अतिक्रमण हटाने के नाम नहीं होने देंगे शोषण: चेयरमैन हाजी अख्तर जलील

नगरपालिका की बोर्ड की मीटिंग का हुआ आयोजन
बिजनौर। स्योहारा नगरपालिका की बोर्ड की एक मीटिंग का आयोजन मीटिंग कक्ष में हुआ, जिसकी अध्यक्षता चेयरमैन हाजी अख़्तर जलील व इओ एपी पांडे ने संयुक्त रूप से की।मीटिंग में गत बोर्ड की मीटिंग की पुष्टि के अलावा नगरपालिका द्वारा चल रहे अतिक्रमण अभियान के अंतर्गत भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाने, स्ट्रीट वेंडरों को स्थान मुहैया कराए जाने, पालिका द्वारा अतिक्रमण मुक्त कराए गए सरकारी भूमि पर पालिका द्वारा कब्ज़ा किये जाने, नगर में सड़कों की मरम्मत, निर्माण, गड्ढों, चैनल मरमत, निर्माण का कार्य, भवन के मानचित्रों की स्वीकृति व अन्य बिंदुओं पर विचार अध्यक्ष की अनुमति से रखे गए।


इस मौके पर चेयरमैन हाजी अख्तर जलील ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर किसी दुकानदार के सामने से कोई भी पटरा तोड़ा नहीं जाएगा। यदि कोई कर्मचारी इस मामले में दोषी पाया गया तो उस पर कार्यवाही की जायेगी।साथ ही इस कार्यवाही में किसी तरह का भेदभाव भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


इओ एपी पांडे ने भी कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर किसी भी दुकानदार का शोषण नहीं किया जाएगा, यदि किसी कर्मचारी की शिकायत मिली तो उसको बक्शा नहीं जाएगा।
इस मौके पर लिपिक देवेन्द्र सिंह, मुकुल विश्नोई, मो. शान के अलावा सभासद इकरामुद्दीन, नसीम कुरेशी, अकरम, मो. यूनुस, यासीन, जयशंकर शर्मा, सनी रस्तोगी, संजीव भारद्वाज, बदर खान, इरफान व कई महिला सभासद भी मौजूद रहीं।

सीएससी सेंटर संचालक लूट का खुलासा, चार गिरफ्तार

बिजनौर। नूरपुर क्षेत्र में 6 जून को सीएससी सेंटर संचालक के साथ हुई लूट का खुलासा करते हुए पुलिस ने चार लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक फरार है। पुलिस ने उनके पास से लूटा गया सामान व अवैध हथियार भी बरामद किए हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक देहात राम अर्ज ने सोमवार दोपहर पुलिस लाइन सभाकक्ष में प्रेस वार्ता करते हुए बताया कि रविवार देर रात नूरपुर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गोहावर नहर के पुल के पास जंगल में लूट की योजना बना रहे मोहित उर्फ रेंचो पुत्र संजय, गणेश दत्त शर्मा उर्फ जानू पुत्र दीपक शर्मा, जीशान उर्फ फैजान उर्फ टुल्ली पुत्र शौकीन निवासीगण ग्राम बिशनपुर धुंधली थाना स्योहोरा तथा कार्तिक उर्फ कशिश पुत्र रवि कुमार निवासी ग्राम खानपुर बिल्लौच थाना नूरपुर को मौके से गिरफ्तार किया। आरोप है कि खुद को घिरता देख इन्होंने पुलिस पार्टी पर फायरिंग भी की। पुलिस ने इनके पास से दो तमंचे, चाकू व कारतूस भी बरामद किए। साथ ही 35400 रूपए, लैपटॉप, थंब मशीन व दो मोबाइल भी इनके पास से मिले। पुलिस पूछताछ में इन्होंने खुलासा किया कि 6 जून को इन्होंने अपने एक अन्य साथी विशाल उर्फ शानू के साथ मिलकर जन सेवा केंद्र संचालक से एक लाख की नकदी, लैपटॉप व थंब मशीन आदि लूटे थे। पुलिस ने चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी। एएसपी देहात ने बताया कि गिरफ्तार चारों अभियुक्तों का अपराधिक इतिहास है। इन पर नूरपुर थाने में कई कई मुकदमे दर्ज है।

रोडवेज में 13 वरिष्ठ अधिकारियों के ट्रांसफर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम प्रशासन ने 13 क्षेत्रीय प्रबंधकों, सेवा प्रबंधकों और एआरएम के ट्रांसफर कर दिए हैं. जिन अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल किया गया है. उनमें लखनऊ के कैसरबाग डिपो में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के पद पर तैनात विमल राजन भी शामिल हैं. विमल को कैसरबाग डिपो से प्रमोशन देकर अयोध्या का प्रभारी आरएम बना दिया गया है.

आगरा रीजन में तैनात रहे क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज पुंडीर को वहां से हटाकर परिवहन निगम मुख्यालय में तैनात कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि उन्हें 30 जून को रिटायर होने वाले प्रधान प्रबंधक अनघ मिश्रा की जगह पर प्रधान प्रबंधक के पद पर तैनाती दी जाएगी. लखनऊ परिक्षेत्र के कैसरबाग डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन को अयोध्या परिक्षेत्र का प्रभारी आरएम बना दिया गया है. उनके स्थान पर फिलहाल अभी कैसरबाग डिपो में किसी भी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक की तैनाती नहीं की गई है. इसके अलावा प्रभारी आरएम बनने वालों में राजीव शर्मा और अपराजित श्रीवास्तव भी शामिल हैं. आरएम चित्रकूट धाम अशोक कुमार को आगरा का आरएम बनाया गया है.

चित्रकूट धाम बांदा में तैनात रहे सेवा प्रबंधक केपी सिंह को मुख्यालय भेजा गया है. हरदोई में तैनात क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज त्रिवेदी को प्रयागराज आरएम की जिम्मेदारी दी गई है. एआरएम चंदौली डिपो मुकेश कुमार को सेवा प्रबंधक प्रयागराज बनाया गया है. सहारनपुर के सेवा प्रबंधक राहुल चौधरी को गाजियाबाद का सेवा प्रबंधक बनाया गया है.

नोएडा में तैनात रहे गौरव पांडेय को सहारनपुर सेवा प्रबंधक के पद पर तैनाती दी गई है. मुख्यालय पर तैनात एआरएम अपराजित श्रीवास्तव को हरदोई का क्षेत्रीय प्रबंधक बनाया गया है. राजीव कुमार शर्मा जो अभी तक मुख्यालय पर एआरएम के पद पर तैनात थे उन्हें चित्रकूट धाम बांदा का आरएम बना दिया गया है. अलीगढ़ में प्रभारी आरएम के पद पर तैनात मोहम्मद परवेज खां को मुरादाबाद का प्रभारी आरएम बनाया गया है. इसके अलावा गाजियाबाद के सेवा प्रबंधक मनोज कुमार सिंह को नोएडा का सेवा प्रबंधक बनाया गया है. सेवा प्रबंधक राजीव आनंद को प्रयागराज से कानपुर कार्यशाला का सेवा प्रबंधक बनाया गया है.

जल्द ही जारी होगी एक और तबादला सूची
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एक ही डिपो में पिछले तीन साल से तैनात सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों और यातायात अधीक्षकों के भी ट्रांसफर किए जाएंगे. यह ट्रांसफर एआरएम और टीएस से विकल्प लेकर तैयार हो रहे हैं. ज्यादातर अधिकारियों को मनचाहे स्थान पर तैनाती मिलने की उम्मीद है.

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान रजत जयंती वर्ष समारोह का वार्षिक कैलेंडर

लीजिए, हाजिर है..

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान रजत जयंती वर्ष समारोह का वार्षिक कैलेंडर

∆ अब से 8 मई 2023 तक प्रतिमाह कम से कम एक कार्यक्रम की योजना आप सबके सहयोग और स्नेह से प्रतिफलित होनी तय..

∆ आचार्य द्विवेदी की धर्मपत्नी द्वारा बनवाए गए महावीर चौरे पर 25 जून को शाम 4:00 बजे से सुंदरकांड के पाठ के साथ रजत जयंती वर्ष का शुभारंभ हो चुका है
और
∆ 9 जुलाई शनिवार नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार से कार्यक्रमों की श्रंखला का आगाज

∆ दिसंबर 2022 तक के सभी आयोजनों की तारीखें आपके कैलेंडर में,

आगे के महीनों की तारीखें तय होते ही नई सूचना आपके व्हाट्सएप पर होगी,

समिति के सभी सदस्यों, समस्त सहयोगियों और शुभचिंतकों को हृदय से धन्यवाद!!!

आपका
गौरव अवस्थी रायबरेली

साधू के भेष में मिला 24 साल से फरार इनामी डकैत

बीहड़ के लालाराम गैंग का इनामी डकैत छेदा सिंह

बीहड़ के लालाराम गैंग का इनामी डकैत छेदा सिंह 24 साल बाद गिरफ्तार। चित्रकूट के एक आश्रम में छिपा हुआ था साधु के वेश में। आरोपी पर घोषित था इनाम 50 हजार।

औरेया पुलिस ने लालाराम गैंग के एक ऐसे डकैत को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्‍त की है, जो 24 साल से फरार था। आरोपी पर कई थानों में अपहरण व लूट के मामले दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपी पर 50 हजार का इनाम रखा था। यह डकैत चित्रकूट के एक आश्रम में वह साधु बनकर रह गया था।

लखनऊ। बुंदेलखंड के बीहड़ में कभी एकछत्र राज करने वाले दस्यु सरगना लालाराम के गिरोह का सक्रिय सदस्य 24 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा है। अदालत से इस डकैत पर 50 हजार का इनाम भी घोषित था। यह पुलिस से बचने के लिए चित्रकूट के एक आश्रम में साधु बनकर रह रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी औरेया के अपने मूल गांव आया हुआ था, यहीं से पुलिस ने गुप्‍त सूचना के आधार पर इस डकैत की पहचान की। पुलिस ने इसके पास से फर्जी राशन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र व पैन कार्ड भी बरामद किया है। इस डकैत पर कानपुर देहात के थाना राजपुर, सिकंदरा, जालौन के थाना रामपुरा, औरैया के थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए औरैया एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि, गिरफ्तार आरोपी की पहचान 24 साल से फरार इनामी डकैत भासौन गांव निवासी छेदा सिंह उर्फ छिद्दा के रूप में की गई है। एसपी ने बताया कि, मुखबिर की सूचना के आधार पर सीओ अजीतमल प्रदीप कुमार के नेतृत्व में टीम ने रविवार को गांव में दबिश दी थी। इस दौरान यह फरार डकैत अपने घर पर साधू के भेष में मिला। पुलिस ने जब आरोपी की तलाशी ली तो उसके पास से बृजमोहन दास पुत्र राम बालक दास निवासी रघुराज नगर चित्रकूट सतना मध्य प्रदेश के नाम से वोटर आईडी, राशन कार्ड, फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बरामद हुआ।

कई अपहरण तथा लूट की घटनाओं में रहा था शामिल-

एसपी अभिषेक वर्मा ने डकैत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, यह आरोपी लालाराम गैंग का सक्रिय सदस्य रह चुका है। बीहड़ में रहकर इसने फिरौती के लिए कई अपहरण तथा लूट की घटनाओं को अंजाम दिया है। इस आरोपी ने वर्ष 1998 में गैंग के साथ अयाना के जसवंतपुर गांव से चार लोगों का अपहरण कर लिया था, बाद में फिरौती देने पर इन लोगों को छोड़ा गया था। इस दौरान पुलिस के साथ इन डकैतों की मुठभेड़ भी हुई थी। इसी मामले में कोर्ट ने छेदा सिंह को वांछित घोषित कर रखा था। पुलिस ने बताया कि, धीरे-धीरे जब पुलिस का शिकंजा कसने पर गैंग समाप्त होने लगा तो यह अपना नाम-पता बदलकर चित्रकूट में साधु बनकर रहने लगा था।

छेदा सिंह पर 2 दर्जन से अधिक मुकदमे
छेदा सिंह के ऊपर गंभीर धाराओं में 24 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसका आपराधिक इतिहास…
1. मु.अ.सं 13/97 धारा 364 IPC थाना राजपुर जनपद कानपुर देहात.
2. मु.अ.सं 19/97 धारा 364 IPC थाना राजपुर जनपद कानपुर देहात.
3. मु.अ.सं 21/97 धारा 147/148/149/307IPC थाना राजपुर जनपद कानपुर देहात.
4. मु.अ.सं 155/97 धारा 364 IPC थाना सिकन्दरा जनपद कानपुर देहात.
5. मु.अ.सं 297/97 धारा 364/216IPC एवं 10/12 द0प्र0क्षे0थाना रमपुरा जनपद जालौन.
6. मु.अ.सं 298/97 धारा 3/25 आर्म्स एक्ट थाना रमपुरा जनपद जालौन.
7. मु.अ.सं 068/98 धारा 147/148/149/307 IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
8. मु.अ.सं 49/98 धारा 364IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
9. मु.अ.सं 25/98 धारा 395/398IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
10. मु.अ.सं 86/98 धारा 147/148/149/307 IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
11. मु.अ.सं 052/98 धारा 147/148/149/307 IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
12. मु.अ.सं 97/98 धारा 147/148/149/307 IPC एवं 10/12 द.प्र.क्षे.थाना अयाना जनपद औरैया.
13. मु.अ.सं085/98 धारा 323/325/504IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
14. मु.अ.सं084/99 धारा 3(1) गैंगेस्टर एक्ट थाना अयाना जनपद औरैया.
15 मु.अ.सं0144/99 धारा 147/148/149/307 IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
16. मु.अ.सं 089/97 धारा 364IPC थाना अयाना जनपद औरैया.
17. मु.अ.सं 07/99 3 यूपी गुण्डा एक्ट थाना अयाना जनपद औरैया.
18. मु.अ.सं 0683/98 धारा 364IPC थाना अयाना फिरोजाबाद जनपद औरैया.
19. मु.अ.सं 0997/98 धारा 364IPC थाना रौन जनपद भिण्ड म.प्र..
20. मु.अ.सं 07/2000 धारा 364IPC थाना अयाना सट्टी जनपद का. देहात.
21. मु.अ.सं 013/2000 धारा 147/148/149/307 IPC थाना सट्टी जनपद का. देहात.

सम्मान बचाओ महापंचायत के लिए अड़े किसान

हर हाल में होगी किसान सम्मान बचाओ महापंचायत

पुलिस प्रशासन पर किसानों को डराने का आरोप 

बिजनौर। जिले में बिजली और पुलिस व राजस्व अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ किए जा रहे उत्पीड़न व तानाशाही के साथ किसान के साथ की गई मारपीट के खिलाफ भाकियू 28 जून को ग्राम जीतपुरा खरख में किसान सम्मान बचाओ महापंचायत का बिगुल फूंक दिया हैं तो वहीं  पुलिस प्रशासन ने जिले के किसानों पर भाकियू का साथ छोड़ने का दवाब बनाकर पीड़ित किसान से ही पंचायत में होने संबंधित लिखित में ले लिया फिर भी भाकियू ने निश्चित समय व निश्चित स्थान पर ही किसान सम्मान बचाओ महापंचायत करने की घोषणा करते हुए मैदान में मंच और टेंट लगवाने के लिए जायजा लिया।

बनाई महापंचायत की रणनीति-
रविवार को भाकियू ने किसानों पर महापंचायत न कराने के लिए पीड़ित किसानों पर पुलिस के बढ़ रहे उत्पीड़न को देखते हुए गन्ना समिति में प्रातः 11 बजे पूरे जिले से भाकियू की जिला, मंडल, व प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के सभी पदाधिकारियों ने महापंचायत की रणनीति बनाई उसके बाद सभी भाकियू पदाधिकारियों ने महापंचायत स्थल पर पहुंचकर मैदान का जायजा लिया और ग्राम जीतपुरा खरख में ग्रामवासियों की मीटिंग ली, ग्रामवासियों ने भाकियू को महापंचायत में पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया। भाकियू जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने कहा कि बाबा टिकैत की भाकियू ने पंचायत करने के लिए कभी परमिशन नहीं ली है  और न ही कभी परमिशन ली जाएगी।

इमरजेंसी लगा रही पुलिस: कुलदीप सिंह –
जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने जिले के किसानों से महापंचायत में पहुंचने का आह्वान करते हुए कहा कि पुलिस जिले में इमरजेंसी लगाकर किसानों की पंचायत को रोकने की बात करते हुए मुकदमे लिखने को डरा रही है। पुलिस को इसका जवाब जिले का किसान 28 जून को ग्राम जीतपुरा खरख में होने वाली किसान सम्मान बचाओ महापंचायत में हजारों की संख्या में किसान आयेगा तो पुलिस सभी पर मुकदमा लिख लेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के मसीहा भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत की पंचायत को रोकने की कोई ताकत नहीं बनी है।

पहले ही दे दी थी चेतावनी-
ज्ञात हो कि ग्राम जीतपुरा खरख में विद्युत कर्मियों के आधी रात किसानों के घरों में घुसने को लेके हुई मारपीट में पुलिस के 3 किसानों को एक तरफा कार्यवाही कर जेल भेजने से भाकियू पिछले एक सप्ताह से आंदोलनरत हैं और भाकियू के इस संबंध में 28 जून को किसान सम्मान बचाओ महापंचायत करने की घोषणा करने से मामला तूल पकड़ गया है। रही सही कसर ग्राम हंसना जट के एक किसान को एक लाख का कर्ज़ जमा न करने पर अमीन द्वारा कर्जदार किसान की भतीजी की शादी के समारोह में ही मारपीट कर बेइज्जती करने से क्षुब्ध किसान की जहर खाकर मौत हो जाने व तहसीलदार सदर द्वारा एक किसान को अपने ऑफिस में बुलाकर की गई मारपीट की सूचना मिली तो भाकियू पदाधिकारियों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन शुरू कर दिया था।  डीएम व एसपी की मौजूदगी में किसानों से हुए समझौते पर भाकियू ने 3 दिन मे किसानों की सभी समस्याओं के समाधान करने व पुलिस द्वारा झूठे मुकदमो की जांच न होने पर 28 जून को होने वाली किसान सम्मान बचाओ महापंचायत में भाकियू सुप्रीमो की अध्यक्षता में कठोर निर्णय लेने की चेतावनी देकर शाम धरना खत्म किया था। भाकियू जिला अध्यक्ष चौधरी कुलदीप सिंह ने जिला प्रशासन पर किसानों को डराने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। महापंचायत निश्चित टाइम और निश्चित स्थान पर ही होगी और प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए भाकियू की महापंचायत को कमजोर करना चाहता हैं जिसका खुद जवाब देने के लिए जिले का किसान तैयार बैठा है और भाकियू द्वारा जिले में 100 गाड़ियों पर माइक लगाकर प्रचार करने की पदाधिकारियों को जिमीदारी दी गई और 200 भाकियू कार्यकर्ताओं की महापंचायत के लिए मंच और टेंट लगवाने की जिम्मेदारी भी दी।
इस अवसर पर प्रदेश महासचिव ठाकुर रामौतार सिंह, प्रांतीय नेता बाबूराम तोमर, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, होशियार सिंह, डालचंद प्रधान, ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मदपुर देवमल डॉ विजय चौधरी, ब्लॉक महासचिव पंकज सहरावत, तहसील अध्यक्ष कोमन सिंह, युवा तहसील अध्यक्ष सरदार मनप्रीत सिंह, जितेंद्र पहलवान, सतपाल चौधरी, छतर सिंह सिकेट्री, दिनेश कुमार, नरदेव सिंह, धर्मेंद्र कुमार, मुनिदेव सिंह, रविशेखर तोमर, नीटू मौर्य आदि ने महापंचायत की सफलता के लिए जिले के किसानों का एक दुसरे से खुद प्रचार करके आने का आह्वान किया।

आम महोत्सव-2022 का ‘लोगो’ लांच

प्रमुख सचिव उद्यान ने किया आम महोत्सव-2022 का ‘लोगो’ लांच

आम महोत्सव का उद्देश्य किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाना एवं जागरूकता पैदा करना है

चयनित प्रविष्टियाँ को समापन समारोह के दिन किया जायेगा सम्मानित-श्री राजेश कुमार सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री राजेश कुमार सिंह ने आज लोक भवन स्थित मीडिया सेन्टर में लखनऊ आम महोत्सव-2022 का लोगो लांच करते हुए बताया कि यह महोत्सव 04 जुलाई से 07 जुलाई तक अवध शिल्पग्राम, लखनऊ में पर्यटन विभाग, सूचना और जनसम्पर्क विभाग और 20 से अधिक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मंत्रालय और विभागों के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा इन फलों से बनने वाले उप उत्पादों को बनाने की दिशा में और बेहतर प्रयास किया जायेगा। आम महोत्सव में आध्यात्मिक सत्र के साथ बच्चों के लिए कार्यशालाए एवं असीमित आम खाने प्रतियोगिताएं होंगी, तथा आम कार्निवाल के माहौल में चार चांद लगाने के लिए खेल के स्टॉल भी लगाए जायेंगे। प्रमुख रसोइया आम व्यंजनों का प्रदर्शन करेंगे तथा फोटोग्राफर, छायाकार और ब्लागर भी बढ़ चढ़ कर इसमें हिस्सा ले सकते हैं और सोशल मीडिया पर अपनी रचनात्मक कलाओं के साथ पोस्ट कर सकते हैं। चयनित प्रविष्टियाँ को 07 जुलाई 2022 को आम महोत्सव समापन समारोह में सम्मानित किया जायेगा।


श्री आर0के0 सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विश्व में आमों की उच्चतम उत्पादकता (17 मीट्रिक प्रति हेक्टेयर) के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ को आम क्लस्टर के रूप में घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य आम की उत्पादकता को बढ़ाने के साथ ही किसानों की आय को बढ़ाना है। इस महोत्सव के माध्यम से किसानों को मार्केटिंग के प्रति जागरूक करना भी है। इसी के दृष्टिगत विभिन्न विभागों एवं कंपनियों को इस महोत्सव में आमंत्रित किया गया है और उनके बेहतर सुझावों को विभाग द्वारा अपनाने का प्रयास किया जायेगा।


प्रमुख सचिव उद्यान ने लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर आम महोत्सव का लुफ्त उठाएं और लगाये गये आम विभिन्न प्रजातियों अवगत हों। प्रेसवार्ता के अंत में आम महोत्सव से जुड़े विषय पर एक डॉक्यूमेन्टरी भी दिखायी गयी।
प्रेसवार्ता के दौरान निदेशक उद्यान डॉ0 आर.के. तोमर एवं संयुक्त निदेशक उद्यान श्री बी.पी. द्विवेदी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

गजब: बिना नौकरी किये ईओ ने निकाल लिया 6 माह का वेतन!

बिना नौकरी किये ईओ ने निकाला 6 माह का वेतन जिलाधिकारी को दिया गया शिकायती पत्र। नगर पंचायत झालू का मामला।

बिजनौर। बिना नौकरी किये छह महीने का वेतन निकालने का मामला प्रकाश में आया है। मामला नगर पंचायत झालू के अधिशासी अधिकारी का है। इस मामले में नगर निवासी एक व्यक्ति द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई है।

बताया गया है कि नगर पंचायत झालू के अधिशासी अधिकारी प्रेमचन्द पूर्व में जनपद रामपुर की नगर पंचायत शाहबाद में तैनात थे। इनका शासन द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2021 को स्थानान्तरण जनपद बिजनौर की नगर पंचायत झालू में हो गया था। बताया गया है कि इनके द्वारा नगर पंचायत झालू में अपनी योगदान आख्या दिनांक 08 जनवरी 2022 को दी गयी। इस प्रकार 6 माह तक इनके द्वारा सर्विस नहीं की गयी। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2022 में नगर पंचायत झालू के अध्यक्ष शहजाद अहमद की सांठगाठ से अधिशासी अधिकारी प्रेमचन्द ने सर्विस से बाहर रहे 6 माह का वेतन नगर पंचायत झालू से आहरित कर लिया। इसी प्रकार पूर्व में तैनात अधिशासी अधिकारी धर्मदेव व अध्यक्ष शहजाद अहमद ने आपस में सांठगाठ कर तमाम फर्जी भुगतान निकाल लिए गए,जो आडिटर के द्वारा आपत्तियों में प्रदर्शित किये गए। आपत्तियों के निस्तारण अभी तक नहीं किए गए हैं। कस्बा झालू बिजनौर के मोहल्ला चौधरियान निवासी संजीव राणा पुत्र करन सिंह ने जिलाधिकारी को दिये शिकायती पत्र में अनुरोध किया है कि उपरोक्त घोर अनियमितता व शासकीय धनराशि के दुरूपयोग की जांच कराकर तत्काल प्रभावी कार्यवाही करें।

शहजाद अहमद अध्यक्ष नगर पंचायत झालू

वहीं अध्यक्ष शहजाद अहमद ने बताया कि यह बात सही है कि अधिशाषी अधिकारी ने छह माह बाद ड्यूटी जॉइन की थी, लेकिन वह मेडिकल लीव पर थे, लिहाजा उक्त अवधि के वेतन का आहरण नियम विरुद्ध नहीं है।

शिक्षक समस्याओं को लेकर बैठक में की गई चर्चा

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ बिजनौर की बैठक। शिक्षक समस्याओं को लेकर बैठक में की गई चर्चा।

बिजनौर। धामपुर में बीआरसी कार्यालय पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ बिजनौर की बैठक में शिक्षकों की दर्जनों समस्याओं पर चर्चा की गई। बैठक में सी.सी.एल, शिक्षकों की प्रमोशन अंतर्जनपदीय एवं जिले के अंदर स्थानांतरण, पुरानी पेंशन, संघ का चुनाव आदि समस्याओं को शिक्षकों ने रखा। जिला अध्यक्ष नागेश कुमार ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा शिक्षकों कि सभी समस्याओं को शासन स्तर रखकर समस्याओं का निदान किया जाएगा।

बैठक को जिला उपाध्यक्ष लोकेंद्र त्यागी, पवित्र चौहान, जिला मीडिया प्रभारी विपिन शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष इंद्रवीर नागर, धर्मेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, देवेंद्र कुमार, पवन कुमार, यशवीर चौहान, गिरीश कुमार, कुलदीप चौधरी, पवन कुमार, यशवीर चौहान, गिरीश कुमार, कुलदीप चौधरी, पवन चौहान, अरविंद चौधरी एवं प्रशांत सिंह, सुतेद्र सिंह, मोहम्मद सलमानी, भूपेंद्र कुमार, नितिन चौहान, मोहम्मद साजिद, नवनीत आर्य, पूनम सिंह, अरुण सिंह आदि उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नागेश कुमार ने की तथा संचालन धर्मेंद्र कुमार एवं लोकेंद्र त्यागी ने किया।

बिजनौर में 25 दिन से बंद है मीट कारोबार; एसपी व डीएम से मिले कारोबारी

बिजनौर। जनपद में पिछले 25 दिन से मीट कारोबार बंद है। इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से की गई है। मीट कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि बिना किसी वाजिब आदेश के उन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस कारण उनके सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। डीएम, एसपी ने उनकी समस्याओं को सुन कर निदान का भरोसा दिलाया है। जज

स्वस्थ मानव संपदा का होना अत्यन्त आवश्यक: कमिश्नर

आज मीडिया ग्रुप से Reporter and Anchor Mohd. Danish और बिजनौर से – आज मीडिया ग्रुप के इलेक्ट्रॉनिक चैनल से सतेंद्र सिंह की रिपोर्ट –

बिजनौर। जनपद बिजनौर में आठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन नेहरू स्टेडियम में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि मण्डलायुक्त मुरादाबाद, पूर्व सांसद व जिलाधिकारी ने दीप प्रज्जवलन कर किया। मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि आज योग दिवस पूरे विश्व मे मनाया जा रहा है, योग भारत की धरती से पूरे विश्व को एक बहुत बडी देन है, गंगा बैराज घाट पर मां गंगा को दूध व पुष्प अर्पित कर मां गंगा की आरती की गयी, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों व आमजन ने योगा में प्रतिभाग किया। मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी मानव संपदा होती है, आज योग दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दक्ष मानव संपदा है तो बेहतर है, लेकिन उसके साथ-साथ स्वस्थ मानव संपदा का होना अत्यन्त आवश्यक है। मनुष्य का शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है, शारीरिक स्वास्थय के साथ-साथ मन का स्वस्थ होना भी आवश्यक है, योग के माध्यम से मानसिक स्वास्थय व शारीरिक स्वास्थय दोनों को ठीक रखा जा सकता है।

वहीं इस अवसर पर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थय की कुंजी है, उन्होंने आमजन से योग अपनाने की अपील की, योग जीवन को स्वस्थ व निरोग रखने मे सहायक होता है। योग जीवन को स्वस्थ व निरोग रखने में सहायक होता है, नेहरू स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रशांत महर्षि ने योग सिखाया और भारती गौड व विनोद गोस्वामी का सहयोग रहा।

वहीं गंगा बैराज घाट पर आयोजित कार्यक्रम में योग शिक्षक तिलकराम ने योगा सिखाया। इस अवसर पर पूर्व सांसद भारतेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक डा0 धर्मवीर सिंह, जिला वन अधिकारी डा० अनिल पटेल, मुख्य विकास अधिकारी के0पी0 सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, पीडी डी0आर0डी०ए० ज्ञानेश्वर तिवारी सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी, क्रीडा भारती के सदस्य व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

गांवों का भ्रमण कर DM ने जाना जनता का हाल


जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा दूरस्थ ग्रामों का भ्रमण कर ग्रामवासियों की सुनी गईं समस्याएं, विभागीय अधिकारियों को उक्त ग्रामों में शासकीय योजनाओं से संतृप्त करने के लिए कैम्पों का आयोजन कर उन्हें लाभान्वित करने तथा उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार निस्तारण करने के दिए निर्देश

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने ग्राम तेलीपाड़ा, मोटाढाक, रामपुर चाठा सहित विभिन्न ग्रामों का निरीक्षण करते हुए स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुना और प्राथामिकता के आधार पर उनके निराकरण के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह, उप जिलाधिकारी के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।


निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी श्री मिश्रा सर्वप्रथम ग्राम तेलीपुरा पहुंचे और वहां पर ग्रामवासियों की समस्याओं को सुना। इस अवसर पर ग्रामवासियों द्वारा बताया गया कि गांव में विद्युत रोस्टर का पता न होने के कारण मालूम नहीं होता कि बिजली के आने-जाने का समय किया है, उक्त संबंध में शेड्यूल से अवगत कराने और हाई टेनशन विद्युत लाईन को हटाने के लिए अनुरोध किया गया, जिस पर जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता विद्युत को निर्देश दिए कि ग्राम के मुख्य स्थान पर विद्युत रोस्टर को प्रदर्शित कराएं और गांव के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन विद्युत लाईन को हटाना सुनिश्चित करें। ग्रामवासियों ने इस अवसर पर जिलाधिकारी से आवारा पशुओं की समस्या का निदान कराने, लिंक रोड बनवाने तथा गांव में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए पाईप पेयजल योजना के अंतर्गत पानी की टंकी बनवाने की मांग भी की। इस पर उन्होंने आवारा पशुओं को पशु आश्रय स्थल में पहुंचाने के लिए उपजिलाधिकारी तथा अधिशासी अभियंता जल निगम को गांव में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए पाईप लाइन योजना से आच्छादित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर ग्रामवासियों द्वारा शमशान घाट विकसित करने की भी मांग की गई।


तदुपरांत ग्राम मथुरापुर मोर पहुंचे जिलाधिकारी श्री मिश्रा को ग्रामवासियों द्वारा बताया गया कि गांव के ऊपर 11 हजार पावर की विद्युत लाईन गुजरने से हर समय किसी भी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है, यदि केबिल लाईन का प्रयोग किया जाए तो इस समस्या का स्थायी समाधान सम्भव हो सकता है। इस पर उन्होंने अधिशासी अभियंता को उक्त सम्बन्ध में तत्काल आवश्यक करते हुए समस्या के समाधान करने के निर्देश दिए।

ग्राम चंदनपुरा के भ्रमण के दौरान ग्रामवासियों ने गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र की स्थापना तथा डेढ़ किमी लंबाई के संपर्क निर्माण की मांग की। इस पर अधिशासी अभियंता लोनिवि द्वारा बताया कि उक्त सड़के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है और अनुमति प्राप्त होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा। युवाओं के लिए खेल के मेदान की मांग करने पर उन्होंने उप जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि ग्राम समाज की भूमि का चिन्हिकरण कर ग्राम के युवा/युवतियों के लिए खेल के मेदान का निर्माण कराएं।


ग्राम मोटाढाक के निरीक्षण के दौरान ग्रामवासियों द्वारा ग्राम को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए तटबंध बनाने तथा ट्यूबवेल लगवाने की मांग की गई, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा सिंचाई विभाग के अधिकारियों को उक्त सम्बन्ध में तटबांध बनाने के लिए मौके का स्थलीय निरीक्षण करने तथा सिंचाई के लिए एक ट्यूबवेल लगाने के निर्देश दिए गए।

ग्राम रामपुर चाठा में गंगा द्वारा कटान रोकने के लिए अधिशासी अभियंता अफ़ज़लगढ़ सिंचाई खण्ड को निर्देश दिए कि उक्त समस्या के स्थायी निराकरण के लिए परियोजना बना कर शासन को प्रेषित करें और तत्काल अस्थाई रूप से कटान को रोकने के लिए आवश्यक कार्यवाही अमल में लाएं। सड़क निर्माण की मांग पर उन्होंने अधिशासी अभियंता लोनिवि को निर्देश दिए कि संबंधित सड़क के निर्माण के लिए प्रस्ताव पास कराने तथा सोलर पैनल द्वारा विद्युत सुविधा के अलावा विद्युत की लाइन से ग्राम को आच्छादित करने की मांग पर उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारी को उक्त संबंध में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।


जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने विद्युत, सड़क, सिंचाई तथा अन्य जन कल्याणकारी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि उक्त ग्रामों सहित अन्य दूरस्थ ग्रामों में ग्रामवासियों को शासकीय योजनाओं से संतृप्त करने के लिए कैम्पों का आयोजन कराएं और उन्हें लाभान्वित करना सुनिश्चित करें।

जिले को पॉलीथिन एवं प्रदूषण मुक्त बनाने को आगे आएं एनजीओ


जिले को सुन्दर, आकर्षक और पॉलीथिन एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आकर कार्य करने का आह्वान, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जिला प्रशासन द्वारा उनको आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का दिया आश्वासन।

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कलक्ट्रेट सभागार में एनजीओ के पदाधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि जिले को सुन्दर, आकर्षक और पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए आगे आएं। जिला प्रशासन द्वारा उनको आवश्यक सहयोग और सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़कों के किनारे अथवा ख़ाली सार्वजनिक भूमि, तालाबों के तटों तथा पार्काें में पौधे रोपित कराएं। इसके लिए उन्हें आवश्यकता के अनुसार पौध तथा उसकी सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड उपलब्ध कराएं जाएंगें। उन्होंने निर्देश दिए कि तालाबों और पार्काें के सौंदर्यकरण के क्षेत्र में कार्य करें। जिलाधिकारी श्री मिश्रा ने ”नमो फाउण्डेशन“ नामक स्वयंसेवी संस्था के सेक्रेट्री सुशील कुमार राजपूत को निर्देशित करते हुए कहा कि सौंदर्यकरण के साथ ही जिले को प्रदूषण मुक्त बनाने में भी संस्था को सहायोग उपलब्ध कराने के लिए आगे लाएं।


इस पर अवसर विधायक चांदपुर स्वामी ओमवेश, मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, पिछड़ा कल्याण विभाग के अधिकारियों सहित अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

आज है विश्व संगीत दिवस

शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जिसे संगीत पसंद ना हो। संगीत ऐसी चीज है, जो लोगों के दिल और दिमाग पर गहरा प्रभाव डालती है। इसी वजह से दुनिया भर के गायकों और संगीतकारों को म्यूजिक के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मान देने के उद्देश्य से आज (21 जून) विश्व भर में ‘वर्ल्ड म्यूजिक डे’ सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन कई देशों में संगीत प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।

हर साल 21 जून को मनाए जाने वाले विश्व संगीत दिवस की एक खास थीम होती है। संगीत दिवस 2022 की थीम ‘चौराहों पर संगीत’ (Music At Intersections) है। इसी थीम पर इस साल के सभी कार्यक्रम आयोजित होंगे। संगीत दिवस का उद्देश्य दुनियाभर के गायकों और संगीतकारों का संगीत के क्षेत्र में योगदान को सम्मान देना है।

