
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर.. आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है. इस दिवस के जनक हैं पत्रकार शिरोमणि पंडित जुगल किशोर सुकुल. आज ही के दिन सुकुल जी ने उदंत मार्तंड नाम का हिंदी का पहला अखबार कोलकाता से 1826 में प्रकाशित किया था. उनके नाम पर हिंदी पत्रकारिता के लिए हिंदी पत्रकारिता द्वारा कई कसमें खाई जाती है. रस्में निभाई जाती है, बस नाम के लिए काम” के लिए नहीं. दुर्भाग्य देखिए! जिस देश में सैकड़ों सरकारी और निजी पत्रकारिता का प्रशिक्षण देने वाले संस्थान खुल गए हो, जिस देश में 40,000 से ज्यादा पत्र पत्रिकाएं हिंदी में निकलती हो, लाखों लाख लोग हिंदी पत्रकारिता करते हो, करोड़ों करोड़ों लोग हिंदी पत्रकारिता का लाभ उठाते हो, उस देश में पत्रकारिता के इस पुरोधा के नाम पर न कोई भवन है. न कोई सम्मान है. न सरकारी रिकॉर्ड में कोई उल्लेख.. इतनी उपेक्षा के बाद भी इस पुरोधा के नाम एक परंपरा है. छोटा-बड़ा हर पत्रकार दिनविशेष ही सही उनकी स्मृतियों को सहेज लेता है बावजूद इसके कि उनका पूर्ण विवरण कहीं मिलता नहीं. धन्यवाद का पात्र है देश का प्रमुख हिंदी दैनिक दैनिक जागरण. “दैनिक जागरण” ने आज सुकुल जी को याद करते हुए बहुत ही शोध परक लेख अपने सभी संस्करण में प्रकाशित किया है।( रिपोर्ट देखें और पढ़ें भी).

हमें इस बात का संतोष है कि जागरण के खोजकर्ता पत्रकारों की टीम के सदस्यों ने उनके बाबत जानकारी जुटाने की कोशिशों को हम तभी पहुंचाया था. यह अलग बात है कि हमारे पास भी कोई ठोस जानकारी नहीं थी. हम भी उन्हीं वंशज की तरह साबित हुए जैसे अन्य तमाम.. जागरण की यह खोज ही बताती है कि सुकुल जी कानपुर के नहीं मूल रूप से बैसवारा (उन्नाव-रायबरेली जनपद के क्षेत्र विशेष को मिलाकर पुकारा जाने वाला एक भौगोलिक क्षेत्र) के भाटन खेड़ा गांव के ही रहने वाले थे और यहां से वह कानपुर और गए कोलकाता गए. हम इसे अपना सौभाग्य ही मानेंगे कि यही बैसवारा हमारी जन्मभूमि है और कर्मभूमि भी. यह भी कि हम हिंदी पत्रकारिता से ही अपना पेट भर रहे हैं और परिवार भी पाल रहे.. पत्रकारिता के अपने इस पूर्वज की स्मृतियों को प्रणाम करते हुए आज हमारा संकल्प बस इतना ही है कि बताए गए गांव में, बताई गई जगह, पर बताई गई देहरी पर माथा टेक कर उस प्रतापी मिट्टी को माथे से इसी महीने जाकर लगाएंगे जरूर. पत्रकारिता के और साथी साथ चलने को तैयार होंगे के साधन हमारा. हां! बताएंगे भी, इसी माध्यम से बता ना पाए तो आप हमें लानत भेजना ना भूलिएगा! आज के इस पुण्य दिवस पर बस इतना ही! बाकी कोई बात नहीं..
◇ गौरव अवस्थी, उन्नाव/रायबरेली
Leave a comment