यूपी में जल निगम होगा बंद, 5327 फील्ड कर्मचारियों का बदला विभाग
यूपी के सबसे पुराने कॉर्पोरेशन जल निगम को बंद करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने औपचारिक पत्र भेज कर नियमित कर्माचारियों को पंचायती राज विभाग और नगर निकायों में समाहित करने के निर्देश दिए हैं। जल निगम के 5 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का मर्जर किया जा रहा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने कॉर्पोरेशन जल निगम को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें नियमित कर्माचारियों को पंचायती राज विभाग और नगर निकायों में समाहित किया जाएगा।
“यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने आदेश दिए हैं कि इस विभाग के नियमित 5327 फील्ड कर्मचारियों को पंचायती राज विभाग तथा नगर निकायों में समायोजित कर दिया है। साथ ही प्रदेश जल निगम के बंद किया जाता है।”
वेतन को तरसे कर्मचारी-
जल निगम के कर्मचारी पिछले 15 दिन से वेतन के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 8वां महीना लग चुका है लेकिन कर्मचारियों को न वेतन दिया गया है और न ही कोई पेंशन दी जा रही है। उत्तर प्रदेश जल निगम संस्थान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राम सनेही यादव का कहना है कि 12 फरवरी को सभी जिलों में एक दिन का धरना दिया था और इस बाबत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था।
उधारी चुकाने में ही उड़ जाएगी सितंबर की तनख्वाह -16 फरवरी से जल निगम मुख्यालय पर लगातार धरना-प्रदर्शन चल रहा है। सभी जिलों में भी भोजनावकाश के समय 1 घंटे का धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। एमडी से साथ हुई बैठक राम सनेही यादव ने कहा कि जल निगम के एमडी से बैठक के बाद 1 मार्च को सितंबर, 2020 की सैलरी आई है। अभी अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी महीने की सैलरी बाकी है। जितनी सैलरी आई है, वो तो उधारी चुकाने में ही उड़ जाएगी।
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