फ्रांस में 1982 में जब पहला संगीत दिवस मनाया गया तो इसे 32 से ज्यादा देशों का समर्थन मिला। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। उसके बाद से अब भारत समेत इटली, ग्रीस, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, पेरू, ब्राजील, इक्वाडोर, मैक्सिको, कनाडा, जापान, चीन, मलेशिया और दुनिया के तमाम देश विश्व संगीत दिवस हर साल 21 जून को मनाते हैं।

क्रीड़ा भारती ने धूमधाम से मनाया अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस

क्रीड़ा भारती ने जनपद मुख्यालय सहित सभी विकास खण्डों में धूमधाम से मनाया अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिव

बिजनौर। क्रीड़ा भारती बिजनौर द्वारा नेहरू स्टेडियम में जिला प्रशासन व आयुष विभाग के साथ संयुक्त रूप से अष्टम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया।

नेहरू स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ शंखनाद के साथ मुख्य अतिथि आयुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा, भाजपा जिला अध्यक्ष व पूर्व सांसद बिजनौर राजा भारतेन्द्र द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अतिथियों का स्वागत क्रीड़ा भारती के जैनेंद्र सिंह, डा. राघव मेहरा, अरविंद अहलावत व दीपक चौहान द्वारा पुष्प गुच्छ देकर किया गया। नेहरू स्टेडियम में प्रशांत महर्षि के संचालन में हजारों योग साधकों को योग कराया गया।  कार्यक्रम का संचालन क्रीड़ा भारती के जिला अध्यक्ष योगेन्द्र पाल सिंह योगी द्वारा किया गया।

दो हजार से अधिक साधक हुए शामिल-
योग साधक प्रातः 5.00 बजे से ही नेहरू स्टेडियम पहुंचने लगे थे। स्कूल के बच्चों को केसरिया, सफेद व हरी टी शर्ट दी गई थी। स्टेडियम में दो हज़ार से अधिक योग साधकों के सम्मुख विनोद गोस्वामी, भारती गौड़, ओपी राणा, सूनिल राजपूत, हिमानी डा नरेंद्र व दीपक चौहान मंच व तख्त पर योग की सही तरीके से करने का प्रदर्शन कर रहे थे। क्रीड़ा भारती बिजनौर द्वारा जनपद में 15 स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किये गए।


कार्यक्रम के सुव्यवस्थित व अनुशासित आयोजन हेतु प्रत्येक दो पंक्ति पर क्रीड़ा भारती के स्वयं सेवक उपस्थित थे, जो योग साधकों को सही तरीके से योग करना भी बता रहे थे।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केपी सिंह, उप जिला अधिकारी बिजनौर मोहित कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी जय करन यादव, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व युनानी अधिकारी प्रमोद कुमार. जिला उद्यान अधिकारी जितेंद्र कुमार सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
आयुक्त मुरादाबाद मण्डल मुरादाबाद द्वारा नियमित रूप से योग करने के लाभ के बारे में बताते हुए प्रतिदिन योग करने का आह्वान किया गया।


योग दिवस के अवसर पर सर्वप्रथम शिथलीकरण अभ्यास से प्रारंभ करते हुए ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्‍तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणस,पादहस्‍तासन, वीरासनअर्ध उष्‍ट्रासन,उष्‍ट्रासन, शशांकासन, उत्‍तान मंडूकासन, मरीच्‍यासन या वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, सेतुबंधासन, उत्‍तानपाद आसन, कपालभाति प्राणायाम, इसके बाद. नाड़ीशोधन, अनुलोम विलोम, शीतली प्राणायाम,भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। अन्त में ध्‍यान शांतिपाठ आसन, शवासन का अभ्यास कराते हुए कल्याण म़त्र के साथ समापन किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रभात कुमार, राजेन्द्र सोलंकी, चित्रा चौहान, जितेंद्र चौधरी, मनोज शर्मा, अनिल चोधरी, प्रतिका राठी, अशोक त्यागी, विनय तितोरिया, डिम्पल सिंह, राकेश शर्मा, गोबिन्दा क्लब, सुबोध कुमार, सीमा चौधरी, विकास लाटियान आदि का सहयोग रहा। इस अवसर पर अमर उजाला के प्रभारी रजनीश त्यागी, ब्रजवीर सिंह, पब्लिक इमोशन से भूपेंद्र निरंकारी सहित अनेक समाचार पत्रों के संवाददाता भी शामिल हुए।

क्रीड़ा भारती ने विकास खण्ड स्तर पर की व्यवस्था-
इस बार क्रीड़ा भारती द्वारा जनपद मुख्यालय के विकास खण्ड स्तर पर योग कराने हेतु प्रभारी नियुक्त किये गये थे, जिनके द्वारा दूर ग्रामीण क्षेत्रों सहित नगरों में योग दिवस कराया गया। आकाश चौधरी द्वारा हेजलमून पब्लिक स्कूल, चांदपुर, हिन्दू इन्टर कालेज में सुधीर कुमार, चन्द्र पाल सिंह, सरस्वती विद्या मन्दिर नहटौर में पुनीत गुप्ता, विकास खण्ड कोतवाली के ग्राम हरगनपुर में शरद कुमार सिंह, स्योहारा में अक्षत देवरा, एकलव्य शूटिंग रेंज में, प्रीति शर्मा व विपिन चौधरी, जाट कोचिंग सेंटर धामपुर में सुमित शर्मा, नजीबाबाद में विरेंद्र सैनी, नूरपुर में संजीव डवास व किरतपुर में गुलशन गुप्ता द्वारा अष्टम योग दिवस के अवसर पर योग कराया गया।

अग्निपथ योजना: फेक न्यूज चलाने वाले 35 व्हाट्सएप ग्रुप पर बैन

अग्निपथ योजना को लेकर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज चलाने वाले 35 व्हाट्सएप ग्रुप पर बैन।

नई दिल्ली। केंद्र की सैन्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर नई योजना ‘अग्निपथ’ के बारे में कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने वाले 35 व्हाट्सएप समूहों पर रविवार को सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कुछ दिन पहले इस योजना की घोषणा के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ हिंसक विरोध के बीच यह कदम उठाया गया है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना के बारे में कथित रूप से फर्जी खबरें फैलाने के लिए सरकार द्वारा 35 व्हाट्सएप समूहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

हालांकि, इन समूहों के बारे में या उनके एडमिनिस्ट्रेटर के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू की गई है या नहीं, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी है। व्यापक प्रदर्शन के बावजूद अग्निपथ भर्ती योजना वापस लेने से इनकार करते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना ने नयी नीति के तहत भर्ती के लिए रविवार को विस्तृत कार्यक्रम प्रस्तुत किया और इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र बलों में उम्र संबंधी प्रोफाइल को घटाने के लिए इसे लागू किया जा रहा है।

गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में युवा विवादास्पद रक्षा भर्ती योजना का विरोध कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में, विभिन्न शहरों और कस्बों से प्रदर्शनकारियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ किए जाने, रेलगाड़ियों में आग लगाने और सड़कों तथा रेलवे पटरियों को अवरुद्ध करने की घटनाएं सामने आई हैं। गत शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन के तहत तेलंगाना के सिकंदराबाद में पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। आक्रोशित युवाओं के प्रदर्शन के दौरान कई ट्रेनों में आग लगा दी गई थी, निजी, सार्वजनिक वाहनों, रेलवे स्टेशन में तोड़फोड़ की गई और राजमार्गों तथा रेलवे लाइन को अवरुद्ध कर दिया गया था।

विदित हो कि गत 14 जून को घोषित अग्निपथ योजना में साढ़े सत्रह साल से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को केवल चार साल के लिए भर्ती करने का प्रावधान है, जिसमें से 25 प्रतिशत को 15 और वर्षों तक बनाए रखने का प्रावधान है। बाद में, सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा को 23 वर्ष तक बढ़ा दिया था। नई योजना के तहत भर्ती किए जाने वाले कर्मियों को अग्निवीर के रूप में जाना जाएगा। इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य सैन्य कर्मियों की औसत आयु को कम करना और बढ़ते वेतन एवं पेंशन भुगतान में कटौती करना है।

आम जवानों जैसी सहूलियत, एक करोड़ का बीमा

अग्निपथ पर चले अग्निवीरों को आम जवानों जैसी सहूलियत, एक करोड़ का बीमा

नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन से निपटने के लिए बैठकों का दौर लगातार जारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तीनों सेनाओं के प्रमुख दृढ़ता से डटे हुए हैं। रविवार को रक्षा मंत्रालय ने एक अहम प्रेस कांफ्रेंस में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि अग्निपथ स्कीम रोलबैक नहीं होगी। यह भी बताया कि अग्निवीर के जरिए भारतीय सेना में किस तरह से जोश और होश का संतुलन बनाने की योजना है।

अब सभी रिक्रूटमेंट केवल अग्निवीर से- प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि सेना में अब सभी रिक्रूटमेंट केवल अग्निवीर के तहत ही होंगे। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पहले अप्लाई किया था, उनके लिए एज लिमिट बढ़ा दी गई है। सभी को नए सिरे से अप्लाई करना होगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वैकल्पिक भर्ती की कोई योजना नहीं है ।

सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने कहा कि यह योजना काफी विचार-विमर्श करके लाई गई है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं के जोश-होश के बीच तालमेल बनाना है। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना युवाओं के लिए फायदेमंद है। सभी अग्निवीरों को आम जवानों की तरह फायदे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आज की तुलना में अग्निवीरों को ज्यादा अलाउंस मिलेगा। उन्होंने कहा कि दो साल से इस योजना पर चर्चा चल रही थी। अरुण पुरी ने कहा कि हर साल लगभग 17,600 लोग तीनों सेवाओं से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले रहे हैं। किसी ने कभी उनसे यह पूछने की कोशिश नहीं की कि वे सेवानिवृत्ति के बाद क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं के भविष्य के लिए सोच-समझकर उठाया गया कदम है। इन सब के बीच भारतीय वायुसेना ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती करने के लिए विवरण जारी किया है। इस विवरण में वायुसेना ने बताया है कि अग्निपथ सशस्त्र बलों के लिए एक नई मानव संसाधन प्रबंधन योजना है। इस योजना के माध्यम से शामिल किए गए उम्मीदवारों को अग्निवीर कहा जाएगा। इनकी भर्ती वायुसेना अधिनियम 1950 के तहत चार वर्षों के लिए की जाएगा।

अभी है योजना की शुरुआत

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि अभी योजना के शुरू में 46000 अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है, यह क्षमता अभी और बढ़ेगी। अगले 4-5 सालों में यह संख्या 50,000-60,000 होगी और फिर इसे 90 हजार से बढ़ाकर एक लाख किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेना की योजना में 1.25 लाख तक अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। इस प्रकार से यदि 25 फीसदी को परमानेंट रखा जाएगा तो ऑटोमैटिकली 46,000 अग्निवीर परमानेंट रूप से भर्ती होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अग्निवीर देशसेवा के दौरान शहीद होता है उसे एक करोड़ रुपए की आर्थिक मदद मिलेगी।

FIR है दर्ज तो नहीं बन सकेंगे अग्निवीर

केंद्र सरकार की ओर से तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के विरोध के बीच सेना की ओर से उम्मीदवारों को साफतौर पर चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगर उनके खिलाफ FIR दर्ज होती है तो वह ‘अग्निवीर’ नहीं बन सकेंगे। सेना ने कहा कि भर्ती में शामिल होने वाले हर उम्मीदवार को लिखित में यह बताना होगा कि वो अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों में शामिल नहीं थे। सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने कहा कि उम्मीदवारों को एक लिखित प्रमाण पत्र देना होगा कि वे विरोध या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे। पुरी ने कहा कि भारतीय सेना की नींव में अनुशासन है। आगजनी या तोड़फोड़ के लिए कोई जगह नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को एक प्रमाण पत्र देना होगा कि वे विरोध या तोड़फोड़ का हिस्सा नहीं थे। पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, इसके बिना कोई भी शामिल नहीं हो सकता है।

सेना में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने आगे कहा अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज की जाती है तो वे सेना में शामिल नहीं हो सकते। सशस्त्र बलों में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को योजना के ऐलान के बाद बुधवार को बिहार में अग्निपथ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

वायुसेना में कब से शुरू होगी Agniveer भर्ती ?

एयर मार्शल एसके झा ने बताया कि पहले बैच के अग्निवीर भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 24 जून 2022 से शुरू से होगी। इस बैच के लिए फेज-1 की ऑनलाइन परीक्षा 24 जुलाई से शुरू होगी। वहीं पहले बैच की ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन दिसंबर में शुरू होंगे और इस प्रक्रिया को 30 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

नौसेना में Agniveer भर्ती के आवेदन 21 नवंबर से वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि पहले नवल अग्निवीर 21 नवंबर 2022 से ओडिशा स्थिति आईएनएस चिल्का में ट्रेनिंग के लिए पहुंचना शुरू कर देंगे। नौसेना में महिला और पुरुष दोनों अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि नौसेना में पहले से ही विभिन्न जहाजों में 30 महिला अधिकारी तैनात हैं। ऐसे में नौसेना ने अग्निपथ योजना के तहत भी महिला अग्निवीरों की भर्ती का फैसला किया है।

घास की चिता पर जली थी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की निर्जीव देह

164वें बलिदान दिवस (18 जून) पर विशेष

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में जान की कुर्बानी देने वाले योद्धाओं की शौर्य गाथाएं खूब गाईं गईं। सैकड़ों लोकगीत, नाटक, उपन्यास और अनेक भाषाओं में शूरवीरों के जीवन चरित्र लिखे गए लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के डर से लोकगीत दबी जुबान ही गाए जाते थे। खुलकर इन्हें गाने की हिम्मत अच्छे-अच्छों में नहीं थी। स्वाधीन भारत में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता का इतिहास लिखना आसान था। महाश्वेता देवी से लेकर सैकड़ों लेखकों ने लेखनी चलाई लेकिन ‘सिपाही विद्रोह’ या ‘गदर’ कहे गए 1857 के भीषण संग्राम पर गुलामी के दौर में कलम उठाना उतना ही खतरे से खाली नहीं था, जितना सिपाही विद्रोह में कृपाण उठाना।


यह वह दौर था जब अंग्रेज लेखक अपने अत्याचारों पर पर्दा डालने के लिए गदर का मनमाना इतिहास लिखकर भारतीयों की हिंसात्मक कार्यवाही को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे थे। अप्रतिम वीर और भारतीय जनमानस पर अमिट छाप छोड़ने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा था कि विद्रोह के समय अंग्रेजों को सहायता देनी कबूल की। उनके चरित्र को इस तरह चित्रित किया गया कि मानो झांसी की रानी बिना चाहे ही अंग्रेजों से लड़कर वीर नारी बन गई हों।
ऐसे वक्त में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी गदर के संबंध में अंग्रेजी लेखकों द्वारा लिखे जा रहे/ लिखे गए ‘झूठे’ इतिहास को कैसे बर्दाश्त कर सकते थे? उन्हें सरस्वती का संपादन संभाले हुए एक साल ही बीता था। प्रेस मालिकों के नियम और अंग्रेजी कानूनों के डर के बीच अंग्रेज़ों के झूठ के पदार्फाश और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता-शूरता को हिंदी भाषी समाज के सामने लाने की उत्कंठा अंदर से रोज-ब-रोज जोर मार ही रही थी। उसी बीच उन्हें झांसी की रानी पर मराठी लेखक दत्तात्रेय बलवंत‌ पारसनीस की मराठी में लिखी पुस्तक ने रास्ता दिखाया। पुस्तक पढ़ने के बाद झांसी की रानी की वीरता पर अंग्रेज हुकूमत द्वारा फैलाए गए भ्रम को दूर करने के लिए पारसनीस की नीति अपनाते हुए ही उन्होंने 1904 में सरस्वती के जनवरी और फरवरी अंक में पर क्रमश: दो लेख ‘झांसी की रानी लक्ष्मी बाई’ प्रकाशित किए।


द्विवेदी जी ने सरस्वती में लिखे गए अपने पहले लेख के साथ झांसी के किले और रानी के महल के दो चित्र भी लगाए। दूसरी किस्त के साथ झांसी के म्यूटिनी के स्मारक का चित्र और एक चित्र रानी के युद्ध का, जिसमें रानी एक हाथ में तलवार और दूसरे में भाला लिए अंग्रेजों पर वार करती हुई दिखाई गई हैं। चित्र के नीचे कैप्शन दिया गया कि ग्वालियर के एक पुराने चित्र से सरस्वती के लिए यह फोटोग्राफ उतारा गया है। इन लेखों को सुंदर ढंग से सजाकर छापने में द्विवेदी जी ने काफी परिश्रम भी किया।
उन्होंने पारसनीस की चार सौ पृष्ठ की पुस्तक के आधार पर लेखों में विद्रोही सिपाहियों को दुष्ट कहा। बच्चों की प्रचारित हत्या की निंदा की और झांसी की रानी की वीरता की प्रशंसा। द्विवेदी जी ने पारसनीस के प्रमाण संग्रह और इतिहास के अध्ययन की प्रशंसा करते हुए लेख की शुरूआत पारसनीस की पुस्तक के प्रभाव का महत्व स्वीकार करते हुए इस तरह की-‘इस पुस्तक को पढ़कर लक्ष्मीबाई का अतुल पराक्रम, उनका अतुल धैर्य और उनकी अतुल वीरता आंखों के सम्मुख आ जाती है। ऐसी वीर नारी इस देश में क्या और देशों में भी शायद ही हुई होगी।’ हालांकि, सर एडविन अर्नाल्ड ने लक्ष्मी बाई की उपमा फ्रांस की प्रसिद्ध बाला जोन आप आर्क से दी है। लक्ष्मीबाई को परास्त करने वाले सर ह्यूरोज ने भी रानी की वीरता की प्रशंसा की है। द्विवेदी जी लिखते हैं कि ऐसी पुस्तक लिख कर पारसनीस ने इस देश के साहित्य का बड़ा उपकार किया। वह पारसनीस की प्रशंसा करते हुए हिंदी पाठकों से सिफारिश करते हैं कि मराठी न आती हो तो इस एक ही पुस्तक को पढ़ने के लिए ही सही मराठी सीखें जरूर।
पारसनीस की किताब के हवाले से द्विवेदीजी ने झांसी की रानी की वीरता और संग्राम का बखान करते हुए झांसी की लड़ाई के बारे में लिखा-’23 मार्च 1818 को यह आरंभ हुआ झांसी को चारों ओर से अंग्रेजी सेना ने घेर लिया। 24 और 18 पौंडर्स नाम की तोपें शहर की दीवार पर चलने लगीं और दूसरी तोपों से बम के गोले शहर के भीतर फेंके जाने लगे। झांसी के चारों ओर जो दीवार है उसकी चौड़ाई कोई 16 फुट है। उस पर और किले के बुर्ज पर रानी साहब ने सब मिलाकर कोई 50 के ऊपर तोपें लगा दीं। उनमें से भवानी शंकर, कड़क बिजुली, घनगर्ज, नालदार आदि तोपे बड़ी ही भयंकर थीं। रानी साहब खुद युद्ध की देखभाल करने लगी और समय-समय पर अपने योद्धा और सेना नायकों को उत्साहित करने लगीं। उनके युद्ध कौशल का ही कमाल था कि अंग्रेजों ने झांसी की सेना की वीरता और युद्ध कौशल की प्रशंसा की। सर ह्यूरोज ने रानी की प्रशंसा करते हुए लिखा-‘स्त्रियां तक तोपखाने में काम करती थीं और गोला-बारूद लाने में सहायता देती थीं। अंग्रेज 11 दिन का झांसी का घेरा डाले रहे। विकट युद्ध हुआ तथापि रानी साहब के धैर्य और दृढ़ निश्चय के सामने दूसरे पक्ष की कुछ न चली।’
लेख के इस एक अंश से आपको उनके अंग्रेज हुकूमत के प्रति दृष्टिकोण का अंदाज करना आसान होगा–‘महाप्रबल और परम दयालु अंग्रेजी सरकार’ से शत्रुता करने का फल झांसी वालों को मिला। लड़ाई में जो सैनिक मारे गए, उनके अलावा अंग्रेजी फौज ने शहर में पहुंचकर प्रलय आरंभ कर दिया। एक और शहर में उसने आग लगा दी और दूसरी ओर से लड़के और स्त्रियों को छोड़कर बिजन बोल दिया। सात दिन तक लूटमार और फूंक-फांक होती रही। आठवें दिन प्रजा को अभय वचन दिया गया और जिनका कोई वारिस न था, ऐसे मृतकों के ढेर रास्ते में फूंक दिए गए। ये तमाम लोग जो मारे गए थे, निहत्थे थे और उन्होंने न तो किसी कत्लेआम में भाग लिया था न ले सकते थे।’
लेख में झांसी की रानी की वीरता का उल्लेख इस तरह है-‘उनके साथ उनकी दासी मुंदर भी एक घोड़े पर थी। उस पर एक गोरे ने प्राणहारक आघात किया। वह चिल्ला उठी। रानी साहब ने उसको मारने वाले के कंठ में एक निमिष मात्र अपनी तलवार रख दी। अंग्रेजी सेना के वीरों ने रानी साहब को कोई महाशूर सेनानायक समझकर चारों ओर से घेर लिया। इस पर भी वह जरा भयभीत नहीं हुईं। उनकी तलवार अपना काम बड़ी भी भीषणता से बराबर करती रही परंतु एक कोमल और अल्पवयस्क अबला अनेक वीरों के बीच कब तक सजीव रह सकती है? एक अंग्रेज योद्धा ने उनके सिर पर पीछे से तलवार का वार किया जिससे उनके सिर का दाहिना भाग छिल गया और एक आंख निकल आई। इस योद्धा ने रानी साहब की छाती पर किर्च का भी प्रहार किया परंतु धन्य रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, धन्य उनका धैर्य और धन्य उनका साहस! इस दशा को प्राप्त होकर भी उन्होंने इस वीर से पूरा बदला लिया। उसे तत्काल ही उन्होंने धरा तीर्थ को भेजकर अपना जीवन सार्थक किया!! धन्य वह शौर्य और धन्य वह पराक्रम!!!
घायल रानी ने सरदार रामचंद्रराव के साथ एक झोपड़ी में प्रवेश किया। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास समरांगण में भारतवर्ष का महा शौर्यशाली दिव्य स्त्री रत्न खो गया। रानी साहब के सेवक और सरदारों ने एक घास की गंजी से घास लाकर उसकी चिता बनाई और उसी पर रानी साहब की निर्जीव देह रखकर उसे अग्निदेवता के अर्पण कर दिया।’ मुगल शासकों को लोहे के चने चबवाने वाले महाराणा प्रताप ने भले घास की रोटियां खाईं थीं लेकिन यह किताब प्रामाणिक रूप से बताती है कि अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त करने वाली झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की देह घास की चिता पर ही पंचतत्व में विलीन हुई थी। इतिहास में रुचि रखने वाले लोग भले ही इस तथ्य को जानते हों लेकिन नई पीढ़ी इस इतिहास से शायद ही परिचित होंगे।
पारसनीस से प्रभावित आचार्य द्विवेदी लिखते हैं कि यह बहुत अच्छा क्रांतिकारी साहित्य है। वैसा साहित्य है, जिसे पढ़कर भारत के नौजवान अंग्रेजी अंग्रेजी राज्य से नफरत करना सीखते थे और जिन्हें संवैधानिक तरीकों पर या अहिंसात्मक तरीकों पर विश्वास नहीं था वे लक्ष्मीबाई की तरह हथियार को उठाकर अंग्रेजों से लड़ने का प्रयत्न करते थे। आचार्य द्विवेदी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के वास्तविक इतिहास को जानने- समझने के लिए हिंदी भाषी समाज को पारसनीस की मराठी पुस्तक पढ़ने का मंत्र दे रहे थे। वह भी भाषण या मौखिक नहीं बल्कि लेख में बाकायदा लिखकर। उस दौर में झांसी की रानी के वास्तविक इतिहास से हिंदी भाषी समाज को परिचित कराने के थोड़े से होने वाले प्रयासों में एक प्रयास आचार्य द्विवेदी का भी था। यह भारत के उन महान योद्धाओं के प्रति उनकी अपनी श्रद्धा का भी प्रमाण है। आइए! हम सब मिलकर शूरवीर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

जय प्रथम स्वाधीनता संग्राम!!
जय झांसी की रानी लक्ष्मीबाई!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली

मातृभाषा प्रेमी पंडित माधव राव सप्रे

151वीं जयंती पर विशेष

मातृभाषा प्रेमी पंडित माधव राव सप्रे

हिंदी नवजागरण और भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में बढ़चढ़ कर योगदान देने वाले पंडित माधव राव सप्रे का मातृभाषा प्रेम महात्मा गांधी और महावीर प्रसाद द्विवेदी से कतई कमतर नहीं था। गुलाम भारत में प्रभुत्व जमाती अंग्रेजी के खिलाफ मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर ‘म’ अक्षर वाले तीनों महारथी- महात्मा गांधी, माधवराव सप्रे और महावीर प्रसाद द्विवेदी ही मोर्चा संभालने वाले लोगों में अग्रणी थे। यह तीनों ही महानुभाव राष्ट्रभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए हिंदी नवजागरण और भारतीय स्वाधीनता आंदोलन को अपनी-अपनी तरह से गतिशील बना रहे थे।
1917 की ‘सरस्वती’ में माधव राव सप्रे का एक लेख छपा था-‘राष्ट्रीयता की हानि का कारण’। इस लेख में उन्होंने कहा-‘अंग्रेजी भाषा के अधिक प्रचार और देशी भाषाओं के अनादर से राष्ट्रीयता की जो हानि हो रही है, उसका पूरा पूरा वर्णन करना कठिन है। जब तक अंग्रेजी भाषा का अनावश्यक महत्व न घटाया जाएगा और जब तक शिक्षा का द्वार देशी भाषाओं को बनाकर वर्तमान शिक्षा पद्धति में उचित परिवर्तन न किया जाएगा, तब तक ऊपर लिखी गई बुराइयों से हमारा छुटकारा नहीं हो सकता।’
इसी एक में उनका कथन है-‘किसी समय रूस में उच्च वैज्ञानिक शिक्षा जर्मन और फ्रेंच भाषाओं के द्वारा दी जाती थी परंतु अब वहां यह बात नहीं है। सन् 1880 ईस्वी में एक प्रोफेसर ने रूसी भाषा में वैज्ञानिक शिक्षा देना आरंभ किया। दूसरे प्रोफेसरों ने भी उसका अनुकरण किया। फल यह हुआ कि अब रूसी भाषा बोलने वाले रूस के समस्त प्रांतों में वैज्ञानिक शिक्षा रूसी भाषा ही के द्वारा दी जा रही है।’ अपने उसी लेख में सप्रे जी यह भी लिखते हैं-‘जापान के विश्वविद्यालयों का भी यही हाल है। वहां कठिन से कठिन और गहन से गहन तत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान जापानी भाषा में ही होते हैं। जापानी भाषा का साहित्य थोड़े समय पहले ऐसा था कि उसकी तुलना भारतीय देशी भाषाओं के साहित्य से करना उसको सम्मान देना कहा जा सकता है। ऐसी अवस्था में भारतवासी ही अपनी मातृभाषा में शिक्षा पाने से वंचित क्यों रहें?
अपने इस लेख में वह राष्ट्रभाषा और भारतीय भाषा के सवाल को इस तरह भी रेखांकित करते हुए आलोचनात्मक जस्ट भ डालते हैं-‘संसार के अग्रगण्य वैज्ञानिकों में भारतवर्ष के सुप्रसिद्ध अध्यापक जगदीश चंद्र बसु भी हैं। वे अपने सभी आविष्कारों का वर्णन अंग्रेजी भाषा में करते हैं और ग्रंथ लेखन भी उसी भाषा में यदि वे बंगला भाषा का उपयोग करने लगे तो देशी भाषाओं में वैज्ञानिक ग्रंथों का आंशिक अभाव दूर हो सकता है।’ सप्रे जी केवल राष्ट्रभाषा और भारतीय भाषाओं के महत्व पर ही जोर नहीं दे रहे थे। अपने समकालीन और अपनी से आगे की पीढ़ी के महत्वपूर्ण लोगों को यह आईना भी दिखा रहे थे कि मातृभाषा को महत्व देना देश की उन्नति, राष्ट्र की एकता, भारत और भारतीय भाषाओं को गुलामी की दास्तां से मुक्ति दिलाने का एकमात्र माध्यम मातृभाषा ही है।
महात्मा गांधी का मातृभाषा और राष्ट्रभाषा प्रेम जगजाहिर ही है। गांधीजी भारतीय भाषाओं के व्यवहार के प्रबल समर्थक थे। उन्हें हिंदी बोलने पर ही नहीं गुजराती का व्यवहार करने पर भी धक्के खाने पड़े थे। राष्ट्रभाषा और मातृभाषा को महात्मा गांधी देशोद्धार और देशोन्नति का प्रधान साधन समझते थे। दक्षिण अफ्रीका की जेल में बंद रहते समय महात्मा गांधी को अपनी पत्नी की बीमारी का तार मिलने का किस्सा सबको पता ही है। महात्मा गांधी यदि जुर्माना अदा कर देते तो उन्हें जेल से छुटकारा मिल जाता और वे अपने घर जाकर अपनी पत्नी की सेवा आदि कर सकते थे पर उन्होंने अपने सिद्धांत से समझौता नहीं किया। जेलर की आज्ञा प्राप्त करके अपनी पत्नी को उन्होंने गुजराती में एक पत्र लिखा। पत्र देखकर जेलर चौंक गया, क्योंकि वह उसे पढ़ न सका। जेलर ने उस पत्र को तो जाने दिया पर आज्ञा दी कि गांधीजी अपने अगले पत्र अंग्रेजी में ही लिखेंगे। गांधी जी ने उस जेलर से कहा-‘ मेरे हाथ के गुजराती पत्र इस बीमारी की दशा में मेरी पत्नी के लिए दवा का काम करेंगे। इस कारण आप मुझे गुजराती में ही लिखने की आज्ञा दीजिए’ पर जेलर नहीं माना और फल यह हुआ कि गांधी जी ने अंग्रेजी में लिखने से इंकार कर दिया। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने ऐसे दृढ़ प्रतिज्ञ और मातृभाषा भक्त महात्मा गांधी को इंदौर के आठवें हिंदी साहित्य सम्मेलन का सभापति बनाए जाने की भी प्रशंसा की थी।
महावीर प्रसाद द्विवेदी सरस्वती के माध्यम से मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के सवाल पर खुद तो लिख ही रहे थे और दूसरे लेखकों के लेख भी प्रमुखता से छपते हुए अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई को अपने ढंग और सरस्वती के मालिकों की रीति-नीति पर खरा उतरते हुए नई ताकत दे रहे थे। द्विवेदी जी ने बहुतसंख्यक जनता को शिक्षित करने की नीति अपनाई थी। उनका स्पष्ट मानना था कि विभिन्न प्रदेशों की जनता अपनी-अपनी मातृभाषाओं के माध्यम से ही शिक्षित हो सकती थी। द्विवेदी जी ने कहा कि शिक्षित होने का अर्थ अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है। वे लगातार सवाल उठा रहे थे-‘अच्छा शिक्षा के मानी क्या? अंग्रेजी भाषा में धड़ल्ले के साथ बोलना और लिखना आ जाना ही क्या शिक्षा है? द्विवेदी जी ने लिखा था-’30 करोड़ भारतवासियों की ज्ञान वृद्धि क्या इन अंग्रेजी के मुट्ठी भर शुद्ध लेखकों से हो जाएगी?’ अंग्रेजी राज से निराश होकर उन्होंने लिखा-‘लक्षणों से तो यही मालूम होता है कि घर के धान भी पयाल में जाना चाहते हैं। इस दशा में जब तक हम लोग स्वयं ही अपने उद्योग से अपने स्कूल खोल कर अपने मन की शिक्षा न देंगे तब तक यथेष्ट उद्धार की आशा नहीं है।’
पंडित माधव राव सप्रे की आज 151वीं जयंती है। जयंती पर हम मराठी भाषी सप्रे जी के मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी के लिए दिए गए योगदान को याद रखने नई पीढ़ी को याद दिलाना महत्वपूर्ण है। उनके उठाए हुए कदम 100 साल पहले भी प्रासंगिक थे और आज के संदर्भ में भी प्रासंगिक ही बने हुए हैं।

ऐसे माधव राव सप्रे जी को शत्-शत् नमन!!!

∆ गौरव अवस्थी
रायबरेली/उन्नाव

भारत से पहले कई देशों में भी लागू है सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

भारत से पहले निम्नलिखित देशों में भी लागू है – सेना में “टूर ऑफ ड्यूटी” सिस्टम, लेकिन इन देशों में अनिवार्य है, भारत में इसे स्वेच्छिक रखा गया है

अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए आरक्षण

नई दिल्ली: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के तहत भर्ती होने वाले युवाओं की अधिकतम उम्र की सीमा को 21 साल से बढ़ाकर 23 वर्ष करने के फैसले के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को एक और बड़ा एलान किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (HMO India) ने अपने नए आदेश में अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए 10% रिक्तियों को आरक्षित करने का निर्णय लिया है। दो बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा से 3 वर्ष की छूट दी गई। अग्निवीर के पहले बैच के लिए आयु में अधिकतम आयु सीमा से 5 वर्ष की छूट होगी। गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

इजरायल : टूर ऑफ ड्यूटी के मामले में इजरायल सबसे सख्त देश है, यहां इजरायली रक्षा बल में पुरुषों को तीन साल और महिलाओं को दो साल अनिवार्य सेवा देनी होती है. कुछ धार्मिक और स्वास्थ्य के आधार पर तथा गर्भवती महिलाओं को इससे छूट दी जाती है. इसे सेवा और सम्मान का जरिया माना जाता है.

चीन : चीन में आम नागरिकों को जबरन सेना में भर्ती किया जाता है. चीन में हर नागरिक के लिए 18 से 22 वर्ष की आयु के बीच दो साल की सैन्य सेवाएं देना अनिवार्य हैं. यानी चीन का कोई युवा चाहता हो या ना चाहता हो, उसे सेना में भर्ती होना ही पड़ता है. चीन की सेना में करीब 35 प्रतिशत ऐसे युवा हैं, जिन्हें मजबूर करके सैनिक बनाया जाता है.

नार्वे : नार्वे में सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. यहां 19 से 44 साल की उम्र के बीच कभी भी पंजीकरण कराया जा सकता है. महिलाओं के लिए ये नियम 2016 में अनिवार्य किया गया, ताकि उन्हें भी पुरुषों के बराबर हक मिल सके.

स्विटजरलैंड : यहां पर 18 से 34 साल तक युवाओं के लिए सेना में ड्यूटी देना अनिवार्य है, इसके लिए इन्हें 21 सप्ताह की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है. महिलाओं के लिए ये अनिवार्य नहीं है, यह उनकी स्वेच्छा पर निर्भर करता है.

तुर्की : यहां वे युवा जो 20 साल से ज्यादा उम्र के हैं उनके लिए मिलिट्री सर्विस अनिवार्य है. यहां उन लोगों को छूट मिल सकती है जो तीन साल या उससे अधिक समय से विदेश में हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक निश्चित राशि अदा करनी होती है. महिलाओं के लिए ये नियम अनिवार्य नहीं है.

ब्राज़ील : ब्राजील में 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है. इसकी समय सीमा 10 से 12 माह के लिए होती है. यहां थोड़े समय के लिए भी सेना ज्वाइन करने वालों का मेडिकल टेस्ट होता है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन्हें परमानेंट किया जा सके.

उत्तर कोरिया : विश्व के लिए सनसनी बनने वाले उत्तर कोरिया में भी टूर ऑफ ड्यूटी अनिवार्य है, खास बात ये है कि यहां पर पुरुषों को तीनों सेनाओं में ड्यूटी करनी पड़ती है, इसके लिए 23 माह नेवी में, 24 माह वायुसेना में और 21 माह थल सेना में काम करना पड़ता है.

दक्षिण कोरिया : उत्तर कोरिया की तरह ही यहां पर भी तीनों सेनाओं में टूर ऑफ ड्यूटी करना अनिवार्य है, इसमें नौसेना में 23 माह, थल सेना में 21 माह और वायुसेना में 24 माह सर्विस देनी होती है.

रूस : रूस में 18 से 27 साल की उम्र के बीच में कभी भी टूर ऑफ ड्यूटी की जा सकती है, कम से कम 12 माह सैन्य सेवा करना अनिवार्य है.

यूक्रेन: यूक्रेन में भी युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, हालांकि इसके लिए कोई उम्र और न्यूनतम सीमा तय नहीं है, हालिया युद्ध में टूर ऑफ ड्यूटी के तहत कई लोगों ने हथियार उठाकर युद्ध में हिस्सा लिया और रूस जैसे ताकतवर देश को टक्कर देने में सफल रहे.

