उत्तर प्रदेश में बह रही उल्टी गंगा: सरकारी केंद्रों पर 2 हज़ार करोड़ का अनाज बेचकर मुफ्त राशन ले रहे 66 हज़ार किसान

नई दिल्ली (एजेंसी)। नियमानुसार जिस परिवार की शहरी क्षेत्र में प्रतिवर्ष आय तीन लाख और ग्रामीण क्षेत्र में दो लाख रुपये से ज्यादा है उसका राशन कार्ड नहीं बन सकता। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा का अनाज बेचने वाले मुफ्त अनाज के लिए अपात्र हैं। यह केवल अनाज का ही रिकॉर्ड है अगर गन्ने का भी इसी तरह मिलान किया जाए तो लाखों की संख्या में ऐसे किसान मिलेंगे जो मिल पर प्रतिवर्ष लाखों का गन्ना मिल पर बेचते हैं और सरकार से मुफ्त राशन लेते हैं।
उत्तर प्रदेश में उल्टी गंगा बह रही है। यहां के हज़ारों किसान सरकार से मुफ्त राशन ले रहे हैं और ये किसान सरकारी क्रयों केंद्र पर सालाना 3 लाख से 8 लाख तक का अनाज सरकार को बेच रहे हैं। आधार कार्ड के मिलान से गड़बड़ी का पता चलने पर महकमे में खलबली मची गई है। सरकार ने इसकी गहन जांच के निर्देश दिए हैं।
विदित हो कि उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ 60 लाख राशनकार्ड धारक हैं। इनमें से 40 लाख 79 हजार अंत्योदय और तीन करोड़ 19 लाख पात्र गृहस्थी के कार्ड बने हुए हैं। इन कार्डों में कुल 14 करोड़ 87 लाख यूनिट दर्ज हैं। कोरोना काल में सरकार की ओर से गरीब आदमियों को कुछ राहत देते हुए प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना के तहत प्रतिमाह मुफ्त का राशन वितरण किया जा रहा है।
जांच में यह सामने आया कि उत्तर प्रदेश में 66 हजार राशनकार्ड धारक ऐसे किसान हैं, जिन्होंने अपने पास कृषि भूमि दर्शाते हुए एक साल में रबी और खरीफ में तीन लाख रुपये से ज्यादा का गेहूं व धान क्रय केंद्रों पर बेचा है। इन किसानों ने सरकार को दो हज़ार करोड़ का अनाज बेचा है। इस मामले में सामने आया है कि कुछ किसानों ने आठ से दस लाख रुपये तक का भी अनाज बेचा गया है।
दरअसल, यह पूरी गड़बड़ी आधार कार्ड के जरिये पकड़ में आई है। विभाग ने सॉफ्टवेयर से सभी राशनकार्डों पर दर्ज आधार नंबर से उन किसानों का मिलान किया, जिन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों पर धान व गेहूं बेचे हैं। जांच में 66 हजार आधार नंबर ऐसे मिले जिनके राशनकार्ड बने हैं और उन्होंने तीन लाख रुपये से ज्यादा का अनाज बेचा है।
गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि अपात्रों को कैसे राशन वितरण किया जा रहा है। जांच का एक पहलू यह भी है कि कहीं सरकार से मुफ्त का राशन लेकर क्रय केंद्रों पर वापस सरकार को तो नही बेच दिया। साथ ही अपात्रों के राशनकार्ड कैसे बने। या फिर इसमें राशन माफिया और राशन विक्रेता खेल कर रहें हैं।
मामला सामने आने पर सभी जिलाधिकारियों को गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। सभी को 15 दिन में पूरी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद इन पर कार्रवाई होगी।
वीना कुमारी मीना, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद
यह केवल एक ही तरह का मामला सामने आया है। अगर सरकार ईमानदारी से मुफ्त योजनाओं जैसे- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आदि योजनाओं की जांच की जाए तो अपात्रों की भरमार मिल सकती है।
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