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दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए सबसे पहले नवार्ण मंत्र, कवच, इसके बाद कीलक और अर्गला स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके बाद दुर्गा सप्तशती के पाठ का आरंभ करना चाहिए। अगर आप इस तरह का पाठ करेंगे तो आपकी मनोकामनाएं जल्द पूरी होंगी। साथ ही मां दुर्गा प्रसन्न होकर अपनी विशेष कृपा आप पर बरसाएंगी।

कुछ भक्त 7 दिनों में देवी महात्म्य का पाठ भी करते हैं। वे पहले दिन पहला अध्याय, दूसरे दिन 2-3 अध्याय, तीसरे दिन चौथा अध्याय, चौथे दिन 5-8 अध्याय, 5वें दिन 9-10 अध्याय, 6वें दिन 11वां अध्याय और 7वें दिन 12-13 अध्याय जप करते हैं। दिन । प्रत्येक अध्याय को एक ही बैठक में पढ़ना चाहिए।

प्रथम दिन एक पाठ प्रथम अध्याय, दूसरे दिन दो पाठ द्वितीय, तृतीय अध्याय, तीसरे दिन एक पाठ चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन चार पाठ पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय, पांचवें दिन दो अध्यायों का पाठ नवम, दशम अध्याय, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय, सातवें दिन दो पाठ द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय करके एक आवृति सप्तशती की होती है।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तु ते ॥ सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तु ते ॥ ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि।

नौ दिनों तक घर में मां दुर्गा के नाम की ज्योत अवश्‍य जलाएं। अधिक से अधिक नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अवश्‍य करें। इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्‍य करें। पूजन में हमेशा लाल रंग के आसन का उपयोग करना उत्तम होता है।

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