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लखनऊ। अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिए अब तहसील स्तर पर निगरानी की जाएगी। इसके लिए आबकारी विभाग द्वारा नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पिछले दिनों आगरा में जहरीली शराब कांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन मामलों को सख्ती से रोकने के लिए आबकारी प्रवर्तन इकाइयों को मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर उन्हें सक्रिय करने के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए थे।

इंस्पेक्टर समेत सात की तैनाती– आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय आर.भूसरेड्डी ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि अब मानकों के आधार पर तहसील स्तर पर एक इंस्पेक्टर, चार सिपाही और दो हेड कांस्टेबिल तैनात किये जायेंगे। तहसील स्तर पर अवैध शराब बनाने और बेचने वालों की धरपकड़ के लिए प्रवर्तन इकाई को वाहन भी उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अलावा जिन सिपाहियों के पास रायफल नहीं हैं, उन्हें रायफल उपलब्ध करवाई जाएंगी। फिलहाल हर जिला आबकारी कार्यालय में दो वाहन उपलब्ध हैं, जिनमें से एक वाहन जिला आबकारी अधिकारी के पास रहता है और दूसरा किराये पर अनुबंधित वाहन प्रवर्तन इकाई के लिए होता है, जो पूरे जिले में शराब माफिया से निबटने के लिए नाकाफी है।

36 हजार करोड़ रुपए के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य- अपर मुख्य सचिव ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए आबकारी विभाग से 36000 हजार करोड़ रुपए के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है। अवैध शराब बनाने, बेचने वालों के खिलाफ प्रभावी अंकुश के लिए विभाग की प्रवर्तन इकाइयों को मजबूत बनाने, उन्हें जरूरी संसाधनों से युक्त करने के लिए 200 से 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। हाल ही में नियुक्त किये गए 142 नए आबकारी निरीक्षक में से 130 की संस्तुति होने के बाद 80 की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। इन्हें सीयूजी मोबाईल फोन, पिस्टल और एक्साइज मैनुअल उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

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