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मन से निकला आशीर्वाद सबसे बड़ा धन: विजय सेठ

समाजसेवी विजय सेठ कर रहे वानर भंडारा, गौ भंडारा और पशुओं का उपचार

पितृपक्ष में सेवा भाव से जारी है गौ कृपा रसोई का भंडारा

~विनीत पांडेय

सीतापुर। किसी भूखे जरूरतमंद को भरपेट भोजन करा दिया और बदले में कुछ नहीं लिया। किसी की आत्मा को तृप्त करने से बड़ी समाजसेवा और क्या हो सकती है। वह भले ही पैसे न दे पा रहा हो, लेकिन उसके मन से निकला आशीर्वाद सबसे बड़ा धन है। यह सोचना है पशु सेवा समिति के अध्यक्ष व समाजसेवी विजय सेठ का।

वह जिला महिला चिकित्सालय के बाहर गौ कृपा रसोई संचालित करते हैं। वर्तमान में यहां चल रहे भंडारा में पहुंचने वाले प्रत्येक जरूरतमंद को भरपेट स्वादिष्ट भोजन कराया जा रहा है। केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं बल्कि पशुओं के लिए भी भंडारे का प्रबंध है। प्रेरित होकर लोग अपने पूर्वजों के नाम से उनकी रसोई में सामग्री दे जाते हैं और शेष वह स्वयं से जुटाते हैं।

• गो कृपा रसोई के माध्यम से विजय सेठ पितृपक्ष भर रहे नि:शुल्क भोजन

• प्रतिदिन चार से पांच सौ जरूरतमंद कर रहे भरपेट भोजन

दो वर्ष पूर्व शुरू की गो कृपा रसोई

विजय सेठ बताते हैं कि अगस्त 2022 में पहुंचने वाले प्रत्येक जरूरतमंद को भरपेट स्वादिष्ट भोजन कराया जा रहा है। केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं बल्कि पशुओं के लिए भी भंडारे का प्रबंध है। उनकी रसोई में प्रेरित होकर लोग अपने पूर्वजों के नाम से सामग्री दे जाते हैं और शेष वह स्वयं से जुटाते हैं। जिनके पास दस रुपए भी नहीं होते हैं, उनको भी नि:शुल्क भोजन करा दिया जाता है। रसोई में आने वाली राशि से जरूरत की वस्तुएं जुटाने के बाद वानर भंडारा, गौ भंडारा, पशुओं का उपचार आदि सामाजिक कार्य किए जाते हैं। पैसे की कमी को पूरा करने के लिए अपने स्वर्ण व्यापार से व्यवस्था करते हैं। समय-समय पर समाज के संभ्रांत लोग भी सहयोग कर देते हैं। विजय सेठ ने बताया कि पितृपक्ष भर अपनी रसोई में भंडारा चला रखा है। इस दौरान प्रतिदिन पांच सौ लोगों को नि:शुल्क भोजन कराया जा रहा है।

बेसहारा पशुओं के उपचार से प्रारंभ हुई सेवा

वर्ष 2011-12 से विजय सेठ ने बेसहारा पशुओं की सेवा कार्य प्रारंभ किया। वह इधर-उधर घूमते बेसहारा पशुओं का उपचार करते थे। एक फोन पर पहुंच जाते और घायल पशु का उपचार कर देते। धीरे-धीरे यह सिलसिला चलता रहा और पशु सेवा समिति का गठन कर लिया गया। तब से पशुओं की सेवा का यह क्रम चालू है। कोरोना काल में उन्होंने वानरों के लिए भंडारे की सेवा शुरू की थी।

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