
प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाएं
आजादी का अमृत महोत्सव
आसन प्राणायाम करने के लिए भी आवश्यक है प्रतिरोधक क्षमता

शरीर जीर्ण शीर्ण होने पर शरीर की जीवनी शक्ति कमजोर हो जाती है। इसी के कारण रोगी की क्षमता आसन प्राणायाम करने की नहीं रह जाती। मन शरीर आत्मा निस्तेज जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़ा रहता है। हाथ पैर हिलाने उठाने की भी ताकत नहीं रहती। आत्मा शरीर से निकलना चाहती है। ऐसी अवस्था में रोगी की प्रतिरोधक क्षमता का विकास कैसे किया सकता है? बस इसी अवस्था में सुधार लाना है। अच्छे स्वस्थ व्यक्तियों को कोई भी आसन योग करा सकता है, परंतु जीर्ण अवस्था में कोई भी आसन काम नहीं आता। इस अवस्था के लिए योगी के अंदर दैहिक दैविक आध्यात्मिक शक्तियों का होना अति आवश्यक है। इन शक्तियों के द्वारा ही योगी के तन मन और आत्मा पर प्रहार हो सकता है तथा सात्विक आहार संतुलित आहार का होना अति आवश्यक है। तभी पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश की पूर्ति हो सकती है तथा जीवनी शक्ति का विकास हो सकता है तो आइए जीवनी शक्ति के विकास के लिए प्राकृतिक भोजन, सात्विक भोजन परम तत्व के ध्यान द्वारा शरीर को सबल बनाएं।
डॉक्टर नरेंद्र सिंह
आहार आयुर्वेदाचार्य प्राकृतिक चिकित्सक योगाचार्य योगी अनंत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवा संस्थान बिजनौर
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