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पहले ही तैयार हो जाती है बचाव की पटकथा! जगजाहिर हैं नोडल क्वेक्स डॉक्टर एसके निगम के कारनामे!

बिजनौर। जनपद में नीम हकीमों द्वारा आएदिन लोगों की जान ली जा रही है लेकिन नोडल क्वेक्स केवल उगाही को अंजाम दे रहे हैं!

गत दिनों चांदपुर के एक अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में हुई मौत के बाद खूब बवाल हुआ। प्रशासन को काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाने में कामयाबी हासिल हुई। इस हंगामे को होते देख नोडल अधिकारी क्वेक्स एसके निगम चांदपुर पहुंचे और आनन-फानन में उन नर्सिंग होम, अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिया, जिनसे वह वर्षों से अवैध उगाही करते चले आ रहे हैं? इसके बाद अस्पताल संचालक और डॉक्टर अपने बचाव के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पहुंच गए। बताया जाता है कि डॉ. एसके निगम द्वारा एक बाबू को उनको बचाव की जानकारी के लिए लगा दिया गया!

…और बाबू पर भी नहीं किसी का काबू: बाबू ने ऐसा षड्यंत्र रचा कि डॉक्टर बागबाग हो गए और एक मोटी रकम डॉ. एसके निगम को भेंट स्वरूप दी गई। बचाव के रास्ते की जानकारी मिलने पर सीएमओ साहब भी गदगद हो गए! वह बचाव में दलीलें देते नजर आते हैं। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, दरअसल मामला बरसों पुराना है। बरसों से जो भी नोडल कवेक्स बनाए जाते हैं, उनका एकमात्र उद्देश्य इन झोलाछाप नीम हकीम डॉक्टर से अवैध उगाही करना ही बना हुआ है। डॉक्टर एसके निगम एक वर्ष से ज्यादा से नोडल कवेक्स हैं और लगातार चांदपुर में नीम हकीम को नोटिस जारी कर उगाही करते रहे हैं! जब भी कोई ऐसा मामला फंसता नजर आता है तब वह भारी संख्या में नीम हकीम को नोटिस जारी कर देते हैं और बाद में मामला शांत होने पर अवैध उगाही कर उन्हें अभयदान प्रदान करते हुए अपनी एक निश्चित रकम तय कर लेते हैं। एक नीम हकीम को उगाही की जिम्मेदारी देते हैं या फिर गाड़ी में बैठ कर अस्पताल के बाहर अपने ड्राइवर के माध्यम से उगाही के कार्य को अंजाम देते रहते हैं। इस बार भी कुछ अलग नहीं होने जा रहा है।

तगड़ी हो रही उगाही– नाम न छापने की शर्त पर एक अस्पताल संचालक ने बताया कि उनसे प्रतिमाह ₹ 2 से ₹4000 तक की प्रतिमाह उगाही की जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की डॉ. एसके निगम गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की खुली छूट अवैध रूप से संचालित अस्पतालों व नीमहकीमो को दिए हुए हैं जबकि उनके रिटायरमेंट के कुछ माह शेष हैं। ऐसे में वह कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते और वह सारे नीम हकीम अल्ट्रासाउंड सेंटर से अवैध उगाही के लिए ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि छुट्टी के दिन निगम अपनी व्यक्तिगत गाड़ी लेकर उगाही के लिए निकल जाते हैं।

प्रशासन और सरकार की बदनामी- आरोप है कि वह जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साथ ही कुछ स्थानीय पार्टी नेताओं व अधिकारियों को एक मोटी रकम प्रतिमाह अपनी उगाही से देते रहते हैं। इस कारण आज तक किसी सत्तारूढ़ पार्टी के नेता या फिर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी उनकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देखते। अभी उन्होंने चांदपुर में नौ और नजीबाबाद के भागूवाला में 11 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर प्रमाण पत्र मांगे हैं, जबकि पंजीकृत अस्पतालों का रिकॉर्ड सीएमओ ऑफिस में मौजूद रहता है लेकिन इन पर डॉक्टर निगम ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि उन्हें तो अवैध उगाही करनी है। उन्हें इससे क्या लेना कि कोई अस्पताल या डॉक्टर पंजीकृत है या नहीं है। अक्सर होता यह भी है कि अस्पताल का पंजीकरण जिस डॉक्टर के नाम से कराया जाता है वह उस हॉस्पिटल में कभी आता ही नहीं है। इस बात की पुष्टि इन अस्पतालों में लगे सीसीटीवी कैमरे से की जा सकती है, लेकिन इस सब को दरकिनार कर नोडल अधिकारी कवेक्स अपने उगाही के धंधे को जारी रखे हुए हैं। इससे सरकार व जिला प्रशासन की बदनामी के साथ ही कार्यशैली पर राशन लगना तो लाजमी है।

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