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मोदी सरकार करने जा रही नया फैसला, अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों की खैर नहीं, भ्रष्ट अधिकारी भी नपेंगे

दिल्ली। राज्यों की पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारियों को हाईटेक बनाने का खाका खींचा गया है। इसके तहत पुलिस-ट्रैफिक व परिवहन अधिकारियों के शरीर पर बॉडी कैमरा लगेंगे। सरकार के इस कदम से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर शिकंजा कसेगा।
राज्यों की पुलिस व परिवहन अधिकारियों को हाईटेक बनाने के लिए उनके वाहनों के डैशबोर्ड पर सीसीटीवी कैमरे, हाईवे-जंक्शन पर स्पीड कैमरे आदि डिजिटल उपकरणों को लगाने की योजना है। बॉडी कैमरे की वीडियो-ऑडियो रिकॉर्डिंग अदालत में बतौर सबूत पेश किए जाएंगे। इससे चौराहे और हाईवे पर उगाही करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगेगी। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने 25 फरवरी को सड़क सुरक्षा, प्रबंधन की निगरानी व प्रवर्तन संबंधी मसौदा नियम हितधारों से सुझाव-आपत्ति के लिए जारी कर दिए हैं।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगरानी व प्रवर्तन व्यवस्था की खास बात यह होगी कि लाल बत्ती पार करना, ओवर स्पीड, गलत पार्किंग, सीट बैल्ट, हेलमेट, मोबाइल पर बात करने जैसे ट्रैफिक नियमों को तोड़ने की घटना की वीडियो-ऑडियो रिकॉर्डिंग को अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा। इससे उल्लघंन करने वाले इंकार नहीं कर सकेंगे। वहीं, ट्रैफिक पुलिस वाहन चालक को अनावश्यक परेशान नहीं कर सकेगी और ले देकर उनको छोड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। विशेषकर हाईवे पर ट्रकों से हजारों करोड़ की अवैध वसूली के धंधे में कमी आएगी।

गौरतलब है कि चार साल पहले संसदीय समिति ने ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अधिकारियों की रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने के प्रयासों के तहत यह सुझाव दिया था।
दिसंबर 2017 में राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी (प्रवर समिति) ने ट्रैफिक पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के अधिकारियों के लिए बॉडी कैमरे की सिफारिश की थी। इससे भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी रोकने में मदद मिलेगी। प्रवर समिति ने मोटर वाहन संशोधन विधेयक-2017 की समीक्षा करने के बाद यह सिफारिश की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रवर समिति ने कहा कि मोटर वाहन कानून को लागू करने वाले सभी ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ अधिकारियों के पास बॉडी कैमरा होना चाहिए। समिति ने यह भी कहा कि इनके रिकॉर्ड किए गए अपराधों को डिजिटली स्टोर किया जाना चाहिए और कंट्रोल रूम में देखा जाना चाहिए। सांसद विनय पी सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली समिति ने परिवहन क्षेत्र में रिश्वतखोरी से निपटने के लिए वाहनों का रजिस्ट्रेशन आरटीओ के बजाए डीलरों के यहां कराने की सुविधा देने की सिफारिश की थी।

वहीं ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार देश के आरटीओ द्वारा ट्रक मालिकों या चालकों से सालाना 10 हजार करोड़ रुपये की रिश्वत वसूली जाती है। अगर इसमें लाइसेंस, पंजीकरण, कर भुगतान और परमिट के लिए दी जाने वाली रिश्वत जोड़ ली जाए तो आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने अन्य आंकलनों के आधार पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में 23 हजार करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी की बात कही थी।

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