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लखनऊ (एकलव्य बाण समाचार) उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में अवैध और अनाधिकृत निजी चिकित्सालयों की बाढ़ सी आ गयी है। कौन अधिकारी अपने निजी स्वार्थसिद्धी के लिए शासनादेशों की अवहेलना कर मरीजों के जान माल की सुरक्षा की परवाह न करते हुए अवैध व अनाधिकृत तरीके से निजी चिकित्सायलों का संचालन अपनी छत्रछाया में करवा रहे हैं? इनके विरुद्ध कोई प्रभावी वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई है और वर्षों ऐसे ही चल रहे हैं। इन अवैध और अनाधिकृत निजी चिकित्सायलों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण भी प्रति वर्ष संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में किये जाते हैं!

अग्निशमन विभाग भी दरकिनार- आरोप है कि अधिकांश संचालकों के पास अग्निशमन विभाग से चिकित्सालय का भवन निर्माण प्रारंभ एवं अन्तिम- प्रमाण-पत्र भी नहीं है और न ही प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत है। संचालकों द्वारा चिकित्सालय भवन निर्माण कराते समय मरीजों की सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। इसके अतिरिक्त संबंधित विभागों से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किये गए हैं। अभी हाल ही में अग्निशमन विभाग ने गाजियाबाद जनपद में चिकित्सायलों की जांच की थी। इसमें खुलासा हुआ कि 86 चिकित्सायलों में सुरक्षा सम्बन्धी मानक पूरे न होने के कारण मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। चिकित्सायलों में प्रथम एवं द्वितीय तल से मरीजों को लाने व ले जाने के लिए समुचित व्यवस्था भी नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप अप्रिय घटना के समय जान- माल की क्षति होने की पूर्ण संभावना बनी रहती है।

नियमों का पालन नहीं- कुछ निजी चिकित्सायलों में अग्निशमन उपकरण स्थापित तो किये गये हैं लेकिन उनके संचालन हेतु न तो कोई प्रशिक्षित स्टाफ है और न ही नोडल अधिकारी ही बनाया गया है। बताया गया है कि भवन निर्माण से पूर्व उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा से मानचित्र का परीक्षण करा कर अनापत्ति प्रमाण- पत्र व अनुमोदन आवश्यक है। इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है। इसी प्रकार भवन पूर्ण हो जाने के पश्चात अग्निशमन विभाग के माध्यम से निरीक्षण करा कर कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य होता है, इस नियम का पालन भी नहीं किया जाता है।
समय- समय पर मानचित्र के अनुमोदन तथा कम्पलीशन सर्टिफिकेट के अनुसार समस्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं जैसे पलायन मार्ग, कम्पार्ट में टेंशन स्मोक मैनेजमेंट तथा भवन में स्थापित अग्नि शमन सुरक्षा व्यवस्था जैसे फायर डिटेक्शन, फायर हाईड्रेन्ट, फायर एक्सटिम्यूशर इत्यादि के नवीनीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित कराया जाना, भूकंप या आपात कालीन स्थिति में यंत्रों व उपकरणों का संचालन एवं प्रयोग कैसे जाए, की व्यवस्था होनी चाहिये।

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