इसके अलावा ग्रीस में 19 वर्ष की उम्र वाले युवकों को कम से कम 9 माह, ईरान में 24 माह टूर ऑफ ड्यूटी करनी होती है. (एजेंसियां)

श्रीमती न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष नियुक्त

केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई को भारतीय प्रेस परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया है। श्रीमती जस्टिस देसाई उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य प्रकाश दुबे की एक समिति ने पीसीआई अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। एक महत्वपूर्ण बैठक में ये फैसला लिया गया। 

सूत्रों ने बताया कि पीसीआई प्रमुख के रूप में न्यायमूर्ति रंजना देसाई की नियुक्ति की एक आधिकारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि मीडिया वॉचडॉग के अन्य सदस्यों की भी जल्द ही नियुक्ति की जाएगी। पैनल में सांसदों की नियुक्ति की सिफारिश का भी इंतजार है।

गौरतलब है कि इससे पहले न्यायमूर्ति चंद्रमौली कुमार प्रसाद (सेवानिवृत्त) पीसीआई अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल पूरा होने और पिछले साल नवंबर में पद छोड़ने के बाद से यह पद खाली पड़ा था। अब जाकर इस पर न्यायमूर्ति रंजना देसाई की नियुक्ति हुई है। 

न्यायमूर्ति रंजना देसाई का परिचय-
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था। उन्होंने 1970 में एल्फिंस्टन कॉलेज मुंबई से कला में स्नातक और 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से कानून में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रही हैं। 13 सितंबर 2011 को वे इस पद पर नियुक्त हुई थीं। इसके अलावा 72 वर्षीय न्यायमूर्ति देसाई बंबई उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं। जस्टिस रंजना देसाई ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर पर परिसीमन आयोग का नेतृत्व किया था, जिसे केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों को फिर से बनाने के लिए स्थापित किया गया था। कुछ दिनों पहले उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिकता संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) लागू करने के लिए जो ड्राफ्टिंग कमेटी की घोषणा की है उसमें रंजना प्रकाश देसाई भी शामिल हैं।

शांतिपूर्ण माहौल में व्यतीत हुआ जुमा

जिले भर में शांति पूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई जुमे की नमाज

बिजनौर-पुलिस प्रशासन की मेहनत रंग लाई।
बिजनौर में शांतिपूर्ण ढंग से जुमे की नमाज़ हुई अदा।
मस्जिदों से नमाज़ पढ़कर नमाज़ी घरों में हुए क़ैद।
पुलिस प्रशाशन ने ली राहत की सांस।

बिजनौर। जुमे की नमाज को लेकर पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में रहा। नमाज से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे। किसी भी परिस्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन के अलावा सादी वर्दी में पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। डीएम उमेश मिश्रा व एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने पुलिस अधिकारियों के साथ पैदल मार्च कर मुस्लिम धर्म गुरुओं से शांति बनाए रखने की अपील की। सभी जगहों पर बाजारों में चहल पहल आम दिनों की तरह ही रही।

विदित हो कि जुमे की नमाज को लेकर जिले में हाई अलर्ट किया हुआ था। एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने बताया कि जिले में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने को लेकर 21 सेक्टर बनाने के साथ ही कुल 6 जोन में बांटा गया था। जिले की शांति व्यवस्था मजबूत रखने के लिए 21 थानों में हर थानों को 200 अतिरिक्त आरक्षी दिए गए। साथ ही 3 कंपनी पीएसी और फायर ब्रिगेड तैनात रही। वहीं सोशल मीडिया पर पुलिस की विशेष निगरानी रही। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्यवाही की तैयारी में रही। सोशल मीडिया वालियंटर्स की भी तैनाती रही।

सौहार्द्रपूर्ण वातावरण एवं आपस में भाईचारा बनाये रखने की अपील

बरेली। रिजर्व पुलिस लाइन जनपद बरेली सभागार में शहर के धर्म गुरुओं के साथ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गोष्ठी कर त्योहारों को शांतिपूर्ण एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण एवं आपस में भाईचारा बनाये रखने की अपील की गई।

गोष्ठी के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन बरेली राजकुमार, मंडलायुक्त श्रीमति सेल्वा कुमारी जे, पुलिस महानिरीक्षक रमित शर्मा, जिलाधिकारी शिवाकान्त द्विवेदी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवाण द्वारा सुरक्षा / कानून व्यवस्था बनाये रखने में पुलिस का सहयोग करने हेतु प्रेरित कर निम्न बिंदुओं का पालन करने हेतु बताया गया-

1- जनपद बरेली में धारा 144 सीआरपीसी के तहत निषेधाज्ञा लागू है।

2 – प्रशासन से अनुमति प्राप्त किये बिना कोई भी धरना प्रदर्शन करना या उसमें शामिल होना गैरकानूनी है।

3- बिना अनुमति धरना / प्रर्दशन करने वालों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।

4- सोशल मीडिया पर असमाजिक तत्वों द्वारा भडकाऊ व अभद्र पोस्ट एवं वीडियो / फोटो पोस्ट या उसका समर्थन करने पर पुलिस द्वारा तत्परता से प्रकरणों में अभियोग पंजीकृत कर उनके विरूद्ध कार्यवाही की गई है।

5- कोई भी व्यक्ति किसी के कहने / भड़काने में आकर धरना / प्रर्दशन में शामिल न हो, किसी प्रकार का भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक पोस्ट / फोटो व टिप्पणी का समर्थन न करें।

6- पुलिस विभाग व कानून में विश्वास बनाये रखें तथा समाज में शान्ति व्यवस्था कायम रखने हेतु सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बनाये रखें।

7- जनपद बरेली में किसी भी दशा में कानून एवं व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जायेगी। कानून एवं व्यवस्था प्रभावित करने वाले लोंगों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

गोष्ठी के दौरान जनपद बरेली के पुलिस अधीक्षक नगर, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, पुलिस अधीक्षक / क्षेत्राधिकारी लाईन व शहर के समस्त धर्मों के प्रमुख धर्मगुरु उपस्थित रहे।

त्योहार और जुमे पर मुकम्मल रहेगी कानून व्यवस्था

त्योहार और जुमे पर मुस्तैद रहेगी पुलिस। एसपी ने अधीनस्थ स्टाफ को दिए व्यापक दिशा निर्देश। यातायात पुलिस को भी ब्रीफिंग।

बिजनौर। आगामी त्योहार एवं जुमे की नमाज के दृष्टिगत सुरक्षा व शान्ति व्यवस्था मुकम्मल रखने के लिए पुलिस मुस्तैदी से जुट गई है।

इस संबंध में पुलिस अधीक्षक डॉ0 धर्मवीर सिंह ने अधीनस्थ स्टाफ को व्यापक दिशा निर्देश जारी किए हैं।

जनपद में आगामी त्योहार एवं जुमे की नमाज के दृष्टिगत सुरक्षा व शान्ति व्यवस्था के संबंध में पुलिस लाइंस सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ0 धर्मवीर सिंह ने अधीनस्थ अधिकारियों को व्यापक दिशा निर्देश दिये। गोष्ठी में जनपद के सभी क्षेत्राधिकारी/थाना प्रभारी व अन्य अधिकारी मौजूद थे।

इसके अलावा पुलिस अधीक्षक डॉ0 धर्मवीर सिंह व अपर पुलिस अधीक्षक नगर द्वारा पुलिस लाइन परिसर में यातायात पुलिस कर्मियों के साथ जनपद में बेहतर यातायात व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु सभी कर्मियों को ब्रीफ किया गया। शासन द्वारा आदेश व निर्देशों का पालन कराने हेतु संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गये।

पीएम के खिलाफ फेसबुक पर अभद्र पोस्ट डालने वाला गिरफ्तार

बिजनौर। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आपत्तिजनक फोटो तथा पाकिस्तान से प्रेम सम्बन्धी फोटो पोस्ट करने के आरोपी को मंडावर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर किसी फैजान नामक व्यक्ति द्वारा अपनी फेसबुक आईडी से प्रधानमंत्री, भारत सरकार नरेन्द्र मोदी के आपत्तिजनक फोटो तथा विरोधी देश (पाकिस्तान) से प्रेम सम्बन्धी फोटो पोस्ट किये गये थे। सोशल मीडिया सेल द्वारा सोशल मीडिया पर सतर्क दृष्टि रखते हुए इसका तत्काल संज्ञान लिया गया। उक्त फेसबुक आईडी की जाँच की गई, जो फैजान राणा निवासी थाना मण्डावर जनपद बिजनौर की पाई गयी। थाना मण्डावर पुलिस को उक्त अभियुक्त की शीघ्र गिरफ्तारी हेतु निर्देशित किया गया। इसी क्रम में थाना मण्डावर पुलिस द्वारा बुधवार दिनांक 15.06.2022 को अभियुक्त फैजान राणा पुत्र हफीज निवासी मौ० शाहविलायत कस्बा व थाना मण्डावर जनपद बिजनौर को गिरफ्तार किया गया। इस सम्बन्ध में फैजान राणा के विरुद्ध थाना मण्डावर पर मु0अ0सं0 138/22 धारा 505 (2) भादवि व 67 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

गौरतलब है कि पुलिस अधीक्षक, जनपद बिजनौर द्वारा वर्तमान परिवेश के दृष्टिगत सौहार्द बनाये रखने के उद्देश्य से जनपदीय सोशल मीडिया सेल को मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म पर सतर्क दृष्टि बनाए रखने, सूचनाओं का खण्डन करने एवं आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया है। 

निगहबानी में जुटा है सोशल मीडिया सेल- एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया सेल द्वारा सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म यथा फेसबुक, व्हाट्सएप्प, ट्वीटर, इंस्टाग्राम, कू, आदि अन्य सभी सोशल मीडिया साइट्स पर 24 घंटे सतर्क दृष्टि रखी जा रही है। उन्होंने सभी से अनुरोध किया है कि सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर अफवाह / भ्रामक सूचनाओं का प्रसारण, आपत्तिजनक पोस्ट/फोटो/टिप्पणी / दुर्भावनापूर्ण वीडियो, जिससे दो वर्गों/सम्प्रदाय के लोगों के बीच वैमनस्यता बढ़े आदि का समर्थन न करें तथा ऐसी पोस्ट पर कमेंट / लाइक शेयर आदि न करें। ऐसा करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध अभियोग पंजीकृत कर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। बिजनौर पुलिस जनपद की कानून व्यवस्था तथा सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने के लिये प्रतिबद्ध है।

गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बना सूचना विभाग के द्वार पर लगा भण्डारा

गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बना सूचना विभाग के द्वार पर लगा भण्डारा
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा समेत अनेक गणमान्य हस्तियों ने चखा प्रसाद


लखनऊ। उ.प्र. जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में ज्येष्ठ के आखिरी बड़े मंगल के पावन अवसर पर विशाल भण्डारा का आयोजन सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के मुख्य द्वार पर किया गया। इस विशाल भण्डारे की विशेषता रही कि इसमें विभिन्न धर्मो एवं सम्प्रदायों के युवाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और भण्डारे से सम्बंधित विभिन्न कार्यो में हाथ बटाकर सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की।


इससे पहले, एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पं. हरि ओम शर्मा ‘हरि’ ने श्री हनुमान जी का पूजन-अर्चन एवं आरती सम्पन्न की, तदुपरान्त भण्डारे का शुभारम्भ हुआ। कई गणमान्य हस्तियों सर्वश्री एके शर्मा ऊर्जा मंत्री उ.प्र., राजेन्द्र चौधरी सपा नेता, नरेन्द्र श्रीवास्तव सूचना आयुक्त समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों रियाज अहमद, सुल्तान शाकिर हाशमी, वीरेन्द्र श्रीवास्तव, प्रमोद गोस्वामी, अजय कुमार, राजेश श्रीवास्तव, डा. मोहम्मद कामरान आदि विभिन्न हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर उ.प्र. जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के सभी पदाधिकारी व सदस्यगण उपस्थित थे। इनमें संरक्षक अरमान खान, प्रदेश अध्यक्ष पं. हरि ओम शर्मा, प्रदेश महामंत्री अब्दुल वहीद, प्रदेश सचिव जुबैर अहमद, स्वागतकर्ता मुरलीधर आहूजा, प्रदेश उपाध्यक्ष एमएम मोहसिन व शहजादे कलीम, अभय अग्रवाल, शाहिद सिद्दीकी, डीपी शुक्ला, वामिक खान,आरिफ, मुकीम, इमरान खान, कमल शर्मा, मुर्तुजा अली, अनीस खान वारसी, निगहत खान एवं तौसीफ हुसैन आदि शामिल थे।

हिन्दू युवा वाहिनी महिला प्रकोष्ठ का गठन

हिन्दू युवा वाहिनी महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की घोषणा

संगठन के विस्तार को हुई बैठक
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने ली शपथ 

बिजनौर। हिन्दू युवा वाहिनी महिला प्रकोष्ठ की बैठक एसडी पुरम नजीबाबाद रोड पर जिलाध्यक्ष भावना पण्डित के निवास स्थान पर हुई। बैठक में संगठन के विस्तार पर विचार करते हुए सर्वसम्मति से रश्मी राजपूत को जिला संगठन मन्त्री महिला प्रकोष्ठ, अनीता शर्मा को जिला प्रवक्ता महिला प्रकोष्ठ, नमिता वर्मा को जिला मन्त्री महिला प्रकोष्ठ, ललिता को मीडिया प्रभारी, दीपा लाम्बा को जिला उपाध्यक्ष, मंजू को उपाध्यक्ष व रश्मि गोयल को जिला कार्यकारिणी सदस्य पद की जिम्मेदारी प्रदान की गई। सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को हिंदू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष अवधेश शर्मा ने नियुक्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर सभी पदाधिकारियों को शपथ ग्रहण भी कराई गई। अवधेश शर्मा ने सभी पदाधिकारियों को उनके पदों के अनुरूप कार्य प्रणाली पर विस्तार से बताते हुए समाज देश व धर्म के लिए काम करने को कहा। बैठक में जिला प्रभारी अंजू मारवाड़ी, जिला संयोजक वंदना चौधरी, जिलाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ भावना पण्डित आदि महिला मौजूद रही। बैठक की अध्यक्षता अवधेश शर्मा ने तथा संचालन भावना पण्डित ने किया। 

संपूर्ण विकास को मिला बढ़ावा,अपराध मुक्त हो रहा उत्तर प्रदेश- ब्रजलाल


मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संपूर्ण विकास को मिला बढ़ावा, अपराध मुक्त हो रहा उत्तर प्रदेश-ब्रजलाल

बिजनौर। पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं भाजपा राज्यसभा सांसद ब्रजलाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश विकास की राह में आगे बढ़ने के साथ ही अपराध मुक्त हो रहा है। गुंडे माफिया अपराध छोड़कर रोजगार से लग रहे हैं।
स्योहारा क्षेत्र के गांव सद्दोबेरखा में भाजपा के बूथ सशक्तिकरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व डीजीपी व सांसद बृजलाल सिंह ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी का लगभग पतन हो चुका है। पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अनसूचित समाज को केवल वोट बैंक के रूप में ही प्रयोग किया है। पार्टी ने किसी गरीब को कभी टिकट नहीं दिया। इसलिए दलित समाज का बीएसपी से मोह भंग हो गया है। परिणामस्वरूप विधानसभा चुनाव में बीएसपी का मात्र एक विधायक बना है।

उन्होंने कहा कि हम दलित होने के साथ ही पहले हिंदू है। समाज का हित केवल भाजपा में सुरक्षित है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अनसूचित वर्ग के लिए किये गये कार्य पर प्रकाश डाला। मोदी सरकार द्वारा बाबा डॉ० भीमराव अंबेडकर के सम्मान में बनाए गए पंचतीर्थ के विषय में जानकारी दी। क्षेत्रीय विधायक अशोक कुमार राणा ने क्षेत्र में किये गये विकास कार्य गिनाये। उन्होंने ग्रामीणों की श्मशान घाट बनवाने की मांग को शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया। मंडल अध्यक्ष नैपाल सिंह ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से ऐसे दलित बूथों पर विशेष कार्यक्रम किए जा रहे हैं जहां भाजपा का मत प्रतिशत कम रहा है। उनके सशक्तिकरण के लिए दलित चेहरे के रूप में पूर्व डीजीपी बृजलाल सिंह को उतारा गया है। ब्लाक प्रमुख उज्जवल चौहान, अल्लेहपुर ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि नीरज प्रताप सिंह, धामपुर नगर पालिका चेयरमैन राजू गुप्ता, सुभाष चौहान, भाजपा मंडल अध्यक्ष नेपाल सिंह, महामंत्री महेंद्र सैनी, संदीप शर्मा,नीरज राणा, वीरेंद्र सिंह, ग्रामप्रधान दिनेश कुमार आदि रहे।

स्योहारा में शुरू हो गई नुमाइश

विधायक अशोक राणा ने किया नुमाइश का उद्घाटन स्योहारा। स्थानीय रामलीला ग्राउंड में प्रदर्शनी की शुरूआत हो गई है। अब छोटे बड़े सभी लोग यहां जरूरत के सामान की खरीदारी के साथ ही झूलों व सर्कस आदि का लुत्फ उठा सकेंगे। नुमाइश का शुभारम्भ क्षेत्रीय भाजपा विधायक अशोक राणा ने फीता काटकर किया। इस दौरान प्रदर्शनी ठेकेदार मो. अकरम ने विधायक अशोक राणा का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया।


विधायक अशोक कुमार राणा ने कहा कि प्रदर्शनी के आयोजन से बच्चों सहित सभी को मनोरंजन का आनंद मिलता है। आज के इस व्यस्ततम जीवन में मनोरंजन बहुत आवश्यक है। इस मौके पर प्रदर्शनी ठेकेदार मो. अकरम ने बताया कि मेले में मनोरंजन के लिए मौत का कुआं, सर्कस, छोटे बड़े झूले आदि हैं। साथ ही घर के साज सज्जा व घर की जरूरतों व महिलाओं की खरीदारी के लिए दुकाने आदि भी हैं।
इस मौके पर भाजपा मंडल अध्यक्ष नेपाल सिंह, मो.सुलेमान, अनुराग भटनागर, राजपाल सिंह प्रजापति, अविनाश जोशी, एमआर पाशा, चरनजीत सिंह, बलराम जोशी, अमित शर्मा, दिनेश चौहान आदि भी मौजूद रहे।

एकमुश्त समाधान योजना में अब अनिवार्य नहीं रजिस्ट्रेशन

एकमुश्त समाधान योजना: अब रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं

बिजनौर। बिजली विभाग की एकमुश्त समाधान योजना अंतर्गत इस बार विद्युत उपभोक्ताओं को अपने बिलों के समाधान के लिए पंजीकरण नहीं कराना पड़ेगा। इस पर सरकार की ओर से बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

बिजनौर विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता एके पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि शासन की ओर से अक्सर विद्युत उपभोक्ताओं को एकमुश्त समाधान योजना का लाभ उठाने का अवसर दिया जाता रहा है। सरकार इस योजना के तहत अब तक बिजली उपभोक्ताओं को लाभ उठाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता था, लेकिन इस बार सरकार ने योजना का लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं को रजिस्ट्रेशन नहीं कराने की छूट दी है। कोई भी उपभोक्ता सीधे तौर पर इस योजना के तहत अपने विद्युत बिल का एकमुश्त समाधान करा सकता है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि उनके विभाग में 47449 उपभोक्ता हैं जिनमें घरेलू व्यवसाय व ट्यूबवेल के उपभोक्ता शामिल हैं इन उपभोक्ताओं पर 4118.44 लाख रुपए की बक़या है। एक मुश्त समाधान योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं क़ो 1074. 30 लाख रुपए का लाभ होना है। सरकार की इस कल्याणकारी योजना का लाभ उपभोक्ता एक जून से 30 जून तक प्राप्त कर सकते हैं।

आज भी राष्ट्रप्रेम जगा देती हैं अमरेश की कविताएं

पुण्यतिथि विशेष
-जनपद के कालजई साहित्यकार कवि अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ की 43वीं पुण्यतिथि आज
-एक मार्च 1929 को पूरे रूप मजरे कंदरावा में हुआ था जन्म
-मलिक मोहम्मद जायसी राना बेनी माधव और महावीर प्रसाद द्विवेदी के जीवन को समाज के सामने रखा था

रायबरेली। साहित्यकार अमर बहादुर सिंह ‘अमरेश’ की आज 43वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन उनका जीवन पूर्ण हुआ था। पेशे से नायब तहसीलदार रहे अमरेश जी की कविताएं आज भी राष्ट्रप्रेम जगा देती हैं। महात्मा गांधी की हत्या के बाद 13 दिन तक व्रत धारण करके 13 कविताएं लिखीं। उनमें एक रचना-‘दिल्ली तू कैसे देख सकी बापू की खून भरी छाती’ सुनकर सभाओं में लोग रोने लगते थे। विभिन्न विधाओं में कालजयी साहित्य लिखने वाले अमरेश जी को आज जनपद भुल सा चुका है।
1 मार्च 1929 को ऊंचाहार तहसील के पूरे रूप मजरे का निरहुआ में जन्म लेने वाले अमरेश जी बाल्यकाल से ही कविताएं लिखने लगे थे। पहली कविता “नागरिक कक्षा” उन्होंने कक्षा तीन में पढ़ते हुए लिखी थी। अपने जीवन के प्रारंभिक दौर में कालजई कविताएं लिखने वाले अमरेश जी उपन्यास और एकांकी, बालोपयोगी साहित्य लिखने के साथ-साथ संपादन कार्य से भी जुड़े रहे। हिंदी दैनिक स्वतंत्र भारत में उनका स्तंभ ‘गांव की चिट्ठी’ काफी लोकप्रिय रहा। जीवन के आखिरी वक्त तक वह स्वतंत्र भारत में इस कॉलम के लिए लिखते रहे।
बाद में उनका जीवन एक अनुसंधानकर्ता के रूप में भी सामने आया। उन्होंने जनपद की पहचान सूफी काव्य धारा के जनक माने जाने वाले मलिक मोहम्मद जायसी, स्वाधीनता संग्राम के महान शूरवीर राणा बेनी माधव और हिंदी के युग प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पर भी लेखनी चलाई। एक अनुसंधानकर्ता के रूप में उनकी जायसी पर लिखी किताबें ‘कहरानामा’, ‘मसलानामा’, ‘राणा बेनी माधव’ और ‘आचार्य द्विवेदी गांव में’ काफी पसंद की गई।
जनपद के साहित्यिक आकाश के चमकते सितारे अमर बहादुर सिंह को आज जनपद भूल सा चुका है। उनकी यादें धुंधला गई हैं। कवि दुर्गाशंकर वर्मा दुर्गेश कहते हैं कि ऐसे कालजई साहित्यकार के साहित्य को पुर्नप्रकाशित कर समाज के सामने लाने की आवश्यकता है। शबिस्ता बृजेश ने कहा कि अमरेश जी की यादें जनपद के हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। उनके पुत्र अशोक सिंह उनका साहित्य संजोए हुए हैं। वह किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो इस साहित्य की धरोहर को आगे बढ़ा सके।


कॉलोनी तो बस आई गई लेकिन यादें सुरक्षित नहीं

रायबरेली विकास प्राधिकरण ने अमर बहादुर सिंह अमरेश की स्मृति में शहर में कानपुर रोड पर वर्ष 1978 में अमरेश पुरी कॉलोनी बसाई। यह आज शहर की पॉश कॉलोनी मानी जाती है। ..लेकिन कॉलोनी का न तो अपना कोई भव्य गेट है और ना ही यहां अमरेश जी के जीवन वृत्त को प्रदर्शित करने वाला कोई शिलालेख। इससे अमरेश जी का नाम तो जीवित है लेकिन उनके जीवन वृत्त से नई पीढ़ी अपरिचित है।

मुल्क की हिफाज़त और अमन के लिए उठे हजारों हाथ

पुलिस की मौजूदगी के बीच शांति पूर्ण रूप से हुई जुमे की नमाज़

बिजनौर। जुमे की नमाज़ को लेकर जिले भर की मस्जिदों के बाहर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा के लिहाज से एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने पुलिस बल को सतर्कता बरतने के कड़े निर्देश दिए हुए थे।

विदित हो कि कानपुर की घटना को देखते हुए व वायरल एक फेक सन्देश को गम्भीरता से लेते हुए शुक्रवार को पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट व मुस्तेद रहा तो वहीं मुस्लिम धर्मगुरु भी अमन व शांति के लिए प्रशासन के सहयोगी बने रहे। एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने सभी थानाध्यक्षों को कड़ाई से निर्देशित कर रखा था कि चप्पे चप्पे पर पुलिस की निगरानी रहे। पेट्रोल पंप स्वामियों को खुले में पेट्रोल डीजल न बेचने को आगाह कर दिया था। सभी जगह ड्रोन के जरिए निगरानी की गई। गाँवों में सफाई कर्मचारियों से पत्थर आदि हटवा दिये गए थे।

वहीं स्योहारा थानाध्यक्ष आशीष तोमर के नेतृव में सभी मस्जिदों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि हर बार की तरह परम्परागत रूप से जुमे की नमाज पूरी तरह से शांति व अमन के साथ हुई,नमाज़ के बाद हज़ारो हाथ मुल्क की हिफाज़त और अमन के लिए उठे।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो रिलीज

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो

लखनऊ। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष के लिए राष्ट्रीय स्मारक समिति ने नया लोगो गुरुवार को रिलीज किया।
गुरुवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में नया लोगो रिलीज करते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि नया लोगो नई दिल्ली के डिजाइनर राजीव कुमार ने तैयार किया है। नए लोगो में 25 साल की स्मृति यात्रा दर्शाने के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी के राष्ट्र प्रेम, समाज उत्थान की भावना का भी समावेश किया गया है।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो


समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने कहा कि आचार्य द्विवेदी ईश्वर के संरक्षण अभियान का रजत जयंती वर्ष यादगार बनाया जाएगा। अमेरिका इकाई भी इस यज्ञ में अपनी आहुति डालेगी। महामंत्री अनिल मिश्र ने कहा कि वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो रिलीज

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो

लखनऊ। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष के लिए राष्ट्रीय स्मारक समिति ने नया लोगो गुरुवार को रिलीज किया।
गुरुवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में नया लोगो रिलीज करते हुए आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि नया लोगो नई दिल्ली के डिजाइनर राजीव कुमार ने तैयार किया है। नए लोगो में 25 साल की स्मृति यात्रा दर्शाने के साथ-साथ आचार्य द्विवेदी के राष्ट्र प्रेम, समाज उत्थान की भावना का भी समावेश किया गया है।

आचार्य द्विवेदी स्मृति रजत जयंती वर्ष का नया लोगो


समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा ने कहा कि आचार्य द्विवेदी ईश्वर के संरक्षण अभियान का रजत जयंती वर्ष यादगार बनाया जाएगा। अमेरिका इकाई भी इस यज्ञ में अपनी आहुति डालेगी। महामंत्री अनिल मिश्र ने कहा कि वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी।

किसी भी कार्यकर्ता का शोषण बर्दाश्त नहीं: एडवोकेट शैलेन्द्र

बिजनौर। अपना दल (एस) के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार एडवोकेट ने साफ कर दिया है कि किसी भी कार्यकर्ता का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बात उन्होंने अपना दल (एस) की मासिक बैठक के दौरान कही। बैठक का आयोजन चौधरी कॉन्प्लेक्स नजीबाबाद कार्यालय पर हुआ। अध्यक्षता कार्यवाहक जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार एडवोकेट और संचालन हिमांशु राजपूत जिला महासचिव ने किया।

बैठक में शैलेंद्र चौधरी एडवोकेट कहा कि जिले में किसी भी कार्यकर्ता का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक पदाधिकारी को सप्ताह में चार चौपाल बैठकों का विवरण जिला इकाई कार्यालय को भेजना होगा। इसके साथ ही जिला कार्यकारिणी सदस्य को दो सप्ताहिक मॉर्निंग शाखाएं चलानी होंगी। जिला उपाध्यक्ष जिला सचिवों को केवल शनिवार और रविवार को छोड़कर प्रत्येक दिन चौपाल बैठकों का आयोजन कर विधानसभा बार नोडल व सेक्टर पदाधिकारि समन्वय बनाकर नुक्कड़ सभाओं का आयोजन करेंगे। एक बूथ 22 यूथ मिशन 2024 युद्ध स्तर से कार्य करना होगा।

बैठक में जिलाध्यक्ष आईटी सैल सूर्य प्रताप सिंह, यशपाल सिंह, एडवोकेट लव कुश नाथ, योगराज, ब्रजवीर सिंह, हरदीप सिंह, सुनीता आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

75 साहित्यकार एवं समाजसेवी कुमुद सम्मान से अलंकृत

साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी की जयंती पर कुमुद सम्मान से अलंकृत 75 साहित्यकार एवं समाजसेवी

बरेली। रोटरी क्लब भवन चौपुला में साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर 75 साहित्यकार एवं समाजसेवी कुमुद सम्मान से अलंकृत किए गए।

हास्य कवि निर्मल सक्सेना ( कासगंज), वरिष्ठ शायर जीतेश राज नक़्श (पीलीभीत), मुख्य अतिथि आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ सत्येंद्र सिंह, विशिष्ट अतिथिगण बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार श्रीवास्तव, बरेली बार एसोसिएशन के सचिव वीपी ध्यानी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य देवेंद्र देव एवं कार्यक्रम संचालक कवि रोहित राकेश को संस्था के संस्थापक एवं कार्यक्रम आयोजक एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना एवं संस्था अध्यक्ष करुणा निधि गुप्ता ने उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर कुमुद सम्मान से अलंकृत किया

इसके अलावा 75 कवियों एवं समाजसेवियों को भी समारोह में सम्मानित किया गया। आमंत्रित कवियों में निर्मल सक्सेना एवं जीतेश राज ‘नक़्श’ ने अपने काव्य पाठ से सभी का दिल जीत लिया और खूब वाहवाही लूटी।

खटीमा से पधारे सुप्रसिद्ध कवि प्रिय भाई रामरतन यादव द्वारा बहुत सुंदर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। साहित्यकार डॉ महेश मधुकर एवं साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने ‘कुमुद’ जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजक एडवोकेट उपमेंद्र सक्सेना एवं संस्था अध्यक्ष  करुणा निधि गुप्ता ने सभी अतिथियों को हृदय से साधुवाद एवं आभार व्यक्त किया।

आजादी का अमृत महोत्सव: एक, दो, पांच, 10 और 20 रुपए के नए सिक्के लॉन्च

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी का अमृत महोत्सव को समर्पित एक, दो, पांच, 10 और 20 रुपयों के नए सिक्के लॉन्च किए। सिक्कों की इस विशेष सीरीज की पहचान नेत्रहीन लोग भी आसानी से कर सकेंगे। ये सिक्के आजादी का अमृत महोत्सव को समर्पित किए गए हैं।

इस तरह के हैं ये सिक्के
स्पेशल सीरीज के तहत इन सिक्कों पर AKAM का लोगो है। इससे पहले पीएमओ के बयान में कहा गया था कि “सिक्कों की इन स्पेशल सीरीज में AKAM के लोगो की थीम होगी और दृष्टिबाधित व्यक्तियों को भी आसानी से पहचाना जा सकेगा।” विशेष रूप से, इस सप्ताह को 6 से 11 जून, 2022 तक ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ (AKAM) के हिस्से के रूप में मनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि ये सिक्के लगातार लोगों को अमृत काल के लक्ष्यों की याद दिलाएंगे और उन्हें राष्ट्र के विकास में योगदान करने के लिए प्रेरित करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम में उपस्थित वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों से कहा, ‘आप सभी इस विरासत का हिस्सा हैं। देश के आम जन के जीवन को आसान बनाना हो, या देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करना हो, बीते 75 वर्षों में अनेक साथियों ने इसमें बहुत योगदान दिया है। बीते वर्षों में वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट मंत्रालय ने अपने कार्यों के द्वारा, सही समय पर सही निर्णयों के द्वारा अपनी एक विरासत बनाई है, एक बेहतरीन सफर तय किया है।’

वित्त और कार्पोरेट कार्य मंत्रालय 6 से 11 जून तक ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत आइकानिक समारोह आयोजित करेगा। इस दौरान कार्पोरेट कार्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय का प्रत्येक विभाग अपने समृद्ध इतिहास और विरासत के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्परता का प्रदर्शन करेगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रेडिट लिंक्ड सरकारी योजनाओं के लिए ‘जन समर्थ पोर्टल’ शुरू किया। यह पोर्टल अलग-अलग योजनाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा। यह अपने आप में पहला ऐसा पोर्टल होगा जो लाभार्थियों को ऋणदाताओं से जोड़ेगा।

चूहों को बिल्ली से भी ज्यादा इस फल से लगता है डर…

ओटावा (एजेंसी)। चूहों को लेकर आपने सुना होगा कि वह बिल्ली से डरते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने चूहों के डर से जुड़ी एक अबीजोगरीब खोज की है। उन्होंने पता लगाया है कि चूहा केले से डरता है। 

Research on Rat: चूहों पर हाल ही में एक ऐसी रिसर्च हुई है जिसे जानकर आप काफी हैरान होंगे. दरअसल वैज्ञानिकों से अनजाने में हुए इस रिसर्च में सामने आया है कि चूहे बिल्ली से ज्यादा केले से डरते हैं. उन्होंने इसके पीछे की वजह भी निकाली. आइए जानते हैं क्या है रिसर्च….

Latest Viral News: अगर कोई आपसे ये पूछे कि चूहे सबसे ज्यादा किससे डरते हैं, तो शायद आप जवाब देंगे कि बिल्ली से. लेकिन ऐसा नहीं है, चूहे बिल्ली से भी ज्यादा ऐसी चीज से डरते हैं जिसकी कल्पना शायद आप न कर पाएं. हैरानी की बात ये है कि ये कोई जीव नहीं, बल्कि फल है. हाल ही में एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि चूहों को केले से बहुत डर लगता है. हालांकि यह खोज प्लानिंग के तहत नहीं, बल्कि अनजाने में हुई है, लेकिन अब इसकी खूब चर्चा हो रही है.

क्या है पूरी रिसर्च

साइंस एडवांस में छपी इस स्टडी रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि, ‘नर चूहों में केले को देखने के बाद तनाव ज्यादा मिला. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मॉन्ट्रियल में मैगकिल यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम गर्भवती और स्तनपान कराने वाली मादा चूहों पर रिसर्च कर रही थी. इस दौरान दिखा कि अजनबी नर चूहों को कैसे मादा चूहे आक्रामकता दिखा रही हैं. आक्रमकता दिखाने के दौरान मादा चूहों ने मूत्र चिह्न के साथ रिएक्ट किया. यह रिएक्शन अजनबी नर चूहों को भगाने और उन्हें चेतावनी देने के लिए दिया गया था, लेकिन टीम यह देखकर हैरान हो गई कि जो नर चूहे अपनी आक्रमकता के लिए जाने जाते हैं, वो मादा चूहों के रसायन से कैसे भाग गए.

मूत्र को सूंघते ही भाग गया चूहा

इसके बाद टीम ने इस पर रिसर्च शुरू किया. इस स्टडी में शामिल प्रोफेसर जेफरी मोगिल ने बताया कि, चूहे और दूसरे स्तनधारी अपनी सूंघने की शक्तियों को यूज करते हैं. इन सबके लिए अलग-अलग समय पर यूरिन की गंध के अलग-अलग मतलब होते हैं. सूंघने वाले संकेत आमतौर पर नर किसी मादा को भेजते हैं, लेकिन यहां बिल्कुल उल्टा हुआ. इस रिसर्च में मादा चूहे ने नर चूहे को सूंघने वाला संकेत भेजा. इससे साफ हुआ कि मादा चूहा अजनबी नर चूहे को दूर रहने के लिए कह रही है.

ये है केले की थियोरी

अब रिसर्च टीम को ये पता करना था कि माद चूहे ने जो मूत्र चिह्न छोड़ा है उसमें ऐसा क्या था जिसे देखकर नर चूहे को भागना पड़ा. टीम ने जब इस पर काम किया तो पता चला कि स्तनपान कराने वाली मादा चूहों के मूत्र में एन-पेंटाइल एसीटेट (N-Pentyl Acetate) नाम का एक यौगिक था. यह केले समेत कई दूसरे बड़े फलों में मिलने वाले यौगिक के समान होता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि केले का अर्क बनाने के लिए इसे फल से निकालते हैं. इस रसायन से नर चूहों में हार्मोन में परिवर्तन होने लगता है. इसके बाद टीम ने अलग से इस थ्योरी पर काम करने की योजना बनाई. उन्होंने केले के अर्क को नर चूहों के पिंजरे में डाल दिया. इसके बाद नतीजा देखकर वह हैरान हो गए. दरअसल केले के अर्क को देखने के बाद चूहों में तनाव अधिक बढ़ गया था. ये तनाव बिल्कुल उतना ही था, जितना दूसरे चूहों से लड़ाई के दौरान उनमें होता है.

देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक होने वाली है पूरी तरह बैन

अब पानी पी कर की फेंक नहीं पाएंगे बोतल, देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक हो जाएगी पूरी तरह बैन

विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण को बचाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. एक तरफ जहां दुनिया को बचाने की मुहिम में भारत पूरी मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, वहीं अब इस सिलसिले में केंद्र सरकार देशभर में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन करने की तैयारी में है.

सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर पूरी तरह बैन की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक खासकर पिन्नियों और पानी की बोतलों से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. दरअसल केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी करते हुए सिंगल-यूज प्लास्टिक (Single-Use Plastic) को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की सलाह दी है. केंद्र ने कहा है कि इससे ‘स्वच्छ और हरित’ पर्यावरण को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. सरकार का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक देश के 4,704 में से 2,591 शहरी स्थानीय निकायों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक को पहले से प्रतिबंधित (Ban) कर रखा है. ऐसे में अब सभी राज्यों (States) और केंद्र शासित प्रदेश (UT’s) मिलकर ये सुनिश्चित करें कि बाकी बचे 2,100 से अधिक निकाय भी 30 जून, 2022 तक हर हाल में इसे प्रतिबंधित कर दे.

#WorldEnvironmentDay2022: Centre writes to states to phase out Single Use Plastic #WorldEnvironmentDay https://t.co/cSFvL7ffOS— Zee News English (@ZeeNewsEnglish) June 5, 2022

बड़े पैमाने पर चलेगा अभियान

जारी की गई सरकारी एडवायजरी में पर्यावरण बचाने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता के तहत केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 जून तक जिन आदेशों को पूरा करने के लिए कई गतिविधियां शुरू करने को कहा गया है. इसमें खासकर प्लास्टिक की पन्नी और पानी की बोतलों वाले कचरे की सफाई के लिए बड़े पैमाने पर सफाई और ‘प्लॉगिंग’ अभियान चलाने को कहा गया है. बता दें कि फिलहाल स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय जो काम कर रहे हैं उसमें प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और एसयूपी का उन्मूलन भी शामिल है. 

गलती करने वालों पर लगेगा जुर्माना

रिपोर्ट के अनुसार केंद्र की एडवायजरी में ये भी कहा गया है कि सफाई के काम में तेजी के लिए यूएलबी को एसयूपी ‘हॉटस्पॉट’ की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने की जरूरत होगी. इस सलाह में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की कार्रवाई का लाभ उठाने के साथ कुछ और विशेष प्रवर्तन दस्तों का गठन करने को कहा गया है. इसी तरह तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों को औचक निरीक्षण बढ़ाने को कहा गया है. इसी तरह SUP प्रतिबंधों को लागू करने के लिए गलती करने वालों पर भारी जुर्माना यानी कठोर अर्थदंड लगाने की सलाह दी गई है.

प्रतिबंध के बाद भी हो रहा प्रयोग

गौरतलब है कि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2021 के मुताबिक, 75 माइक्रोन यानि 0.075 मिमी मोटाई से कम के प्लास्टिक से बने कैरी बैग के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और किसी भी तरह के उपयोग पर 30 सितंबर, 2021 से प्रतिबंध लगा हुआ है. ऐसे में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिलने की वजह से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रहे संगठन सरकार से कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं.

बड़े काम का है लीची का छिलका

लीची का लुत्फ उठाएं, लेकिन इसके छिलके को कूड़ेदान में न फेंके; फायदों को जानकर रह जाएंगे दंग

Lychee Peel Benefits: लीची का लुत्फ उठाएं, लेकिन इसके छिलके को कूड़ेदान में न फेंके; इन फायदों से रह जाएंगे महरूम

Lychee Peel For Home Remedies: लीची के फायदों के बारे में हम सभी वाकिफ हैं, लेकिन क्या आप इसके छिलके के फायदों के बारे में आप जानते हैं?

Importance Of Lychee Peel: आजकल फल के बाजार लीची से भरे पड़े हैं, ये एक ऐसा फ्रूट है जिसकी पैदावार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सबसे ज्यादा होती है, लेकिन पूरे भारत में इसके शौकीनों की कोई कमी नहीं है, हालांकि लीची खाने के बाद इसके छिलके को हम अक्सर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि छिलकों के भी कई फायदे हैं

लीची से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स

लीची (Lychee) में विटामिन सी, फोलेट, नियासिन, राइबोफ्लेविन, बीटा कैरोटीन और फोलेट जैसे अहम न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं. इससे हमारे शरीर को कई तरीके से फायदे पहुंच सकते हैं. 

लीची खाने के 5 फायदे

1. शरीर रहता है हाइड्रेट
2. मोटापा होगा कम
3. डाइजेशन रहेगा दुरुस्त
4. गले की खराश से मिलेगी निजात
5. गर्भवती महिलाओं के लिए फायदे


लीची के ज्यादातर फायदों के बारे में हम जरूर जानते होंगे, लेकिन इसके छिलके को हम हमेशा कूड़ेदान में फेंक देते है, लेकिन ये जानकर हैरानी होगी कि इसके लीची के छिलके भी कम लाभकारी नहीं है. 

लीची के छिलकों के फायदे 

-लीची के छिलकों को फेस स्क्रब (Lychee Face Scrub) के रूप उपयोग किया जा सकता है. इसके लिए छिलके को मिक्सर ग्राइंडर डालकर चावल का आटा, एलोवेरा जेल और गुलाब जल पीस लें. इसे अपने चेहरे को मसाज देकर साफ पानी से धो लें. इससे आपका चेहरा निखार आ जाएगा.

– लीची के छिलके से गर्दन पर पड़ी मैल भी ठीक हो सकती है, इसके लिए छिलके को पीसकर नींबू का रस, नारियल तेल, हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करना है. इस गर्दन की डेड सेल्स निकल जाएगी.

– एड़ियों की गंदगी साफ करने के लीची के छिलका बेहद मददगार है. इसके लिए छिलके को दरदरा पीसकर मुल्तानी मिट्टी, सेब का सिरका, खाने का सोडा मिक्स कर लें. इससे एड़ियों पर लगाकर 20 मिनट तक छोड़ दें. इसके बाद पानी से साफ कर लें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.) साभार- zee news desk

डाकघरों में अब मिल सकेगा ट्रेन का टिकट

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय रेलवे ने देशभर में 45,000 डाकघरों में टिकट बुकिंग की व्यवस्था की तैयारी कर ली है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर ये फैसल लिया गया है।

इसके लिए रेलवे ने 45,000 डाकघरों में टिकटिंग की व्यवस्था की है। यात्री बिना किसी परेशानी के यहां से टिकट ले सकते हैं। पिछले दिनों खजुराहो में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा करते हुए यह भी बताया था कि अब रेल टिकट लेने में यात्रियों को परेशानी नहीं होगी। इसके साथ ही खजुराहो और दिल्ली के बीच वंदेभारत ट्रेन पर अपडेट देते हुए रेल मंत्री ने बताया था कि इस रूट पर अगस्त तक इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो जाएगा। तब तक वंदे भारत ट्रेन भी चलने लगेगी। अर्थात अगस्त के बाद कभी भी मध्य प्रदेश को वंदे भारत ट्रेन की सौगात मिल सकती है, जिसके लिए डाकघर से ही टिकट बुक हो सकता है।

गौरतलब है कि स्टेशन से दूर दराज में रहने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डाक घरों में रेल आरक्षण कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है ताकि रेल रिजर्वेशन के लिए लोगों को भटकना न पड़े। इन डाक घरों में रेल आरक्षण बुकिंग का कार्य डाक घर के प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। रेलवे द्वारा नेटवर्क कनेक्टिविटी के साथ हार्डवेयर उपलब्ध कराया गया है। इस योजना से शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को आस पास के डाकघरों से अपनी ट्रेनों के लिए रिजर्वेशन कराने की सुविधा मिलेगी। रेलवे ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वर्तमान में रेलवे द्वारा डाक घरों में प्रदत्त कराई गई रेल आरक्षण बुकिंग की सुविधा का लाभ उठाएं।

ऑटोमेटिक टिकट वेंडिग मशीन- इससे पहले भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए उन्हें वेटिंग और लम्बी कतारों से मुक्ति देते हुए ई-टिकटिग की नई सुविधा भी शुरू की है। इसके तहत रेल यात्री अब यात्रा टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और मंथली पास के नवीकरण के लिए ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन पर पेटीएम, फोनपे, फ्रीचार्ज जैसे यूपीआई बेस्ड मोबाइल ऐप से क्यूआर कोड स्कैन कर डिजीटल पेमेंट कर सकेंगे। इस सुविधा में यात्री ऑटोमेटिक टिकट वेंडिग मशीन से मिलने वाली सुविधाओं के लिए डिजिटिल ट्रांजेक्शन से भी भुगतान कर सकेंगे। यात्री इसके जरिये एटीवीएम स्मार्ट कार्ड को भी रिचार्ज करा सकते हैं। क्यूआर कोड को स्कैन कर यात्री फोन के माध्यम से डिजीटल भुगतान कर टिकट प्राप्त कर सकते हैं।

इसे स्कैन करने और पेमेंट करने के बाद यात्रियों को तुरन्त अपने गंतव्य का टिकट मिल जाएगा। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा डिजीटल मोड में पेमेंट करें और लंबी लाइन से छुटकारा पाएं।

गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड को ऐसे स्टेशनों पर अक्सर यात्रियों की तरफ से घंटों लाइन में लग कर टिकट लेने की शिकायत मिली थी। कई बार स्टेशनों पर लंबी-लंबी लाइन में लगने से यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है। लेकिन अब टिकट बिक्री के विकेंद्रीकरण के बाद यात्रियों को घंटों लंबी कतारों में नहीं खड़ा होना पड़ेगा। शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के यात्रियों को ध्यान में रखकर दो अगल-अलग सुविधाओं के बेहतर किया गया है।

6G आते ही खत्म हो जाएंगे स्मार्टफोन? Nokia के CEO की भविष्यवाणी

6G

6G Technology: दुनिया के कई देशों में 5G टेक्नोलॉजी आ चुकी है और अब 6G की तैयारी हो रही है. Nokia के CEO Pekka Lundmark ने 6G और स्मार्टफोन्स के फ्यूचर को लेकर एक भविष्यवाणी की है. उनका मानना है कि साल 2030 तक स्मार्टफोन खत्म हो जाएंगे.

6G

  • नोकिया CEO Pekka Lundmark ने की भविष्यवाणी
  • साल 2030 तक खत्म हो जाएगी स्मार्टफोन की जरूरत?
  • दावोस में World Economic Forum में कही यह बात

फोन से मोबाइल फोन और फिर स्मार्टफोन तक का सफर बहुत छोटा है. बातचीत के लिए तैयार किए गए इस डिवाइस का इतिहास आम लोगों के बीच मुश्किल से कुछ दशक का है. कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही यह इतिहास का हिस्सा भी बन सकते हैं. स्मार्टफोन तेजी से विकसित होने वाले प्रोडक्ट्स में से एक है.

आज से 15-20 साल पहले मौजूदा स्मार्टफोन्स के फीचर्स वाले किसी डिवाइस को हाथ में लेकर घूमना एक कल्पना मात्र थी. स्मार्टफोन्स के तेज विकास की वजह से ही इसके भविष्य पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.  

Nokia के CEO की भविष्यवाणी 

दरअसल, Nokia के CEO Pekka Lundmark का मानना है कि साल 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी शुरू हो चुकी होगी, लेकिन तब तक स्मार्टफोन ‘कॉमन इंटरफेस’ नहीं होंगे. उन्होंने ये बात दावोस में चल रहे World Economic Forum में कही है.  Pekka Lundmark ने कहा कि कॉमर्शियल मार्केट में 2030 तक 6G की एंट्री हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि 6G के आने से पहले ही लोग स्मार्टफोन की तुलना में स्मार्ट ग्लासेस और दूसरे डिवाइस को यूज करने लगेंगे. नोकिया सीईओ ने बताया, ‘तब तक, हम जिन स्मार्टफोन्स को यूज कर रहे हैं, वह सबसे ज्यादा यूज होने वाला इंटरफेस नहीं रह जाएंगे. इनमें से बहुत सी चीजें हमारी बॉडी में सीधे तौर पर मिलने लगेंगी.’

एलॉन मस्क की कंपनी कर रही इस पर काम

हालांकि, Lundmark ने ये नहीं बताया है कि वह किस डिवाइस के बारे में बात कर रहे हैं. एलॉन मस्क की Neuralink जैसी कुछ कंपनियां फिलहाल इस पर काम कर रही हैं और ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस तैयार कर रही हैं. 

पिछले साल अप्रैल में मस्क ने एक फुटेज रिलीज कर इसका डेमो दिखाया था. वीडियो में उन्होंने दिखाया कि कैसे एक मेल मकाक (अफ्रीकी लंगूर) के दिमाग में चिप लगाई गई है और वह ‘माइंड पॉन्ग’ प्ले कर रहा है.

लंगूर को जॉयस्टिक मूव करने के लिए ट्रेंड जरूर किया गया था, लेकिन इस टेस्ट के दौरान उसके अनप्लग रखा गया था. मकाक पैडल को अपने दिमाग की मदद से कंट्रोल कर रहा था. हालांकि, उसे ऐसा लग रहा था कि वह जॉयस्टिक की मदद से ऐसा कर पा रहा है.

कब तक आएगा 6G?

6G को लेकर अभी बहुत सी चीजें क्लियर नहीं है. भारत अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी कर रहा है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6G पर बताया था कि एक टास्ट फोर्स को तैयार किया गया है. इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी.

इससे पहले भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी घोषणा की थी कि देश अपनी स्वदेशी 6G तकनीक पर काम कर रहा है। 2023-2024 तक ये तकनीक तैयार भी हो सकती है। 6G को लेकर अभी कुछ भी साफ नहीं है। अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी है और इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी। ऐसे में नोकिया के सीईओ का ये बयान भविष्य में टेक्नोलॉजी की मजबूती को बताता है।

आचार्य द्विवेदी स्मृति अभियान के रजत जयंती समारोह में होगा देशभर के साहित्यकारों-पत्रकारों का जमावड़ा

आचार्य द्विवेदी स्मृति अभियान का 25वां वर्ष

रजत जयंती समारोह में होगा देशभर के साहित्यकारों-पत्रकारों का जमावड़ा

मुख्य आकर्षण
-दौलतपुर में महावीर चौरा पर सुंदरकांड पाठ से रजत जयंती समारोह की शुरुआत
-दो दिवसीय मुख्य वार्षिक समारोह 11-12 नवंबर को
-ऐतिहासिक दस्तावेजों और दुर्लभ फोटो वाली प्रदर्शनी का आयोजन
-रायबरेली शहर में आचार्य द्विवेदी स्मृति खेल महाकुंभ
-गीत-संगीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से आचार्य द्विवेदी के जीवन वृत्त की प्रस्तुति
-“आचार्य पथ” स्मारिका/पत्रिका का विशेषांक

रायबरेली से शुरू हुआ आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। अभियान की रजत जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। 11-12 नवंबर 2022 को आयोजित होने वाले रजत जयंती समारोह में देशभर के साहित्यकारों पत्रकारों को आमंत्रित किया जाएगा। लखनऊ और दिल्ली में भी कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया। आचार्य पथ स्मारिका का विशेषांक भी निकालने की तैयारी है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की रायबरेली के आशीर्वाद इन होटल में आयोजित बैठक में तय किया गया कि रजत जयंती वर्ष में आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को नए रूप में संजोया जाएगा। वर्ष पर्यंत कार्यक्रमों की श्रंखला चलेगी। इसकी शुरुआत आचार्य द्विवेदी के जन्म ग्राम दौलतपुर में सुंदरकांड के पाठ के साथ होगी। आचार्य द्विवेदी स्मृति खेल महाकुंभ के साथ ही जनपद के साहित्यिक स्वाधीनता संग्राम इतिहास को समेटने वाली प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 12 नवंबर को वार्षिक आयोजन भी इस बार दो दिवसीय होगा। इसमें देशभर के पत्रकार-साहित्यकार शामिल होंगे। आचार्य द्विवेदी के जीवन वृत्त को गीत-संगीत, नाटक और नृत्य के माध्यम से भी प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है।


अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि स्मृति संरक्षण अभियान 9 मई 1998 को समाज और सरकार को जगाने के लिए ध्यानाकर्षण धरने के माध्यम से प्रारंभ हुआ था। यह स्मृति अभियान 9 मई से रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर गया है। 25 वर्ष के सफर में कई सोपान तय किए गए। शहर से लेकर गांव तक तीन स्मृति द्वार बनाए गए। कई सरकारी और निजी संस्थाओं में सभागार आचार्य द्विवेदी के नाम पर रखे गए।
उन्होंने बताया कि आचार्य द्विवेदी की स्मृतियां सात समंदर पार अमेरिका तक पहुंच गई। अमेरिका इकाई की कमान श्रीमती मंजु मिश्रा एवं सदस्य श्रीमती रचना श्रीवास्तव, श्रीमती शुभ्रा ओझा, कुसुम नैपसिक, डॉक्टर ममता त्रिपाठी संभाले हुए हैं। अमेरिका इकाई साल में आचार्य द्विवेदी की स्मृति और हिंदी के प्रचार- प्रसार के लिए ऑनलाइन चार कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इनमें बच्चों की प्रतियोगिताएं भी शामिल हैं।

कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति-
महामंत्री अनिल मिश्र ने बताया कि कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। खेल प्रतियोगिताओं के लिए मुन्ना लाल साहू, स्मिता दुबे, अनुपमा रावत और हिमांशु तिवारी को प्रभारी बनाया गया है। नाटक-नृत्य आदि के लिए अमित सिंह, रवि प्रताप सिंह और क्षमता मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई है। प्रदर्शनी का प्रभार अभिषेक द्विवेदी, नीलेश मिश्रा और अरुण पांडे को सौंपा गया है।
बैठक के अंत में डॉ सुशील चंद्र मिश्र ने सभी को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं। बैठक में राजीव भार्गव, दिनेश शुक्ला, सुधीर द्विवेदी, स्वतंत्र पांडे, राजेश वर्मा, श्रीमती रजनी सक्सेना, रामेंद्र मिश्रा, अमर द्विवेदी, दीपक तिवारी, लंबू बाजपेई, शशिकांत अवस्थी, घनश्याम मिश्रा, राकेश मोहन मिश्रा, राजेश द्विवेदी, कृष्ण मनोहर मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, रोहित मिश्रा, यशी अवस्थी, शिखर अवस्थी, हर्षित द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

आचार्य द्विवेदी के नाम पर चौराहे का सुंदरीकरण करने का सुझाव

रजत जयंती वर्ष की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक में कई सुझाव भी आए। समिति के सदस्य राजेश वर्मा ने सुझाव दिया कि आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान के रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए शहर के एक चौराहे को विकसित किया जाए। सदस्य चंद्रमणि बाजपेई ने छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तकालय- वाचनालय स्थापित किए जाने पर जोर दिया।

आचार्य द्विवेदी के साहित्य का डिजिटलाइजेशन भी होगा

रजत जयंती वर्ष मनाने की तैयारियों से संबंधित बैठक में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिका इकाई की अध्यक्ष श्रीमती मंजु मिश्रा भी ऑनलाइन शामिल हुईं। उन्होंने आचार्य द्विवेदी के साहित्य समेत अन्य विषयों पर लिखी गई पुस्तकों को डिजिटल फॉर्म पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने आश्वस्त किया कि इस दिशा में भी काम तेज किया जाएगा।

सारे उत्तर भारत में वैचारिक क्रांति की मशाल जलाने वाले उरई निवासी युवा पत्रकार नीरज भाई पटेल के बहाने आज की पत्रकारिता की एक पड़ताल-


01 जून को नेशनल जनमत न्यूज चैनल और मासिक पत्रिका मिशन जनमत के प्रधान संपादक नीरज भाई पटेल का जन्म दिन था। वैसे तो इस युवा पत्रकार के प्रशंसकों की जमात समूचे उत्तर भारत में फैली हुई है जिससे उनको जगह-जगह से बधाइंया मिली लेकिन उनके गृह जनपद उरई में स्वाभाविक रूप से उत्साह कुछ अधिक ही रहा। इसके दो दिन पहले 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया गया। इस दिन पत्रकारों की दशा और दिशा को लेकर कई जगह व्यापक चर्चायें हुई। नीरज पटेल का संदर्भ जुड़ने से ये चर्चायें नये आयामों को छूने लगती हैं। चिंतन के वे आयाम जो समकालीन परिस्थितियों में बहुत जरूरी हैं।
नीरज पटेल की पत्रकारिता अतीत की पत्रकारिता की याद दिला देती है। आधुनिक पत्रकारिता के उदय काल में इस विधा का मुख्य उद्देश्य जनमत का निर्माण करना था जिसकी वजह से पत्रकारिता में सूचनाओं के व्यापार के स्थान पर विचारों को प्रसारित करने पर बल रहता था। स्वाधीनता की लड़ाई के महानायक गांधी जी की पत्रकारिता को इस संदर्भ में स्मरण किया जाना प्रासंगिक है। उन्होंने जब यंग इंडिया के संपादन का दायित्व स्वीकार किया उस समय इस द्विसाप्ताहिक समाचार पत्र की प्रसार संख्या मात्र 1200 थी लेकिन तीन वर्षो में ही इसका प्रसार 40 हजार की संख्या पर पहुंच गया था। इसलिए नहीं कि गांधी जी ने उसमें खबरों की संख्या बढ़ा दी हो या आज की पत्रकारिता की तरह प्रसार और टीआरपी बढ़ाने के बाजारू हथकंडे इस्तेमाल किये हों बल्कि लोग गांधी जी के विचारों से प्रेरणा ग्रहण करते थे और गांधी जी के उस समय की हर घटना परिघटना पर विचारों को जानने की ललक लोगों को यंग इंडिया की ओर तेजी से खींचने में कामयाब हुई। जब यंग इंडिया में लिखे उनके विचारों से नाराज होकर अंग्रेजों ने उन पर देश द्रोह का अभियोग लगाकर उन्हें कारावासित करा दिया तो कुछ ही दिनों में यंग इंडिया का प्रसार घटकर मात्र 08 हजार रह गया क्योंकि उसमें लोगों को अब गांधी जी के विचार पढ़ने का अवसर उपलब्ध नहीं रह गया था।
आजादी के बाद भी अखबार मूल रूप से विचारों के लिए ही पढ़े जाते थे। मैने अपने किशोर जीवन में दैनिक वीर अर्जुन में उसके प्रधान संपादक के0 नरेन्द्र के संपादकीय पढ़ने के लिए उस समय के प्रौढ़ों और बुजुर्गो में दीवानगी का आलम देखा था। के0 नरेन्द्र का लेखन हिन्दूवादी था और कांग्रेस का जमाना होते हुए भी एक खासा वर्ग ऐसे विचारों से प्रभावित रहता था जिसकी भीड़ सार्वजनिक पुस्तकालय के खुलने पर वीर अर्जुन पर उसमें प्रकाशित अग्र लेखों को पढ़ने के लिए टूट सी पड़ती थी। बैनेट कोलमैन एंड कंपनी की राजनीतिक पत्रिका दिनमान पर सोशलिस्टों का कब्जा रहता था और वे अपने एंगल से राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर वैचारिक प्रस्तुतियां पत्रिका में सजाते थे। इस पत्रिका की भी बहुत डिमांड थी साथ-साथ में बहुत प्रतिष्ठा भी। हर कुलीन घर में चाहे उसके लोग दिनमान पढ़ें या न पढ़ें पर अपने बैठके में रखने के लिए दिनमान मंगाते जरूर थे। ड्राइंग रूम में दिनमान का होना स्टेट्स सिम्बल का पर्याय था। बाद में बैनेट कोलमैन एंड कंपनी के मालिकों की नई पीढ़ी ने दिनमान को बंद करने का फरमान यह कहते हुए जारी कर दिया था कि इसमें गरीबों और नंगे भूखों की चर्चायें छपती हैं जो बाजार में कोई अहमियत नहीं रखते इस कारण उनके बीच प्रसार के आधार पर दिनमान के लिए हमें कभी विज्ञापन नहीं मिलेगें और घाटे वाले प्रकाशन हमको मंजूर नहीं हैं। बाद में लेआउट के महारथी बनकर पत्रकारिता जगत में स्थापित हुए घनश्याम पंकज ने दिनमान को फायदे में चलाने का मोर्चा संभाला और उसके वैचारिक तत्व को समाप्त कर उसे बाजारू सांचे में ढ़ाल डाला। यह दूसरी बात है कि इसके बावजूद वे दिनमान में कोई करिश्मा नहीं कर पाये।
जहां तक मीडिया के वर्तमान के ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन बटोरने के प्रयोजन की बात है गांधी जी तो इसके बहुत खिलाफ थे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहने के अपने समय में ही इडियन ओपिनियन नाम के अखबार का संपादन किया था और इस दौरान यह संकल्प ले लिया था कि वे अपने अखबार के एक इंच स्पेस को भी विज्ञापन के लिए जाया नहीं होने देंगे। भारत आने के बाद उन्होंने यंग इंडिया, नवजीवन और हरिजन अखबारों में भी इस व्रत का पालन किया। उनके प्रभाव के कारण आजादी के बाद भी कई दशकों तक पत्र-पत्रिकाओं को लेकर अलग तरह की स्थिति बनी रही। कुलीन सेठों का रूझान पत्र-पत्रिकायें निकालने की ओर हुआ तो उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि भले ही उनमें घाटा हो जिसकी पूर्ति उनके अन्य धंधों से की जाये पर उनके प्रकाशनों की समाज में गरिमापूर्ण वैचारिक प्रतिष्ठा रहे। टाइम्स आफ इंडिया के मालिकान साहू शांति प्रसाद जैन अपने प्रकाशनों में इसी ख्याल का निर्वाह करते थे इसलिए उनके प्रकाशनों के संपादक साहित्य, संस्कृति और राजनीतिक विज्ञान की असाधारण हस्तियों में से चयनित किये जाते थे जिनके काम में खुद साहू शांति प्रसाद जैन भी दखल नहीं कर पाते थे पर उन्हें इसमें कोई हेठी महसूस नहीं होती थी।
पर जब मीडिया उद्योग बनने की ओर अग्रसर हुई तो पत्रकारिता के सरोकार बदल गये। जिन दिग्गज लिक्खाड़ों को यह गुमान था कि अखबार या न्यूज चैनल उनकी वजह से चलते हैं और अगर उन्होंने छोड़ दिया तो गांधी जी के हट जाने की तरह वे जिस प्रतिष्ठान में काम करते हैं वह भी औंधे मुंह जा गिरेगा उन सभी को मीडिया जगत से आज आउट किया जा चुका है। पुण्य प्रसून वाजपेयी के हटने के बाद आज तक न्यूज चैनल टीआरपी में पिछड़ने की बजाय आगे बढ़ा है। प्रिंट मीडिया का भी यही आलम है। किसी अखबार को चलाने के लिए अब दिग्गज संपादक की कोई जरूरत नहीं रह गई है।
लेकिन अब बात यही आती है कि क्या पत्रकारिता का उद्देश्य वास्तव में बदला जाना संभव है। अखबार और न्यूज चैनल सिर्फ विज्ञापनों के संवाहक हैं जिसके लिए पत्रकारिता में हर तरह का समझौता जायज है। इसी दृष्टि के चलते आज यह मांग भी उठने लगी है कि न्यूज चैनलों का दर्जा बदल कर उन्हें मनोरंजन चैनल के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए। आज पाठको और दर्शकों की तादात कई गुना बढ़ चुकी है लेकिन क्या मीडिया रचनात्मक जनमत के निर्माण में कोई सक्षम भूमिका निर्वाह कर पा रहा है। इसी बिन्दु से आगे के विमर्श की राह खुलती है। मीडिया को व्यापारिक उद्यम की तरह चलाने की प्रवृत्ति ने पत्रकारिता के स्वरूप को ही बदल डाला है। अखबारों में हर जिले के लिए चार पेज एलाट किये जाते तो इसलिए नहीं कि उनमें लोगों को अपने क्षेत्र की सार्थक सूचनायें ज्यादा से ज्यादा परिमाण में दी जा सकें बल्कि सूचनाओं के नाम पर पीआरशिप को बढ़ावा दिया जा रहा है। कोई कार्यक्रम होता है तो रिपोर्टर काम के लोड के कारण उसकी सही रिपोर्टिंग के लिए पूरा समय नहीं दे सकता। वह फोटो खींचता है और चल देता है। इसके बाद आयोजक एक विज्ञप्ति बनाकर उसके पास भिजवा देते हैं कि कार्यक्रम में अमुक-अमुक ने प्रतिभाग किया। रिपोर्टर मुख्य अतिथि के संबोधन की पंक्तियां अपने मन से लिखकर और प्रतिभागियों की लिस्ट टांचकर फोटो के साथ हैडिंग और क्रासर का इस्तेमाल करके चार कालम की खबर साया कर देता है। अगर कोई अकादमिक आयोजन हुआ तो उसे भी यही ट्रीटमेंट मिलेगा और राजनैतिक हुआ तो उसे भी। ऐसी खबरों की क्या सार्थकता हो सकती है। सूचनाओं की अधिकता व्यापार बढ़ाने में सहायक होती है इसलिए अंधाधुंध सूचनायें बढ़ा दी गई हैं जबकि विचार और विश्लेषण के लिए स्पेस सिकोड़ दिया गया है। न्यूज चैनलों में भी यही हाल है। न्यूज चैनलों और अखबारों के मुकाबले प्रमुख पत्रकारों, विचारकों द्वारा संचालित पोर्टलों के दर्शकों का बढ़ना यह बताता है कि संक्रमण कालीन अलबेली, अटपटी पत्रकारिता से लोग ऊबने लगे हैं।
नीरज पटेल की पत्रकारिता विचारों की पत्रकारिता के पुनर्जीवन का आभास कराने वाली है। सामाजिक उपनिवेशवाद के पुनरूत्थान के इस दौर के खतरों को समय रहते भांपने की जरूरत है वरना यह देश फिर उसी कगार पर पहुंच जायेगा जहां इसने दासता की कई सदियों को भोगा है। सामाजिक अन्याय के सोच पर उनका चैनल और पत्रिका जबरदस्त प्रहार कर रहे हैं जिससे वंचितों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की प्रेरणा मिल रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि नीरज की पत्रकारिता में प्रतिशोध और प्रतिक्रिया का कोई पुट नहीं है जबकि सामाजिक न्याय की वैचारिकी में इस तरह के जोखिम की बहुतायत होती है। इसीलिए वे डा0 लोहिया से लेकर वीपी सिंह तक को नवाजने से नहीं चूकते जो भले ही उस वर्ग से आये हों जो सामाजिक अन्याय के लिए जिम्मेदार रहा है पर उन्होंने व्यवस्था और समाज को मानवीय बनाने में योगदान दिया। नीरज पटेल कहते हैं कि वंचितों को ऐसे महापुरूषों के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करने में संकोच नहीं करना चाहिए। वे वंचितों के बीच के विभीषणों की शिनाख्त में भी पूरी तरह निर्मम रहते हैं जो एक पत्रकार की बेबाकी के अनुरूप है। युवा होते हुए भी उनकी परिपक्वता बेमिसाल है। सामाजिक परिवर्तन के कई अभियान गिरोहबंदी की भावना की तार्किक परिणति पर पहुंचने के पहले ही बलि चढ़ा दिये गये। मधु लिमये इसका उदाहरण है जिनके त्याग पर संदेह नहीं किया जा सकता पर उन्हें मालूम था कि मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद लोहियावाद की अग्रसरता किस ओर होना चाहिए फिर भी शायद उनकी वर्ग चेतना जाग गई या अन्य कारणों से वे गिरोहबाजी निभाने के लिए अभिशप्त हो गये। उन्हांेने लोहियावाद का बाना पहन रखा फिर भी उन्हें मुलायम सिंह की वंशवादी, परिवारवादी और डाला सीमेंट फैक्ट्री के मजदूरों पर गोली चलवाने की राजनीति का समर्थन करने में कोई धर्म संकट महसूस नहीं हुआ क्योंकि उन्हें बाहर से आये वीपी सिंह को सामाजिक न्याय की राजनीति को तार्किक परिणति पर पहुंचाने का श्रेय मिलना गवारा नहीं था। पौराणिक युग के उन तपस्यियों और ऋषियों को याद किया जाना चाहिए जिन्होंने त्यागपूर्ण जीवन इसलिए जिया ताकि सामाजिक उपनिवेशवाद को नैतिक प्रतिष्ठा दिलवाने के लिए अपना उपयोग करा सकें। हर शातिर षणयंत्र में ऐसे अवयव जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान करते रहे हैं। बहरहाल नीरज पटेल किसी ऐसी गिरोहबंदी की जकड़ में नहीं हैं इसलिए दोहरे चेहरे वाले अपने भी उनके तीरों से बेहाल रहते हैं। जन्म दिन पर मेरी ओर से भी उन्हें बधाई और उनकी पत्रकारिता के फलदायी होने की शुभकामनाएं।

-केपी सिंह (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

गाने जो हिट थे हिट रहेंगे ! बिनाका गीतमाला और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल !!

गाने जो हिट थे हिट रहेंगे  ! बिनाका गीतमाला और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल !! साभार-अजय पौंडरिक

एक संगीत प्रेमी के रूप में हम बीनका गीतमाला में श्री अमीन सयानी द्वारा मापे गए गीतों की लोकप्रियता पर विश्वास करते हैं…।

साल 1953 में…

बिनाका गीतमाला हिंदी सिनेमा के शीर्ष फिल्मी गीतों का एक साप्ताहिक रेडियो काउंटडाउन शो था, जिसे लाखों हिंदी संगीत प्रेमियों ने सुना, जिसे 1953 से 1988 तक रेडियो सीलोन पर प्रसारित किया गया और फिर 1989 में ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क की विविध भारती सेवा में स्थानांतरित कर दिया गया। 1994 तक चला। यह भारतीय फिल्मी गीतों का पहला रेडियो काउंटडाउन शो था और इसके चलने के दौरान इसे भारत में सबसे लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम के रूप में उद्धृत किया गया है। इसे बिनाका द्वारा प्रायोजित किया गया था, जहां से इसे इसका नाम मिला। बिनाका गीतमाला, और इसके बाद के अवतारों का नाम सिबाका, सिबाका संगीतमाला, सिबाका गीतमाला, और कोलगेट सिबाका संगीतमाला के नाम पर रेडियो सीलोन पर और फिर विविध भारती पर 1954 से 1994 तक चला, जिसमें वार्षिक वर्ष के अंत की सूची 1954 से 1993 तक प्रसारित हुई।

बिनाका गीतमाला के वार्षिक प्रोग्राम में बजनेवाले  “फाइनल गीतों” की गिनती करें, तो 1953 से 1993 तक “फाइनल  गीतों ” की संख्या 40 वर्षों में 1259 हो जाती है

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल          २४५  गाने 

शंकर-जयकिशन               १४४  गाने     

राहुल देव बर्मन                  १३३  गाने 

कल्याणजी-आनंदजी            ७५ गाने   

सचिन देव बर्मन                   ५५ गाने     

रवि                                  ४६ गाने  

बप्पी लाहिरी                       ४४ गाने 

नौशाद                             ३४  गाने                           

ओ  पी  नय्यर                    ३३  गाने 

राजेश रोशन                      २८  गाने

मदन मोहन                        २४ गाने 

रोशन                              १७ गाने 

सलिल  चौधरी                  १५  गाने 

AMIN SAYANI & PYARELAL (Laxmikant-Pyarelal)

बिनाका गीतमाला में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के २४५”फाइनल गीतों” की वर्षवार सूची / स्थिति।

1963

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, जिन्होंने कुछ “पारसमणि” फिल्म के अविस्मरणीय संगीत के साथ धमाकेदार शुरुआत की. इस फिल्म से उनकी चार रचनाओं को बिनाका गीतमाला साप्ताहिक और दो गाने फाइनल में शामिल किया गया जो पायदान नंबर १५ और  पायदान नम्बर ६ पर बजे. बहोत ही बढियाँ शरुआत,लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए.. 

