शनि कमजोर होने पर व्यक्ति को करना पड़ता है इन भयानक स्थितियों का सामना
जानें कैसे कम सकते हैं प्रभाव
शनि देव अगर किसी व्यक्ति से प्रसन्न रहते हैं तो उस पर धन, सफलता और संपन्नता की बारिश कर देते हैं। वहीं अगर किसी व्यक्ति का शनि कमजोर हो तो उसे जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
Written By : Chirag Bejan Daruwalla, Edited by : Shalie

ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:॥
यदि कुंडली में शनि कमजोर हो तो शनि दोष उत्पन्न होता है जिसके कारण व्यक्ति के जीवन में कई परेशानियां आने लगती हैं। शनि दोष होने पर कई लक्षण दिखाई देने लगते हैं, उन संकेतों को जानकर आप शनि दोष से छुटकारा पा सकते हैं।
शनि दोष के लक्षण
यदि कुंडली में शनि दोष हो तो व्यक्ति का धन और संपत्ति धीरे-धीरे अनावश्यक कार्यों में खर्च होने लगती है।
शनि दोष के कारण वाद-विवाद की स्थिति बनती है और व्यक्ति पर झूठे आरोप लगते हैं। इसके अलावा कोर्ट केस भी बनते हैं।
शराब, जुआ और अन्य बुरी आदतें भी शनि दोष का कारण बनती हैं।
बनते काम में रुकावट आना, कर्ज का बोझ होना, घर में आग लग जाना, घर का बिक जाना या उसका कोई हिस्सा टूट जाना आदि भी शनि दोष के लक्षण माने जाते हैं।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष हो तो उसके बाल समय से पहले झड़ने लगते हैं, आंखें खराब होने लगती हैं और कानों में दर्द रहता है।
खराब शनि के कारण शारीरिक कमजोरी, पेट दर्द, टीबी, कैंसर, त्वचा रोग, फ्रैक्चर, लकवा, सर्दी, अस्थमा आदि रोग होते हैं।
अगर किसी का शनि खराब है तो उसे अपनी मेहनत का फल नहीं मिलता है। नौकरी में परेशानियां और घर में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते रहते हैं।
कैसे ठीक करें शनि दोष ?
शनि साढ़ेसाती, ढैय्या जैसे शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए शनिवार के दिन काले तिल, काला कपड़ा, काली उड़द दाल, सरसों का तेल, जूता-चप्पल, गुड़ और काले रंग के वस्तुओं का दान करें। किसी गरीब जरूरतमंद को इन चीजों का दान करने से शनि दोष ठीक होता है।
शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा शनिवार के दिन शनि देव के साथ बजरंगबली की पूजा भी जरूर करें।
शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले पीपल के पेड़ की पूजा करें। पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने के बाद तेल का दीया जलाएं। ऐसा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे सभी दोष से मुक्ति मिलती है।
साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने लिए शनिवार के दिन शनि देव के मंत्रों का जरूर करें। साथ ही शनि चालीसा का पाठ करने से भी ढैय्या, साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
पुराणों में शनि ग्रह के प्रति अनेक आख्यान प्राप्त होते हैं।शनिदेव को सूर्यदेव का सबसे बड़ा पुत्र एवं कर्मफल दाता माना जाता है। इसी के साथ ही पितृ शत्रु भी, शनि ग्रह के सम्बन्ध में अनेक भ्रान्तियाँ हैं और इसीलिए उसे मारक, अशुभ और दु:ख कारक माना जाता है। पाश्चात्य ज्योतिषी भी उसे दु:ख देने वाला मानते हैं। लेकिन शनि उतना अशुभ और मारक नही है, जितना उसे माना जाता है। इसलिए वह शत्रु नहीं मित्र है। मोक्ष को देने वाला एक मात्र ग्रह शनि ही है। सत्य तो यही है कि शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करता है, और हर प्राणी के साथ उचित न्याय करता है। जो लोग अनुचित विषमता और अस्वाभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्ही को दण्डिंत (प्रताडित) करते हैं। अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
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