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मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, दिल्ली ये सब हिमालय के समांतर रेखा पर हैं। यहां पर कुछ लोगों ने हल्के झटके महसूस किए। यानी चार से लगभग पांच मैग्नीट्यूड, यदि अधिक बड़े होते तो बहुत लोग महसूस करते।

लखनऊ। उत्तर भारत में भूकंप के काफी तेज झटके महसूस किए गए हैं। उत्तरी भाग के अधिकांश इलाकों में भूकंप का असर देखा गया। रात करीब 1.57 बजे भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत से भर दिया। रात में सो रहे लोग अचानक बेड हिलने के कारण जागे। इसके बाद लोग उठकर घर के बाहर भागे।

भूकंप का केंद्र नेपाल और मणिपुर में बताया जा रहा है। जमीन से 10 किलोमीटर नीचे भूकंप का केंद्र होने के कारण करीब 6.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप लोगों को तेज झटका दे गया। भूकंप के झटकों के कारण नेपाल में सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है। वहीं, नेपाल के साथ-साथ भारत और चीन में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। लखनऊ और दिल्ली में करीब 5.7 मैग्नीट्यूड के झटके लगे। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और नॉर्थ-ईस्ट में भूकंप के झटके महसूस किए गए।

नेपाल में भूकंप का केंद्र रहने के बाद भी लोगों को दिल्ली तक काफी तेज झटके महसूस हुए। लखनऊ में लोगों के बेड हिलने लगे तो भूकंप जैसी स्थिति का अहसास हुआ। इसके बाद दहशत जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। तेज झटकों के कारण पंखे तक हिल रहे थे। कुछ इसी प्रकार की स्थिति दिल्ली में भी देखने को मिली। लखनऊ के विनय खंड-2 में तीन मंजिला मकान के सबसे ऊपरी फ्लोर पर रहने वाले दिव्यांशु कुमार सिंह ने कहा कि रात को सो रहे थे। अचानक बेड हिलने के कारण नींद खुली। पहले तो कुछ समझ नहीं आया। लेकिन, जब पंखा और टीवी को हिलते देखा तो नीचे भागा। परिवार के सभी सदस्य नीचे आ गए। लोगों को आफ्टर शॉक का भी डर सता रहा था। दिल्ली और नोएडा में भी लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे का फोन कर स्थिति की जानकारी लेनी शुरू की।

हिमालय के समांतर रेखा पर स्थित मेरठ, मुरादाबाद, लखनऊ, दिल्ली में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। चार से लगभग पांच मैग्नीट्यूड के झटकों से दहशत फैल गई। यदि ये झटके और अधिक बड़े होते तो भारी तबाही भी हो सकती थी। जानकारों का कहना है कि बड़े भूकंप से पहले भी फोर शॉक आते हैं पर यह भी ऐसा है, नहीं कहा जा सकता। वैसे प्लेट गति के कारण तनाव तो निरंतर जमा हो रहा है, और वह बहुत से छोटे- छोटे भूकंपों रिलीज़ नहीं होने वाला। यानी एक बड़ा भूकंप गंगा के मैदान में आशंकित है, लेकिन कब, यह कोई नहीं बता सकता।

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