नंबर 15   वो जब याद आया लता – रफ़ी.. “पारसमणि”

नंबर 06  हसता  हुआ नूरानी चेहरा, लता – कमल बारोट “पारसमणि”

1964

बिनाका गीतमाला में  वर्ष के अंत में 32 “फाइनल गीत” हैं। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के  “हरिश्चंद्र तारामती” के कुछ बेहतरीन  गीत हैं. “दोस्ती” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल – मोहम्मद रफ़ी (३७९ गाने ) और  “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल – किशोर कुमार (४०२ गाने ) का लम्बा दौर चला.  “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे” से लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बक्शी की रिकॉर्ड ब्रेकिंग पार्टनरशिप शुरू (३०२ फिल्म्स और १६८० गाने )

नंबर 30  मैं एक नन्हा सा .. लता .. “हरिश्चंद्र तारामती”

नंबर 26  राही मनावा .. रफ़ी ..”दोस्ती”

नंबर 21  चाहुंगा मैं तुझे..रफ़ी..”दोस्ती”

नंबर 06  मेरे महबूब क़यामत ..किशोर .. “मिस्टर एक्स इन बॉम्बे”

1965

बिनाका गीतमाला 1965 भले ही बॉलीवुड संगीत निर्देशकों के बीच धीरे-धीरे लेकिन लगातार बदलाव देख रहा हो, क्योंकि इस बार शीर्ष स्लॉट सहित अधिकांश स्लॉट पर कल्याणजी आनंदजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल,       आर डी बर्मन जैसे नवागंतुकों का कब्जा था।

जैसा कि पहले के वर्षों में हुआ था, इस वर्ष भी भारत में एक फिल्मी गीत को पंथ का दर्जा ( cult status) प्राप्त हुआ। यह गीत था- संत ज्ञानेश्वर का “ज्योत से ज्योत जगाते ते चलो”।

नंबर 29  खुदा मुहब्बत ना होती..रफ़ी…”बॉक्सर”

नंबर 25  कोई जब रहा ना पाये..रफी..दोस्ती’

नंबर 24  नींद निगाहो की .. लता .. “लुटेरा”

नंबर 18  अजनबी तुम जाने…किशोर..हम सब उस्ताद है”

नंबर 04  ज्योत से ज्योत जगाते चलो … लता-मुकेश “संत ज्ञानेश्वर”

नंबर 02  चाहुंगा मैं तुझे … रफ़ी “दोस्ती”

1966

नंबर 26  दिन जवानी की चार यार ..किशोर .. “प्यार किए जा”

नंबर 24  गोर हाथों पर ना जुल्म..रफ़ी.”प्यार किए जा”

नंबर 20   पायल की झंकार रस्ते .. लता .. “मेरे लाल”

नंबर 14   ये आज कल के लडके..उषा “दिल्लगी”

1967

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत निर्देशन में मिलन के गीतों ने 1967 में पूरे देश में धूम मचा दी और बिनाका गीतमाला कोई अपवाद नहीं था। एक और नवागंतुक, आर डी बर्मन, जिनका संगीत निर्देशक के रूप में करियर 1961 के बाद रुका हुआ था, ने अचानक अपने करियर को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ते हुए पाया- “तीसरी मंजिल” में उनके संगीत के लिए धन्यवाद।

नंबर  33 ये कली जब त क..लता – महेंद्र “आए दिन बहार के”

नंबर  24 माँ मुझे अपने आँचल .. लता .. “छोटा भाई”

नंबर  23 मैं देखु  जिस और..लता..”अनीता”

नंबर  21 मेरा यार बड़ा शर्मिला .. रफी .. “मिलन की रात”

नंबर  17 मुबारक हो सबको..मुकेश..’मिलन’

नंबर 13 मेरे दुश्मन तू .. रफ़ी ..” आए दिन बहार के “

नंबर  07 ना बाबा ना बाबा..लता..अनीता”

नंबर  06 हम तुम युग युग .. लता-मुकेश .. “मिलन”

नंबर  01 सावन का महीना  ..लता-मुकेश .. “मिलन”

1968

नंबर  32 मस्त बहारों का मैं..रफ़ी..”फ़र्ज”

नंबर  24 छलकाए  जाम..रफ़ी..”मेरे हमदम मेरे दोस्त’

नंबर  22 बड़े मियां दीवाने..’शागिर्द’

नंबर  20 महबूब मेरे..लता-मुकेश..”पत्थर के सनम”

नंबर  16 मेरा नाम है चमेली .. लता .. “राजा और रैंक”

नंबर  14 चलो सजना .. लता .. “मेरे हमदम मेरे दोस्त”

नंबर  11 बड़दु क्या लाना..लता…”पत्थर के सनम”

नंबर  01 दिल बिल प्यार व्यार .. लता .. “शागिर्द”

1969

नंबर  31 वो कौन है .. लता-मुकेश … “अंजना”

नंबर  25 महबूबा महबूबा .. रफ़ी .. “साधु और शैतान”

नंबर  23 रेशम की डोरी..लता-रफ़ी..”साजन”

नंबर  22 रुक जा जरा … लता .. “इज्जत”

नंबर 19 आया सावन झूम के..लता-रफी..”आया सावन झूम के’

नंबर 18 बड़ी मस्तानी है..रफ़ी..”जीने की राह”

नंबर 16 दिल में क्या है..लता-रफ़ी. “जिगरी दोस्त”

नंबर 12 एक तेरा साथ.लता-रफ़ी.. “वापस”

नंबर 09 जे हम तुम चोरी से..लता-मुकेश.. “धरती कहे पुकार के”

नंबर 06 आ मेरे हमजोली आ..लता-रफी..’ जीने की राह’

नंबर 01 कैसे रहूँ चुप , .. लता .. “इन्तेकाम

1970

लगातार चौथे वर्ष, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की रचना वर्ष के शीर्ष गीत के रूप में उभरी।

नंबर  28 हाय रे हाय निंद नहीं .. लता-रफी .. “हमजोली”

नंबर  18 झिल मिल सितारोंका .. लता-रफी .. “जीवन मृत्यु”

नंबर  16 है शुक्र के तू है लडका..रफ़ी..’हिम्मत’

नंबर  14 वो कौन है। लता-मुकेश .. “अंजना”

नंबर  12 छुप गए सारे..लता-रफ़ी..’दो रास्ते’

नंबर  11 शादी के लिए..रफ़ी..’देवी’

नंबर  09 शराफत छोड दी..लता, “शराफत”

नंबर  08 सा रे गा मा पा..लता-किशोर .. “अभिनेत्री”

नंबर  05 खिलोना जान कर..रफ़ी..खिलोना”

नंबर  01 बिंदिया चमकेगी..लता…”दो रास्ते

1971

नंबर  32 सोना लाई जा रे .. लता .. “मेरा गांव मेरा देश”

नंबर  31 जवानी ओ दीवानी तू ..किशोर .. “आन मिलो सजना”

नंबर  26 तारों ने सज के..मुकेश..जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली”

नंबर  22 ओ मितवा ओ मितवा … लता .. “जल बिन मछलील नृत्य बिन बिजली”

नंबर  14 तुमको भी तो ..लता-किशोर .. “आप आए बहार आई”

नंबर  06 चल चल चल मेरे साथी..किशोर..’हाथी मेरे साथी’

नंबर  02 अच्छा तो हम चलते हैं..लता-किशोर .. “आन मिलो सजना”

1972

नंबर  33  मैंने देखा तूने देखा..लता.”दुश्मन’

नंबर  34 ना तू ज़मीन के लिए..रफ़ी..”दास्तान”

नंबर  29 एक प्यार का नगमा है, लता-मुकेश “शोर”

नंबर  28 रेशमा जवान हो गई..रफ़ी..’मॉम की गुड़िया’

नंबर  24 राम ओ राम ..मुकेश .. “एक बेचारा”

नंबर  23 दिल की बात दिल ही जाने..किशोर-लता..’रूप तेरा मस्ताना’

नंबर  20 शीश भारी गुलाब की … लता .. “जीत”

नंबर  16 मैं एक राजा हूं..रफी..उपहार’

नंबर  08 ये जीवन है..किशोर .. “पिया का घर”

नंबर  04 वादा तेरा वादा..किशोर..दुश्मन”

1973

नंबर  34 जरा सा उसे छुआ तो..लता..”शोर”

नंबर  32 झूठ बोले कौवा कटे..लता-शैलेंद्र सिंह..’बॉबी’

नंबर  29 आज मौसम बड़ा..रफ़ी..’लोफ़र’

नंबर  20 मेरे दिल में आज क्या है..किशोर..’दाग’

नंबर 16 धीरे धीरे बोल कोई .. लता-मुकेश .. “गोरा और काला”

नंबर 12 एबीसीडी छोडो .. लता .. “राजा जानी”

नंबर  07 अब चाहे मा रूठे .. लता-किशोर .. “दाग”

नंबर  02 और चाबी खो जाए .. लता-शैलेंद्र सिंह, “बॉबी”

1974

नंबर  32 बैठ जा बैठ गई..किशोर-लता..”अमीर गरीब”

नंबर  26 दाल रोटी खाओ ..किशोर-लता .. “ज्वार भाटा”

नंबर  25 गम का फसाना..किशोर..’मनचली”

नंबर  24 ओ मनचली कहां चली…किशोर..”मनचली”

नंबर  23 तू रु तू रु तेरा मेरा..किशोर..”ज्वर भाटा’

नंबर  22 शोर मच गया शोर..किशोर.. “बदला”

नंबर  12 मैं शायर तो नहीं..शैलेंद्र सिंह..”बॉबी”

नंबर  04 गड़ी बुला रही है..किशोर…”दोस्त”

नंबर  03 झूठ बोले कौवा कटे .. लता-शैलेंद्र सिंह। “बॉबी”

1975

नंबर  26 मैं जाट यमला पगला..रफ़ी..”प्रतिज्ञा”

नंबर  23 फौजी गया जब गांव मैं..किशोर..”आक्रमण’

नंबर  21 आएगी जरूर चिट्ठी..लता…”दुल्हन”

नंबर  20 जीजाजी जीजाजी..आशा-किशोर..”पोंगा पंडित”

नंबर 15 ये जो पब्लिक है..किशोर…”रोटी”

नंबर 13 कभी खोले ना ..किशोर ..”बिदाई”

नंबर 10 चल दरिया मैं डुब जाए..किशोर-लता.. “प्रेम कहानी”

नंबर 02 हाय ये मजबूरी .. लता .. “रोटी कपड़ा और मकान”

नंबर  01 महंगाई  मार गई .. लता-मुकेश-चंचल-जानीबाबू .. “रोटी कपड़ा और मकान”

1976

1963 के बाद पहली बार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के गाने पहली १० में नहीं आ रहे हैं..

नंबर  33 की गल है कोई नहीं .. लता-किशोर .. “जेन मैन”

नंबर  28 जीजाजी जीजाजी मेरी ने किया ..किशोर-आशा ..”पोंगा पंडित”

नंबर  26 कल की हसीन मुलकात .. लता-किशोर .. “चरस”

नंबर  25 आजा तेरी याद आई..लता-आनंद बक्सी-रफी..’चरस’

नंबर  24 मुझे दर्द रहता है..लता-मुकेश..दस नंबरी’

नंबर  22 जेन मैन जेन मैन..किशोर ..”जेन मैन”

नंबर 10 कहत कबीर सुनो..मुकेश..दस नंबरी’

1977

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने पीक पीरियड के अपने दूसरे चरण में वापसी की।

नंबर  41 तैयब अली प्यार का दुश्मन..रफ़ी-मुकरी..’अमर अकबर एंथनी’

नंबर  34 आते जाते खूबसूरत..किशोर..अनुरोध’

नंबर  29 मेरी दिलरुबा ..किशोर ..”आस पास”

नंबर  24 ड्रीम गर्ल ड्रीम गर्ल किशोर ..’ड्रीम गर्ल’

नंबर  21 बुरे काम का बुरा..रफ़ी-शैलेंद्र सिंह, “चाचा भतीजा”

नंबर 18 यार दिलदार तुझे कैसा..आशा-किशोर..’छैला बाबू”

नंबर 17 तेरी मेरी शादी पंडित ना..आशा-किशोर..”दिलदार”

नंबर 11 अनहोनी को होनी  कर दे..महेंद्र-किशोर-शैलेंद्र.. “अमर अकबर एंथनी”

नंबर 06 सत्यम शिवम सुंदरम .. लता .. “सत्यं शिवम सुंदरम”

नंबर 05 आप के अनुरोध पे … किशोर ..”अनुरोध”

नंबर 03 ओ मेरी महबूबा .. रफ़ी .. “धर्मवीर”

नंबर 02 पर्दा है परदा .. रफी .. “अमर अकबर एंथनी”

1978

नंबर  33 अजी ठहरो जरा सोचो..किशोर, रफी, शैलेंद्र सिंह “परवरिश”

नंबर  28 सोमवार को हम मिले … किशोर, सुलक्षणा पंडित .. “अपनापन”

नंबर  26 हम प्रेमी प्रेम कराना  जाने..किशोर, रफी, शैलेंद्र सिंह “परवरिश”

नंबर  25 ये खिडकी जो बंद रहती है… रफ़ी..”मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर  24 चंचल शीतल निर्मल कोमल .. मुकेश .. “सत्यम शिवम सुंदरम”

नंबर  23 मैं तुलसी तेरे आंगन की .. लता .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर  19 जब आती होगी याद मेरी..रफ़ी-सुलक्षणा पंडित..’फंसी’

नंबर  07 यशोमती मैय्या से .. लता, मननाडे .. “सत्यं शिवम सुंदरम”

नंबर 02 आदमी मुसाफिर है .. लता-रफी .. “अपनापन”

1979

नंबर  36 मन्नूभाई मोटर चली ..किशोर .. “फूल खिले है गुलशन गुलशन”

नंबर  32 डफ़लीवाले डफ़ली बजा ..लता-रफ़ी, “सरगम”

नंबर  26 चलो रे डोली उठाओ .. रफ़ी .. “जानी दुश्मन”

नंबर  20 मेरी दुश्मन है ये … रफी .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर 16 मैं तेरे प्यार मैं पागल..किशोर, लता.. “प्रेम बंधन”

नंबर 15 ओ मेरी जान ..किशोर, अनुराधा .. “जानी दुश्मन”

नंबर 10 तेरे हाथो मैं पहचान के..आशा-रफ़ी..”जानी दुश्मन”

नंबर 06 मैं तुलसी तेरे आंगन की .. लट्टा .. “मैं तुलसी तेरे आंगन की”

नंबर 04 ना जाने कैसे..किशोर, रफ़ी, सुमन.. “बदलते रिश्ते”

1980

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के ऊपर के तीन गाने शीर्ष स्थान पर. 

नंबर  32 बने चाहे  दुश्मन..किशोर-रफ़ी..’दोस्ताना’

नंबर  30 मार गई मुजे…किशोर-आशा..”जुदाई”

नंबर  23  परबत के हम पर..लता-रफ़ी..”सरगम”

नंबर  22 हम तो चले परदेस..रफ़ी..’सरगम’

नंबर  16 मैं तो बेघर हौं..आशा..”सुहाग”

नंबर 15 मैं सोला बार्स की ..लता-किशोर .. “कर्ज़”

नंबर 11 तेरी रब ने बना दी..रफ़ी, आशा, शैलेंद्र..’सुहाग’

नंबर 09 ऐ यार सुन यारी तेरी..रफ़ी-शैलेंद्र सिंग-आशा..’सुहाग’

नंबर 07 कोयल बोली..लता-रफ़ी..”सरगम”

नंबर 03 शीशा हो या दिल..लता। “आशा”

नंबर 02 ओम शांति ओम..किशोर .. “कर्ज़”

नंबर 01 डफलीवाले डफली बजा .. लता-रफी .. “सरगम”

1981

नंबर  32 हम बने तुम बने..लता-एसपीबी..’एक दूजे के लिए’

नंबर  30 मेरे नसीब मैं .. लता “नसीब”

नंबर  27 मेरे दोस्त किस्सा..रफ़ी..’दोस्ताना’

नंबर  26 लुई शमशा उई .. लता-नितिन मुकेश .. “क्रांति”

नंबर 16 चल चमेली .. लता-सुरेश वाडकर .. “क्रोधी”

नंबर 12 एक रास्ता दो रही..रफ़ी-किशोर..’राम बलराम’

नंबर 10 जॉन जॉनी जनार्दन..रफी, “नसीब”

नंबर  08 मेरे जीवन साथी ..एसपीबी-अनुर्धा .. “एक दूजे के लिए”

नंबर  07 मार्च गई मुजे..किशोर-आशा..’जुदाई’

नंबर  06 चना ज़ोर गरम..किशोर, रफ़ी, किशोर, एन मुकेश .. “क्रांति”

नंबर  05 तेरे मेरे बीच मैं..लता/एसपीबी..’एक दूजे के लिए’

नंबर  03 चल चल मेरे भाई .. रफ़ी, अमिताभ .. “नसीब”

नंबर  02 जिंदगी की ना टूटी लादी..लता-एन मुकेश..’क्रांति’

1982

नंबर  31 मेघा रे मेघा रे..लता-सुरेश वाडकर..”प्यासा सावन”

नंबर  29 मेरी किस्मत में तू नहीं शायद .. लता-सुरेश वाडकर “प्रेम रोग”

नंबर  28 मेरे दिलदार का बकपन..रफ़ी-किशोर..”दीदार-ए-यार’

नंबर  25 सारा दिन सत्ते हो..किशोर-आशा..’रास्ते प्यार के’

नंबर  21 मेरे महबूब तुझे सलाम..रफ़ी-आशा। ”बगावत”

नंबर  20 अपने अपने मियां पे..आशा..”अपना बना लो’

नंबर  18 खातून की खिदमत मैं…किशोर…”देश प्रेमी”

नंबर  13 छोड मजा हाट ..किशोर-आशा .. “फिफ्टी फिफ्टी”

नंबर  12 मैं तुम मैं समां…एसपीबी-आशा..”रास्ते प्यार के”

नंबर  10 मोहब्बत है क्या चीज़..लता-सुरेश..”प्रेम रोग”

नंबर  09 प्यार का वादा फिफ्टी फिफ्टी ..आशा-किशोर ..”फिफ्टी फिफ्टी”

नबर  07 है राजू है डैडी..राजेश्वरी-एसपीबी .. “एक ही भूल”

नंबर 05 मैं हूं प्रेम रोगी .. सुरेश वाडकर .. “प्रेम रोग”

1983

1963 के बाद से दूसरी बार, यह पाया गया कि पहले TEN में LP गाने गायब हैं।

नंबर 29 ये अंधा कानून है ..किशोर कुमार .. “अंधा कंतों”

नंबर 25 ज़िंदगी मौज उड़ने का नाम ..महेंद्र कपूर “अवतार”

नंबर 19 लिखानेवाले ने लिख डाले .. लता-सुरेश वाडकर .. “अर्पण”

नंबर 12 मेरी किस्मत मैं तू नहीं शायद। लता-सुरेश वाडकर “प्रेम रोग”

1984

नंबर 26 लंबी जुदाई .. रेशमा … “हीरो”

नंबर 21 बिच्छू बालक गया ..किशोर-आशा “इंकलाब”

नंबर 17 मुझे पीने का शंख नहीं .. शब्बीर-अनुराधा “कुली”

नंबर 11 डिंग डोंग ओ बेबी एक गाना गाओ .. मनहर उधास-अनुराधा पंडवाल .. “हीरो”

नंबर 10 प्यार करनेवाले कभी ..मनहर उधास- लता “हीरो”

नंबर  08 ऊई मार्गई डॉ बाबू..अलका दग्निक – शैलेंद्र सिंह “घर एक मंदिर”

नंबर  05 दोनो जवानी के मस्ती मैं .. शब्बीर – आशा .. “कुली”

नंबर 01 तू मेरा जानू है। अनुराधा-मन्हार … “हीरो”

1985

नंबर  32 मन क्यों बेहका .. लता-आशा .. “उत्सव”

नंबर  26 दिल बेकरार था दिल बेकरार है..अनुराधा-शब्बीर..’तेरी मेहरबानियां’

नंबर  18 तेरी मेहरबानियां..शब्बीर कुमार..’तेरी मेहरबानियां’

नंबर  15 जिंदगी हर कदम .. लता-शब्बीर ..”मेरी जंग”

नंबर  14 ज़िहाल-ए-मुश्किल .. लता-शब्बीर … “गुलाम”

नंबर  10 श्री देवी तू नहीं .किशोर कुमार… “सीराफोरश”

नंबर  09 तुम याद न आया करो..शब्बीर-लता..’ जीने नहीं दूंगा’

नंबर  05 चाह लाख तूफान आए..लता-शब्बीर..प्यार झुकता नहीं’

नंबर  02 तुमसे मिल के ना जाने क्यों .. शब्बीर-कविता “प्यार झुकता नहीं”

1986

एक बार फिर टॉप थ्री गाने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के हैं

नंबर  38 ओ मिस दे दे किस ..सुरेश वाडेकर-शैलेंद्र सिघ … “लव 86”

नंबर  35 तू कल चला जाएगा…मोहम्मद अजीज-मन्हर..”नाम”

नंबर  34 बोल बेबी बोल रॉक-एन-रोल ..किशोर-एस जानकी .. “मेरी जंग”

नंबर  29 भला है बुरा है… अनुराधा..”नसीब अपना अपना”

नंबर  27 एक लड़की जिस्का नाम..मोहम्मद अजीज-कविता…”आग और शोला”

नंबर  26 अमीरों के शाम ..मोहम्मद अजीज…’नाम’..

नंबर  23 मायका पिया बुलावे .. सुरेश वाडकर-लता .. “सुर संगम”

नंबर  17 मन क्यों बेहका .. लता-आशा ..”उत्सव”

नंबर  15 प्यार किया है .. शब्बीर-कविता “प्यार किता है प्यार करें”

नंबर  12 चिचि आई है.. पंकज उहदेस “नाम”

नंबर  11 बहरों की रंगिनीयों ..शब्बीर .. “नसीब अपना अपाना”

नंबर  07 गोरी का साजन..एस जानकी-मोहम्मद अजीज..आखिरी रास्ता”

नंबर  05 जिंदगी हर कदम..लता-शब्बीर..’मेरी जंग’

नंबर  03 हर करम अपना करेंगे .. कविता-मोहम्मद अजीज .. “कर्म”

नंबर  02 दुनिया मैं कितना घुम है..मोहम्मद अजीज..’अमृत’

नंबर  01 यशोदा का नंदलाला … लता मंगेशकर … “संजोग”

1987

नंबर  26 ना तुमने किया ना मैंने किया … लता … “नचे मयूरी”

नंबर  24 राम राम बोल..शब्बीर-अलका-कविता..”हुकुमत”

नंबर  19 नाम सारे..मोहम्मद अजीज-लता… ”सिंदूर”

नंबर  14 हवा हवाई .. कविता .. “मिस्टर इंडिया”

नंबर  13 डी डी डीड फुटबॉल..कविता..मिस्टर इंडिया”

नंबर  11 कराटे है हम प्यार..किशोर-कविता..’मिस्टर इंडिया’

नंबर  08 अमीरों की शाम..मोहम्मद अजीज..’नाम’

नंबर  05 तूने बैचैन इतना किया..मोहम्मद अजीज..”नगीना”

नंबर  04 मैं तेरी दुशमन… लता….”नगीना”

नंबर  03 न जयो परदेश..कविता.”कर्मा”

नंबर  01 चिट्ठी  आई है .. पंकज उधास .. “नाम”

1988

नंबर  27 लोग जहां पर रहते हैं..सुरेश-मोहम्मद अजीज-कविता..प्यार का मंदिर’

नंबर  25 फूल गुलाब का … अनुराधा-मोहम्मद अजीज .. “कीवी हो तो ऐसी”

नंबर  22 मैंने ही एक गीत लिखा है… शब्बीर कुमार..”हमारा खांडन”

नंबर  17 पतज़ड़ सावन बसंत बहार..सुरेश वाडकर-लता, “सिंदूर”

नंबर  13 कह दो की तुम मेरी हो .. अनुराधा-अमित कुमार .. “तेज़ाब”

नंबर  12 जब प्यार किया..मोहम्मद अजीज-अनुराधा..’वतन के रखवाले’

नंबर  11 आज फिर तुम से प्यार आया है..अनुराधा-पंकज उहदेस “दयावान”

नंबर  09 एक दो तीन चार..अलका याज्ञनिक/अमित कुमार…”तेज़ाब”

नंबर  07 ऊँगली  मैं अंगुठी .. मोहम्मद अजीज-लता, “राम अवतार”

नंबर  02 तुझे इतना प्यार करेन..लता-शब्बीर,। ” ”कुदरत का कानून”

1989

नंबर 19 चाहे तू मेरी जान ले ले..जॉली मुखर्जी..”दयावान”

नंबर 18 दिल तेरा किसने तोड़ा..मोहम्मद अजीज..”दयावान”

नंबर 10 मुझसे तुमसे है बिल्ली का बच्चा … मनहर उधास-अनुराधा “राम लखन”

नंबर 08 सो गया ये जहान..नितिन मुकेश, अलका, शब्बीर “तेज़ाब”

नंबर 07 तेरे लखन ने बड़ा दुख..लता मंगेशकर..’राम लखन’

नंबर 06 कहदो के तुम हो .. अनुराधा-अमित कुमार .. “तेज़ाब”

नंबर 04 हम तुम्हारे इतन प्यार करेंगे .. अनुराधा-मोहम्मद अजीज … “बीस साल बाद”

नंबर 01 एक दो का चार..मोहम्मद अजीज.. “राम लखन”

1990

नंबर  25 तेरा बीमार  मेरा दिल..मोहम्मद अजीज-कविता।” चालबाज़ “

नंबर  21 कहना ना तुम ये किस से..सलमा आगा-मोहम्मद अजीज..”पति पत्नी और तवायफ”

नंबर 19 ना जाने कहां से आई है..अमित-कविता- “चलबाज़”

नंबर  05 जुम्मा चुम्मा दे दे… सुदेश भोंसले..”हम”

1991

नंबर 19 इमली का बूटा .. सुदेश भोंसले-मोहम्मद अजीज ..”सौदागर”

नंबर 15 कागज़ कलाम दावत .. मोहम्मद अजीज-शोआ जोशी .. “हम”

नंबर 11 जां तुम चाहो जहां ..अमित कुमार-अलका याज्ञनिक “नरसिंह”

नंबर 09 इलु इलु क्या है..मनहर-कविता.. “सौदागर”

नंबर 05 सौदागर सौदा कर..कविता-मन्हार-सुखविंदर सिंह। “सौदागर”

1992

नंबर  22 तू रूप की रानी ..अमित कुमार-कविता .. “कमरे की रानी चोरों का राजा”

नंबर  13 पी पी पिया .. अलका-उदित नारायण .. “प्रेम दीवाने”

नंबर  03 तू मेज़ कुबुल मैं तुझे कुबुल ..मोहम्मद अजीज-कविथा.. “खुदा गवाह”

1993

नंबर  23 मैं तेरा आशिक हूं .. रूप कुमार राठौड़  “गुमराह”

नंबर 16 नायक नहीं कहलनायक हूं मैं…विनोद राठौड़-कविता..”खलनायक”

नंबर  01 चोली के पिछे  क्या है … अलका याग्निक -इला अरुण “खलनायक”

1993 से 1998 के बाद कई गाने आए लेकिन फिर बिनाका गीतमाला बंद हो गई।

बिनाका गीतमाला के इतिहास में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल सबसे सफल संगीत निर्देशक हैं

बिजनौर की श्रुति शर्मा बनीं UPSC टॉपर

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 का परिणाम घोषित; श्रुति शर्मा ने किया टॉप

बिजनौर की रहने वाली हैं श्रुति शर्मा

इस साल की UPSC टॉपर श्रुति शर्मा यूपी के बिजनौर की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। एम. ए. की पढ़ाई उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पूरी की। UPSC की तैयारी के लिए श्रुति ने जामिया मिलिया इस्लामिया के रेसिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) जॉइन किया था।

संघ लोक सेवा आयोग( यूपीएससी) ने सिविल सेवा 2021 का परिणाम जारी कर दिया है। परिणाम के अनुसार उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद की रहने वाली श्रुति शर्मा समेत अंकिता अग्रवाल और गामिनी सिंगला टॉपर बनीं हैं।

सिविल सेवा परीक्षा 2021 के परिणाम के अनुसार श्रुति शर्मा ने ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की है। वहीं, दूसरे स्थान पर अंकिता अग्रवाल और गामिनी सिंगला रही हैं। इस साल तीनों ही टॉपर लड़कियां हैं।

बिजनौर के धामपुर निवासी श्रुति शर्मा दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं। जानकारी के मुताबिक उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया आवासीय कोचिंग अकादमी में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की है।

श्रुति के यूपीएससी परीक्षा में टॉप करने पर परिजनों में खुशी का माहौल है। परिजनों का कहना है कि बेटी कोचिंग के साथ साथ घर में भी खूब पढ़ाई करती थी। आज उसकी मेहनत रंग लाई है। 
परीक्षा परिणाम ऑनलाइन रूप से उपलब्ध है। जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा में भाग लिया था और इंटरव्यू में शामिल हुए थे वे अपना परिणाम यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।  

DU की ही स्टूडेंट रही हैं 2nd टॉपर- अंकिता अग्रवाल ने यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। अंकिता दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट रही हैं। डीयू से उन्होंने इकोनॉमिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। ग्रेजुएशन में पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस उनके ऑप्शनल सब्जेक्ट थे। वहीं तीसरे नंबर पर आने वाली गामिनी सिंगला कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री रखती है। उन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर सोशियोलॉजी चुना था।

पहला स्थान – श्रुति शर्मा
दूसरा स्थान- अंकिता अग्रवाल
तीसरा स्थान – गामिनी सिंगला
चौथा स्थान – ऐश्वर्य वर्मा
पांचवा स्थान – उत्कर्ष द्विवेदी
छठा स्थान – यक्ष चौधरी
सातवां स्थान – सम्यक एस जैन
आठवां स्थान – इशिता राठी
नौवां स्थान – प्रीतम कुमार
दसवां स्थान – हरकीरत सिंह रंधावा

आईएएस बनना चाहती हैं श्रुति-

श्रुति शर्मा ने बताया कि परिणाम से वह आश्चर्य में हैं। वह बीते चार वर्षों से सिविल सेवा की तैयारी कर रही थीं। श्रुति शर्मा का सपना आईएएस बनने का है। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं।

जामिया से कर रही थी तैयारी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली श्रुति शर्मा जामिया मिलिया इस्लामिया आवासीय कोचिंग अकादमी (RCA) से अपनी सिविल सेवा की तैयारी कर रही थीं। आरसीए को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों जैसी श्रेणियों से संबंधित छात्रों को मुफ्त कोचिंग और आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए वित्त पोषित किया जाता है।  जामिया के एक अधिकारी ने बताया कि कोचिंग अकादमी के 23 छात्रों ने सिविल सेवा परीक्षा पास की है। 

संघ लोक सेवा आयोग की ओर से जारी किए गए परिणाम के अनुसार इस परीक्षा में कुल 685 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। संघ लोक सेवा आयोग की ओर से हर साल आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के पदों पर चयन हेतु सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन किया जाता है।

वहीं बिजनौर जिले के सहसपुर कस्बे की शुमायला चौधरी ने सिविल सर्विसेज यूपीएससी की परीक्षा में देश में 367 रैंक हासिल की है। शुमायला को मिल सकता है आईपीएस कैडर!

नटवरलाल गैंग व्यापारी की हत्या करने की फिराक में…

नटवरलाल गैंग करा सकता है व्यापारी की हत्या

पुलिस महानिदेशक समेत कई पुलिस आला अधिकारियों को मेल से शिकायत कर व्यापारी में मांगी खुद औऱ परिवार की सुरक्षा

बिजनौर। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन और 25 लाख की रकम हड़प चुके गैंग की पुलिस से शिकायत करने पर व्यापारी को हत्या होने की आशंका है। व्यापारी ने अपनी जान की सुरक्षा कराने और रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश सरकार से की है। तहरीर में नामजद अपराधी बेहद शातिर किस्म के है, जो अपना भंडा फूटते देख व्यापारी को सड़क हादसे में मरवाने का षड्यंत्र कर रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक, डीएम औऱ पुलिस अधीक्षक बिजनोर समेत आला अफसरों को भेजी शिकायत में पीड़ित दुष्यंत कुमार पुत्र विजयपाल सिंह निवासी गांव बलदिया थाना हल्दौर ने कहा कि वह एक व्यापारी है। प्रार्थी ने 16 मई 20 22 को थाना हल्दौर में अपने पिता स्व. विजयपाल सिंह पुत्र रघुवीर सिंह निवासी गांव बलदिया थाना हल्दौर जिला बिजनौर की 16 फरवरी 2022 को सदमे से मौत होने और करीब 25 लाख रुपए धोखाधड़ी होने की थाना हल्दौर में तहरीर दी है। थाना हल्दौर पुलिस ने घटना की रिपोर्ट फिलहाल दर्ज नहीं की है, इससे घटना के दोषी यशपाल सिंह पुत्र रघुवीर सिंह, मिथलेश पत्नी यशपाल सिंह, अनुज सिंह पुत्र यशपाल सिंह निवासीगण वीआईपी कॉलोनी और सरला पत्नी धर्मपाल सिंह, धर्मपाल सिंह पुत्र रघुवीर सिंह निवासी मोहल्ला चौधरीयान थाना कोतवाली शहर के हौसले बुलंद है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसे विश्वसनीय सूत्रों से पता लगा कि तहरीर में नामजद लोग बेहद शातिर अपराधी किस्म के हैं, जो अपने दूसरे रिश्तेदार धर्मेंद्र उर्फ बबलू पुत्र रणधीर सिंह निवासी गांव तिबड़ी थाना कोतवाली शहर के साथ मिलकर प्रार्थी की सड़क दुर्घटना में हत्या करने की योजना बना रहे हैं। धर्मेंद्र पुत्र रणधीर सिंह और अनुज पुत्र यशपाल का कई पेशेवर अपराधियों के साथ संबंध है, इनमें धर्मेंद्र अपने इलाके में जुआ खिलाने में चर्चित है, साथ ही साल 2007 में धर्मेंद्र पुत्र रणधीर सिंह का नाम अपने चाचा जगवीर सिंह की हत्या कराने में पुलिस जांच में रहा था, लेकिन अपने शातिर होने के कारण धर्मेंद्र थाना कोतवाली शहर पुलिस को गुमराह करने में कामयाब रहा है।
तहरीर में नामजद धर्मपाल और सरला ने बिजनौर नगर पालिका की जमीन कब्जा रखी है, यह लोग मारपीट करने, जमीन कब्जाने, धोखाधड़ी करने में थाना कोतवाली शहर के रिकार्ड में नामजद है। दोनों के नाम तीन-चार मुक़दमे दर्ज हैं। उपरोक्त यशपाल सिंह सरकारी सेवाओं में रहने के कारण बेहद शातिर है, इसने कई लोगो की जमीन कब्जाने को मुकदमे कोर्ट में दायर कर आतंकित किया है। उपरोक्त अनुज सिंह मेरठ और हरियाणा में रहकर नशे का धंधा करता है, उसने पुलिस से बचने के लिए अपना धर्म तक परिवर्तन करके अपनी विवाहिता होने के बाबजूद दूसरी शादी मेरठ में की है, उसे उपरोक्त लोगों का पूरा संरक्षण रहता है।

तहरीर में नामजद लोगों से व्यापारी और उसके परिवार को जान माल का खतरा पूर्ण रूप से बना हुआ है। उपरोक्त लोगों ने षडयंत्र करके प्रार्थी के पिता की बेशकीमती करीब डेढ़ करोड़ रुपए की जमीन और उनके खाते से करीब 25 लाख रुपए का मिलकर गबन किया है, जिसे बार-बार मांगने पर प्रार्थी के पिता विजय पाल सिंह को उपरोक्त लोगों ने काफी डराया धमकाया, इससे वह सदमे में रहे और उनकी इसी सदमे के कारण मौत हो गई थी। उपरोक्त लोग बेहद शातिर किस्म के हैं, अन्य लोगों को भी तरह-तरह से परेशान करते रहते हैं, उपरोक्त अपराधियो के डर के कारण कुछ पीड़ित लोग पुलिस के पास तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, उपरोक्त अपराधी हर अपराध में पुलिस को तरह तरह से गुमराह करके ज्यादातर अपराध में बच निकलते हैं, जिस कारण के हौसले बुलंद है और यह लोग प्रार्थी के द्वारा अपने परिवार का करीब डेढ़ करोड रुपए से अधिक की संपत्ति और 25 लाख रुपया वापस मांगने पर तथा थाने में उपरोक्त लोगों की तहरीर देने पर प्रार्थी को कभी भी यह लोग सड़क हादसे में मरवा सकते हैं। तहरीर के मुताबिक पीड़ित ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने और अगर किसी कारण अगले एक साल तक अगर उसके साथ कोई दुर्घटना होती है तो उसका जिम्मेदार उपरोक्त लोगों को ही समझा जाए। पीड़ित ने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा कराने की गुहार लगाई है।

