जमीन मुआवजा घोटाले में 2 PCS अधिकारियों पर केस दर्ज
SDM आरडी राम व SDM अशोक कनौजिया पर दर्ज हुआ मुकदमा
किसानों को मनमाने तरीके से मुआवजे देने का आरोप
डीएम अमेठी ने जांच के बाद हजारों किसानों को भेजा नोटिस
लखनऊ (एजेंसियां)। अमेठी में अरबों रुपए का घोटाला सामने आया है। हाईवे चौड़ीकरण के नाम पर अरबों रुपए एसडीएम हजम कर गए। इस संबंध में कानूनगो सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर दो एसडीएम आरडी राम और अशोक कुमार कनौजिया समेत अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारी जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
आखिर क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2014 में केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद अमेठी में एनएच-56 के चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। निर्माण से पहले एनएचएआई के अनुरोध पर राजस्व विभाग ने सड़क चौड़ीकरण के अलावा जगदीशपुर और मुसाफिरखाना में कस्बे में लोगों को जाम से राहत देने के लिए शहर के बाहर बाईपास का सर्वे किया। आरोप है कि सर्वे के बाद अफसरों ने गलत तरीके से कृषि योग्य भूमि का मुआवजा सर्किल रेट का चार गुना निर्धारित करने के बजाय एनएच से सटी जमीन का सर्किल रेट कई गुना अधिक के बराबर बना दिया। मुआवजा निर्धारण और वितरण में गड़बड़ी के सामने आने के बाद अमेठी जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच कराई तो 384 करोड़ का घोटाला सामने आया।
2020 में जारी हुआ नोटिस
अमेठी जिला प्रशासन ने जांच टीम की ओर से तैयार रिपोर्ट को शासन को भेजा था। अमेठी की मुसाफिरखाना तहसील में दो बाईपास के लिए अवार्ड और मुआवजा वितरण की कार्रवाई एसडीएम आरडी राम के कार्यकाल में शुरू हुई। आरडी राम 23 फरवरी 2015 से 18 सितंबर 2015 तक सात महीने मुसाफिरखाना के एसडीएम रहे। इसके बाद उनके स्थान पर 19 सितंबर 2015 को अशोक कुमार कनौजिया की तैनाती हुई और वह 25 मार्च 2016 तक एसडीएम रहे। अशोक कुमार कनौजिया का भी जमीन अवार्ड करने में अहम रोल रहा है। 2020 में मामले के खुलासे के बाद नोटिस जारी हुई थी। इसके बाद अफसरों ने मुआवजा वितरण पर रोक लगा दी थी। कानूनगो की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ केस
कानूनगो की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ केस
इस मामले में रजिस्ट्रार कार्यालय मुसाफिरखाना में तैनात कानूनगो सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर मुसाफिरखाना तहसील के दो एसडीएम आरडी राम और अशोक कुमार कनौजिया समेत अज्ञात के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस का कहना है विवेचना जारी है। साक्ष्य के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
सुलतानपुर में भी हो चुकी है 200 करोड़ की अनियमितता
वर्ष 2018 में सुलतानपुर में भी एनएच-56 के जमीन अधिग्रहण में 200 करोड़ का घोटाला सामने आया था। एनएच 56 पर कुल 5 बाईपास बनने थे, जिसमें 75 में से 38 गांव प्रभावित हो रहे थे। इन 38 गांव पर न ही कोई नेशनल हाइवे है और न ही स्टेट हाइवे। बावजूद इसके इन 38 गांव के करीब 6 हजार काश्तकारों को करीब 200 करोड़ से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। इस मामले में तत्कालीन डीएम विवेक ने शासन से सीबीआई जांच तक की सिफारिश की थी, हालाकि यह मामला आज भी कोर्ट में लंबित है और बाईपास निर्माण अधर में होने से सुलतानपुर से वाराणसी मार्ग अधूरा है।
सर्किल रेट एनएच किनारे की जमीन का होता है ज्यादा
जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे की राशि सर्किल रेट के आधार पर तय किया जाता है। जिला मजिस्ट्रेट चार तरह के मानक पर इसका निर्धारण करते हैं। राष्ट्रीय या राजकीय राजमार्ग के किनारे की भूमि का सर्किल रेट सबसे ज्यादा होता है। इसके बाद संपर्क मार्ग, फिर चकरोड और उसके बाद ऐसे चक जिस पर जाने का कोई साधन न हो।
“तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिन दो अफसरों के नाम है, उनके बारे में बताया जा रहा है कि एक रिटायर हो चुके हैं, जबकि एक शासन में तैनात है। इससे ज्यादा अभी जानकारी नहीं मिल पाई है।” ~विनोद कुमार सिंह कोतवाल मुसाफिरखाना


























































































































































































































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