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अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा कब्रिस्तान वाला तालाब

बिजनौर। ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोत का मुख्य स्रोत तालाबों को माना जाता रहा है लेकिन अब तालाबों की हालत दयनीय हो चुकी है। हर गांव में तालाबों का आकार घटता जा रहा है, जिससे जल संचय नहीं हो पा रहा। तालाबों को दबंगों ने प्रधानों से हमसाज होकर पाटकर अपने मकान बना लिए तो कुछ तालाबों में घास आदि खड़ी है जो धीरे-धीरे तालाबों को पाटने का काम कर रही है।

विकास खंड नूरपुर से तीन किलोमीटर दूर ग्राम रोशनपुर जागीर में कब्रिस्तान वाला तालाब अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रहा है,  इसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं। कभी यह तालाब जल संचय का मुख्य स्रोत हुआ करता था। आज तक कोई इसका जीर्णोद्धार नहीं कर पाया। इस कारण बरसात का पानी तालाब में ना जाकर लोगों के घरों और दुकानों में घुसता है। प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना यह तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। तालाब में फैली गंदगी संक्रामक रोगों को पैदा करने की दावत दे रही है। वहां से लोगों का निकलना दूभर हो गया है। तालाब में कूड़ा करकट डाल कर उसे पाटने का काम किया जा रहा है। अगर इस तालाब का सौंदर्य करण हो जाता तो यह जल संचय के साथ-साथ गांव की सुंदरता में चार चांद लगा देता। ग्रामीण विजय पाल सिंह, संतोष कुमार, नसीम अहमद, सोनू पाल आदि का कहना है कि गांव की दूषित राजनीति के चलते आज तक इस तालाब का सौंदर्य करण नहीं हो पाया उन्होंने प्रशासन से इसके जीर्णोद्धार की मांग की है।

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