आधार कार्ड की कॉपी देते समय न बरतें लापरवाही

आधार कार्ड की कॉपी देते समय रहें सावधान, न बरतें लापरवाही, हो सकता है गलत इस्तेमाल, केंद्र सरकार ने जारी की एडवाइजर

  • जानें क्या होता है मास्कड आधार
  • गैर-लाइसेंसी नहीं रख सकते आधार
  • साइबर कैफे से नहीं करें डाउनलोड
सोच-समझकर शेयर करें आधार

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र सरकार ने आधार कार्ड को लेकर एक ए़डवाइजरी जारी की है। सरकार ने नागरिकों से कहा है कि वे दुरुपयोग को रोकने के लिए अपने आधार कार्ड की केवल नकाबपोश प्रतियां ही किसी के साथ साझा करें। रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में सरकार ने कहा कि अपने आधार की फोटोकॉपी किसी व्यक्ति या संस्थान के साथ धड़ल्ले से साझा न करें क्योंकि इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

सरकार ने इसका विकल्प बताते हुए सिर्फ नकाबपोश (मास्कड) आधार ही साझा करने की सलाह दी है। इस पर सिर्फ अंतिम चार अंक दर्ज होते हैं। इसके अलावा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि गैर-लाइसेंसी प्राइवेट इकाइयां आपका आधार कलेक्ट नहीं कर सकती हैं, ना ही उसे अपने पास रख सकती हैं। इसमें बिना लाइसेंस वाले होटल और सिनेमा हॉल शामिल हैं। सरकार ने कहा कि केवल वे संगठन जिन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से उपयोगकर्ता लाइसेंस प्राप्त किया है, वे ही किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए आधार का उपयोग कर सकते हैं।

सरकार ने नागरिकों से अपने आधार कार्ड साझा करने से पहले यह सत्यापित करने के लिए कहा कि किसी संगठन के पास यूआईडीएआई से वैध उपयोगकर्ता लाइसेंस है। इसके अतिरिक्त सरकार ने लोगों को अपने आधार कार्ड डाउनलोड करने के लिए इंटरनेट कैफे में सार्वजनिक कंप्यूटर का उपयोग नहीं करने की चेतावनी दी है। सरकार ने अपनी सलाह में कहा है कि यदि आप ऐसा करते हैं तो कृपया सुनिश्चित करें कि आप उस कंप्यूटर से ई-आधार की सभी डाउनलोड की गई प्रतियों को स्थायी रूप से हटा दें।

आधार कार्ड (Aadhaar Card) को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण जारी करता है। ये एक 12 डिजिट का एक न्यूमेरिक कोड होता है, जिसे आधार संख्या कहा जाता है बये मूलत: आपकी बायोमीट्रिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

क्या होता है मास्क्ड आधार
मास्क्ड आधार में आपकी 12 डिजिट की पूरी आधार संख्या नहीं दिखाई देती है, बल्कि इसमें आधार संख्या के सिर्फ आखिरी चार अंक ही दिखाई देते हैं। इसे ऑनलाइन भी प्राप्त किया जा सकता है।

Masked Aadhaar डाऊनलोड करने का तरीका
अगर आप मास्क्ड आधार डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप UIDAI की वेबसाइट पर जाकर  ‘ Do You Want a Masked Aadhaar’ का विकल्प चुन सकते हैं। यहां जरूरी डिटेल भरकर मास्क्ड आधार डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा Digi Locker और mAadhaar का भी विकल्प है।

mAadhaar है सुरक्षित विकल्प
UIDAI ने स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक नई मोबाइल ऐप mAadhaar लॉन्च किया हुआ है। इसे एंड्राइड के प्ले स्टोर और एपल के ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। आपके आधार से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रहे, इसलिए इसमें एक विशेष फीचर जोड़ा गया है। एक आधार संख्या से ये ऐप एक बार में एक ही फोन डिवाइस पर एक्टिव रहती है। ऐसे में यदि आप अपना फोन बदलते हैं तो नए डिवाइस पर ऐप के एक्टिव होते ही ये पुराने डिवाइस पर खुदबखुद डिएक्टिवेट हो जाएगी।

दो शातिर इनामी बदमाश मुठभेड़ में ढेर, एक गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बदमाशों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। गाजियाबाद में दो अलग अलग मुठभेड़ में दो शातिर ईनामी बदमाशों को पुलिस ने मार गिराया वहीं हापुड़ जिले के देहात थाना क्षेत्र में एक लाख के इनामी बदमाश को गिरफ्तार किया गया है।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एसपी दीपक भूकर के नेतृत्व में हापुड़ देहात थाने की पुलिस की एक लाख के इनामी बदमाश मोनू उर्फ मोइनुद्दीन से मुठभेड़ हो गई। इस दौरान हाइवे पर लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाला अंतरराज्यीय बदमाश मोनू गोली लगने से घायल हो गया। मुठभेड़ में बदमाश की गोली एसपी और देहात थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट में लगी, वहीं एक सिपाही बदमाश की गोली से घायल हो गया।

जानकारी के अनुसार, पुलिस के साथ हापुड़ देहात थाना क्षेत्र के असौड़ा में हुई मुठभेड़ के दौरान हापुड़ के पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर और हापुड़ देहात थाना प्रभारी विनोद पांडेय की बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली लग गई। इस दौरान सिपाही राजीव मलिक घायल हो गए। राजीव को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

एसपी ने बताया कि पुलिस करतारपुर चौराहे पर चेकिंग कर रही थी, उसी दौरान हेलमेट लगाकर गुजर रहा एक बाइक सवार पुलिस पर फायरिंग कर भागने लगा। इसके बाद पुलिस ने उसका पीछा किया और असौड़ा के पास बदमाश को घेर लिया। बदमाश पुलिस पर फायरिंग कर रहा था। जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। बदमाश के हाथ व पैर में गोली लगी है। एसपी ने कहा कि बदमाश चार जिलों से वांछित चल रहा था। उक्त बदमाश हाइवे पर लूट की घटनाओं को अंजाम देता था।

वहीं दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक लाख के इनामी कुख्यात बदमाश बिल्लू दुजाना और उसके साथी 50 हजार के इनामी राकेश को गाजियाबाद पुलिस ने शुक्रवार की रात को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। एसपी सिटी प्रथम निपुण अग्रवाल ने बताया कि सूचना के आधार पर वह सीओ प्रथम स्वतंत्र कुमार सिंह व टीम के साथ मधुबन बापूधाम‌ में चेकिंग कर रहे थे। बाइक सवार दो संदिग्ध व्यक्ति को रुकने का इशारा किया तो वे बैरिकेडिंग तोड़कर भागने लगे। इस कारण बाइक फिसली और दोनों गिर गए।

वहीं, पुलिसकर्मियों को अपनी ओर आता‌ देख दोनों ताबड़तोड़ फायरिंग कर भागने लगे। जवाबी कार्रवाई में गौतमबुद्धनगर के दुजाना गांव निवासी राकेश पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया, जबकि दूसरा अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गया। घायल को अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

उधर, दोनों बदमाशों की फायरिंग में एसपी सिटी प्रथम व सीओ प्रथम के बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और एक सिपाही भी गोली लगने से घायल हो गया है।‌ राकेश 50 हजार का इनामी बदमाश था।

दूसरे एनकाउंटर में इंदिरापुरम में एसपी क्राइम दीक्षा शर्मा और‌ सीओ इंदिरापुरम अभय मिश्र की टीम की चेकिंग से बचकर भाग रहे दो बदमाश बैरिकेड के साइड से निकलने के दौरान तारों में फंस गए। पकड़ने को दौड़ी पुलिस पर बदमाशों ने फायरिंग कर दी, जिसमें दुजाना गांव निवासी अवनीश उर्फ बिल्लू दुजाना गोली लगने से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।

गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, बिल्लू एक लाख रुपए का इनामी बदमाश था। बिल्लू ने राकेश व अन्य सदस्यों के साथ मिलकर वेवसिटी में जितेंद्र व हरेंद्र की हत्या कर दी थी। दोनों के खिलाफ हत्या, अपहरण व रंगदारी मांगने के 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

घर के बाहर से गाय हो गई गायब

घर के बाहर से गाय हो गई गायब- बिजनौर। शांति नगर कालोनी निवासी दिलावर सिंह उर्फ हरद्वारी की दुधारू गाय 15 मई 2022 की रात्रि रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। पीड़ित ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि इस संबंध में सूचना देने वाले सज्जन को यथोचित पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सूचना मोबाइल नंबर 8899073622, 8958333695 अथवा 9411950325 पर दी जा सकती है।

दबंग दंपत्ति ने फ़िल्म में काम करवाने के नाम पर हड़पे ₹2 लाख

-फर्जी केस लगवा कर भिजवा दिया जेल।
-पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से तमाम शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई। -जानलेवा हमला कर कई दिन तक बनाए रहे बंधक

बिजनौर। एक दंपत्ति ने दबंग व्यक्ति पर उसके पुत्र को झूठा फंसाने का आरोप लगाया है। इस मामले में डीएम को प्रार्थना पत्र दिया गया है।

हीमपुरदीपा के गांव सिकंदरी निवासी गिरवर सिंह पुत्र विजयपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उसका पुत्र यूट्यूबर है, जिसका जिले में काफी नाम है। उन्होंने बताया कि घेर रामबाग निवासी कथित रूप से दबंग व अपराधी प्रवृत्ति के पति – पत्नी ने उनके पुत्र से मुंबई में फिल्म में काम दिलाने के नाम पर दो लाख रुपए लिए। काम न होने पर उनके पुत्र ने अपने दो लाख रुपए वापस मांगे। इसके चलते उन्होंने उसके पुत्र पर जानलेवा हमला किया और कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इसके बाद आरोपितों ने उसके पुत्र को युवती से छेड़छाड़ व एससी-एसटी के झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवा  दिया। इस पूरे मामले में एक दरोगा भी उनके साथ हमसाज थे। उन्होंने डीआईजी मुरादाबाद को भी शिकायत भेज कर इंसाफ की गुहार लगाई थी।

फिल्म बनाने का ख्याल भी छोड़ दे- आरोप है कि पूछने पर आरोपी ने कहा कि मैने तेरे लड़के को समझाया था कि किसी को कुछ मत बताना व रुपए वापिस मत मांगना और फिल्म बनाने का ख्याल भी छोड़ दे, लेकिन तुम दोनों बाप बेटे की समझ मे मेरी बात नहीं आयी, जब जीवन भर तेरा लड़का जेल में रहेगा। एल०बी० यू-ट्यूब चैनल चलाकर ऑफिस खोलकर हमारे काम को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। तुम दोनों बाप बेटे का काम ही खत्म कर दिया है। यह भी आरोप है कि उक्त अभियुक्तगण का बहुत बड़ा गैंग है।

पुलिस प्रशासन से शिकायत पड़ी हैं पैंडिंग में- पीड़ित कई बार थाने गया तथा अन्य अधिकारियों से भी शिकायत कर चुका है। प्रार्थी इस सम्बन्ध में दिनांक 10.08.2021 व 19.05.2022 को जनता दरवार में तथा दिनांक 08.10.2021 को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से डीएम के समक्ष प्रार्थना पत्र दे चुका है। वहीं 09.06.2021 को डी०आई०जी० मुरादाबाद के समक्ष प्रस्तुत होकर प्रार्थना पत्र दिया। इसके अलावा 08.10.2021 व 26.05.2022 को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से दिया तथा एक प्रार्थना पत्र मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को दि. 26. 04.2022 को दिया। प्रार्थना पत्रों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में हिन्द मजदूर किसान मोर्चा के राजेश, अमर पाल, अग्र्राज, रवेन्द्र, सपना, ज्यपाल, विपिन आदि शामिल रहे।

साढ़े चार हजार बकायेदारों की संपत्ति होगी कुर्क

पुलिस का साथ मिलने से सहकारिता विभाग की बढ़ी ताकत

हासिल करना है बकाया ऋणों की वसूली कर पूर्व वर्षों की भाँति शीर्ष स्थान

बिजनौर। सहकारिता विभाग द्वारा सहकारी समितियों से ऋण लेकर समय से जमा न करने वाले साढे चार हजार बकायेदारों के खिलाफ गिरफ्तारी / सम्पति कुर्क करने की व्यापक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

इसी क्रम में गुरुवार को पुलिस विभाग से 10 सशस्त्र पुलिस बल को बकाया वसूली हेतु सहकारिता विभाग जनपद-बिजनौर से सम्बद्ध किया गया है। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबन्धक, सहकारिता जनपद बिजनौर द्वारा जनपद की प्रत्येक तहसील में दो-दो पुलिस बल को सम्बन्धित तहसील के वसूली अधिकारियों के साथ सम्बद्ध किया गया है, जिससे वांरन्ट प्राप्त कर बकायेदारों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही की जा सके। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबन्धक, सहकारिता, बिजनौर, डा० प्रदीप कुमार द्वारा सम्बन्धित तहसील के वसूली अधिकारियों एवं पुलिस विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गए सशस्त्र बल के साथ बकाया से वसूली की रणनीति तैयार करते हुए समन्वय बैठक की गई। बैठक में बैंक मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा सहकारिता विभाग के सभी तहसील प्रभारी अपर जिला सहकारी अधिकारी उपस्थित रहे। सहकारिता विभाग को बकाया वसूली के लिये पुलिस अधीक्षक बिजनौर के सहयोग से सशस्त्र पुलिस बल मिल जाने से बकाया वसूली में और अधिक तेजी आयेगी। सहकारिता विभाग द्वारा पूर्व से ही बकाया वसूली के लिये साईटेशन वारन्ट प्राप्त कर बकायेदारों की गिरफ्तारी / कुर्की की कार्यवाही जोर शोर से की जा रही है। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा सहकारिता विभाग की मांग पर सशस्त्र पुलिस बल उपलब्ध कराने से समिति की बकाया ऋण की वसूली में तेजी आयेगी। सहकारिता विभाग द्वारा अवगत कराया गया है कि दैनिक आधार पर सक्षम अधिकारियों से समिति से लिये गये ऋण के बकायेदारों के विरूद्ध वारन्ट प्राप्त किये जा रहे हैं और बकायेदारों की सम्पति कुर्क करने की तैयारी की जा रही है। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबन्धक, सहकारिता, बिजनौर द्वारा यह भी बताया गया कि जिला सहकारी बैंक लि०, बिजनौर उ०प्र० शासन द्वारा दिये गये पुलिस बल की सहायता से बकाया ऋणों की वसूली कर पूर्व वर्षों की भाँति उ०प्र० के जिला सहकारी बैंकों में शीर्ष स्थान प्राप्त करेगें।

राशनकार्ड मामले में कांग्रेस ने गवर्नर को भेजा ज्ञापन

बिजनौर। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला/शहर कांग्रेस कमेटी बिजनौर द्वारा प्रदेश की राज्यपाल महोदया को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी बिजनौर को दिया गया।
कांग्रेस जनों ने मांग पत्र में कहा कि प्रदेश के विभिन जनपदों में जिलाधिकारी/जिला पूर्ति अधिकारी राशन कार्ड वापस करने एवं गरीबों   को दिये राशन की रिकवरी को लेकर लगातार आदेश जारी कर रहे है, जिसके चलते प्रदेश की आम जनता में रोष व्याप्त है एवं आम जनता भृमित है, जबकि उनका यह आदेश खाद्य सुरक्षा कानून के खिलाफ है। अच्छे दिनों का वादा एवं गरीबों की भलाई का दावा करने वाली योगी सरकार लगातार गरीबों का  उपहास एवं अपमान कर उन्हें प्रताड़ित कर रही है।
जिला/शहर कांग्रेस कमेटी बिजनौर ने मांग करते हुए कहा कि जनहित में राशन कार्ड वापस करने के आदेश को निरस्त करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार एवं समस्त जिलाधिकारीयों, समस्त जिला पूर्ति अधिकारियों को आदेश दिये जायें। साथ ही जिनके राशनकार्ड तहसीलों में जमा किये गए हैं, उन्हें वापस कार्ड धारकों को दिए जाएं।
कांग्रेस जनों ने दूसरा ज्ञापन अपर जिला अधिकारी बिजनौर को दिया। इसमें नगर पालिकाओं की मतदाता सूची के पुनः निरीक्षण में मकान संख्या नगरपालिका के मकान क्रम संख्या के हिसाब से ही किये जाने और वार्डो के परिसीमन में भी उपरोक्त को ही ध्यान में रखे जाने की मांग की गई।
इस अवसर पर सर्व श्री शेरबाज पठान, मुनीश त्यागी, जिला महासचिव नज़ाकत अल्वी, बिजनौर शहर अध्यक्ष मीनू गोयल, हाजी नसीम अंसारी, हुक्म सिंह, बाला सैनी, डा०ओमप्रकाश सिंह, सुरेश सैनी, इकबाल अहमद, हर्षवर्धन सिंह राणा, पूनम, पदम् सिंह, कविता देवी, काज़ी आतिफ, असलम अंसारी, मो०राशिद, अदनान शेख, पदम् सिंह, वसीम अहमद, शाकिर बाबा, शमशाद अली, जियाउल हक, अनीस पहलवान, मो०इरशाद, शानू खान आदि कांग्रेस जन मौजूद रहे।

गोवंश को भूसा उपलब्ध कराने के लिए डीएम को सौंपा रुपए 11 हजार का चैक

गोवंश को भूसा उपलब्ध कराने के लिए डीएम को सौपा रुपए 11 हजार का चैक

जिलाधिकारी ने जिला मुख्यालय व प्रत्येक तहसील स्तर पर एक-एक हजार कुन्तल क्षमता के भूसा बैंक बनाने के दिये।

जिले में 30 गो आश्रय स्थलों में 2400 गोवंश संरक्षित -जिलाधिकारी

भूसा बैंकों में अधिक से अधिक भूसा दान करने के लिए आगे आयें आमजन-जिलाधिकारी

मण्डल में सहभागिता योजना व भूसा संग्रह करने में प्रथम स्थान पर है जिला बिजनौर -जिलाधिकारी

बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में नुमाइश ग्राउण्ड में संचालित भूसा बैंक में गोवंश को भूसा उपलब्ध कराने के लिए रू0 11 हजार का चैक सुनील कुमार शर्मा ने सौपा। जिलाधिकारी ने बताया कि जिला मुख्यालय व प्रत्येक तहसील स्तर पर एक-एक हजार कुन्तल क्षमता के भूसा बैंक बनाने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि सहभागिता योजना व भूसा संग्रह करने में जिला बिजनौर, मुरादाबाद मण्डल में प्रथम स्थान पर है। वर्तमान में जिले में 30 गो आश्रय स्थलों में कुल 2400 गोवंश संरक्षित हैं। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि शासन द्वारा तहसील एवं ब्लॉक स्तर पर गोवंश आश्रय स्थलों में भूसा उपलब्ध कराने के लिए भूसा बैंक स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि गोवंशों को चारे की कमी न होने पाए। उन्होंने जन सामान्य का आह्वान किया कि भूसा बैंकों में अधिक से अधिक भूसा दान करने के लिए आगे आकर इस पुण्य कार्य में अपना योदान उपलब्ध कराएं।

निराश्रित गोवंश घूमता हुआ न पाया जाए- जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार केे महत्वांकक्षी गो संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में पूरी गंभीरता के साथ गोवंश को संरक्षण उपलब्ध कराते हुए उनके चारे-पानी एवं स्वास्थ्य आदि की निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र एवं ग्राम क्षेत्र के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश उपलब्ध कराए गए हैं कि एक भी निराश्रित गोवंश घूमता हुआ पाया जाए तो तत्काल उसकी सूचना संबंधित नगर निकाय के अधिकारियों ,खण्ड विकास अधिकारी या पशुपालन विभाग के अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसके संरक्षण की समुचित व्यवस्था की जा सके।

जिले में 2400 गोवंश संरक्षित- मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा0 विजेन्द्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में जिले में 03 वृहद गो आश्रय स्थल, 12 कान्हा गौशाला, 04 कांजी हाउस व 11 अस्थाई गौशाला केन्द्र सहित कुल 30 गो आश्रय स्थल स्थापित हैं। इनमें कुल 2400 गोवंश संरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सहभागिता कार्यक्रम के अंतर्गत 687 गोवंशों को पशुपालकों को व्यक्तिगत रूप से संरक्षण के लिये दिया गया है। उन्होंने बताया कि सहभागिता योजना व भूसा संग्रह करने में जिला बिजनौर, मुरादाबाद मण्डल में प्रथम स्थान तथा भूसा संग्रह करने में प्रदेश में नवें स्थान पर है। इस अवसर पर चैक प्रदान करने वाले समाजसेवी धीर सिंह, सुनील शर्मा व देवराज सिंह राजपूत आदि मौजूद रहे।

CM योगी की मंशा को हैरतअंगेज तरीके से पलीता लगाते ADO, VDO

रिपोर्ट-नरपाल सिंह

गांव नहीं अपने विकास में जुटे सेक्रेट्री!

2. संपत्ति की हो जाए जांच तो धनकुबेरों के पैरों तले की जमीन जाएगी खिसक।

3. आलीशान बंगलों जमीन जायदाद के हैं मालिक।

4. पेट्रोल पंप तक के मालिक हैं गांवों के खेवनहार।

सत्ता के गठजोड़ से चलता रहता है पूरा मामला।

फर्जी बिल, बैक डेट के विज्ञापन ही नहीं बैंकों तक मे खुलवा लिए फर्जी खाते।

अखबारों के असली मालिक तक होंगे अनजान।

8. प्रधान बेचने लगे घर से निर्माण सामग्री।

9. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बावजूद मोटी चमड़ी वालों की ही चलती मर्जी।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट “ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर फॉर एशिया’ के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में भारत अब एशिया में शीर्ष पर है। इस रिपोर्ट के अनुसार करीब 50 फीसदी लोगों को अपना काम निकलवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। इनमें से 63 फीसदी ने इस डर से कोई शिकायत भी नहीं की क्योंकि इससे उन्हें कहीं बाद में कोई परेशान ना करे। इस रिपोर्ट के अनुसार करीब आधी आबादी अपने संपर्कों या जुगाड़ से काम निकलवाने में भरोसा रखती है। यह भी एक तरह का भ्रष्टाचार ही है और इससे सिस्टम में भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा मिलता है। भ्रष्टाचार के मामले में भारत और चीन की स्थिति बराबर की रही है, लेकिन जहां चीन ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है, वहीं पिछले साल की तुलना में भारत की स्थिति और भी बदतर हुई है।

ताकतवर ही सबसे भ्रष्ट …! हमारे यहां सबसे शक्तिशाली समूह राजनीतिज्ञों का है। भ्रष्टाचार जैसी बीमारी को दूर करने का काम केवल राजनैतिक इच्छाशक्ति से ही हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हमारा राजनीतिक सिस्टम इसमें पहल क्यों नहीं करता? इसका जवाब इन आंकड़ों में है : हमारे यहां दागी सांसदों की संख्या जहां 2004 में 43 प्रतिशत थी, वहीं यह 2019 में बढ़कर 43 फीसदी हो गई। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या सत्ताधारी पार्टी में है। इसी दरमियान बिहार में हुए चुनाव में दागी विधायकों की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2015 में जहां चुने हुए विधायकों में से 58 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज थे, वहीं 2020 में यह संख्या बढ़कर 68 फीसदी हो गई। हमारे जनप्रतिनिधियों के दागी होने का मतलब यही है कि जब उनका दामन साफ नहीं होगा तो वे भ्रष्टाचार को दूर करने का प्रयास क्यों करेंगे, क्योंकि व्यवस्था में भ्रष्टाचार ही इन्हें अपने कारनामों को ढंकने में मदद करता है।

तो नागरिक क्या कर सकते हैं? “ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर’ रिपोर्ट कहती हैं कि हमारे यहां 46 फीसदी लोगों ने अपने संपर्कों के जरिए अपने काम करवाए। इनमें से अधिकांश काम छोटे-बड़े नेताओं के जरिए ही करवाए जाते हैं। अगर ये नेता मदद नहीं करते तो उस काम के लिए उन्हें रिश्वत देनी पड़ती। यानी यहां लोगों को यह समझने की जरूरत है कि राजनीतिज्ञ इतने शक्तिशाली हैं कि अगर वे चाहें तो वे पूरे सिस्टम को बदल सकते हैं। अब यह आम नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे नेता ही ऐसे चुनेें जिनकी ईमानदारी और निष्ठा तमाम सवालों से परे हो। अगर राजनीति ईमानदार होगी तो नौकरशाही को अपने आप ईमानदार होना होगा। शीर्ष नौकरशाह जब ईमानदार होंगे तो निचले स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी भ्रष्टाचार करने का साहस नहीं कर पाएंगे। जब नेता ईमानदार होगा, अफसर ईमानदार होंगे, कर्मचारी ईमानदार होंगे तो आम लोगों में भी वे लोग जो अपने गलत काम भी पैसे देकर या जुगाड़ से करवा लेते हैं, उनके लिए यह सबकुछ इतना आसान नहीं रह जाएगा।

लेकिन यह होगा कैसे? जनता ईमानदार नेता चुनें, यह कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल। इसके लिए हमें कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे। इलेक्टोरल बॉड्स को बंद करके राजनीतिक दलों को होने वाली फंडिंग में पारदर्शिता लानी होगी। आपराधिक रिकॉर्ड वाले लागों को चुनाव का टिकट देने पर रोक लगानी होगी और किसी दागी को टिकट देने पर संबंधित राजनीतिक दल के मुखिया को जिम्मेदार ठहराना होगा। इसके लिए सिविल सोसाइटी का दबाव बनाना होगा और जब भी जरूरत हो, कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी नहीं पीछे नहीं रहना होगा। इसके लिए मीडिया को भी अहम भूमिका निभानी होगी।

कहां है समस्या? – कुछ साल पहले एक जाने-माने राजनेता ने कहा था कि चुनावी फंडिंग ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी गंगोत्री है। इससे निबटने के लिए सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड्स लेकर आई, लेकिन इसने तो चुनावी फंडिंग को और भी अस्पष्ट और अपारदर्शी बना दिया है। दरअसल, हमारे राजनीतिज्ञ राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बिल्कुल नहीं चाहते। यह बात कुछ कारपोरेट्स हाउसेस को भी रास आती है, क्योंकि इससे वे बड़ी आसानी से राजनीतिक दलों को पैसा दे देते हैं और चुनावों के बाद सरकार से बेजा फायदा उठाते हैं। – भ्रष्टाचार से निबटने के लिए हमें प्रभावी सीबीआई, सीवीसी और एंटी करप्शन ब्यूरो चाहिए। …लेकिन इन सभी विभागों का मूल संगठन यानी पुलिस के बारे में आम धारणा यही है कि यह सबसे भ्रष्ट विभाग है। इसलिए हम पुलिस से और प्रकारांतर में इन तमाम संगठनों से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि ये भ्रष्टाचार को मिटाने में कारगर रहेंगे, जब तक कि इनके पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होगी। – सरकारी सेवकों को भी जवाबदेह नहीं बनाया गया है। सरकारी शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं या जाते हैं तो पढ़ाते नहीं। डॉक्टर सरकारी हास्पिटल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं जाते। अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिलती। सड़के, जलापूर्ति, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अक्सर खराब मिलती है। और दुर्भाग्य से किसी को भी खराब काम करने या जिम्मेदारी न निभाने पर नौकरी से नहीं निकाला जाता। समस्या यह है कि अच्छा काम करने वाले को पुरस्कार भी नहीं मिलता। तो अच्छा काम करने की प्रेरणा भी नहीं मिलती।

केरल और बिहार के सबक … एक रिपोर्ट के अनुसर केरल में केवल 10 फीसदी नागरिकों को अपने काम करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी, जबकि बिहार में 75 फीसदी लोगों को। आखिर ऐसा क्यों है, इसको लेकर तो व्यापक अध्ययन की जरूरत है, लेकिन इसमें कहीं न कहीं शिक्षा और साक्षरता का योगदान तो नजर आता ही है। केरल भारत का सबसे साक्षर प्रदेश है, जबकि बिहार का नाम साक्षरता के मामले में नीचे से शीर्ष के राज्यों में शुमार होता है। त्रिलोचन शास्त्री

(लेखक आईआईएम बैंगलोर में प्रोफेसर हैं। एडीआर – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के फाउंडर चेयरमैन भी रहे हैं।)

डीएवी इंटर कालेज के शिक्षक व स्टाफ ही प्रिंसिपल के खिलाफ जंग में कूदे

बिजनौर। डीएवी इंटर कालेज के प्रिंसिपल से कथित मारपीट के मामले में नया मोड़ आ गया है। कालेज के शिक्षक एवं अन्य स्टाफ ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता कर कालेज प्रधानाचार्य डा. मनोज कुमार गोस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए। स्टाफ के लोगों ने पत्रकारों को बताया कि प्रिंसिपल  स्टाफ को आएदिन गाली गलौच कर जान से मारने की धमकी देते रहते हैं। कालेज शिक्षक इनके व्यवहार से बुरी तरह से तंग आ चुके हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक से इनके यहां से स्थानान्तरण की मांग की गई है।

पत्रकारों से बात करते हुए शिक्षक दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रिंसिपल मनोज गोस्वामी के कृत्यों से कालेज की छवि लगातार खराब हो रही है। लिपिक शरद शर्मा को इन्होंने जान से मारने की नीयत से गला घोंटने का प्रयास किया। आएदिन थाने जाकर झूठी तहरीर देते रहते हैं। शिक्षक विशाल वत्स व राजेन्द्र सिंह ने भी प्रधानाचार्य पर अभद्रता व मारपीट का आरोप लगाया। यह भी आरोप लगाया कि वह कर्मचारी दुष्यन्त कुमार से घर पर निजि कार्य कराते रहे और जब उसने ऐसा करने से मना कर दिया तो उसका वेतन नहीं दिया। इस मामले में उपप्रबन्धक ने उनसे कहा तो अपने एक साथी से मिलकर उपप्रबन्धक पर हमला कर दिया और कुछ दलाल टाइप के लोगों को साथ लेकर थाने पहुंच गए जहां उल्टे उनके खिलाफ ही झूठी तहरीर दे दी। कालेज स्टाफ ने एक स्वर में प्रधानाचार्य को हटाने की मांग की। इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह, राजबाला देवी, चन्द्र सिंह, लोकेश कुमार, मंजू रानी, खलेश कुमार शर्मा, अरूण कुमार गर्ग, नीरज कुमार शर्मा, अमित, शरद शर्मा, लेखराज सिंह, राजेन्द्र कुमार, सोमपाल सिंह, अनीता रानी, राजवीर सिंह, दिनेश शर्मा, शैलेन्द्र कुमार शर्मा, आसिफ अहमद खां, अशोक कुमार, राहुल कुमार आदि स्टाफ मौजूद रहे। वहीं इस मामले में प्रधानाचार्य का भी पक्ष जानने का प्रयास किया गया मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका। गौरतलब है कि दो डिम पूर्व कालेज में कथित रूप से प्रिंसिपल मनोज गोस्वामी के ऊपर हमले की घटना हुई थी।

कागजों में कट गया बिजली कनेक्शन, फिर भी चार साल से चल रहे 2 नलकूप

बिजनौर। बिजली विभाग के भी खेल निराले हैं। बिजली चोरी जैसे मामले तो आम बात हो गई है; जालसाजी के तो ऐसे-ऐसे मामले भरे पड़े हैं जो पता चल जाएं तो सिर घूम जाए। ऐसा ही एक मामला है जो विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत, लापरवाही और अकर्मण्यता की पोल खोलता है।

दअरसल दो भाइयों ने 7.5 हॉर्स पावर के दो अलग निजी नलकूप फर्जी तरीके से लगवा लिए। जिस गांव की जमीन के कागजात के आधार पर कनेक्शन स्वीकृत हुए, नलकूप वहां न लगवा कर दूसरे गांव में, वो भी दूसरे की जमीन पर लगा लिए। एक साल बाद शिकायत हुई तो जांच के आदेश कछुआ चाल से चलते रहे। चार साल पहले दोनों नलकूपों के कनेक्शन काटे गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! दोनों ही कनेक्शन आज भी बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। विभागीय आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। इनके द्वारा खपत की जा रही बिजली के बिल की भरपाई कौन करेगा? मामले की शिकायत तहसील दिवस में की गई है।

जानकारी के अनुसार 04 दिसंबर 2017 को ग्राम सदूपुरा निवासी सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त ने पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत करते हुए बताया कि ग्राम फरीदपुर सल्लू स्थित 100 बीघा जमीन में से 48 बीघा का बैनामा कराया था। दाखिल खारिज की कार्रवाई के दौरान रफीक अहमद पुत्र अब्दुल हमीद, नफीस अहमद पुत्रगण अब्दुल हमीद अहमद निवासी ग्राम सद्पुरा ने एतराज किया, जिसका मुकदमा रेवन्यु बोर्ड तक चला। हालांकि बाद में दाखिल खारिज भी हो गया। सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर सोमदत्त की शिकायत के अनुसार उक्त दोनों लोगों ने बिजली स्वीकृत कराई ग्राम सदुपुरा की जमीन के लिए जबकि जिस जमीन पर प्रार्थी के बोरिंग में नलकूप लगाया, वह फरीदपुर सल्लु में है। इस प्रकार रफीक अहमद व नफीस अहमद ने जालसाजी, हेराफेरी व झूठा शपथ पत्र देकर बिजली कनेक्शन लगवा लिया ताकि प्रार्थी की जमीन पर मालिकाना हक जाहिर कर सके। सरकारी विभागों में प्रार्थना पत्र घूमता रहा। फिर 03 फरवरी 2018 को उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर जसवीर सिंह ने 33/11 केवी उपकेंद्र गंज के अवर अभियंता बहराम सिंह को उक्त दोनों कनेक्शन गलत स्थान पर संचालित होने की जानकारी देते हुए अविलंब उतारने और अवगत कराने के निर्देश दिए।

इसके बाद विद्युत वितरण खण्ड बिजनौर के अधिशासी अभियन्ता किताब सिंह ने 09 अप्रैल 2018 को निजी नलकूप संख्या 225/5027/130124 के लिए रफीक अहमद व निजी नलकूप संख्या 225/5027/130125 के लिए नफीस अहमद पुत्रगण हमीद निवासी ग्राम सदूपुरा बिजनौर को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि उनके द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2016 को सामान्य योजना के अन्तर्गत 7.5 हॉर्स पावर के उक्त दो निजी नलकूप हेतु अनुबन्ध किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर जांच में पाया गया कि उनके द्वारा फर्द ग्राम सदुपुरा की लगायी गयी है जबकि निजी नलकूप ग्राम फरीदपुर सल्लू में स्थापित किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा विभाग को गुमराह करके संयोजन प्राप्त किया गया है। यह भी कहा कि पत्र प्राप्ति के 03 दिन के अन्दर स्पष्ट करें कि उनके द्वारा गलत फर्द क्यों लगायी गयी हैं,अन्यथा उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करते हुए संयोजन निरस्त कर दिया जायेगा।

वहीं 17 मई 2018 को अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल ने उक्त दोनों कनेक्शन काटने के संबंध में कार्यालय से पत्र जारी किया। उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण उपखण्ड द्वितीय बिजनौर को उक्त दोनों कनेक्शन काटने और नलकूप की समस्त सामग्री उतारकर विभागीय भंडार गृह में जमा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल बिजनौर के साथ ही उक्त दोनों कनेक्शन धारकों को भी इसकी एक प्रति सूचनार्थ भेजी। अब किसी प्रकार दोनों नलकूपों के कनेक्शन कट तो गए, लेकिन सिर्फ कागजों पर! असलियत में दोनों ही कनेक्शन आज तक बदस्तूर धड़ल्ले से चल रहे हैं। आज तक अधिशासी अभियंता ब्रह्मपाल के आदेश के अनुपालन में सामान विभागीय भंडार गृह में जमा नहीं कराया गया। एक बात और विचारणीय है कि तकरीबन चार साल से जिन दो निजी नलकूप का कनेक्शन कथित रूप से कटा हुआ है, उनके द्वारा खपत की गई बिजली के बिल का भुगतान कौन, किस से और कब करेगा? 

