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मोदीनगर। उत्तर प्रदेश का किसान व गन्ना किसान भाजपा सरकार से बेहद खफा है। इसका जवाब वे उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा 2022 चुनाव में भाजपा सरकार को हरा कर देंगे।

यह आरोप राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश शर्मा ने अपने कैम्प कार्यालय मोदी नगर में लगाया। उन्होंने कहा कि किसान लगभग नौ माह से तीन काले कानूनों को वापस करवाने को लेकर बार्डर पर बैठा हुआ है, पर भाजपा की हिटलरशाह सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करने को तैयार नहीं हैं। गन्ना भुगतान शासनादेश व नियमानुसार न करवाने को लेकर किसान भाजपा सरकार की केन्द्र व उत्तर प्रदेश सरकार से बेहद रूष्ट है। भाजपा सरकार ने किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर लाठियां व पानी की बौछार करने का कार्य किया है। इसके जवाब में किसान उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का कार्य करेंगे।
इंटक नेता ने कहा कि अधिनियम के अनुसार 14 दिन पूर्व अवधि तक देय अवशेष गन्ना मूल्य का भुगतान न करवाने के संबंध में अधिकारीगण भी दोषी हैं। नियमानुसार व शासनादेशों के अंतर्गत बकाया गन्ना भुगतान न दिलवाने के परिणाम स्वरूप अधिकारी भी अपराधी की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में शुगर मिल्स ने नियमानुसार 14 दिन पूर्व अवधि तक गन्ना किसानों का देय गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है और न ही किया जा रहा है? जबकि उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 की धारा- 17 (3) के अंतर्गत 14 दिन पूर्व अवधि पर गन्ना मूल्य भुगतान किये जाने की स्पष्ट व्यवस्था दी गई है। अग्रेतर निर्धारित अवधि में भुगतान न करने पर 12 प्रतिशत ब्याज की देयता बन जाती है। गन्ना किसानों में बकाया भुगतान मिल प्रबंधकों द्वारा न दिये जाने पर जबरदस्त रोष व्याप्त है। उत्तर प्रदेश के मिल प्रबंधक गन्ना किसानों का न तो पूर्ण रूप से भुगतान कर रहे हैं न ही ब्याज दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश शुगर मिल विभाग के अधिकारीगण व मिल प्रबंधक उत्तर प्रदेश शुगर मिल टैगिंग आदेश का उल्लंघन कर रही हैं। गन्ना एवं चीनी उत्तर प्रदेश विभाग लखनऊ के अधिकारीगण सांठ-गांठ के चलते शुगर मिलों से टैगिंग आदेश का पालन नहीं करवा पा रहे हैं, जबकि अधिनियमों व शासनादेशों का पालन करवाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

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