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बच्चे की प्रथम गुरु होती है मां। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर मनाया गया शिक्षक दिवस।

बिजनौर। स्योहारा क्षेत्र में सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाया गया। विद्यालयों में अध्यापकों द्वारा छात्र-छात्राओं को शिक्षक दिवस का महत्व समझाया गया। सीटीएस स्कूल के प्रबंधक सोमपाल सिंह ने कहा कि मां से बड़ा कोई गुरु नहीं। बच्चा अपने जन्म के बाद जब बोलना सीखता है, तो सबसे पहले जो शब्द वह बोलता है वह होता है ‘माँ’। स्त्री माँ के रूप में बच्चे की प्रथम गुरु है। बच्चे के मुख से निकला हुआ यह एक शब्द मात्र शब्द नहीं, उस माता द्वारा नौ महीने बच्चे को अपनी कोख में पालने व उसके बाद होने वाली प्रसव पीड़ा का पर्याय है। बच्चे अगर शब्द हैं, तो मां भाषा, मां; बच्चों को बोलना, चलना और खाना सिखाती है, मां सबसे बड़ी गुरू है। मां से बढकर कोई नहीं, माता को जो अनुभव होता है, वही बालक के जीवन पर प्रभाव डालता है। माता से ही वह संस्कार ग्रहण करता है। माता के उच्चारण व उसकी भाषा से ही वह भाषा-ज्ञान प्राप्त करता है। यही भाषा-ज्ञान उसके संपूर्ण जीवन का आधार होता है। इसी नींव पर बालक की शिक्षा-दीक्षा तथा संपूर्ण जीवन की योग्यता व ज्ञान का महल खड़ा होता है। शिक्षक दिवस के दिन विराट तोमर ने अपनी माता को प्रथम गुरु मानते हुए उनका आशीर्वाद लिया।

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