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नयी दिल्ली। आजकल अखबारों में हर तरफ विज्ञापनों की भरमार रहती है और यह विज्ञापन अखबार मालिकों के लिए राजस्व का एक बड़ा जरिया होते हैं। अब सवाल यह पैदा होता है कि पहला विज्ञापन कब और कहां प्रकाशित हुआ होगा? हम बताते हैं…

विभिन्न समाचार माध्यमों के राजस्व का जरिया विज्ञापन होते हैं। अखबार, टीवी के अलावा सोशल मीडिया आदि के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले विज्ञापन ही इनकी निरंतरता का आधार हैं। विज्ञापनों से होने वाली आय से ही पूरे संस्थान के खर्चे सम्पन्न होते हैं। इनमें कर्मचारियों का वेतन, मशीनरी, कम्प्यूटर, बिजली, परिवहन आदि सभी कुछ  शामिल हैं। कुल मिलाकर विज्ञापन को मीडिया संस्थानों की रीढ़ कहा जा सकता है।

भारत में वह 25 मार्च 1788 का दिन था जब कलकत्ता गजट में भारतीय भाषा में पहला विज्ञापन प्रकाशित हुआ। यह बांग्ला भाषा में प्रकाशित हुआ था। तभी से अखबारों में विज्ञापन देने की परंपरा का सूत्रपात हुआ। पहले तो किसी सामान, कंपनी आदि के विज्ञापन ही प्रकाशित हुआ करते थे। धीरे-धीरे बधाई, शोक संदेश, राजनीतिक दलों का प्रचार, सरकारी योजनाओं के टेंडर आदि सब कुछ विज्ञापनों पर निर्भर होते चले गए। अब हालात यह है कि विज्ञापन के बिना किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म की परिकल्पना करना भी बेमानी है।

अतः आप भी ध्यान रखें कि जब कोई मीडिया कर्मी आपसे विज्ञापन के लिये कहे तो उसके पीछे का मंतव्य समझना होगा। …क्योंकि बहुत से ऐसे पत्रकार भी हैं जो किसी मीडिया संस्थान की नौकरी न कर के स्वतंत्र पत्रकारिता करते हैं और आपके सहयोग से ही उसके परिवार का खर्च चलता है। वैसे भी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है पत्रकार।

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