उरई/जालौन। वैसे तो मोदी योगी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करती हैं लेकिन उन्हीं के मातहत सरकारी नुमाईंदे कागजों में काम कर करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े करने में मशगूल हैं। मनरेगा में तो इतना बड़ा घोटाला है कि सीबीआई और ईडी की ही जरूरत पड़ेगी, लेकिन इन शिकायतों पर किसी को कोई दिलचस्पी नहीं है।

माधौगढ़ विकास खंड में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपए के काम कागजों में दिखा कर निकाल लिये गए तो कहीं फ़र्ज़ी जॉबकार्ड भरकर वारे-न्यारे किये जा रहे हैं। आम जनता की शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है, या शिकायतकर्ता को इतना परेशान कर दिया जाता है कि वह थक हार कर शांत बैठ जाता है। मिर्जापुर गांव में ग्राम प्रधान मुनीम कुशवाहा द्वारा मनरेगा के आधे से ज़्यादा काम ट्रैक्टरों से करा कर 14 दिनों की मजदूरी होमगार्ड गंभीर जॉबकार्ड संख्या-2 और पीआरडी जवान दिनेश जॉब कार्ड संख्या-3 के जॉबकार्ड में दिखाकर भर दी। जब इसकी शिकायत पंचायत के वार्ड सदस्य अंकित सिंह ने की तो उसके ख़िलाफ़ फर्जी शिकायतें दर्ज कराई जाने लगी। ऐसे ही ग्राम असहना में सुदामा के खेत से मचकचा तक चकबन्ध निर्माण के नाम पर 9 लाख का भुगतान निकाल लिया गया। इस चकबन्ध में एक फावड़ा तक मजदूर ने नहीं डाला और भुगतान भी गांव से 16 किमी दूर अकबरपुरा के मजदूरों के नाम हो गया। पूरे फर्जीबाड़े में न वर्क इंचार्ज को अपनी नौकरी की चिंता न भुगतान प्रक्रिया में शामिल एपीओ, जेई या प्रमुख जिम्मेदार खंड विकास अधिकारी को। ऐसे में योगी सरकार इनके घर कब जमींदोज करेगी? इस बात का इंतजार आम जनता कर रही है। (साभार-जालौन टाइम्स)
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