राम नाम का 1008 बार जप के साथ ही भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः’ का भी जप
निर्जला एकादशी और बड़ा मंगल के दुर्लभ संयोग में करें ये कार्य

निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और बड़ा मंगल के दिन भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के परम भक्त हनुमान जी की पूजा की जाती है। ऐसे में निर्जला एकादशी और बड़ा मंगल का एक ही दिन होना बेहद दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। साल 2024 में ये दुर्लभ संयोग 18 जून को बन रहा है। इस दिन निर्जला एकादशी व्रत भी है और बड़ा मंगल भी। ऐसे में इस दिन कुछ कार्य आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं।
भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही हनुमान चालीसा का पाठ
निर्जला एकादशी का व्रत रखने वालों को इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। ध्यान रखें कि भगवान विष्णु की पूजा समाप्त करने के बाद ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी विष्णु भगवान के अवतार राम जी के भक्त हैं, ऐसे में वो विष्णु जी के भी भक्त हुए और भगवान से पहले भक्त की पूजा करना धार्मिक रूप से शुभ नहीं माना जाता।
बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा का तो लाभ मिलता ही है, लेकिन बड़ा मंगल के साथ ही अगर एकादशी तिथि भी आ जाए तो इस दिन राम जी की पूजा भी करनी चाहिए। अगर आप इस दिन किसी हनुमान मंदिर में जाकर, लाल रंग के आसन पर बैठें और राम नाम का 1008 बार जप करें तो जीवन की सभी समस्याओं का अंत हो सकता है। राम नाम के जप के साथ ही भगवान विष्णु के मंत्र ‘ ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः’ का भी जप करना चाहिए।
एकादशी तिथि के दिन विष्णु जी की पूजा के साथ ही दान का भी बड़ा महत्व है। हनुमान जी भी उन लोगों से प्रसन्न होते हैं जो जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं। इसलिए अपने सामर्थ्य के अनुसार इस दिन दान अवश्य करना चाहिए। तांबे से बनी चीजें, दूध, चावल, जल आदि का दान करने से भगवान विष्णु और हनुमान जी आपको सुख-समृद्धि प्रदान करेंगे।

सुंदरकांड का पाठ
अगर आपके जीवन में शनि, मंगल या राहु-केतु जैसे ग्रहों के कारण परेशानियां चल रही हैं तो निर्जला एकादशी और बड़ा मंगल के दुर्लभ संयोग के दिन घर में रामचरितमानस का पाठ करना चाहिए। अगर पूरी रामचरितमानस पढ़ना संभव न हो तो सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं।
इन उपायों से भी होगा लाभ
~गुरुजनों को पुस्तक, पेन आदि वस्तुएं उपहार में दें।
~किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम में जाकर दान करें।
~राहगीरों को शरबत पिलाएं।
~किसी मंदिर में जाकर कम से कम 11 लोगों को भोजन करवाएं। (साभार)
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।)
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