दोनों ही भाइयों के खिलाफ दर्ज हैं कई केस– दरअसल उक्त दोनों ही भाई शातिर किस्म के हैं। उनके खिलाफ वर्ष 1987 से लेकर 2019 तक कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, जान से मारने की धमकी, फ्राड आदि के थाना शहर कोतवाली में आठ व थाना स्योहारा में एक मुकदमा शामिल है।

बहुत ही गंभीर मामला है। वह अधिशासी अभियंता को इस मामले में यथोचित कार्रवाई के लिये निर्देशित कर रहे हैं। यदि  इतने वर्ष से अवैध रूप से दोनों कनेक्शन संचालित हो रहे हैं तो इसमें संलिप्त विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच व कार्रवाई की जाएगी। शासकीय धन की वसूली के लिए भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। –नंदलाल, अधीक्षण अभियंता।

बेहतर कानून व्यवस्था की व्यापारियों द्वारा प्रशंसा

व्यापारियों ने किया एडीजी राजकुमार, डीएम उमेश मिश्रा, एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी सिटी डॉ. प्रवीण रंजन आदि पुलिस अधिकारियों का स्वागत। डीएम एसपी ने व्यापारियों से मांगे जिले की व्यवस्था और बेहतर करने के लिए सुझाव। उद्योग व्यापार मंडल की ओर से जैन धर्मशाला में आयोजित हुआ कार्यक्रम।

बिजनौर। उद्योग व्यापार मंडल की ओर से व्यापारियों ने जैन धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में एडीजी राजकुमार, डीएम उमेश मिश्रा, एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी सिटी डॉ. प्रवीण रंजन आदि पुलिस अधिकारियों का स्वागत किया। व्यापारियों ने जिले में अच्छी कानून व्यवस्था की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम में डीएम उमेश मिश्रा और एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने सभी व्यापारियों से जिले की व्यवस्था और बेहतर करने के लिए सुझाव मांगे। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की ओर से रजनीश अग्रवाल, मनोज कुच्छल, मुनीष त्यागी, बीएस राजपूत, दिलशाद खान, डॉ. उस्मानी, दीपक अरोड़ा, सौरभ सिंघल, गुलाम साबिर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला कोषाध्यक्ष बीएस राजपूत ने किया।

…अब कुतुब मीनार की खुदाई की तैयारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। कुतुब मीनार को लेकर छिड़े विवाद के बीच ऐतिहासिक परिसर में खुदाई की जाएगी। संस्कृति मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि कुतुब मीनार में मूर्तियों की Iconography कराई जाए। एक रिपोर्ट के आधार पर कुतुब मीनार परिसर में खुदाई का काम किया जाएगा। इसके बाद ASI संस्कृति मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

संस्कृति सचिव ने अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने के बाद यह फैसला लिया है। लिहाजा कुतुब मीनार के साउथ में और मस्जिद से 15 मीटर दूरी पर खुदाई का काम शुरू किया जा सकता है। बता दें कि कुतुब मीनार ही नहीं, अनंगताल और लालकोट किले पर भी खुदाई का काम किया जाएगा।

कुतुब मीनार परिसर में खुदाई के निर्णय से पहले संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने 12 लोगों की टीम के साथ निरीक्षण किया। इस टीम में 3 इतिहासकार, ASI के 4 अधिकारी और रिसर्चर मौजूद थे। इस मामले में ASI के अधिकारियों का कहना है कि कुतुबमीनार में 1991 के बाद से खुदाई का काम नहीं हुआ है।

ASI के अधिकारियों का कहना है कि कुतुब मीनार में 1991 के बाद से खुदाई का काम नहीं हुआ है। इसके अलावा कई रिसर्च भी पेंडिंग हैं, जिसकी वजह से ये फैसला लिया गया है।

विष्णु स्तम्भ नाम देने की मांग- कुतुब मीनार का नाम बदलने की मांग भी हाल ही में की गई थी। इसके बाद वहां हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। हिंदू संगठनों ने कुतुब मीनार का नाम बदलकर विष्णु स्तम्भ करने की मांग की थी। हिंदू संगठन के एक कार्यकर्ता ने कहा था कि मुगलों ने हमसे इसे छीना था। इसे लेकर हम अपनी मांगों को रख रहे हैं। हमारी मांग है कि कुतुब मीनार का नाम बदलकर विष्णु स्तम्भ किया जाए।

एनआईए अफसर तंजील हत्याकांड में मुनीर व रैयान को फाँसी की सजा

एनआइए अफसर व उनकी पत्नी की हत्या केस में मुख्य आरोपी मुनीर और  रैयान को फाँसी की सज़ा।  एडीजे कोर्ट 5 के जज डॉ विजय कुमार तालियांन ने सुनाई सज़ा। दोनों को फांसी की सजा का एलान। तंजीम,जेनी और रिजवान को किया गया बरी। मुख्य आरोपी मुनीर और रेयान ने गोली बरसाकर उतारा था एनआईए अफसर तंजील और उनकी पत्नी फरजाना को मौत के घाट। 2/3 अप्रैल 2016 की घटना।

बिजनौर। न्यायालय द्वारा एनआईए के पुलिस उपाधीक्षक तंजील अहमद हत्याकाण्ड के मुख्य अभियुक्त/गैंगस्टर मुनीर तथा सहअभियुक्त रैय्यान को फांसी की सजा से दण्डित किया गया है। तंजील अहमद पठानकोट आतंकी हमले की जांच टीम का हिस्सा थे। गत दिवस अदालत ने तीन आरोपितों को केस से बरी कर दिया था, जबकि मुनीर और उसके साथी रैय्यान को दोष करार दिया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुनहगारों को कोर्ट लाया गया था।

गौरतलब है कि दिनांक 02/03 अप्रैल 2016 को एनआईए के पुलिस उपाधीक्षक तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना की मुनीर तथा उसके साथियों द्वारा हत्या कर दी गयी थी। दिनांक 16 अप्रैल 2022 को इस अभियोग से सम्बन्धित गैंगस्टर एक्ट में न्यायालय द्वारा अभियुक्त मुनीर को 10 वर्ष के कारावास व 01 लाख रुपए के अर्थदण्ड से दंडित किया गया था। पुलिस उपाधीक्षक एवं उनकी पत्नी की हत्या के मामले में पुलिस द्वारा की गयी प्रभावी पैरवी के उपरान्त आज एडीजे कोर्ट 5 के जज डॉ विजय कुमार तालियांन द्वारा मुख्य अभियुक्त मुनीर तथा सहअभियुक्त रैय्यान को फांसी की सजा से दंडित किया गया। मुनीर अन्तर्राज्यीय गैंग का गैंग लीडर (गैंग कोड सं–आईएस 32/21) तथा हिस्ट्रीशीटर है। मुनीर के खिलाफ विभिन्न जनपदों/राज्यों में कुल 33 अभियोग पंजीकृत हैं तथा शासन द्वारा चिन्हित राज्य स्तरीय आपराधिक माफिया घोषित है। अभियुक्तों की सजा से शासन एवं पुलिस प्रशासन के प्रति आम लोगों का विश्वास उत्पन्न हुआ है तथा अपराधियों में भय का माहौल व्याप्त हुआ है।

लेनदेन का था विवाद

विवेचना के दौरान पता चला कि पारिवारिक प्रॉपर्टी में रुपयों के लेनदेन को लेकर मुनीर का एनआइए अफसर तंजील अहमद के साथ विवाद चल रहा था। मुनीर को संदेह था कि एनआइए अफसर उसकी मुखबिरी कर रहे हैं। इसे लेकर मुनीर ने अपने साथी रैयान, तंजीम, मोहम्मद जैनी और रिजवान के साथ मिलकर दोनों की हत्या कर दी थी। इस मामले में शुक्रवार को कोर्ट ने निर्णय सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम डा. विजय कुमार तालियान ने मुख्य आरोपित मुनीर और रैयान को दोषी पाया। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपित तंजीम, रिजवान और मोहम्मद जैनी को बरी कर दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता जितेंद्र सिंह मौजूद रहे।

अप्रैल 2016 की वारदात- अपर जिला शासकीय अधिवक्ता आनंद उर्फ अभिनव जंघाला के अनुसार एक-दो अप्रैल 2016 की रात एनआइए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना पर उस समय जानलेवा हमला किया गया, जब वह स्योहारा में एक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के बाद दिल्ली लौट रहे थे। हमले में एनआइए अफसर तंजील अहमद की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी फरजाना की इलाज के दौरान दिल्ली में मौत हुई थी। उनके दो बच्चे हमले के दौरान बच गए थे।

बचाव पक्ष की ओर से तर्क– बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल चौधरी ने बताया कि कोर्ट ने आरोपित मुनीर और रैयान को आर्म्स एक्ट सहित एक अन्य मामले में भी बरी कर दिया है। मुनीर और रैयान को हत्या का दोषी पाया है। उन्होंने दावा किया कि मुनीर और रैयान की तंजील अहमद से किसी प्रकार की कोई रंजिश नहीं थी। एनआइए अफसर तंजील अहमद आतंकवादी तथा अन्य गंभीर मामलों की जांच करते थे, ऐसी संभावना है कि उक्त घटना को किसी अन्य व्यक्ति ने अंजाम दिया।

गीत-संग्रह ‘पुन: युधिष्ठिर छला गया है’ एवं ‘मेंहदी रचे हाथ’ का लोकार्पण सम्पन्न

लखनऊ। साहित्य प्रोत्साहन संस्थान मनकापुर गोंडा के तत्वावधान एवं सुनील त्रिपाठी के संयोजन में स्थानीय डिप्लोमा इंजीनियर्स सभागार हजरतगंज लखनऊ में कवि व गीतकार राहुल द्विवेदी ‘स्मित’ एवं कवि चन्द्रगत भारती की काव्य कृतियों ‘पुन: युधिष्ठिर छला गया है’ एवं ‘मेंहदी रचे हाथ’ का लोकार्पण किया गया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर मिश्र की अध्यक्षता में सम्पन्न इस लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि कार्यक्रम अधिशासी दूरदर्शन ओबी भट्टाचार्य, विशिष्ट अतिथि डॉ० सुशील कुमार राय, कार्यक्रम अधिशासी, आकाशवाणी लखनऊ एवं संपादक सांध्य दैनिक ‘पब्लिक इमोशन’ बिजनौर डॉ पंकज भारद्वाज तथा मुख्य वक्ता वरिष्ठ नवगीतकार मधुकर अस्थाना, अन्तर्राष्ट्रीय व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना एवं वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र शुक्ल ‘राज’ ने मंच को सुशोभित किया।

कार्यक्रम का आरम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीपक प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात दोनों पुस्तकों का लोकार्पण संस्था के संस्थापक सचिव धीरज श्रीवास्तव एवं मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। लोकार्पित कृतियों पर अपने विचार रखते हुए मुख्य वक्ता मधुकर अस्थाना ने कहा कि पुनः युधिष्ठिर छला गया है; गीतकृति अपने शीर्षक से ही प्रतीक और व्यंजना की छाप छोड़ने लगती है, जिससे स्पष्ट होता है कि कवि की वाणी में पूरे  समाज की अन्तरात्मा की अभिव्यक्ति हो रही है और उनके गीत जीवन मूल्यों की प्रतिस्थापना हेतु प्रयत्नशील दिखाई देते हैं।

मुख्य अतिथि ओबी भट्टाचार्य ने राहुल द्विवेदी को उनकी पुस्तक के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस पुस्तक में कल्पना, संवेदना, यथार्थ की अनुभूति और संघर्ष की अभिव्यक्ति के संग लेखनी के तारतम्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। युवा कवि राहुल द्विवेदी स्मित एवं चन्द्रगत भारती में छुपी क्षमता को उनकी पुस्तकें स्वत‍: ही प्रकाशित करती हैं। डॉ० सुशील कुमार राय ने दोनों कृतिकारों को उनकी पुस्तकों हेतु बधाई दी साथ ही पुस्तकों को समय की शिला पर अंकित पृष्ठों का संकलन कहा।

डॉ० पंकज भारद्वाज ने कहा कि ‘पुनः युधिष्ठिर छला गया है’ कृति के प्रत्येक गीत मानवीय चेतना को जगाने में सफल होंगे।चन्द्रगत भारती की पुस्तक ‘मेंहदी रचे हाथ’ पर वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र शुक्ल राज ने कहा कि विपुल संवेदनाओं के धनी गीतकवि चन्द्रगत भारती हिन्दी साहित्य की रत्नमाला के आकर्षक व्यक्तित्व हैं। उनके गीत संग्रह ‘मेंहदी रचे हाथ’ में कोमल हृदय की भाव-तरलता के साथ-साथ युगीन बोध की सघनता पाठकों के हृदय को सहज ही मोह लेती है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यंग्यकार सर्वेश अष्ठाना ने कहा कि राहुल द्विवेदी स्मित के गीतों में गहरी संवेदना की प्रभावशाली अभिव्यक्ति है। अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो हरिशंकर मिश्र ने कहा कि अरसा बाद एक विशुद्ध साहित्यिक कार्यक्रम में गीतों पर हुई चर्चा का विस्तृत स्वरूप देख रहा हूँ।दोनों पुस्तकें अपने कलेवर और रचनात्मक गुणवत्ता से पाठक को आकर्षित करती है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में शिक्षा, साहित्य एवं पत्रकारिता से जुड़ी ग्यारह हस्तियों को उनके अपने क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश मौर्य मृदु, साहित्य भूषण शिवकांत मिश्र विद्रोही, डॉ अजय प्रसून, केवल प्रसाद सत्यम, रामानन्द सागर, डॉ सीके मिश्र, शालिनी सिंह, मनोज मानव, केदारनाथ शुक्ल, करन सिंह परिहार रहे। समारोह के प्रथम चरण का संचालन नवगीतकार अवनीश त्रिपाठी ने तथा द्वितीय चरण का संचालन ओज कवि उमाकांत पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का समापन संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष उमाशंकर शुक्ल के कृतज्ञता ज्ञापन से हुआ।

कार्यक्रम में सुनील त्रिपाठी, नरेंद्र भूषण, मनोज मानव, साहित्य भूषण कमलेश मौर्य ‘मृदु’, डॉ अजय प्रसून, केदारनाथ शुक्ल, केवल प्रसाद सत्यम, करन सिंह परिहार, कुलदीप बृजवासी, साहित्य भूषण शिवाकांत मिश्र विद्रोही, मंजुल मिश्र मंजर ,  मुकेश कुमार मिश्र, हितेश शर्मा ‘पथिक’, धीरज मिश्रा, राजाभैया गुप्ता ‘राजाभ’, ज्ञान प्रकाश ‘आकुल’, ओमप्रकाश शर्मा, आत्मप्रकाश मिश्र, पुनीता देवी, रेनू सिंह, श्रीमती प्रमिला, रियाज अहमद, अलका अस्थाना, अनुज ‘अब्र’, कमल किशोर भावुक, प्रतिभा गुप्ता, शुभदा बाजपेई ,योगी योगेश शुक्ल, निशा सिंह, महेश प्रकाश अष्ठाना,आदि नगर के अनेक साहित्यिक संस्था-प्रमुखों, कवियों, साहित्यकारों और समाजसेवियों की उपस्थिति रही।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई रविवार को


आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अंतर्राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह 22 मई 2022 रविवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह 8:00 बजे ऑनलाइन आयोजित किया गया है।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि रमाकांत कुमार (चांसरी प्रमुख, भारतीय कौंसलावास सैनफ्रांसिस्को-अमेरिका) और डॉ. कृपा शंकर चौबे (अध्यक्ष-जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा-महाराष्ट्र) निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले भारत और अमेरिका के बच्चों को आशीर्वाद एवं पुरस्कार प्रदान करेंगे।
पुरस्कार वितरण एवं आशीर्वाद समारोह का लाइव प्रसारण हमारी भाषा हिंदी फेसबुक पेज पर भी किया जाएगा। आपकी उपस्थिति हम सबका उत्साहवर्धन करेगी।
यह जानकारी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की श्रीमती मंजु मिश्रा अध्यक्ष अमेरिका इकाई एवं विनोद शुक्ल अध्यक्ष भारत इकाई ने संयुक्त रूप से दी।

डिप्टी सीएम ने छापा मारकर पकड़ीं साढ़े 16 करोड़ की एक्सपायरी दवाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में ताबड़तोड़ औचक निरीक्षण के क्रम में शुक्रवार को डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मेडिसिन सप्लाई कार्पोरेशन के गोदाम पर छापा मारा। इस दौरान लगभग साढ़े 16 करोड़ रुपए की एक्सपायरी दवाईंयां मिलीं। इस पर उन्होंने फटकार लगाते हुए तीन दिन के अंदर संबंधित से रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि डिप्टी सीएम डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक प्रदेश के अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं। अस्पतालों में मिल रही अव्यवस्थाओं पर वो जिम्मेदारों को फटकार लगा रहे हैं। इसके साथ ही व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने के निर्देश दे रहे हैं।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ट्वीट कर कहा है कि, ‘उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कार्पोरेशन, गोदाम पहुंचकर वहां मानक अनुरूप दवाइयों की उपलब्धता व सप्लाई रिपोर्ट का औचक निरीक्षण कर प्रथम दृष्टया 16,40,33,033 रुपये की एक्सपायरी दवाएं पाई गईं। इसकी जांच हेतु समिति को जांच रिपोर्ट 3 दिनों में प्रस्तुत करने संबंधी आदेश दे दिए गए हैं।’

विदित हो कि, इससे पहले लोहिया अस्पताल में डिप्टी सीएम ने छापेमारी की थी, जहां पर लाखों रुपये की एक्सपायरी डेट की दवाईंया मिलीं थीं, जिसमें उन्होंने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे।

ADG ने किया पुलिस लाइंस का गहनता से निरीक्षण

बिजनौर। अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन बरेली राजकुमार व पुलिस उपाधीक्षक हृदय शंकर उपाध्याय द्वारा पुलिस कार्यालय की विभिन्न शाखाओं / कार्यालयों का भ्रमण / निरीक्षण किया गया। कार्यालयों के निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रचलित अभिलेखों के रखरखाव / अभिलेखों को अद्यावधिक किये जाने, साफ-सफाई आदि के सम्बन्ध में दिशा निर्देश दिये। इस दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ धर्मवीर सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक नगर / ग्रामीण तथा अन्य अधिकारीगण/कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

अपर पुलिस महानिदेशक राजकुमार, बरेली जोन के जनपद बिजनौर पहुंचने पर रिजर्व पुलिस लाइन्स के अतिथि गृह में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान एडीजी ने रिजर्व पुलिस लाइन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों के टर्न आउट ड्रिल आदि का भी निरीक्षण किया तथा जवानों को चुस्त दुरुस्त व शारीरक एवं मानसिक रूप से फिट रहने के लिये परेड को दौड़ लगवाई। परेड में एकरूपता में अनुशासन बनाए रखने के लिए टोलीवार ड्रिल करवाई। एडीजी ने ड्रिल देखकर उसे और बेहतर तरीके से कराने के लिए प्रभारी पुलिस लाइन को निर्देशित किया। तत्पश्चात एडीजी ने रिजर्व पुलिस लाइन में क्वाटर गार्ड, शस्त्रागार, पुलिस स्टोर, सीपीसी कैंटीन, पुलिस चिकित्सालय, परिवहन शाखा, पुलिस लाइंस आवासीय परिसर, डायल 112, भोजनालय, शिकायत प्रकोष्ठ समेत विभिन्न कार्यालय के अपराध शाखा, पुलिस पेंशनर्स शाखा, रिकॉर्ड रूम, शाखाओं का निरीक्षण किया। वहां पर अभिलेखों के रख-रखाव एवं साफ सफाई आदि को लेकर दिशा निर्देश दिए। आदि का निरीक्षण भी किया। अभिलेखों का निरीक्षण करने के पश्चात सम्बंधित को दिशानिर्देश दिये।

पुलिस पेंशनर्स को धन्यवाद- एडीजी ने रिजर्व पुलिस लाइन्स के सभागार कक्ष में पुलिस पेंशनर्स के साथ गोष्ठी की। इस दौरान पुलिस विभाग में उनके योगदान के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही उनकी समस्याओं को सुनकर समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु संबंधित को निर्देशित एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। तत्पश्चात उन्होंने जनपद के जनप्रतिनिधियों के साथ गोष्ठी की तथा उनसे क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में जानकारी ली।

…नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार रतिराम जी

…नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार रतिराम जी
बिजनौर। मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार श्री रतिराम का हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया। वह 62 वर्ष के थे। कुछ दिन पूर्व हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर फिसलने से उनका कूल्हा टूट गया था। गंभीर रूप से घायल होने के बाद वह बिजनौर के एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन थे। मूल रूप से जनपद बिजनौर की तहसील चांदपुर अंतर्गत ग्राम हल्ला नंगला निवासी श्री रतिराम पुत्र रोहिताश सिंह का जन्म 04 जनवरी 1959 को हुआ था। वर्तमान में वह जिला मुख्यालय बिजनौर में रेलवे क्रॉसिंग के समीप शक्ति नगर में अपने परिवार समेत रह रहे थे। वह जीवन पर्यन्त पत्रकारिता से जुड़े रहे और वर्तमान में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में समाज के लिए कार्य कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों में अपनी लेखनी का कौशल दिखाया। उनके आकस्मिक निधन का समाचार सुनकर पत्रकारिता जगत के अलावा, परिजनों, मित्रों व शुभचिंतकों को यकायक यकीन नहीं हुआ। शोकाकुल माहौल में उनका अंतिम संस्कार गंगा बैराज पर कर दिया गया। वह अपने पीछे पत्नी के अलावा एक पुत्र व पांच बेटियां छोड़ गए हैं। तीन पुत्रियों का विवाह हो चुका है।

तीन दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता का डीआईजी ने किया उद्घाटन

बिजनौर। रिजर्व पुलिस लाइन्स में दिनांक 19.05.2022 से 21.05.2022 तक आयोजित होने वाली अन्तरजनपदीय पुलिस वालीबॉल, बास्केटबॉल, हैण्डबॉल, सेपक टकरा एवं योगा प्रतियोगिता वर्ष-2022 व सडक सुरक्षा जागरुकता अभियान का शुभारम्भ शलभ माथुर, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुरादाबाद परिक्षेत्र मुरादाबाद द्वारा किया गया।

रिजर्व पुलिस लाइन में शलभ माथुर, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुरादाबाद परिक्षेत्र मुरादाबाद द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर लिया गया। उनके द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देने वाली गार्द को उत्साहवर्धन हेतु पुरस्कृत किया गया। इसके पश्चात पुलिस लाइन्स के ग्राउण्ड में बरेली जोन, बरेली की दिनांक 19.05.2022 से 21.05.2022 तक आयोजित होने वाली अन्तरजनपदीय पुलिस वालीबॉल, बास्केटबॉल, हैण्डबॉल, सेपक टकरा एवं योगा प्रतियोगिता वर्ष-2022 का उदघाटन किया गया। उक्त प्रतियोगिता में बरेली जोन के सभी 09 जनपदों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। पुलिस उपमहानिरीक्षक ने सभी प्रतिभागी खिलाडियों से हाथ मिलाकर उनका परिचय लिया तथा खेल भावना के उददेश्य से खेलने की अपील करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया गया।
तदोपरान्त पुलिस उपमहानिरीक्षक मुरादाबाद परिक्षेत्र मुरादाबाद श्री माथुर द्वारा रिजर्व पुलिस लाइन्स प्रांगण में एनसीसी कैडेट्स को सडक सुरक्षा के बारे में जागरुक किया गया। उनको बताया गया कि सड़क पर सभी को अपने बाँये तरफ चलना चाहिए खासतौर से चालक को और दूसरी तरफ से आ रहे वाहन को जाने देना चाहिये। चालक को सड़क पर गाड़ी घुमाते समय गति धीमी रखनी चाहिये। अधिक व्यस्त सड़कों और रोड जंक्शन पर चलते समय ज्यादा सावधानी बरतें। दोपहिया वाहन चालकों को अच्छी गुणवत्ता वाले हेलमेट पहनने चाहिये नहीं तो उन्हें बिना हेलमेट के रोड पर नहीं आना चाहिये। गाड़ी की गति निर्धारित सीमा तक ही रखें खासतौर से स्कूल, हॉस्पिटल, कॉलोनी आदि क्षेत्रों में। सभी वाहनों को दूसरे वाहनों से निश्चित दूरी बनाकर रखनी चाहिये। सड़कों पर चलने वाले सभी लोगों को रोड पर बने निशान और नियमों की अच्छे से जानकारी हो। यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा के नियम-कानूनों को दिमाग में रखें।

एनसीसी कैडेट्स की जागरुकता रैली- इसी के साथ ही एनसीसी कैडेट्स के साथ प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर जागरुकता रैली को रवाना किया गया एवं आमजन मानस को यातायात नियमों से अवगत कराया गया। इस दौरान जिलाधिकारी उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ0 धर्मवीर सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ0 प्रवीन रंजन सिंह, आरटीओ शिव शंकर, एआरटीओ राकेश मोहन, क्षेत्राधिकारी नगर कुलदीप गुप्ता, उ0नि0 यातायात बलराम सिंह व अन्य पुलिस अधिकारीगण मौजूद रहे।


इसके बाद पुलिस उपमहानिरीक्षक द्वारा स्कूली वैन बस एवं एंबुलेंस का फिटनेस चेक कर वाहन से सम्बन्धित जानकारी ली गई तथा सम्बन्धित को इस सम्बन्ध में डाटाबेस बनाकर रखने हेतु निर्देशित किया गया। वाहन स्वामी को बताया गया कि स्कूली वाहनों में सभी मानकों को हमेशा पूरा रखा जाए तथा वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने हेतु निर्देशित किया गया।

ग्राम प्रहरियों को वर्दी किट-
डीआईजी ने रिजर्व पुलिस लाइन्स प्रांगण में नगर सर्किल के ग्राम प्रहरियों को जर्सी, साफा, जीन कोट, बेल्ट, जूता, धोती (कुल 06) सामानों का वितरण किया गया। ग्राम प्रहरियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी पुलिस विभाग मे एक मजबूत कडी है जो अपने आसपास की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखते हैं, जिससे किसी घटना को घटित होने से रोका जा सकता है। उनके द्वारा सभी को समय से सूचना देने व अपने दायित्वों का अच्छी तरह से निर्वहन करने हेतु प्रेरित किया गया। सभी ग्राम प्रहरियों को अपनी डयूटी को सतर्कता पूर्वक करने व किसी भी प्रकार की कोई भी सूचना तत्काल थाना प्रभारी को देने हेतु बताया गया। पुलिस उपमहानिरीक्षक शलभ माथुर द्वारा रिजर्व पुलिस लाइन्स प्रांगण में आयोजित नेत्र शिविर का निरीक्षण किया गया। शिविर में वाहन चालक अपनी ऑखों का इलाज, शुगर, ब्लड प्रेशर आदि की जाँच करा रहे थे। डीआईजी द्वारा सभी चालकों को यातायात नियमों का पालन करने, वाहन चलाते समय किसी भी नशे का सेवन न करने हेतु बताया गया तथा सभी को समय-समय पर अपनी जाँच कराने हेतु प्रेरित किया गया। शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ, शुगर रोग विशेषज्ञ व अन्य स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद रहे।

GGIC में सड़क सुरक्षा से संबंधित जागरूक शपथ दिलाई- उन्होंने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बिजनौर में पहुंच कर स्कूलों के बच्चों के साथ सडक सुरक्षा सप्ताह के तहत सड़क सुरक्षा से संबंधित जागरूक शपथ दिलाई तथा सभी को सडक सुरक्षा में जागरुक करते हुए बताया गया कि

1- ट्रैफिक सिग्नल का अर्थ समझना ।
2- रुको, देखो फिर सड़क पार करो ।
3- ध्वनि पर ध्यान दें ।
4- सड़क पर दौड़ें नहीं ।
5- फुटपाथ का उपयोग करें ।
6- पेडेस्ट्रियन से करें सड़क पार ।
7- वाहन के बाहर हाथ न निकालें ।
8- मोड़ से सड़क पार न करें ।
9- ड्राइविंग के नियमों का पालन करे ।
10- चलते वाहन में सुरक्षित बैठना ।
11- वाहन के रुकने के बाद ही चढ़ना और उतरना ।
12- हमेशा किनारे पर ही उतरें ।
13- स्कूल बस का इस्तेमाल हमेशा लाइन में रहकर करें ।
14- उतरने वाले यात्रियों को पहले अवसर दें ।
15- हाथ का इशारा दें ।

इस दौरान जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारी एवं स्कूल का स्टाफ उपस्थित रहा।

सीएम की गुडबुक के डीजीपी से कितना छंटेगा पुलिस व्यवस्था का गतिरोध


आखिर उत्तर प्रदेश के निवर्तमान पुलिस महानिदेशक शीर्ष स्तर पर नौकरशाही की लाबिंग के भंवर में फंसकर प्रतिशोध की भेंट चढ़ ही गये। हालांकि उनसे पहले और डीजीपी भी रहे हैं जो कार्यकाल के पहले चलते किये गये हैं लेकिन किसी को इतने बेआबरू अंदाज का सामना नहीं करना पड़ा। मुकुल गोयल के बारे में बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा गया कि वे निकम्मे, विभागीय कार्य में रूचि न लेने वाले और शासन के निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारी के रूप में प्रदर्शित रहे हैं। उनकी शराफत के कायल प्रदेश पुलिस के अधिकांश उच्चाधिकारी शासन की इतनी कठोर टिप्पणी से अवाक हैं और उन पर लगाये गये इन अतिरंजनापूर्ण आरोपों को पचा नहीं पा रहे हैं।


अतिरिक्त कार्यभार औपचारिकता मात्र, उन्हें स्थायी डीजीपी मानो-
फिलहाल उनकी जगह इंटेलीजेंस और विजीलेंस के मुखिया देवेन्द्र सिंह चौहान को डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है। जिसे लेकर जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री मुकुल गोयल को डीजीपी नियुक्त किये जाने के समय से ही उन्हें इस पद पर आसीन कराने को व्यग्र थे। 2020 में उन्हें इसी मकसद से केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लाया गया था। पर तकनीकी बाधाओं के कारण मुख्यमंत्री अपनी इस मंशा को उस समय पूरा नहीं कर सके थे चूंकि प्रदेश कैडर के आइपीएस अधिकारियों में वे बहुत निचली पायदान पर थे। अगर मुकुल गोयल को कार्यकाल पूरा कर लेने दिया जाता तो देवेन्द्र सिंह चौहान उनसे लगभग एक साल पहले ही रिटायर हो जाते और डीजीपी बनने की उनकी हसरत दफन होकर रह जाती इसलिए मुकुल गोयल को नाकारा बताकर समय रहते डीजीपी का पद उनसे खाली कराने की कवायद तत्काल पूरी की जाना अब लाजिमी हो गया था।


विजिलेंस मुखिया की पावर का नमूना श्रीराम अरूण भी थे-
प्रसंगवश इसका उल्लेख किया जा सकता है कि देवेन्द्र सिंह चैहान के पहले भी डीजीपी पद तक पहुंचने के महत्वाकांक्षी अफसर तमाम करिश्मे दिखा चुके हैं जिनमें एडीजी के पद से इस्तीफा देकर राजनीति में आने और प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले असीम अरूण के पिता श्रीराम अरूण का नाम भी कभी लिया गया था। श्रीराम अरूण जब एडीजी विजीलेंस थे उस समय उन्होंने भविष्य में डीजीपी पद के दावेदार बनने वाले सारे पुलिस अफसरों की फाइलें खुलवा दी थी ताकि उनके प्रमोशन का लिफाफा डीपीसी में बंद करना पड़ जाये।


डीएस चौहान को लाने के लिए किस तरह बुना गया तानाबाना-
देवेन्द्र सिंह चौहान को अभी स्थायी डीजीपी इसलिए नहीं बनाया जा सका है कि वे वरिष्ठता क्रम में अभी भी छठे नम्बर पर हैं। यूपी कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस अनिल अग्रवाल केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं इसलिए उन्हें छोड़ भी दिया जाये तो वे पांचवे नम्बर पर रह जाते हैं। अब पांच शीर्ष आईपीएस में विश्वजीत महापात्रा को दो महीने बाद ही रिटायर होना है इसलिए उनको डीजीपी बनाया नहीं जा सकता। इनके अलावा गोपाल लाल मीणा हैं जिनका रिटायरमेंट अगले साल 10 जनवरी को है। जाहिर है कि दो महीने बाद उनका कार्यकाल भी छह महीने से कम बच पायेगा तो वे भी डीजीपी की दावेदारी की दौड़ से बाहर हो जायेंगे और देवेन्द्र सिंह चैहान का नाम टाप 3 में आ जायेगा। तब केन्द्र में उन्हीं के नाम पर मोहर लगवाने की पैरवी राज्य सरकार की ओर से पूरी मजबूती से हो सकेगी इसलिए लोग अभी से मानने लगे हैं कि देवेन्द्र सिंह चैहान कार्यवाहक नहीं बल्कि स्थायी डीजीपी हैं जो रिटायरमेंट के बाद ही इस कुर्सी से अलग होंगे। नतीजतन फिलहाल उनको कार्यवाहक लिखा जाना औपचारिकता मात्र है।


ओपी सिंह को डीजीपी बनाने में भी सीएम ने सुपरसीड किये थे आधा दर्जन आईपीएस-
वैसे सजातीय अधिकारी को इस कुर्सी पर देखने की मुख्यमंत्री की लालसा शुरू से ही इतनी प्रबल रही है कि देवेन्द्र सिंह चैहान के पहले ओपी सिंह को डीजीपी बनाने के लिए उन्होंने उनके ऊपर के लगभग आधा दर्जन अधिकारी सुपरसीड कर दिये थे। इसी तरह अपनी सरकार पहली बार गठित होने के बाद जब उन्होंने तत्कालीन डीजीपी जाबेद अहमद को हटाकर नया डीजीपी नियुक्त करने का फैसला किया तो कार्यकाल कम रह जाने के बावजूद उनकी निगाह सुलखान सिंह पर जाकर टिकी। हालांकि सुलखान सिंह चैबीस कैरेट के ईमानदार अधिकारी रहे हैं और उनके जबरदस्त सादगी भी थी इसलिए लोगों की सहानुभूति भी उनसे जुड़ी थी और स्वाभाविक रूप से इसके कारण उनका नाम बतौर डीजीपी इतिहास में शामिल कराने के लिए लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार भी माना था।


सपा से रिश्ते की बात का बतंगड़-
पर देवेन्द्र सिंह चैहान को अपने को साबित करने के लिए बड़ी मशक्कत की जरूरत पड़ेगी अन्यथा उनके लिए आरपी सिंह और राजकुमार विश्वकर्मा को सुपरसीड किये जाने के लिए मुख्यमंत्री पर उंगलियां जरूर उठेंगी जबकि उंगली तो मुकुल गोयल को हटाने के लिए बहुत लचर कारण बताये जाने पर भी उठ रही हैं। अगर उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि वे कभी सपा के खास रहे थे तो इसमें बहुत दम नहीं है। इसके लिए उन्हें अखिलेश सरकार में एडीजी एलओ बनाये जाने की बात कही जाती है लेकिन यह बात छुपा ली जाती है कि अखिलेश सरकार ने बीच में ही उनको यहां से शंट करके लूप लाइन में डाल दिया था और बाद में उन्हें केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर चले जाना पड़ा था। इस मामले में तो कोई देवेन्द्र सिंह चैहान का भी नाम ले सकता है क्योंकि मूलतः मैनपुरी जिले के होने के नाते उनके मुलायम सिंह से काफी नजदीकी संबंध रहे हैं और इस कारण वे परिवार के बुजुर्ग के रूप में मुलायम सिंह से सामाजिक शिष्टाचार निभाने को मजबूर रहते थे जिसे लेकर उनकी कुछ तश्वीरे अखबारों में भी प्रकाशित करा दी गई थी।


नाकारा बताये गये गोयल नबाजे जा चुके हैं उत्कृष्ट पुलिस सेवा मेडल से-


जहां तक मुकुल गोयल की कार्यक्षमता का सवाल है उनको राष्ट्रपति के पुलिस पदक और उत्कृष्ट पुलिस सेवा पदक से अलंकृत किया जा चुका है। यह भी याद करना होगा कि उन्हीं के कार्यकाल में पहली बार उत्तर प्रदेश में देश भर के पुलिस महानिदेशकों का तीन दिन का सम्मेलन आयोजित किया गया जो इतना सफल आयोजन माना गया कि दो दिन का समय इसके लिए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने और एक दिन का समय स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया था। अगर वे विभागीय कार्य में रूचि न लेने वाले होते तो इतना बड़ा कामयाब पुलिस आयोजन कैसे करा पाते।


