सीएम योगी से मुलाकात के बाद कयासों का बाजार था गर्म। यूपी में विधानसभा चुनाव लगभग 7 महीने बाद होने हैं। ऐसे में गहन मंथन कर सरकार ने की डीजीपी के पद पर मुकुल गोयल की नियुक्ति।

लखनऊ (एकलव्य बाण समाचार)। यूपी के डीजीपी पद पर वरिष्ठ आईपीएस मुकुल गोयल की ताजपोशी हो गई है। वह 1987 बैच के अधिकारी हैं। मौजूदा डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी का बुधवार को रिटायरमेंट हो गया। मंगलवार शाम मुकुल गोयल ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की।

अटकलें- मुकुल गोयल के सीएम योगी से मुलाकात के बाद कयासों का बाजार गर्म हो गया था। मुकुल गोयल सपा सरकार में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर भी रह चुके हैं। वह साल 2024 में रिटायर होंगे। ऐसे में उनके पास डीजीपी के पद पर बने रहने के लिए पर्याप्त समय भी है।
संघ लोक सेवा आयोग ने भेजे थे 3 नाम- मंगलवार को संघ लोक आयोग ने तीन सीनियर IPS अधिकारियों के नाम तय कर उत्तर प्रदेश सरकार को भेज दिए थे। पैनल में 1987 बैच के मुकुल गोयल, 1988 बैच के आरके विश्वकर्मा और आनंद कुमार शामिल थे। मुकुल गोयल फिलहाल बीएसएफ में एडीजी के पद पर तैनात रहे।
तेजतर्रार छवि का कमाल- यूपी की गहरी समझ और तेज तर्रार अफसर होने की उनकी छवि के चलते मुकुल गोयल को डीजीपी की जिम्मेदारी मिलने की संभावनाएं ज्यादा ही जताई जा रही थीं। 1987 बैच के ही आरपी सिंह, विश्वजीत महापात्रा, गोपाल लाल मीना भी डीजीपी पद के दावेदारी में शामिल रहे।
वरिष्ठता को प्राथमिकता- योगी सरकार में अब तक डीजीपी की नियुक्ति में वरिष्ठता को प्राथमिकता दी गई है। मौजूदा सरकार में डीजीपी नियुक्त करते समय अफसरों की सीनियरिटी को हमेशा वरीयता दी गई। सरकार के गठन के बाद सुलखान सिंह पहले डीजीपी बनाए गए थे, जो उस वक्त सीनियर आईपीएस अफसर थे, हालांकि 3 महीने बाद ही उन्हें रिटायर होना था। बाद में सरकार में उन्हें 6 महीने का सेवा विस्तार दे दिया। डीजीपी रहे ओपी सिंह और मौजूदा डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी भी सबसे सीनियर अधिकारी हैं। यही वजह है कि मौजूदा समय में सबसे सीनियर अफसर मुकुल गोयल को अगला डीजीपी बनाए जाने की ज्यादा संभावनाएं जताई जा रही थीं।
कहां-कहां रहे- मुकुल गोयल 1987 बैच के आइपीएस हैं। अब तक वह मैनपुरी, आज़मगढ़, हाथरस, उरई जालौन, गोरखपुर, वाराणसी, सहारनपुर और मेरठ जैसे जिलों में एसएसपी रह चुके हैं। डीआईजी के पद पर कानपुर, आगरा और बरेली में नियुक्ति रही है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान जहां एनडीआरएफ/ आईटीबीपी में काम किया तो वहां से लौटने के बाद आईजी के पद पर बरेली का चार्ज मिला। एडीजी के पद पर प्रमोट कर उन्हें एडीजी जीआरपी की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी गयी थी। बाद में उन्हें एडीजी लॉ एंड ऑर्डर का पद मिला।
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