जान लीजिए कुछ आवश्यक नियम
कब तोड़ना चाहिए बेलपत्र ?
बेलपत्र, जिसे बिल्व पत्र भी कहा जाता है, भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और उनकी पूजा में इसका विशेष महत्व है। यह एक त्रिपर्णी पत्ता होता है, जिसके तीन पत्तों को त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का प्रतीक माना जाता है। बेलपत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे तोड़ने और चढ़ाने के कुछ नियम हैं जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।

कुछ नियमों का पालन करके आप भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पूर्णिमा तिथि: पूर्णिमा के दिन बेलपत्र तोड़ना बहुत शुभ और उत्तम फलदायी माना जाता है।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक: बेलपत्र हमेशा सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले तोड़ लेना चाहिए। सूर्यास्त के बाद बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना जाता है।
अन्य दिनों में: अगर आप किसी विशेष तिथि पर बेलपत्र चढ़ाना चाहते हैं और उस दिन तोड़ना वर्जित है, तो आप एक दिन पहले बेलपत्र तोड़कर रख सकते हैं। बेलपत्र कभी बासी नहीं होते और इन्हें धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
तोड़ने से पहले और बाद में: बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम करना चाहिए।बेलपत्र कब नहीं तोड़ना चाहिए?

कुछ विशेष दिनों में बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है, क्योंकि ऐसा करने से दोष लगता है:
सोमवार: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। अगर आपको सोमवार को बेलपत्र चढ़ाना है, तो एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
चतुर्थी: इस तिथि पर बेलपत्र तोड़ना मना है।
अष्टमी: अष्टमी तिथि पर भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
नवमी: नवमी तिथि पर बेलपत्र तोड़ना वर्जित है।
चतुर्दशी: चतुर्दशी तिथि पर भी बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए।
अमावस्या: अमावस्या के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
संक्रांति: संक्रांति के समय भी बेलपत्र तोड़ना वर्जित है।
प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि या अन्य विशेष व्रत/त्योहार: जिन दिनों भगवान शिव से संबंधित विशेष व्रत या उत्सव होते हैं, उन दिनों बेलपत्र नहीं तोड़ा जाता है। पूजा के लिए एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़ लेना चाहिए।
बेलपत्र तोड़ने के अन्य महत्वपूर्ण नियम:
पूरी टहनी न तोड़ें: टहनी से चुन-चुनकर सिर्फ बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए। कभी भी पूरी टहनी नहीं तोड़नी चाहिए।
वृक्ष को नुकसान न पहुंचाएं: बेलपत्र इतनी सावधानी से तोड़ें कि वृक्ष को कोई नुकसान न पहुंचे।
सही बेलपत्र का चुनाव: कटे-फटे, छेद वाले, कीड़े लगे या पीले पड़े बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए। हमेशा हरे-भरे और स्वस्थ बेलपत्र ही चुनें।
त्रिदल बेलपत्र: भगवान शिव को हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र (त्रिदल बेलपत्र) ही चढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह शिवजी के त्रिनेत्र का प्रतीक माना जाता है।
दोबारा इस्तेमाल: यदि नया बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
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