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मधुमेह (डायबिटीज) साध्य या असाध्य (भाग- 1)

मधुमेह अर्थात शुगर (डायबिटीज) एक ऐसी बीमारी का नाम है जो वर्तमान समय में केवल भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में एक महामारी का रूप ले चुकी है। दिन-प्रतिदिन, साल दर साल इसके मरीजों की संख्या में इज़ाफा होता जा रहा है। आयुष मंत्रालय के ताज़ा आकड़ों के अनुसार केवल भारत में ही मधुमेह से ग्रसित मरीजों की संख्या 40% से 50% प्रतिशत के बीच पहुँच चुकी है। इसके अतिरिक्त उन मरीजों की संख्या अलग है जिन्हें यह पता ही नहीं कि वे आंशिक रूप से मधुमेह से पीड़ित हो चुके हैं। उन्हें पता तब चलता है, जब बीमारी स्थायी रूप से उनके शरीर में घर बना चुकी होती है। यह मनुष्य के शरीर में एक चोर की तरह प्रवेश करके उसके शरीर को अंदर से ऐसे खोखला कर देती है, जैसे दीमक लकड़ी को कर देती है। इसलिए यह बीमारी दुनिया में “साइलेंट किलर के नाम से भी जानी जाती है। यह बीमारी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। (टाइप -1 और टाइप – 2) टाइप 2 में रोगी दवाइयों द्वारा इसकी चिकित्सा कराता है जबकि टाइप-1 में रोगी इन्सुलिन पर निर्भर रहता है। रोगी के शरीर में इसका स्तर करने के लिए लैब में दो तरह के टैस्ट किये जाते हैं। पहला खाली पेट, दूसरा खाने के बाद दो घंटे के अंदर। सामान्य रूप से एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में शुगर अर्थात ग्लूकोज़ का स्तर खाली पेट (70 से 110 एमजी / डीएल के बीच और खाने के बाद 70 से 160 एमजी / डीएल के बीच में होना चाहिए। यदि इस स्तर से कम या अधिक होता है तो उसे शुगर का कम या अधिक होना माना जाता है।

यह रोग होता क्यों है ? यदि इस पर चर्चा की जाये तो इसके पीछे अधिक मात्रा में मीठा का सेवन करना नहीं है बल्कि मुख्य रूप से हमारी दिनचर्या व खान-पान है या फिर आज की व्यस्त जीवनशैली में रहने वाला मानसिक तनाव। भिन्न – भिन्न खाद्य पदार्थ व पेय पदार्थ जैसे जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, मांस इत्यादि हानिकारक चीजों का अत्यधिक सेवन करना, विलासिता पूर्ण जीवन जीना, शारीरिक श्रम का सर्वथा अभाव आदि कुछ ऐसे अनगिनत कारण हैं जो इस बीमारी को जन्म देते हैं ।

अब योग हैं तो उपचार भी है। ऐसा नहीं है कि यह बीमारी असाध्य है हाँ इतना जरूर कहूँगा कि ऐलोपैथी में इसका स्थायी उपचार नहीं है। मरीज को जीवनभर एक या दो गोलियों का सेवन करना पड़ता है। होम्योपैथी से भी इसे नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन सटीक उपचार आयुर्वेद में ही संभव है लेकिन वो भी तब जब किसी कुशल आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख मे पूर्ण परहेज़ करते हुए अपने खान-पान की आदतों में बदलाव किया जाए।

लक्षण : शुगर रोगी को मुख्य रूप से निम्न लक्षण दिखायी देते हैं जैसे- चिड़चिड़ापन, थकान, वजन कम या ज्यादा होना, अधिक प्यास लगना, पेशाब जाना, धुंधला दिखाई देना, भूख अधिक लगना, धाव का जल्दी ना भरना, बार-2 शरीर में इंफैक्शन होना आदि ।

उपचार : शुगर के मरीज को चिकित्सा के साथ – साथ चोकर युक्त आटे का सेवन करना चाहिए। हरी शाक-सब्जियों का सेवन करना चाहिए। सुबह-शाम खाली पेट आधा चम्मच जामुन पाउडर का सेवन हल्के गर्म पानी से करें। थोड़ा सा मेथी दाना रात में कप पानी में भिगोकर रखें सुबह खाली पेट दाने खाकर ऊपर से वही पानी पी लें। इसके अतिरिक्त कुशल चिकित्सक के मार्गदर्शन में अंजीर, गुड़मार बूटी, करेला जूस, करी पत्ता, आँवला, नीम दालचीनी, तुलसी पत्र, ऐलोवेरा, लहसुन, अदरक जैतून तेल पुदीना फ्ती आदि से निर्मित आयुर्वेदिक नुस्खों का लाभ प्राप्त करना चाहिए ।

योग द्वारा उपचार : शुगर को नियंत्रित करने में योग की भी मुख्य भूमिका होती है, जिनमें नीचे लिखी योग क्रियाओं के का अभ्यास करें ।

(कपाल भाँति) (फोटो) जमीन पर कोई भी आसन बिछाकर सुखासन में सीधे बैठ जायें। श्वांस को सामान्य करें। फिर बलपूर्वक श्वास को नासिका से बाहर फेंक दे और उसी समय पेट को अधिकतम अन्दर की तरफ खींच लें। फिर धीरे-2 श्वांस को अन्दर आने दें व पेट को बाहर जाने दें। बार-2 यह क्रिया करें।

(उड्डीयान बंध) ( फोटो) पूर्व की भांति सीधे बैठकर श्वांस को एक ही बार में नासिका से बाहर फेंक कर पेट को अधिकतम कमर की तरफ लगाकर रोक दें। बार-2 इस क्रिया को करें ।

(मंडूकासन) (फोटो) ‘वज्रासन में बैठकर दोनों हाथों की मुठियाँ बनायें। अंगूठा अंदर रखें। फिर दोनों हाथों की मुट्ठी नाभी के दोनों ओर लगाकर श्वांस बाहर निकालते हुए निगाह सामने रखते हुए झुक जायें, यह 3 से 5 बार करें।

(अर्द्धमत्स्येन्द्रासन) ( फोटो) दंडासन में बैठकर बायें पैर की ऐड़ी को नितम्ब के पास लगायें। दायें पैर को मोड़ कर बायें घुटने के ऊपर से बाहर की तरफ जमीन पर रखें। बायें हाथ को दायें घुटने के ऊपर से निकालकर बाहर की तरफ दायें पैर का पंजा पकड़ लें। दायें हाथ को पीछे की तरफ घुमाकर पीठ पर रखें व गर्दन घुमाकर दायीं तरफ देखें। इसी तरह पैर बदलकर अभ्यास करें।

नोट: योग का अभ्यास किसी कुशल योग गुरू के मार्गदर्शन में करें अन्यथा हानि भी हो सकती है।

  • प्रस्तुति – श्री कुमार श्री

योगाचार्य । वैदिक चिकित्सक (पूर्व योग / वैदिक चिकित्सक) (एम० जे० बी० वाई० पी० सी० (महाराष्ट्र)

विशेष : यदि आप शुगर के रोगी हैं, अंग्रेजी या देशी दवाई छोड़ना चाहते हैं या फिर किसी भी बीमारी से पीड़ित हैं आराम नहीं मिलता है तो नीचे लिखें ई-मेल आई० डी० पर समस्या लिख भेजें। श्रीजी एक्सप्रेस के माध्यम से हम आपका उत्तर देगें। अथवा कॉल करें – 8865029549

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