लखनऊ। कोरोना संक्रमण या अन्य किसी कारण से मौत होने पर, शव का अंतिम संस्कार करने के लिए, ग्राम प्रधान द्वारा तत्काल 5000 रुपए उपलब्ध कराने हेतु उत्तर प्रदेश के अपर प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने आदेश जारी किए हैं।


लखनऊ। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कोविड-19 से संक्रमित या किसी अन्य कारण से मृत्यु होने पर शवों की अंत्येष्टि के सम्बन्ध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है।
कहा गया है कि शासन के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि कोविड-19 से संक्रमित या किसी अन्य कारण से मृत्यु होने पर शवों को पारम्परिक रीति से अंतिम संस्कार के स्थान पर नदियों में बहा दिया जा रहा है। फलतः नदियों में कई जगह शव प्राप्त हुए हैं।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक निर्धन व निराश्रित परिवारों में मृत्यु होने पर अंत्येष्टि हेतु राज्य वित्त आयोग से धनराशि रू. 5,000/- शासनादेश संख्या 1075 / 33-1-2020-3003 / 2017 दिनांक 02.06.2020 निर्गत किया गया है। इसी प्रकार शासनादेश संख्या- यू. ओ. 23 / 33-3-2021- यू.ओ. 23 / 2021 दिनांक 29.04.2021 द्वारा भी यह निर्देश प्रसारित किए गए हैं कि कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम किया के लिए तत्काल धनराशि रु.5,000/- प्रदान किया जाए। यदि इस प्रकार से कोविड संक्रमण से मृत्यु जिसमें परिवारजन अंतिम संस्कार में सहयोग न कर पा रहे हों तों, ग्राम पंचायत उक्त रू.5,000/- की धनराशि का उपयोग शवों के दाह संस्कार पर करेगी। इस सम्बन्ध में नगर विकास विभाग द्वारा भी शासनादेश संख्या- 536 / 9-7/ 2021 27 (ज) / 2014 टी.सी.-1 दिनांक 07.05.2021 द्वारा कोविड-19 से संक्रमण के कारण मृत्यु की दशा में शवों के निस्तारण हेतु रू.5,000/- व्यय करने हेतु नगरीय निकायों को अधिकृत किया गया है।
प्राप्त सूचना के अनुसार शवों का उचित अंतिम संस्कार के स्थान पर जल में प्रवाहित करने के निम्न कारण इंगित किए जा गए हैं- (A) अंतिम संस्कार हेतु धन का अभाव (लकड़ी व अन्य व्यवस्था न होना) (B) पंथ / परम्परा। (C) कोविड-19 के शव को संक्रमण के भय से लावारिस छोड़ देना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से निर्धन परिवारों में एवं कोविड-19 में मृत्यु की दशा में शवों के अंतिम संस्कार हेतु जब पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है तो धन का अभाव कारण नहीं बनता कि शवों का अंतिम संस्कार करने के स्थान पर नदियों में प्रवाहित किया जाय। पंथ व परम्परा के प्रकरण में भी संबंधित को शव के जल प्रवाह से होने वाले कुप्रभाव को समझाते हुए इन शवों की अंत्येष्टि की जानी चाहिए। किसी भी दशा में शव किसी नदी में प्रवाहित नहीं किया जाना चाहिए। कोविड-19 से अगर किसी की मृत्यु होती है तो कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार ही उन शवों का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए ।
पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों में नव निर्वाचित ग्राम प्रधान अपने क्षेत्र में यह सुनिश्चित करें कि शासन द्वारा अंतिम संस्कार के लिए अनुमन्य धनराशि का पूर्ण उपयोग हो एवं किसी भी दशा में शव नदी में प्रवाहित न किए जाए। इस सम्बन्ध में क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं जिला पंचायत सदस्यों का भी सहयोग लेते हुए यह सुनिश्चित किया जाय कि जल स्रोतों / नदियों में शव प्रवाहित न हों, उनका उचित तरीके से अंत्येष्टि की जाए।
जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि पंचायतीराज विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जल स्रोत / नदी में शव प्रवाहित न किया जाए। जिलाधिकारी उपरोक्त तीनों शासनादेशों में अनुमन्य कराई गई धनराशि के व्यय का नियमित अनुश्रवण करें तथा इसकी सूचना निदेशक, पंचायतीराज उ०प्र० को प्रति सप्ताह उपलब्ध कराएं। जनपदों को पर्याप्त धनराशि इस हेतु उपलब्ध कराई गई है तो जिलाधिकारीगण यह सुनिश्चित करें कि उनके जनपद में उचित तरीके से शव का अंतिम संस्कार हो, जल में प्रवाहित न किया जाए।
Leave a comment