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पंडित शिवकुमार शास्त्री, बाड़ा मंदिर बिजनौर उत्तर प्रदेश

5 अप्रैल की मध्य रात्रि 12:30 बजे से देव गुरु बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश कर गए हैं। यहीं से कुंभ पर्व का पहला चरण शुरू हो गया है। कुंभ का पूर्ण सहयोग 13 अप्रैल की रात्रि 2:33 बजे पर उस समय बनेगा जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसके बाद ही सही मायनों में कुंभ स्नान का मुहूर्त बनेगा। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार 14 अप्रैल का स्नान ही वास्तविक कुंभ स्नान होगा और यही सबसे महत्वपूर्ण होगा। इसी दिन नव संवत्सर की शुरुआत होगी। संक्रांति भी उसी दिन होगी। अमृत की चौघड़िया प्रातः 7:28 बजे से 9:05 बजे तक रहेगी। इसी दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक होगा। यही कुंभ के स्नान का सर्वोत्तम योग होगा। कुंभ का यह दुर्लभ योग लगभग एक माह तक रहेगा। यानी कुंभ का प्रयोग 14 मई की अर्धरात्रि तक बना रहेगा। इस अवधि तक गंगा में कुंभ स्नान का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

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