
छठव्रतियों ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य
आज उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का पूरा होगा संकल्प
बिजनौर। लोक आस्था के महापर्व छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन रविवार शाम छठव्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। आज उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प पूरा होगा।
बिजनौर कुटिया कॉलोनी में छत पर 36 घंटे का निर्जल व्रत रखकर महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर शशि प्रभा, किरण श्रीवास्तव, पूनम मिश्रा, ज्ञानती देवी, सोना देवी, मीरा, नीता, प्रतिमा देवी, दिनेश श्रीवास्तव आदि छठव्रती उपस्थित रहे।

विदित हो कि 28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ छठ पर्व का आरंभ हुआ था। दूसरे दिन यानि 29 अक्टूबर को खरना था। अब कल छठ महापर्व के चौथे और आखिरी दिन 31 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का संकल्प पूरा होगा।

मुख्य रूप से यह महापर्व बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका विस्तार पूरे देश में हो रहा है। यही नहीं दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय भी छठ पर्व मनाते हैं। इसे कई अन्य नामों जैसे डाला छठ, सूर्य षष्ठी के नाम से जाना जाता है। छठ का त्योहार भगवान भास्कर और छठी माता की पूजा और उपासना का त्योहार है। इसमें महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और अरोग्यता, परिवार की समृद्धि के लिए छठी माता से आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। कई पुरुष भी छठ का व्रत रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि शाम के समय सूर्य देवता अपनी अर्धांगिनी देवी प्रत्युषा के साथ समय बिताते हैं। यही कारण है कि छठ पूजा में शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है।
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