वार्ता कर एसोसिएशन को विश्वास में लेना जरूरी: रामबाबू रस्तोगी
“हिट एण्ड रन” के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल
लखनऊ। केन्द्र सरकार के द्वारा बिना बस और ट्रक ड्राइवर एसोसिएशन से वार्ता किए एवं विश्वास में लिए बगैर यदि “हिट एण्ड रन” नए कानून को लागू किया जाता है तो बस और ट्रक हड़ताल को समर्थन देते हुए सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल उ.प्र.सड़क पर उतर कर अनिश्चित कालीन आंदोलन करेगी। यह बात सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रामबाबू रस्तोगी ने कही।
सड़क सुरक्षा को लेकर नए कानून “हिट एण्ड रन” के प्रावधान लागू होने के पहले ही, दिन सरकार के काले कानून के विरोध में सोमवार को वाहन चालक अचानक हड़ताल पर चले गए। हड़ताल का असर उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ लगभग 12 राज्य जैसे उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी रहा। केंद्र सरकार द्वारा सड़क हादसों पर नियंत्रण करने के लिए हिट एंड रन कानून में बदलाव किया जा रहा है। ड्राइवर इस कानून का विरोध कर रहे हैं। दरअसल, भारतीय न्याय संहिता 2023 में हुए संशोधन के बाद हिट एंड रन के मामलों में दोषी ड्राइवर को 10 साल तक कैद और 7 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल के प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू रस्तोगी ने कहा कि केन्द्र सरकार को जल्द से जल्द देश के समस्त ट्रांसपोर्टरों के संगठनों से वार्ता कर सुझाव के आधार पर ही नए कानून को लागू करने की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए। श्री रस्तोगी ने कहा कि देश में व कई प्रदेशों में बस और ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल से जन-सामान्य के वस्तुओं की उपलब्धता पर असामान्य स्थित हो सकती है, जिसके परिणाम स्वरूप दैनिक उपयोग की चीजों जैसे सब्जी, अनाज, दवाई इत्यादि की अनुपलब्धता होने से काला-बाजारी और महंगाई बढ़ सकती है, इसलिए सरकार को इस सम्पूर्ण प्रकरण पर तत्काल उचित एवं संतोषजनक कदम ही उठाना चाहिए।
…तो सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल छेड़ेगा हल्ला बोल आन्दोलन
रामबाबू रस्तोगी ने यह भी कहा कि यदि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार ने समय से बस एवं ट्रक ड्राइवरों की जरूरी मांग पर सकारात्मक विचार नहीं किया तो आगामी भविष्य में होने वाले जन-सामान्य की परेशानी को देखते हुए सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल के प्रांतीय अध्यक्ष रामबाबू रस्तोगी अपने सभी प्रदेश संगठन के माध्यम से सभी जिलों के कार्यकर्ताओं के साथ इस आंदोलन को समर्थन देते हुए जन-सामान्य को भविष्य में इस हड़ताल से होने वाली परेशानी के दृष्टिगत सड़क पर उतर कर हल्ला बोल आन्दोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी सारी जिम्मेदारी केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की होगी।
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