घरों पर कन्याओं को जिमा कर लिया आशीर्वाद
अष्टमी पर नौ कन्याओं के पूजन के बाद किया व्रत परायण
नौ देवियों के स्वरूप को मानते हुए कराया जाता है भोजन
बिजनौर। नवरात्र के आठवें दिन आदि शक्ति के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा के साथ कन्या पूजन कर व्रत परायण किया गया। घर में नौ देवियों के स्वरूप में कन्याओं को आमंत्रण करके उनकों भोग लगाया और माता स्वरूप जानकर उनसे आशीर्वाद लिया। इसके अलावा नवमी पूजन करने वाले बहुत से श्रद्धालुओं ने व्रत रखे, बुधवार को परायण उपरांत कन्या पूजन किया जाएगा।
मंगलवार को चैत्र मास की अष्टमी को माता गौरी की पूजा अर्चना कर श्रद्धालुओं ने अपने घरों पर कन्या पूजन कर उन्हें भोग लगाया गया तथा कन्याओं को मां का स्वरुप मानकर उनसे आशीर्वाद लिया। यूं तो नवरात्रि के दौरान हर दिन कन्या पूजन करने की मान्यता है, लेकिन महाअष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का महत्व सबसे अधिक होता है। चैत्र नवरात्रि का शुभारम्भ घट स्थापना के साथ होता है वहीं, नवरात्रि का समापन कन्या पूजन के साथ किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी तिथि के दिन और कुछ लोग अपनी पारिवारिक मान्यता के अनुसार नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करते हैं। कन्या पूजन को कई लोग कंजक पूजन भी कहते हैं। कन्या पूजन के दौरान नौ कन्याओं के साथ ही एक बालक की भी पूजा की जाती है। इसका कारण यह है कि नवरात्रि में नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है, वहीं बालक को बटुक भैरव या हनुमान जी के रूप में पूजा जाता है। कन्या पूजन के दौरान कंजकों के साथ बिठाए जाने वाले बालक को लांगुर कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा एवं सेवा किए जाने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-शांति और धन-वैभव का आशीर्वाद देती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान दो साल से नौ साल के बीच की कन्याओं की ही पूजा की जाती है। हालांकि नौ वर्ष से अधिक उम्र की कन्याओं को भी भोजन करा सकते हैं परंतु पूजन सिर्फ नौ वर्ष से कम आयु की ही कन्याओं का किया जाता है।
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