
समाजसेवी फहीम अख्तर ने की मांग, ऑड-ईवन फॉर्मूले से चलाई जाएं ई-रिक्शा
बिजनौर। समाजसेवी फहीम अख्तर उर्फ राजा ने प्रशासन से मांग की है कि गरीब रिक्शा वालों की समस्याओं को देखते हुए। ई-रिक्शा को पूरी तरीके से बंद ना करके ऑड-ईवन फॉर्मूले से चलाई जाएं। फहीम का कहना है कि गरीब रिक्शा चालक रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करता है। कोरोना महामारी से हर कोई परेशान है। इस बार इस महामारी से मरने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। परंतु गरीब कि रोजी रोटी का साधन उसे छीन लिया जाता है तो उसके परिवार और वह महामारी से ना मार कर भुखमरी से मर जाएगा। ई-रिक्शा बंद होने से उन लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिनके पास या तो इलाज के पैसे हैं या फिर एंबुलेंस का किराया देने के, यदि ऐसे लोग एंबुलेंस में अपने मरीजों को हॉस्पिटल तक ले जाते हैं तो एक हजार से 15 सौ रुपए किराया उनको देना पड़ता है, जबकि ई रिक्शा में ले जाने पर मात्र 50 रुपए ही किराया देना पड़ता है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गरीबों को बड़ी राहत देते हुए उनको मासिक भत्ता देने की घोषणा की है। इस भत्ते से गरीबों को काफी हद तक राहत मिलेगी। परंतु यह भत्ता परिवार के पालन पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है और देखा जाए तो अभी यह सिर्फ घोषणा की गई है। गरीबों के खाते तक इस भत्ते को पहुंचने के लिए अभी 10 से 15 दिन का समय लगेगा। ऐसे में 10 से 15 दिन रोजमर्रा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में यदि ई रिक्शा को ऑड-ईवन फॉर्मूले से चलने की परमिशन मिल जाती है। गरीब रिक्शा वालों को अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए पर्याप्त रकम मिल जाएगी। प्रशासन को गरीब रिक्शा वालों के परिवार वालों के बारे में सोच कर कोई उचित समाधान निकालना चाहिए।
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