गोयल फील्ड पर न जाने के लिए किये गये थे बाध्य-
उनके फील्ड पर न जाने की बात भी बहुत स्पष्ट है। उनसे पहले हितेश अवस्थी को जब डीजीपी बनाया गया था तो उन्होंने अपनी पहली प्रेस कान्फ्रेस में ही कह दिया था कि डीजीपी का काम जिलों में जाना नहीं है लेकिन उन्हें कभी इस तरह की धारणा के लिए टोकने की जरूरत महसूस नहीं की गई जबकि मुकुल गोयल ने तो पहली मीडिया वार्ता में कहा था कि वे अपने कार्यालय में ही बने रहने की बजाय मानिटरिंग के लिए समय-समय पर बाहर समीक्षा बैठकें करेंगे। अगर वे ऐसा नहीं कर पाये तो अनुमान लगाया जा सकता है कि निश्चित रूप से उन्हें इसके लिए ऊपर से रोका गया होगा। लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली के निरीक्षण के समय व्याप्त गंदगी के आधार पर जब उन्होंने मौके पर ही प्रभारी निरीक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी किया तो उन्हें नीचा दिखाने के लिए इसके क्रियान्वयन पर न केवल रोक लगा दी गई बल्कि इसे ऐसे प्रचारित किया गया जिससे उनकी सत्यनिष्ठा पर लोगों में संदेह व्याप्त हो जाये और मुख्यमंत्री के मुंह से वीडियों कान्फ्रेसिंग में यह कहला दिया गया कि डीजीपी कार्यालय की थानों में नियुक्ति की संस्तुतियां जिलों के मुखिया मान्य न करें। हालांकि तथ्य यह बताते हैं कि उनके समय थानों की नीलामी का कोई मामला सामने नहीं आया जबकि योगी के समय ही एक दौर ऐसा था कि ऐसे आरोपों के कारण बुलंदशहर के तत्कालीन एसएसपी एन कोलांची और प्रयागराज के तत्कालीन एसएसपी अतुल शर्मा आदि को सरकार को निलंबित करना पड़ गया था। नोएडा के तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण ने तो अपने पांच समकक्षों द्वारा थाने देने के लिए सौदेबाजी करने के सबूत पैनड्राइव में इकट्ठा करके तत्कालीन डीजीपी ओपी सिंह को सौंप दिये थे। बाद में जब सरकार ने उनके आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित की तो उसे ओपी सिंह ने पैनड्राइव देने में लगातार टालमटोल की। बाद में एसआईटी ने देरी से जांच रिपोर्ट सौंपते समय ओपी सिंह की इस अडंगेबाजी को भी वहन किया लेकिन ओपी सिंह को लेकर तरह-तरह की चचार्ये खूब चली बावजूद इसके मुख्यमंत्री का वरदहस्त उन पर बना रहा। यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि मुकुल गोयल के बारे में जिलों के अधिकारियों को बड़ी शिकायतें थी जबकि मुकुल गोयल उन्हें लगातार जलील किये जाने का एहसास कर लेने के बाद जोन, रेंज और जिलों के पुलिस मुखियाओं से बात तक करने में खुद ही कतराने लगे थे तो उनसे ये लोग तंग कैसे हो सकते थे। इसी तरह उनके द्वारा मीडिया ब्रीफिंग से बचने की बात भी बेमानी है क्योंकि उन्होंने तो पदभार संभालते ही लम्बी ब्रीफिंग की थी। पर आगे उन्हें इसके लिए अपने कदम संभवतः शासन की मंशा के कारण रोक देने पड़े थे।


गोयल के स्वतः कहीं और शिफ्ट हो जाने का शायद था इंतजार-
विधानसभा चुनाव के समय निर्वाचन आयोग के निर्देशों के कारण जब हर स्तर पर पुलिस में तबादलों की सूची बनाने की कवायद की जाने लगी तो इसके लिए तीन समितियां बनायी गई पर मुकुल गोयल को एक भी समिति में नहीं रखा गया जबकि वे तीनों समितियों के अध्यक्ष होने चाहिए थे। यह भी सभी जानते हैं कि हर डीजीपी तभी सफलतापूर्वक काम कर पाता है जब उसे अपने मुताबिक अपनी टीम बनाने दी जाये लेकिन मुकुल गोयल की स्थिति यह थी कि वे जिन नामों की संस्तुति करते थे उन अधिकारियों को जिलों में पोस्ट करने की बजाय सजा वाले स्थानों पर भेज दिया जाता था। कुल मिलाकर प्रयास यह था कि मुकुल गोयल अपनी उपेक्षा से ऊबकर खुद ही पलायन करने की पेशकश कर दें।


जो भी हो गोयल के हट जाने से होगा पुलिस व्यवस्था का भला-
बहरहाल मुकुल गोयल का हट जाना एक तरह से अच्छा ही हुआ क्योंकि उनके प्रति शासन के रवैये से पुलिस की व्यवस्था डैड मोड में चली गई थी जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा था। भले ही उनके समय सोनभद्र में 11 आदिवासियों की हत्या, कानपुर के बिकरू में 8 पुलिस कर्मियों को शहीद किये जाने और हाथरस में दलित किशोरी की रेप के बाद हत्या और उसके शव को घर वालों को सौंपने की बजाय पुलिस द्वारा जलबा दिये जाने जैसे सरकार की नाक कटाने वाला एक भी बड़ा कांड सामने नहीं आया। पर यह उनकी खुश किस्मती भर रही वरना जिस तरह से पुलिस व्यवस्था पंगु हो गई थी उसमें बहुत बड़े-बड़े बवाल हो जाने थे। अब मुख्यमंत्री की पसंद के डीजीपी कुर्सी पर बैठ गये हैं तो पुलिस व्यवस्था में यह गतिरोध निश्चित रूप से छटेगा। बशर्ते देवेन्द्र सिंह चैहान प्रभावी ढंग से मोर्चा संभालें। इंटेलीजेंस और विजीलेंस की कमान होने से देवेन्द्र सिंह चैहान को गड़बड़ी करने वाले जिला प्रमुखों की सारी कच्ची पक्की पुख्ता जानकारियां होंगी इसलिए उन्हें सारे दागदार एसएसपी, एसपी जिलों से वापस बुला लेना चाहिए और जिलों के लिए अपनी साफ सुथरी नई टीम बनानी चाहिए। जोन और रेंज के मुखिया मुकुल गोयल के कार्यकाल में शहंशाह बन गये थे जबकि जब तक ये लोग जिलों का लगातार भ्रमण न करते रहें तब तक जिलों में स्थिति ठीक नहीं रह सकती। देवेन्द्र सिंह चैहान को इन पदों के अफसरों को आराम तलबी छोड़कर फील्ड पर जाने के लिए मजबूर करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी झांसी मंडल के दौरे में इन्हें लक्ष्य करके चेतावनी जारी की थी। ओपी सिंह की तरह देवेन्द्र सिंह पर भी एसीएस होम को अभी की भांति पुलिस पर हावी बने रहने का अवसर नहीं मिल पायेगा इसलिए वे इस मामले में कारगर कदम आराम से उठा सकते हैं। महत्वपूर्ण पदों पर अफसरों की नियुक्ति में सामाजिक समीकरणों को  भी उन्हें दुरूस्त करना चाहिए जो अभी एकतरफा हैं। रेंकर आईपीएस को जिलों की कमान सौंपने में काफी कंजूसी दिखायी दे रही है जिससे उनमें कुंठा है। तमाम रेंकर अफसर इसके कारण लूप लाइन में ही रिटायर हो जाने के लिए विवश हैं। जिला पुलिस प्रमुख के रूप में कार्य करने का उन्हें थोड़ा और ज्यादा अवसर दिलाने का अगर देवेन्द्र सिंह चौहान पैरवी कर पाते हैं तो यह बहुत अच्छा होगा।


एसीएस होम के पुलिस पर हावी रहने के दिन भी लदेंगे-
इस बीच जिला पुलिस प्रमुखों की जबावदेही तय की जाने में व्याप्त संकोच के कारण भी स्थितियां बिगड़ी हैं और पुलिस की निरंकुशता की शिकायतें बढ़ी हैं। नये डीजीपी इसमें कड़ाई करेंगे तो शिकायतें भी कम होगी और जिला पुलिस प्रमुखों के रूप में नई तैनातियां बढ़ने से ज्यादा से ज्यादा अफसरों को आजमाया जा सकेेगा तो बेहतर पुलिसिंग के लिए ज्यादा विकल्प तैयार होंगे। अगर पुलिस के सम्मुख मौजूद चुनौतियांे के बेहतरीन निदान में देवेन्द्र सिंह चैहान ने अपना करिश्मा दिखाने में कसर नहीं छोड़ी तो उनकी छवि भी मजबूत होगी और मुख्यमंत्री की भी शानदार छवि स्थापित होगी।  

केपी सिंह, (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

ढूंढ रहे थे तस्करी की शराब, बरामद हुई 232 kg चांदी

गोपालगंज (एजेंसी)। बिहार के गोपालगंज में उत्पाद विभाग की टीम को बड़ी कामयाबी मिली जब टीम ने उत्तर प्रदेश से बिहार आ रही एक कार से शराब की जगह दो क्विंटल से अधिक चांदी बरामद की। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। दरअसल, उत्पाद विभाग की टीम बुधवार को अवैध शराब को लेकर कुचायकोट थाना क्षेत्र के बलथरी चेक पोस्ट पर उत्तर प्रदेश से आने वाले वाहनों की तलाशी ले रही थी। इसी दौरान एक कार से 232 किलोग्राम चांदी बरामद की गई।

गोपालगंज के उत्पाद अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि बारीकी से जांच के दौरान कार में पीछे की सीट के नीचे तहखाना जैसी जगह मिली, जिससे 232 किलोग्राम चांदी बरामद की गई। उन्होंने बताया कि बरामद की गई चांदी की कीमत बाजार में डेढ़ से दो करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

कानपुर से हो रही थी तस्करी- उत्पाद अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि इस मामले में कार चालक और एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। उन लोगों की पहचान दरभंगा जिला के नगर थाना क्षेत्र के बड़ा बाजार निवासी मनोज गुप्ता और चालक शिव शंकर महतो के रूप में की गई है। पूछताछ में पता चला है कि चांदी को उत्तर प्रदेश के कानपुर से दरभंगा ले जाया जा रहा था। सूचना पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।

कायस्थ चेतना मंच द्वारा दूसरा प्याऊ संचालित

बरेली। कायस्थ चेतना मंच के तत्वावधान में 17 मई 2022 दिन मंगलवार को प्याऊ का उद्घाटन संस्था के संरक्षक डॉक्टर पवन सक्सेना एवं संस्था के वरिष्ठ सदस्य पार्षद सतीश कातिब मम्मा जी द्वारा किया गया।

डॉक्टर पवन सक्सेना ने इसे संस्था का सराहनीय कार्य बताया। सतीश मम्मा ने कहा कि समय समय पर ऐसे कार्य कराने से संस्था की छवि और उज्जवल होगी। अध्यक्ष संजय सक्सेना ने बताया संस्था द्वारा एक प्याऊ बदायूं रोड स्थित पानी की टंकी के सामने 3 मई अक्षय तृतीया से संचालित हो रहा है, जिससे बदायूं रोड पर राहगीरों के लिए बहुत आराम मिलता है। चौपला पुल से लेकर करगैना तक और कोहरापीर पुलिस चौकी के आसपास भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। राहगीरों के लिए बहुत परेशानी होती है। यह विचार मन में आया था। इसीलिए प्याऊ संचालित किए गए हैं। अभी दो प्याऊ और संचालित करने का विचार है।

संस्था के वरिष्ठ उपाध्याय अखिलेश सक्सेना ने सभी का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया म। इस कार्यक्रम में महिला अध्यक्ष श्रीमती माया सक्सेना, श्रीमती प्रतिभा जौहरी, अविनाश सक्सेना, बीनू सिन्हा, महासचिव अमित सक्सेना बिंदु, निर्भय सक्सैना, पंकज सक्सेना पंछी आदि लोग उपस्थित रहे।

इससे पहले व्यंजन रेस्टोरेंट पर रेस्टोरेंट के मालिक गुप्ता के विशेष सहयोग से राहगीरों को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए एक प्याऊ की व्यवस्था की गई। कायस्थ चेतना मंच संरक्षक डॉक्टर पवन सक्सेना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा नारियल फोड़कर प्याऊ का उद्घाटन किया गया।

अध्यक्ष संजय सक्सेना, महासचिव अमित सक्सेना बिंदु, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अविनाश चंद्र सक्सेना, अखिलेश कुमार सक्सेना, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, निर्भय सक्सैना वरिष्ठ पत्रकार, जिला महिला अध्यक्ष श्रीमती माया सक्सेना, पार्षद सतीश कातिब मम्मा, वरिष्ठ पार्षद एवं बीडीए सदस्य पंकज जौहरी पंछी, श्रीमती प्रतिमा जौहरी आदि ने कार्यक्रम में सहयोग किया अंत में अखिलेश कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

माँ भारती की अभिनव अर्चना प्रदक्षिणा बाइक रैली 22 मई को


बिजनौर। स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अन्तर्गत क्रीड़ा भारती द्वारा 22 मई को पूरे देश में माँ भारती की अभिनव अर्चना; क्रीड़ा भारती के संग राष्ट्र प्रदक्षिणा का आयोजन किया जायेगा। क्रीड़ा भारती बिजनौर द्वारा भी 22 मई को राष्ट्र प्रदक्षिणा बाइक रैली डीएवी इन्टर कालेज बिजनौर से नौगावाँ सादात तक निकाली जायेगी, जिसमें 75 बाइक शामिल रहेंगी।
यह निर्णय सुदर्शन भवन आदोपुर में क्रीड़ा भारती के मंत्री जैनेंद्र के संचालन में सम्पन्न हुई एक समीक्षा बैठक में लिया गया। समीक्षा बैठक में क्रीड़ा भारती के प्रदेश संयोजक विकास अग्रवाल व प्रदक्षिणा कार्यक्रम के संयोजक तथा प्रान्त अध्यक्ष विशाल मित्तल द्वारा बाइक रैली के आयोजन के उद्देश्य व आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। पदाधिकारी द्वय द्वारा बताया गया कि रैली पूरे देश में प्रातः ठीक आठ बजकर छप्पन मिनट पर प्रारंभ होगी। प्रदक्षिणा के माध्यम से युवाओं में देश प्रेम की भावना व खेलों के प्रति जागृत करने का संदेश दिया जाना है।
इससे पूर्व कार्यक्रम की रुपरेखा की जानकारी विभाग सरसंघचालक महेश जी, विभाग प्रचारक विनीत कौशल, विभाग कार्यवाह प्रशांत महर्षि, सह नगर कार्यवाह दीपक चौहान द्वारा दी गयी।
क्रीड़ा भारती के अध्यक्ष योगेन्द्र पाल सिंह योगी द्वारा बताया गया कि प्रदक्षिणा बाइक रैली का जनपद के अनेक स्थानों पर स्वागत किया जायेगा। इस दौरान क्रीड़ा भारती से जुड़े खिलाड़ियों व आम जन द्वारा पुष्प वर्षा की जायेगी। बैठक में भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष रोबिन चौधरी, विश्व हिन्दू परिषद के जिला मंत्री अनिल चौधरी, नगर प्रचारक प्रिन्स चौधरी, विद्यार्थी परिषद के युवराज सिंह, क्रीड़ा भारती के अरविंद अहलावत, प्रभात कुमार, संजीव डवास, विनय कुमार, राजेन्द्र सोलंकी द्वारा प्रदक्षिणा कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु पूर्ण रूप से सहयोग करने का आश्वासन दिया गया।

वीणा जी को याद कर हो गई आंखें नम

उरई (जालौन)। बुंदेलखंड कोकिला के नाम से संगीत की दुनिया में नवाजी जाती रहीं  सुर साम्राज्ञी स्वर्गीय वीणा श्रीवास्तव के जन्मदिन के उपलक्ष्य में उन्ही के द्वारा स्थापित रंगमंचीय सांस्कृतिक संस्था “वातायन” के तत्वावधान में शनिवार की रात राजमार्ग स्थित मणीन्द्रालय प्रेक्षागृह में मधुर यादें शीर्षक से संगीतमय भावभीना  कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक रवि कुमार और विशिष्ट अतिथि लोक कला मर्मग्य अयोध्या प्रसाद कुमुद उपस्थित रहे। इस अवसर पर वीणा जी से जुड़े खट्टे मीठे संस्मरणों को भी साझा किया गया, जिससे सभा में मौजूद उनके प्रशंसकों  की आँखे नम हो गईं।

इस अवसर पर नन्हें बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों ने लोगों को मुग्ध कर दिया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उरई के लोगों के लिए यहाँ की सांस्कृतिक विरासत उनके गौरव को स्थापित करने वाली है, जिसमें वीणा जी जैसी शख्सियतों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस तरह के लोगों की स्मृति होने वाले आयोजनों से यहाँ की समृद्ध सृजन धारा अविरल बनी रहेगी और पीढी दर पीढी इसकी मशाल थामने वाली प्रतिभाएं जन्म लेती रहेंगी।

वातायन के अध्यक्ष और वीणा जी के पति डॉ अरुण श्रीवास्तव ने जब वातायन संस्था के इतिहास पर प्रकाश डालने के साथ वीणा जी से जुडीं तमाम यादें ताजा की तो माहौल भावुक हो गया। कार्यक्रम का संचालन महेश अरोरा ने किया। संरक्षक डॉ आदित्य सक्सेना ने भी वीणा जी की बहुआयामी प्रतिभा के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला तो लोग रोमांच और कौतूहल से भर उठे।

संगठन उपाध्यक्ष चौधरी जय करण सिंह और कार्यक्रम उपाध्यक्ष डॉ स्वयं प्रभा द्विवेदी ने मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। वातायन के अन्य पदाधिकारियों में कार्यक्रम सचिव वर्षा राहुल सिंह, संगठन सचिव अमर सिंह, कोषाध्यक्ष गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी अरविंद नायक, कार्यक्रम निदेशक हेम प्रधान, कार्यक्रम उपनिदेशक डॉ विश्वप्रभा त्रिपाठी, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सक्सेना, श्रीमती इंदु सक्सेना, सुधीर प्रकाश सिंह, श्रीमती शशि अरोड़ा, डॉ केएन सिंह निरंजन, श्रीमती रत्ना प्रधान, डॉ कुमारेन्द्र  सिंह ने भी कार्यक्रम को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सौजन्य से जालौन टाइम्स उरई  

रजत जयंती वर्ष: हम हैं राही स्मृति अभियान के

रजत जयंती वर्ष: हम हैं राही स्मृति अभियान के

यही तारीख थी नौ मई। साल 1998। अपने ही गांव-घर, जनपद, प्रदेश और देश में भुला-बिसरा दिए गए हिंदी के प्रथम आचार्य हम सबको एक भाषा, एक बोली-बानी और नवीन व्याकरण देने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्मृतियों को संजोने से जुड़ा अभियान शुरू हुआ। शुरुआत 42 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी के बीच रायबरेली शहर के शहीद चौक से ध्यानाकर्षण धरने के माध्यम से हुई। यह एक शुरुआत भर थी। कोई खाका नहीं। कोई आका नहीं। कुल जमा 40-50 और पवित्र संकल्प इस अभियान की नींव में थे। प्रकृति या यूं कहें खुद आचार्य जी ने शहीद चौक पर जुटे अनुयायियों की परीक्षा ली। टेंट के नीचे बैठे लोग अपने इस पूर्वज और हिंदी के पुरोधा की यादों को जीवंत बनाने का संकल्प ले ही रहे थे कि तेज अंधड़ से 18×36 का टेंट उड़ गया। लोग बाल बाल बचे लेकिन कोई डिगा न हटा। ध्यानाकर्षण धरना अपने तय समय पर ही खत्म हुआ।

पहली परीक्षा में पास होने के बाद चल पड़ा स्मृति संरक्षण अभियान आप सब के सहयोग-स्नेह और संरक्षण से कई पड़ाव पार करते हुए आज यहां तक पहुंचा है। अभियान का यह 25वां वर्ष प्रारंभ हुआ है। किसी भी परंपरा के 25 वर्ष कम नहीं होते। इस दरमियान कुछ बदला, कुछ छूटा और बहुत कुछ नया शामिल भी हुआ। इस टूटे-फूटे ही सही अभियान के भवन में न जाने कितने लोगों का पैसा, पसीना और प्यारभाव ईंट-गारे के रूप में लगा है। सबके नाम गिनाने बैठे तो कागज नामों से ही भर जाए। मन की बहुत बातें मन में ही रखनी पड़ जाएं। इसलिए बात केवल उन पड़ावों की जो यादों में अंकित-टंकित हो चुकी हैं।
    अभियान का शुरुआती मुख्य मकसद साहित्यधाम दौलतपुर को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में घोषित कराने से जुड़ा था। इसके प्रयास भी दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हुए। खूब हुए लेकिन हिंदी के पुरोधा का जन्मस्थान राष्ट्रीय स्मारक नहीं बन पाया तो नहीं बन पाया। अब इसके लिए हम खुद को गुनाहगार ठहराएं या शासन सत्ता को? राष्ट्रीय स्मारक तो छोड़िए जन्मस्थान पर एक ऐसा स्थान तक नहीं बन पाया जहां बैठकर आज  हिंदी भाषा और अपने पुरोधाओं से प्रेम करने वाली पीढ़ी प्रेम से बैठ ही सके। बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी, इसलिए जरूरी है दूसरी तरफ चला जाए। अभियान से जुड़ी कुछ ऐसी तारीखें हैं, जो तवारीख बन गई।
   भला हो, कांग्रेस के सांसद रहे कैप्टन सतीश शर्मा का, जिन्होंने अभियान से प्रभावित होकर अपनी सांसद निधि से पुस्तकालय-वाचनालय का भवन जन्म स्थान के सामने आचार्य जी के सहन की भूमि पर ही निर्मित कराया। भला हिंदी के उन पुरोधा डॉ नामवर सिंह का भी हो जिन्होंने उस पुस्तकालय-वाचनालय भवन का लोकार्पण किया। यह अलग बात है कि तमाम मुश्किलों की वजह से पुस्तकालय वाचनालय संचालित नहीं हो पाया।
     साल वर्ष 2004 में एक नई शुरुआत आचार्य स्मृति दिवस के बहाने हुई। देश के शीर्षस्थ कवियों में शुमार रहे बालकवि बैरागी के एकल काव्य पाठ से शुरू हुई यह परंपरा आज भी जारी है। वर्ष-प्रतिवर्ष यह परंपरा नई होती गई। निखरती गई। आज ‘आचार्य स्मृति दिवस’ अभियान का मुख्य केंद्र है। इस दिवस के बहाने देश भर के न जाने कितने स्नावनामधन्य साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और खिलाड़ियों को सुनने-गुनने, देखने-समझने के अवसर हम सबको मिल चुके हैं।
   

अभियान का एक असल पड़ाव तो ‘आचार्य पथ’ स्मारिका-पत्रिका भी है। प्रधान संपादक साहित्यकार -गीतकार आनंद स्वरूप श्रीवास्तव के कुशल संपादन में निरंतर 11 वर्षों से प्रकाशित हो रही इस स्मारिका ने आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों को जीवंत बनाने में कम योगदान नहीं दिया है। देशभर के साहित्यकार आचार्य द्विवेदी पर केंद्रित लेख लिखते हैं। छपते हैं। प्रधान संपादक ने स्मारिका को ‘सरस्वती’ की तरह ही विविध ज्ञान की पत्रिका बनाने का उपक्रम भी लगातार किया है और कर रहे हैं।
    अभियान वर्ष 2015 कि वह तारीख भी नहीं भूल सकता जब ‘द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ’‌ का पुन: प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट-नई दिल्ली ने किया। इस काम में अभियान की भूमिका दुर्लभ ग्रंथों को उपलब्ध कराने भर की ही थी पर यह भूमिका भी कम नहीं थी। अभियान अपने अग्रज-बुजुर्ग रमाशंकर अग्निहोत्री को हमेशा याद करता है और रहेगा, जिन्होंने यह दुर्लभ ग्रंथ अभियान से जुड़ी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति को खुशी-खुशी सौंपा और नेशनल बुक ट्रस्ट के सहायक संपादक हिंदी पंकज चतुर्वेदी के योगदान को भी हम नहीं भूल सकते। ग्रंथ का पुनः प्रकाशन उन्हीं की बदौलत हुआ।
    हम नहीं भूल सकते राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट रायबरेली) के निदेशक डॉ. भारत साह के उस योगदान को जो एक ऐसी किताब के रूप में दर्ज है, जिसका ऐतिहासिक महत्त्व है। इस किताब का नाम है विज्ञान वार्ता। आचार्य द्विवेदी द्वारा सरस्वती के संपादन के दौरान लिखे गए तकनीक, विज्ञान और नई नई खोजों से संबंधित लेखों को मुंशी प्रेमचंद ने अपने संपादन में संग्रहित कर वर्ष1930 में विज्ञान वार्ता नाम से पुस्तक प्रकाशित की थी। इस दुर्लभ पुस्तक को भी समिति ने निफ्ट रायबरेली के निदेशक को उपलब्ध और उन्होंने पुनः प्रकाशित कराया।
    तारीख तो नहीं भूलने वाली है,10 जनवरी 2021भी। ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युग प्रेरक सम्मान’ से सम्मानित प्रवासी भारतीय और कैलिफोर्निया अमेरिका में हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देने वाली हिंदीसेवी श्रीमती मंजू मिश्रा ने आचार्य जी की स्मृतियों को सात समंदर पार जीवंत बनाने और इस बहाने प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़े रखने का बीड़ा अपनी प्रवासी साथी श्रीमती ममता कांडपाल त्रिपाठी, श्रीमती रचना श्रीवास्तव, श्रीमती शुभ्रा ओझा और श्रीमती कुसुम नैपसिक से प्राप्त नैतिक-भौतिक-साहित्यिक-सामाजिक सहयोग के बल पर इसी दिन उठाया था। आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की अमेरिकी इकाई की शुरुआत इसी दिन हुई। एक छोटे से शहर की छोटी सी शुरुआत के दुनिया के सबसे संपन्न देश अमेरिका तक पहुंचना हम जैसे अकंचिनों के लिए स्वप्न सरीखा है। समिति शुक्रगुजार है अमेरिका इकाई की सभी सदस्यों की।
     हमें याद है, 21 दिसंबर 1998 को रायबरेली शहर के राही ब्लाक परिसर में तत्कालीन खंड विकास अधिकारी श्री विनोद सिंह और (अब दिवंगत) की अगुवाई में स्थापित की गई आचार्य श्री की आवक्ष प्रतिमा के अनावरण समारोह में पधारे अनेक साहित्यकार अपने संबोधन में महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम गिना रहे थे लेकिन अनवरत 25 वर्षों के प्रयासों से अब लोगों के दिल-दिमाग में महावीर प्रसाद द्विवेदी पुनर्जीवित हो चुके हैं।
     एक साहित्यकार-संपादक की स्मृतियों को भूलने बिसराने वाले समाज के मन में पुनः स्थापित करने का काम बिना समाज के सहयोग के संभव कहां था? इस मामले में आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति समाज के सभी वर्गों-धर्मो-जातियों के लोगों की हमेशा ऋणी थी, है और रहेगी। आचार्य द्विवेदी स्मृति संरक्षण अभियान समाज के सहयोग से आज अपने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आचार्य द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति अभियान को सहयोग देने वाले ऐसे सभी गणमान्य, सामान्य और कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने वाले श्रोताओं-दर्शकों के प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करती है और आशा भी करती है कि अभियान की स्वर्ण जयंती पूर्ण कराने में भी आपका पूर्ण सहयोग-स्नेह-संरक्षण बना रहेगा।

गौरव अवस्थी
रायबरेली

मातृ दिवस पर साहित्यानुरागिनी एवं समाज सेविका मिथलेश गौड़ को किया सम्मानित

बरेली। कवि गोष्ठी आयोजन समिति के तत्वावधान में स्थानीय साहूकारा में मातृ दिवस पर कवि गोष्ठी एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्री नत्थू लाल सदाचारी के संयोजन में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विनय सागर जायसवाल ने की। मुख्य अतिथि डॉ शिव शंकर यजुर्वेदी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ रामशंकर ‘प्रेमी’ रहे।


कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर हुआ। वंदना बृजेंद्र तिवारी “अकिंचन” ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मातृ दिवस पर साहित्यानुरागिनी श्रीमती मिथलेश गौड़ को समाज सेवा एवं परिवार में सामंजस्य के साथ उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्था के सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट द्वारा सम्मानित किया गया।


काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से माताओं की महिमा का गुणगान किया और जगत में उन्हें सबसे महान बताते हुए माताओं की सेवा का संकल्प लिया।


कार्यक्रम में संस्थाध्यक्ष रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’, सचिव उपमेंद्र सक्सेना एड., संयोजक नत्थू लाल सदाचारी, एस. ए. हुदा सोंटा, सत्यवती सिंह ‘सत्या’, ठा.राम प्रकाश ‘ओज’, अमित मनोज, पीयूष गोयल ‘बेदिल’, मिलन कुमार ‘मिलन’, जगदीश निमिष, उमेश त्रिगुणायत, रीतेश साहनी, रजत कुमार एवं व्यास नंदन शर्मा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राज शुक्ल ‘गजल राज’ने किया।

फर्जी कोटेदार ने जमाया तालाब पर कब्जा!

बिजनौर। एक तरफ सरकार पूरे उत्तर प्रदेश में तालाबों को अवैध कब्जा से मुक्त कराने में जुटी हुई है। प्रशासनिक अमला दिन रात एक किये हुए है।

वहीं एक सरकारी कर्मचारी की कृपा के चकते कक्षा पांच की फर्जी अंक तालिका के जरिए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान चलाने वाले कोटेदार ने तालाब पर कब्जा जमा लिया है।

दरअसल मामला धामपुर तहसील अंतर्गत विकास खण्ड नहटौर, ग्राम मांडू, पोस्ट बसेड़ा खुर्द का है। ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार असलम पुत्र असगर ने पूर्व में तालाब खसरा संख्या 315 को समाप्त कर अपना व अपने परिजनों का भवन निर्माण किया हुआ है।

यही नहीं वर्तमान में फर्जी अंकतालिका के द्वारा राशन डीलर के पद पर काबिज है। इस मामले में पूर्व में कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की गई, लेकिन वह आम जनता के पैसों के द्वारा खुद को बचाता चला आ रहा है।

आरोप है कि उक्त फर्जी कोटेदार को पटवारी नितिन तोमर का वरदहस्त प्राप्त है। कई बार उनके मोबाइल नंबर 8171358109 पर कॉल के बावजूद महोदय ने फ़ोन रिसीव नहीं किया।

थक हार कर अब ग्रामीणों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है।

घायल को अस्पताल पहुंचाओ, 5000 रुपए ले जाओ

पुलिस के डर से लोग नहीं करते पीड़ितों की सहायता। इसी कारण केंद्र सरकार ने की है इसके लिए एक अनूठी पहल। राष्ट्रीय स्तर पर 10 सबसे नेक मददगारों को दिया जाएगा एक-एक लाख रुपए का पुरस्कार

नई दिल्ली (PTI)। पुलिस के चक्कर में कौन पड़ेगा? कहीं हम ही न फंस जाएं! अस्पताल और पुलिसवाले हमें ही परेशान करेंगे! ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जो सड़क पर एक्सीडेंट के बाद घायल अवस्था में पड़े दर्द से कराह रहे व्यक्ति की मदद करने से हम सभी को रोकते हैं. पुलिस और सरकारें बार-बार कहती हैं कि एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति की मदद करना मानवता की सेवा है और ऐसा करने पर आपको पुलिस परेशान नहीं करेगी. इसके बावजूद आम लोग डर के मारे घायल को अस्पताल पहुंचाने में कतराते हैं. अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसके लिए एक अनूठी पहल की है.

सड़क मंत्रालय ने बताया कि उसने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को गंभीर चोट लगने के एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों के लिए एक खास योजना शुरू की है. मंत्रालय ने बताया कि सड़क हादसे में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 5000 रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों और परिवहन सचिवों को लिखे पत्र में कहा कि यह योजना 15 अक्टूबर 2021 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी होगी. मंत्रालय ने नेक मददगार को पुरस्कार देने की योजना’ के लिए दिशानिर्देश जारी किए.

मंत्रालय ने कहा कि इस योजना का मकसद आपात स्थिति में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने के लिए आम जनता को प्रेरित करना है. नकद पुरस्कार के साथ एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि इस पुरस्कार के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर 10 सबसे नेक मददगारों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा.

क्या होता है गोल्डन आवर?
स्वर्ण घंटे (गोल्डन आवर) पर बताया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के धारा 2 (12ए) के अनुसार स्वर्ण घंटे का मतलब वह एक घंटे का समय है, जो व्यक्ति को दर्दनाक चोट लगने के बाद का एक घंटा होता है. इस एक घंटे के दौरान घायल या घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाया जाता है ताकि उसकी जान बच सके या बचने की संभावना होती है.

वहीं बिजनौर के पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने गुड सेमरिटन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत घायलों को निकटतम अस्पताल में पहुंचाने पर किसी भी नागरिक को 5000 रुपए का पुरस्कार दिया जाता है। सभी थाना क्षेत्रों में योजना का प्रचार-प्रसार किया गया है। बताया कि अभी तक कोई भी इसके लिये आगे नहीं आया है।

अधिकारी प्राथमिकता से करें आम नागरिक की समस्या का निस्तारण-संदीप सिंह


विकास एवं जन कल्याणकारी योजनाओं में अनियमितता एवं लाभार्थी को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित किए जाने का मामला प्रकाश में आने पर संबंधित विभागीय अधिकारी के विरूद्व जीरो टॉलरेन्स के आधार पर कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाए तथा सभी अधिकारी अपने पास आने वाले आम नागरिक की समस्या का पूर्ण मानक और गुणवत्ता के आधार पर निस्तारण करना सुनिश्चित करें- राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा विभाग उ0प्र0 सरकार संदीप सिंह

बिजनौर। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा विभाग उ0प्र0 सरकार संदीप सिंह ने स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों की गुणवत्ता के प्रति अति संवेदनशील और गंभीर है और प्रयासरत है कि विकास एवं जन कल्याणकारी योजनाओं का भरपूर लाभ प्रदेश के सभी नागरिकों को प्राप्त हो तथा शासकीय योजनाओं को पूर्ण मानक एवं गुणवत्ता के साथ क्रियान्वित किया जाए और उनका लाभ पंक्ति के अन्त में खड़े व्यक्ति को भी निश्चित रूप से पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि विकास एवं जन कल्याणकारी योजनाओं में अनियमितता एवं लाभार्थी को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित किए जाने का मामला प्रकाश में आने पर संबंधित विभागीय अधिकारी के विरूद्व कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी अधिकारी अपने पास आने वाले आम नागरिक की समस्या का पूर्ण मानक और गुणवत्ता के आधार पर निस्तारण करना सुनिश्चित करें और यदि कार्य किया जाना सम्भव न हो तो संबंधित व्यक्ति को उसका कारण बताया जाए ताकि वह संतुष्ट हो सके।
राज्य मंत्री शाम 04ः00 बजे विकास भवन के सभागार में अपराध/कानून व्यवस्था एवं विकास कार्याें की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
उन्होंने सभी अधिकारियों को शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति अद्यतन रखने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी योजनाओं के गुणवत्तापरक क्रियान्वयन और उनका लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाए जाने के कार्य की उच्च स्तर पर भी समीक्षा की जाएगी। अतः सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा एवं निष्पक्षता के साथ करना सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि शासन की मंशा इसके अलावा और कुछ नहीं है कि शासकीय योजनाओं को पूर्ण मानक एवं गुणवत्ता के साथ क्रियान्वित किया जाए और उनका लाभ पंक्ति के अन्त में खड़े व्यक्ति को भी निश्चित रूप से पहुंचे।

डीएम ने उपलब्ध कराई प्रगति आख्या-
इस अवसर पर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने जिले में शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार में जानकारी उपलब्ध कराई और बताया कि लगभग सभी योजनाओं में जिले को सम्मानजनक स्थान प्राप्त है तथा एनआरएलएम में जिला कई वर्षाें से प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है। उन्होंने बताया कि महिला सशक्तिकरण एवं उन्हें स्वालम्बी बनाने के लिए जिले में विशिष्ठ कार्य किए जा रहे हैं, जिनके सुपरिणाम महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के रूप में सामने आ रहे हैं। उन्होंने मंत्री से धामपुर में 100 बेड के तैयार अस्पताल के लिए चिकित्सक, मेडिकल एवं पेरा मेडिकल स्टाफ उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हुए उक्त अस्पताल के संचालन से स्थानीय और आसपास के लोगों को भारी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने नगर क्षेत्र चांदपुर, किरतपुर एवं हल्दौर में जर्जर भवनों के लिए शासन से धनराशि उपलब्ध कराने तथा नजीबाबाद-बालावाली-लक्सर मार्ग पर गंगा नदी के सेतु के पहुंच मार्ग निर