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धड़ल्ले से नशे में प्रयोग हो रहा है व्हाइटनर फ्लूड।खुली बिक्री पर लगनी चाहिए रोक।

लखनऊ। व्हाइटनर फ्लूड का उपयोग गलत लिखे को सही करने के लिए किया जाता है। …मगर क्या हो अगर व्हाइटनर का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाने लगे? जी हां, ऐसा ही हो रहा है…। प्रदेश के लगभग हर जिले में व्हाइटनर का इस्तेमाल नशे में हो रहा है। इसका नशे में इस्तेमाल करने वाले भी छोटे छोटे बच्चे हैं। ये बच्चे सुबह से शाम तक मेहनत, मजदूरी या भीख मांग कर जो कमाते हैं, शाम को व्हाइटनर खरीद में खर्च कर देते हैं। ये अपने पैसे तो इसमें खर्च करते ही हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि इसका इनके स्वास्थ्य पर कितना गहरा प्रभाव पड़ रहा है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि व्हाइटनर फ्लूड को बेचने के लिए कुछ नियम कायदे बनाएं, जिससे इसका इस्तेमाल नशे में होने से रोका जा सके।

दुकानदार काट रहे चांदी! यह हर व्यक्ति जनता है कि जिस दुकान से वो कुछ भी सामान लगातार खरीदता है, वहां जान पहचान हो जाती है। गुटका, बीड़ी सिगरेट आदि हो या दूध, ब्रेड, मक्खन! दुकानदार आपको देखते ही आपकी पसंद का माल आपको थमा देता है। अब सोचने का विषय ये है कि छोटे बच्चे लगातार व्हाइटनर फ्लूड क्यों खरीद रहे हैं, दुकानदार को समझ में नहीं आता? सब समझ में आता है, लेकिन कमाई के चक्कर में वह अनदेखी करता है।

नशा बनता है आपराधिक घटनाओं का कारण- पुलिस का काम अपराध नियंत्रण और घटित हो चुके अपराध का खुलासा कर आरोपी को क़ानूनन सजा दिलाने का है। समस्या तब बढ़ जाती है, जब अपराध के पीछे कोई वाजिब कारण न हो। नशे में किये जाने वाले अपराध इसी श्रेणी में आते हैं।

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