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👉 उरई जालौन विधानसभा क्षेत्र समाजवादी पार्टी की टिकट के प्रबल दावेदार पूर्व मंत्री दयाशंकर वर्मा को भरोसेमंद नहीं मानते सपा कार्यकर्ता।
👉लोकसभा विधानसभा एवं निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चला चुके हैं मुहिम, जालौन नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में थोपन यादव के खिलाफ बागी प्रत्याशी के समर्थन में रहे थे दयाशंकर वर्मा। 👉 गांधी इंटर कॉलेज उरई की जमीन पर दया शंकर वर्मा पर लगे थे कब्जा करने के आरोप, कॉलेज के क्रीड़ा स्थल पर खोल लिया था दरवाजा, कोंच में पूर्व मंत्री के भाइयों पर भी मकान पर कब्जे एवं छेड़खानी के आरोपियों को संरक्षण देने के चलते कटा था 2017 में टिकट।

उरई (जालौन)। उरई-जालौन सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी कर रहे पूर्व विधायक दयाशंकर वर्मा के कारनामे ही अब उनके टिकट में बाधक माने जा रहे हैं। उनके क्रियाकलापों से पार्टी कार्यकर्ताओं में व्याप्त नाराजगी को जहां वह दूर करने में असफल रहे हैं, वहीं उनके ऊपर अपने स्वार्थ के लिए ही काम करने के आरोप लग रहे हैं कि वह पार्टी के मूल वोट बैंक यादव समाज के व्यक्ति की सफलता को हजम नहीं कर पाते हैं। जब भी मौका आया उन्होंने हमेशा विरोध में ही काम किया। पूर्वमंत्री दयाशंकर वर्मा पर अपने पिछले विधायकी कार्यकाल में जिस तरह से जमीनों एवं मकानों पर कब्जे के आरोप लगे थे उसके चलते ही वर्ष २०१७ के विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन के बाद उनका टिकट काटकर महेन्द्र कठेरिया को दे दिया गया था, क्योंकि नामांकन के दौरान उनके भाई पर कोंच नगर की युवती ने जबरन मकान पर कब्जा करने एवं उत्पीड़न के आरोप लगाये थे। २०१७ के विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद उनके बागी तेवर जगजाहिर हुए थे। तो लोकसभा चुनाव में दयाशंकर वर्मा के रवैये को लेकर समाजवादी पार्टी के आम कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई थी। निकाय चुनाव में भी उन पर जालौन नगर पालिका परिषद से समाजवादी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी चंद्रप्रकाश उर्फ थोपन यादव के खिलाफबागी प्रत्याशी को उतारने का षड़यंत्र रचने के आरोप लगे चुके हैं।

गांधी इंटर कालेज के क्रीडा स्थल पर कब्जे का आरोप

उरई। समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे दयाशंकर वर्मा पर श्री गांधी इंटर कालेज उरई की प्रबंधक श्रीमती इंदु शर्मा एवं तत्कालीन प्रधानाचार्य ने कालेज के क्रीडा स्थल पर कब्जा करने का आरोप बकायदा पत्रकार वार्ता में लगाया था। उनके लॉज में अराजकतत्वों के ठहरने के भी आरोप लगे थे। स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों के साथ अप्रिय घटना घटने की आशंका व्यक्त की गई थी। दरअसल दयाशंकर वर्मा ने अपने लॉज के पीछे एक दरवाजा लगा दिया था जो गांधी इंटर कालेज के क्रीड़ा स्थल में खुलता था। तब समाजवादी पार्टी के नेताओं के दबाव में दयाशंकर वर्मा को यह कहते हुए सफाई देनी पड़ी थी कि लॉज में मरम्मत का कार्य चल रहा है और निर्माण सामग्री अंदर ले जाने के लिए दरवाजा खोला गया था, लेकिन असल मंशा क्रीड़ा स्थल पर कब्जे की मानी जा रही थी।

थोपन यादव के खिलाफ खड़ा किया था बागी प्रत्याशी- उरई। पूर्वमंत्री दयाशंकर वर्मा पर वर्ष २०१७ के निकाय चुनाव में जालौन नगर पालिका परिषद से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी चंद्रप्रकाश उर्फ थोपन यादव के खिलाफ बागी प्रत्याशी खड़ा करने में दयाशंकर वर्मा की भूमिका चर्चा का विषय रही थी। दरअसल समाजवादी पार्टी ने थोपन यादव को टिकट दिया था, लेकिन पार्टी के फैसले के विरूद्ध जाकर उन्होंने इकबाल मंसूरी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना समर्थन दे दिया था। जिसके चलते थोपन यादव को पराजय का सामना करना पड़ा था। तो इकबाल मंसूरी भी हार गये थे। इस तरह वोटों के विभाजन का फायदा भाजपा प्रत्याशी गिरीश गुप्ता को मिला था, जो चुनाव में सफल रहे थे। तब थोपन यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से दयाशंकर वर्मा की कुटिल राजनीति करने की शिकायत की थी।

लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में भितरघात के आरोप

उरई। वर्ष २०१७ के चुनाव में टिकट कटने के बाद प्रत्याशी बनाये गये महेन्द्र कठेरिया के चुनाव में पूर्वमंत्री एवं सपा नेता दयाशंकर वर्मा पर भितरघात के आरोप लगे थे। पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता आज भी यह कहते पाये जाते हैं कि दयाशंकर ने महेन्द्र कठेरिया सपा प्रत्याशी को हराने के लिए भाजपा के उम्मीदबार गौरीशंकर वर्मा के पक्ष में अपने लोगों को लगाया था। तब महेन्द्र कठेरिया ने भी उन पर भितरघात के आरोप लगाये थे। यही नहीं लोकसभा चुनाव २०१९ में सपा बसपा गठबंधन के प्रत्याशी अजय सिंह पंकज के चुनाव प्रचार से दयाशंकर वर्मा ने दूरी बना रखी थी। तत्कालीन जिला कमेटी के अनुरोध के बाद भी दयाशंकर वर्मा ने पार्टी के खिलाफ जाकर अघोषित रूप से भाजपा का साथ दिया था। इस तरह के आरोप आज भी सपा नेता लगाने से नहीं चूकते है।

दयाशंकर को भरोसेमंद नहीं मानते सपाई

उरई। समाजवादी पार्टी से टिकट की दावेदारी कर रहे दयाशंकर वर्मा को समाजवादी पार्टी के नेता भरोसेमंद नहीं मानते, क्योंकि किसान कामगार पार्टी से पहली बार विधायक बनने के बाद से दल बदलने के आरोप लगाये जाते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता तो उन्हें सौदेबाज बताते हैं। पार्टी के मिशनरी नेताओं का मानना है कि दयाशंकर वर्मा को टिकट देना नेकी कर दरिया में डालने जैसा होगा, क्योंकि २०१२ में विधायक बनने के बाद गनीमत रही कि सपा की सरकार बन गई अगर कहीं हंग असेम्बली होती तो फिर वह मौके पर चौका लगाने से नहीं चूकते। उनके यह तमाम कारनामे उरई जालौन क्षेत्र से उनके टिकट में बाधक माने जा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का तो यह तक कहना है कि दयाशंकर वर्मा को टिकट दिया तो पार्टी के मूलवोट बैंक यादव समाज की नाराजगी का सामना चुनाव में करना पड़ सकता है।

सुरेश खरकया
जिला संवाददाता
स्वतंत्र भारत उरई जालौन

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