newsdaily24

update रहें…हर दम, हर पल

बिजनौर। युवा समाज सेवी व भारतीय बौद्ध संघ के जिला अध्यक्ष गामेंद्र सिंह गजरौलिया ने संत कबीर दास जी की जयंती के शुभ अवसर पर कहा कि कबीर दास जी अनुभव के कवि हैं। मनुष्य को अनुभव की यात्रा में जीवन संघर्षों से होकर गुजरना पड़ता है। कबीर दास जी का पूरा जीवन अनुभव से होकर गुजरा जिसमें कई रंग भरे पड़े हैं। संत कबीर दास जी धन संचय को अनुचित मानते थे, क्योंकि धन संचय शोषण पर आधारित होता है।

युवा समाज सेवी व भारतीय बौद्ध संघ के जिलाध्यक्ष गामेंद्र सिंह गजरौलिया

संत कबीर दास जी का पथ कांटों की सेज है, उस रास्ते पर चलने से सब डरते हैं। धर्म या धन के मठाधीश संत कबीर के पथ पर चल नहीं सकते, यह एक ध्रुव सत्य है की रोटी के बिना भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन निरर्थक है,संत कबीर दास स्पष्ट रूप से इस सत्य को स्वीकार करते हैं। सर्व धर्म जीवन यापन हेतु जीवन कर्म को अहमियत देते हैं तत्पश्चात भक्ति की साधना में आत्म लीन होते हैं।
जिला अध्यक्ष गामेंद्र सिंह गजरौलिया ने आगे कहा कि संत कबीर दास जी के जीवन में प्रेम की अर्थ वक्ता सर्वाधिक है, संत कबीर दास जी किताबों के ज्ञान की जगह प्रेम की अनुभूतियों को ज्यादा तरजीह देते हैं, बहुत ही सफाई के साथ उसकी महत्ता को भी रेखांकित करते हैं कबीर दास जी कहते हैं की पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।
गामेंद्र सिंह गजरौलिया ने कहा कि संत कबीर दास जी भारतीय सामाजिक संरचना की जटिलता से बखूबी परिचित थे। वह लगातार धार्मिक-कर्मकांड, सामाजिक अंतर्विरोध के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे। मध्यकालीन समाज की जकड़ बंदियों को तोड़ने की दिशा में प्रयास करते रहे।
संत कबीर दास जी अपने समय और समाज के सबसे प्रगतिशील व्यक्ति थे, प्रश्न करने की प्रवृत्ति उनकी कविता की खास विशेषता रही है। संत कबीर दास जी निडर होकर समाज के मठाधीशों से सवाल करते थे।
आज का युग संत कबीर दास की कविताओं में निहित मूल्यों के साथ जीने की मांग करता है, जहां से मानवीय प्रेम और विश्वास के प्रति एक नई सोच विकसित हो सके।

Posted in ,

Leave a comment