फर्जी वेबसाइट से साल में कमाए रुपए 80 लाख
फर्जी ट्रेजरी अधिकारी बन कर करते थे ठगी, तीन आरोपियों को साइबर पुलिस ने लखनऊ से किया गिरफ्तार, तीन पर इनाम घोषित
लखनऊ/वाराणसी। फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाकर खुद को ट्रेजरी अधिकारी बताकर पुलिस पेंशनर्स से ठगी करने वाले तीन अंतर्राज्यीय गैंग के तीन सदस्यों को साइबर थाना वाराणसी की पुलिस ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है। इस प्रकरण में 9 अभियुक्तों की गिरफ्तारी पूर्व में ही की जा चुकी है। एसपी साइबर क्राइम उत्तर प्रदेश द्वारा गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को ₹ 10 हजार का इनाम दिया गया है। पकड़े गए तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उम्मीद है कि ठगी करने वालों का एक बड़ा गैंग जल्द पुलिस की गिरफ्त में होगा।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्र ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अफजल आलम निवासी सोनबरसा थाना हरसिद्धि पूर्वी चंपारण, सुशील कुमार निवासी भवानीपुर शिवरतनगंज अमेठी और मोहम्मद इरशाद निवासी जगदीशपुर गया बिहार के रूप में हुई है। इनके पास से कुटरचित पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी अफजल आलम ने पुलिस को बताया कि उसके द्वारा नौ फर्जी वेबसाइट बनाकर प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में फर्जी पैन और आधार कार्ड बनाकर लोगों से ठगी की जा रही थी। एक वेबसाइट से प्रत्येक वर्ष 75-80 लाख रुपए की कमाई की जाती है।
तीन पर इनाम की घोषणा

प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम थाना वाराणसी ने बताया कि विवेचना के क्रम में फर्जी वेबसाइट बनाने और उसमें लगी API को उपलब्ध कराने में तीन लोगों का नाम प्रकाश में आया है, जो अभी भी फरार हैं। तीनों साइबर अपराधी हरिओम, आकाश तथा सुजीत के ऊपर एसपी साइबर क्राइम द्वारा 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। अभियुक्तों को गिरफ्तार करने वालों में हेड कांस्टेबल आलोक कुमार सिंह, कांस्टेबल प्रभात द्विवेदी, हेड कांस्टेबल रविकांत जायसवाल, कांस्टेबल चंद्रशेखर और चालक विजय कुमार शामिल रहे।
3 साल में बनाए 4 लाख फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड?
पिछले साल वाराणसी साइबर थाने पर शिकायत मिली कि ट्रेजरी अधिकारी बनकर पुलिस विभाग के रिटायर्ड अफसरों से ठगी की जा रही है। वाराणसी साइबर टीम ने जांच के बाद दो एफआईआर दर्ज की और 9 लोग गिरफ्तार किए। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद पता चला कि फर्जी नाम पता से पैन कार्ड और आधार कार्ड बनाकर साइबर अपराधियों के द्वारा ठगी के लिए खोले जा रहे बैंक खातों का पूरा एक रैकेट चल रहा है। यह गैंग फर्जी वेबसाइट के जरिए फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बना रहा था। इनसे बरामद रजिस्टर में पैसों का लेनदेन देख आशंका है कि यह गैंग 03 साल में लगभग 04 लाख फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाकर साइबर अपराधियों को दे चुका है।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का मास्टरमाइंड अफजल आलम
गिरफ्तार तीनों आरोपियों में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का मास्टर अफजल आलम मास्टरमाइंड है, जो कई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट वाली कंपनियों में काम कर चुका है. पूछताछ की गई तो पता चला अफजल आलम ने डोमेन नेम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से कई डोमेन बुक करा रखे थे. अफजल आलम ने कई वेबसाइट बना रखी थी जिसमें http://www.digitalportal.in, http://www.digitalfastprint.co.in, http://www.digitalfastprint.online, http://www.digitalfastprint.in और http://www.reprintportal.xyz के नाम से वेबसाइटें बना रखी थी.
अफजल आलम ने कई डाटा सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से कस्टमर के डाटा खरीद रखे थे। जब भी कोई व्यक्ति आधार कार्ड या पैन कार्ड बनवाने के लिए इसकी वेबसाइट पर लॉगिन करता तो किसी भी दूसरे व्यक्ति का आधार कार्ड नंबर इनके सामने होता, जिसमें व्यक्ति अपना नाम फोटो और फर्जी पता डाल देता. जिसके बाद उसे यूआईडीआई की तरह की फर्जी आधार कार्ड की कॉपी निकल आती.
फर्जी दस्तावेंजों से खोलते थे खाते
एसपी साइबर थाना त्रिवेणी सिंह के अनुसार अमूमन ऐसे फर्जी नाम पता वाले आधार कार्ड से साइबर अपराधी बैंक खाता खोलते थे। जब उनके द्वारा ठगी की रकम इस फर्जी नाम पता वाले बैंक खाते में जमा होती और पुलिस किसी केस की जांच करते बैंक खाते तक पहुंचती तो पता चलता खाताधारक का नाम फोटो पता सब फर्जी था। इस तरह फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने के इस गोरखधंधे का इस्तेमाल साइबर अपराधियों की ठगी की रकम के लिए बैंक खाता खोलने में किया जा रहा था। यह गैंग इस फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का प्रिंट लेने के लिए फीस भी बहुत मामूली लेता और वह भी ऑनलाइन। हर आधार कार्ड के लिए गेटवे के जरिए ₹20 का पेमेंट और पैन कार्ड ₹19 का पेमेंट लेकर प्रिंट कर देता था।
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