप विचार करें कि ज्ञानियों की अपेक्षा अज्ञानी लोग कम बीमार हुए; इसका कारण जैसा कि उसे मानसिक रोग हुआ ही नहीं।
असाध्य रोग का कारण क्या है? बहुत ज्यादा सोचना, ऐसे समाचार देखना, सोचने मात्र से तन की स्तिथि एवं मन की स्तिथि दोनों खराब हो जाती है, जिसके कारण जीवनी शक्ति कमजोर पड़ जाती है और शरीर के आंतरिक अंग काम करना बंद कर देते हैं।
समाधान
सरकारी नियमों का पालन करें
अफवाएं न फैलाएं
गुनगुना पानी का प्रयोग करें
हरी सब्जियों, फलों का प्रयोग करें
कोल्ड कंमप्रेस करे
जीवनी शक्ति का विकास करें
डॉ नरेंद्र सिंह
प्रांत प्रमुख
आरोग्य भारती
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