
धार्मिक स्थल जिंदगी में सुकून देते हैं और आत्मविश्वास को बढ़ाते भी हैं। मुझे भले पूजा पाठ में ज्यादा रुचि न हो लेकिन ईश्वर के प्रति मेरी श्रद्धा हमेशा से रही है और आखिरी सांस तक रहेगी। पत्रकारिता में जब आप रिपोर्टिंग से जुड़े हों तब आपके पास दूसरे शहरों में जा कर धार्मिक स्थल देखने का मौका कम मिलता है, लेकिन जब भी मुझे मौका मिला मैंने इसे दिल की गहराइयों तक बसा लिया। हाल के दिनों में मैं अपने मित्र अमन अग्रवाल और वरिष्ठ जेल अधीक्षक राकेश कुमार के साथ अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित नींब करोली बाबा के मंदिर कैंची धाम दर्शन करने गया था। सुबह छह बजे हल्की बारिश में जब सफर शुरू किया तो मन बहुत प्रसन्न था। हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, उधम सिंह नगर, रुद्रपुर, भीमताल होते हुए भवाली पहुंच कर सुरम्य पहाड़ियों पर स्थित मंदिर पहुंचा था। मंदिर के नीचे कोसी नदी पत्थरों से टकरा कर अठखेलियां करती हुई निकलती है। मैंने जब शिवानी के उपन्यास कैंजा को पढ़ा था तब उसमें अल्मोड़ा का जिक्र था और कोसी नदी का खूबसूरत वर्णन था। मेरी आंखों के सामने उपन्यास के वो अंश आ गए थे।

जब मैंने मंदिर में प्रवेश किया तब लगा नींब करोली महाराज कितने सिद्ध पुरुष थे, जिनके पास आकर लोगों को मानसिक शांति मिलती होगी। मंदिर में प्रवेश के साथ सबसे पहले बाबा के दर्शन किए और बगल में समाधि को नमन किया। इसके बाद हनुमानजी, शिवजी और विंध्यवासिनी देवी के दर्शन किए। मंदिर में मौजूद भक्त सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। शांत और सुरम्य स्थल पर स्थित मंदिर को लेकर तमाम मान्यताएं हैं। लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं और मन की शांति के लिए विश्वास की डोर को मजबूत भी करते हैं। मंदिर में दर्शन के बाद मेरठ की ओर वापसी की। वही हरे भरे पहाड़, रास्ते में पड़ने वाली भीम ताल झील, जिसके बारे में कहा जाता है कि भीम के एक प्रहार से झील बन गई थी। रास्ते में सोच रहा था दुनिया की सारी सुख सुविधाओं को भोगने वाले क्रिकेटर विराट कोहली जैसे लोग जब शांति के लिए आ सकते हैं फिर आम लोग क्यों नहीं ?ईश्वर सब पर एक ही तरह की ममता और कृपा रखते हैं।
~GYAN PRAKASH
April 22, 2023

Leave a comment