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…दीपक की थर्राती बाती मुझको बहुत डराती है

मौका मिले तो रिश्तों की किताब पढ़ लेना

नजीबाबाद। साहित्यिक संस्था “मेरी कलम” के तत्वावधान में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत एक शाम शहीदों के नाम वेबिनार गोष्ठी आयोजित की गयी। अध्यक्षता मधु प्रसाद तथा संचालन डा. मंजु मधुर जौहरी ने किया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि सतीश अकेला तथा विशिष्ट अतिथि केशव सक्सेना रहे। गोष्ठी का शुभारंभ संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डा. मंजु जौहरी मधुर ने मां शारदे को वंदन कर किया।

वेबिनार गोष्ठी में काव्य पाठ करते हुए मधु प्रसाद ने कहा कि भारत मां के भाल पर लिख अभिनंदन नाम। वीर सपूतों कर दिया तुमने अदभुत काम। सतीश अकेला ने कहा कि जिंदगी को जितना समझता रहा उलझनों में उतना उलझता रहा। केशव सक्सेना ने कहा कि अपने प्यारे देश की खातिर हमको अलख जगानी है। डा. मंजु जौहरी मधुर ने कहा कि मैं अपने देश के गणतंत्र का सम्मान करती हूं। तिरंगा हो कफन मेरा यही अरमान करती हूं। अजय जौहरी ने कहा कि फीका-फीका दिखता है बाजारों में, मीठा-मीठा गायब हैं बाजारों में। डा. सतेंद्र गुप्ता ने कहा कि मौका मिले तो रिश्तों की किताब पढ़ लेना। खूबसूरत सी कोई तस्वीर निगाह में जड़ लेना। देवपुत्र गुलफाम ने कहा कि प्यार की खातिर हम तो अपना शीश झुकाते हैं। हमसे जो टकराए उसका शीश उड़ाते हैं। नीरज कांत सोती ने कहा कि भैया मुझको याद तुम्हारी आती है। दीपक की थर्राती बाती मुझको बहुत डराती है। डा. पूनम तिवारी ने कहा कि जब मिल गई जीवन की सौगात क्यों भूल गए अपनी औकात। डा. अर्चना चंचल ने कहा कि याद रहेगी दिल में वीरों की अमिट निशानी। ऊषा श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहासों की बात करूं तो कलम वहीं रो पड़ती है। प्रतिभा पुरोहित ने कहा कि बहती जहां रसवंती धारा वह ये देश हमारा है। कविता नामदेव ने कहा कि दिन है शहीदों को याद करने का तिरंगा फहराने का। कार्यक्रम के अंत में संस्था की अध्यक्ष तथा सभी कवियों व गीतकारों ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

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