
मेडिकल एसोसिएशन के बाद अब व्यापार प्रतिनिधि मण्डल ने सौंपा औषधि निरीक्षक के खिलाफ ज्ञापन
चित्रकूट। मेडिकल एसोसिएशन के बाद अब जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने ड्रग इंस्पेक्टर के खिलाफ जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की मांग की है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष जगदीश प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में संगठन मंत्री आनंद सागर खरे, उमा शंकर सोनी आदि व्यापारी नेताओं ने अवगत कराया कि नगर में मेडिकल की दुकानों के संचालक शासन की मंशा अनुरूप और नियम कानून का अनुपालन करते हुए दवा का व्यवसाय कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में नाम कमाने वाला औषधि निरीक्षक हमेशा मेडिकल स्टोर के व्यापारियों का शोषण, उत्पीड़न करता रहा है। गत दिवस औषधि निरीक्षक द्वारा नमन मेडिकल स्टोर के खिलाफ धन ऐंठने की नीयत से साजिश रची गई। इसका मुंहतोड़ जवाब दुकान मालिक और सभी व्यापारियों ने दिया। जिलाध्यक्ष जगदीश गुप्ता ने कहा कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही यहां से तबादला भी किया जाए। ज्ञापन की एक प्रति जिलाधिकारी के अलावा प्रदेश सरकार के लोक निर्माण राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए सौंपी गई है।
गौरतलब है कि चित्रकूट जिला मुख्यालय स्थित नमन मेडिकल स्टोर पर ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई का कई मेडिकल स्टोर संचालक विरोध कर रहे हैं। आरोप है कि ड्रग इंस्पेक्टर दबाव बनाकर रुपए मांगते हैं। इसको लेकर जिले के प्रभारी व यूपी के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल नंदी से भी शिकायत की गई। कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों ने कहा कि उनकी मनमानी बंद न हुई दुकानें बंद कर विरोध किया जाएगा।
इससे पहले मुख्यालय की एसडीएम कालोनी निवासी मेडिकल स्टोर संचालिका दीपिका गुप्ता ने शनिवार को डीएम व एडीएम को लिखे पत्र में ड्रग इंस्पेक्टर मनोज सिंह व उनके चालक पर 50 हजार रुपए मांगने का आरोप लगाया था। रुपए न देने पर उनके गोदाम में छापा मारकर पौने दो लाख की दवाएं सीज करने और फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था।
रविवार को इस प्रकरण को लेकर कई मेडिकल स्टोर संचालकों ने बेडी पुलिया के पास बैठक की। दुकानदारों ने कहा कि ऐसे में काम करना मुश्किल हो रहा है। दुकानदार डर की वजह से चुपचाप रुपए देते हैं।
इसके विपरीत ड्रग इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने आरोपों को गलत व निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि किसी को नियमों के खिलाफ काम नहीं करने दिया जाएगा। नमन मेडिकल के मामले में भी वैधानिक कार्रवाई हुई है, किसी से रुपए की मांग नहीं की गई।
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